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बुखार के कारन, लक्षण और इलाज,Fever in hindi



बुखार के कारन, लक्षण और इलाज,Fever in hindi
fever( बुखार ) 

फीवर जिसे हम भुखार बी बोलते है मौसम अक्सर जब बी चेंज होता है है तो ज्यादा टार लोगो को बचो को fever हो जाता है। बीमारी बड़ी हो या छोटी, कुछ समय के लिए वह आपको कमजोर कर देती है लेकिन खुद की थोड़ी सी देखभाल, आराम और खानपान में सुधार के साथ आप सामान्य हो जाते हैं। तो दोस्तो आज हम इस article मैं ये ही जाने गे की फीवर होने के टाइम अपनी देखभल, आराम,खनपन, केस हो और है बचो को जब फीवर हो तो क्या करे देख बाल और बी बहोत कुछ और कौन सी दवाओं का उपयोग करे डॉक्टर से कब साल ले और डाइट ये सब आज हम मिल के जानते है तो चलो जानते कैसे पाएं फीवर(भुखार) से छुटकारा तो चलो सुरु कर ते है।

Kuch points mai aap ko ye article batuga jis se ye article aap ko ache se smaj aa jay ga

1, बुखार के कारन, लक्षण और इलाज

2, बरसात के दिनों में बुखार पर इन चीजों पर विशेष ध्यान दिया जाता है

3, मॉनसून में हो रहे कई प्रकार के बुखार, ये हैं वायरल के लक्षण

4,जाने क्या है टाइफाइड फीवर

5, बार-बार बुख़ार आना किसी और बीमारी का संकेत भी हो सकता है

6, इन बीमारियों में वायरल फीवर हो सकता है
जानलेवा
7, बार बार बुखार आने का इलाज : सभी तरह के बुखार भागने के उपाय

8, जानिए वायरल बुखार से जुड़ी जरूरी बातें

9, शिशुओं और बच्चों में बुखार

10, बच्चों में वायरल बुखार: लक्षण और कारण

11, आखिर रात को बुखार क्‍यों हो जाता है तेज

12, बार-बार ऐसा बुखार आना जल्दी बूढ़ा कर देता है आपको, रहें बचकर

13, हर तरह के बुखार की रामबाण औ‍षधि है 'गिलोय'

14, इन घरेलू नुस्‍खों से दें वायरल फीवर को मात

15, बुखार कम करने के घरेलू उपाय

16, टाइफाइड बुखार से बचाव के लिए घरेलू इलाज

17, बुखार में खानपान : क्या खाएं और क्या ना खाएं

18, बुखार में Normal or आयुर्वेदिक डाइट

19, तुरंत बुखार उतारने की दवा : 5 अंग्रेजी और आयुर्वेदिक उपाय

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बुखार के कारन, लक्षण और इलाज

आमतौर पर शरीर के ताप का घटना-बढ़ना, जिसे बुखार कहते हैं, इसकी रोग-प्रतिरोधआत्मक प्रणाली का किसी बाहरी संक्रमण से मुक़ाबला करने का एक तरीका होता है। मगर, कई बार यह हो सकता है की आपका तापमान ज़्यादा बढ़ जाए और यह बुखार एक गंभीर समस्या बन सकता है । आइये जानते हैं हम इस लेख में बुखार के कारन, लक्षण, निदान और इलाज।

*बुखार क्या और क्यों होता है

बैक्टीरिया, वायरस, कवक और अन्य प्रकार के रोगाणुओं जैसे कई सूक्ष्म जीव मानव शरीर में प्रवेश करते हैं, लगभग हर दिन। प्रतिरक्षा प्रणाली आमतौर पर इन सूक्ष्म जीवों से लड़ती है, जो उन्हें शरीर के भीतर किसी भी बड़ी समस्या का कारण बनती रहती है। हालांकि, ऐसे समय हो सकते हैं जब प्रतिरक्षा प्रणाली उन सभी से लड़ नहीं सकती और उन्हें शरीर से खत्म नहीं कर पाती है। जब एक व्यक्ति प्रतिरक्षा प्रणाली इन हानिकारक वायरस को रोकने में विफल हो जाती है, तो वे आमतौर पर शरीर में संक्रमण का कारण बनती हैं। यह बाद में शरीर में बुखार के तोर पेह पेश होता है ।

*बुखार के लक्षण

किसी प्रकार की बीमारी होने पर शरीर के द्वारा गयी प्रतिक्रियाएं जिससे हम मेडिकल भाषा में सिकनेस बिहेवियर(रोग आचरण) कहते हैं। इसी प्रकार बुखार  होने की स्तिथि में, आप यह बुखार के लक्षण महसूस कर सकते हैं:
ठंडा महसूस करनाकंपकंपी भूख मिट

जाना निर्जलीकरणडिप्रेशन या अवसादहाइपर-अलगेसिअ –

दर्द के प्रति संवेदनशीलता में बढ़ावथकान और सुस्तीध्यान केंद्रित करने में समस्याएंतंद्रापसीना आना
यदि बुखार तेज़ होता है, तो आप यह बुखार के लक्षण  के साथ चिड़चिड़ापन, भ्रम और दौरे भी महसूस कर सकते हैं।

*बुखार के कारण जैसे की:
एक संक्रमण, जैसे फ्लू, चिकनपॉक्स, या निमोनियासंधिशोथ ( rheumatoid arthritis )कुछ दवाइओ का भी साइड-इफ़ेक्ट हो सकता है बुखार सूरज की रोशनी, या सनबर्न के लिए त्वचा का ज़्यादा – अनावरणगर्मी का दौरा, या तो उच्च तापमान या लंबे समय तक सख्त अभ्यास के संपर्क में रहने से होता हैनिर्जलीकरणसिलिकोसिस -जो एक फेफड़ो की बीमारी होती हैशराब की वापसी से भी हो सकता है

*बुखार का निदान

आम तौर पर बुखार का निदान (bukhaar ka needan) एक सरल प्रक्रिया है। जिसमें मरीज का तापमान लिया जाता है, और अगर ताप एक स्तर से ऊपर होता है तोह तो उससे बुखार कहेंगे। ताप मापने वक़्त इस बात का ध्यान रखना चईये की पीड़ित विख्याति आराम की अवस्था में हो। क्यूंकि किसी भी प्रकार की शारारिक गतिविड़ी हमारे शरीर का तापमान बढ़ा सकती है।


*एक व्यक्ति को बुखार में पीड़ित कहा जाता है जब:

मुंह में तापमान 37.7 डिग्री सेंटीग्रेड (99.9 डिग्री फ़ारेनहाइट) से अधिक होता है।गुदाशय (गुदा) में तापमान 37.5-38.3 डिग्री सेंटीग्रेड (100-101 फारेनहाइट) से अधिक होता है।हाथ के नीचे या कान के अंदर का तापमान 37.2 सेंटीग्रेड (99 फारेनहाइट) से अधिक होता है।

हमें यह याद रकना चईये की बुखार एक लक्षण  होता है और नाकि एक बीमारी। इसलिय जब डॉक्टर बुखार का पुष्टि करें चुके होते हैं तोह फिर यह मरीज़ को टेस्ट करवाने के लिए भेजता है। और उस टेस्ट के हिसाब से डॉक्टर आगे बीमारी या बुखार का निदान (bukhaar ka needan) करता है।


*बुखार का इलाज और घरेलु नुस्क

कम ताप वाले बुखार के लिए आपको डॉक्टर की दवाई की ज़रुरत न पढ़ें। बल्कि कम ताप वाल्ला बुखार हकीकत में हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होता है क्यूंकि यह शरीर में बढे इन्फेक्शन को मार देता है।

*बुखार का इलाज

उच्च बुखार के मामले में, या कम बुखार जो असुविधा पैदा कर रहा है, आपका डॉक्टर एसिटामिनोफेन (टायलोनोल, अन्य) या इबुप्रोफेन (एडविल, मोटरीन आईबी, अन्य) जैसे ओवर-द-काउंटर दवा दे सकता है।एंटीबायोटिक वायरल संक्रमण का इलाज नहीं करते हैं, लेकिन कुछ वायरल संक्रमणों के इलाज के लिए इस्तेमाल कुछ एंटीवायरल दवाएं हैं। हालांकि, वायरस के कारण सबसे छोटी बीमारियों के लिए सबसे अच्छा इलाज अक्सर आराम किया जाता है और बहुत सारे तरल पदार्थ।


बरसात के दिनों में बुखार पर इन चीजों पर विशेष ध्यान दिया जाता है

बुखार का मौसम भी शुरू होता है क्योंकि बरसात का मौसम आता है। इस मौसम के दौरान, वायरस और बैक्टीरिया फैलाने वाला बुखार बहुत सक्रिय है। जिन लोगों को बीमारी की कम प्रतिरक्षा है, वे बुखार हैं। वायरल बुखार सिरदर्द, शरीर में दर्द, शरीर का तापमान बढ़ता है, सिरदर्द बढ़ता है। आज, हम आपको कुछ बताएंगे जो आपको अपने विचारों को अच्छी तरह से रखने में मदद कर सकता है, हमें इन चीजों के बारे में बताएं .....

* मौसमी संतरे और निबोन खाएं जिनमें विटामिन सी और वीटा कैरोटीन होता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाते हैं।

* आहार भोजन में वायरल बुखार का भरपूर खाना चाहिए। जस्ता बहुत सारे डाई भोजन में पाया जाता है।

* मौसमी संतरे और निबोन खाएं जिनमें विटामिन सी और वीटा कैरोटीन होता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाते हैं।

* आहार भोजन में वायरल बुखार का भरपूर खाना चाहिए। जस्ता बहुत सारे डाई भोजन में पाया जाता है।

* कैलोरी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और खनिजों में लहसुन में पाए जाते हैं। यह सर्दी, सर्दी, दर्द, सूजन और त्वचा से संबंधित रोगों का कारण नहीं बनता है। लहसुन घी या तेल का इस्तेमाल स्वादयुक्त सॉस के रूप में भी किया जा सकता है।

* खूब पानी पिए। निर्जलीकरण के अलावा, यह शरीर को सूक्ष्म जीवों पर हमला करने में मदद करता है।

* तुलसी के पत्तों में खांसी, सर्दी, बुखार और श्वसन रोग से लड़ने की शक्ति होती है। बदलते मौसम में तुलसी की पत्तियों को उबलते हुए, या चाय में जोड़कर, नाक और गले में संक्रमण पीएं।

* वायरल बुखार में हरी और पत्तेदार सब्जियों की अधिक मात्रा का उपयोग करें। चूंकि हरी सब्जियों में पानी की अधिक मात्रा होती है, इसलिए कोई निर्जलीकरण नहीं होता है।

* टमाटर, आलू और संतरे खाओ। विटामिन सी बहुतायत में पाया जाता है।

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मॉनसून में हो रहे कई प्रकार के बुखार, ये हैं वायरल के लक्षण



  सीजन के बदलने पर लोगों को कई बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती हैं, जैसे जुखाम, खांसी, बुखार। कई लोग ऑफिस या काम पर जाने के लिए एंटीबायोटिक का सेवन करते हैं, ऐसा करना गलत है। बिना डॉक्टर की सलाह लिए कोई भी मेडिसिन लेना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। साथ ही मॉनसून में होने वाला बुखार भ्रम भी पैदा करता है।
बुखार कई प्रकार के होते हैं। इसमें मलेरिया, डेंगू, 
चिकनगुनिया, पीलिया और टायफायड शामिल हैं। इन सभी के लक्षण मिलते-जुलते रहते हैं। मॉनसून के बुखार में एस्प्रिन लेना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि कई किस्म के बुखार में प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है।

मॉनसून में होने वाले बुखार के लक्षण

अगर मॉनसून में बुखार हो तो इन बातों का ध्यान रखें:
जब तक टायफायड की पहचान न हो जाए, तब तक कोई भी एंटीबायटिक न लें। खांसी, आंखों का लाल होना और जुखाम आदि वायरल विकार की वजह से भी हो सकता है। डेंगू होने पर आखें हिलाने पर दर्द होता है। वहीं, चिकनगुनिया में मरीज़ को बुखार, रैशेज़ और जोड़ों में दर्द होता है। कलाई के जोड़ों को दबाने से जोड़ों का दर्द बढ़ता है। मलेरिया के बुखार में कपकपी छूटती है और कठोरपन आ जाता है। बुखार के बीच में टोक्सीमिया नहीं होता।

पीलिया में जब तक पीलिया सामने आता है तब तक बुखार चला जाता है। टायफायड का रोगी टॉक्सिक लगता है और उसकी नब्ज बुखार से कम होती है। ज़्यादातर वायरल बुखार अपने आप नियंत्रित होते हैं और एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। मॉनसून के ज़्यादातर वायरल विकारों में उचित मात्रा में पानी लेने से इलाज हो जाता है। किसी लंबी मेडिकल बीमारी के दौरान बुखार होने पर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

जाने क्या है टाइफाइड फीवर

टाइफायड साल्मोनेला बैक्टीरिया से फैलने वाली खतरनाक बीमारी है। इसे मियादी बुखार भी कहते हैं। टाइफायड  बुखार पाचन तंत्र और ब्लटस्ट्रीम में बैक्टीरिया के इंफेक्शन की वजह से होता है। गंदे पानी, संक्रमित जूस या पेय के साथ साल्मोनेला बैक्टीरिया हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है। टायफायड की संभावना किसी संक्रमित व्यक्ति के जूठे खाद्य-पदार्थ के खाने-पीने से भी हो सकती है। वहीं दूषित खाद्य पदार्थ के सेवन से भी ये संक्रमण हो जाता है। पाचन तंत्र में पहुंचकर इन बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है। शरीर के अंदर ही ये बैक्टीर‌िया एक अंग से दूसरे अंग में पहुंचते हैं। टाइफायड के इलाज में जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाह‌िए। दवाओं का कोर्स पूरा न किया जाए तो इसके वापस आने की भी संभावना रहती है।

*क्या है टाइफायड 

टाइफायड के बैक्टीरिया इंसानों के शरीर में ही पाया जाता है। इससे संक्रमित लोगों के मल से सप्लाई का पानी दूषित हो जाता है। ये पानी खाद्य पदार्थों में भी पहुंच सकता है। बैक्टीरिया पानी और सूखे मल में हफ्तों तक ‌जिंदा रहता है। इस तरह ये दूषित पानी और खाद्य पदार्थों के जरिए शरीर में पहुंचकर संक्रमण पहुंचाता है। संक्रमण बहुत अधिक हो जाने पर 3 से 5 फीसदी लोग इस बीमारी के कैरियर हो जाते हैं। जहां कुछ लोगों को हल्की से परेशानी होती है, जिसके लक्षण पहचान में भी नहीं आते वहीं कैरियर लंबे समय के लिए इस बीमारी से ग्रसित रहते हैं। उनमें भी ये लक्षण दिखाई नहीं देते लेकिन कई सालों तक इनसे टाइफायड का संक्रमण हो सकता है।

*लक्षण

संक्रमित पानी या खाना खाने के बाद साल्मोनेला छोटी आंत के जरिए ब्लड स्ट्रीम में मिल जाता है। लिवर, स्प्लीन और बोनमैरो की श्वेत रुधिर क‌णिकाओं के जरिए इनकी संख्या बढ़ती रहती है और ये रक्त धारा में फिर से पहुंच जाते हैं। बुखार टाइफायड का प्रमुख लक्षण है। इसके बाद संक्रमण बढ़ने के साथ भूख कम होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द होना, तेज बुखार, ठंड लगना, दस्त लगना, सुस्ती, कमजोरी और उल्टी  जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। आंतों के संक्रमण के कारण शरीर के हर भाग में संक्रमण हो सकता है, जिससे कई अन्य संक्रमित बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
सामान्यता टाइफायड 1 महीने तक चलता है, लेकिन कमजोरी ज्यादा होने पर ज्यादा समय ले सकता है। इस दौरान शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती है और जिससे रोगी को सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है। 

*टाइफायड की जांच

शुरुआती स्टेज में रोगी के ब्लड सैंपल की जांच करके उसका इलाज शुरू किया जाता है। इसके अलावा रोगी का स्टूल टेस्ट करके उसके शरीर में टाइफायड के बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाया जाता है। विडाल टेस्ट भी टाइफायड के टेस्ट का प्रचलित तरीका है लेकि‌न कई बार टाइफायड ठीक होने के बाद भी सालों-साल मरीज के ब्लड में विडाल टेस्ट पॉजिटिव आता रहता है। इसके लिए स्टूल और टा‌इफायड टेस्ट कराना बेहतर विकल्प है। कभी-कभी संक्रमण ज्यादा होने पर अगर मरीज को ज्यादा पेट दर्द या उल्टी हो तो सोनोग्राफी भी करनी पड़ सकती है।

*इलाज

टाइफायड का  इलाज एंटी बायोटिक दवाओं के जरिये किया जाता है। शुरुआती अवस्था का टाइफायड एंटीबायोटिक गोलियों और इंजेक्शन की मदद से दो हफ्ते के अंदर ठीक हो जाता है। इसके साथ परहेज रखना बेहद जरूरी है।

*ऐसे करें मरीज की देख-रेख
टाइफायड के दौरान तेज बुखार आता है। ऐसे में किसी कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर शरीर को पोंछे। इसके अलावा ठंडे पानी की पट्टियां सिर पर रखने से भी शरीर का तापमान कम होता है। कपड़े को समय समय पर बदलते रहना चाहिए। ये ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि पानी बर्फ का ना हो। पट्टी रखने के ल‌िए साधारण पानी का इस्तेमाल करें।

*घरेलू उपचार

1. तुलसी और सूरजमुखी के पत्तों का रस निकालकर पीने से टाइफायड में राहत मिलती है।

2. लहसुन की तासीर गर्म होती है और यह प्राकृतिक एंटीबायोटिक है। घी में 5 से 7 लहसुन की कलियां पीसकर तलें और सेंधा नमक मिलाकर खाएं। 

3. सेब का जूस निकालकर इसमें अदरक का रस मिलाकर प‌िएं, इससे हर तरह के बुखार में राहत मिलती है।

4. पके हुए केले को पीसकर इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार खाएं।

5. लौंग में टाइफायड ठीक करने के गुण होते हैं। लौंग के तेल में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। आठ कप पानी में 5 से 7 लौंग डालकर उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए इसे छान लें। इस पानी को पूरा दिन पीएं। इस उपचार को एक हफ्ते लगातार करें।

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बार-बार बुख़ार आना किसी और बीमारी का संकेत भी हो सकता है



मूल रूप से बुख़ार किसी अन्य बीमारी या स्वास्थ समस्या के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं. यह एक संकेत है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से लड़ रही है।आइये, आज हम आपकी जानकारी के लिए बताते हैं ,बुख़ार के लक्षण,प्रकार और कारण।

किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान जब सामान्य से अधिक हो जाता है, तो हम कहते हैं कि उसे बुख़ार हो गया है. हम सभी कभी ना कभी बुख़ार से पीड़ित ज़रूर होते हैं.

