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योग क्‍या है? जानें कब और कैसे करते हैं


बीयर योग क्‍या है? जानें कब और कैसे करते हैं ये योगासन, करता है वज़न कम करने में मदद



जिन्‍हें बीयर से नफ़रत है, वो इस लेख को पढ़ने के बाद शायद अपना नजरिया बदल देंगे। जी हां आज हम आपको बीयर योग के बारे में बताने जा रहें जो दुनियाभर में तेजी से फैल रहा है। अलग-अलग योग क्रियाओं की तरह यह भी एक योगासन है, जिसके कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ हैं। आपको बता दें कि बीयर को पहले भी कई शोध में सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीयर योग ऑस्‍ट्रेलिया में तेजी से फेमस हो रहा है। इसकी खोज इसलिए की गई ताकि लोग चेतना के उच्चतम स्तर तक पहुंच सकें। बीयर योग ऐसे लोगों के लिए है जो बीयर को पसंद करते हैं और योग भी करना चाहते हैं। अगर आप वयस्‍क हैं तो इस योग को कर सकते हैं।
कैसे करते हैं बीयर योग: बीयर योग शुरू करने से पहले लोग थोड़ी सी बीयर पीते हैं जिससे उन्हें मन की शांति मिलती है। लोग सिर्फ बीयर को पीते ही नहीं बल्कि योग करते समय इसे अपने सिर पर भी रखते है और बीयर के गिलास का बैलेंस भी करते हैं। सिर्फ यही नहीं, बीयर योग के लिए एक साइट भी बनाई गई है। जर्मनी से शुरू हुआ बीयर योग कई देशों में फॉलो किया जा रहा है। ऑस्‍ट्रेलिया और अमेरिका के लोग बीयर योग को काफी पसंद कर रहे हैं। वहीं, इस योग को शुरू करने वाले लोगों का मानना हैं कि बीयर योग करने से उनको काफी फायदा हो रहा है।

मोटापा भी कम करता है: वैसे अधिकतर लोग सोचते हैं कि बीयर से वजन बढ़ता हैं लेकिन यहां के लोग इससे अपना वजन घटा रहे हैं। आधुनिक जीवनशैली में हर कोई मोटापे की समस्या से ग्रसित है। वजन कम करने के लिए लोग बहुत से तरीके भी अपना रहे हैं। कोई जिम में घंटों पसीना बहा रहा है तो कुछ लोग योग का सहारा ले रहे हैं। मोटापे की समस्या आजकल आम देखने को मिलती है। लोग अपना वजन कम करने के लिए कई तरीके अपनाते हैं। वहीं, कई लोग घर पर ही योग करके खुद को फिट रखते हैं।

पैरों, कूल्‍हों, कंधों और छाती की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं ये योगासन, आप भी करें ट्राय


कुछ ऐसे योगासन हैं जो आपके पूरे शरीर में मांसपेशियों के निर्माण करने में मदद करते हैं। खासकर, पैरों, कूल्‍हों, कंधों और छाती की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं। लेख में दी गई योग मुद्राएं आप घर पर ही शुरू कर सकते हैं।

उत्‍तानासन: यह पुरुषों के लिए एक विशेष योग है। आगे की ओर खड़े हुए मुद्रा को उत्तानासन भी कहा जाता है। यह स्टैंडिंग फॉरवर्ड फोल्ड पोज पुरुषों के लिए एक अच्छा योग है। यह एक स्‍थायी योग है जिसमें व्‍यक्ति का पूरा शरीर आगे की ओर झुका होता है यह योग मुद्रा आपके शरीर के पूरे पिछले हिस्से को सिर से एड़ी तक स्‍ट्रेच करने में मदद करती है। अगर इसके फायदों की बात करें तो यह, ब्लड प्रेशर कम करता है, सिरदर्द और रक्त परिसंचरण में सुधार करता है। आपको बेहतर नींद में मदद करता है। आपको तनाव से आराम दिलाने में मदद करता है।

वीरभद्रासन: वीरभद्रासन या वॉरियर पोज तीन मुख्‍य भागों में बांटा गया है। यह आसन एक पौराणिक योद्धा के कारनामों को याद करता है। यह आसन घुटने के क्षेत्रों के साथ-साथ आपकी जांघ की मांसपेशियों का निर्माण करता है, जिसका अर्थ है कि आपको जोड़ों के लिए अधिक स्थिरता और सुरक्षा मिलेगी। यह पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं और खिलाडि़यों के लिए भी अच्छा योगासन है। यह पुरुषों के लिए एक प्रतिष्ठित योग है। यह आपको खिंचाव में मदद करता है जहां आपको कूल्हों या कंधों की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। यह एक मजबूत मुद्रा के अलावा और कुछ नहीं है। यह पैरों और घुटनों की मांसपेशियों को मजबूती और स्थिरता प्रदान करता है। आपके कंधे, हाथ और पीठ को मजबूत बनाता है। आपके संतुलन और एकाग्रता को बेहतर बनाने में मदद करता है।

