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जानें कमर दर्द से छुटकारा पाने के चमत्कारिक तरीके

जानें कमर दर्द से छुटकारा पाने के चमत्कारिक तरीके


कमर दर्द आज के समय की एक आम समस्या बन चुकी है जिसकी गिरफ्त में बड़ी उम्र के लोग ही नहीं, बल्कि युवा के लोग भी आ रहे है। कमर दर्द के होने की मुख्य वजह बदलती जीवनशैली के साथ शारीरिक श्रम ना करना पाया गया। अधिकतर लोगों को यह दर्द कमर के मध्य या निचले हिस्से में ज्यादा 1 में महसूस होता है। इस दर्द से छुटकारा पाने के लिये आप कई तरह के उपचार करते है लेकिन इसका असर मात्र कुछ समय के लिये ही रहता है। आज हम आपको ऐसे कुछ घरेलू उपायों कें बारें में बता रहे है जिसे अजमाकर आप इस समस्या से काफी जल्दी निजात पा सकती है। जानें कमर दर्द से छुटकारा पाने वाले घरेलू उपाय।

कमर दर्द से निजात पाने के लिये आप एक खडाई में सरसो का तेल डालकर उसमें लहसुन की तीन-चार कलियॉ के साथ अजवाइन को डालकर गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।
नमक मिले गर्म पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद इससे कमर की सिकाई करें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।
कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छी तरह से गर्म कर लें। अब इस गर्म नमक को किसी सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। और इस पोटली से कमर की सिकाई करें काफी जल्द ही अराम मिलने लगेगा।
अजवाइन को तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेंके। और ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।
कमर दर्द के लिए व्यायाम करना सबसे अच्छा तरीका है। इसके लिये आप रोज सुबह सैर पर जाये,तैराकी या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है।
ऑफिस में काम करते वक्त अधिक देर तक एक ही पोजीशन में ना। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।
कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, जो कमर के दर्द का प्रमुख कारण बनती है इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।




27% औरतें सर्वाइकल इरोज़न बीमारी की शिकार, यूरिन ही है पहला संकेत


सर्वाइकल इरोज़न (Cervical Erosion) यानि गर्भाशय ग्रीवा महिलाओं से संबंधित एक ऐसा रोग है, जिसे सर्वाइकल एक्ट्रोपियन भी कहा जाता है। इस बीमारी के लक्षण साइलेंट होते हैं इसलिए महिलाओं को समय रहते इसका पता नहीं चल पाता। यह एक ऐसा संक्रमित रोग है, जो संबंध बनाने से फैलता है इसलिए शादीशुदा महिलाओं में इसका खतरा अधिक होता है। इस रोग के होने पर महिलाओं के प्राइवेट पार्ट में सूजन भी आ जाती है। अगर समय रहते इसका इलाज ना किया जाए तो यह महिलाओं के लिए जानलेवा भी बन सकता है।

क्या है सर्वाइकल इरोज़न
गर्भाशय ग्रीवा, गर्भाश्‍य के अंत में निचले हिस्‍से में स्थित संकरी सी ग्रीवा होती है, जो योनि में जाकर खुलती है। संबंध बनाते समय गर्भाशय ग्रीवा शोथ, क्‍लाइमायडिया और गोनोरहा जैसे यौन संचारित संक्रमणों के कारण महिलाएं इस कैंसर की चपेट में आ जाती है।

दो तरह के होते हैं सर्वाइकल इरोजन

सर्वाइकल इरोजन या गर्भाशय ग्रीवा में दो प्रकार के सेल्स होते हैं, फ्लैट स्किन सेल्स और ग्‍लैंडुलर सेल्स। यह दोनों सेल्स योनि और गर्भाशय तक इंफैक्शन को गर्भाशय ग्रीवा में मौजूद यह सेल्स बैक्‍टीरिया और वायरस को गर्भाशय में प्रवेश करने से रोकती है। वहीं जब गर्भाशय ग्रीवा संक्रमित हो जाती है तो इससे संक्रमण योनि व गर्भाशय तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
सर्वाइकल इरोजन के कारण

आमतौर पर गर्भाशय ग्रीवा शोथ बैक्‍टीरियल और वायरल संक्रमण द्वारा होता है, जो यौन संबंधों द्वारा फैलते हैं। एलर्जिक रिएक्‍शन, गर्भनिरोधक गोलियों, शुक्राणुनाशकों और कंडोम में मौजूद लेटेक्‍स के कारण भी महिलाएं इसकी चपेट में आ जाती है। वहीं अगर योनि में मौजूद बैक्टीरिया जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए तो इसके कारण भी महिलाओं को यह समस्या हो सकती है। इसके अलावा प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी इसका कारण बनते हैं।

