Header Ads

फायदेमंद है योग


ब्लड प्रेशर के लिए दवाईयों से ज्यादा फायदेमंद है योग

जो लोग हाईपरटेंशन के मरीज बनने के कगार पर हैं या फिर हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी का शिकार होने की तरफ बढ़ रहे हैं, उनके लिए दवाईयां या लाइफस्टाइल में बदलाव से ज्यादा फायदेमंद है- योग। जी हां, हाई बीपी से बचाने में योग सबसे फायदेमंद माना जा रहा है। इतना ही नहीं, अगर आप सोचते हैं कि लाइफस्टाइल में बदलाव करके इन बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है तो आप गलत हैं।

मिली जानकारी के अनुसार 120/80 ब्लड प्रेशर को नॉर्मल माना जाता है। लेकिन जब किसी का ऊपर का बीपी यानी सिस्टॉलिक 120 से 139 के बीच पहुंच जाए तो यह प्री-हाइपरटेंशन की स्थिति मानी जाती है। ऐसे लोग कुछ समय बाद ब्लड प्रेशर के मरीज बन जाते हैं। एक बार बीपी के मरीज बनने पर ब्रेन स्ट्रोक व हार्ट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मरीजों को अक्सर दवा के साथ लाइफस्टाइल सुधारने को कहा जाता है। 

जिन मरीजों ने नियमित रूप से योगासन किया, उनका बीपी 4 mmHg तक कम हो गया। बिना योग किए सिर्फ खानपान और लाइफस्टाइल में सुधार करने वालों के बीपी में कोई कमी नहीं आई। अगर ऊपर का बीपी 3 mmHg भी घट जाए तो ब्रेन स्ट्रोक से मौत का खतरा 8 प्रतिशत और दिल की बीमारी से मौत के खतरा 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है।ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए सूर्य नमस्कार, वज्रासन, ताड़ासन, शशकासन आदि करना भी फायदेमंद हो सकता है।



बैठने वाली जॉब है तो करें ये योगासन, नहीं होंगी रीढ़ की हड्डी की समस्याएं


जैसे-जैसे तकनीक विकसित होती जा रही है, बहुत सारे काम अब एक ही जगह बैठकर किए जाने लगे हैं। इसी तरह पढ़ने वाले स्टूडेंट्स, दुकानदार और डेस्क जॉब वाले लोगों को दिनभर एक ही जगह बैठे-बैठे काम करना पड़ता है। काम के दबाव के कारण न तो अपनी फिटनेस के बारे में सोचने का वक्त होता है और न ही जिम जाकर एक्सरसाइज करने का समय होता है। ऐसे में देखा गया है कि थोड़े समय बाद इन लोगों में पीठ दर्द, कमर दर्द, कंधा दर्द या कोहनी और उंगलियों का दर्द शुरू हो जाता है। इसका कारण यह है कि आप मानसिक रूप से तो एक्टिव होते हैं मगर शारीरिक रूप से बिल्कुल निष्क्रिय होते हैं। फिट रहने के लिए आपके शरीर को थोड़ी मेहनत या एक्सरसाइज करनी बहुत जरूरी है। अगर आपको अपने काम से ज्यादा समय नहीं मिलता है, तो आप घर पर या ऑफिस में ही 10 मिनट समय निकालकर कुछ आसान योगासन कर सकते हैं, जिससे आप शरीर में होने वाली इन समस्याओं से बचे रहें। इसके अलावा ये योगासन आपको शारीरिक रूप से फिट भी रखेंगे।
हस्तोत्तासन करें
हस्तोत्तासन को आप कहीं भी और कभी भी कर सकते हैं।इसे करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को ऊपर आकाश की तरफ उठा लें।यह दोनों हाथों के पंजों को मिलाते हुए एड़ियों को ऊंचा करें और हाथों को और ऊपर की तरफ खींचें।इसके बाद एड़ियों को जमीन पर रख दें।अब हाथों को ऊपर उठाए हुए ही दाईं तरफ क्षमतानुसार घूम कर स्ट्रेच करें।फिर इसी तरह बाईं तरफ क्षमतानुसार स्ट्रेच करें।हर 3 घंटे के अंतराल पर ऐसा 2-3 बार कर लें, तो आपको कभी भी कमर और पीठ की समस्या नहीं होगी।

सुप्त पवनमुक्तासन

चटाई बिछाकर सीधे लेट जाएं। अपने घुटनों से टांगें मोड़ लें और उन्हें अपनी छाती के करीब लाएं।अपनी टांगों के आसपास अपनी बाहें लपेटें। चाहें तो अब आंखें भी बंद कर सकती हैं।गहरी सांस लें। इसी मुद्रा में 1 मिनट के लिए रहें।अब सांस छोड़ें और अपना सिर इतना उठाएं कि आपकी नाक घुटनों को छू सके। इस मुद्रा में 5 सेकंड तक रहें। सांस लेते हुए अब अपना सिर पीछे ले जा सकती हैं। इसे 5 बार दोहराएं।इस आसन से पेट, छोटी और बड़ी इंटेस्टाइन, लिवर, पेन्क्रियाज़, गॉलब्लैडर और पेल्विक की मांसपेशियों की खुद-ब- खुद मालिश हो जाती है।