बुखार वास्तव में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि एक लक्षण है जिससे ये पता चलता है, कि हमारे शरीर में किसी तरह का संक्रमण हो गया है. बुखार कई कारणों से हो सकता है, जैसे ज़्यादा शारीरिक मेहनत करने से, ज़्यादा गर्म वातावरण में, पीरियड्स के समय, लू लगने से, बैक्टीरियल, वायरल फंगल इन्फेक्शन के कारण या किसी रोग के प्रभाव से.

* बुखार के शारीरिक लक्षण  

बुखार होने पर कई शारीरिक लक्षण भी प्रकट होते हैं, जैसे सर में दर्द होना, मांसपेशियों में दर्द होना, सर्दी लगना, शरीर में कमज़ोरी होना, कमर में दर्द होना, त्वचा पर दाने निकल आना, बहुत पसीना आना, चक्कर आना, कपकपी होना, बेहोश हो जाना, बेहोशी में बड़बड़ाना, डार्क सर्कल्स आना इत्यादि.

* बुखार के प्रकार और कारण 

सामान्य बुखार (सिंपल फीवर) बुखार का एक प्रकार है और ऐसा बुखार होने पर कई घरेलू उपचार किये जा सकते हैं. ऐसा बुखार अक्सर बारिश में भींग जाने से, पानी के संपर्क में ज़्यादा देर रहने से, गीले कपड़े पहनने से, जुकाम होने पर, कब्ज़

होने पर, लूज़ मोशन होने पर, पेट दर्द या पेट में कोई भी समस्या होने से, रात को जागने से, अनियमित दिनचर्या के कारण, मानसिक तनाव के कारण, मौसम में बदलाव के कारण, धूप में ज़्यादा समय घूमने से, और ज़्यादा शारीरिक श्रम करने से हो जाता है.

अक्सर घरेलू उपचारों से ही सामान्य / साधारण बुखार ठीक भी हो जाता है. इसके अलावा पेरासिटामोल, एस्पिरिन, आईब्रुफेन जैसी कुछ दवाएं भी बुखार में बेहद असरदार होती हैं और कई बार दवा की एक-दो गोली खाते ही बुखार छूमंतर हो भी जाता है. लेकिन बुखार अगर बार बार आये तो ये चिंता का विषय है.साधारण ज्वर के अलावा बुखार के अन्य प्रकार भी हैं. बुखार के प्रकारों में सविराम ज्वर, अविराम ज्वर, स्वलप-विराम ज्वर सम्मिलित हैं.

बुखार अगर बार-बार हो रहा है या लगातार बना ही हुआ है, तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. ऐसी बीमारियों में टायफायड, हेपेटाइटिस-बी, जॉन्डिस, मलेरिया, डेंगू, लिवर की खराबी, चिकनगुनिया, और कई अन्य बीमारियाँ आतें हैं. अगर आप बार-बार होने वाले बुख़ार को अनदेखा कर रहे हैं ,तो आपको इसके घातक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.

बुखार चाहे आपके बच्चे को हो रहा हो, घर के किसी सदस्य को हो रहा हो या आपको, किसी भी परिस्थिति में आप बार-बार होने वाले बुखार को अनदेखा ना करें. आप बार-बार पेरासिटामोल या बुखार की कोई अन्य दवा का इस्तेमाल करके बुखार को दबाने की बजाय चिकित्सक की सलाह लें.

अगर आपने समझदारी से काम नहीं लिया तो ऐसा बुखार जानलेवा भी हो सकता है| ख़ासकर नवजात या छोटे बच्चे, और वृद्ध अगर बुख़ार से ग्रस्त हों, तो उन्हें अपनी समझ से दवा देने की बजाय हमेशा डॉक्टर के सुझाव के अनुसार ही दवा दें और बाकी निर्देशों का भी पालन करें|

इन बीमारियों में वायरल फीवर हो सकता है जानलेवा

1
बीमारी में वायरल

वैसे तो बदलते मौसम में वायरल फीवर होना आम बात होती है, लेकिन अगर आप पहले से ही दिल या डायबिटीज की बीमारी से परेशान हैं तो  वायरल फीवर आपके लिए जानलेवा हो सकता है। ये समस्या सिर्फ वायरल फीवर से नहीं बल्कि किसी भी तरह के संक्रामक बुखार जैसे डेंगू चिकनगुनिया की स्थिति में भी खतरनाक हो सकती है। अगर आप नीचे दी हुई किसी भी बीमारी से ग्रस्त हैं तो बुखार की दवा लेने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर मिल लें। 

2
डायबिटीज के मरीज

डायबिटीज के रोगियों को वायरल होने पर ज्यादा सावधानी बरतना चाहिए। वायरल की दवाई लेने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें। मधुमेह की दवा को भी बिना सलाह के लेना ना बंद करें। अपने खानपान को लेकर सर्तक रहें। दिनभर में थोड़ा-थोड़ा करके खायें। तरल आहार की मात्रा को बढ़ा दें। मधुमेह और वायरल दोनो की दवाओं का सेवन आपके इंसुलिन के स्तर को प्रभावित कर सकता है। इसलिए आपको ज्यादा सावधानी की आवश्यकता होती है। इस दौरान अगर आपके शरीर में सूजन आदि की समस्या हो जाए तो भी परेशान ना हो। 

3
किडनी के रोगी

वायरल बुखार किडनी रोगी के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। ऐसे में कभी भी अपनी मर्जी से दवाई ना खाएं। सबसे पहले डॉक्टर को बताएं। वायरल के लिए ली गई पैरासीटामॉ़ल आपकी किडनी पर बुरा प्रभाव डालती है। बुखार होने पर अगर आपका यूरिया क्रेटाइन बढ़ गया हो तो तुरंत ही डॉक्टर को दिखाएं। वायरल के बढ़ने पर किडनी अपना काम ठीक तरह से नहीं कर पाती है। 

4
हृदयरोगी

अगर आपको दिल से जुड़ा कोई रोग है तो वायरल फीवर में ज्यादा सचेत रहने की जरूरत होती है। दिल के रोगी बुखार होने पर ज्यादा से ज्यादा आराम करें। किसी भी तरह का बोझ ना उठाएं। इससे दिल पर असर पड़ने का खतरा रहता है। साथ ही पेशाब की मात्रा पर भी ध्यान दें। अगर पेशाब कम हो रही हो तो पानी ज्यादा ना पीएं। ये भी दिल पर बुरा असर डाल सकता है। नियमित रूप से डॉक्टर के संपर्क में रहें। 

5
बीपी के रोगी
दिल के साथ साथ ब्लड प्रेशर के रोगियों को लिए भी वायरल बुखार जानलेवा साबित हो सकता है। बुखार में ली जाने वाली दवाइयां ब्लडप्रेशर पर बुरा असर डालती है। बुखार के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है जो ब्लडप्रेशर को लो कर देता है। फीवर होने पर ब्लड प्रेशर अचानक घटता-बढ़ता है, इसलिए अलर्ट रहना चाहिए। अगर फिर भी कंट्रोल नहीं होता है तो हॉस्पिटल में एडमिट हो जाएं। फीवर हो तो डॉक्टर से दिखाकर दवा लें। बीपी का डोज भी कम करा लें।

बार बार बुखार आने का इलाज : सभी तरह के बुखार भागने के उपाय


जानिये बुखार भगाने के उपाय रामबाण नुस्खे सभी तरह के बुखार के लिए जैसे मलेरिया, टाइफाइड, डेंगू, पित्त ज्वर, सहित ज्वर, वायरल फीवर, लू का बुखार, पुराना बुखार, बार बार बुखार आना का इलाज आदि. यह ऐसे आयुर्वेदिक नुस्खे बताये जायेंगे जो की सभी तरह के बुखार के लिए सही नुस्खे जिनसे आपको पूरा आराम मिलेगा तो चलो जानते है।


* बार बार बुखार आने का इलाज : उतारने के नुस्खे

(1). तुलसी की पत्तियां 7, कालीमिर्च के दाने 4, पीपर (पिप्पली) 1, इन तीनो दवाओं को 60 ग्राम पानी के साथ बारीक पीसकर 10 ग्राम पानी के साथ बारीक पीसकर 10 ग्राम मिश्री मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट सेवन करने से महीनो का ठहरा हुआ बुखार, जीर्ण बुखार दूर हो जाता हैं. अपनी जरूरत के मुताबिक 2-3 सप्ताह लगातार प्रयोग करे और सुबह व शाम दूध में 2 छोटी पीपर डालकर औटाकर और फिर पीपर निकालकर दूध का मिश्री के साथ सेवन करे. यह प्रयोग भी समस्त प्रकार के जीर्ण बुखार में लाभदायक होता हैं.

(2). किसी मिटटी के बर्तन में 10 ग्राम अजवाइन और 2 नग बड़ी पीपर आधा कप पानी में आठ पहर तक भिगोये. प्रात:काल उसी पानी में अजवाइन और पीपर को घोटकर घासा बना लें. रोजाना सुबह के समय यह घास बनाकर अपनी जरूरत के मुताबिक़ लगातार 15 दिन तक सेवन करने से पुराने से पुराना बुखार का इलाज हो जाता हैं. (कफ के बुखार में यह प्रयोग विशेष लाभकारी हैं). जिन लोगों को भी पुराना बुखार हैं व बार-बार बुखार आने की समस्या हो तो वह इस प्रयोग को कर सकते हैं.

* बुखार में तुलसी का प्रयोग – तुलसी की 4 पत्तियां रोजाना सुबह के समय खाने से डेंगू, मलेरिया वायरल फीवर व सामान्य बुखार से बचा जा सकता हैं, इसी तरह तुलसी की 4 पत्तियां और 4 कालीमिर्च रोजाना खाने से मौसमी बुखार से भी बचा जा सकता हैं. तुलसी का रोजाना सेवन करने मात्रा से  शरीर में आसानी से तबियत ख़राब नहीं होती. जिन लोगों को भी बार-बार बुखार आता हो वह इन नुस्खों से इलाज जरूर करे


* पुराना बुखार 

(1). बुखार भगाने के लिए 21 नीम के पत्ते और 21 दाने कालीमिर्च के लेकर दोनों को मलमल के कपडे में पोटली बांधकर आधा किलो पानी में उबाले. चौथाई पानी बाकी रहने पर उतारकर ठंडा होने पर सुबह शाम पिए. इस प्रयोग से पुराने से पुराना bukhar भी जल्द ठीक हो जाता हैं.

(2). कच्चा पिसा हुआ जीरा 1 ग्राम, 1 ग्राम गुड़ में ही मिलाकर 3 बार रोजाना लेते रहने से पुराना बुखार दूर हो जाता हैं.

(3). तेज बुखार, बार-बार बुखार आना आदि के लिए चूर्ण – सोंठ, छोटा पीपर, सेंधा नमक, कालीमिर्च, सूखा पोदीना, अजमोद, निम् गिलोय और पित्त पापड़ा इन सभी को 6-6 ग्राम की मात्रा में लेकर साफ़ और स्वच्छ करने के बाद दरदरा चूर्ण बना लें.अगर रोगी को तेज बुखार हो यानि 101 डिग्री हो और इससे अधिक टेम्परेचर हो तो बताया गया नुस्खा जिसमे आठों औषधियों के चूर्ण को काम में लाये. अगर bukhar कम हो, 101 डिग्री तक हो तो निम् गिलोय 2/3 मात्रा में यानी 6 ग्राम की जगह पर 4 ग्राम की मात्रा में लें और बताये गए नुस्खे में मिलाकर प्रयोग करे.बताये गए चूर्ण की मात्रा वयस्कों के लिए 6 ग्राम, बच्चों के लिए 3 ग्राम की मात्रा में लेकर 60 ग्राम पानी के साथ मिलाकर बारीक पीस लें और ऐसा घोल अथवा घास बना लें, जो न गाढ़ा हो और न ही पतला. ध्यान रहे की यह घास जितना बारीक पिसेंगे या घोटेंगे उतना ही अधिक प्रभावशाली होगा.इस घासे को को किसी कांसे की कटोरी को थोड़ा गर्म करके उसमे डाले, ताकि यह थोड़ा गुनगुना हो जाए. कांसे की कटोरी अगर आपके पास नहीं हो तो पीतल की कलाई वाली कटोरी को काम में लाये. फिर इस गुनगुने घासे को रोगी को खाली पेट जरा-सा साधारण (रोजाना रसोई में काम आने वाला) नमक डालकर तुरंत 1 घूंट में पीला दें

(4). बुखार भगाने के लिए बच्चों को ऊपर से 1-2 चम्मच सादा पानी या 1-2 मुनक्के खिला सकते हैं. इस तरह इस घासे को रोगी को सुबह के समय खाली पेट 3-4 दिन सेवन कराने से ही सभी तरह का Fever ठीक हो जाते है. इस आयुर्वेदिक नुस्खे के सेवन से सालों साल पुराना Fever आना भी बंद हो जाता हैं, बार बार बुखार आना आदि सभी नष्ट हो जाता हैं.ये सभी तरीके बार बार बुखार आने का इलाज करते है.

* Fever के लिए.

(1). 7-7 तुलसी की कोमल पत्तियां दिन में 3 बार चबाने से भी मलेरिया बुखार व अन्य पुराने से पुराना बुखार कुछ ही दिनों में ही जड़ से नष्ट हो जाता हैं अथवा 60 ग्राम काली (श्यामा) तुलसी की पत्तियां और इतने ही वजन में कालीमिर्च लेकर 5 घंटे तक सील बट्टे पर पीसकर पानी मिलाकर 1-1 ग्राम सेवन करने से पसीना आकर Fever उतर जाता हैं.

(2). बुखार होने पर खून में नुकसानदायक पदार्थ बढ़ जाते हैं. टमाटर का सूप इन पदार्थों को निकाल देता है, इससे रोगी को आराम मिलता हैं. यह normal fever में ही देना चाहिए.

(3). गाजर का रस 185 ग्राम, चुकुन्दर का रस 250 ग्राम, खीरा या ककड़ी का रस 125 ग्राम मिलाकर पिने से सिर दर्द, दाद, दमा और बुखार में बहुत फायदा होता हैं.


* बुखार का तापमान
(1). बुखार में शरीर का तापमान कम करने के लिए गीली मिटटी की पट्टी पेट पर बांधे. हर घंटे पर पट्टी बदलते रहे. इस प्रयोग से Bukhar की तपन हट जाती हैं.


* बार बार प्यास लगना बुखार में
बुखार जिसमें रोगी को बार बार प्यास लगे, यानी बुखार में बार-बार प्यास लगने पर उबलते पानी में नीबू निचोड़कर पिलाने से बुखार का तापमान कम हो जाता हैं. एक कप में दो चम्मच नीबू का रस डालकर प्रयोग करे. पानी में नीबू निचोड़कर बार बार पिने से बुखार की गर्मी और ताप कम होता हैं. यह प्रयोग यानी सादा फीके पानी में नीबू के रस को मिलाकर सेवन करने से पीला ज्वर यानी पीलिया भी ठीक हो जाता है. इसमें मीठा न मिलाये.


* रुक रुक कर बुखार आना

पुराना bukhar, रुक-रूक कर आने वाला बुखार, fever weakness कमजोरी और स्त्री रोग दूध वृद्धि में कच्चा जीरा पीसकर समान मात्रा में गुड़ मिलाकर मटर के दाने के बराबर गोलियां बनाकर ये 2-2 गोलियां रोजाना 3 बार खाकर पानी पिने से बहुत लाभ होता हैं. इस प्रयोग से स्त्रियों का दूध बढ़ जाता हैं और गर्भाशय और योनि की सूजन, प्रसव के दौरान गर्भाशय की शुद्धि और श्वेत प्रदर व बुखार आदि में अत्यंत लाभकारी होता हैं.


* टाइफाइड के लिए

आंत्र बुखार टाइफाइड में लौंग का पानी पिलाये. 5 नग लौंग 2 किलो पानी में उबालकर आधा पानी बाकी रहने पर छान लें. इस पानी को रोजाना बार-बार पिलाये. केवल पानी उबालकर ठंडा करके पिलाना भी फायदेमंद होता हैं.
* बुखार में बलगम व कफ आना
बलगम और बुखार भगाने के लिए 30 कालीमिर्च पीसकर 2 कप पानी में उबालें. चौथाई पानी बाकी रहने पर छानकर 1 चम्मच शहद मिलाकर सुबह शाम पिने से खांसी, कफ, गले में कफ लगे रहना ठीक हो जाता है और 10 कालीमिर्च, 15 तुलसी के पत्ते पीसकर शहद में मिलाकर रोजाना 3 बार चाटने से गले में जमा बलगम व कफ बाहर निकलकर गला साफ़ हो जाता हैं.


* कफ वाला बुखार

आधा चम्मच पीसी हुई सोंठ 1 कप पानी में उबाले. आधा पानी बाकी रहने पर मिश्री मिलाकर पिने से कफ वाला fever दूर हो जाता हैं.

* तेज बुखार में क्या करना चाहिए घरेलु उपचार

(1). तेज बुखार होने पर अदरक का रस और शहद 6-6 ग्राम की मात्रा में मिलाकर चाटने से लाभ होता हैं.

(2). High fever में ठन्डे पानी का स्पंज बहुत फायदेमंद होता हैं. तेज बुखार होने पर ठन्डे पानी में तौलिया भिगोकर रोगी के सिर पर रखें तथा सारे शरीर को गीले कपडे में पोंछे. पोंछते समय रोगग्रस्त व्यक्ति के शरीर को हवा न लगने दें, शरीर को ढका हुआ रखे.