उत्‍कटासन: उत्‍कटासन को चेयर पोज भी कहते हैं, यह पुरुषों के लिए बेहतर माना जाता है। अगर आप खुद को माचो मैन के तौर पर देखना चाहते हैं तो ये योगासन आपके लिए है। इस आसन को करना बहुत आसान है इसमें आपको बिना कुर्सी के बैठना है। यह योग स्‍ट्रेंथ, स्थि‍रता और बैलेंस बनाने में मदद करता है। यह हैमस्ट्रिंग, क्वाड्रिसेप्स और इरेक्टर रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है। निचले पैर की मांसपेशियों को मजबूत करने और विकसित करने के लिए अच्छा है। यह सपाट पैरों में सुधार के लिए भी अच्छा है। आपके पेट के अंगों को प्रोत्‍साहित करता है।

भुजंगासन: भुजंग यानी सांप के आकार का आसन भुजंगासन कहलाता है। कुछ लोग भुजंगासन को पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए फायदेमंद मानते हैं। इसे करना बहुत आसान है। पारंपरिक योग पुस्तकों में कहा गया है कि भुजंगासन का कोबरा मुद्रा शरीर की गर्मी बढ़ाता है, रोगों को मारता है और कुंडलिनी को जागृत करता है। यह मुद्रा आपकी रीढ़ को मजबूत बनाने में मदद करती है। इससे छाती, कंधे और पेट में खिंचाव होता है। यह नितंबों को शेप में लाता है। यह योग तनाव और थकान को दूर करने में मदद करता है।



डिप्रेशन और तनाव दूर करने में असरदायक है बकरी योग


आज के समय में योग काफी प्रचलित हो रहा है। अलग-अलग आसन से एक्‍सपर्ट व्‍यक्ति के स्‍वस्‍थ की गारंटी लेने लगे हैं। इन्‍हीं में से एक है बकरी योग, जो काफी लोकप्रिय हो रहा है। अधिकांश योगा हम खुद से ही करते है लेकिन इस योग को बकरी के साथ किया जाता है| इसलिए इसे गोट योगा कहा जाता है। यह योग करने का एक प्राकृतिक तरीका है। इस योगा की उत्पत्ति एल्बेनी से ताल्लुक रखने वाली लेनी मोर्से की देन है। इस योग का आरंभ मोर्से ने अपने छोटे से फार्म से किया था। 

कैसे करें बकरी योग
इसमें व्यक्ति को एक जगह पर योग करना होता है और साथ ही वहां पर छोटे कद की बकरियों को रखा जाता है। योगा करते समय से ये बकरियां व्यक्ति को चाटने लगती है या फिर उनके ऊपर भी चढ़ जाती है। गोट योगा के दौरान योगा करने वाले व्यक्ति के ऊपर बकरी का बच्चा या फिर बकरी उछलती है या फिर चलती है। इससे योगा करता हुआ व्यक्ति बकरी के साथ खेलने लगता है और खुद को प्रकृति के करीब महसूस करता है और कुछ देर के लिए सही लेकिन दुनिया के सारे तनाव से दूर हो जाता है।

बकरीयोग के फायदे
-डिप्रेशन, तनाव और फ्रस्ट्रेशन से शिकार लोगो के लिए गोट योगा असरदायक होता है। इसे करने से ख़ुशी मिलती है।

-मोर्से के मुताबिक, जो लोग तनाव से घिरे रहते है उनके लिए यह प्राकृतिक तरीके से तनाव से निजात दिलाता है।

-इसके अतिरिक्त जिन लोगों को किसी न किसी तरह का विकार होता है या फिर कोई शारीरिक कमी है वे भी इसकी सहायता ले सकते हैं।

-इस योग को करने से किसी भी तरह की बीमारी को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है। साथ ही किसी बीमारी को ठीक करने में इसकी कोई खास भूमिका नहीं होती है। 

-परन्तु इसे करने से लोग मानसिक रूप से खुश रहते है जिसके कारण आने वाली बीमारी कोसो दूर रहती है।






शरीर में उर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए आप ले सकते है इन योगासन की मदद



हम में से अधिकतर लोग काम के दौरान, काम के बाद या बिना काम किए भी थका हुआ महसूस करते हैं। शरीर में ऊर्जा की कमी के कारण ऐसा हो सकता है। शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए हम अक्सर कैफीन या पावर नैप की मदद लेते हैं। हालांकि शरीर की ऊर्जा को बढ़ाने के लिए योग का अभ्यास करना सबसे अच्छा तरीका है। योग एक स्वाभाविक तरीका है जो न केवल ऊर्जा को बढ़ाता है बल्कि आपको शारीरिक और मानसिक रूप से फिट भी रखता है। कुछ योगासन विशेष रूप से शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए कारगर हैं। इनका अभ्यास नियमित करने से आप दिनभर उर्जावान रहते हैं और स्वस्थ तरीके से अपने कार्यों को करने में सक्षम होते हैं। 

