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कमर पतली बनाने के लिए करें अतिसरल सुझाव


कमर पतली बनाने के लिए करें अतिसरल सुझाव और जाने इसको बनाने के तरीके


पतली कमर - हर महिला और विषय का सपनाअपवाद के बिना सभी पुरुषों की प्रशंसा ऐस्पेन कमर की खोज में, लड़कियां कुछ भी तैयार हैं - भूख हड़ताल से लिपोसक्शन और पसलियों को हटाने के लिए। मैं आपको आग्रह करता हूं कि आप अपने आहार में पीड़ा न करें और शल्य तालिका में न जाएं! हमारे समय में ठाठ रूपों के लिए लड़ने के कई अन्य तरीके हैं। आपको कमर पतली बनाने के लिए नहीं पता? हम आपकी मदद करेंगे!

18 वीं शताब्दी की शुरुआत के रूप में, महिलाओं ने विश्राम की मांग की थीआदर्श छवि, जिससे पुरुष आधा जीत। युवा महिलाओं ने तंग कोर्सेट पहना और नियमित रूप से ऑक्सीजन और भोजन की कमी से बेहोश हो गई। कई शताब्दियों के बाद कुछ भी नहीं बदल गया है, सिवाय इसके कि इंटरनेट ने प्रकट किया है, और इसके साथ वजन कम करने और अपने शरीर को आदर्श 90-60-90 तक लाने के कई तरीके हैं।


कैसे कमर पतली बनाने के लिए बहुत कुछ लिखा जाता हैलेख और किताबें चिकित्सकों की मदद के बिना आदर्श आंकड़े कैसे ढूंढें? सबसे पहले, यह निर्धारित करें कि कमर पर कितनी सेंटीमीटर आप निकालना चाहते हैं। वांछित आकार निर्धारित करने से पहले, अपने शरीर के अनुपात को प्रकट करना आवश्यक है यदि आपकी ऊंचाई 170 से अधिक है, और काया बड़ा है, तो यह एक कमर 50 सेंटीमीटर का सपना देखने के लिए मूर्खतापूर्ण नहीं है, आपका आदर्श 70 या अधिक है इसके अलावा, मात्रा हड्डियों की चौड़ाई, कंधों और कूल्हों के अनुपात पर निर्भर करते हैं। इसके अलावा, विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कूल्हों और स्तनों की मात्रा में मेल खाती है, तो कमर के इन संस्करणों का 70% होना चाहिए। यह अंतर यह है कि "सुनहरा मतलब" है, जो किसी भी संविधान के तहत अच्छा लग रहा है। दुर्भाग्य से, सभी महिलाओं की प्रकृति से एक संकीर्ण कमर नहीं है शरीर में महिला सेक्स हार्मोन की और अधिक महिलाएं, कमर को अधिक पतला होगा। साथ ही फुटबॉल, जिमनास्टिक, मुक्केबाजी आदि जैसे खेलों में अक्सर छोटी लड़कियों को शामिल किया जाता है। (मुख्य रूप से पुरुष, बिजली के खेल), उनके आंकड़े को खराब करते हैं और ध्यान नहीं देते कि कैसे कमर गायब हो जाता है, और कूपर और छाती की मांसपेशियों को कूल्हे की तुलना में अधिक विकसित किया जाता है।

आप अपनी कमर पतले की मदद से कर सकते हैंफिटनेस प्रशिक्षण मुख्य बात जो याद रखने योग्य है, लोकप्रिय विश्वास के विपरीत, प्रेस (दोनों सीधे और तिरछी मांसपेशियों पर) पर अभ्यास करते हैं, स्थिति को खराब करते हैं, मात्रा में वृद्धि सामान्य तौर पर, पेट के हिस्से पर कोई भी सक्रिय बल आपकी कमर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। थोड़ी कसरत के बाद एक पतली कमर और सपाट पेट के सभी अभ्यास किए जाने चाहिए। वार्म अप पूरी तरह से किसी भी हो सकता है: एक रोशनी जोग, नृत्य तालबद्ध संगीत या खींचने के चलते


व्यायाम की जटिलता में कुछ सरल क्रियाएं शामिल हैं, जो सबसे अधिक भाग के लिए कालीन पर झूठ बोल रही हैं। 
अपनी पीठ पर रखो, अपने हाथ अपने सिर के पीछे रखो और अलग-अलग दिशाओं में घुमाएं, फर्श पर रोलिंग करें। 
फर्श से मत उठो, अपने पैरों को मोड़ो, सतह पर अपने पैरों को रखकर। दोनों पैर बाएं और दायां झुकते हैं, घुटनों के साथ फर्श को छूते हैं 
एक ठाठ कमर और एक घेरा के लिए एक कठिन संघर्ष में मदद मिलेगी, जिसे आपको आधे घंटे के लिए हर दिन मोड़ना चाहिए। 
शुरुआती स्थिति को बदलने के बिना, अपना हाथ डाल देंअपने शरीर के साथ फर्श, पेट खींचो अपने कूल्हों को जितना ऊंचा हो उतना ऊँचा उठाएं, प्रेस और श्रोणि की मांसपेशियों को दबा कर। धीरे धीरे नीचे जाओ 15 सेकंड के अंतराल के साथ 30 गुना के 3 सेटों को दोहराएं। 