(3). High fever होने पर सौंफ पानी में उबालकर 2-2 चम्मच बार-बार रोगी को पिलाते रहने से पुराना बुखार भी ठीक हो जाता हैं.

(4). तेज बुखार होने पर लहसुन कूटकर थोड़ा पानी मिलाकर पोटली बनाकर सुंघाए. इस आयुर्वेदिक नुस्खे का उपयोग करने से बुखार की तीव्रता कम हो जाती हैं. लहसुन का रस 6 ग्राम की मात्रा में दिन में 3 बार सुबह, दुपहर और शाम को पिलाने से बुखार का इलाज होता हैं यह बुखार भगाने का उपाय हैं.

(5). नारियल का पानी पिने से fever का तापमान कम होता हैं. यह tez bukhar में बहुत लाभदायक होता हैं.


* लू लगने पर लू लग के बुखार आना

(1). यह लू लगने से आने वाले बुखार का इलाज करता हैं. लू लगने पर पकी हुई इमली के गूदे के रोगी के हाथों की हथेलियों और पैरों के तलवों पर मलने से लू का प्रभाव मिट जाता हैं और 1 गिलास पानी में 25 ग्राम इमली को भिगोकर इसका पानी पिने से गर्मी में लू नहीं लगती (लू का बुखार).गर्मी की ऋतू में रूचि के अनुसार बार-बार पानी पिने से लू गर्मी के मौसम में चलने वाली गर्म हवा नहीं लगती हैं.दो नीबू काटकर 250 ग्राम पानी में डालकर उबाले. जब पानी आधा बाकी रह जाए तब उतारकर छान लें. इसमें 2 ग्राम सेंधा नमक सेंककर मिला लें और पि जाए, यह 1 मात्रा हैं. इस तरह प्रयोग दिन में 3 बार करे. भोजन न करे. 2-3 दिन इस तरह करते रहने से प्रत्येक का बुखार का उपचार हो जाता हैं.


* Flu Fever के लिये

(1). Flu Fever शरीर के विभिन्न अंग और हड्डियां टूटने, नजला जुकाम व फ्लू होने पर गर्म पानी में नीबू का रस पीते रहने से, इन रोगों से बचा जा सकता हैं तथा इन रोगों के हो जाने पर इस प्रयोग के करने से लाभ भी होता हैं. पानी में शहद भी मिला सकते हैं. 1 ग्लास उबलते पानी में 1 नीबू का रस व इच्छानुसार शहद डालकर रात को सोते समय पिने से जुकाम खांसी भी ठीक होती हैं.

(2). बुखार भगाने के लिए दूध में 2 पीपल अथवा चौथाई चम्मच सोंठ डालकर व उबालकर पिने से फ्लू ठीक हो जाता हैं.

* सामान्य बुखार के लिए

(1). जुकाम, खांसी व कुछ बुखार रहने पर पोदीना, 5 दाने काली मिर्च और अपने स्वाद के मुताबिक नमक डालकर चाय की भांति उबालकर रोजाना 3 बार पिने से लाभ होता हैं. यह सैंकड़ों बार का किया गया और सफल प्रयोग हैं.

(2). बुखार में मूंग की दाल का पथ्य देना उत्तम हैं. यह छिलके सहित काम में लेनी चाहिए. Bukhar होने पर मूंग की दाल में सूखे आंवले डालकर पकाये और रोजाना सुबह शाम दिन में 2 बार खाये. इसमें बुखार ठीक होगा और दस्त साफ़ आएंगे मूंग आंखों के लिए भी परम लाभकारी हैं.

(3). 1 लौंग पीसकर दिन में 3 बार गर्म पानी से सेवन करने पर सामन्य bukhar जल्दी ठीक हो जाता हैं.


* चेचक बुखार के लिए

चेचक बुखार में तुलसी के पत्तों के साथ अजवाइन पीसकर रोजाना सेवन करने से चेचक का बुखार कम हो जाता हैं. जब चेचक का संक्रमण फैल रहा हो, तो उस समय रोजाना सुबह तुलसी के पत्तों का रस पीना अत्यंत फायदेमंद होता हैं. यह चेचक की सर्वोत्तम घरेलु प्रतिरोधक औषधि हैं.


* मलेरिया बुखार के लिए

(1). बुखार उतारने के तरीके में कुटकी के बारीक़ चूर्ण को आधा ग्राम की मात्रा में बताशे में भरकर ताजे पानी से bukhar चढ़ने से पहले रोगी को खिला देने से मलेरिया, सर्दी लगकर चढ़ने वाला बुखार उतर जाता हैं. बुखार की अवस्था में गर्म पानी से दिन में 2-3 बार खिलाने से पसीना आकर बुखार उतर जाता हैं. चाहें तो कुटकी के चूर्ण में समान भाग में चीनी लेकर व पीसकर मिला लें और 2 ग्राम की मात्रा में दवा दिन में 2-3 बार ताज़ा पानी के साथ सेवन करे. इस प्रयोग से 2-3 दिन में हर तरह का मलेरिया बुखार ठीक हो जाता हैं

(2). मलेरिया बुखार में नमक, कालीमिर्च नीबू में भरकर गर्म करके चूसने से बुखार की गर्मी दूर हो जाती हैं. 2 नीबुओं का रस छिलके सहित 500 ग्राम पानी में मिलाकर मिटटी की हांडी में रात को उबालकर आधा बाकी रहने पर रख दें. फिर सुबह के समय इसे पिने से मलेरिया fever आना बंद हो जाता हैं.

(3). पानी में नीबू निचोड़कर स्वाद के मुताबिक शक्कर मिलाकर पिने से 4 दिन में मलेरिया आना बंद हो जाता हैं. मलेरिया fever उलटी वमन होने लगे, तो नीबू में नमक भरकर चूसें. नीबू और गन्ने का रस मिलाकर पिए उल्टियां बंद हो जाएंगी.

(4). अगर मलेरिया fever एक फिक्स समय पर आता हो तो लहसुन के रस का हाथ पैरों के नाखुनो पर बुखार आने से पहले लेप करे तथा 1 चम्मच लहसुन का रस 1 चम्मच तिल के तेल में मिलाकर जब तक बुखार न आये, 1-1 घंटे के अंतराल में जीभ पर डालकर चूसें. इस तरह 4 दिन का यह प्रयोग करने से मलेरिया बुखार ठीक हो जाता हैं.

(5). 60 ग्राम नीम के हरे पत्ते और 4 दाने कालीमिर्च के लेकर दोनों को पीसकर 125 ग्राम पानी में घोलकर व छानकर पिने से malaria fever बिलकुल ठीक हो जाता हैं. यह विश्वसनीय प्रयोग हैं.

(6). धनिया और सोंठ पिसे हुए आधा-आधा चम्मच मिलाकर, रोजाना 3 बार पानी के साथ सेवन करने से प्रत्येक प्रकार का सर्दी देकर आने वाला malaria fever जल्द ही आसानी से ठीक हो जाता हैं.

(7). एक चम्मच जीरा बिना भुना हुआ पीस लें. इसका तीन गुना गुड़ इसमें मिलाकर इसकी 3 गोलियां बना लें. एक निश्चित फिक्स समय पर सर्दी लग कर आने वाले मलेरिया fever के आने से पहले 1-1 घंटे के अंतराल से 1-1 गोली कुछ दिन तक रोजाना सेवन करते रहने से मलेरिया fever ठीक हो जाता हैं.

(8). तुलसी की पत्तियां 7 और 7 दाने कालीमिर्च के एक साथ मिलाकर चबाने से 5 बार में malaria bukhar जड़ से ख़त्म हो जाता हैं. दिन में 3 बार सेवन करे.

(9). फूली हुई फिटकरी के चूर्ण में 3 गुना ज्यादा पीसी हुई चीनी या खांड अच्छी तरह मिलाकर 2 ग्राम की मात्रा में 2-2 घंटे के अंतराल से गुन-गुने पानी से 3 बार सेवन करने से ही मलेरिया का जड़ से इलाज हो जाता हैं. यदि बुखार रहे तो जरूरत के मुताबिक 1-2 मात्राए और भी सेवन की जा सकती हैं. यह मलेरिया व तिजारी और चोथेया fever की रामबाण एलॉपथी की दवाओं से भी अधिक शक्तिशाली व लाभकारी दवा हैं तथा किसी भी प्रकार की खुश्की पैदा नहीं होती

(10). बरसात व सर्दी की ऋतू में यह दवाई 125 ग्राम पानी में उबालकर आधा बाकी रहने पर रोगी को पिलाये. कालीमिर्च को थोड़ा सा कूटकर पानी में डाले. 12 साल से कम उम्र वाले रोगी यानी बच्चों को चौथाई चम्मच की मात्रा में 3 तुलसी की पत्तियां और 2 नग कालीमिर्च 10 ग्राम पानी में पीसकर बच्चे की उम्र के मुताबिक खिला दें.

(11). अगर मिठास की जरूरत हो तो आप इसके कड़वे व तीखे से नुस्खे को खा नहीं सकते तो इसमें 10 ग्राम मिश्री का चूर्ण डाला जा सकता हैं. इस आयुर्वेदिक दवा को अपनी जरूरत के मुताबिक 2 से 7 दिनों तक सेवन कराये और तुलसी की पत्तियां 7, कालीमिर्च के दाने 7 और बताशे 7 या फिर मिश्री 10 ग्राम लेकर 3 कप पानी में उबाले और 1 कप पानी शेष रह जाने पर गर्म-गर्म ही पीकर बदन ढंककर 10 मिनट के लिए लेट जाए. इस प्रयोग से fever, इन्फ्लुएजला, मलेरिया, सर्दी जुकाम और हरारत शर्तिया दूर हो जाते हैं. अपनी जरूरत के मुताबिक दिन में 2 बार सुबह और रात को सोते समय 2-3 दिन तक प्रयोग करे.

* अन्य बुखार भगाने के उपाय इलाज के लिए

(1). गर्मी की ऋतू में तुलसी की 11 पत्तियां और दाने काली मिर्च लेकर 60 ग्राम पानी में रगड़कर सुबह शाम दिन में 2 बार रोगी को पिलाये.

(2). कम्प वाले बुखार में यह दवा अगर बुखार आने से एक घंटे पहले दें, तो अधिक उत्तम हैं. वैसे दवा सेवन कराते समय बुखार हो या न हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता हैं.

नोट : गर्भवती महिलाओं को यह घरेलु उपाय न दें

(3). बुखार उतारने के तरीके में 10 ग्राम अजवाइन मिटटी के कोरे बर्तन में 500 ग्राम पानी में भिगों दें और उस बर्तन को दिन के समय छाया वाली जगह में और रात के समय में खुली जगह ओस में रख दें. दूसरे दिन उसका निथरा हुआ पानी रोगी को पीला दें. इस तरह इस अजवाइन के पानी के सेवन से कुछ ही दिनों में कफ ज्वर पूरी तरह से ख़त्म हो जायेगा. इसके अलावा इस प्रयोग से पुरानी कब्ज, पसली की सूजन, जिगर व अमाशय के कफ विकार और पेशाब का पीलापन आदि शिकायते भी दूर हो जाती हैं. बुखार उतारने के लिए यह बहुत अच्छा तरीका है.

(4). खांसी, श्वास और बुखार में नीबू में नमक, कालीमिर्च और शक्कर भरकर गर्म करके चूसने से लाभ होता हैं.

(5). प्लेग, गर्मी का बुखार, पीलिया में रोगग्रस्त व्यक्ति को इमली का पानी पिलाना फायदेमंद होता हैं.

(6). खीरा खाने से कब्ज, पीलिया, बुखार, शरीर में जलन होना, गर्मी के सारे दोष और चर्म रोगों में रामबाण लाभ होता हैं.टिंडा हलके bukhar को ठीक कर देता हैंपरवल पुराने बुखार में बहुत फायदेमंद होते हैंमेथी Bukhar को दूर करती हैं4 लौंग पीसकर पानी में घोलकर पिने से तेज पित्त बुखार कम हो जाता हैं.

(7). खसरा निकलने पर 2 लौंग को घिसकर शहद के साथ लेने से खसरा ठीक हो जाता हैं. यह सैंकड़ों बार प्रयोग में लाया गया नुस्खा हैं, इसके परिणाम हमेशा सफल रहे हैं.

(8). अगर Bukhar में जम्हाइयां या उबासियां आती हो, शरीर में दर्द हो, दुर्बलता और कंपन हो तो सुबह शाम 20 नग कालीमिर्च कूटकर 1 ग्लास पानी में उबाले. चौथाई पानी बाकी रह जाने पर सुहाता-सुहाता गर्म पिलाये. इससे बुखार उतर जाएगा और 5 कालीमिर्च 5 तुलसी के पत्ते, 1 लौंग, 1 इलाइची और जरा सा अदरक लेकर सबको चाय के साथ उबालकर रोजाना दिन में 3 बार पिने से कफ वाला बुखार ठीक हो जाता हैं.

(9). धनिया की गिरी से बुखार उतरता है. गर्मी के बुखार में धनिये की गिरी का सेवन करना परम लाभकारी होता हैं.

(10). वात बुखार (Rheumatic Fever remedy) में सूजन वाली जगह पर नमक या बालू मिटटी की पोटली से सेंक करना लाभदायक होता हैं. बुखार उतारने के लिए यह बहुत अच्छा तरीका है.

(11). जिन रोगों में ठोस भोजन देना हानिकारक होता है, वहां जौ का पानी barley water अच्छा शामक पेय है. बुखार, सूजन, पेशाब में जलन होने पर यह अत्यंत लाभकारी होता हैं. एक कप जौ 1 किलो पानी में उबालकर ठंडा करके बार-बार पीना चाहिए.

(12). जीर्ण बुखार हो गया हो और साथ ही ऐसी खांसी भी हो जिससे छाती में दर्द हो तो तुलसी के पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर पिने से लाभ होता हैं

(13). सिर दर्द, बुखार और दाद में तुलसी के पत्तों का रस रोजाना 12 ग्राम की मात्रा में पीना लाभदायक होता हैं.


जानिए वायरल बुखार से जुड़ी जरूरी बातें



वायरल बुखार हवा और पानी से फैलने वाला वायरल इन्फेक्शन है। बरसात के समय में इसके बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है ऐसे में इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातों के बारे में जनना जरूरी है। तो चलो दोस्तो जानते है इस के बारे मे ।

वायरल बुखार हवा और पानी से फैलने वाला वायरल इन्फेक्शन है। जब हम सांस लेते हैं तो हवा में फैले इन्फेक्टेड बैक्टीरिया हमारे शरीर के अंदर चले जाते हैं। अगर आपका बुखार 104 डिग्री तक पहुंच जाए तो आपको जरुर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। वायरल के लक्षणों को पहचानना मुश्किल होता है कि यह मामूली बैक्टीरियल इन्फेक्शन है या वायरल बुखार, क्योंकि यह दोनों लगभग एक जैसे होते हैं। जब तक आपको पता नहीं होगा कि आपके शरीर में दिख रहे लक्षण किस ओर इशारा कर रहे हैं तब तक इनका इलाज करना मुश्किल होता है। इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या हैं वायरल बुखार के लक्षण और उसका घरेलू उपाय।

* वायरल बुखार के लक्षण-

– अगर बुखार के साथ बहुत ज्यादा थकान हो रही है तो यह वायरल बुखार का बड़ा लक्षण है।

– सिर में दर्द, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द, खांसी-जुकाम आदि हो रहा है बुखार के साथ तो जल्द डॉक्टर को दिखाएं।

– आंखों में दर्द, जलन और आंखें अगर लाल हो रही हों तो यह भी वायरल बुखार के लक्षण होते हैं।

– उलटी और डायरिया का होना भी वायरल बुखार के लक्षण हैं. साथ ही यह आपके शरीर को कमजोर बना देते हैं।


* वायरल बुखार ठीक करने के घरेलू लक्षण-

धनिया की चाय- यह कई तरह के वायरल इन्फेक्शन को खत्म करने में मदद करता है। वायरल के बुखार में भी धनिया के सेवन करके वायरल से जल्द छुटकारा पा सकते हैं।
नींबू और शहद- यह भी बुखार के असर को कम करते हैं। दोनों को एक साथ मिक्स करके इनका सेवन करने से जल्द बुखार कम होना शुरू कर देगा।


लहसुन- इसके अनेक फायदे होते हैं।

 लहसुन में ऐसे तत्व होते हैं जो वायरल के असर को कम कर देते हैं। इसके लिए 3 से 4 लहसुन के टुकड़ों को गर्म पानी में उबालें। ठंडा होने पर पानी पी लें और साथ ही उन लहसुन के टुकड़ों को भी खाएं।

अदरक- यह शरीर और जोड़ों के दर्द में लाभदायक होती हैं। वायरल बुखार में होने वाले दर्द में ये आपकी मदद करेगी। इसके लिए अदरक के पेस्ट में थोडा शहद मिलाकर थोड़ी-थोड़ी देर में लेने से ये वायरल के असर को कम करता है और 

दर्द भी कम करता है।

मेथी का पानी- मेथी वायरल बुखार को रोकती है। इसके लिए मेथी के दानों को एक ग्लास पानी में दाल कर रात भर के लिए छोड़ दें और सुबह इस पानी को छानकर रख लें। इस पानी का सेवन हर 2 घंटे में करते रहना लाभदायक होता है।


शिशुओं और बच्चों में बुखार

शिशु को तेज बुखार है। क्या यह चिंता की बात है?बच्चे को बुखार होने की क्या वजह हो सकती है? मुझे कैसे पता चलेगा कि शिशु को बुखार है? बच्चे का बुखार  ठीक करने के लिए मैं क्या कर सकत हूं? मुझे कैसे पता चलेगा कि शिशु का बुखार गंभीर है? बुखारी दौरे (फेब्राइल कनवल्जन) क्या होते हैं?

*शिशु को तेज बुखार है। क्या यह चिंता की बात है?

