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थायराइड के लिए योग


थायराइड के लिए योग और उन्हें करने की विधि
Yoga for thyroid पर बात करना इसलिए बेहद जरुरी है क्योकि आजकल Thyroid बहुत तेजी से फ़ैल रहा है, लेकिन कुछ खास चुनिंदा योग करने से इसके उपचार में प्राकृतिक रूप से बहुत सहायता मिलती हैl इसीलिए हम बता रहे है कुछ खास yoga for thyroid– इन्हें आप अपने नियमित उपचार के साथ दिनचर्या में शामिल करें इससे न केवल आपके जीवन को तनावमुक्त बनने में मदद मिलेगी बल्कि आपके दैनिक जीवन शैली को सरल एवं आनंदमय बनाने में भी मदद मिलेगी।
Yoga for thyroid – Sarvangasana सर्वांगासन

इस आसन में हमारे शरीर के सभी अंगों का व्यायाम होता है, इसलिए इसे सर्वागासन कहा जाता है। थायराइड में सर्वांगासन को बहुत महत्तवपूर्ण बताया गया है, क्योकि इस आसन की विभिन्न मुद्राओ के दौरान पड़ने वाले दबाव थाइरोइड ग्रंथियों को निर्विघ्ऩ रूप से कार्य करने में मदद करता है तथा दिमाग में पाये जाने वाली ग्रंथियों को भी सही तरीके से कार्य करने में सहायता करता है, जैसे कि pituitary gland और pineal gland आदि ग्रन्थियां जिनका प्रभाव थाइरोइड ग्रंथियों पर नियंत्रण पाने में होता है। इन ही सब खूबियों के चलते सर्वांगासन हमने को रखा है Yoga for thyroid लिस्ट में पहले नंबर पर !

SARVANGASANA
सर्वांगासन करने विधि:
जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों की आपस में मिलाकर कमर तक के भाग को जमीन से ऊपर उठाते हुए लाएं।
उसके बाद दोनों हाथों के सहारे से कमर को पकड लें। पंजे खींचे हुए, जांघों और टांगों को बिलकुल सीधा रखें।
ठोढ़ी कठ कप से लगी रहे। हमारी टांगें 90 डिग्री के कोण पर स्थित रहेगी। श्वास की गति सामान्य रहेगी।
जितनी देर आप सरलता पूर्वक इस आसन में रह सकते हैं, रहें। फिर धीरे-धीरे हाथों के सहारे से सामान्य अवस्था में वापस आएं।
थायराइड के अलावा अन्य रोगों में लाभः

इस योगासन को करने से नेत्र ज्योति बढ़ती है, त्वचा रोग ठीक होते हृदय के विकार दूर होते है तथा रक्त की शुद्धि होती है |
Yoga for thyroid -जनु शीर्षासन Janu Shirasasana


janu-sirsasana
जनु शीर्षासन करने विधि:
भूमि पर बैठकर टांगों को सीधा मिलाकर रखें।
उसके बाद किसी एक पैर को हाथ से लेकर उसकी एड़ी को गुदा तथा अंडकोष (Testicles) के मध्य भाग में लगाएं। पैर को केची बना कर पकड़े और सिर को झुकाकर उस टांग का स्पर्श करें।
थायराइड के अलावा अन्य रोगों में लाभः
अवसाद-निराशा मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाता है। यह योगासन करने से लिवर, Spleen और kidneys के कार्यों में बहुत तेजी से सुधार आता है। यह आसन अवसाद से भी मुक्ति दिलाता है, साथ ही मस्तिष्क को भी शांत रखता है। इस आसन को करने से गुदा तथा मूत्रेन्द्रिय को असाधारण लाभ होता है।
Yoga for thyroid – मत्स्यासन (Matsyasana)


matsyasana
मत्स्यासन करने की विधि:
पदमासन की मुद्रा में बैठें। दायीं टांग को बायीं टांग की जड में टिका दें। फिर बायीं टांग मोड़कर एड़ी दायीं टांग की जड़ में टिका दें। पीठ के बल लेट जाएं।
फिर कंधो से कमर तक का भाग ऊपर रहे। सीना भी ऊपर की ओर उभरा रहे। दायें हाथ से बायें पैर का अंगूठा और बायें हाथ से दाहिने पैर का अंगूठा पकड़े रहें।
ये सुनिश्चित कर ले की सारा शरीर सिर और नितंब पर टिक जाना चाहिए। अब घुटनों को जमीन पर लगाने की कोशिश करें।
थायराइड के अलावा अन्य रोगों में लाभः –
गले की बीमारियां दूर करने में सहायक। योगासन की यह क्रिया गले की बीमारियां ठीक करने के साथ-साथ फेफडों में व्याप्त संक्रमण को भी ठीक करती है। गर्दन और बाजुओं की जकडन को दूर करता है। इस आसन को करने से थायराइड और पैरा थायराइड की ग्रंथियां बहुत लाभदायक स्थिति में पहुंच जाती हैं।