पदसंचालनासन
यह आसन मोटापे के इलाज में बहुत कारगर है। इसके अभ्यास से पीठ, हिप्स, टांगें, होठ, पेट और पेल्विस मजबूत होते हैं।चटाई बिछा लें और उस पर सीधी लेट जाएं। हथेलियां नीचे की तरफ हों। सामान्य रूप से सांस लें और अपनी दोनों टांगों को ऐसे हवा में चलाएं, मानो लेटे हुए साइकिल चला रही हों। इसके 10-12 राउंड्स करें।अब शवासन में आएं, यानी लेट जाएं और दो मिनट तक धीरे-धीरे सांस लें।अब उलटी दिशा में टांगों को चलाएं। इसके 10-12 राउंड्स करें।
स्ट्रेचिंग करें
उल्‍टी टांग को सीधी टांग के ऊपर रखें और आगे की तरफ झुक जाएं फिर महसूस करें कि कहां-कहां स्‍ट्रेच आ रहा है। फिर वापस उसी अवस्‍था में आ जाएं। फिर दूसरी तरफ से भी इस आसन को करें।अब अपनी उंगलियों को आपस में फंसाकर ऊपर ले जाइए और खींचकर रखिए। सांस भरते रहिए और वापस आ जाइए। फिर अपना उल्‍टा हाथ ऊपर ले जाइए और दूसरी साइड में झुक जाइए। ऐसा ही दूसरी साइड से भी करें।उल्टा पैर आगे ले जाइए फिर हाथ से पैरों की उंगालियों को पकड़ने की कोशिश करें। अगर नहीं पकड़ पा रहे तो पैर को पकड़ लें। फिर वापस आ जाइए। दूसरी तरफ से भी ऐसे ही करें।

घंटों तक न बैठे रहें

ऑफिस में बैठने का काम हो तो भी एक जगह चेयर पर घंटों तक न बैठे रहें, बल्कि बीच-बीच में टहलते रहें। हर एक-डेढ़ घंटे बाद अपनी कुर्सी से उठें और 20 कदम चलकर शरीर को थोड़ा स्ट्रेच करें और फिर बैठ जाएं। अपना सामान स्वयं ही उठाकर रखें या फिर लंच टाइम में अपने केबिन में ही टहल लें। कैसे भी 15-20 मिनट तो अवश्य निकालें अपने लिए जिसमें आप चल सकें, ताकि शरीर की कसरत हो जाए।


अस्थमा रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है पासासन



अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है क्योंकि उसके फेफड़ों तक सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है। आमतौर पर धूल और प्रदूषण भरे माहौल और सर्दियों के मौसम में अस्थमा रोगियों की समस्याएं बढ़ जाती हैं। अस्थमा में कई बार व्यक्ति सही समय पर सांस नहीं ले पाता है इसलिए ये जानलेवा भी हो सकता है। अस्थमा रोगियों के लिए पासासन का अभ्यास बहुत फायदेमंद होता है। 

कैसे करें इस आसन का अभ्यास
-इस आसन को करने के लिए सबसे पहले ताड़ासन की मुद्रा में सीधे खड़े हो जाएं।

-अब अपने घुटनों को मोड़ते हुए सारा वजन अपने पैर पर रखते हुए बैठ जाएं।

-इस दौरान तलवों को जमीन पर स्थिर रखें।

-फिर शरीर के ऊपरी हिस्‍से को दाईं तरफ मोड़ें, शरीर का ऊपरी हिस्सा दाहिने घुटनों तक लाने का प्रयास कीजिए।

-अपना दाहिना हाथ ऊपर उठाएं और बायां पैर सामने की तरफ रखें।

-अब अपने बाएं हाथ को ऊपर उठाकर पीठ के पीछे ले जाएं और दाहिने हाथ को पकड़ें।

-फिर पीठ की तरफ से हाथों को ले जाकर एक हाथ से दूसरे हाथ को कसकर पकड़ लीजिए।

-फिर अपने सिर को ऊपर की तरफ ले जाकर लंबी सांस लें।

-लंबी सांसें 4-5 बार लें। फिर आराम से सामान्य स्थिति में आयें।

-अब शरीर के दूसरे तरफ से इस क्रिया को दोहरायें


पासासन के लाभ
पासासन ऐसा योगासन है जो अस्थमा के साथ दूसरी बीमारियों को भी दूर करता है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर को फिट रखा जा सकता है। मासिकधर्म, साइटिका, हल्का पीठ दर्द, कंधे का दर्द या फिर गर्दन के दर्द को ठीक करने में पासासन काफी अच्छा माना जाता है। यह पोज़ थोड़ा टेढ़ा-मेढ़ा जरुर है लेकिन लगातार अभ्यास करने से यह आसान हो जाता है। इस आसन से पीठ, कमर और एडि़यों की मसापेशियों में खिंचाव होता है। इससे पेट की समस्यायें भी ठीक हो जाती हैं।

