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जल्दी प्रेगनेंट होने के लिए ये 6 योगासन ट्राई करें

जल्दी प्रेगनेंट होने के लिए ये 6 योगासन ट्राई करें
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जब आप प्रेगनेंट होने के लिए बार-बार ट्राई कर रहे हो फिर भी मां नहीं बन पा रही हैं तो आपके अपने अंडाशय या ओवरी पर ध्यान देने की ज़रूरत है। ये नट के आकार वाली ऑर्गन ओवरी एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन का निष्कासन करते हैं। योगा एक्सपर्ट भावना तोलानी योगासन के मदद से अंडाशय का फंक्शन बेहतर तरीके से हो पाता है जिससे मां बनने का चांस बढ़ जाता है।

बद्धकोणासन- इस आसन को करने से लोअर बैक और हिप्स दोनो में अच्छी तरह स्ट्रेच होता है जिससे स्ट्रेस, टेंशन कम हो पाता है और ओवरी में ब्लड का सर्कुलेशन बेहतर तरीके से हो पाता है।



भुजंगासन- इस पोज़ से हिप स्ट्रेच्ड होता है और पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो अच्छी तरह से होने लगता है जिससे मां बनने का चांस कुछ हद तक बढ़ जाता है।

मत्यासन- इस आसन का पूरा लाभ शरीर के प्रजनन तंत्र को मिलता है। इस आसन को करने से एक तो शरीर अच्छी तरह से स्ट्रेच्ड होता है ऊपर से एबडोमेन का ब्लड का सर्कुलेशन अच्छी तरह से हो पाता है।

राजकपोतासन- अगर आप इस आसन का करते हैं तो इससे एनर्जी आपके बॉडी के निचले भाग में चला जाता है जिससे हिप्स, थाई और ग्लूट्स को ओपन करने में भी मदद मिलती है।

विपरित वीरभद्रासन- इस आसन को करने से आपके बॉडी के इंटरनल ऑर्गन्स को मजबूती मिलने के साथ फिर से नवयौवन जैसी शक्ति मिल जाती है। शरीर में ब्लड का फ्लो अच्छी तरह से हो पाता है जिससे थकान कम होती है और मन भी शांत हो जाता है।




विपरीतकरणी- इस आसन को करने से पेल्विस और ओवरी एरिया में ब्लड का सर्कुलेशन बेहतर तरीके से हो पाता है। इस आसन को करने से मन और शरीर शांत होने के साथ शरीर भी रिलैक्स हो जाता है।

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योग से न केवल शरीर का लचीलापन बढ़ता है वरन् वज़न घटाने में मदद मिलती है। इसके साथ भीतरी अंगों के कामकाज में भी सुधार होता है। इससे पीठ के निचले हिस्से में दर्द को कम करने, मेटाबॉलिज्म बढ़ाने, अनिद्रा के इलाज और यहां तक कि ब्लैडर व पेल्विक हिस्से को मजबूत करने में भी मदद मिलती है।




पादांगुष्ठासन- ब्लैडर के कामकाज में सुधार के अलावा इससे पेट की मसल्स और जेनिटल अंग भी मजबूत होते हैं। पीरियड्स और प्रेगनेंसी में इस आसन को करने से बचना चाहिए। इसके अलावा खाली पेट ही इस आसन को ट्राई करें।



टिट्टिभासन- इस आसन को करने के लिए आपको अधिक प्रैक्टिस की जरूरत है। इससे कोर मजबूत होते हैं और ब्लैडर के कामकाम में सुधार होता है।




बद्धकोणासन- इस आसन को करने से बच्चे को जन्म देने में आसानी होती है और शरीर से तनाव कम होता है। इसके अलावा ब्लैडर के फंक्शन में सुधार होता है।



पासासन- इससे ना केवल ब्लैडर को मजबूती मिलती है बल्कि पीरियड्स की बेचैनी भी कम होती है और पीठ दर्द से राहत मिलती है। ये ग्रोन के मसल्स को स्ट्रेच करता हैं और गर्भाशय को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है।



पद्मासन- ध्यान और आराम के लिए ये सबसे बहतर आसन है। इससे दिमाग शांत होता है और हिप्स के लचीलेपन में सुधार होता है। इससे मसल्स का तनाव भी कम होता है।।

अर्द्ध भेकासन- इससे कमर, जांघ और पेट की मसल्स में फैलाव होता है। इससे ब्लैडर को मजबूती मिलती है और पाचन में सुधार होता है। हाई और लॉ बीपी वाले लोग इसे ना करें।

सेतुबंध सर्वांगासन- इससे ब्लैडर और कोर मसल्स को मजबूती मिलती है। अगर आपको गर्दन में चोट लगी हो तो इसे ना करें।

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