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रोजाना भीगे हुए चने खाने के हैं कई फायदे


रोजाना भीगे हुए चने खाने के हैं कई फायदे, जानिए और स्वस्थ्य रहिए....

देशी चने की बात की जाए तो ये आपको बादाम और काजू जैसे मंहगे से खाद्य से भी ज्यादा फायदेमंद होता है।

शायद आपको पता भी नहीं होगा कि इसमें प्रोटीन, विटामिंस और फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है।

आप मुट्ठी भर चना लेकर रात में किसी मिट्टी या चीनी मिट्टी के बर्तन में रख दें। सुबह आप इन भीगे हुए चनों को खूब चबाचबाकर खाएं।आप चाहें तो इसका पानी भी पी सकते हैं।

आइए जानते हैं इसको रोजाना खाने के लाभ....



रोजाना भीगे हुए चने खाने से होने वाले लाभ

मिलेगी ताकत और एनर्जी

भीगे चने हमारे शरीर को ताकत देने का बहुत अच्छा सोर्स हैं। अगर आपको कमजोरी लगती है तो इसको नियमित खाने से आपके शरीर में चमत्कारिक बदलाव आएंगे।

कब्ज़ से छुटकारा

चनों में फाइबर होता है। इसको रोज खाने से आपका डायजेशन सिस्टम ठीक रहता है।

बढ़ेगा स्पर्म काउंट

रोजाना भीगे हुए चनों के साथ यदि आप शक्कर भी खाते हैं तो ये आपके स्पर्म की संख्या को बढ़ाता है।



बढ़ेगी फर्टिलिटी

हर रोज मुट्ठी भर भीगे चने खाने से शरीर में फर्टिलिटी बढ़ती है।

यूरिन प्रॉब्लम

अगरह आपको यूरिन की समस्या है तो इसके सेवन से आपको आराम मिलेगा। ये पाइल्स के लिए भी असरदार है।

हेल्दी स्किन

बगैर नमक डाले चबा-चबाकर खाने से स्किन हेल्दी और ग्लोइंग होती है। खुजली, रैशेज़, जैसी स्किन प्रॉब्लम दूर होती हैं।

आपका वजन बढ़ेगा

अगर आप दुबले हैं तो भीगे हुए चने आपके शरीर में मांस बढ़ाने में मदद करता है। रोजाना एक मुट्ठी चने खाकर आप अपनी सेहत में सुधार कर सकते हैं।





पूर्ण भुजा शक्ति विकासक योग के लाभ



योग की पूर्ण भुजा शक्ति विकासक क्रिया को करने से जहां एक ओर प्राणशक्ति का विकास होता है वहीं खुलकर गहरी सांस लेने और छोड़ने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। इसके चलते प्राणशक्ति का स्तर बढ़ जाता है और व्यक्ति दिनभर चुस्त-दुरुस्त बना रहता है। इसके नियमित अभ्यास से भुजाओं की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और कंधों की जकड़न दूर होती है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर के सभी अंगों में प्राणशक्ति का संचार होने लगता है।

योग आसनों की शुरुआत के पूर्व अंग संचालनों में पारंगत हुआ जाता है। अंग संचालनों के क्रम में ही एक अंग संचालन 'पूर्ण भुजा शक्ति विकासक क्रिया' है। जिन लोगों को कठिन आसन करने में दिक्कत होती है, वे इस अभ्यास से आसन और प्राणायाम के लाभ एकसाथ प्राप्त कर सकते हैं।

पूर्ण भुजा शक्ति विकासक क्रिया योग की विधि : सबसे पहले सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं। अब दोनों पैरों के पंजों को आपस में मिला लें। फिर भुजाओं को सीधा, कंधों को पीछे खींचकर और सीने को तानकर रखें। 

इसके बाद दाएं हाथ का अंगूठा भीतर और अंगुलियां बाहर रखते हुए मुट्ठी बांध लें। फिर बाएं हाथ के तलवे को जंघा से सटाकर रखें। श्वास भरते हुए दाईं भुजा को कंधों के सामने लाएं।

उसके बाद श्वास भरते हुए भुजा को सिर के ऊपर लाएं। अब श्वास छोड़ें और दाईं हथेली को कंधों के पीछे से नीचे लेकर आएं। इस तरह एक चक्र पूरा होगा। अब दाएं हाथ से लगातार 10 बार इसी तरह गोलाकार चलाएं। उसके बाद बाएं हाथ से भी मुट्ठी बनाकर 10 बार गोलाकार चलाएं। 