सूर्य नमस्कार: सूर्य नमस्कार सबसे अच्छा और सबसे अधिक अभ्यास किया जाने वाला योगासन है। यह शरीर के लचीलेपन को सुधारने में मदद करता है और उचित ऊर्जा प्रदान करने में भी मदद करता है। हर रोज खाली पेट इस योगासन का अभ्यास करना चाहिए। इस योगासन में कई चरण हैं जिनका ठीक से अभ्यास किया जाना जरुरी है। हर सुबह सूर्य नमस्कार योगासन को पांच बार दोहराएं जिससे आपको अधिकतम लाभ प्राप्त होता है।

भुजंगासन: भुजंगासान को कोबरा पोज़ के नाम से भी जाना जाता है। यह हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है और शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है। यह शरीर के लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद करता है और आपको एक अच्छा बॉडी पोस्चर देता है। 

वीरभद्रासन: वीरभद्रासन या वॉरियर पोज़ तीन प्रकार से किया जा सकता है। यह शरीर को ताकत और सहनशक्ति प्रदान करता है। इसके अलावा, वीरभद्रासन शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है और शरीर के पोस्चर को सुधारने में कारगर है। शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए हर रोज इस योग का अभ्यास करना चाहिए। 

वृक्षासन: वृक्षासन या ट्री पोज़ सबसे आसान योगासन है। यह न केवल शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है बल्कि ऊर्जा के स्तर को भी बढ़ाता है। यह आपके फोकस में सुधार करता है। दिन भर तरोताजा और ऊर्जा से भरा महसूस करने के लिए हर रोज सुबह इस आसन का अभ्यास करें।

सेतु बंधासन: सेतु बंधासन या ब्रिज पोज़ आपकी कमर को मजबूत बनाने में करता है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। यह शरीर के रिजुवेनेशन में मदद करता है और थकान से छुटकारा पाने में दिलाता है।




शारीरिक और मानसिक रुप से सक्रिय रहने के लिए आप कर सकते है ये योगासन


योग शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है। यह एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करने और शांतिपूर्ण जीवन जीने में मदद करता है। मानसिक शांति और फिट शरीर के लिए यह सबसे अच्छा तरीका है। साथ ही योग करने से आपको कुछ अस्वस्थ आदतों को छोड़ने में भी मदद मिलती है। रोजाना योग का अभ्यास करने से आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ में सुधार होता है। यह ना केवल हमारे जीने के तरीके को बेहतर बनाता है बल्कि हमें कई स्वास्थ्य समस्याओं से दूर रहने में भी मदद करता है। इतना ही नहीं, यदि आप रोजाना योग का अभ्यास करते हैं तो आप शारीरिक और मानसिक रुप से सक्रिय रहता है। आइए जानते हैं इसके लिए कुछ प्रभावी योगासन।

बालासन: जिन लोगों ने योग का अभ्यास करना शुरु किया है, उनके लिए यह सबसे बेहतर योगासन है क्योंकि इसका अभ्यास करना बहुत ही आसान है। यह शरीर को आराम देने और तनाव व चिंता से छुटकारा पाने में मदद करता है। यह शरीर में रक्त के प्रवाह को स्वस्थ करता है। इसका रोजाना 5 मिनट के लिए अभ्यास करना चाहिए।

भुजंगासन: भुजंगासन शरीर के लचीलेपन में सुधार करने में मदद करता है। यह शरीर को स्ट्रेच करता है और पीठ के निचले हिस्से में राहत दिलाता है। इस योग का अभ्यास 5 मिनट तक करने से आपकी कमर स्वस्थ रहती है और आपका मूड नियंत्रित रहता है।

वृक्षासन: वृक्षासन सबसे आसान योगासनो में से है। यह शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है। यह शरीर की सहनशक्ति को बढ़ाता है और रिलैक्स करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह दिमाग, शरीर और आत्मा को शांत करता है। वृक्षासन शरीर के दर्द से छुटकारा पाने में भी मदद करता है।

नटराजासन: इस योगासन का हर रोज अभ्यास करने से शरीर का लचीलापन बढ़ता है। यह शरीर को संतुलित करने और शरीर की मुद्रा में सुधार करने में भी मदद करता है। बेहतर एकाग्रता और सहनशक्ति के लिए इस योग को यह करना चाहिए।

धनुरासन: धनुरासन आलस और सुस्ती से छुटकारा पाने में मदद करता है। यह आपको तरोताज़ा बनाता है और ऊर्जा प्रदान करता है। यह आपको सक्रिय रखता है और शरीर से थकावट को दूर करता है।