अगर आपको सवाल उठता है - कमर को कैसे बनाया जाए पतले, खेल नहीं कर रहे हैं, हम आपको ब्यूटीशियन पर जाने या घर पर स्पा के इलाज के लिए सलाह देते हैं। एक बहुत प्रभावी तरीका है कि हजारों गृहिणियों ने कोशिश की है। सरसों के पाउडर से एक मोटी पर्याप्त दलिया, पानी और शहद के कुछ चम्मच खर्च करें। यह सब मिश्रण करने के बाद, पेट और समस्या वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लागू करें, सिलोफ़ेन फिल्म के साथ पेट की गुहा लपेटो ताकि "स्नान" में सभी कमर और पेट हों। प्रक्रिया को अधिक सफल बनाने के लिए, एक तौलिया या ऊनी कंबल के साथ कमर लपेटें। यह घर का बना लपेटने से आपको कमर को पतला बनाने के लिए, और कम से कम 2 सेंटीमीटर से आधे घंटे के लिए बहुत मेहनत के बिना छुटकारा पाने के सवाल का उत्तर देने में मदद मिलेगी



जानें कमर दर्द से छुटकारा पाने के चमत्कारिक तरीके




कमर दर्द आज के समय की एक आम समस्या बन चुकी है जिसकी गिरफ्त में बड़ी उम्र के लोग ही नहीं, बल्कि युवा के लोग भी आ रहे है। कमर दर्द के होने की मुख्य वजह बदलती जीवनशैली के साथ शारीरिक श्रम ना करना पाया गया। अधिकतर लोगों को यह दर्द कमर के मध्य या निचले हिस्से में ज्यादा 1 में महसूस होता है। इस दर्द से छुटकारा पाने के लिये आप कई तरह के उपचार करते है लेकिन इसका असर मात्र कुछ समय के लिये ही रहता है। आज हम आपको ऐसे कुछ घरेलू उपायों कें बारें में बता रहे है जिसे अजमाकर आप इस समस्या से काफी जल्दी निजात पा सकती है। जानें कमर दर्द से छुटकारा पाने वाले घरेलू उपाय।

कमर दर्द से निजात पाने के लिये आप एक खडाई में सरसो का तेल डालकर उसमें लहसुन की तीन-चार कलियॉ के साथ अजवाइन को डालकर गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।
नमक मिले गर्म पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद इससे कमर की सिकाई करें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।
कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छी तरह से गर्म कर लें। अब इस गर्म नमक को किसी सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। और इस पोटली से कमर की सिकाई करें काफी जल्द ही अराम मिलने लगेगा।
अजवाइन को तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेंके। और ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।

कमर दर्द के लिए व्यायाम करना सबसे अच्छा तरीका है। इसके लिये आप रोज सुबह सैर पर जाये,तैराकी या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है।
ऑफिस में काम करते वक्त अधिक देर तक एक ही पोजीशन में ना। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।
कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, जो कमर के दर्द का प्रमुख कारण बनती है इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।



हाथ-पैरो का सुन्न हो जाना और हाथ और पैरो में झनझनाहट होना जानें इस प्रकार



हाथ पैर किस प्रकार सुन्न हो जाते है आइए जानें 


अकसर जब आप कभी एक ही अवस्था में बैठे रह जाते हैं तो आपके हाथ और पैर सुन्नं पड़ जाते हैं, जिसके कारण आपको कभी कोई भी चीज़ को छूने का एहसास मालूम नहीं पड़ता है। यही नहीं, इसके अलावा आपको प्रभावित स्था न पर दर्द, कमजोरी या ऐठन भी महसूस होती होगी। लगभग सभी लोग इस अनुभव का शिकार जरूर हुए होंगे।


लगातार हाथों और पैरों पर प्रेशर के अलावा यह सुन्न पड़ना, किसी ठंडी चीज को बहुत देर तक छूते रहने से, तंत्रिका चोट, बहुत अधिक शराब का सेवन, थकान, धूम्रपान, मधुमेह, विटामिन या मैग्नीहशियम की कमी आदि से भी होता है।

शरीर के अंग का सुन्नाआ पड़ जाना एक आम सी समस्यात जरूर है लेकिन इसके कई कारण भी हो सकते हैं। अगर यह समस्या कुछ मिनटों तक रहती है तब तो घबराने वाली कोई बात नहीं है लेकिन अगर यही कई-कई घंटों तक बनी रहे तो आपको डॉक्ट र के पास जाने की आवश्यतकता जरूर है, क्योंकि यह किसी बड़ी बीमारी का भी लक्षण हो सकता है।


एक ही मुद्रा में ज्यादा देर तक रहने से हाथ-पैर जब सुन्न पड़ जाते हैं और उनमें झनझनाहट होने लगती है, तो कई बार व्यक्ति घबरा जाता है। खीज भी बहुत होती है, लेकिन क्या आपको मालूम है कि हाथ-पैर सुन्न होते क्यों हैं?