यह आपके शिशु की उम्र पर निर्भर करता है। यदि शिशु छह महीने से कम उम्र का है तो बुखार होना चिंताजनक हो सकता है। 

नन्हें शिशुओं को तेज बुखार होना असामान्य है, और यदि तेज बुखार हो, तो यह इस बात की चेतावनी है कि कुछ गड़बड़ जरुर है।

शिशु को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं, यदि वह: 

तीन महीने से कम उम्र का है और उसे 100.4 डिग्री 

फेहरनहाइट या इससे ज्यादा बुखार हो। 

तीन से छह महीने की उम्र का है और उसका तापमान 102.2 डिग्री फेहरनहाइट या इससे ज्यादा हो।मगर यदि आपका शिशु छह महीने से बड़ा है, तो आप उसकी स्वास्थ्य स्थिति का अंदाजा हमेशा उसके बढ़े हुए तापमान से नहीं लगा सकती हैं। आमतौर पर बुखार का कोर्स पूरा होने देना ठीक रहता है और कई बुखार बहुत जल्द और अपने आप ठीक हो जाते हैं।

इस उम्र में, यदि आपके शिशु को बुखार हो मगर वह इससे प्रभावित न लग रहा हो हो सामान्य ढंग से खेल और दूध पी रहा हो तो आपको चिंता करने की जरुरत नहीं है। मगर, फिर भी आपको उसपर नजर रखनी पड़ेगी कि वह पहले से बेहतर महसूस कर रहा है या नहीं। साथ ही अन्य चिंताजनक संकेतों जैसे कि सांस लेने में परेशानी, भूख कम लगना, उनींदा होना या आसपास की चीजों में रुचि न दिखाना आदि पर ध्यान दें। 

अतिरिक्त सलाह के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से बात करें। उदाहरण के तौर पर शिशु का बुखार यदि 104 डिग्री पहुंच जाए तो डॉक्टर आपको तुरंत आने के लिए कह सकते हैं। या फिर 24 घंटों के बाद भी बुखार बना रहे, फिर चाहे अन्य लक्षण हो या नहीं।

बुखार के इन सात आश्चर्यजनक तथ्यों के बारे में भी जानकारी रखें और अपनी अंत:प्रेरणा (इंस्टिंक्ट) पर विश्वास करें। शिशु की उम्र चाहे कितनी भी हो, अगर आपको लगे कि शिशु की तबियत ठीक नहीं है, तो हो सकता है आप सही हों। शिशु के उपचार के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें।
*बच्चे को बुखार होने की क्या वजह हो सकती है?
आपके शिशु को बुखार इसलिए है क्योंकि उसका शरीर किसी इनफेक्शन या बीमारी से लड़ रहा है। शरीर का बढ़ा हुआ तापमान शिशु की प्रतिरक्षण प्रणाली की इनफेक्शन से लड़ने में मदद करता है।ऐसे ही ओर अछे articles के लिए जुड़े रहे ( https://normaladvices.blogspot.com ) से।

कई बार बुखार होने के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चलता, 

मगर कुछ आम कारण नीचे दिए गए हैं:

श्वसन पथ संक्रमण (रेस्पिरेटरी ट्रेक्ट इनफेक्शन-आरटीआई)। नाक, गले, वायुमार्ग और फेफड़ों के किसी भी इनफेक्शन को आरटीआई कहा जाता है। आरटीआई में ब्रोंकियोलाइटिस, क्रूप और काली खांसी शामिल है। क्रूप और काली खांसी में बुखार आमतौर पर खांसी होने से पहले होता है।

शिशुओं और बच्चों में कान का इनफेक्शन शिशुओं और बच्चों में कान का इनफेक्शन विषाणु जनित इनफेक्शन जिनमें चकत्ते होते हैं, जैसे कि छोटी माता (चिकनपॉक्स) या लाल खसरा (रास्योला)।

टॉन्सिलाइटिस जो कि गलतुण्डिका (टॉन्सिल) में सूजन होना है। यह आमतौर पर विषाणुजनित इनफेक्शन होता है, मगर कभी कभार यह जीवाणु जनित संक्रमण की वजह से भी हो सकता है।

गुर्दे या शिशुओं में मूत्रमार्ग संक्रमणपेट का इनफेक्शन (गैस्ट्रोएंटेराइटिस)

जीवाणुजनित इनफेक्शन जैसे कि टाइफाइड।
मच्छरजनित बीमारियां।

तापघात (हीट स्ट्रोक)शिशुओं को अक्सर टीकाकरण के बाद भी बुखार हो जाता है। डॉक्टर आपको बताएंगे कि टीकाकरण के बाद किन लक्षणों के लिए शिशु पर नजर रखनी चाहिए। 

आपने यह सुना होगा कि शिशु के दांत निकलने पर भी उसे बुखार हो सकता है। बहरहाल, दांत निकलने से शिशु को परेशानी जरुर हो सकती है, मगर इसकी वजह से बुखार या पेट में गड़बड़ी नहीं होती।

*कैसे पता चलेगा कि शिशु को बुखार है?

आमतौर पर आप शिशु को छूकर ही यह पता लगा सकते हैं कि उसे बुखार है। उसकी त्वचा सामान्य से काफी गर्म महसूस होगी। आप उसका माथा छूकर देख सकती हैं, और यदि शिशु तीन महीने से कम उम्र का है, तो उसकी छाती या पीठ छूकर पता लगा सकती हैं। हो सकता है आपके शिशु के गाल लाल हों और वह काफी चिपचिपा या पसीने में तर लगे।

यदि आपको लगे कि शिशु को बुखार है तो बेहतर है कि सही रीडिंग के लिए थर्मोमीटर से उसका तापमान मापें। शरीर का सामान्य तापमान 96.8 डिग्री फेहरनहाइट और 98.6 डिग्री फेहरनहाइट के बीच होता है। मगर यह हर बच्चे के अनुसार एक डिग्री के कुछ प्वाइंट ऊपर-नीचे हो सकता है। अगर तापमान शिशु के लिए सामान्य से ज्यादा हो, तो वह बुखार है।
बुखार मापने के लिए आपको कोई महंगा थर्मोमीटर खरीदने की जरुरत नहीं है। अधिकांश थर्मोमीटर इस्तेमाल में आसान होते हैं और इनमें प्रयोग के स्पष्ट निर्देश दिए होते हैं।

डिजिटल थर्मोमीटर घर में इस्तेमाल के लिए शायद सबसे बेहतर होते हैं। इसे शिशु की बगल में लगाकर बाजू नीचे कर दें। माप ले लेने के बाद बीप की आवाज करते हैं।

कान में लगाने वाले थर्मोमीटर काफी सटीक परिणाम देते हैं, और इस्तेमाल में केवल एक सैकंड लगता है, मगर ये काफी महंगे होते हैं। साथ ही इनका सही ढंग से इस्तेमाल कर पाना भी मुश्किल होता है क्योंकि शिशु हिलते-डुलते रहते हैं और उनका कान का छेद छोटा होता है।

स्ट्रिप-टाइप थर्मोमीटर इतना सटीक परिणाम नहीं दे पाते क्योंकि ये केवल शिशु की त्वचा का तापमान दर्शाते हैं, उसके शरीर का नहीं। इसलिए बेहतर यही है कि स्ट्रिप-टाइप थर्मोमीटर का इस्तेमाल न किया जाए।

विभिन्न तरह के थर्मोमीटर और उनके फायदे व नकुसानों के बारे में हमारा यह स्लाइडशो देखें।

*बच्चे का बुखार ठीक करने के लिए मैं क्या कर सकते है।
शिशु को आराम पहुंचाने के लिए आप नीचे दिए गए उपायों को अपना सकती हैं:

अपने शिशु को खूब सारा तरल पदार्थ पीने के लिए दें, ताकि वह जलनियोजित (हाइड्रेटेड) रह सके। यदि वह अनन्य ​स्तनपान (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) करता है, तो उसे अतिरिक्त स्तनपानकरवाएं। यदि वह फॉर्मूला दूध पीता है, तो उसे उबालकर ठंडा किया गया पानी भी पिलाएं। 

अगर आपके शिशु ने ठोस आहार खाना शुरु कर दिया है, तो यदि बुखार के पहले दिन वह खाना न खाना चाहे तो चिंता न करें। पहले दिन के बाद उसे छोटे-मोटे स्नैक्स देती रहें ताकि उसका ऊर्जा का स्तर बना रहे।

बीमार होने पर आपका शिशु आराम करना चाहेगा, ​इसलिए उसे रिलैक्स करने या झपकी लेने में मदद करें। उसे कहानी पढ़कर सुनाएं और लेटे हुए छोटे-मोटे खेल खिला सकती हैं।  
शिशु को ऐसे कपड़े पहनाए जिनमें वह सबसे ज्यादा आरामदायक रहे, उसके सिर को न ढकें। बहुत ज्यादा कपड़े पहनाकर उसके शरीर में गर्मी न बढ़ाएं। रजाई और दौहर की बजा चादर और हल्के कंबल ज्यादा सही रहते हैं और जरुरत के अनुसार आप इन्हें हटा भी सकती हैं। 

बुखार कम करने के लिए शिशु का मुंह, गर्दन, बाजुएं और टांगों को हल्के गुनगुने पानी से पौंछें।

*रात में समय-समय पर शिशु की जांच करती रहें।
बेहतर महसूस होने तक शिशु को क्रेच या डेकेयर न भेजें।शिशु यदि असहज या परेशान हो तो डॉक्टर अधिकांश मामलों में शिशुओं को इन्फेंट पैरासिटामोल देने की सलाह देते हैं। मगर शिशु को किसी भी तरह की कोई दवाई देने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह करें। साथ ही आप डॉक्टर को दिखाएं बिना दवा देकर अन्य लक्षणों को दबाना नहीं चाहेंगी।

खुराक को लेकर शिशु के डॉक्टर की सलाह का पालन करें। सही खुराक बच्चे के वजन के अनुसार निर्धारित होती है न कि उसकी उम्र के अनुसार। डॉक्टर आपको सही खुराक की गणना करने में मदद करेंगे।

सही मात्रा में खुराक देने के लिए शिशु को दवा के साथ आने वाले माप कप का इस्तेमाल करें। साथ ही, लिखकर रख लें कि शिशु को दवाई कब दी थी ताकि आप बुखार कम करने की दवा निर्देशित मात्रा से अधिक न दे दें।

आपने शायद पैरासिटामोल और​ शिशुओं में सांस फूलने या अस्थमा की समस्या होने के बीच संबंध के बारे में सुना होगा। मगर, चिंता न करें, इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि पैरासिटामोल से ये समस्याएं होती हैं। यदि डॉक्टर की सलाह के अनुसार शिशु को सही खुराक दी जाए तो पैरासिटामोल सुरक्षित है।

यदि आपके शिशु को डेंगू जैसी बीमारी है या फिर डॉक्टर को लगता है कि उसके लक्षणों की वजह डेंगू हो सकता है तो वे आपको शिशु को आईबूप्रोफेन या मेफ्टाल न देने की सलाह देंगे। ये उसके खून में से प्लेटलेट्स कम कर सकते हैं और रक्तस्त्राव का खतरा बढ़ सकता है।

आपको बच्चे को कभी भी एस्पिरिन नहीं देनी चाहिए। एस्पिरिन को रेज सिंड्रोम के साथ जोड़ा जाता है, यह एक दुर्लभ मगर गंभीर और कभी-कभार जानलेवा स्थिति हो सकती है।

*कैसे पता चलेगा कि शिशु का बुखार गंभीर है?
अगर शिशु को बुखार के साथ-साथ कुछ अन्य लक्षण भी दिखाई दे रहे हों, तो ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। 

इन लक्षणों पर ध्यान दें:

आपके शिशु की उम्र दो महीने से कम है और वह दूध नहीं पी रहा। इसमें स्तनपान और बोतल से दूध पिलाना दोनों शामिल हैं।

आपका शिशु विशेषरूप से काफी उनींदा या सुस्त लगे।
शिशु हांफ रहा है, सांस लेते समय घरघराहट की आवाज आ रही है या उसे सांस लेने में इतनी मुश्किल हो रही है कि उसका पेट पसलियों में धंस रहा है।

आपके शिशु के सिर पर नरम स्थान यानि कलांतराल धंसे हुए है और साथ में अन्य लक्षण जैसे कि सूखे होंठ, आंसू न आना, सामान्य से कम लंगोट गीली करना आदि। ये सभी शरीर में पानी की कमी के लक्षण हो सकते हैं।

शिशु को बिना किसी कारण चकत्ते हो रहे हैं या त्वचा धब्बेदार हो गई है।यदि शिशु को सांस लेने में दिक्कत हो रही हो या आपको लगे कि उसे कोई गंभीर इनफेक्शन हो गया है, तो उसे सीधे नजदीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में ले जाएं। कुछ संक्रमणों को उपचार न किया जाए तो वे जानलेवा हो सकते हैं, हालांकि ऐसा होना दुर्लभ है। 

ऐसे संक्रमणों में शामिल हैं:

मेनिंजाइटिस, यह मस्तिष्क और मेरु रज्जु के आसपास की झिल्लियों में होने वाला इनफेक्शन है।

बच्चों में वायरल बुखार: लक्षण और कारण



बच्चों में वायरल बुखार: लक्षण और कारण

वायरल संक्रमण हर उम्र के लोगों में एक आम बात है। मगर बच्चों में यह जायद देखने को मिलता है। हालाँकि बच्चों में पाए जाने वाले अधिकतर संक्रामक बीमारियां चिंताजनक नहीं हैं मगर कुछ गंभीर संक्रामक बीमारियां भी हैं जो चिंता का विषय है।

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से आजकल पूरे वातावरण में अचानक से बदलाव हो रहें हैं और इसके साथ ही साथ पूरा वातावरण भी प्रदूषित है। 

खाने पीने की चीजों में भी अशुद्धि और मिलावट है , जिससे हमारे बच्चों की शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता घटती ही जा रही है

एक छोटा सा नाज़ुक बच्चा इन सारे परिवर्तन को एक साथ सहन नहीं कर पाता है जिसके फलस्वरूप वह बीमार पड़ जाता है

यह बीमारियां भी विभिन्न प्रकार की होती हैं जो बच्चे को पूरी तरह से अपने प्रभाव में ले लेती हैं। इन्ही बीमारियों में वायरल बुखार भी एक बीमारी है।

* इस लेख में आप सीखेंगे

बच्चों में वायरल बुखार बच्चों में वायरल बुखार क्यों होता हैवायरल बुखार क्या है बच्चों में वायरल बुखार कितनी दिन रहता ह बच्चों में वायरल बुखार होने पर तापमान को कैसे निचे लाएं सावधानिया ंबच्चों में वायरल बुखार के लक्षणबच्चों में वायरल बुखार कारण क्या वायरल बुखार से दूसरों को संक्रमण फैलता है बच्चों में वायरल बुखार का घरेलू उपचार बच्चों में किन कारणों से बुखार होता है जानिए इस वीडियो के द्वारा

* बच्चों में वायरल बुखार

वायरल संक्रमण  हर उम्र के लोगों में एक आम बात है। मगर बच्चों में यह जायद देखने को मिलता है। हालाँकि बच्चों में पाए जाने वाले अधिकतर संक्रामक बीमारियां चिंताजनक नहीं हैं इनमें से कुछ आम संक्रामक बीमारियां है सर्दी खांसी, झुकाम, उलटी, दस्त और भुखार। इनके आलावा कुछ गंभीर संक्रामक बीमारियां  भी हैं जो चिंता का विषय है।

 जैसे - चेचक (missiles), जो  वैक्सीन के कारण अब उतना नहीं देखने को मिलता है

अधिकतर संक्रामक बीमारियां इसलिए भी चिंता का विषय नहीं हैं क्योँकि वे समय के साथ अपने आप ही ठीक हो जाएंगी। बहुत सी संक्रामक बीमारियां इतनी अलग हैं की उनके डायग्नोसिस के लिए किसी टेस्ट की जरुरत ही नहीं है। उनके लक्षण ही काफी हैं उनकी पहचान के लिए।  

 * बच्चों में वायरल बुखार क्यों होता है

हर बच्चा कभी ना कभी बीमार पड़ता ही रहता है। वो इसलिए क्यूंकि उसके शरीर में बिमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक छमता पूरी तरह से डेवेलोप नहीं हुई है। इसके आलावा उन्हें ये नहीं पता होता की गन्दगी क्या होती है। वे जमीन पर पड़ी कुछ भी गन्दी वस्तु मुँह में डाल लेते हैं जिससे संक्रमण उनके शरीर में प्रवेश कर जाता है। हमें गन्दी वस्तुओं को, जिनसे संक्रमण का खतरा हो, बच्चों के पहुँच से दूर रखना चाहिए। बीमारी से बचाव ही सबसे बेहतरीन इलाज है।

* वायरल बुखार क्या है

वायरल बुखार एक एक्यूट वायरल संक्रमण है। इसमें संक्रमित विषाणु शरीर में तेजी से फैलते हैं और कुछ ही दिनों में पूरी तरह खत्म भी हो जाते हैं। 

वायरल होने पर रोगी का तांत्रिक तंत्र भी प्रभावित हो सकता है। शिशुओं के लिए वायरल और अधिक कष्टदायी होता है। इससे वे पीले तथा सुस्त पड़ जाते हैं। उन्हें श्वसन तथा स्तनपान में कठिनाई के साथ ही उल्टी-दस्त भी हो सकते हैं। 

इसके अलावा शिशुओं में निमोनिया, कंठशोथ और कर्णशोथ जैसी जटिलताएँ भी पैदा हो जाती हैं। किसी अन्य रोग के साथ मिलकर वायरल बुखार रोगी की हालत को और भी खराब कर देता है। उदाहरण के लिए यदि खाँसी के रोगी बच्चे को वायरल हो जाए तो उसका तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित हो सकता है।

* बच्चों में वायरल बुखार कितनी दिन रहता है

संक्रमण कई तरह के होते हैं। हर बीमारी की अवधि अलग अलग होती है। वायरल बुखार कम से कम तीन दिन और अधिक से अधिक दो सप्ताह तक रह सकता है। वायरल बुखार को किसी दवा से या एंटीबायोटिक से ठीक नहीं किया जा सकता है। परन्तु वायरल बुखार के दौरान बच्चों की प्रतिरोधक छमता बहुत घाट जाती है, जिस कारण ये जरुरी होता है की उनको सावधानी के तौर पे, डॉक्टर की सलाह पर दवाई दिया जाये। परन्तु बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण हुई बीमारी को एंटीबायोटिक के द्वारा ठीक किया जा सकता है। 