व्यायाम में ध्यान रखें ये बातें
-वाकिंग, लों इम्पेक्ट एरोबिक्स और स्वीमिंग जैसे लों इंटेसिटी वाले व्यायामों का चुनाव करें।

-यदि अस्थमा का दौरा पड़ता है, तो व्यायाम की इंटेसिटी को घटा दें।

-इ-आई-ए से बचने के लिए किसी भी व्यायाम को करने से पहले एक इन्हेलर का कई बार उपयोग कर लें।

-व्यायाम के पहले, व्यायाम के दौरान और व्यायाम के बाद अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करें।

-वार्मअप और कूल डाऊन की अवधि को बढ़ा दें।

-कभी भी अत्यंत उच्च या अत्यंत निम्न तापमान और अत्यंत नमी जैसी परिस्थिति में व्यायाम न करें।

अस्थमा के मरीज हमेशा ध्यान रखें ये बातें
-घबराए नही क्योंकि घबराने से मांस पेशियों पर तनाव बढ़ता है जिससे की सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है।

-हिम्मत न हारें और मुंह से सांस लेते रहें, फिर मुंह बंद करके नाक से सांस लें। धीरे धीरे सांस अन्दर की तरफ लें और फिर बाहर की तरफ छोड़े।

-सांस अन्दर की तरफ लेने और बाहर की तरफ छोड़ने के बीच में सांस न रोकें ।

-पीक फ्लो मीटर की मदद से अपने अटैक की स्थिति नापें। पीक फ्लो मीटर सस्ते इन्सट्रुमेट हैं जिनसे अटैक की स्थिति का पता चलता है।

-अगर हो सके तो इन्हेलेन्ट का प्रयोग करें और कोशिश करें हर 20 मिनट पर दो बार इन्हेलेन्ट का प्रयोग करने की।

-धुंए व धूल से दूर रहें।

-अपने ट्रीटमेंट के रिस्पांस को परखें। खराब रिस्पांस तब होता है जब आपको खांसी आयें। अच्छा रिस्पांस तब होता है जब आपको सांस लेने में अच्छा लगे और आराम महसूस हो।

-डाक्टर के द्वारा दिये गये निर्देशों का पालन करें अधिक परेशानी होने पर चिकित्‍सक से जल्‍दी से जल्‍दी संपर्क करें।

-डाक्टर के द्वारा दी दवाएं समय पर लें। अगर दवाओं से भी आपकी परेशानी ठीक नहीं हो रही तो याद रखें कि यह मौका खुद की मदद करने का है।

-अगर आपको सांस लेने में परेशानी बढ़ती जा रही है तो तुरंत धूल वाली जगह से दूर हट कर खड़े हो जायें।
एसिडिटी और गैस की समस्या से हैं परेशान, तो रोज करें ये आसन


क्या आपके पेट में बहुत ज्यादा गैस बनती है या टॉयलेट में घंटों बैठे रहने के बाद भी आपका पेट साफ नहीं होता है? ये समस्याएं अब इतनी आम हो गई हैं कि लोगों ने इन्हें बीमारी मानना छोड़ दिया है। दवाओं और चूरन आदि के प्रयोग से आपके शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचता है और इसकी आदत पड़ जाती है। पेट की समस्याओं में कई योगासनों को बहुत फायदेमंद माना जाता है। इन योगासनों के नियमित अभ्यास से न सिर्फ पेट की समस्याएं जैसे- एसिडिटी, कब्ज, गैस, बदहजमी आदि दूर होती हैं, बल्कि पूरे शरीर को लाभ मिलता है। आइए आपको बताते हैं पेट के लिए फायदेमंद योगासन।

मकरासन का अभ्यास करें
सबसे पहले चादर या चटाई बिछाकर जमीन पर पेट के बल लेट जाइए। दोनों हाथों की कोहनियों को मिलाते हुए हाथ मोड़िए और गाल को हथेलियों के बीच टिका लीजिए। अब दोनों पैरों को मिलाकर सांस को अंदर कीजिए, उसके बाद सांस को बाहर करते हुए दोनों कोहनियों को अंदर की तरफ खींचिए।इस क्रिया को कम से कम 5 बार दोहराइए। अब धीरे-धीरे अपने पैरों, हाथों और शरीर के ऊपरी हिस्से को इस तरह ऊपर उठाएं कि आपके शरीर का सारा वजन पेट पर आ जाए। अब धीरे-धीरे पहले की पोजीशन में आ जाइए। सांस को आराम से लेते हुए पैरों को बारी-बारी घुटने से मोड़िए और फिर पहले की पोजीशन में ले जाइए। कोशिश कीजिए कि आपके पैरों की एड़ी नितंबों को छुए। इस क्रिया को 20 बार दोहराइए। पैरों को मुड़ा रखकर गर्दन को घुमाकर दोनों पैरों की एड़ियों को देखने का प्रयास कीजिए।

