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भारतीयों में तेजी से फैल रही हैं फैटी लिवर की बीमारी, ऐसे करें बचाव



भारतीयों में तेजी से फैल रही हैं फैटी लिवर की बीमारी, ऐसे करें बचाव

हेल्‍दी लाइफ के लिए लिवर का हेल्‍दी होना बहुत जरूरी है क्‍योंकि लिवर शरीर के जरूरी अंगों में से एक है और शरीर के महत्‍वपूर्ण काम जैसे डाइजेशन में अहम भूमिका निभाना से लेकर बॉडी में मौजूद टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करता है। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट का कहना हैं कि हेल्‍थ के प्रति लापरवाही के चलते फैटी लिवर की बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो लोगों की हेल्‍थ को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। फैटी लिवर एक ऐसी बीमारी है जो शरीर में अधिक फैट बनने के कारण होता है। माना जाता था कि लिवर में प्रॉब्‍लम ज्‍यादा शराब पीने से होती है। लेकिन साल 2018 की तुलना में इस साल गैर-अल्कोहल फैटी लिवर रोग (एनएएफएलडी) के मामलों में वृद्धि हुई है। हालांकि, अभी तक कोई निश्चित आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि हर महीने फैटी लिवर रोग के कम से कम 10 से 12 नए मामले सामने आते हैं।
हालांकि सभी प्रकार के नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) खतरनाक नहीं होते हैं। लेकिन इनकी अनदेखी आगे चलकर परेशानी का सबब बन सकती है। एक बार बीमारी की जानकारी मिलने के बाद, रोगी को यह जानने के लिए आगे के टेस्‍टों से गुजरना होता है कि लिवर में जख्म या सूजन तो नहीं है। लिवर की सूजन के लगभग 20 प्रतिशत मामलों में सिरोसिस विकसित होने की संभावना होती है।


डॉक्‍टर की राय
हेल्थ केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉक्‍टर के.के. अग्रवाल का कहना है कि नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) ऐसे लोगों को प्रभावित करती हैं, जो शराब नहीं पीते हैं। जैसा कि नाम से पता चलता है, इस स्थिति की मुख्य विशेषता लिवर में बहुत अधिक फैट का जमा होना है। एक हेल्‍दी लिवर में कम या बिल्कुल भी फैट नहीं होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, 'एनएएफएलडी वाले लोगों में हार्ट डिजीज विकसित होने की अधिक संभावना रहती है और यह उनमें मृत्यु के सबसे आम कारणों में से एक है। वजन में लगभग 10 प्रतिशत की कमी लाने से फैटी लिवर और सूजन में सुधार हो सकता है।' आइए ऐसे की कुछ बातों के बारे में जानें जिन्‍हें ध्‍यान में रखकर आप फैटी लिवर की समस्‍या से बचाव पा सकते हैं।

इस तरह रखें ध्यान-
लिवर को हेल्‍दी रखने के लिए अपनी डाइट में फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और हेल्‍दी फूड से भरपूर वनस्पति को शमिल करें।
अगर आप अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, तो प्रत्येक दिन खाने वाली कैलोरी की संख्या कम करें और ज्‍यादा एक्‍सरसाइज करें।


वजन नॉर्मल है तो हेल्‍दी डाइट का चयन करके और एक्‍सरसाइज करके इसे हेल्दी बनाए रखने की कोशिश करें।
हफ्ते के अधिकांश दिनों में एक्‍सरसाइज करें। हर दिन कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्ट‍िविटी करने की कोशिश करें।


पेट के कैंसर के लिए रामबाण है ये आयुर्वेदिक उपाय, बचना है तो जरूर आजमाएं


कैंसर एक खतरनाक बीमारी है जो धीरे-धीरे लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। कैंसर का नाम सुनते ही अच्‍छे-अच्‍छों के पसीने छूटने लगते हैं क्‍योंकि समय पर कैंसर की जानकारी और इलाज ना होने पर लोग अपनी जान भी गवां सकते हैं। आज पूरी में दुनिया इस घातक बीमारी के कारण लोग अपनी जिंदगी से लड़ाई लड़ रहे हैं। जहां एक ओर पुरूष मुंह और फेफड़े का कैंसर दूसरी ओर महिलाओं में ब्रेस्‍ट और सर्वाइकल कैंसर से सबसे ज्‍यादा प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा पेट का कैंसर भी लोगों में बहुत ज्‍यादा पाया जा रहा है। कैंसर को जड़ से खत्म करने के लिए वैज्ञानिक इसका इलाज खोज रहे हैं और लोग इस समस्‍या से निपटने के लिए आयुर्वेद की तलाश कर रहे हैं। क्योंकि आयुर्वेद में गंभीर बीमारियों से लड़ने की क्षमता है और भारत में सदियों से आयुर्वेदिक पद्धति द्वारा बीमारियों का इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा कई रिसर्च ने भी इस बात को साबित किया है कि आयुर्वेद से आप कैंसर को रोक सकते हैं।