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* बच्चों में वायरल बुखार होने पर तापमान को कैसे निचे लाएं
बच्चों में वायरल बुखार होने पर तापमान को बिना किसी दवा के मदद के भी निचे लाया जा सकता है। परन्तु इस का मतलब यह नहीं की बीमारी का इलाज हो गया। बुखार में तापमान इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करता है। मगर तापमान बहुत जयादा हो जाये तो बच्चों के शरीर पर इसका बुरा आसार भी हो सकता है। इससे डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। इस परिस्थिति में तापमान की निचे लाना जरुरी हो जाता है। 

* बिना किसी दवा के, घरेलू उपचार के द्वारा भी तापमान को निचे लाया जा सकता है

बच्चा जब बिस्तर पे आराम कर रहा हो तो उसके माथे पे ठंडा भीगा कपडा रखें भीगे कपडे से बच्चे के शरीर को पोंछें। बच्चे के शरीर के तापमान को निचे लाने का यह एक कारगर तरीका है आपने बच्चे को तरल खाना खाने को दें कमरे का पंखा चला दें बच्चे को कम और आराम दायक कपडा पहनाएं। इससे बच्चे के शरीर का तापमान आसानी से निकल जायेगा। मगर यदि आप का बच्चा ठण्ड से काँप रहा हो तो उसे पतला कम्बल उड़ा दें। बच्चे को कमरे ठण्ड जगह में रखें। अपने बच्चे को बहार ना जाने दें। 

*सावधानियां

अगर आप के बच्चे का तापमान किसी भी वक़्त 100.4 या फिर इससे अधिक पहुँच जाये तो आप को तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। ये एक मेडिकल एमर्जेन्सी (medical emergency) है। अगर आप का बच्चा 3 महीने से कम उम्र का है तो डॉक्टर को यह बात आवश्य बताएं

* बच्चों में वायरल बुखार के लक्षण

बच्चे के पूरे शरीर में अत्यधिक दर्द होता है।गले में खराश और खाँसी आना।मिचली और उलटी होना।नाक से लगातार पानी बहना।सिर में दर्द होना।आँखें लाल- लाल हो जाना और उसमें जलन का एहसास होना।त्वचा पर धब्बे।मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना।सामान्य रूप से कमज़ोरी होना।बच्चे को अत्यधिक ठण्ड लगने लगती है।अत्यधिक दस्त होना।शरीर का तापमान 100 से 103 डिग्री हो जाता है।तीन हफ़्तों से अधिक खाँसी आना।मल में खून आना।हाथ - पैर में सूजन।दौरे पड़ना।छींक आना।

* बच्चों में वायरल बुखार कारण

प्रदूषित जल और भोजन का सेवन।वायु द्वारा उत्पन्न सूक्ष्म कणों का भीतर जाना।वायरल बुखार बहुत तेजी से एक इंसान से दूसरे इंसान तक संक्रमित होता है जिससे यह बुखार एक साथ कई लोगों को हो जाता है।बच्चे को होने वाला फीवर लापरवाही करने पर खतरनाक रूप लेकर वायरल फीवर में परिवर्तित हो जाता है।मौसम में आये बदलाव की वजह से यह बुखार होता है।वायरल बुखार इम्युनिटी सिस्टम ( प्रतिरोधक क्षमता ) के कमजोर होने की वजह से होता है।अत्यधिक थकान  होना।

* क्या वायरल बुखार से दूसरों को संक्रमण फैलता है -

बुखार कम हो या ज्यादा हो, अगर आप के बच्चे को बुखार है तो उसे घर में ही रखें। बुखार किसी भी तरह का हो, वह संक्रामक है। आपके बीमार बच्चे के द्वारा दूसरे बच्चों को भी संक्रमण लग सकता है। 

* बच्चों में वायरल बुखार का घरेलू उपचार

एक लीटर पानी में ताजे तुलसी के पत्तों के साथ लौंग को उबालें। इतना उबालें की पानी घट कर आधा हो जाये। जब पानी ठंडा हो जाये तो इसे दिन में तीन बार पिने तो दें। जैतून और लहसुन दोनों ही बुखार के लिए बहुत अच्छी दवा है। दो कच्चे लहसुन को क्रश कर के दो बड़े चमच जैतून के तेल में मिला लें। सोने से पहले इस मिश्रण को बच्चे के पैर के तलवे पे लगा दें। एक छोटा अदरक लें। उसे छील कर और क्रश करके एक कप पानी में कुछ देर उबालें। इसमें शहद में मिला दें और दिन में दो से तीन बार पियें। 

अगर आपके बच्चे में उपर्युक्त लक्षण दिखाई पड़ते हैं तो आप उसका पहले घरेलू इलाज करें और आराम न मिलने पर तुरंत डॉक्टर के पास ले जा कर उसका चेक अप करवाएं।

आखिर रात को बुखार क्‍यों हो जाता है तेज

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रात में तेज बुखार

रात में तेज बुखार आना और दिन में एक दम से उतर जाना, इस तरह के लक्षण को अक्‍सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि रात में तेज बुखार होना किसी बीमारी का संकेत हो सकता है और आगे चलकर बहुत घातक साबित हो सकता है। साथ रात की नींद खराब होती है और अगले दिन थकान महसूस होती है। अगर आपके शरीर में बुखार के कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे है लेकिन सिर्फ रात में तेज बुखार आता है तो अपने डॉक्‍टर से जरूर संपर्क करें। आइए जानें किन कारणों से रात को बुखार तेज होने लगता है।

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स्किन इंफेक्‍शन

किसी भी तरह के इंफेक्‍शन में शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। इसी तरह के इंफेक्‍शन में स्किन इंफेक्‍शन भी शामिल है। अगर आपको स्किन इंफेक्‍शन है तो आपको रात में तेज बुखार आ सकता है। ऐसे में आपको डॉक्‍टर से अपनी जांच जल्‍द से जल्‍द करवानी चाहिए।

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यूरिनरी ट्रेक्‍ट इंफेक्‍शन

यूरिनरी ट्रेक्‍ट इंफेक्‍शन यानी यू टी आई में भी आपको रात के समय तेज बुखार हो सकता है। बुखार के साथ यूरीन करते समय जलन और दर्द भी होता है। इस समस्‍या में लापरवाही किये बिना तुरंत अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें।

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सूजन

किसी भी तरह की बीमारी और एलर्जी से शरीर में सूजन हो सकती है और इससे आपको बुखार भी आ सकता है। अगर यह स्थिति ज्‍यादा दिनों तक बनी रहती है तो अपने डॉक्‍टर से तुरंत संपर्क करें।

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श्वसन तंत्र में संक्रमण

बुखार आने के यह सबसे सामान्‍य कारणों में से एक है। आम सर्दी, भोजन नली, गले और ब्रांकाई में संक्रमण के कारण भी बुखार आने लगता है। आमतौर पर यह समस्‍या कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन तंत्र में संक्रमण को ठीक होने में थोड़ा समय लग सकता है।

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एलर्जी

रात में बुखार के आने के पीछे 7 मुख्‍य कारणों में से एक कारण किसी भी प्रकार की एलर्जी भी है। एलर्जी के कारण आपको रात में बुखार के साथ-साथ शरीर में लालिमा और सूजन की समस्‍या भी हो सकती है। इससे पहले की यह समय के साथ और खराब हो तुंरत अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें।

बार-बार ऐसा बुखार आना जल्दी बूढ़ा कर देता है आपको, रहें बचकर



बीमारी बड़ी हो या छोटी, कुछ समय के लिए वह आपको कमजोर कर देती है लेकिन खुद की थोड़ी सी देखभाल, आराम और खानपान में सुधार के साथ आप सामान्य हो जाते हैं। पर कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो ठीक भले ही हो जाएं लेकिन अपना असर वो जीवन भर के लिए छोड़ जाती हैं। 

इन्हीं कुछ बीमारियों में एक है बुखार का आना।

बुखार आना कोई बड़ी बात नहीं है और थोड़े समय में ठीक होकर अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस भी लौट सकते हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि एक खास लक्षण के साथ आया बुखार आपको उम्र से पहले बूढ़ा बना सकता है।
शायद आपको पता ना हो लेकिन सामान्य तेज बुखार रोगाणुओं से मुक्त होने का शरीर का तरीका होता है। शरीर का तापमान तेज होने पर इसमें भी आपको तेज बदन और सिर दर्द हो सकता है। एक समय अंतराल पूरा करने के बाद आप स्वत: ही ठीक हो जाते हैं और नॉर्मल लाइफ में वापस भी आ जाते हैं। लेकिन अगर यही दर्द हल्के बुखार के साथ हो और ठीक ना हो या थोड़े-थोड़े समय के बाद आपको बार-बार परेशान करता हो तो समझ लें कि आपका शरीर तेजी से बूढ़ा हो रहा है।

इसका अर्थ यह है कि आपका शरीर रोगाणुओं से लड़ने में सक्षम नहीं है और आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कम है। इसलिए ऐसा होना आपके शरीर की थकान बढ़ा देता है, आपका शरीर हर प्रकार से फिर शिथिल पड़ने लगता है। इससे जहां आपको हर समय थकान महसूस होगी, आपकी हड्डियां भी धीरे-धीर कमजोर होने लगती हैं। शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी होने लगती है, अपनी ऊर्जा और त्वचा की चमक भी आप खोने लगते हैं।

कुल मिलकार कहें तो आपका शरीर बहुत तेजी से बूढ़ा हो रहा होता है जिसे आप समझ नहीं पाते। इस प्रकार बहुत जल्द ही आप अन्य बीमारियों के शिकार भी जाते हैं और समय से पहले ही आपकी त्वचा पर भी उम्र का असर दिखने लगता है।


इसलिए अगर 100 या 99 डिग्री बुखार आपको अक्सर रहता हो और इसके साथ ही बॉडी में भी बहुत अधिक दर्द रहे तो इसे नजरअंदाज ना करें। तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।


हर तरह के बुखार की रामबाण औ‍षधि है 'गिलोय'

पान के पत्‍तों की तरह दिखने वाले गिलोय के पत्‍ते एक तरह की बेल है। गिलोय के सेवन से हमारी इम्‍यूनिटी स्‍ट्रॉग होती है और शरीर बीमारियां से बचा रहता है। आयुर्वेद में तो गिलोय को बुखार की एक महान औषधि के रूप में माना गया है। पान के आकार के होने के कारण गिलोय की पत्तियों को आसानी से पहचाना जा सकता है। 

गिलोय के बारे में आपने कभी न कभी किसी से जरूर सुना होगा। यहां तक कि हमारी मां और दादी तो पुराने बुखार या डेंगू जैसी गंभीर मामले में इसे लेने की सलाह देती है। जी हां गिलोय सबसे प्रभावी आयुर्वेदिक दवाओं में से एक है। यह इतनी गुणकारी होती है कि प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे अमृता के रूप में जाना जाता है, इस बारहमासी जड़ी-बूटी को लगाना और इस्‍तेमाल करना बहुत ही आसान है।

गिलोय को चिकनगुनिया, डेंगू या नॉर्मल सभी तरह के बुखार की रामबाण औषधि माना जाता है। क्‍या सच में ऐसा होता है, यह जानने के लिए हमने शालीमार बाग स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल की डायटिशियन सिमरन सैनी से बात की। उनके अनुसार गिलोय या गुदुची एक जड़ी बूटी है जिससे आप प्राकृतिक रूप से कई रोगों का इलाज कर सकते हैं।

* गिलोय के पोषक तत्‍व

डायटिशियन सिमरन के अनुसार, गिलोय एंटीऑक्‍सीडेंट से भरपूर होता है जो हमारी फ्री रेडिकल्‍स से रक्षा करता है और इम्‍यूनिटी को बढ़ाता है।यह शरीर को ठंडा रखता है जिससे बुखार कम करने में मदद मिलती है। साथ ही क्रोनिक फीवर जैसे डेंगू और चिकनगुनिया के लिए भी प्रभावी है।गिलोय का सेवन वाइट ब्‍लड सेल्‍स को रेगुलेट करने में मदद करते है।  गिलोय में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेंटरी और अल्‍कालाइन गुण पाचन में मदद करते हैं।इसके अलावा यह अर्थराइटिस और अस्‍थमा के उपचार और टाइप -2 डायबिटीज के लिए ब्‍लड ग्लूकोज के स्तर को कम करने में मदद करता है।

* क्या शिशुओं और बच्चों को गिलोय दिया जाना चाहिए?
सिमरन के अनुसार, शिशुओं के लिए यह उचित नहीं है यह केवल 5 वर्ष से अधिक उम्र के बच्‍चों के लिए सुरक्षित है। बच्चों को एक दिन में 250 मिलीग्राम तक ही देना चाहिए।

* कहां से लें गिलोय?

गिलोय आपको आयुर्वेदिक दुकानों में पाउडर, जूस और कैप्‍सूल के रूप में आसानी से मिल जायेगा। या आप इसे घर में आसानी से उगा सकते है। बस अपनी स्थानीय नर्सरी से एक गिलोय स्टेम लेकर, इसे गमले में लग लें। यह बहुत तेजी से बढ़ता है, और आप घर में आसानी से इसकी पत्तियों को उबालकर रस बना सकते हैं।

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इन घरेलू नुस्‍खों से दें वायरल फीवर को मात



मौसम में बदलाव का सबसे ज्यादा असर सेहत पर पड़ता है
वायरल का फीवर हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है, जिसकी वजह से शरीर में इंफेक्शन बहुत तेजी से बढ़ता है. वायरल के संक्रमण बहुत तेजी से एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंच जाता है.

आइए जानें, वायरल फीवर के लक्षण और इससे बचाव के घरेलू नुस्खे...

*वायरल फीवर के मुख्य लक्षण

वायरल होने से वाले शरीर में कुछ इस तरह के लक्षण दिखते हैं जैसे, गले में दर्द, खांसी, सिर दर्द थकान, जोड़ों में दर्द के साथ ही उल्टी और दस्त होना, आंखों का लाल होना और माथे का बहुत तेज गर्म होना आदि. बड़ों के साथ यह वायरल फीवर बच्चों में भी तेजी से फैलता है.

* इन घरेलू उपचार से आप इस इंफेक्शन से राहत पा सकते हैं...

1. हल्दी और सौंठ का पाउड

अदरक में एंटी आक्सिडेंट गुण बुखार को ठीक करते हैं. एक चम्मच काली मिर्च का चूर्ण, एक छोटी चम्मच हल्दी का चूर्ण औरएक चम्मच सौंठ यानी अदरक के पाउडर को एक कप पानी और हल्की सी चीनी डालकर गर्म कर लें. जब यह पानी उबलने के बाद आधा रह जाए तो इसे ठंडा करके पिएं. इससे वायरल फीवर से आराम मिलता है.

2. तुलसी का इस्तेमाल

तुलसी में एंटीबायोटिक गुण होते हैं जिससे शरीर के अंदर के वायरस खत्म होते हैं. एक चम्मच लौंग के चूर्ण और दस से पंद्रह तुलसी के ताजे पत्तों को एक लीटर पानी में डालकर इतना उबालें जब तक यह सूखकर आधा न रह जाए. इसके बाद इसे छानें और ठंडा करके हर एक घंटे में पिएं. आपको वायरल से जल्द ही आराम मिलेगा.

3. धनिया की चाय

धनिया सेहत का धनी होता है इसलिए यह वायरल बुखार जैसे कई रोगों को खत्म करता है.वायरल के बुखार को खत्म करने के लिए धनिया चाय बहुत ही असरदार औषधि का काम करती है.

4. मेथी का पानी

आपके किचन में मेथी तो होती ही है.मेथी के दानों को एक कप में भरकर इसे रात भर के लिए भिगों लें और सुबह के समय इसे छानकर हर एक घंटे में पिएं. जल्द ही आराम मिलेगा.

5. नींबू और शहद

नींबू का रस और शहद भी वायरल फीवर के असर को कम करते हैं. आप शहद और नींबू का रस का सेवन भी कर सकते हैं.