मलासन भी है फायदेमंद
मलासन करने के लिए सबसे पहले अपने घुटनों को मोड़कर मल त्‍याग की अवस्‍था में बैठ जाएं। बैठने के बाद अपने दोनों हाथों की बगल को दोनों घुटनों पर टीका दें।अब दोनों हाथो की हथेलियों को मिलाकर नमस्कार मुद्रा बनाएं। अब धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें, आपको कुछ देर इसी अवस्था में बैठना है।अब धीरे-धीरे हांथो को खोलते हुए वापस उठ कर खड़े हो जाए।

भुजंगासन है पेट के लिए फायदेमंद
भुजंगासन करने के लिये सबसे पहले मुंह को नीचे की ओर करके पेट के बल लेट जाएं और फिर शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दें। इसके बाद हथेलियों को कंधों और कुहनियों के बीच वाली जगह पर जमीन के ऊपर रख लें और नाभि से आगे तक के भाग को धीरे-धीरे सांप के फन की तरह ऊपर उठाएं। अब पैर की उंगलियों को पीछे की तरफ खींचकर रखें, ताकि उंगलियां जमीन को छूने लगें। इस पोजीशन में कुछ देर के लिये रुकें और इसे कम से कम चार बार करें।

पवनमुक्तासन का अभ्यास करें

इस आसन को करने के लिए भूमि पर चटाई बिछा कर पीठ के बल लेट जायें। फिर सांस भर लीजिए। अब किसी भी एक पैर को घुटने से मोडि़ये, दोनों हाथों की अंगुलियों को परस्पर मिलाकर उसके द्वारा मोड़े हुए घुटनों को पकड़कर पेट के साथ लगा दें। फिर सिर को ऊपर उठाकर मोड़े हुए घुटनों पर नाक लगाएं। दूसरा पैर जमीन पर सीधा रखें। इस क्रिया के दौरान श्वांस रोककर कुम्भक चालू रखें। सिर और मोड़ा हुआ पैर भूमि पर पहले की तरह रखने के बाद ही रेचक करें। दोनों पैरों को बारी-बारी से मोड़कर यह क्रिया करें। दोनों पैर एक साथ मोड़कर भी यह आसन किया जा सकता है।तनावपूर्ण जिंदगी और बीमारियों को मात देता है लाफ्टर योगा



अगर सुबह-सुबह आपके घर के आसपास तेज-तेज हंसने की आवाज सुनाई दे तो चकित होने की जरूरत नहीं है, क्‍योंकि वह न तो कोई चुटकुला सुनकर हंसते हैं और न ही किसी का मजाक उड़ा रहे होते हैं, बल्कि वह एक विशेष प्रकार का योग करते हैं। जी हां, आजकल की तनावपूर्ण जिंदगी और गंभीर बीमारियों को मात देने के लिए योगा एक बेहतर विकल्‍प बनकर देश और दुनिया में लोगों को अच्‍छी सेहत, खुशी और मानसिक शांति प्रदान कर रहा है। इस विशेष योग को हास्‍य योग या लाफ्टर योगा कहते हैं। 

मूड ठीक करे
हास्‍य योग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे करने के कुछ सेकेंड में आपका मूड बदलने लगता है, आपके मस्तिष्‍क की कोशिकाएं कई तरह के केमिकल्‍स श्रावित करने लगती हैं जिसे एंडॉर्फिन के नाम से जाना जाता है। तो अगर आपका मूड अच्‍छा है तो इसका मतलब सब कुछ अच्‍छा है। दरअसल मूड का असर आपकी पर्सनल लाइफ, सोशल लाइफ और बिजनेस लाइफ तीनों पर पड़ता है। अगर आप मानसिक रूप से खुश हैं तो इससे आपको कोई परेशानी नहीं होगी। इसलिए आप रोजाना 30 मिनट हास्‍य योग या लाफ्टर योगा करें और खुद को स्‍वस्‍थ रखें।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए
लाफ्टर योगा से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और स्‍ट्रेस लेवल कम हो जाता है। दरअसल, स्‍ट्रेस लेवल जितना ज्‍यादा होगा आपका इम्‍यून सिस्‍टम उतना ही कमजोर होगा। इसलिए हास्‍य योग के माध्‍यम से अपना स्‍ट्रेस लेवल कम कीजिए और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर बीमारियों से मुक्‍त हो जाइए। यह आपके लिए सबसे हेल्‍दी एक्‍सरसाइज है जोकि बीमारियों से बचाता है। हास्‍य योग रक्‍तचाप और रक्‍तशर्करा को नियंत्रित रखता है। ह्रदय और फेफड़ो के लिए भी योग बेहतर है। इसके अलावा इस बीमारिया से बुजुर्गों में अल्‍जाइमर जैसी बीमारियों से निजात मिलती है।