क्या है सुखासन और इसके फायदे, देखे विधि और आप भी ले इसका आंनद

सुखासन एक बहुत ही आम योग मुद्रा है जिसका अभ्यास मेडिटेशन और श्वास से जुड़े व्यायाम जैसे “प्राणायाम” करते वक्त किया जाता है। यह लोटस पोज़ या पद्मासन के विकल्प के रुप में भी इस्तेमाल किया जाता है। सुखासन शब्द सुख और आसन से मिलकर बना है। इसमें ‘सुख’ का मतलब ‘सहज’ और ‘आनंद’ है जबकि ‘आसन’ का मतलब है ‘मुद्रा’। सुखासन का अभ्यास करना काफी आसान है और इसका अभ्यास आप कहीं भी कर सकते हैं। इसके अभ्यास से आपको कई फायदे मिलते हैं। सुखासन का अभ्यास करने से आपके पोस्चर में सुधार होता है और आपकी कमर को आराम मिलता है। अगर आप दिनभर कुर्सी पर बैठे रहते हैं तो इस योगासन का अभ्यास जरुर करें। 

सुखासन करने की विधि: जमीन में कोई चटाई या चादर बिछाएं और इस पर सीधे बैठ जाएं। टांगो को अपने सामने फैलाएं। अब टांगो को घुटने से मोड़ लें और घुटनों को बाहर की तरफ रखें। अपने हर पैर को दूसरे पैर के घुटने के नीचे रखें। हाथों को घुटनों पर रखें और हथेलियों को नीचे की तरफ रखें। कमर, सिर और गर्दन को सीधा रखें। अपनी नजर सामने की तरफ रखें। इस स्थिति में एक मिनट के लिए रहें। अब अपने पैरों की स्थिति बदल लें।

सुखासन करने के फायदे: सुखासन का अभ्यास करने से आपको अपनी रीढ़ को स्ट्रेच करने में मदद मिलती है। यह रीढ़ को लंबा करने में मदद करता है। यह आसन आपके कॉलर बोन और छाती को चौड़ा करता है। टखनों को खोलने में मदद करता है। कमर की मांसपेशियों को मजबूत करता है और आपके शरीर की मुद्रा(पोस्चर) को सुधारता है। यह आसन आपके शरीर में शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाने में मदद करता है। टखनों, घुटनों और कूल्हों के जोड़ों का लचीलापन बढ़ाता है। इसका अभ्यास उन लोगों के लिए अधिक बेहतर है जिनका शरीर कठोर है। थकान को कम करने में मदद करता है। काम के बाद आप सुखासन का अभ्यास कर सकते हैं। कमर और गर्दन को स्ट्रेच करने में मदद करता है। यह आपके घुटनों, पिंडली की मांसपेशियों और जांघों को मसाज करने में मदद करता है।

बिना जिम के भी आप पा सकते है एब्स, ये योगासन करेंगे आपकी मदद


प्रत्येक व्यक्ति शानदार एब्स पाने की इच्छा रखता है क्योंकि यह एक व्यक्ति के आकर्षण को बढ़ाता है। शानदार एब्स को प्राप्त करना काफी आसान नहीं है, इसके लिए पौष्टिक आहार के साथ उचित वर्कआउट की आवश्यकता भी होती है। इसके अलावा, लोग सिक्स पैक एब्स पाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। वे कड़ी मेहनत के दिनचर्या का पालन करते हैं और आहार योजना का भी पालन करते हैं। इन सभी उपायों को करने के बावजूद, कुछ लोग सिक्स पैक एब्स पाने में विफल हो जाते हैं। यदि आप अपना शानदार एब्स बनाना चाहते हैं तो कुछ योग का भी अभ्यास करते हैं। बहुत से लोग इन योग के बारे में अवगत नहीं हैं। यदि आप विविधता के साथ अपनी मूल मांसपेशियों को प्रशिक्षण देते हैं तो आप परिणामों को जल्द से जल्द प्राप्त कर सकते हैं। 

तितली आसन: शानदार एब्स पाने के लिए तितली आसन सबसे लाभकारी होता है। इसका अभ्यास करने के लिए, जमीन पर बैठ जाएं और अपने घुटनों को मोड़ लें और पैरों को खोल लें। इसके बाद, सिर को उठाएं और अपनी रीढ़ की हड्डी को पेल्विस की ओर क्रंच करें। थोड़ी देर रूकने के बाद फिर से शुरूआत करें।

ट्विस्ट की मदद से बोट पोज: ट्विस्ट बोट पोज की मदद से सिक्स पैक एब्स बना सकते हैं। इसका अभ्यास करने के लिए, जमीन पर बैठ जाएं और अपने घुटनों को छाती तक ले आएं। अब अपने हाथों को छाती से सामने प्रार्थना की अवस्था में ले आएं। अब अपने हाथ को दाएं ओर ट्विस्ट करें और हाथों को प्रार्थना की अवस्था में ही रखें। अब इसी को दूसरे हाथ से भी करें।