बुखार कम करने के घरेलू उपाय

बुखार कम करने के घरेलू उपाय यदि आपको या आपके बच्‍चें को बुखार हो तो आप स्‍वाभाविक रूप से इसे जितना जल्‍दी हो सके कम करना चाहेंगें। बुखार को कम करना सबसे पहला उद्देश्‍य होता है। हाला‍कि शरीर का अधिक तापमान प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्‍तेजित करने और संक्रामक एजेंटों को मारने के लिए जाना जाता है। इसलिए कम से कम थोड़ी देर के लिए बुखार को सामान्‍य रूप से आगे बढ़ने देना आपके लिए अच्‍छा हो सकता है। हालाकि हम बुखार को जितनी जल्‍दी हो सके नियंत्रित करना चाहते हैं ताकि आप या आपका बच्‍चा जितना संभव हो आरामदायक महसूस कर सकें और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली अपना काम कर सके। इस आर्टिकल में आप जानेंगे बुखार कम करने के घरेलू उपाय, बुखार भगाने के उपाय, वायरल बुखार के घरेलू नुस्खे, बुखार का रामबाण इलाज, दवा, उपचार, के बारे में।

बुखार का उपचार करने से पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि बुखार क्‍यों होता है। बुखार संक्रमण से लड़ने के लिए मानव शरीर द्वारा उपयोग की जाने वाली एक आत्‍मरक्षा तंत्र है। उच्‍च तापमान शरीर में श्‍वेत रक्‍त कोशिकाओं का उत्‍पादन करता है जो संक्रमण के खिलाफ रक्षा प्रदान करते हैं और वायरस या बैक्‍टीरिया के विकास को रोकते हैं। दिलचस्‍प बात यह है कि बुखार को कम करने से शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए प्राकृतिक तंत्र में बाधा आ सकती है।

* बुखार आने का कारण

फीवर (बुखार) आना शरीर की एक सामान्‍य क्रिया है। लेकिन यह कभ- कभी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। आइए जाने बुखार किन कारणों से आता है :

जीवाणु संक्रमण जैसे स्‍कार्लेट बुखार या संधि बुखार दोनों ही गले की खराबी से संबंधित है। बक्टेरिया, वायरल संक्रमण, इन्‍फ्लूएंजा के कारणदवाओं के कारणगैरकानूनी ड्रग्‍स सेगर्मी के संपर्क से संबंधित बीमारियों सेएलर्जी सेसूजन संबंधी बीमारियां जैसे किशोर में संधिशोथ गठिया से

*बुखार के लक्षण क्‍या हैं

फीवर (बुखार) के संकेत और लक्षण स्‍पष्‍ट या सूक्ष्‍म हो सकते हैं। यदि आपका बच्‍चा छोटा हो तो बुखार के लक्षण और अधिक सूक्ष्‍म हो सकते हैं।

चिड़चिड़ापन, सुस्‍ती, उग्रता या बिल्‍कुल शांत होना आदि लक्षण हो सकते हैं।गर्मी या शरीर को गर्म महसूस कर सकते हैं। अच्‍छी तरह से भोजन ना करना , बच्‍चों का रोना आदि।तेजी से सांस लेनासोने या खाने की आदतों में परिवर्तन प्रदर्शित करना

* ऐसे लक्षण जो बच्‍चों द्वारा बताए जा सकते हैं

एक ही जगह पर दूसरों की तुलना में गर्म या ठंडा लगनाशरीर में दर्दसिर दर्दअधिक सोना या सोने में कठिनाई होना अपर्याप्‍त भूख

* बुखार के प्रकार

बुखार का वर्गीकर किया जा सकता है कि वे कितने समय तक चलते हैं, बुखार किस स्‍तर का है, उसकी तीव्रता क्‍या है।

फीवर निम्न प्रकार का हो सकता है :

कम ग्रेड – 100.5 से 102.1 डिग्री फेरनहाइट या 38.1 से 39 डिग्री सेल्सियस तकमध्‍यम – 102.2 से 104.0 डिग्री फेरनहाइट या 39.1 से 40 डिग्री सेल्सियस तकउच्‍च – 104.1 से 106.0 डिग्री फेरनहाइट या 40.1 से 41.1 डिग्री सेल्सियस तकहाइपरपीरेक्सिया – 106.0 डिग्री फेरनहाइट या 41.1 डिग्री सेल्सियस से ऊपर
तापमान की स्थिति यह समझाने में मदद कर सकती है कि मरीज को किस प्रकार की समस्‍या है।

* बुखार का निदान कैसे करें

फीवर के सामान्‍य लक्षण होने पर, एक  थर्मामीटर की सहायता से बुखार की पुष्‍टी हो सकती है। बच्‍चों या वयस्‍कों में 100.4 F से अधिक तापमान होना बुखार का सूचक होता है। बुखार के कारण का निर्धारण करने के लिए डाक्‍टर रक्‍त परिक्षण और इमेजिंग जैसे विभिन्‍न परिक्षणों द्वारा बुखार की पुष्‍टी करता है और यह जानकारी हासिंल करता है कि आपको किस स्‍तर का बुखार (Fever) है। यह ज्ञात होने के बाद वह आपके बुखार का इलाज अन्‍य दवाओं की सहायता से करता है। इस लेख में आप जानेगें सामान्‍य बुखार को ठीक करने के घरेलू उपाय जिनका उपयोग कर आप बुखार को ठीक कर सकते हैं।

* बुखार भागने के घरेलू उपाय और तरीके

1,गर्म पानी से स्‍नान बुखार कम करने के लिए –
बुखार से पीडित व्‍यक्ति को गर्म या गुनगुने पानी से स्‍नान करना चाहिए। यह पीडित व्‍यक्ति को आराम दिलाने में मदद करता है। गर्म पानी का उपयोग करने से शरीर का तापमान धीरे धीरे कम होने लगता है।

2, बुखार का घरेलू उपचार गीले मोजे से

इस विधि का उपयोग करने से रोगी को रात भर आराम मिलता है। एडियों को ढ़कने के लिए एक जोड़ी सूती मोजों को ठंडे पानी में गीला करें और मोजों को निचोड़कर अतिरिक्‍त पानी को निकाल दें। और बुखार से पीड़ित व्‍यक्ति को पहना दें और यदि आवश्‍यक्‍ता पड़े तो इन मोजों के ऊपर से ऊनी मोजों को भी पहना जा सकता है। ऐसा करने से बुखार पीडित व्‍यक्ति को रात भर आराम मिलेगा। रात को सोते समय वयक्ति को कंबल से खुद को ढंक कर सोना चाहिए।

कुछ लोगों को इससे परेशानी भी हो सकती है क्‍योंकि उन्‍हें कुछ मिनटों में ठंडक महसूस होने लगती है।यह उपचार नैसर्गिक द्रष्टिकोण है। सिद्धांत यह है कि ठंडे पैर परिसंचरण में वृद्धि करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्‍तेजित करने में मदद करते हैं। जिसका परिणाम यह होता है‍ कि आपका शरीर की गर्मी खर्च होने लगती है और आपके द्वारा पहने गए गीले मोजे सूखने लगते हैं जो आपके शरीर को ठंडा करने में मदद करता है। यह उपचार छाती में रक्‍त संचय से छुटकारा पाने के लिए भी उपयोग किया जा सकता है।

3, बुखार भगाने के उपाय है गीले तौलिये से उपचार

एक तौलिया ले और उसे थंडे पानी में गीला करें। तौलिया को निचोड़कर अतिरिक्‍त पानी निकाल दें और तौलिया को गर्दन के चारों ओर लपेटें। यह आपके शरीर के तापमान को कम करने में मदद करेगा जिससे आपका बुखार कम होने लगता है।



4, सरसों तेल और लहसुन की मालिश बुखार को कम करने के लिए घरेलू उपाय

आपने सुना होगा कि सरसों का तेल और लहसुन बुखार के लिए प्रभावी ढंग से काम करता है। यह बिल्‍कुल सच है, इसके अलावा यह शरीर के दर्द को कम करता है और शरीर से विषाक्‍त पदार्थोंको हटाने के लिए पसीने बढ़ाने में मदद करता है। इसके लिए आपको बस 2 चम्‍मच सरसों के तेल को गर्म करना है और इसमें 1 चम्‍मच लहसुन पेस्‍ट  को मिलाना है। 2 मिनिट के लिए मिश्रण को ऐसे ही छोड़ दें। फिर इस तेल से अपने बच्‍चे या बुखार से पीड़ित व्‍यक्ति की छाती, पैर, हथेलियों, पीठ और गर्दन पर इस तेल से मालिश करें। यह बुखार को दूर करने का सबसे अच्‍छा तरीका हो सकता है जो आपकी थकान और दर्द से भी निजात दिलाने में मदद करता है।

5, बुखार का रामबाण इलाज प्‍याज से

आपने अपने पूर्वजो के द्वारा प्‍याज के औषधीय गुणों के बारे में जरूर सुना होगा। प्‍याज न केवल शरीर के तापमान को कम करता है बल्कि बुखार के दौरान शरीर को दर्द से भी राहत दिलाता है। बस एक पूरे प्‍याज को पतले स्‍लाइस (thin slice) में काट लें और कुछ देर तक व्‍यक्ति के पैरों पर प्‍याज के 2-4 तुकड़ों को घिसें। बुखार को कम करने के लिए इस प्रक्रिया को दिन मे कम से कम 3 बार दोहराएं।

6, अदरक है बुखार के लिए घरेलू उपचार

अदरक के एंटीआक्‍सीडेंट गुण उन जीवाणुओं को मारने में सक्षम होते है जो बुखार के लिए जिम्‍मेदार होते हैं। अदरक आपके शरीर में पसीना निकलने की मात्रा को बढ़ाता है जिसके कारण यह शरीर की गर्मी और विषाक्‍त पदार्थों को हटाने में मदद करता है। गर्म पानी से भरे बाथटब में लगभग 2 चम्‍मच अदरक पाउडर मिलाएं। अदरक पाउडर को पानी में अच्‍छी तरह घुलने दें और बीमार व्‍यक्ति को इस पानी से नहलाएं। नहाने के बाद रोगी को पसीना आ सकता है जिससे कि उसके शरीर से गर्मी कम हो जाएगी और विषाक्‍त पदार्थों को भी दूर करने में मदद मिलेगी। अदरक बुखार के लिए एक प्रभावी घरेलू उपचार हो सकता है। स्‍नान करते समय ध्‍यान रखें कि अदरक का पानी आपके बच्‍चे या रोगी की आंख के संपर्क में न आए।

7, बुखार से बचने का तरीका अपने बच्‍चे को हाइड्रेटेड रखें

सूप और ठोस भोजन के अलावा पानी और रस के रूप मे तरल पदार्थ का सेवन आवश्‍यक है। फलों के रस, ग्‍लूकोज पानी, दूध, जौ पानी, नारियल का पानी और मक्‍खन शरीर की ऊर्जा के स्‍तर को बढ़ाते हैं। नवजात शिशु जिन्‍हें स्‍तनपान कराया जा रहा है उन्‍हें हर 10 मिनिट में ये सामग्रीयां खिलाना चाहिए। यह ध्‍यान रखें कि आप शरीर से द्रव हानि की भरपाई करने के लिए खाद्य पदार्थों की संख्‍या में वृद्धि करें।

8, हल्‍के कपड़ों का चयन करें बुखार कम करने के लिए

बुखार के दौरान बच्‍चों को बुखार के नुकसान से बचाने के लिए हल्‍के कपड़े पहनाए जाने चाहिए। कपड़ों की परत शरीर की गर्मी को रोक कर बुखार को बढ़ा देती है। यदि बच्‍चे को कपकपाहट हो रही हो तो उसे एक कंबल से ढकना चाहिए।

9, घर के भीतर रहें बुखार से बचने का उपाय –

बुखार के दौरान सूर्य के प्रकाश को सीधे तौर पर ग्रहण करने से बचना चाहिए। बच्‍चों को ऐसी स्थिति मे शांत और छायादार जगह में रखे, जैसे कि घर के अंदर। सार्वजनिक स्‍थानों पर जाने से बचें क्‍योंकि आपके बच्‍चे के कमजोर शरीर को और अधिक संक्रमण हो सकता है।

10, बुखार के घरेलू उपाय में भाप की मदद लें

यदि बुखार ठंड के साथ होता है तो भाप बुखार के लिए जिम्‍मेदार श्‍लेष्‍म को हटाने में मदद कर सकती है। एक भाप स्‍नान घर पर प्रभावी बुखार उपचार हो सकता है। एक वाष्‍पकारक में गर्म पानी भरें और इसमें नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदें डालें। अपने बच्‍चे को भाप में श्‍वास लेने के लिए कहें। गर्म और नम हवा को सांस लेने से श्‍लेष्‍म को हटाने में मदद मिलेगी और इस प्रकार बुखार कम हो जाएगा।

11, बुखार को ठीक करने के लिए क्‍या खाएं

बुखार के लिए बेशक हमे इलाज की आवश्‍यकता होती है, पर यह बहुत कुछ हमारे खान पान पर भी निर्भर करता है। आइए जाने बुखार के समय हमें किन चीजों का सेवन करना चाहिए जो हमारी बुखार को कम करने में मदद कर सकते हैं।

12, कैमोमाइल चाय बुखार को दूर करने का घरेलू नुस्खा है

कैमोमाइल चाय बुखार के उपचार का एक अच्‍छा बिकल्‍प होता है। थोड़े से पानी को उबालें और उसमें कुछ कैमोमाइल चाय की पत्तियों को डालें। इस मिश्रण को छानने के बाद इसे रोगी को पिलाएं। कुछ लोग स्‍वाद के बदलाव का आनंद नहीं लेते हैं इसलिए इस चाय में थोड़ी मात्रा में शहद भी मिलाया जा सकता है। इस चाय का उपयोग दिन में कई बार किया जा सकता है।

13, नींबू और शहद बुखार को कम करने मे मदद करे

नींबू में उपस्थित विटामिन सी हमारे शरीर की प्रतिरक्षा को मजबूत करता है और शहद हमारे शरीर को पोषण दिलाता है। बुखार को कम करने में दोनों का संयोजन प्रभावी है। आप नींबू के 1 चम्‍मच रस में 1 चम्‍मच शहद को मिलाएं और इसे अच्‍छी तरह मिलाने के बाद इसे रोगी को खिलाएं। यह उसके बुखार को निश्चित ही कम करेगा।

14, बुखार भगाने के उपाय धनिया के बीज

धनियां बीज मे मौजूद फाइटोन्‍यूट्रिएंट्स और विटामिन शरीर की प्रतिरक्षा के निर्माण में मदद करते हैं। यह व्‍यक्ति को वायरल बुखार से प्रभावी रूप से सु‍रक्षित कर सकता है। उबलते पानी में धनियां के बीजों को डालें। फिर इस पानी को ठंडा करके छान लें और इसमें दूध और शक्‍कर मिला कर बुखार से पीडित व्‍यक्ति को दें। यह सुखदायक पेय बुखार को कम करने में लाभकारी होता है।

15,तुलसी के पत्‍ते से करे बुखार का घरेलू उपचार

एंटीबायोटिक गुणों वाली तुलसी के पौधे जो प्रकृति मे अतिरिक्‍त बैक्‍टीरिया और कवक के अलावा कीटाणुनाशक गुण भी रखती हैं। तुलसी का उपयोग लंबे समय से वायरल बुखार को दूर करने के लिए किया जा रहा है। आपको 1 लीटर पानी 20-25 तुलसी के पत्‍तों और आधा चम्‍मच लौंग पाउडर को उबालने की जरूरत है। इस मिश्रण को तब तक उबालें जब तक यह आधा न बचे। फिर इस काढ़े को ठंडा करके हर दो घंटों में सेवन करें यह आपकी बुखार को कम करने में मदद करेगा।

इसके अलावा आप 20 से 25 तुलसी की पत्तियों के साथ एक छोई चम्मच अदरक को मिलाकर उबालें और जब पानी आधा रह जाये तब इसमें शहद मिलाएं और कुछ दिनों के लिए नियमित इसका सेवन करें, ऐसा करने से बुखार को दूर भागने में लाभ होगा।

16, चावल का माड़ बुखार को दूर करने के लिए उपयोगी

चावल स्‍टार्च एक मूत्रवर्धक ऐजेंट के रूप में कार्य करता है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है। यह पेशाब को बढ़ावादेता है जो शरीर के विषाक्‍त पदार्थों को दूर करने में मदद करता है। वायरल फीवर को पभावी ढंग से कम करने के लिए आप घरेलू उपचार के रूप में चावल के माड़

का उपयोग कर सकते हैं।

17, बुखार के लिए घरेलू उपचार है मेथी के बीज

मेथी के बीजों मे एल्‍कोलोइड, सैपोनिन्‍स और डायोजजेनिन होते हैं जो अत्‍यधिक औषधीय गुण बाले होते हैं। वे प्रभावी रूप से वायरल संक्रमण को कम कर सकते हैं। आपको रात में मेथी के बीजों को पानी में भिंगोंने की आवश्‍यकता है। सुबह आप रोगी को इस पानी का सेवन कराएं। यह पूरे दिन रोगी को तनावमुक्‍त रखेगा और बुखार को प्रभावी ढंग से दूर करने में मदद करेगा।

18, नारियल तेल बुखार से लड़ने में मदद करे

नारियल के तेल में जीवाणुरोधी और एंटीवायरल गुण होते हैं। जो बुखार के जीवाणुओं से लड़ने में हमारी मदद करते है। आप इसका उपयोग करके रोगी के लिए खाना तैयार कर सकते हैं या उसके भोजन में नारियल तेल मिला सकते हैं।

टाइफाइड बुखार से बचाव के लिए घरेलू इलाज



टाइफाइड एक खतरनाक बीमारी होती है।लगातार घटता बढ़ता रहता है तापमान।घरेलु उपायों से भी हो सकता है इलाज।शरीर में कम ना होने दें पानी की कमी।

टाइफाइड एक खतरनाक बीमारी है, इस बीमारी में तेज बुखार आता है, जो कई दिनों तक बना रहता है। यह बुखार कम-ज्यादा होता रहता है, लेकिन कभी सामान्य नहीं होता। 

टाइफाइड का इन्फेक्शन होने के एक सप्ताह बाद रोग के लक्षण नजर आने लगते हैं। कई बार दो-दो माह बाद तक इसके लक्षण दिखते हैं। टाइफाइड और बुखारका घरेलू इलाज से बचाव किया जा सकता है।

बुखार से बचाव के घरेलू इलाज-

•    पान का रस, अदरक का रस और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम पीने से आराम मिलता है।

•    यदि जुकाम या सर्दी-गर्मी में बुखार हो तो तुलसी, मुलेठी, गाजवां, शहद और मिश्री को पानी में मिलाकर काढा बनाएं और पीएं। इससे जुकाम सही हो जाता है और बुखार भी जल्द ही उतर जाता है।

•    गर्मी के मौसम में टायफायड होने पर लू लगने के कारण बुखार होने का खतरा रहता है। ऐसे में आप कच्चे आम को आग या पानी में पकाकर इसका रस पानी के साथ मिलाकर पीएं।

•    जलवायु परिवर्तन की वजह से बुखार होने तुलसी की चाय पीने से आराम मिलता है। इसके लिए 20 तुलसी की पत्तियां, 20 काली मिर्च, थोड़ी सी अदरक, जरा सी दालचीनी को पानी में डालकर खूब खौलाएं। अब इस मिश्रण को आंच से उतारकर छानें और इसमें मिश्री या चीनी मिलाकर गर्म-गर्म पीएं। 

•    तुलसी और सूर्यमुखी के पत्तों का रस पीने से भी टायफायड बुखार ठीक होते हैं। करीब तीन दिन तक सुबह-सुबह इसका प्रयोग करें। 

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टायफायड के अलावा, बुखार के कई और कारण भी हो सकते हैं,  ऐसे में कुछ बातों का रखें ख्याल 

•    बुखार में रोगी को अधिक से अधिक आराम की जरूरत होती है। भोजन का खास ख्याल रखें। बुखार होने पर दूध, साबूदाना, चाय, मिश्री आदि हल्की चीजें खाएं। मिश्री का शर्बत, मौसमी का रस, सोडा वाटर और कच्चे नारियल का पानी जरूर पीये। 

•    पानी खूब पीएं और पीने के पानी को पहले गर्म करें और उसे ठंडा होने के बाद पीये। अधिक पानी पीने से शरीर का जहर पेशाब और पसीने के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है।