बौद्धिक स्‍तर बढ़ाए
मनुष्‍य के मस्तिष्‍क को हमेशा अधिक ऑक्‍सीजन की आवश्‍यकता होती है। हास्‍य योग करने से मस्तिष्‍क ही नहीं बल्कि पूरी बॉडी में ऑक्‍सीजन का प्रसार होता है, इससे बौद्धिक स्‍तर में बढ़ोत्‍तरी होती है साथी शारीरिक दक्षता भी बढ़ती है। अगर आप भी इस तरह के फायदे चाहते हैं तो हास्‍य योग करना शुरू कर दीजिए।
सामाजिक जुड़ाव
हास्‍य योग न सिर्फ आपको सेहतमंद बनाता है बल्कि यह सामाजिक जुड़ाव के माध्‍यम से कई प्रकार की खुशियां भी प्रदान करता है। जब आप किसी विशेष जगह पर कई लोगों के साथ हास्‍य योग करते हैं तो वहां कई तरह के खुशहाल व्‍यक्तियों से आपका इंट्रोडक्‍शन होता है, जिससे आपका सामाजिक दायरा बढ़ता है साथ ही आपको मानसिक शांति भी मिलती है। मनोवै‍ज्ञनिक रूप से देखा जाए तो यह प्रत्‍येक व्‍यक्ति के लिए जरूरी है। इससे आपको चेहरे पर हमेशा मुस्‍कान दिखेगी।

पॉजिटिव एनर्जी

अगर आप नियमित रूप से लाफ्टर योगा एक्‍सरसाइज़ करते हैं तो आपके विचार और व्‍यवहार में सकारात्‍मकता दिखने लगती है। इससे आप हर क्षेत्र में सफल होते हैं। यह योग सिर्फ बुजुर्गों के लिए नहीं है बल्कि इसे बच्‍चे, किशोर और युवा भी कर सकते हैं। इससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास अच्‍छा होगा। बौद्धिक स्‍तर में बढ़ोत्‍तरी होगी।थायरॉइड और मानसिक तनाव को दूर करता है पूर्वोत्तानासन


योगासनों द्वारा शरीर की तमाम समस्याओं और बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। योगासन शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए फायदेमंद होता है इसलिए इसका नियमित अभ्यास आपके मन, मस्तिष्क और शरीर को स्वस्थ रहने में मदद करता है। ऐसा ही एक योगासन है पूर्वोत्तानासन। पूर्वोत्तानासन तीन शब्दों से मिलकर बना है- पूर्व+उत्तान+ आसन, यानी पूर्व दिशा में खिंचने वाला आसन। इस आसन का अभ्यास इंटरनल ऑर्गन्स का मसाज करने, स्पाइन की लंबाई बढ़ाने और संतुलन बनाने के लिए किया जाता है। इसे पिरामिड पोज भी कहते हैं क्योंकि ये पिरामिड की तरह पोज बनाकर किया जाता है। आइए आपको बताते हैं कि आप किस तरह कर सकते हैं पूर्वोत्तानासन और क्या हैं इसके नियमित अभ्यास के फायदे।

कैसे करें पूर्वोत्तानासन
-इस आसन के अभ्यास के लिए सबसे पहले सामने की तरफ पैरों को फैलाकर बैठ जाएं।

-इस स्थिति में रीढ़ की हड्डी को जितना संभव हो सीधा करें और तनकर बैठें।

-अब हाथों को अपने कूल्हों से कुछ पीछे रखें।

-अब सांस अंदर खींचते हुए कूल्हों को ऊपर उठाएं।

-आप जितना ज्यादा अपने शरीर को ऊपर उठा सकते हैं उतना ऊपर उठाएं।

-कुछ सेंकंड के लिए इस स्थिति में रुकें और फिर वापस पहले वाली स्थिति में आ जाएं।

-इस चक्र का अभ्यास शुरुआत में 5-10 बार करें और क्षमता बढ़ने पर चक्र बढ़ाते जाएं।

थायरॉइड में फायदेमंद है पूर्वोत्तानासन
थायरॉइड एक गंभीर समस्या है, जिसका शिकार ज्यादातर महिलाएं हो रही हैं। इस रोग के कारण गले में स्थित थायरॉइड ग्रंथि कई बार थायरॉक्सिन हार्मोन्स का स्राव बंद कर देती है और कई बार ज्यादा मात्रा में स्राव करने लगती है, जिससे कई तरह की शारीरिक परेशानियां शुरू हो जाती हैं। पूर्वोत्तानासन के अभ्यास द्वारा थायरॉइड ग्रंथि से होने वाली समस्या धीरे-धीरे कम हो जाती है और ये ग्रंथि संतुलित मात्रा में हार्मोन्स बनाने लगती है। थायरॉइड के मरीजों को इस आसन का अभ्यास नियमित करना चाहिए।

