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प्रैग्नेंसी में बहुत जरूरी है 10 मिनट का यह काम


प्रैग्नेंसी में बहुत जरूरी है 10 मिनट का यह काम, बीमारियां रहेंगी कोसों दूर


प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस, हाई बीपी, कब्ज, खून की कमी, चक्कर आना और नींद ना आना जैसी कई समस्याएं झेलनी पड़ती है। वहीं की बार इस दौरान महिलाएं तनाव का शिकार भी हो जाती है। बच्चे को हैल्दी रखने के लिए जरूरी है कि महिला प्रैग्नेंसी पीरियड में स्ट्रेस फ्री रहें। ऐसे में तनाव को दूर करने के लिए आप हैल्दी डाइट के साथ मेडिटेशन का सहारा ले सकती हैं। यह न सिर्फ आपको तनावमुक्त रखेगा बल्कि इससे इस दौरान होने वाली अन्य परेशानियां भी दूर हो जाएगी।
मेडिटेशन करने का समय


गर्भवती महिलाएं मेडिटेशन सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समय कर सकती हैं। मगर इस बात का ध्यान रखें कि आप जहां भी यह मेडिटेशन करें वहां का वातावरण शांत हो।

मेडिटेशन करने का तरीका


ध्यान लगाने के लिए एकांत और आरामदायक स्थान पर बैठें। वैसे तो इसे खड़े होकर भी कर सकते हैं लेकिन गर्भवती महिलाओं को मेडिटेशन बैठकर ही करना चाहिए। आप चाहे तो इसे कुर्सी पर बैठकर भी कर सकती हैं। ध्यान की मुद्रा में बैठकर आप 10 बार गहरी और लंबी सांस भरें और छोड़ें।






मेडिटेशन के फायदे
तनाव को करता है कम

कई बार प्रैग्नेंसी के दौरान महिलाएं तनाव का शिकार हो जाती है। हालांकि ऐसा उनके शरीर में होने वाले हॉर्मोनल बदलाव के कारण होता है। ऐसे में रोजाना यह आसान करने से तनाव, गुस्सा और अवसाद दूर होता है। इसके अलावा इसके नियमित अभ्यास से मन और मस्तिष्क को शांति मिलती हैं।

प्रसव में नहीं होती परेशानी

इस दौरान नियमित रूप से मेडिटेशन करने से प्रसव के दौरान होने वाला दर्द कम होता है। साथ ही इससे शरीर में को एनर्जी भी मिलती है।

इम्यून सिस्टम

कमजोर इम्यून सिस्टम गर्भवती महिलाओं के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। ऐसे में हर प्रेग्नेंट महिला को मेडिटेशन करना चाहिए। इससे इम्यून सिस्टम बूस्ट होता है, जिससे आप मॉर्निंग सिकनेस जैसी छोटी-मोटी समस्याओं से बची रहती हैं।


प्री मैच्योर डिलीवरी

कई बार प्रैग्नेंसी में कॉम्पलिकेशन होने के कारण बच्चे का जन्म समय से पहले ही हो जाता है लेकिन रोजाना मेडिटेशन करने से प्री मैच्योर डिलीवरी की संभावना भी कम हो जाती है।


हाइपरटेंशन की समस्या

अगर आपको हाइपरटेंशन यानि हाई ब्लड प्रैशर की शिकायत है तो मेडिटेशन आपके लिए फायदेमंद है क्योंकि यह ब्लड प्रैशर को कंट्रोल करता है।

माइग्रेन या सिरदर्द

जिन गर्भवती महिलाओं को माइग्रेन की समस्या हो उन्हें यह आसन जरूर करना चाहिए। साथ ही इससे मामूली सिरदर्द की शिकायत भी दूर रहती है।

सकारात्मक सोच


रोजाना मेडिटेशन करने से गर्भवती महिलाओं की सोच सकारात्मक बनती है। साथ ही इससे बच्चा स्वस्थ और तेज दिमाग वाला होता है।

प्रैग्नेंसी के दौरान करेंगे ये 5 योगासन तो मिलेंगे अनेक फायदे 

गर्भवती महिला के लिए योग : योग शारीरिक और मानिसक विकास में काफी मददगार है। यह न केवल आम लोगों के लिए जरूरी है बल्कि यह गर्भवती महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद है। गर्भावस्था के दौरान अक्सर महिलाओं को तनाव सताने लगता है। ऐसे में महिला योग करके तनावरहित रह सकती है। योग से न केवल गर्भवती महिलाएं स्वस्थ रहती है बल्कि इससे उनकी डिलविरी भी आसान होती है। इसके अलावा गर्भ में पल रहे बच्चे का भी विकास होता है। आइए जानिए ऐसे योगासन जो गर्भवती महिलाओं को जरूर करने चाहिए।
1. उष्ट्रासन आसन 