हाथ पैर को सुन्न होने से कैसे बचे , आइए जानें 


गरम पानी से सेंके

शरीर का जो भी अंग सुन्न पड़ गया हो वहां गरम पानी की बोतल का सेंक रखें। इससे वहां की रक्त संचालन ठीक हो जाएगी। इस टिप्स की मदद से आपकी मासपेशियां और नसें रिलैक्स होंगी। एक साफ कपड़े को गरम पानी में 5 मिनट के लिए भिगोएं रखें और फिर उससे प्रभावित जगह को सेंके। आप चाहें तो गरम पानी से स्नाेन भी कर सकती हैं।


व्यायाम करना ना भूलें

व्यावयाम (एक्सरसाइज़) करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन तेज़ी से होता है और सुन्न वाली जगह पर ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ जाती है। जिन लोगों को अकसर सुन्न होने की शिकायत रहती है उन्हें रोजाना हाथ और पैरों का 15 मिनट व्याेयाम करना चाहिए। इसके अलावा हफ्ते में 5 दिन के लिए 30 मिनट एरोबिक्सव करें, जिससे आप हमेशा स्वस्थ बने रहेंगे।


मसाज कैसे करें 

जब कभी हाथ-पैर सुन्न हो जाएं तब उन्हें और मसाज देना शुरू कर दें। बता दें कि इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। गरम जैतून तेल, नारियल तेल या सरसों के तेल से मसाज करना बहुत अच्छा होगा।

हल्दी और दूध पिये 

घर के खाने में प्रयोग होने वाली हल्दी में ऐसे तत्वट मौजूद हैं जो आपके ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं और साथ ही यह सूजन, दर्द और परेशानी को भी कम करती है। एक गिलास दूध में थोड़ा हल्दी मिक्स करके हल्की आंच पर पकाएं। आप चाहे तो इसमें हल्दी भी मिला सकते हैं। इसे पीने से आपको काफी राहत मिलेगी। आप चाहे तो हल्दी और पानी के पेस्ट से प्रभावित स्थान की मसाज भी कर सकते हैं।


दालचीनी का उपयोग करें

दालचीनी में कैमिकल और न्यूरट्रियंट्स दोनों ही मौजूद होते हैं जो हाथ और पैरों में ब्लड फ्लो को बढ़ाते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि रोजाना 2-4 ग्राम दालचीनी पावडर को लेने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। इसको लेने का अच्छाे तरीका है कि एक गिलास गरम पानी में 1 चम्मच दालचीनी पावडर मिलाएं और दिन में एक बार पियें। दूसरा तरीका है कि 1 चम्मच दालचीनी और शहद मिला कर सुबह कुछ दिनों तक सेवन करें।


मैग्नीशियम का सेवन जरूर करें इस प्रकार 

हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवे, बीज, ओटमील, पीनट बटर, ठंडे पानी की मछलियां, सोया बीन, अवाकाडो, केला, डार्क चॉकलेट और लो फैट दही आदि जरूर खाएं। पैर सुन्न नहीं होंगे। आप रोजाना मैग्नीशियम 350 एम जी की सप्प लीमेंट भी ले सकती हैं। पर इस बारे में डॉक्टर से जरूर बात कर लें।


विज्ञान के मुताबिक, हाथ पैर का सुन्न पड़ जाना बेहद आम-सी बात है। किसी एक मुद्रा में लगाता बैठे रहने या सोने के बाद जब आप उठते हैं, तो कई बार आपने महसूस किया होगा कि आपका पैर काम ही नहीं कर रहा। शरीर का वह हिस्सा सुन्न पड़ जाता है और उसमें एक खास तरह की झनझनाहट होने लगती है। जब आप चलने की कोशिश करते हैं या फिर पैरों में जूते या चप्पल डालने की कोशिश करते हैं, तो पैर काम करना बंद कर चुका होता और ऐसा लगता है, कि खड़े होते ही आप गिर जायेंगे, लेकिन कुछ देर हिलने-डुलने या चलने पर स्थिति सामान्य हो जाती है।


बिल्कुल ऐसा ही हाथ के साथ भी होता है। कुर्सी के हत्थे पर देर तक हाथ टिकाने या बिस्तर में बांह के बल सोने या हाथ का तकिया बनाकर सोने से हाथ भी सुन्न होकर झनझनानेलगता है। हालांकि हाथ-पैर का इस तरह सुन्न पड़ जाना कोई परेशानी की बात नहीं है। असल में एक ही मुद्रा में देर तक रहने से कुछ नसें दब जाती हैं। इस कारण हाथ-पैर को पर्याप्त मात्रा में अॉक्सीजन नहीं मिल पाती। अॉक्सीजन के अभाव में अंग बचाव की मुद्रा में आ जाते हैं और सिर्फ बहुत ज़रूरी काम ही करते हैं।