Yoga for thyroid -हलासन (Halasana)
halasana
हलासन करने की विधि:
सबसे पहले जमीन पर पीठ के बल लेट जाये याद रखे की पैर दोनों एक दूसरे से मिले हुए जरुर हों। तथा दोनों हाथों की हथेलियां जमीन पर और कमर के पास लगी हुई हों।
अब आसमान की तरफ मुंह उठाकर अपनी आखें बंद करें। फिर धीरे-धीरे दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाएं। ऐसा करते समय पेट को सिकोड़ें और सांस को अंदर लें।
दोनों पैरों को सिर के पीछे लगाने कि कोशिश करें जैसा कि इमेज में दिखाया गया है।
अब पीठ और कमर को पैरों के साथ पीछे की तरफ मोड़ने के लिए हाथों का सहारा लें|
अंत में धीरे-धीरे पैरों को मोंड़ें (अपनी क्षमता के अनुसार) ज्यादा जोर न लगाये अब थोड़ा रूकने का प्रयास करें। घुटनें मुड़ें नहीं इस बात का ध्यान रखें। अब वापस पहली अवस्था में आएं।
थायराइड के अलावा अन्य रोगों में लाभः 

रीढ़ की हड्डी को लचीला नियमित अभ्यास से अजीर्ण, कब्ज, अर्श, थायराइड का अल्प विकास, अंगविकार, असमय वृद्धत्व, दमा, कफ, रक्तविकार पाचन तंत्र को मजबूत करके पाचन क्षमता बढ़ाने में मदद करता है, साथ ही भूख भी बढ़ाता है। 2. मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों को मधुमेह कंट्रोल (diabetes control) करने में मदद करता है। 3. पेट की मांसपेशियों में मजबूती
Yoga for thyroid – मार्जरीआसन (Marjariasana)
Marjariasana
मार्जरी आसन करने की विधि:
सबसे अपने घुटनों और हाथों के बल आये और शरीर को एक मेज़ कई तरह बना लें अपनी पीठ से मेज़ काऊपरी हिस्सा बनाएं और हाथ ओर पैर से मेज़ के चारों पैर बनाएं.
अपने हाथ कन्धों के ठीक नीचे, हथेलियां ज़मीन से चिपकी हुई रखें और घुटनो मेँ पुट्ठों जितना अंतर रखें
गर्दन सीधी नज़रें सामने रखें. साँस लेते हुए अपनी ठोड़ी को ऊपर कि ओर सर को पीछे की ऒर ले जाएँ.
अब अपनी नाभि को जमीन की ऒर दबाएं और अपनी कमर के निचले हिस्से को छत की ओर ले जाएँ. दोनों पुटठों को सिकोड़ लें. अब आप थोड़ा खिंचाव महसूस कर रहें होंगे ? इस स्थिति को बनाएँ रखें ओर लंबी गहरी साँसें लेते और छोड़ते रहें |
अब इसकी विपरीत स्थिति करेंगे – साँस छोड़ते हुए ठोड़ी को छाती से लगाएं ओर पीठ को धनुष आकार में जितना ऊपर हो सके उतना उठाएं, पुट्ठों को ढीला छोड़ दें | इस स्थिति को कुछ समय तक बनाएँ रखें और फिर पहले कि तरह मेजनुमा स्थिति में आ जाये |
थायराइड के अलावा अन्य रोगों में लाभः

इस आसन को करने से कमर का दर्द तथा मास पेशियो के दर्द में आराम मिलता है | मोटापा और पेट की चर्बी कम होती है , रीढ़ की हड्डी से सम्बन्धी रोगों से राहत मिलती है |

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Yoga for thyroid विपरीतकर्णी (Viparitakarani)

viparitakarani
विपरीतकर्णी आसन करने की विधि:
सबसे पहले आप अपनी पीठ के बल लेट जाएँ और अपने टाँगों को दीवार का सहारा देते हुए पैरों को छत की ओर उठा लें|
अब अपनी बाहों को फैला कर शरीर के दोनों तरफ ज़मीन पर रख दें और अपनी हथेलियों को आकाश की तरफ मोड़ कर खुली रखें|
दूसरी मुद्रा में जाने से पहले इसी मुद्रा में कम से कम पंद्रह तक की गिनती करें, और उसके बाद गहरी लंबी साँस लें और छोड़ें|

थायराइड के लिए योग और उन्हें करने की विधि
थायराइड के अलावा अन्य रोगों में लाभः 

इस योगासन को करने से अग्नाशय, उदर, लीवर, किडनी, और मूत्राशय बेरिकेस आदि से सम्बंधित रोगों में विशेष लाभ मिलता है।
Yoga for thyroid में इन सभी आसनों के अलावा तेज़ गति से सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar,) उज्जयी श्वास (Ujjayi Breath), प्राणायाम जैसे कपालभाती (Kapalabhati), भस्त्रिका (Bhastrika) तथा नाड़ी शोधन (Nadi Shodhan) भी थायराइड के रोगी को लाभ देता है !

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