इस आसन को करने से खून का प्रभाव ठीक होता है और रीढ़ की हड्डी भी मजबूत होती है। इससे ऊर्जा लेवल बढ़ता है। इसके लिए जमीन पर कपड़ा बिछा कर घुटनों के बल खड़े हो जाएं और सांस को अंदर को खींचते हुए शरीर को धीरे-धीरे पीछे को झुकाएं। अब हाथों से दोनों एडियों को पकड़ने की कोशिश करें। इसे करते हुए गर्दन और दोनों हाथों को सीधा रखें। इस आसन को 30 सैकेंड से 1 मिनट तक ही करें।

2. पर्वतासन 

इस आसन को करने से कमर दर्द से राहत मिलती है और डिलीवरी के बाद वजन भी ज्यादा नहीं बढ़ता। इस आसन को करने के लिए पहले सुखासन में आराम से बैठे। पीठ को सीधा रख कर सांस को अंदर खींच कर दोनों हाथों को नमस्ते की मुद्रा में जोड़ लें। कुछ समय तक इस अवस्था में रहें और थोड़ी देर में सामान्य हो जाएं। इस आसन को 2-3 बार से ज्यादा न करें।

3. अनुलोम विलोम
इस आसन को करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। इसे गर्भावस्था में जरूर करना चाहिए। इस आसन को करने के लिए पहले वज्रासन में बैठ जाएं। फिर हाथों की उंगलियों से नाक के दाएं छिद्र को बंद करें और बाएं से लंबी सांस लें। इसके बाद बाएं छिद्र को बंद करके दाएं से सांस लें। इस प्रक्रिया को कम से कम 10-15 मिनट तक दोहराएं।
4. तितली आसन
यह आसन गर्भावस्था के तीसरे महीने से कर सकते हैं। इससे शरीर में लचीलापन आता है और साथ में डिलीवरी के दौरान तकलीफ कम होती है। अगर इस आसन को करने आपको निचले हिस्से में दर्द महसूस हो तो इसे बिल्कुल ना करें। इस आसन को करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर मोड़कर अपने पैर मिला लें। दोनों पैरों को नमस्ते की मुद्रा बनाएं। दोनों हाथों की उंगलियों को क्रॉस करते हुए पैर के पंजे को पकड़ें और अपने पैरों को ऊपर नीचे की ओर पकड़े।
5. शवासन
मानसिक शांति के लिए यह योगासन काफी फायदेमंद है। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास अच्छे से होता है। इसे करने के लिए जमीन पर सीधा लेट जाएं और अपने हाथों-पैरों को खुला छोड़ दें।

प्रेग्नेंसी में करें सूर्य नमस्कार, नॉर्मल डिलीवरी के साथ मिलेंगे ये 7 फायदे 


प्रेग्नेंसी में योग करना जच्चा और बच्चा दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इस दौरान महिलाओं को इस बात की टेंशन रहती है कि कौन-सा योग उनके लिए सबसे बेस्ट है। ऐसे में आप सूर्य नमस्कार को अपनी रुटीन में शामिल कर सकती हैं। इस आसन से मां के साथ-साथ बच्चा भी स्वस्थ रहता है। चलिए आपको बताते हैं प्रेग्नेंसी में क्यों फायदेमंद है सूर्य नमस्कार। 
सूर्य नमस्कार करने के 12 चरण

सूर्य नमस्कार में कुल 12 आसन होते हैं, जिसमें 6 विधि के बाद फिर उन्हीं 6 विधियों को उल्टे क्रम में दोहराया जाता है। अगर आप इस आसान को सुबह सूर्य की किरणों के सामने स्वच्छ व खुली हवादार में करेगी तभी पूरा फायदा मिलेगा।

कितनी देर करना चाहिए सूर्य नमस्कार


सूर्य नमस्कार सभी योगासनों में से बेस्ट हैं जिसे प्रेग्नेंसी के शुरूआती महीनों में किया जा सकता हैं। सूर्य नमस्कार को 5 से 10 मिनट तक करना जरूरी है। अगर यह आसन रोजाना 5-12 बार तक कर लिया जाए तो आपको कोई और आसन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