शरीर के किसी भी अंग में होने वाली सुन्नता का पता मस्तिष्क को भी चल जाता है, जिसके चलते मस्तिष्क आॉक्सीजन के लिए परेशान होते हाथ-पैर की मदद करने लगता है। दिमाग झनझनाहट का सिग्नल भेज कर शरीर को हिलने-डुलने के लिए बाध्य करता है। आमतौर पर हाथ या पैर का सुन्न होना सामान्य-सी ही बात है। लेकिन यदि सुन्नता लंबे समय तक बनी रहे, दिन में कई-कई बार हाथ-पैर सुन्न पड़ने लगें या फिर झनझनाहट खत्म होने में बहुत अधिक समय लग रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि कभी-कभीझनझनाहट और सुन्नता स्लिप डिस्क, मल्टीपल स्क्लेरोसिस या डायबिटीज के चलते भी होती है।

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विटामिन बी फूड को डायट में करें शामिल

अगर हाथ-पैरों में झन्न-झन्नाहट सी होती है तो अपने आहार में ढेर सारे विटामिन बी, बी6 और बी12को शामिल करें। इनकी कमी से भी हाथ, पैरों, बाजुओं और उंगलियों में सुन्न पैदाहो जाती है। आपको अपने आहार में अंडे, अवाकाडो, मीट, केला, बींस, मछली, ओटमील, दूध, चीज़, दही, मेवे, बीज और फल शामिल करने चाहिये।

रस्सी कूदें, वज़न घटाएं


स्किपिंग यानी रस्सी कूदना एक बेहतरीन ऐरोबिक एक्सरसाइज़ है. इससे पूरे शरीर की एक्सरसाइज़ होती है. यह वज़न कम करने के साथ ही बांह और काफ़ मसल्स को टोन करने में मदद करता है. नियमित रूप से रस्सी कूदने से हड्डियां मज़बूत होती हैं और एकाग्रता व स्टेमिना भी बढ़ता है. इतना ही नहीं, यह हमारे हृदय को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है,’’ कहना है फ़िटनेस ट्रेनर योगेश चव्हाण का. स्किपिंग से होनेवाले फ़ायदों के बारे में बताते हुए फ़िटनेस ट्रेनर प्रसाद शेट्टी कहते हैं,‘‘स्किपिंग मेटाबॉलिज़्म व बोन डेंसिटी बढ़ाने के साथ ही पैर, घुटनों और ऐंकल को मज़बूत बनाने में सहायक है. नियमित रूप से स्किपिंग करने से आंख, हाथ और पैरों के बीच कोऑर्डिनेशन यानी तालमेल बढ़ता है, लेकिन मैं बताना चाहूंगा कि यह एक शॉर्ट ड्यूरेशन एक्सरसाइज़ है यानी इसे ज़्यादा से ज़्यादा २० मिनट तक ही करना चाहिए. इससे ज़्यादा समय तक लगातार स्किपिंग करने से आपके लोअर बॉडी पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है, जिससे घुटनों के चोटिल होने का ख़तरा बढ़ जाता है. मेरा मानना है कि इसका फ़ायदा उठाने के लिए सिर्फ़ स्किपिंग करने के बजाय इसे अपने वर्कआउट प्लान में शामिल करना चाहिए.’


रस्सी कूदें, वज़न घटाएं
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आप वज़न तो कम करना चाहती हैं, लेकिन जिम जाने के लिए समय नहीं निकाल पा रही हैं तो स्किपिंग यानी रस्सी कूदना आपके लिए सही विकल्प है.

लक्ष्य: वज़न कम करना और शारीरिक क्षमता बढ़ाना. 
कितनी कैलोरी ख़र्च होती है: 10 मिनट तक लगातार रस्सी कूदकर आप 100 कैलोरी बर्न कर सकती हैं. 
कहां करें: कहीं भी, घर, पार्क या किसी भी खुले स्थान पर. 
आपको आवश्यकता होगी: स्किपिंग रोप (रस्सी) व अच्छी क्वॉलिटी के स्पोर्ट्स शूज़ की.

बीमारियों से भी बचाता है
रस्सी कूदने से ऑस्टिओपरोसिस होने का ख़तरा भी कम होता है. यूके के ऑस्टिओपरोसिस सोसायटी द्वारा किए गए शोध के अनुसार, नियमित रूप से स्पिकिंग करने से उम्र के साथ हड्डियों के क्षय होने की दर में गिरावट आती है, जिससे ऑस्टिओपरोसिस जैसी बीमारी होने का ख़तरा कम हो जाता है. 
क्या आप जानती हैं?

10 मिनट स्किपिंग करने से उतना ही फ़ायदा मिलता है, जितना की 30 मिनट जॉगिंग, 15 मिनट दौड़ने व 12 मिनट तैराकी करने से.