लेग एक्सटेंशन की मदद से बोट पोज: लेग एक्सटेंशन की मदद से बोट पोज का अभ्यास एब्स बनाने में मदद करता है। इसका अभ्यास करने के लिए, जमीन पर बैठें और अपने घुटनों को छाती तक लाएं। अब अपने हाथों को जमीन पर रखें। इसके बाद, अपने अपर बॉडी नीचें करते हुएं पैरों को उठाएं।

लाइंग लेग रीच: लाइंग लेग रीच शानदार एब्स पाने में मदद करते हैं। इसका अभ्यास करने के लिए, पीठ के बल लेट जाएं और पैरों को 90 डिग्री में उठाएं। इसके बाद अपने कंधे को लिफ्ट करें और अपने बाएं पैर की तरफ दाए हाथ को लाएं। इसी प्रक्रिया को दूसरी तरफ से करें।

योग क्या है, योग के प्रकार, मुद्रायें और फायदे

“योग” (Yoga in Hindi) यह शब्द अपने आप में ही पूर्ण विज्ञान के समान है जो शरीर, मन, आत्मा और ब्रह्मांड को एकजुट बनाता है। योग का इतिहास करीबन 5000 साल पुराना है, जिसे प्राचीन भारतीय दर्शन में मन और शरीर के अभ्यास के रूप में जाना जाता है। योग की विभिन्न शैलियाँ शारीरिक मुद्राएँ, साँस लेने की तकनीक और ध्यान या विश्राम को जोड़ती हैं।

हाल के वर्षों में, योग ने शारीरिक व्यायाम के एक रूप के रूप में अपना एक अलग स्थान बनाया है और आज यह दुनियाभर में लोकप्रिय हो चुका है जो मन और शरीर के बेहतर नियंत्रण और कल्याण को बढ़ाता है।योगाभ्यास में कई अलग-अलग प्रकार के योग और कई अनुशासन सम्मिलित हैं। आइये इस लेख की सहायता से योग के इतिहास (History of Yoga in Hindi), विभिन्न मुद्राओं, इसके फायदों (Yoga Benefits in Hindi) और नुकसानों पर प्रकाश डालने का प्रयास करते हैं।

योग की विभिन्न मुद्राओं को यदि सही प्रकार से न किया जाये तो ये आपके लिए घातक भी सिद्ध हो सकती हैं। अतः इसे किसी अच्छे योग प्रशिक्षक की देख रेख में ही करें परन्तु आइये पहले जान लेते हैं What is Yoga in Hindi?


सूची
योग क्या है
योग का इतिहास
योग और भारत
योग के प्रकार
योग की मुद्रायें
योग के फायदे
योग से सम्भावित जोखिम और नुकसान
Yoga In Hindi – योग क्या है?
योग संस्कृत भाषा के ‘युज धातु’ से निकला है जिसका अर्थ होता है आत्मा का परमात्मा से मिलन अर्थात योग में इतनी शक्ति होती है, कि यह आपको अमरत्व की प्राप्ति करा सकता है। कुछ लोग योग को भृमवश साधारण आसान समझ लेते हैं किन्तु यह उनसे कहीं बढ़कर है। योग (Yoga in Hindi) मुख्य रूप से एक आध्यात्मिक अनुशासन है, जिसमे जीवन शैली का पूर्णसार आत्मसात किया गया है।

योग एक कला के साथ-साथ एक विज्ञान भी है। यह एक विज्ञान है, क्योंकि यह शरीर और मन को नियंत्रित करने के लिए व्यावहारिक तरीके प्रदान करता है, जिससे गहन ध्यान संभव है। और यह एक कला है, जब तक कि यह सहज रूप से और संवेदनशील रूप से अभ्यास नहीं किया जाता है, यह केवल सतही परिणाम देगा। योग केवल मान्यताओं की ही प्रणाली नहीं है अपितु यह शरीर और मन के एक दूसरे पर प्रभाव को ध्यान में रखता है, और उन्हें आपसी सद्भाव (mutual harmony) में लाता है।

योग प्राणायाम, या ऊर्जा-नियंत्रण के माध्यम से शरीर में मुख्य रूप से ऊर्जा के प्रसार का काम करता है। योग (yoga asana in hindi) सिखाता है कि कैसे, सांस-नियंत्रण के माध्यम से, मन और जागरूकता के उच्च स्थान को प्राप्त किया जा सकता है।
History Of Yoga in Hindi – योग का इतिहास