शरीर में लचीलापन

गर्भावस्‍था में धीरे-धीरे शरीर का वजन बढ़ता है, ऐसे में इसे कंट्रोल करने के लिए शरीर में लचीलापन होना जरूरी है क्योंकि लचीला शरीर बढ़ते वजन को आसानी से अनुकूलित कर लेता है। साथ की शरीर के लचीलेपन से डिलीवरी के दौरान दर्द भी कम होता हैं। 

शिशु को मिलती हैं पर्याप्‍त ऑक्सीजन

सूर्य नमस्‍कार के अलग-अलग चरणों में गहरी सांस ली जाती है, जिसे गर्भावस्था में करने से शरीर में पल रहे बच्‍चे को जरूरी ऑक्सीजन मिल जाती हैं। 

नॉर्मल डिलिवरी में मदद 


मॉडर्न समय में सिजेरियन डिलीवरी के कैसेज काफी बढ़ गए है लेकिन अगर आप अपनी डिलीवरी नॉर्मल चाहती है तो प्रैग्नेंसी के शुरूआती महीनों में नियमित सूर्य नमस्‍कार का अभ्यास करें। इससे डिलिवरी के समय होने वाले होने वाले दर्द कम होता है। 
पैरों की ऐंठन में आराम 

सूर्य नमस्‍कार करने से पैरों की स्‍ट्रैचिंग होती है। इससे पैरों के साथ-साथ शरीर में खून का दौरा ठीक तरीके से होता है। साथ ही पैरों में होने वाले क्रैम्‍प्‍स या ऐंठन कम होती है।

शारीरिक मुद्रा में सुधार
प्रेग्नेंसी के दौरान अधिक महिलाओं का बॉडी पोश्चर बिगड़ जाता है जिससे शरीर को पूरी बनावट बिगड़ जाती हैं। मगर नियमित इस आसन को करने से अंदर से शरीरिक सुधार होने लगते है और शरीर से जुड़ी अन्य प्रॉबल्म भी दूर होती हैं। 

तनाव दूर 

गर्भावस्था में महिला में शारीरिक व मानसिक परिवर्तन होते है। अधिकतर महिलाएं तनाव में रहने लगती है लेकिन इस स्थिति में चिंता आपकी और बच्चे की सेहत को बिगाड़ सकती है। बेहतर होगा कि प्रेग्नेंसी में तनावमुक्त रहने के लिए सूर्य नमस्‍कार का अभ्यास करें। इससे आपकी खुद को रिलेक्स महसूस करेगी और बैचेनी व तनाव जैसी दिक्कतें दूर रहेंगी। 
कब्‍ज दूर 

गर्भवती महिलाओं में कब्ज की समस्या आम देखने को मिलती हैं। ऐसे में सूर्य नमस्कार करने से पाचन क्रिया में भी सुधार होता है और कब्ज की समस्या दूर रहती हैं।

मन की एकाग्रता बढ़ाएं

यह योगासन करने से शरीर पूरी तरह से फ्री हो जाता है। वात, पित्‍त और कफ दोष शांत हो जाते हैं और इससे शरीर तनाव से दूर अध्‍यात्‍म की ओर चला जाता है, जिससे मन की एकाग्रता बढ़ जाती हैं। 




प्रेग्नेंसी में स्ट्रेस फ्री रहने के लिए करें भ्रामरी प्राणायाम - 

प्रेग्नेंसी में महिलाओं को बहुत-सी हैल्थ प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है। इस दौरान जहां कुछ महिलाओं को इस दौरान मॉर्निंग सिकनेस, हाई बीपी, कब्ज, खून की कमी, चक्कर आना और नींद ना आना जैसी समस्याएं झेलनी पड़ती है। वही कुछ महिलाएं तनाव का शिकार हो जाती है। बच्चे को हैल्दी रखने के लिए बहुत जरूरी है कि आप प्रेग्नेंसी पीरियड में स्ट्रैस फ्री रहें। ऐसे में आज हम आपको भ्रामरी प्राणायाम के बारे में बताएंगे। यह न सिर्फ आपको तनावमुक्त रखेगा बल्कि इससे बाकी परेशानी भी दूर हो जाएगी। 

-भ्रामरी प्राणायाम करने का समय

गर्भवती महिलाओं यह प्राणायाम सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समय में कर सकती हैं। इस बात का ख्याल रखें कि आप जहां भी यह प्राणायाम करें वहां का वातावरण शांत हो।