तनाव कम करता है पूर्वोत्तानासन
आजकल तनाव की समस्या हर व्यक्ति को है। हर क्षेत्र में बढ़ने कॉम्पटीशन और आगे बढ़ने के दबाव के कारण बच्चे से लेकर बूढ़ों तक, हर व्यक्ति थोड़ा या ज्यादा तनाव की स्थिति से गुजर रहा है। ऐसे में पूर्वोत्तानास के अभ्यास द्वारा मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है। इस आसन के अभ्यास से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है और दिमाग मांसपेशियों की अकड़न कम हो जाती है, जिससे व्यक्ति को मानसिक शांति महसूस होती है। तनाव होने पर आसन के दौरान गहरी-गहरी सांसें लें।

मोटापा घटाता है ये आसन
पूर्वोत्तासन का नियमति अभ्यास शरीर की चर्बी भी कम करता है। यह शरीर के निचले भाग और बाजुओं को सुडौल बनाने के लिए अच्छा आसन है। दरअसल इस आसन में पेट पर दबाव पड़ता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है, जिससे मोटापा धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसके अलावा इस आसन की खास बात ये है कि इसका अभ्यास शरीर को लचीला बनाता है।

ब्लड प्रेशर और दर्द की समस्या

पूर्वोत्तानासन के अभ्यास से पीठ की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर और सिरदर्द तक की समस्या में भी राहत मिलती है। चूंकि इस योगासन के माध्यम से शरीर में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है इसलिए ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और दर्द से राहत मिलती है।अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है क्योंकि उसके फेफड़ों तक सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है। आमतौर पर धूल और प्रदूषण भरे माहौल और सर्दियों के मौसम में अस्थमा रोगियों की समस्याएं बढ़ जाती हैं। अस्थमा में कई बार व्यक्ति सही समय पर सांस नहीं ले पाता है इसलिए ये जानलेवा भी हो सकता है। अस्थमा रोगियों के लिए पासासन का अभ्यास बहुत फायदेमंद होता है। 

कैसे करें इस आसन का अभ्यास
-इस आसन को करने के लिए सबसे पहले ताड़ासन की मुद्रा में सीधे खड़े हो जाएं।

-अब अपने घुटनों को मोड़ते हुए सारा वजन अपने पैर पर रखते हुए बैठ जाएं।

-इस दौरान तलवों को जमीन पर स्थिर रखें।

-फिर शरीर के ऊपरी हिस्‍से को दाईं तरफ मोड़ें, शरीर का ऊपरी हिस्सा दाहिने घुटनों तक लाने का प्रयास कीजिए।

-अपना दाहिना हाथ ऊपर उठाएं और बायां पैर सामने की तरफ रखें।

-अब अपने बाएं हाथ को ऊपर उठाकर पीठ के पीछे ले जाएं और दाहिने हाथ को पकड़ें।

-फिर पीठ की तरफ से हाथों को ले जाकर एक हाथ से दूसरे हाथ को कसकर पकड़ लीजिए।

-फिर अपने सिर को ऊपर की तरफ ले जाकर लंबी सांस लें।

-लंबी सांसें 4-5 बार लें। फिर आराम से सामान्य स्थिति में आयें।

-अब शरीर के दूसरे तरफ से इस क्रिया को दोहरायें।

पासासन के लाभ
पासासन ऐसा योगासन है जो अस्थमा के साथ दूसरी बीमारियों को भी दूर करता है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर को फिट रखा जा सकता है। मासिकधर्म, साइटिका, हल्का पीठ दर्द, कंधे का दर्द या फिर गर्दन के दर्द को ठीक करने में पासासन काफी अच्छा माना जाता है। यह पोज़ थोड़ा टेढ़ा-मेढ़ा जरुर है लेकिन लगातार अभ्यास करने से यह आसान हो जाता है। इस आसन से पीठ, कमर और एडि़यों की मसापेशियों में खिंचाव होता है। इससे पेट की समस्यायें भी ठीक हो जाती हैं।

व्यायाम में ध्यान रखें ये बातें
-वाकिंग, लों इम्पेक्ट एरोबिक्स और स्वीमिंग जैसे लों इंटेसिटी वाले व्यायामों का चुनाव करें।

-यदि अस्थमा का दौरा पड़ता है, तो व्यायाम की इंटेसिटी को घटा दें।

-इ-आई-ए से बचने के लिए किसी भी व्यायाम को करने से पहले एक इन्हेलर का कई बार उपयोग कर लें।

-व्यायाम के पहले, व्यायाम के दौरान और व्यायाम के बाद अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करें।

-वार्मअप और कूल डाऊन की अवधि को बढ़ा दें।

-कभी भी अत्यंत उच्च या अत्यंत निम्न तापमान और अत्यंत नमी जैसी परिस्थिति में व्यायाम न करें।

अस्थमा के मरीज हमेशा ध्यान रखें ये बातें
-घबराए नही क्योंकि घबराने से मांस पेशियों पर तनाव बढ़ता है जिससे की सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है।

-हिम्मत न हारें और मुंह से सांस लेते रहें, फिर मुंह बंद करके नाक से सांस लें। धीरे धीरे सांस अन्दर की तरफ लें और फिर बाहर की तरफ छोड़े।