हाल में हुई एक रिसर्च ने पेट के कैंसर के लिए हल्‍दी को फायदेमंद बताया है। जी हां नई रिसर्च के अनुसार कक्यूर्मा लॉन्गा (हल्दी के पौधे) की जड़ों से निकले करक्यूमिन को पेट का कैंसर रोकने या उससे निपटने में मददगार पाया गया है। लेकिन सबसे पहले हम पेट के कैंसर के कारणों और कारकों के बारे में जान लेते हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
इस बारे में हेल्थ केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष पद्मश्री डॉक्‍टर के के अग्रवाल का कहना हैं कि पेट का कैंसर कई वर्षों में धीरे-धीरे विकसित होता है, इसलिए शुरूआत में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। लेकिन सामान्य लक्षणों में भूख कम होना, वजन में कमी, पेट में दर्द, अपच, मतली, उल्टी (ब्‍लड के साथ या बिना उसके), पेट में सूजन या तरल पदार्थ का निर्माण, और स्‍टूल में ब्‍लड आना शामिल हैं। इन लक्षणों में से कुछ का इलाज किया जाता है, क्योंकि वे दिखाई देते हैं और गायब हो जाते हैं, जबकि अन्य लक्षण उपचार के बावजूद जारी रहते हैं।
पेट के कैंसर के मुख्य कारक

पेट का कैंसर के मुख्‍य कारकों में बहुत ज्‍यादा तनाव, स्‍मोकिंग और अल्कोहल जिम्मेदार हो सकते हैं। स्‍मोकिंग विशेष रूप से इस स्थिति की संभावना को बढ़ाता है। भारत में कई जगहों पर, आहार में फाइबर सामग्री कम रहती है। अधिक मसालेदार और मांसाहारी भोजन के कारण पेट की परत में सूजन हो सकती है, जिसे अगर छोड़ दिया जाए तो कैंसर हो सकता है।

पेट के कैंसर के लिए फायदेमंद है हल्‍दी
फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ साओ पाउलो (यूनिफैस्प) और फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ पारा (उफ्पा) के शोधकतार्ओं ने ब्राजील में यह जानकारी दी। करक्यूमिन के अलावा, हिस्टोन गतिविधि को संशोधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अन्य यौगिकों में कोलकेल्सीफेरोल, रेस्वेराट्रोल, क्वेरसेटिन, गार्सिनॉल और सोडियम ब्यूटाइरेट (आहार फाइबर के फरमेंटेशन के बाद आंत के बैक्टीरिया द्वारा उत्पादित) प्रमुख थे।

क्या कहते हैं आंकड़े
वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड इंटरनेशनल के पेट के कैंसर संबंधी आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में हर साल गैस्ट्रिक कैंसर के अनुमानित 9,52,000 नए मामले सामने आते हैं, जिसमें लगभग 7,23,000 लोगों (यानी 72 प्रतिशत मृत्यु दर) की जान चली जाती है। भारत में, पेट के कैंसर के लगभग 62,000 मामलों का हर साल (अनुमानित 80 प्रतिशत मृत्यु दर के साथ) निदान किया जाता है।


पेट के कैंसर का इलाज
पेट के कैंसर के लिए पर्याप्त फॉलो-अप और पोस्ट-ट्रीटमेंट केयर की आवश्यकता होती है, इसलिए नियमित जांच के लिए हेल्‍थ टीम के संपर्क में रहना महत्वपूर्ण है। पहले कुछ सालों के लिए हेल्‍थ टीम से हर 3 से 6 महीने में मिलने की सिफारिश की जाती है। उसके बाद सालाना मिला जा सकता है। हालांकि पेट के कैंसर के निदान के बाद जीवन तनावपूर्ण हो जाता है लेकिन परेशान होने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि सही उपचार, जीवनशैली में बदलाव और डॉक्टरों के समर्थन से मरीज ठीक हो सकता है।



चुपके से आपके लिवर को नुकसान पहुंचा रही हैं ये 8 चीजें
लिवर शरीर के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो हमारे शरीर के 500 से अधिक महत्वपूर्ण काम करता है जिसमें ब्लड को साफ करना, टॉक्सिन को दूर करना, पोषक तत्वों को एनर्जी में बदलना और विटामिन और मिनरल का भंडारण करना आदि शामिल है। इसलिए इस महत्वपूर्ण अंग को टिप-टॉप शेप में रखने बहुत जरूरी है। लेकिन कुछ चीजें चुपके से आपके लिवर को नुकसान पहुंचा रही है। आज हम आपको ऐसी ही कुछ चीजों और हेल्दी लिवर के लिए आपको क्या करना चाहिए, इसके कुछ टिप्स दे रहे है।
बहुत ज्यादा चीनी
बहुत ज्या‍दा चीनी सिर्फ आपके दांतों के लिए ही बुरी नहीं है। यह आपके लिवर को भी नुकसान पहुंचा सकती है। फैट बनाने के लिए यह अंग एक प्रकार की चीनी का इस्तेमाल करता है, जिसे फ्रुक्टोज कहा जाता है। बहुत ज्यादा रिफाइंड चीनी और हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप एक फैटी बिल्डअप का कारण बनकर लिवर रोग का कारण बन सकता है। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि चीनी शराब की तरह ही लिवर के लिए हानिकारक हो सकती है, भले ही आप अधिक वजन वाले न हो। सोडा, पेस्ट्री और कैंडी जैसी फूड्स को कम लेने का ये एक और कारण है।