-भ्रामरी प्राणायाम का तरीका
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप समतल जमीन पर बैठ जाएं। अब अपने दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़कर कानों तक ले आए। इसके बाद अंगूठे से दोनों कानों को बंद कर दें। अब दोनों हाथो की तर्जनी उंगली को माथे पर और मध्यमा, अनामिका और कनिष्का उंगली को आंखों के ऊपर रखें। फिर मुंह बंद करके नाक से सांस लें। सांस को अंदर-बाहर छोड़ते हुए ओउम का उच्चारण करें। 15-20 सेकंड सांस अंदर-बाहर करने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाए। प्रैग्नेंट महिलाओं को यह आसान 4-5 बार करना चाहिए।



-भ्रामरी प्राणायाम के फायदे

1. भ्रामरी प्राणायाम से तनाव, गुस्सा और अवसाद दूर होता है। इसके अलावा इसके नियमित अभ्यास से मन और मस्तिष्क को शांति मिलती हैं।
2. अगर आपको हाइपरटेंशन की शिकायत है तो प्राणायाम आपके लिए फायदेमंद है।
3. गर्भवती महिलाओं को रोज भ्रामरी प्राणायाम करना चाहिए। इससे डिलीवरी के समय परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।


4. इसे करने से सिरदर्द की शिकायत भी दूर होती है।

5. जिन गर्भवती महिलाओं को माइग्रेन या बीपी की समस्या हो उन्हें यह आसन जरूर करना चाहिए।

6. बदलते मौसम में नाक बंद होना, सिरदर्द, नाक से पानी गिरना जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भ्रामरी प्राणायाम सबसे बेहतर उपाय है।


7. भ्रामरी प्राणायाम के रोजाना अभ्यास से गर्भवती महिलाओं की सोच सकारात्मक बनती है।


किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है व्यायाम, जानिए क्यों?

स्वस्थ रहने और बीमारियों से बचे रहने के लिए योग सबसे अच्छा माध्यम है। तन और मन को स्वस्थ रखने के लिए योग बेहतरीन व्यायाम है लेकिन क्या आप जानते हैं कि किडनी रोग से ग्रस्त लोगों के लिए योग कितना फायदेमंद है। आज हम आपको ऐसे 5 कारण बताने जा रहे हैं, जिसके अनुसार क्रॉनिक किडनी डिसीज से ग्रस्त मरीजों को रोजाना योग करना चाहिए। 

1. डायबिटीज को रखता है कंट्रोल
डायबिटीज मरीजों को किडनी रोग की संभावना सबसे ज्यादा होती है लेकिन रोजाना योगासन करके इसके खतरे को टाला जा सकता है। एक शोध के मुताबिक, नियमित रूप से योग करने पर ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और लिपिड्स कंट्रोल में रहते हैं। ब्लड शुगर कंट्रोल में रहने पर डायबिटीज पेशेंट में किडनी रोग की संभावना 30% तक कम हो जाती है।



2. ब्लड प्रेशर कंट्रोल

हाई ब्लड प्रेशर किडनी फेलियर के मुख्य कारणों में से एक है। ऐसे में रोज सर्पासन और उष्ट्रासन के जरिए आप ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रख सकते हैं, जिससे किडनी फेलियर का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।

3. दिल मजबूत तो किडनी स्वस्थ

किडनी डिजीज से बचे रहने के लिए दिल का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। दिल और किडनी दोनों को स्वस्थ रखने के लिए आप अंर्धचंद्रासन, त्रिकोणासन और धनुरासन जैसे योग कर सकते हैं।


4. डिप्रेशन से बचाव
क्रॉनिक डिजीज से जूझ रहे पेशेंट्स को डिप्रेशन का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में मेडिटेशन और प्राणायाम आपके लिए बेहद फायदेमंद है। इससे न सिर्फ आपको मानसिक शांति मिलेगी बल्कि यह आपको डिप्रेशन से बाहर लाने में मदद करेगा।

5. हड्डियों के दर्द से राहत

किडनी रोग से ग्रस्त लोगों को हड्डियों में काफी दर्द रहता है। यूंकि उन्हें पेनकिलर्स नहीं दिए जा सकते तो योग ही एकमात्र तरीका है इस दर्द को दूर करने का। ऐसे में आप रोजाना पश्चिमोत्तनासन, हलासन योग और मार्जायासन द्वारा इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।


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