-सांस अन्दर की तरफ लेने और बाहर की तरफ छोड़ने के बीच में सांस न रोकें ।

-पीक फ्लो मीटर की मदद से अपने अटैक की स्थिति नापें। पीक फ्लो मीटर सस्ते इन्सट्रुमेट हैं जिनसे अटैक की स्थिति का पता चलता है।

-अगर हो सके तो इन्हेलेन्ट का प्रयोग करें और कोशिश करें हर 20 मिनट पर दो बार इन्हेलेन्ट का प्रयोग करने की।

-धुंए व धूल से दूर रहें।

-अपने ट्रीटमेंट के रिस्पांस को परखें। खराब रिस्पांस तब होता है जब आपको खांसी आयें। अच्छा रिस्पांस तब होता है जब आपको सांस लेने में अच्छा लगे और आराम महसूस हो।

-डाक्टर के द्वारा दिये गये निर्देशों का पालन करें अधिक परेशानी होने पर चिकित्‍सक से जल्‍दी से जल्‍दी संपर्क करें।

-डाक्टर के द्वारा दी दवाएं समय पर लें। अगर दवाओं से भी आपकी परेशानी ठीक नहीं हो रही तो याद रखें कि यह मौका खुद की मदद करने का है।

-अगर आपको सांस लेने में परेशानी बढ़ती जा रही है तो तुरंत धूल वाली जगह से दूर हट कर खड़े हो जायें।




सुबह उठने के बाद करें ये एक्सरसाइज, दिनभर रहेंगे एक्टिव


सुबह-सुबह उठने का मन नहीं करता है, फिर भी उठना पड़ता है। नींद पूरी न हो पाने के कारण दिनभर सुस्ती रहती है और काम में मन नहीं लगता है। अगर ये समस्या आपकी भी है, तो कुछ खास एक्सरसाइज आपकी मदद कर सकती हैं। इन एक्सरसाइज को करने के लिए आपको हर रोज सिर्फ 10 मिनट का समय निकालना है। इसके बाद आप पूरे दिन एक्टिव रहेंगे और आपकी एनर्जी भी बरकरार रहेगी। इसके अलावा आपको रात में नींद भी अच्छी आएगी, जिससे आप कम सोकर भी शरीर की सारी थकान आसानी से मिटा पाएंगे। आइए आपको बताते हैं कि सुबह उठने के बाद आपको कैसे करनी चाहिए अपने दिन की शुरुआत।

सुबह उठने के बाद सबसे पहला काम
फिट और हेल्दी रहने के लिए आपको सुबह-सुबह उठकर जिम में घंटों पसीना बहाने की जरूरत नहीं है। सुबह उठने के बाद सबसे पहले एक ग्लास सामान्य या गुनगुना पानी पिएं और फिर एक्सरसाइज के लिए तैयार हो जाएं। आप घर के किसी कमरे में, छत पर, पार्क में या सड़क पर, कहीं भी ये एक्सरसाइज आसानी से कर सकते हैं।

स्ट्रेचिंग
सबसे पहले अपने दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखते हुए बिल्कुल सीधे खड़े हो जाएं। अब अपने हाथों को ऊपर की तरफ जितना ज्यादा उठा सकते हैं उठाएं। इसी के साथ अपनी एड़ियां भी उठाएं। 10 सेकंड रुकने के बाद फिर पहले वाली पोजीशन में आ जाएं। इसके बाद अपने हाथों को दाएं-बाएं फैलाएं और फिर विपरीत दिशा में ले जाते हुए कमर को स्ट्रेच करें। इसके बाद हाथों को दोबारा ऊपर की तरफ उठाकर झुकते हुए पैर की उंगलियों को छुएं। ये सभी क्रियाएं 5-5 बार करें। इस तरह आपके पूरे शरीर की स्ट्रेचिंग हो जाएगी।

पावर पुशअप्स
स्ट्रेचिंग करने के बाद आपकी बॉडी एक्सरसाइज के लिए तैयार हो जाती है। अब आपको तुरंत पुशअप्स करने हैं, जिससे आपके सीने, भुजाएं, एब्स और पैरों को फायदा मिलेगा। पुशअप्स करने के लिए जमीन पर पेट के बल लेट जाएं और अपनी हथेलियों को जमीन पर इस तरह रखें कि ये आपके सीने के सामने आएं। अब अपने हाथों की शक्ति के सहारे अपने पूरे शरीर को ऊपर उठाएं और फिर पहले वाली पोजीशन में आ जाएं। इससे आपकी बांहों पर जोर पड़ेगा। आप जितने पुशअप्स कर सकते हैं, उतने कर लें। शुरुआत में अगर आप 5-10 पुशअप्स भी करते हैं, तो ये आपके लिए फायदेमंद होगा।