यद्धपि योग के खोजकर्ता के विषय में कोई लिखित साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, किन्तु ऐसा माना जाता है कि योग का प्रारम्भ हमारे देश भारत में हुआ था। भारतीय ऋषि पतंजलि द्वारा योग दर्शन पर लिखे गए 2,000 वर्ष पुराने “योग सूत्र”, को मन और भावनाओं को नियंत्रित करने, और आध्यात्मिक रूप से विकसित करने का एक सम्पूर्ण गाइड माना जाता है। योग सूत्र, योग का सबसे पहला लिखित रिकॉर्ड है और अस्तित्व में सबसे पुराना ग्रंथों में से एक है। यह सभी आधुनिक योगों के लिए रूपरेखा प्रदान करता है।

योग अपनी मुद्राओं और आसनों के लिए काफी प्रसिद्ध है। फिटनेस, योग का प्राथमिक लक्ष्य नहीं था अपितु योग साधना के साधकों और अनुयायियों ने अन्य प्रथाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया, जैसे कि श्वसन विधियों और मानसिक ध्यान का उपयोग करके आध्यात्मिक ऊर्जा का विस्तार करना।

इतने पुराने इतिहास के बाद भी 19 वीं शताब्दी के अंत में योग को लोकप्रियता प्राप्त होना प्रारम्भ हुई। 1920 और 1930 के दशक के पश्चात पहले भारत में और बाद में पश्चिम में योग में रुचि का विस्फोट हुआ।
नोट: पुरुष योग पेशेवरों को योगियों के रूप में जाना जाता है, और महिला योग पेशेवरों को योगिनी कहा जाता है।

इतिहास: योग की शुरुआत एक प्राचीन प्रथा के रूप में हुई थी जिसकी उत्पत्ति के नमूने भारत में 3000 ई.पू. योग मुद्राओं के पाषाण-नक्काशीदार आंकड़े सिंधु घाटी में पाए जा सकते हैं, जो मूल मुद्रा और प्रथाओं को दर्शाते हैं। दिव्य ज्ञानोदय के मार्ग पर हृदय और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए योग का विकास किया गया। साथ ही, यह पता चला कि योग से मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी कई बीमारियों का इलाज करने और शारीरिक चोटों और पुराने दर्द को कम करने में भी सहायता मिलती है। योग के कारण बहुत सारी बीमारियों का इलाज करने में मदद मिली है। और जैसे-जैसे योग भारत के बाहर और इतने सारे अलग-अलग संस्कृतियों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, वैसे ही इस प्रथा को कई अलग-अलग स्कूलों में शिक्षाओं और साधनों में बदल दिया गया है। आइये जानते हैं भारत में योग की हाल की स्थिति क्या और कैसी है।
भारत में योग ( अंतराष्ट्रीय योग दिवस)

अंतराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) की शुरुआत सर्वप्रथम 21 जून 2015 को भारत में हुई। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को दिए गए प्रस्ताव को स्वीकृति मिली और 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाना प्रस्तावित किया गया।

अभी प्रश्न यह उठता है कि 21 जून ही क्यों? इसका उत्तर है – 21 जून उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन है और दुनिया के कई हिस्सों में एक विशेष महत्व रखता है, अतः माननीय प्रधानमंत्री जी ने इस दिन का सुझाव दिया।

वर्ष 2018 में योग सत्र के बाद, अधिकारियों ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें लिखा था, “21 जून 2018 को राजस्थान सरकार के पतंजलि योगपीठ और जिला प्रशासन कोटा, राजस्थान में सबसे बड़ा योग लेसन ग्रहण किया जिसमे सबसे अधिक मात्रा में लोगों ने भाग लिया “।
योग के प्रकार – Yoga Poses in Hindi

आधुनिक योग व्यायाम, शक्ति, लचीलापन और श्वास पर ध्यान देने के साथ विकसित हुआ है। यह शारीरिक और मानसिक कल्याण को बढ़ाने में मदद करता है। योग की कई शैलियाँ (Yoga Poses in Hindi) हैं, और कोई भी शैली दूसरे से अधिक प्रामाणिक या श्रेष्ठ नहीं है। योग के विभिन्न प्रकार और शैलियों (Yoga Poses in Hindi) में निम्न शामिल हैं:


अष्टांग योग: योग के इस प्रकार में योग की प्राचीन शिक्षाओं का उपयोग किया जाता है। हालाँकि, यह 1970 के दशक के दौरान सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ था। अष्टांग योग मुख्य रूप से छः मुद्राओं का समन्वय है जो तेजी से सांस लेने की प्रक्रिया को जोड़ता है।
बिक्रम योग: बिक्रम योग को “हॉट” योग के रूप में या नाम से भी जाना जाता है। इस प्रकार का योग मुख्य रूप से एक कृत्रिम रूप से गर्म कमरे में जिसका तापमान लगभग 105 डिग्री और 40 प्रतिशत आर्द्रता होती है, में किया जाता है। इसमें कुल 26 पोज़ होते हैं और दो साँस लेने के व्यायाम का क्रम होता है।