हर्बल सप्लीमेंट
भले ही लेबल फूड को 'नेचुरल' कहे, लेकिन यह आपके लिए ठीक नहीं हो सकता है। जैसे, कुछ महिलाएं मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने या खुद को रिलैक्स करने के लिए कावा नामक हर्ब्स लेती हैं। लेकिन स्टडी बताती हैं कि यह लिवर को सही काम करने से रोक सकता है। जिससे हेपेटाइटिस और लिवर फेल हो सकता है। कुछ देशों ने इस हर्ब पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन यह अभी भी अमेरिका में उपलब्ध है। इसलिए किसी भी हर्ब को लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए कि वे सुरक्षित है या नहीं।
मोटापा
एक्स्‍ट्रा फैट का आपके लिवर सेल्स पर निर्माण हो सकता है और गैर-मादक फैटयुक्त लिवर रोग (एनएएफएलडी) को जन्म दे सकता है। नतीजतन, आपके लिवर में सूजन आ सकती है। समय के साथ, यह लिवर टिश्यु को कठोर कर सकता है (डॉक्टर इस सिरोसिस कहते हैं)। इसलिए अगर आपका वजन ज्यादा या आप मोटे हैं, मध्यम आयु वर्ग के हैं, या आपको डायबिटीज हैं तो आपको एनएएफएलडी होने की संभावना है। आप चीजों को बदल सकते हैं। डाइट और एक्सरसाइज से बीमारी को रोका जा सकता है।
'विटामिन ए' के सप्लीमेंट
आपके शरीर को 'विटामिन ए' की जरूरत है, इसके लिए आपको ताजे फल और सब्जियों जैसे कि लाल, नारंगी और पीले रंग चीजें लेना ठीक रहता है। लेकिन अगर आप 'विटामिन ए' के सप्लीमेंट बहुत ज्यादा लेते हैं, तो यह आपके लिवर के लिए एक समस्या हो सकती है। इसलिए 'विटामिन ए' सप्लीमेंट लेने से पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें कि आपको इसकी जरूरत है भी या नहीं।
सॉफ्ट ड्रिंक्स

शोध से पता चला है कि जो लोग बहुत ज्यादा सॉफ्ट ड्रिंक्स पीते हैं उनमें गैर-अल्कोहल फैटी लिवर रोग (एनएएफएलडी) होने की संभावना अधिक होती है। अध्ययन यह साबित नहीं करते कि ड्रिंक्स कारण थे।

एसिटामिनोफेन

अगर आप गले में खराश, या सिरदर्द, या सर्दी होने पर पेनकिलर ले लेती हैं। तो इसे बहुत ज्यादा लेने से बचें! अगर आप गलती से एसिटामिनोफेन वाली किसी भी चीज़ को बहुत ज्यादा लेती हैं - जैसे अगर आप सिरदर्द के लिए एक गोली और ठंड के लिए दूसरी गोली ले लेती हैं, लेकिन दोनों में एसिटामिनोफेन है तो यह आपके लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। दवाओं की जांच करें कि एक दिन में कितना लेना ठीक रहता है। सीमाओं पर टिके रहेंगे तो आप ठीक रहेंगे।


ट्रांस फैट
ट्रांस फैट मानव निर्मित फैट है जो कुछ पैक फूड्स और पके हुए सामानों में होता है। (आप ऐसी चीजों को "आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत" सामग्री के रूप में सूचीबद्ध देखेंगे)। ट्रांस फैट से भरपूर डाइट से आपका वजन बढ़ने की संभावना बहुत ज्यादा होती है। यह आपके लिवर के लिए अच्छा नहीं है। इसलिए सामग्री सूची की जांच करें। अगर इसमें ट्रांस फैट का "0" ग्राम भी लिखा है, तो भी इसमें थोड़ी मात्रा ये मौजूद हो सकता है।

शराब
आप शायद पहले से ही जानते हैं कि बहुत अधिक शराब पीना आपके लिवर के लिए बुरी है। लेकिन आप सोच भी नहीं कर सकते हैं कि आप शराब के आदी होने के बिना भी अधिक पी लेते है। कई बीयर के गिलास साइज में इतने बड़े होते है कि आप ना चाहते हुए भी ज्यादा पी लेते हैं। अगर आप पीते हैं, तो कम मात्रा में लें। महिलाओं को प्रतिदिन 1 और पुरुषों को 2 से ज्यादा नहीं लेना चाहिए। 

ये चीजें आपके लिवर को चुपके से खराब कर रही हैं इसलिए लिवर को हेल्‍दी रखने के लिए इनसे बचकर रहें। 



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