अंत में धीरे-धीरे श्वास को सामान्य कर लें। श्वास के सामान्य होने के बाद दोनों हाथों की मुट्ठी बनाकर 10 बार गोलाकार चलाएं। सामने से पीछे की ओर ले जाएं। इस दौरान श्वास की एकाग्रता और संतुलन बनाए रखें। 

जिस तरह हाथों को एक दिशा में गोलाकार घुमाते हैं, उसी तरह हाथों को उल्टी दिशा में भी गोलाकार घुमाना चाहिए। इससे विपरीत योग संचालन भी हो जाता है, जो कि जरूरी है।

सावधानी : योग संचालन के दौरान श्वास के प्रति सजग रहें। एक श्वास में एक चक्र पूरा करें। बाजू बिलकुल सीधी रखें। शरीर को तानकर रखें।

इसका लाभ : इस अंग संचालन योग को करने से जहां एक ओर प्राणशक्ति का विकास होता है वहीं खुलकर गहरी सांस लेने और छोड़ने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। इसके चलते प्राणशक्ति का स्तर बढ़ जाता है और व्यक्ति दिनभर चुस्त-दुरुस्त बना रहता है।

इसके नियमित अभ्यास से भुजाओं की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और कंधों की जकड़न दूर होती है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर के सभी अंगों में प्राणशक्ति का संचार होने लगता है।
भ्रामरी प्राणयाम करने का तरीका


श्वांस को लम्बा गहरा फफड़ों में भरते हुये, दोनों कानों में अंगुलियां डालकर कानों को बन्द कर देंगे, बाहर की कोई भी ध्वनि सुनाई ना दे। अब मुहं व होठों का बन्द करके जीभ को ऊपर तालु पर लगा देंगे। ओउम का दीर्घ गुंजन, भौरें के उड़ते समय की ध्वनि की तरह करेंगे, जिसमें श्वांस नासिका से गुंजन के साथ बाहर निकलेगा और पूरे मस्तिष्क में कम्पन्न होगा। यह प्राणायाम करते समय अपना ध्यान आज्ञा चक्र भृकुटिद् पर केन्द्रित करेंगे। इस प्रकार 5 से 7 बार दोहरायेंगे। मन एकाग्र होता है, याददाश्त तेज होती है। मानसिक तनाव, उच्चरक्तचाप, हृदयरोग, उत्तेजना में लाभप्रद। 
भ्रामरी प्राणयाम करने का तरीका
इस आसान को सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों वक्त किया जा सकता है|
सबसे पहले एक स्वच्छ और समतल जगह चुने और दरी बिछाये|
अब ध्यान लगाने वाले आसन जैसे की पद्मासन या सुखासन में बैठ जाए।
अपनी दोनों आँखों को बंद रखें तथा मन और चित्त को शांत रखें, दफ्तर के काम या तनाव देने वाले अन्य किसी विचारो को मन में आने ना दे|
अपने मेरुदंड को बिलकुल सीधा और दोनों हाथो को बगल में अपने कंधो के समांतर फैलाए।
अब अपने हाथो को कुहनियो से मोड़ते हुए हाथ को कानों के समीप ले जाए।
दोनों हाथों के अंगूठो से दोनों कानों को बंद कर लें।
इस प्राणायाम में नाक से श्वांस भर कर धीरे-धीरे गले से भ्रमर की गुंजन के साथ श्वांस छोड़ना होता है, इसलिए पहले नाक से श्वास अंदर लें और फिर बाहर छोड़े।
इस बात का ध्यान रहे की श्वास बाहर छोड़ते समय कंठ से भवरे के समान आवाज करना हैं। यह आवाज पूर्ण श्वास छोड़ने तक निरंतर निकालना है| और आवाज आखिर तक एक समान होना चाहिए।
ध्वनि तरंग को अपने मस्तिष्क में अनुभव करें व गुंजन करते वक्त जीभ को तालु से लगायें। दांतों को खुला रखें किन्तु होठ बंद रहना चाहिए|
इसके अभ्यास को 5 से 10 बार तक करें।
श्वास लेने के लिए कोई अनुपात निर्धारित नहीं है अपने सामर्थ्य के अनुसार इसे भर सकते है। लेकिन जितनी श्वास लेते बने उतनी ही ले, अनाव्यशक शरीर को तकलीफ ना दे|
शरुआत में बिना कान बंद किये भी भ्रामरी प्राणयाम को किया जा सकता है|