हठ योग: यह किसी भी प्रकार के योग के लिए एक सामान्य शब्द है जो शारीरिक मुद्राएं सिखाता है। “हठ योग” की कक्षाएं आमतौर पर मूल योग मुद्राओं के सौम्य परिचय के रूप में काम करती हैं।

अयंगर योग: योग के इस प्रकार में विभिन्न प्रॉप्स (सहारा) जैसे कम्बल, तकिया, कुर्सी और गोल लम्बे तकिये इत्यादि का प्रयोग करके सभी पोज का सही संरेखण किया जाता है।

जीवामुक्ति योग: जीवामुक्ति का अर्थ होता है “जीवित रहते हुए मुक्ति।” यह प्रकार 1984 में उभरा और आध्यात्मिक शिक्षाओं और प्रथाओं को इसमें शामिल किया गया। योग का यह प्रकार खुद पोज़ पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय पोज़ के बीच रफ़्तार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करता है।

इस प्रकार के फोकस को विनयसा कहा जाता है। प्रत्येक कक्षा में एक विषय होता है, जिसे योग शास्त्र, जप, ध्यान, आसन, प्राणायाम और संगीत के माध्यम से खोजा जाता है। जीवामुक्ति योग शारीरिक रूप से तीव्र हो सकता है।
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कृपालु योग: यह प्रकार प्रेक्टिशनर को अपने शरीर को जानने, स्वीकार करने और सीखने की शिक्षा देता है। कृपालु के छात्र आवक देख कर अपने स्तर का अभ्यास करना सीखता है। कक्षाएं आमतौर पर श्वास अभ्यास और कोमल स्ट्रेच के साथ शुरू होती हैं, इसके बाद व्यक्तिगत पोज और अंतिम विश्राम की एक श्रृंखला होती है।

कुंडलिनी योग: कुंडलिनी का अर्थ है “एक साँप की तरह कुंडलित होना।” कुंडलिनी योग ध्यान की एक प्रणाली है जिसका उद्देश्य मन में दबी हुई ऊर्जा को जारी करना है।

एक वर्ग आम तौर पर जप के साथ शुरू होता है और गायन के साथ समाप्त होता है। बीच में, यह एक विशिष्ट परिणाम बनाने के लिए आसन, प्राणायाम और ध्यान को अनुकूलित करता है।

पावर योग: 1980 के दशक के अंत में, प्रेक्टिशनरों ने पारंपरिक अष्टांग प्रणाली पर आधारित इस सक्रिय और एथलेटिक प्रकार के योग का विकास किया।

शिवानंद: यह एक प्रणाली है जो पांच-बिंदु दर्शन पर आधारित है। यह दर्शन बताता है कि एक स्वस्थ योगिक जीवन शैली बनाने के लिए उचित श्वास, विश्राम, आहार, व्यायाम और सकारात्मक सोच एक साथ काम करते हैं। आमतौर पर यह एक ही 12 मूल आसनों का उपयोग करता है, जो सूर्य नमस्कार और सवाना आसनों द्वारा बुक किया गया है।

विनियोग: विनियोग शारीरिक क्षमता की परवाह किए बिना किसी भी व्यक्ति को अनुकूलित कर सकता है। विनियोग के शिक्षकों को गहन प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है और वे शरीर रचना और योग चिकित्सा के विशेषज्ञ होते हैं।

यिन: यह एक शांति प्रदान करने वाला और ध्यान करने वाला योग अभ्यास है, जिसे ताओवादी योग भी कहा जाता है। यिन योग प्रमुख जोड़ों में तनाव की रिहाई की अनुमति देता है, जिसमें शामिल हैं:
टखने
घुटने
कूल्हों
पूरी पीठ
गरदन
कंधों

प्रीनेटल या जन्मपूर्व योग: यह योग प्रसवपूर्व किया जाता है और योग उन मुद्राओं का उपयोग करता है जो चिकित्सकों ने ऐसे लोगों के लिए डिज़ाइन किए हैं जो गर्भवती हैं। यह गर्भावस्था के बाद पुनः पुराने आकार में वापस आने में महिलाओं की सहायता कर सकता है और साथ ही साथ स्वास्थ्य की देखभाल करने वाली गर्भावस्था का समर्थन कर सकता है।