भारत की 27% महिलाएं है इसकी शिकार
सर्वाइकल इरोजन पूरी दुनिया की औंरतों के लिए खतरा बना हुआ है लेकिन भारतीय महिलाओं में इसका खतरा अधिक है। शोध के अनुसार, पूरी दुनिया में हर साल 5 लाख सर्वाइकल इरोजन के मामले सामने आते हैं, जिसमें 27% भारत की महिलाएं शामिल होती हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों की महिलाओं में इसका खतरा 60% ज्यादा होता है, जिसका सबसे बड़ा कारण सुरक्षा ना बरतना है।
सर्वाइकल इरोजन के लक्षण

योनि से असामान्‍य स्राव
स्राव सलेटी और पीले रंग होना
स्राव से पस व दुर्गंध आना
बार-बार पेशाब जाना
पेशाब के साथ दर्द होना
संभोग के दौरान दर्द होना
पीरियड्स में असामान्‍य रक्‍त स्राव होना
डॉक्‍टर से कब संपर्क करें?
जब मासिक धर्म के बिना योनि से नियमित असामान्‍य स्राव होने लगे तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बचाव

सर्वाइकल इरोजन ज्यादातर असुरक्षित यौन संबंधों से फैलता है इसलिए इससे बचने की कोशिश करें। इसमें आमतौर पर कोई लक्षण नजर नहीं आते। यह एक सामान्‍य पेप टेस्‍ट से ही सामने आ सकता है। ऐसे में बेहतर यही होगा कि आप पेल्विक की नियमित जांच, कोलपोस्कोपी (Colposcopy), बायोप्सी (Biopsy) और पेप टेस्‍ट करवाती रहें। इसके अलावा प्राइवेट पार्ट की साफ-सफाई का खास-ख्याल रखें


वेट लॉस टिप्स: वजन कम भी करता है केला, करें इस तरह सेवन



कई ऐसे फल और सब्जियां हैं जो वजन बढ़ाने या घटाने का काम करते हैं। ऐसे फलों-सब्जियों को नियमित रूप से खाने से वजन को कंट्रोल किया जा सकता है और जो लोग बहुत दुबले-पतले हैं, वे अपना वजन बढ़ा सकते हैं। केला एक ऐसा फल है जिसे वजन बढ़ाने के लिए जाना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट की अधिक मात्रा होती है, जिस कारण हम इसका सेवन करना बंद कर देते हैं। ऐसे में बहुत सी युवतियां तो केले को अपनी डायट में शामिल ही नहीं करती हैं। जो लोग भी सोचते हैं कि केला सिर्फ वजन बढ़ाता है, तो वे गलत हैं। दरअसल, उन्हें केले के स्वास्थ्य लाभ के बारे में पूरी तरह से पता ही नहीं है। एक केले में करीब 105 कैलोरी, 3 ग्राम फाइबर, 27 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 14 ग्राम शुगर होती है। केले में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं जो फ्लैट बेली पाने में आपकी मदद कर सकते हैं। केले को अगर वजन कम करने के लिए खाया जाए तो यह काफी प्रभावी होते हैं।
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केले में पोटैशियम होता है, जो कि शरीर में पानी को बनाए रखने की प्रक्रिया को रोकने में मदद करता है। यह सूजन को कम करने में भी मदद करता है। केले का यह अद्भुत गुण इसे वजन कम करने के लिए काफी अच्छा उपाय बताते हैं।



केले में कोलीन के साथ-साथ विटामिन बी के उच्च गुण होते हैं, इन दोनों गुणों के कारण ही केला खाने से हमारे पेट की चर्बी दूर हो जाती है। इसका सेवन करने से आप पेट के साथ ही शरीर की सारी कैलोरी भी कम कर सकती हैं।



केले में उच्च फाइबर सामग्री होने के साथ ही प्रोबायोटिक भी उच्च मात्रा में होती है। यह प्रोबायोटिक तत्व हमारे शरीर में अच्छे बैक्टीरिया के विकास में मदद करता है जो कि वजन बढ़ने का मुख्य कारण होता है।



अन्य फलों और सब्जियों से अलग केले में काफी कम कीटनाशकों के अवशेष होते हैं, इसी के साथ इसके छिलके बहुत मोटे होते हैं। अनुसंधान में यह साबित किया गया है कि कीटनाशक जो कि हमारे खाने में होते हैं, वह हमारे वजन को बढ़ा देते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पेट में होने वाले विषाक्त पदार्थ हमारे पेट की वसा कोशिकाओं को संग्रहित ऊर्जा को जलाने की प्रक्रिया हो रोकता है। आप चाहे तो केले के साथ अन्य फलों की अदला-बदली कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके शरीर के विषाक्त पदार्थ जोखिम को कम करने के साथ तेजी से वजन को कम भी करता है।

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