किस तरह मदद करता है: ‘‘स्किपिंग यानी रस्सी कूदना एक बेहतरीन ऐरोबिक एक्सरसाइज़ है. इससे पूरे शरीर की एक्सरसाइज़ होती है. यह वज़न कम करने के साथ ही बांह और काफ़ मसल्स को टोन करने में मदद करता है. नियमित रूप से रस्सी कूदने से हड्डियां मज़बूत होती हैं और एकाग्रता व स्टेमिना भी बढ़ता है. इतना ही नहीं, यह हमारे हृदय को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है,’’ कहना है फ़िटनेस ट्रेनर योगेश चव्हाण का. स्किपिंग से होनेवाले फ़ायदों के बारे में बताते हुए फ़िटनेस ट्रेनर प्रसाद शेट्टी कहते हैं,‘‘स्किपिंग मेटाबॉलिज़्म व बोन डेंसिटी बढ़ाने के साथ ही पैर, घुटनों और ऐंकल को मज़बूत बनाने में सहायक है. नियमित रूप से स्किपिंग करने से आंख, हाथ और पैरों के बीच कोऑर्डिनेशन यानी तालमेल बढ़ता है, लेकिन मैं बताना चाहूंगा कि यह एक शॉर्ट ड्यूरेशन एक्सरसाइज़ है यानी इसे ज़्यादा से ज़्यादा २० मिनट तक ही करना चाहिए. इससे ज़्यादा समय तक लगातार स्किपिंग करने से आपके लोअर बॉडी पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है, जिससे घुटनों के चोटिल होने का ख़तरा बढ़ जाता है. मेरा मानना है कि इसका फ़ायदा उठाने के लिए सिर्फ़ स्किपिंग करने के बजाय इसे अपने वर्कआउट प्लान में शामिल करना चाहिए.’’

ध्यान दें: रस्सी कूदना एक खेल है. इसे करने के लिए हाथों और पैरों के बीच समन्वय बैठाने की आवश्यकता होती है. इसके लिए आपके बांहों और पैरों के बीच ट्यूनिंग होना ज़रूरी है. यदि आप पहली बार रस्सी कूद रही हैं तो आपको सीखने में कुछ समय लग सकता है इसलिए शुरुआत में 50 से 150 रिपिटिशन करें और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं. प्रसाद शेट्टी कहते हैं,‘‘स्किपिंग पैडेड सर्फ़ेस (सतह), जैसे- योगा मैट इत्यादि पर करना चाहिए. कॉन्क्रीट, हार्ड या उबड़-खाबड़ जगह पर स्पिकिंग करने से जॉइन्ट्स पर अनावश्यक ज़ोर पड़ता है.’’ वहीं योगेश सलाह देते हैं,‘‘अन्य एक्सरसाइज़ की तरह स्किपिंग शुरू करने से पहले वॉर्मअप और स्ट्रेचिंग करना ज़रूरी है. साथ ही स्किपिंग करते समय पंजों पर रहें. कुछ लोग स्किपिंग करते समय ज़मीन से बहुत ऊंचा कूदते हैं, जो कि ग़लत है. इस तरह रस्सी कूदने से जल्दी थकावट होती है और चोटिल होने का ख़तरा भी रहता है. आपको ज़मीन से एक इंच से ज़्यादा ऊंचा नहीं कूदना चाहिए.’’इस बारे में बात करते हुए फ़लक्स फ़िटनेस सेंटर के ट्रेनर दिलीप सालुंखे कहते हैं,‘‘स्पिकिंग करने के लिए पूरी तरह फ़िट होना बहुत ज़रूरी है. घुटनों में चोट, पीठ दर्द, मसल्स पुल होने या अन्य किसी भी तरह की शारीरिक समस्या होने पर स्किपिंग नहीं करना चाहिए.’’ 

यूं करें: शुरुआत में एक मिनट रस्सी कूदें और फिर 30 सेकंड आराम करें. ऐसा 4 बार यानी कुछ छह मिनट तक करें और फिर दो-तीन मिनट आराम करें. इस तरह स्किपिंग करने से हृदयगति संतुलित रहती है और कैलोरीज़ भी बर्न होती हैं.

बदलाव लाएं: यदि आप एक ही तरह से रस्सी कूदकर बोर हो चुकी हैं तो पैटर्न में विविधता लाकर इसे रोचक बना सकती हैं. इसके लिए आप डबल-फ़ुट हूप्स, सिंगल-फ़ुट हूप्स, क्रिस-क्रॉस इत्यादि तरीक़े ट्राई कर सकती हैं.



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कब्ज और पेट साफ रखने के आसान घरेलू उपाय



पेट हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर आपका पेट साफ है तो एक अच्छा निरोगी जीवन जी सकते हैं। अगर आपका पेट साफ नहीं रहता तो आपको बहुत सारी बीमारियां घेर लेती है। जैसे भूख ना लगना लीवर संबंधी परेशानी पेट दर्द, कब्ज, गैस और अगर आप इस बीमारी से लंबे समय से पीड़ित है तो इसका असर आपको अपनी त्वचा पर भी मिल जाता है। लंबे समय से इस बीमारी से पीड़ित रहने पर आपकी त्वचा की चमक गायब हो जाएगी और आपकी त्वचा मुरझाई हुई सी लगेगी। और आपको स्किन संबंधी और भी कई सारी समस्याएं हो सकती हैं। इसीलिए दोस्तों पेट का साफ होना बहुत जरूरी है। चलिए जानते हैं किस तरह आप अपने पेट को साफ कर सकते हैं।