सुबह के समय SEX करने के फायदे जानकार हो जाएंगे आप हैरान

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सुबह के समय सेक्स करने से बहुत से फायदे होते हैं सुबह के समय यदि हम सेक्स करते हैं तो हम संतुस्ट तो होते ही है और इसके साथ हमारे शरीर में बीमारियाँ भी होने की स्म्भाबना कम हो जाती हैंI
सुबह के समय समभोग के फायदे के फायदेSLEEPING SABGURU.COM समभोग के फायदे
एक रिसर्च के अनुसार सुबह के समय में सेक्स करने से बीर्य की गुड्बत्ता 12 प्रतिशत बढ़ जाती जाती है। इसलिए जिस किसी भी महिला को गर्भधारण करने में परेशानी होती है। बे महिलाये सुबह के समय सेक्स करे इससे गर्भधारण करने की स्म्भाबना बढ़ जाती हैं। इसके साथ ही कई सेक्स सम्बन्धी समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है।
सुबह के समय सेक्स करने से आप दिनभर तरोताजा और फिट रह सकते हैं। सुबह के समय सेक्स के दौरान हमारे शरीर से निकलने वाले केमिकल्स से हमें अधिक संतुष्टि मिलती है। जिससे हम ना सिर्फ खुश रहते हैं बल्कि हम स्वस्थ भी महसूस करते हैं।
रिसर्च के अनुसार यदि कोई कपल सफ्ताह में 3 दिन सेक्स करता है। तो इससे हार्ट अटेक का खतरा कम हो जाता है। इसलिए सम्भब हो सके तो रात की जगह सुबह के समय सेक्स करे और अपने स्वास्थ को स्वस्थ रखे।
सुबह के समय सेक्स करने से शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से बढ़ता है। जिससे लिंग में अधिक कड़ापन आजाता है। इससे आक्सीजन का संचार अच्छी तरह से बालो तथा त्वचा में होता है। इससे आपकी त्वचा तथा बालो सम्बंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं। तथा आपकी त्वचा दमकने लगती है।
सुबह के टाइम में किया गया सेक्स किसी भी व्यायाम से कम नहीं होता है। क्योकि इस समय हबा में आक्सीजन की मात्रा अधिक होती है। सेक्स के दोरान व्यक्ति बड़ी बड़ी सांसे लेता हैं। जिससे जादा से जादा आक्सीजन फेफड़ो तक आसानी से पहुच जाती है। इसलिए सुबह सेक्स का फायदा उठाये।
सुबह के समय हमारा दिमाग बिलकुल शांत होता है। और सभी परेशानियों से मुख्त होता है। उस समय हमारा पूरा नियंत्रण होता है। हमारे दिमाग पर और यदि आप सुबह के समय सेक्स करते हैं। तो आपका बीर्य भी बहुत देर में निकलता है जिससे शीघ्रपतन नहीं होता है।





पहली बार शारीरिक संबंध बनाने से लड़कियों के शरीर में होते हैं यह परिवर्तन


पीरियड्स में बदलाव

जब लड़की पहली बार शारीरिक संबंध बनाती है तो उनके पीरियड का समय अनियमित हो जाता है। यह सामान्य सी बात है, परंतु यदि पीरियड आने में अधिक देरी हो तो यह प्रेगनेंसी भी हो सकती है।

मानसिक परिवर्तन

पहली बार शारीरिक संबंध बनाने के कारण लड़कियों के दिमाग में सेक्स की प्रति उत्साह अधिक बढ़ जाता है। इसी कारण उनके दिमाग और भी ज्यादा क्रियाशील हो जाता है अर्थात उनके सोचने समझने की क्षमता अधिक हो जाती है।

शारीरिक परिवर्तन

पहली बार शारीरिक संबंध बनाने से लड़कियों में अनेक प्रकार के शारीरिक परिवर्तन होने लगते हैं। सामान्य सी बात है, पहली बार संबंध बनाने से लड़कियों के अंगों में बढ़ोतरी होने लगती है और त्वचा में चमक के साथ साथ चेहरे पर भी निखार आता है। 

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