•    लहसुन की कली पांच से दस ग्राम तक काटकर तिल के तेल में या घी में तलकर सेंधा नमक डालकर खाने से सभी प्रकार का बुखार ठीक होता है। 

•    तेज बुखार आने पर माथे पर ठंडे पानी का कपड़ा रखें तो बुखार उतर जाता है,और बुखार की गर्मी सिर पर नहीं चढ़ती है।

•    फ्लू में प्याज का रस बार-बार पीने से बुखार उतर जाता है,और कब्ज में भी आराम मिलता है।

•    पुदीना और अदरक का काढ़ा पीने से बुखार उतर जाता है। काढ़ा पीकर घंटे भर आराम करें, बाहर हवा में न जाएं।


घरेलू दवाओं से यदि आपको आराम न मिले, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उसके निर्देशानुसार इलाज करवाएं।


बुखार में खानपान : क्या खाएं और क्या ना खाएं


अन्य रोगों की तरह बुखार में भी सही खानपान का चुनाव आपको इस बीमारी से जल्दी ही छुटकारा दिला सकता है | दुनिया में सबसे ज्यादा पाई जाने वाली बीमारी बुखार ही है, जो कभी भी, किसी को भी, किसी भी मौसम में हो सकता है। शरीर का तापमान जब 98.4 डिग्री फारेनहाइट या 36.8 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक हो जाए, तो समझे कि बुखार हो गया है। आयुर्वेद में बुखार को स्वतंत्र रोग के रूप में तथा अन्य रोगों के साइड इफ़ेक्ट के रूप में होने वाला रोग माना जाता है, जबकि एलोपैथी में इसे अन्य रोगों का लक्षण मात्र मानते हैं।

 कारण : बुखार होने के प्रमुख कारणों में कीटाणुओं का संक्रमण होता हैं इसके अतिरिक्त अधिक गर्मी या सर्दी में रहने से भी बुखार हो जाता है। लक्षण : शरीर की गर्मी बढ़ना, शरीर टूटना, सिर दर्द, घबराहट, उलटी, जी मिचलाना, खाने की इच्छा न होना, चलने पर चक्कर आना, नींद न आना, मुंह का स्वाद बिगड़ना, हृदय की धड़कन बढ़ना, नींद में बड़बड़ाना आदि लक्षण बुखार में देखने की मिलते हैं।


* बुखार में क्या खाना चाहिए

बुखार में भोजन

बुखार में जहां तक हो सके तरल भोज्य पदार्थ ही सेवन करें और कच्ची चीजों की तुलना में पके हुए भोजन को खाएं भाप में पकाई हुई सब्जियों, सूप और फलो के पतले रस को अपने भोजन में शामिल करें ।बुखार में साधारण, हलका, आसानी से पचने वाला, कम मिर्च मसालेदार व कम मात्रा में भोजन करें।बुखार की शुरुआत में दो दिन का बिना ठोस आहार के उपवास करें और तरल चीजें ही सेवन करें।पालक और टमाटर का सूप, हरी साग-सब्जियां, सोयाबीन का सूप, खिचड़ी, मुनक्का, दलिया, ओट्स, पोहा, मूंग की दाल का पानी आदि का सेवन करें |उबली सब्जी या सूप : ताजा उबली हुई सब्जियां, सब्जियों का सूप, सलाद भी बुखार की स्थिति में सही भोजन होगा।इलेक्ट्रोलाइट : बाजार में आसानी से मिलने वाला इलेक्ट्रोलाइट शरीर को तरल पदार्थ देने का अच्छा विकल्प है। यह शरीर की जरूरी पोषण और रोग से लड़ने की ताकत देता है।चिकन का सूप : यह मांसाहारी लोगों के काम की चीज है। ठोस आहार के बिना यह शरीर को भरपूर पोषण देता है।उबले आलू में काली मिर्च डाल कर खाएं |बुखार उतरने पर डबल रोटी, गेंहू की रोटी, दूध, साबूदाना की खीर या खिचड़ी खाएं।


* बुखार में कौन सा फल खाना चाहिए – आलू बुखारा, चीकू, चकोतरा, अंगूर, पपीता, अनार, सेब, संतरा आदि का सेवन करें |कमजोरी दूर करने के लिए ग्लूकोज, सुक्रोज, लेक्टोज पानी में घोलकर पिएं।कच्चे नारियल का पानी भी बुखार में लाभकारी है |उबला हुआ ठंडा किया पानी बार बार पीते रहें ।बुखार में ठंड लगे, तो गर्म पानी में और गर्मी या जलन महसूस हो, तो गर्म किए ठंडे पानी में नींबू का रस और थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर बार-बार पिएं।बुखार की कमजोरी में पानी में शहद मिलाकर पिएं।गर्मी, थकान या मेहनत के कारण हुए बुखार में अनानास के रस में शहद डालकर पीने से काफी फायदा होगा।पपीते के पत्तों का काढ़ा भी बुखार को उतार देता है।यदि बुखार गर्मी में लू लगने से हुआ है और कफ खांसी नहीं है तो दही का प्रयोग भी लाभकारी हैं | कई अध्ययनों में पाया गया है कि प्रोबायोटिक के धनी पदार्थ बुखार में कमी लाते हैं। दही में प्रोबायोटिक होते हैं, लिहाजा दही का सेवन करें। बाजार से दही खरीद रहे हैं तो दही ‘लाइव बैक्टीरिया कल्चर” युक्त होनी चाहिए। लो-फैट दही लें।यदि आपको कफ (खांसी ) है तो बुखार में केले का सेवन नहीं करना चाहिए | केले की तासीर ठंडी होती हैं |शहद और नींबू की चाय : बुखार में यह पेय बहुत काम का है। हर्बल चाय का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। चाय में अदरक डालने से इसका लाभ और बढ़ जाएगा। बुखार में पानी के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्यवर्धक पेय पदाथों का ज्यादा-से-ज्यादा सेवन करना चाहिए। नुस्खा : पांच-छह ग्राम अदरक के रस में इतना ही शहद मिलाकर चाटें। बुखार में काफी फायदा होगा।जीरा और तुलसी : एक चम्मच जीरा के दाने लें। चार-पांच तुलसी की पत्तियां लें। इन दोनों को एक गिलास पानी में मिला लें। इसके बाद पानी को कुछ मिनट के लिए उबलने दें। इसके बाद इस मिश्रण की एक चम्मच मात्रा दिन में दो-तीन बार लें। नुस्खा 1 : तुलसी की 10-12 पत्तियां और 8-9 काली मिर्च लेकर एक कप पानी में डालकर उबालें। उबलने के बाद इस मिश्रण को पी जाएं, बुखार में बहुत फायदा होगा। नुस्खा 2 : पिसे हुए जीरे की आधा चम्मच मात्रा में थोडा-सा गुड़ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बुखार में लाभ होगा ।


*ताजा फलों का रस : बुखार में ताजा फलों का रस भी बहुत फायदा देगा। ऐसी स्थिति में फलों का डिब्बाबंद जूस नहीं पीना चाहिए। हर हाल में ताजा फलों का रस ही लेना चाहिए। फलों का रस शरीर के रोग प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत करने का काम करेगा। अगर बुखार के साथ पेट में गड़बड़ नहीं है तो संतरे का जूस बढ़िया रहेगा।बुखार में कम मलाई वाला दूध भी जरूर लें, क्योंकि इससे शरीर को प्रोटीन भी मिलेगा, जो रोग प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत करेगा। प्रोटीन हमें अन्य पदार्थों से भी मिल सकता है, जैसे कि अंडा और चिकन से, लेकिन ये ठोस पदार्थ बुखार की स्थिति में पेट के लिए ठीक नहीं रहते, इसलिए तरल पदार्थ होने के नाते दूध ठीक रहता है। नुस्खा : गर्म दूध के गिलास में थोड़े बादाम या अन्य नट्स को भी कूट-पीसकर मिलाया जा सकता है। इसके अलावा एक गिलास दूध में एक चम्मच शहद या थोड़ा-सा केसर पाउडर मिलाना भी बुखार में लाभकारी रहेगा । फलों का रस, गन्ने का रस, मकई का रस थोड़ा-थोड़ा बार-बार पिएं।


* बुखार में ये उपाय भी हैं बहुत कारगर  

तुलसी के छह-सात पत्ते लें और करीब इतने ही दाने काली मिर्च के तथा दो पत्ते पीपल के लें और एक छोटी गांठ सौंठ की। सभी को एक कप पानी में डालकर उबालें। पानी जब आधा रह जाए तो उसमें मिश्री मिलाएं और सुबह के समय खाली पेट लें। कई दिन तक ऐसा करें, बुखार में बहुत फायदा होगा।100 ग्राम नीम की छाल को कूटकर बारीक कर ले। इसमें आधा लीटर पानी डालकर उबालें। पानी के 100 ग्राम रहने तक उबालें। इसके बाद इस पानी को सुबह-शाम पिलाएं, बुखार से जल्दी ही छुटकारा मिलेगा |बुखार में नीम की पत्तियों को सुखाकर और पीसकर उनका चूर्ण बना लें। अब चूर्ण की एक चम्मच मात्रा का गर्म पानी के साथ सेवन करें। यह भी पढ़ें – टाइफाइड में क्या खाएं और टाइफाइड में परहेजतेज बुखार में पानी में थोड़ी सौंफ डालकर उबालें और पानी को थोड़ी-थोड़ी देर में रोगी को पिलाते रहें।


* बुखार में क्या नहीं खाना चाहिए

बुखार में भारी, गरिष्ठ, तले हुए, मिर्च-मसालेदार भोजन से परहेज करें।बुखार में दूध से बनी मिठाइयाँ और रेशायुक्त आहार न खाएं।खट्टे फलों का सेवन भी बुखार में न करें।
यह भी पढ़ें – डेंगू बुखार : लक्षण, बचाव, खानपान और उपचार के उपायबुखार में जल्दी ताकत लाने के चक्कर में अधिक घी, मक्खन, मांस, आदि गरिष्ठ पदार्थ न खाएं-पिएं।चाय, कॉफ़ी, शराब, कोल्ड ड्रिंक्स आदि से परहेज रखें |रेड मीट या अन्य मीट बिल्कुल न लें। इसे आपका पेट हजम नहीं कर पाएगा।बुखार में जंक फूड (फास्ट फूड, डिब्बाबंद फूड) का सेवन भी कतई न करें।उच्च फैट वाले और तैलीय भोजन से भी पूरी तरह परहेज करें।बुखार में आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिक जैसी ठंडी चीजों और सोडा ड्रिक से भी दूर रहें।बुखार में शराब और धूम्रपान का सेवन भी बिल्कुल नहीं होना चाहिए।


* बुखार में इन बातों का भी रखें ख्याल

पूरा विश्राम कर सुबह-शाम 30 मिनट का शवासन करें।तेज बुखार होने पर माथे पर ठंडे पानी की पट्टी रखें |पैर के तलवो पर लौकी के रस या लौकी के तेल की मालिश अवश्य करें |रोगी का कमरा स्वच्छ, हवादार रखें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें।व्यक्तिगत स्वच्छता पर पूरा ध्यान दें।सुबह और शाम को लंबी और गहरी सांस लेने का अभ्यास करें।बुखार में हमेशा कंबल, गर्म कपड़े में शरीर को लपेट कर न रखें।


बुखार में Normal or आयुर्वेदिक डाइट

बुखार में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाये – यह शरीर को बहुत कमजोर कर देता है, और एक सही खानपान, आहार इस कमजोरी को जल्दी दूर करने व बुखार को जल्दी से ठीक करने में मदद करते है. इसलिए हम यहां बुखार में कौन से फल सब्जियां, फल का रस, रोटी, सूप आदि इस बारे में गहराई से समझाते हुए आपको उपयोगी सलाह देंगे.
हमने सभी तरह की बीमारी में के महत्व के बारे में कई बार बताया हैं की “हर एक रोग में एक सही खान पान बहुत महत्व रखता हैं, इसके कई फायदे होते हैं. साथ ही इससे शरीर बीमारी हालात में भी अच्छा बना रहता हैं ज्यादा कमजोरी महसूस नहीं होती

* बुखार में क्यों खाये सही भोजन

बुखार में हमारे शरीर की पाचन प्रणाली बिगड़ जाती हैं, वह ठीक से काम नहीं कर पाती और अगर ऐसी स्थिति में हम ऐसा खाना खाये जो की भारी हो, जो की पाचन में समय लेता हो, तो ऐसे भोजन को पचाने में पाचन प्रणाली को ज्यादा कार्य करना पड़ता हैं वह भी बीमारी अवस्था में.जरा सोचिये जब आप बीमार होते हैं तो आप भी शारीरिक काम नहीं कर पाते. बीमारी हालत में जरा सा काम करने पर भी भारी थकान महसूस होने लगती हैं. ठीक ऐसा ही हमारी पाचन प्रणाली के साथ होता हैं, जिससे आपके शरीर को ज्यादा नुकसान पहुंचता हैं, ज्यादा कमजोरी आने लगती हैं.बहुत से ऐसे लोग आज भी जिन्दा हैं, जो की बुखार के समय ढेर सारा भोजन करते हैं और उन्हें कुछ नहीं होता, इसके पीछे शारीरिक क्षमता होती हैं. उनका शरीर होता ही ऐसा ही, जो की इन सब को एडजस्ट कर लेता हैं. पर आज कल ऐसा शरीर सभी का नहीं होता. इसलिए आप इसे Try न करे.बुखार में आहार में हलकी और जल्दी पचने वाली चीजे ज्यादा खाये.


* बुखार में पका भोजन खाये

बुखार में पका हुआ भोजन खाना चाहिए, यह स्वादिष्ठ और संक्रमण रहित होता हैं. भोजन को ठीक से पकाने पर उसमे मौजूद सारे संक्रमण बैक्टीरिया मर जाते हैं. जिससे शरीर संक्रमण का कोई खतरा नहीं रहता. ज्यादा से ज्यादा हरे पत्तेदार सब्जियां खाये, मूंग की दाल खाये, दलिया खाये, सब्जियों का सूप पिए और बुखार में मूंग की खिचड़ी भी खाना चाहिए.


* बुखार में क्या खाये

Breakfast में आप फलों का सेवन करे. क्योंकि फलों में विटामिन C ज्यादा मात्रा में होता हैं और यह Vitamin रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता हैं. इसके साथ ही आप ताज़ा गरम दूध भी पि सकते हैं. दूध में आप केसर और एक चम्मच शहद मिलाये, इसे अच्छे से मिक्स कर के पिए, बुखार में यह बहुत फायदेमंड रहेगा, कमजोरी नहीं आने देगा. ब्रेकफास्ट में क्या न लें – इस वक्त आप हल्का भोजन ही करे, और भूख से आधा ही खाये. तो इस तरह ब्रेकफास्ट में यह चीजे बुखार में खाना चाहिए.

Lunch

Lunch में ऐसे पदार्थ खाये जिनमे कार्बोहाइड्रेट्स मिलता हो. आप इसमें हरी सब्जियां, सब्जियों का सूप, आदि खा सकते हैं. शरीर की कमजोरी दूर करने के लिए हमे प्रोटीन से भरा भोजन भी करना चाहिए, और इसके लिए अंडे एक बेहतरीन उपाय हैं. यह पाचन में भी हलके ही होते हैं, बुखार में उबले हुए अंडो का ही सेवन करे. इसके साथ ही उबली हुई सब्जी व रोटी खा सकते हैं. बुखार के लंच में यह बुखार में खाये.

Dinner 

Dinner में पेट भरकर नहीं खाना चाहिए, फिर चाहे बुखार हो या सामान्य अवस्था, रात के समय हमेशा कम भोजन करना चाहिए. क्योंकि रात के समय भोजन पचाने में समस्या होती है. हमने जो लंच में बताया हैं वही भोजन आप डिनर में भी ले सकते हैं. इसके साथ ही फलों का रस व सादे फलों, पपीता का सेवन कर सकते हैं.वैज्ञानिकों ने रिसर्च में यह जाना हैं की बुखार में Chicken stew का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता हैं. यह शरीर को जरुरत अनुसार ताकत देता हैं, इसके साथ ही यह पचने में भी ज्यादा समय नहीं लगाता. यह बुखार से शरीर पर हुए नुकसान से जल्दी उभरने का एक अच्छा स्त्रोत हैं.

* संक्रमित भोजन खाने से बचे

बुखार एक संक्रमण होता हैं, इसका होना यह खबर देता हैं की आपका शरीर भीतर किसी बैक्टीरिया से लड़ाई लड़ रहा हैं. तो आपको यह बात अच्छे से समझ लेना है की ऐसी चीजों से बचे जो की संक्रमण की शिकार हो. फलों को भी अच्छे से धोकर ही खाये, ज्यादा समय से कटे हुए फलों का सेवन न करे, और ना ही किसी फल को काट कर आधा छोड़ दें. क्योंकि कटे हुए फल पर उसके कटे हुए हिस्से पर ढेर सारे बैक्टीरिया आकर बैठ जाते हैं. और अगर ऐसे में कटे फल का सेवन करेंगे तो नुकसान होगा.अगर आप जानना चाहते है की बुखार में कौन सा फल खाने चाहिए – तो संतरे, सेब, अंगूर, काले अंगूर, बड़े मुनक्का, पपीता, चीकू, अनार, गन्ने आदि और मौसमी फल खाये. अगर आप ऐसे नहीं खाना चाहते तो इनका juice बनाकर जरूर पिए. यह शरीर में कमजोरी नहीं आने देंगे.ऐसे ही ओर अछे articles के लिए जुड़े रहे ( https://normaladvices.blogspot.com ) से।

* बुखार में बिना घी व तैल की रोटियां खाये, फायदेमंद होगी.

* चावल का सेवन करे, यह स्वादिष्ट भी होते हैं और इनको पचने में ज्यादा समय भी नहीं लगता.

* सूप पिए, आप किसी भी तरह का सूप पि सकते हैं यह के लिए अच्छा स्त्रोत हैं.

* खिचड़ी भी पचाने में बहुत आसान होती हैं, इसमें कैलोरीज भी अधिक होती हैं. इसका सेवन जरूर करे.

* आलू को उबालकर खाये, जब आपका मन कुछ अलग खाने का हो तो यह जरूर आजमाए. उबले आलू बुखार में खाना चाहिए लाभ मिलता है.