आराम योग: यह योग का एक आराम तरीका है। एक व्यक्ति चार या पाँच सरल पोज़ में इस योग की कक्षा ले सकता है। इसमें किसी पोज़ को पकड़ने के किसी भी अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता नहीं है बस आप कुछ प्रॉप्स जैसे कम्बल, गोल तकिये की सहायता से आप आराम की मुद्राएं कर सकते हैं।
योग की मुद्रायें – Yoga Mudra in Hindi
योग की विभिन्न मुद्राएं (Yoga Mudra in Hindi) निम्न प्रकार हैं-
1. स्थायी योग
कोणासन – प्रथम
कोणासन द्वितीय
कतिचक्रासन
हस्तपादासन
अर्ध चक्रसन
त्रिकोणासन
वीरभद्रासन या वीरभद्रासन
परसारिता पादहस्तासनं
वृक्षासन
पस्चिम नमस्कारासन
गरुड़ासन
उत्कटासन
2. बैठने कर करने वाले योग
जनु शिरसाना
पश्चिमोत्तानासन
पूर्वोत्तानासन
अर्ध मत्स्येन्द्रासन
बद्धकोणासन
पद्मासन
मरजरिसाना
एका पादा राजा कपोतसाना
शिशुआसना
चौकी चलनसाना
वज्रासन
गोमुखासन
3. पेट योगा की मुद्रा में लेटना
वसिष्ठासना
अधो मुख सवासना
मकर अधो मुख संवासन
धनुरासन
भुजंगासन
सलम्बा भुजंगासन
विपरीता शलभासन
शलभासन
उर्ध्वा मुख संवासना
4. पीठ के बल लेटकर योग
नौकासन
सेतु बंधासन
मत्स्यासन
पवनमुक्तासन
सर्वांगसन
हलासन
नटराजासन
विष्णुअसना
शवासन
सिरसासन
योग के फायदे – Benefits of Yoga In Hindi
यदि आप योग करने के कारणों की खोज कर रहें है? यहाँ हमने योग की सहायता से आपके दिल की सेहत और आपके शरीर के लचीलेपन में वृद्धि करने के जैसे अनेक फायदों (Benefits of Yoga in Hindi) के बारे में बताया है, जो निम्न प्रकार हैं –
आपके लचीलेपन में सुधार करता है
मांसपेशियों की ताकत बढ़ाता है
आपके पोस्चर्स को परिपूर्ण करता है
उपास्थि और जोड़ों को टूटने से बचाता है
आपकी रीढ़ की हड्डी की सुरक्षा करता है
आपके हड्डियों के स्वास्थ्य को मजबूत करता है
आपके रक्त प्रवाह को बढ़ाता है
आपकी प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाता है
ह्रदय गति को नियमित रखता है
आपके ब्लड प्रेशर को कम करता है
आपके अधिवृक्क ग्रंथियों को नियंत्रित करता है
आपको खुश करता है
एक स्वस्थ जीवन शैली प्रदान करता है
ब्लड शुगर कम करता है
आपको ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है
आपके सिस्टम को आराम देता है
आपके संतुलन को बेहतर बनाता है
आपके तंत्रिका तंत्र को बनाए रखता है
आपके अंगों में तनाव को दूर करता है
आपको गहरी नींद देने में मदद करता है
IBS और अन्य पाचन समस्याओं को रोकता है
आपको मन की शांति देता है
आपके आत्म-सम्मान को बढ़ाता है
आपका दर्द मिटाता है
आपको आंतरिक शक्ति देता है
योग के जोखिम और नुकसान – Risks And Side Effects of Yoga in Hindi

यदि आप एक अच्छी तरह से प्रशिक्षित प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में योग करते हैं तो यह आपके लिए अत्यंत सुरक्षित और लाभदायक होता है। किन्तु कुछ परिस्थितियों में यह आपके लिए हानिकारक भी हो सकता है। योग के कुछ जोखिम और नुकसान इस प्रकार हैं-
योग के कारण यदि आपको चोट लगती है तो यह आपके निरंतर अभ्यास में बाधा बन सकती है। अपितु योग के कारण गंभीर चोट बहुत ही दुर्लभ होती है।
यदि आप गर्भवती है या किसी मेडिकल समस्या जैसे हाई ब्लड प्रेशर, ग्लूकोमा या कांच बिंदु रोग और साइटिका इत्यादि से पीड़ित हैं तो, योग का अभ्यास करने से पहले अपने चिकित्सक से बात कर लें। ऐसे में कुछ योग की मुद्राओं को बदलने या उनसे बचने की आवश्यकता हो सकती है।
यदि आपने योग हाल ही में सीखना प्रारम्भ किया है तो चरम स्थिति और कठिन तकनीकों से बचना चाहिए, जैसे कि हेडस्टैंड, पद्मासन और बलपूर्वक साँस लेना।
यदि आप किसी स्वास्थ्य समस्या के लिए योग कर रहें है तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उस समस्या के लिए पारंपरिक चिकित्सा देखभाल को अनदेखा न करे और न ही योग को उस समस्या से बदलें। दर्द या अन्य किसी समस्या के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें।
योग (Yoga in Hindi) का अभ्यास शरीर और मन को विकसित करने में मदद करता है, यद्धपि यह किसी भी दवा के विकल्प के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता है। प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में योग सीखना और अभ्यास करना अति आवश्यक होता है। किसी भी चिकित्सकीय स्थिति के मामले में, अपने डॉक्टर और अपने योग शिक्षक से परामर्श करने के बाद ही योग का अभ्यास करें।

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