कब्ज होने के कारण :-


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कब्ज कई तरह का हो सकता है। जैसे कभी-कभार होने वाला कब्ज, क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन (कब्ज बहुत ज्यादा बढ़ जाने पर), यात्रा या उम्र से संबंधित कब्ज। कब्ज में हमारी आंतें मल को छोड़ नहीं पातीं। ऐसा कई वजहों से हो सकता है, मसलन, खानपान में अचानक आया बदलाव, यात्रा, उम्र, गर्भावस्था आदि।

खानपान में किसी भी तरह का बदलाव कब्ज का कारण बन सकता है, जैसे अचानक बहुत ज्यादा तैलीय खाना खाने या वजन घटाने के लिए खाने पर नियंत्रण करने की वजह से भी कब्ज हो जाता है। इसके अतिरिक्त यदि आप बहुत ज्यादा वसायुक्त चीजें पसंद करते हैं या शराब और कॉफी पीते हैं तो भी कब्ज के शिकार हो सकते हैं।


कुछ लोग बहुत कम पानी पीते हैं। ऐसे लोग मानते हैं कि दिन में दो गिलास पानी पी लें तो भी उनका काम चल जाएगा, लेकिन इससे हमारे पाचन तंत्र और शरीर की जरूरतें पूरी नहीं होतीं।

क्या आप रोजाना कसरत करते हैं? रोजाना न सही, सप्ताह में चार दिन तो करते होंगे। नहीं? पाचन तंत्र के बिगड़ने या कब्ज होने की यह सबसे बड़ी वजह है। शारीरिक व्यायाम के अभाव में हमारा मेटाबॉलिज्म खराब हो जाता है। मेटाबॉलिज्म के कमजोर पड़ते ही हमारी पाचन क्रिया गड़बड़ हो जाती है।


कुछ दवाओं के सेवन से भी कब्जियत हो जाती है। ज्यादातर मामले पेन किलर्स की वजह से देखने को मिले हैं। कुछ विटामिन और आयरन की खुराक से भी यह समस्या हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर से राय लेकर आप इन दवाओं के साथ स्टूल सॉफ्टनर ( मल को ढीला करने बाली) दवाएं ले सकते हैं।

साधारण सी दिखने वाली परेशानी कई बार जी का जंजाल बन जाती है। कब्ज की बीमारी कुछ ऐसी ही यदि कब्ज पर लगाम न कसा जाए तो अपने विकराल रूप में आने के बाद यह कई दूसरी बीमारियों को भी न्योता देता है।

सुबह पेट साफ करने का कारगर और आसान घरेलू उपाय :

इस नुस्खे का प्रयोग आपको सुबह के समय करना है नुस्खे के लिए आपको एक कप गर्म पानी और उसमें आधा नींबू निचोड़ ले और एक चम्मच अरंडी (कैस्टर ऑयल) का तेल मिला ले और आधा चम्मच नमक मिलाकर इन सब चीजों को अच्छी तरह मिक्स कर ले एक गिलास गुनगुना पानी पीने के बाद इस मिश्रण का सेवन करें। 15 से 20 मिनट के बाद ही इसका असर आपको दिख जाएगा और आपका पेट पूरी तरह साफ हो जाएगा।

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रात को सोते वक्त अरंडी के तेल को हल्के गरम दूध में मिलाकर पीजिए। इससे पेट साफ होगा।

कब्ज से निजात दिलाने वाले 10 अन्य घरेलू उपाय :

सुबह उठने के बाद नींबू के रस को काला नमक मिलाकर पानी के साथ सेवन कीजिए। इससे पेट साफ होगा।

20 ग्राम त्रिफला रात को एक लिटर पानी में भिगोकर रख दीजिए। सुबह उठने के बाद त्रिफला को छानकर उस पानी को पी लीजिए। इससे कुछ ही दिनों में कब्ज की शिकायत दूर हो जाएगी।

कब्ज के लिए शहद बहुत फायदेमंद है। रात को सोने से पहले एक चम्‍मच शहद को एक गिलास पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से पीने से कब्‍ज दूर हो जाता है।

हर रोज रात में हर्र को पीसकर बारीक चूर्ण बना लीजिए, इस चूर्ण को कुनकुने पानी के साथ पीजिए। कब्ज दूर होगा और पेट में गैस बनना बंद हो जाएगा।

इसबगोल की भूसी कब्ज के लिए रामबाण दवा है। दूध या पानी के साथ रात में सोते वक्त इसबगोल की भूसी लेने से कब्ज समाप्त होता है।


पका हुआ अमरूद और पपीता कब्‍ज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। अमरूद और पपीता को किसी भी समय खाया जा सकता है।


किशमिश को पानी में कुछ देर तक डालकर गलाइए, इसके बाद किशमिश को पानी से निकालकर खा लीजिए। इससे कब्ज की शिकायत दूर होती है।

पालक का रस पीने से कब्‍ज की शिकायत दूर होती है, खाने में भी पालक की सब्‍जी का प्रयोग करना चाहिए।