* रेड और वाइट सेल्स बुखार के समय कम हो जाते हैं जिससे शरीर को बहुत नुकसान होता हैं. इसकी भरपाई के लिए आप सेब खाये. क्योंकि सेब में रेड वाइट सेल्स की वृद्धि करने की क्षमता होती हैं.  सेब बुखार में खाये ताकत मिलेगी.

* फलों के रस का सेवन करे, यह डिहाइड्रेशन से भी बचाएंगे और मुंह के स्वाद को भी ठीक करेंगे.

* उबले हुए अंडे खाये, बुखार में आसानी से प्रोटीन पाने के लिए यह बहुत अच्छा स्त्रोत हैं.

* बुखार में (कच्चे फल) ज्यादा खाना चाहिए.

* बुखार में केला खाना चाहिए यह हल्का फल होता है जिसमे शरीर को तुरंत शक्ति देने के गुण होते है. इसके सेवन से आपको ताकत मिलेगी. हो सके तो आप इसे सुबह दूध के साथ खाये और दिन में भी खा सकते है.


** बुखार में क्या करे क्या न करे : आयुर्वेदिक डाइट

1. बुखार उतरने पर रोगी कमजोर हो जाता हैं, इसलिए उसे ठंडी हवा से बचाते हुए बंद कमरे में गीले तोलिये से उसका शरीर पोंछ देना चाहिए. ऐसा आपको रोगी को नहलाने के बाद व रोगी को पसीना आने पर जरूर करना चाहिए, ऐसे में रोगी को हवा लगना बेहद खतरनाक हो सकता हैं. क्योंकि ऐसे समय पर रोगी का शरीर काफी कमजोर नाजुक सा रहता हैं.

2. बुखार आने के बाद होंठों के पकने व फट जाने पर जीरे को पानी के साथ महीन पीसकर 4-4 घंटे के अंतराल से होंठों पर लेप करने से ये कष्ट दूर हो जाते हैं.

3. बुखार से पीड़ित रोगी को अगर दूध हजम न होता हो, तो दूध को उबालते समय सौंफ के कुछ दाने डालकर या 1-2 छोटी पीपर डालकर उबालने से दूध हल्का और सुपाच्य हो जाता हैं. इसके अलावा पीपर का दूध पुराने बुखार को भी दूर करता हैं.

4. वात और कफ बुखार में उबालकर ठंडा किया हुआ पानी रोगी को पिलाना चाहिए. औटाया हुआ पानी वात और कफ बुखार को ख़त्म करता हैं, जो पानी औटाते औटाते धीरे-धीरे झाग रहित और निर्मल हो जाए तथा आधा बाकी रह जाए, उसे ही औटा हुआ अथवा उष्णोदक पानी कहा जाता हैं. 

आयुर्वेदे शास्त्र के मुताबिक-

एक किलो का 250 ग्राम पका हुआ गर्म पानी कफ बुखार का नाश करता हैंएक किलो 750 ग्राम पका हुआ गर्म पानी पित्त बुखार का नाश करता हैं1-2 बार उबाला हुआ पका पानी रात में पिने से कफ वात और अजीर्ण नाशक होता हैंसभी प्रकार के बुखार में बेदाना मीठा अनार निर्भयतापूर्वक दिया जा सकता हैं. इससे बुखार के समय बार-बार प्यास लगना शांत हो जाती हैं.

5. सभी तरह के बुखार की शुरुआत में रोगी को अन्न न देकर या केवल तरल पदार्थ अथवा फल देना उचित हैं. जैसे दूध, चाय, यथासम्भव तुलसी चाय, गुरुकुल, कांगड़ी हरिद्वार की चाय, मौसमी फल और उसका रस बिना बर्फ के मिलाये ही पीना लाभदायक होता हैं. नारियल पानी, नीबू पानी, चीकू, पपीता, आलूबुखारा, साबूदाना आदि यह सभी अत्यंत लाभकारी होते हैं और सभी तरह के बुखार में खायेजा सकते हैं.

6. निमोनियां के बुखार में 250 ग्राम पानी में 1 लौंग डालकर 10 मिनट तक उबाले. इसके बाद 60 ग्राम यह पानी रोगी को दिन में 2-3 बार देना परम लाभप्रद हैं.

7. आयुर्वेद के मुताबिक मैदे से बनी खाद्य वस्तुए जैसे बिस्कुट, डबलरोटी आदि बुखार की स्थिति में रोगी को नहीं दी जानी चाहिए. इनकी जगह पर मूंग की दाल, मूंग की दाल का पानी, साबूदाना-दूध दिया जा सकता हैं और पटोलिया आधा कप की मात्रा में देना चाहिए. पटोलिया बनाने की विधि 

8. थोड़े से गेहूं के आटे में कुछ बूंदे देसी घी की डालकर हलकी आंच पर गुलाबी-गुलाबी भूनकर उसमे इतनी मात्रा में गर्म पानी मिलाये की पतला तरल घोल सा बन जाए. भुने आटे में गर्म पानी मिलाते समय किसी करछी से अच्छी तरह हिलाते रहना चाहिए, ताकि आटे की डालियां न रहने पाए और घोल गाढ़ा व एकसार बन जाए. इसके बाद इसमें अपनी जरूरत के मुताबिक दूध-शक्कर या अकेली शक्कर अथवा नमक मिलाकर लें यही सुपाच्य पोटलिया हैं.

9. बुखार कम हो जाने पर या फिर उतर जाने पर खिचड़ी, गेहूं की डालियां, अंगूर, सेब आदि सुपाच्य आहार रोगी को देना चाहिए. बुखार के दौरान रोगी को उबालकर ठंडा किया हुआ थोड़ी-थोड़ी मात्रा में घूंट-घूंट करके खूब पिलाना चाहिए.

10. बुखार पूरी तरह उतर जाने के बाद धीरे-धीरे तरल चीजों के बदले पर ठोस आहार जैसे एक आध पतला फुल्का, टिंडा, परवल, तोरई, घीया, चौलाई, बथुआ, मेथी आदि कम मसाले वाले सब्जियां मूंग की दाल मूंग की बड़ियां मंगोड़ी की सब्जी, मसूर की दाल, टमाटर-प्याज का सलाद आदि देना चाहिए, लेकिन ध्यान रहे की बुखार के रोगी को कोई भी खाद्य पदार्थ भर पेट नहीं खिलाना चाहिए, बल्कि थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार में खिलाना चाहिए.

11. बुखार में रोगी को पोदीना के 10 पत्ते और 10 नग मुनक्का 200 ग्राम पानी में शाम को भिगो देने के बाद सुबह के समय मसल कर व छानकर पिलाने से उदर विकार, अपच व मंदाग्नि में लाभ होता हैं.

12. बुखार से पीड़ित रोगी को भूख न लगने पर मुंह का स्वाद सुधारने के लिए भोजन से 10-15 मिनट पहले छिले हुए अदरक की कतरनों पर 1-2 ग्राम नमक लगाकर खिलाना चाहिए या फिर टमाटर काटकर सेंधा नमक लगाकर खाये इसके अलावा मुनक्का बिना बीज के 4-5 नग पीस मसलकर जरा सा काला नमक या सेंधा नमक मिलाकर खिलाये. नीबू के आधे भाग पर कालीमिर्च या काला नमक लगाकर हलकी आंच पर तवे पर रखकर गर्म करे. जब नीबू का रस खद-बद करने लगे, तब उसे तवे से उतारकर चूसने से भी मुंह का स्वाद सुधरता हैं.

13. बुखार की कमजोरी दुर्बलता को दूर करने के लिए दूध में 4-5 नग खजूर उबालकर या फिर शहद 1-2 चम्मच की मात्रा में दिन में 2 बार देना लाभदायक होता हैं. बच्चों को खसरा, चेचक आदि के बाद की कमजोरी को मिटाने के लिए 1 छुहारा दूध में उबालकर दिन में 2 बार पिलाना लाभकारी होता हैं.

** बच्चों को बुखार में यही सब खिला सकते है.

बुखार में क्या न खाये परहेज :

बुखार में परहेज क्या करे ; जैसा की हमने ऊपर बताया एक तो सादहरण चाय न पिए, कोल्ड्रिंक्स न पिए, सिगरेट्स भी बंद कर दें, मांसाहारी भोजन भी नहीं खाना चाहिए और भारी भोजन करने से बचे. भूख से कम खाना खाये, भारी भोजन से हमारा मतलब है की वह भोजन जो की पचाने में समय लेता हो. और ऐसे भोजन में सिर्फ मूंग की खिचड़ी, सब्जियों का सूप, फलों का रस आदि आते हैं, इसे हल्का भोजन भी कहा जाता हैं.

* बुखार में तरल पदार्थ का सेवन ज्यादा करे. इसमें फलों का रस पीना सबसे अच्छा है.

बुखार में क्या नहीं खाना चाहिए : दूध से बने पदार्थ जैसे दूध का क्रीम आदि इन से बचे, इस जगह आप दूध पि सकते हैं लेकिन इससे बने हुए पदार्थ न ले. दूसरी बात मांसाहारी भोजन से बुखार में परहेज करे, लाल मांस, मछली, मुर्गी, बकरे का मांस आदि नॉन वेजीटेरियन भोजन बुखार में न खाये.क्योंकि इनमे कोलेस्ट्रॉल ज्यादा मात्रा में पाया जाता हैं और यह पचाने में जटिल होते हैं, इनको पचाने में पाचन प्रणाली को बहुत क्रिया करनी पड़ती हैं, यह बहुत देर से पचते हैं. इसलिए मांसाहारी भोजन न खाये. चाय, कॉफ़ी, कोल्ड्रिंक्स भी Fever में Avoid करे. तेल से बनी तली हुई चीजें से भी बचे.

* बुखार में डॉक्टर द्वारा दी गई मेडिसिन हमेशा दूध के साथ ले, और भूखे न रहे. चाहे आपको भूख नहीं लगती हो लेकिन फिर भी बताई गई चीजे खाये. साफ़ सफाई का खास ध्यान रखे, और जब दवा लेने के बाद गर्मी आये तो अच्छे से कम्बल ओढ़कर सो जाए तो तेजी से उस गर्मी को आने दें.

* बुखार के समय आराम करे, बाहर बाजार में घूमने फिरने से बचे, क्योंकि अभी हमने आपको बताया हैं की बीमारी हालात में हमारा शरीर बहुत नाजुक होता हैं. और ऐसी नाजुक हालत में बहार का वातावरण हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता हैं. तरह तरह के संक्रमण जो की हवा में बह रहे होते हैं वह रोगी के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं.
तुरंत बुखार उतारने की दवा : 5 अंग्रेजी और आयुर्वेदिक उपाय

हमने आपको बुखार से जुड़े हर विषय में गहराई से बताया है, शायद ही ऐसा कोई सब्जेक्ट रह गया हो जो हमने बुखार पर न लिखा हो. सिर्फ tablets ही बाकी रह गए है. इसके अलावा अगर आपको लगता है की हमे बुखार रोग पर और भी लिखना चाहिए तो हमे Comment के जरिये बताये.


* ज्यादा तबियत खराब होने पर क्या करे

यह बात आप अच्छे से समझ लें की अगर आपको लगता हैं की आपकी तबियत ज्यादा खराब हैं, आपको बुखार आये हुए ज्यादा दिन हो गए है आदि. तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से Check up करवा लेना चाहिए. ऐसा करने से आप ज्यादा बीमार पढ़ने से बच सकते हैं.क्योंकि आज का समय ऐसा हैं की हर साल नई-नई बीमारियां जन्म ले रही है, और ऐसी अवस्था में आपको भी कोई नई बीमारी घेर सकती हैं. और आपको जब इस बारे में खबर होगी तो तब तक बहुत देर हो चुकी होगी. इसलिए हमारी सलाह को मानिये और ज्यादा तबियत बिगड़ने पर डॉक्टर को दिखाने में हिचकियां न.


* बुखार की दवा अंग्रेजी से करे इलाज

अंग्रेजी दवा का नाम (टेबलेट) की जो list में हमने निचे कुछ मेडिसिन्स के नाम दिए है. आप इनका प्रयोग बुखार उतारने में कर सकते है. यह बुखार के साथ-साथ सर दर्द, बदन दर्द को दूर करने में भी कारगर होंगी. इनके सेवन से आप बुखार से बड़े जल्दी छुटकारा पा सकते है. इनमे से आप कोई सी भी बुखार की गोली ले सकते है, यह सिर्फ 10 मिनट में असर दिखाना शुरू कर देगी और बुखार भगा देगी. (बुखार जल्दी ठीक करने के लिए इन दवाई का उपयोग कर सकते है).

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** पतंजलि की दवा

बाबा रामदेव की पतंजलि में बुखार को जड़ से ख़त्म करने में बहुत उपयोगी है. आप एक तो “दिव्य ज्वरनाशक वटी” और “दिव्य ज्वरनाशक क्वाथ” दोनों को पतंजलि स्टोर से ले आये और इनका इस्तेमाल करे. इनको इस्तेमाल करने की विधि इनके पैकेट के ऊपर ही लिखी होती है.ज्वरनाशक क्वाथ स्वाद में बहुत कड़वा होता है, लेकिन इसको अगर आपने ले लिया तो फिर आपको सालों तक बुखार नहीं आएगा. लेकिन शर्त यही है की आप इसकी पूरी खुराक लें.

* गिलोय

आप पतंजलि स्टोर से गिलोय भी ले आये, और इसका भी काढ़ा बनाकर पिए. आपको चाहे कोई सा भी बुखार हो यह आयुर्वेदिक दवा यानी गिलोय का काढ़ा उसे ठीक कर देगा. असल में यह काढ़ा रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है जिससे बुखार टूट जाता है.अगर आप काढ़ा नहीं लेना चाहते तो पतंजलि स्टोर से गिलोय की टेबलेट भी ले सकते है. इसको बड़ी उम्र के व्यक्ति को दो-दो गोली गिलोय की दें और छोटे बच्चों को एक गोली ही दें. इस तरह बिना काढ़ा पिए भी आप इसका लाभ ले सकते है.

* तुलसी का आयुर्वेदिक काढ़ा

20-22 तुलसी ताज़ा पत्ते लें और इन्हें करीबन एक लीटर पानी में डालकर खूब उबाले, इसमें आप 4-5 लौंग भी डाल दें और पूरा तब तक उबाले जब तक की यह उबलकर आधा न रह जाये. जब यह आधा रह जाए तो ठंडा होने पर इसको पि ले. ऐसा आप रोजाना रात को सोने से पहले करे इसको लेने के बाद पानी न पिए. तीन दिन तक यह लेने से बुखार चला जाता है.

कोई सी भी दवा या काढ़ा लेने के बाद आपको तेज गर्मी होगी तो आप कम्बल ओढ़कर सो जाए, और शरीर को हवा न लगने दें. आप इस तरह जितनी गर्म निकालेंगे उतने ही जल्दी बुखार ख़त्म हो जायेगा.

* घर पर बनाये घरेलु दवा इस तरह

अगर आपको सर्दी लग कर बुखार आया हो यानी पहले सर्दी हुई हो और फिर बुखार आया हो तो आप यह आयुर्वेदिक उपाय करे. यह सर्दी से आये हुई बुखार से सिर्फ दो दिन में ही छुटकारा दिला देगा. इसको बनाने में भी ज्यादा समय नहीं लगता बस 3 minute.अदरक और शहद हर घर में मौजूद होते है, और इस उपाय के लिए हमे इन दोनों की ही जरुरत होती हैं. थोड़े से अदरक का रस निकाले, रस निकालने के लिए किसी चीज से अदरक को पीसले. इसके बाद अदरक के रस में अपने स्वाद अनुसार शहद मिलाये. और अब इसका सेवन कर ले.इस दवाई को रोजाना सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले लें. एक बात जरूर याद रखे की इस दवाई को लेने के बाद पानी बिलकुल भी न पिए. अगर आप पानी पीते है तो यह आपको नुकसान भी कर सकती है.
एक बार यह सभी भी जरूर पड़ें :बुखार में क्या खाये और क्या नहींबुखार में बाबा रामदेव का इलाजबच्चों के बुखार का इलाजसर्दी जुकाम का जड़ से इलाज के नुस्खेखांसी का जड़ से इलाज के नुस्खे

* बुखार में सर्दी से तुरंत राहत

अगर आपको बुखार में सर्दी बहुत हो रही है, जुकाम के वजह से नाक बंद है तो आप पतंजलि स्टोर से “दिव्यधारा” नाम की एक liquid फॉर्म में दवा आएगी उसे खरीद लें, फिर दो लोटे पानी ले और उसे अच्छा पूरा उबाल लें, उबालने लेने के बाद एक कम्बल ओढ़कर बेथ जाए और और गर्म अपनी को कम्बल के अंदर रख लें. अब दिव्यधारा की 1/2 बून्द इसमें डाल दें. इसके बाद अगले 10 मिनट तक वैसे ही बैठे रहे और गहरी-गहरी सांस लेते रहे. (नोट: इसमें आपका मन होगा की अभी उठ जाओ लेकिन ध्यान रहे आपको उठना नहीं है पुरे 10 मिनट तक इस भांप को लेना है) इससे तुरंत आपकी नाक पूरी खुल जाएगी और जुकाम से भी राहत मिलेगी. सर्दी जुकाम और बुखार में कोनसी दवाई लेनी चाहिए इसके बारे में हम ऊपर बता चुके है.

* लहसुन की दवा बनाये इस तरह
आप बुखार में लहसुन का उपयोग भी कर सकते हैं, क्योंकि इसमें भी वह गुण होते हैं जो की एक बुखार के इलाज की दवाई में होते हैं. लहसुन की पांच कलियां लें और इन्है घी में डालकर तवे पर सेंक कर खाये. आप तो पांच लहसुन की कलियों को तवे पर डाल दे और इसमें घी भी मिला दें. अब इसे थोड़ा तल लें. तलने के बाद ठन्डे हो जाने पर इसका सेवन करे.

बुखार के और नुस्खे जानने के लिए आप इस पोस्ट का अगला पेज भी पड़ें, यहाँ ओर आयुर्वेदिक नुस्खे बताये गए है जिन्हे आप घर पर ही बनाकर बुखार से छुटकारा पा सकते है.

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