अंजीर के फल को रात भर पानी में डालकर गलाइए, इसके बाद सुबह उठकर इस फल को खाने से कब्‍ज की शिकायत समाप्त होती है।

मुनक्का में कब्ज नष्ट करने के तत्‍व मौजूद होते हैं। 6-7 मुनक्‍का रोज रात को सोने से पहले खाने से कब्ज समाप्त होती है। 

कृपया ध्यान रखे :

कब्ज की समस्‍या से बचने के लिए नियमित रूप से व्यायाम और योगा करना चाहिए। गरिष्ठ भोजन करने से बचें।

इन नुस्खों को प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। अपनाने के बाद भी अगर पेट की बीमारी ठीक नही होती तो चिकित्सक से संपर्क अवश्य कीजिए।

वजन कम करने के फायदे, जानकर रहे जायगे हैरान


वजन कम करना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन फिर भी कई बार किसी विशेष कारण के चलते हम जल्द से जल्द वजन कम करना चाहते हैं। आने वाले कुछ दिनों में शादी या कोई खास समारोह है या फिर आपने ठान लिया है, कि अगले कुछ दिनों में आप अपने फेवरेट लिबास में फिट होकर ही रहेंगे, जो अब तक नहीं हो पा रहे हैं, तो हम कर रहे हैं आपकी मदद। 






लेकिन यह बात ध्यान रखें कि 10 दिनों में आपका वजन बहुत ज्यादा कम नहीं हो सकता और अगर हुआ भी तो यह अपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए हम कुछ इंचेस कम करने के बारे में ही सोच सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कैसे करें वजन कम 10 दिनों में - 
एकदम भूखे रहकर या कम खाकर वजन कम करने की कोशि‍श न करें, इससे आपका मेटाबॉलिज्म कम हो जाता है, जिससे वजन धीमी गति से घटता है। दिनभर में कम से कम 1000 कैलोरीज अवश्य लें। बल्कि बेहतर होगा कि आप 1200 कैलोरी प्रतिदिन लें, ताकि उर्जा का स्तर बना रहे और थकान न हो। 
बाहर का तेल और मसालेदार खाना नजरअंदाज करें। घर पर बना लो कैलोरी फूड ही खाएं, और फाइबर लें। इसके लिए आप फल और सब्ज‍ि‍यों का प्रयोग कर सकते हैं। हो सके तो घर पर ही ताजे फलों का जूस बनाकर पिएं और उनमें शक्कर का प्रयोग न करें तो बेहतर होगा। 
आप केवल फ्रूट डाइट और लिक्व‍ि‍ट डाइट लेकर भी तेजी से वजन कम कर सकते हैं, लेकिन यह किसी डाइटीशियन की निगरानी में ही करें तो बेहतर होगा।आप सूखे मेवों का प्रयोग भी सीमित मात्रा में कर सकते हैं। 
दिन में दो बार भोजन के बजाए प्रोटीन शेक एक बेहतर विकल्प है। इसे लेने के बाद घंटों तक भूख नहीं लगती और आप कमजोरी भी महसूस नहीं करते। किसी एक वक्त आप हल्का भोजन ले सकते हैं। 
नेचुरल पेय पदार्थों जैसे- नारियल पानी, ग्रीन-टी, हर्बल वॉटर जिसमें तुलसी या अदरक का जूस मिला हो का प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा कोशिश करें की गर्म या गुनगुना पानी ही पिएं। 
तली-भुनी चीजों, वेफर्स, मीठा, व्हाइट ब्रेड, बिस्किट, मैदे की बनी चीजें, कॉकटेल, शर्बत, सॉफ्टड्रिंक्स या कोल्ड्रिंक्स, और पैकेट में उपलब्ध सूप या जूस से दूरी बनाए रखें। 
खीरा, पार्सले, मेथी, नींबू, खट्टे फलों को खाने में शामिल करें। आप चाहें तो दही का सेवन भी कर सकते हैं। 
रोटी में जौ का आटा प्रयुक्त हो, तो यह वजन कम करने में आपकी मदद कर सकती है। या फिर औट्स का प्रयोग करें। 
प्रतिदिन सुबह खाली पेट, गरम पानी में नींबू और शहद मिलाकर पिएं। हो सके तो इस पानी में दालचीनी का पाउडर डाल दें। यह बेहद असरकारक और स्वास्थ्यवर्धक होता है। 
रोजाना कम से कम 1 घंटा पैदल चलें और 90 मिनट तक कार्ड‍ियो वर्कआउट करें। इससे आपकी बॉडी टोन्ड दिखेगी और रक्त संचार तेज होने से चेहरा भी निखरेगा। 



पति-पत्नी के इस दिन बनाए गए शारीरिक संबंध से किन्नर की उत्पत्ति हो सकती है 





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लेकिन आज हम ‘गर्भ संस्कार’ में दिए गए कुछ निर्देशों के बारे में बताएंगे। ये ऐसे निर्देश हैं जो बताते हैं कि पति-पत्नी को किस दिन शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए।


हिन्दू शास्त्रों में मनुष्य के जीवन से जुडे कई रहस्य हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक, हर प्रकार का उल्लेख हिन्दू शास्त्रों एवं ग्रंथों में पाया जाता है। साइंस ने भले ही वर्षों के बाद जन्म और मृत्यु के रहस्यों को अपने मुताबिक लोगों तक पहुंचाया, लेकिन यही रहस्य हजारों वर्ष पहले हिन्दू शास्त्रों में खोल दिए गए थे।


गर्भ उपनिषद में स्त्री-पुरुष के संबंध बनाने से लेकर किस प्रकार से मां के गर्भ में शिशु का जन्म होता है, कैसे वह समय के साथ विकसित होता है और गर्भ के भीतर 9 महीने तक वह क्या सोचता है, इसके बारे में बताया गया है।


इतना ही नहीं, इस महान ग्रंथ में यहां तक बताया गया है कि किस प्रकार से एक किन्नर की उत्पत्ति होती है। किन हालातों में मां के गर्भ से एक किन्नर का जन्म होता है, इस बात के रहस्य को गर्भ उपनिषद में उजागर किया गया है।


लेकिन आज हम ‘गर्भ संस्कार’ में दिए गए कुछ निर्देशों के बारे में बताएंगे। ये ऐसे निर्देश हैं जो बताते हैं कि पति-पत्नी को किस दिन शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए।


दरअसल यदि पति-पत्नी संतान प्राप्ति के लिए संभोग कर रहे हैं, तो उन्हें किस दिन एक-दूसरे से दूर रहना चाहिए, इसके बारे में गर्भ संस्कार में जानकारी प्रदान की गई है।



गर्भ संस्कार के अनुसार यदि शुभ दिन पर एक स्त्री गर्भधारण करे, तो आने वाली संतान भी मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ एवं गुणी भी होती है। लेकिन अशुभ दिन पर गर्भधारण करने से सभी अशुभ ग्रहों का असर होने वाली संतान पर होता है। फिर पैदा होने के बाद ऐसी संतान एक के बाद एक परेशानियां खड़ी करती है।

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तो चलिए आपको सबसे पहले बताते हैं कि अगर पति-पत्नी संतान प्राप्ति के लिए एक-दूसरे के साथ संबंध बनाने की सोच रहे हैं, तो वे कौन से दिन हैं जिस दिन उन्हें यह विचार मन से निकाल देना चाहिए। इस दिन का स्वामी होता है मंगल, अत्यंत क्रोधी एवं विनाशकारी ग्रह माना जाता है मंगल। इसलिए शास्त्रों के अनुसार इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है।


गर्भ संस्कार के अनुसार यह दिन गर्भधारण के लिए बेहद अशुभ है। यदि इस दिन स्त्री गर्भधारण कर ले, तो होने वाली संतान बेहद क्रोधी और घमंडी होती है। किसी की बात ना सुनना, केवल अपने मन मुताबिक कार्य करना, सभी को परेशान करना और स्वभाव में ही हिंसा का होना, ऐसे होते हैं मंगल ग्रह के प्रभाव में जन्मे बच्चे।


यह दिन शनि ग्रह को समर्पित होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार क्रूर एवं पापी ग्रह की श्रेणी में आता है शनि ग्रह। इसलिए इस दिन पति-पत्नी का संतान उत्पत्ति के विचार से करीब आना अशुभ माना जाता है।


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शनि ग्रह के प्रभाव से होने वाली संतान निराशावादी एवं नकारात्मक सोच वाली होती है। शनि ग्रह कई बार ऐसे बच्चों को ताउम्र रोग भी प्रदान करता है।




दरअसल रविवार के दिन को पूर्ण रूप से भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित माना गया है। और ऐसे शुभ दिन पर पति-पत्नी का शारीरिक संबंध बनाना ‘पाप’ कहलाता है। फिर चाहे वह संतान की प्राप्ति के लिए ही क्यों ना हो, इसदिन पति-पत्नी को दूर रहना चाहिए।

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यही कारण है कि इस लिस्ट में रविवार का दिन भी शामिल है। इस दिन आप सूर्य देव से केवल अच्छी संतान पाने की प्रार्थना कर सकते हैं। किंतु इस दिन स्त्री गर्भधारण कर ले तो सूर्य देव के प्रकोप का सामना करती है ऐसी संतान। क्रोध, ईर्ष्या, स्वभाव में ही हर पल की गर्मी, ऐसे लक्षण वाली होती है संतान।


गर्भ संस्कार के अनुसार सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार गर्भधारण के लिए शुभ दिन हैं। इन चार दिनों के गर्भधारण से उत्पन्न हुई संतान गुणी, माता-पिता की आज्ञाकारी, सेहतमंद और मानसिक रूप से तेज होती है। तो यदि आप सोच लें कि मंगलवार का दिन आधी रात 12 बजे समाप्त हो गया है और इसके बाद गर्भधारण करना उचित होगा, तो यह गलत है। हिन्दू शास्त्रों द्वारा बताया गया समय का यह नियम हमेशा याद रखना चाहिए।


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