सूमो स्क्वैट
सूमो स्क्वैट करने से आपके कमर के नीचे के हिस्सों की अच्छी एक्सरसाइज हो जाती है। इसे करने के लिए सबसे पहले अपने पैरों के बीच थोड़ी जगह बनाते हुए सीधा खड़े हो जाएं। अब अपने दोनों हाथों को अपने सिर के पीछे ले जाकर लॉक कर लें। इसके बाद बिना आगे की तरफ झुके हुए, बैठने की पोजीशन में आएं। घुटनों को मोड़ते हुए आप जितने नीचे तक बैठ सकते हैं, बैठें और फिर वापस खड़े हो जाएं। इस तरह 10 सेट करें। इसके बाद आप अपने दाएं पैर को दाईं दिशा में फैलाते हुए ऊपर उठाएं और फिर पहले वाली पोजीशन में आ जाएं। इसके बाद बाएं पैर को बाईं दिशा में फैलाते हुए ऊपर उठाएं और फिर पहले वाली पोजीशन में आ जाएं।

चेहरे की सभी समस्याओं को दूर करता है फेशियल योगा


योगासनों के द्वारा सिर्फ रोगों ही नहीं, चेहरे की तमाम परेशानियों को भी दूर किया जा सकता है। जी हां, योग अपने चेहरे की खूबसूरती बढ़ा सकते हैं। चेहरे के लिए किए जाने वाले खास योगासनों को फेशियल योगा कहते हैं। इन योगासनों की खास बात ये है कि बिना किसी केमिकलयुक्त ब्यूटी प्रोडक्ट के आप अपने चेहरे से झुर्रियां, काले घेरे, मुंहासे आदि को दूर कर सकते हैं। फेशियल योगा आपके चेहरे की त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है, जिससे आपकी खूबसूरती बढ़ती है और चेहरे पर आत्मविश्वास झलकता है। आइए आपको बताते हैं कैसे करें फेशियल योगा।

झुर्रियों के लिए खास योगसन
गहरी सांस लें और मुंह में इतनी हवा भरें जैसे गुब्‍बारा फुलाने के लिए हवा भरते हैं। पांच सेकंड के लिए इसी मुद्रा में रहें। गुब्बारा फुलाने वाली इस योग को करने से न सिर्फ चेहरे बल्कि फेफड़ों की भी अच्छी एक्सरसाइज होती है। इससे गालों की झुर्रियां दूर होती है और चेहरे की त्वचा का कसाव बना रहता है। इस योग को पांच से आठ बार दोहराएं।
ऐसे करें गालों की चर्बी को कम
इस योग को करने के लिए हम अपने गालों को दुलार से मारते हैं। इस योग को करने क‍े लिए सुखासन में बैठकर अपने दोनों हाथों की अंगुलियों से अपने गालों को लगातार थपथपाएं। चेहरे को खूबसूरत बनाने के लिए नियमित रूप से 5 मिनट करें।

फाइन लाइन्स से छुटकारा पाने के लिए योगासन
अगर आप अपनी नाक और होंठ के बीच की लाइनों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो यह योग आपके लिए बहुत उपयोगी सा‍बित हो सकता है। इसे करने के लिए हंसे और होंठ और नाक के बीच के हिस्‍से को दबाये। उभरे हुए हिस्‍से को कम से कम 20-30 बार दबाकर रखें।

हंसना भी है बेहतरीन योगासन
हास्‍यासन करने से चेहरा गुलाव की तरह खिल जाता है। खूब जोर से हंसने को हास्‍यासन कहते हैं। हंसने के दौरान शरीर की सभी 600 मांसपेशियों की कसरत एक साथ होती है। ठहाका लगाकर हंसने से फेफड़ों में ज्यादा ऑक्सीजन जाती है, रक्त शुद्ध होता है। इस योग को करने के लिए इतना हंसिये कि आंखों से आंसू आ जाए।

चेहरे पर निखार के लिए योगासन
कपोल शक्ति विकासक योग चेहरे प‍र निखार लाने के लिए बहुत अच्‍छा योगासन है। इसके लिए सुखासन या फिर पद्मासन में बैठ जाएं। दोनों हाथों की आठों अंगुलियों के आगे के भाग को आपस में मिलाकर दोनों अंगूठे से दोनों नाकों के छिद्रों को बंद कर लें। फिर सांस अंदर खींचे। फिर दोनों अंगूठों से नाक के छिद्रों को बन्द कर लें और अपने गालों को गुब्बारे की तरह फुलाएं और अपनी क्षमता अनुसार सांस रोककर धीरे-धीरे सांसों को बाहर निकालें। यह अभ्यास कम से कम 20 बार करें।



कमर और कंधों के लिए बहुत फायदेमंद है आकर्ण धनुरासन


योगासनों के नियमित अभ्यास से शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखा जा सकता है। वैसे तो योगासन आपके पूरे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं, मगर अलग-अलग योगासनों के अलग-अलग अंगों से जुड़े कुछ विशेष फायदे भी हैं। अगर कभी आपकी नस चढ़ जाती है, या कमर और कंधों में दर्द होता है, तो आकर्ण धनुरासन आपके लिए बहुत फायदेमंद है।

इस आसन को करने के दौरान आपके शरीर की आकृति धनुष चलाने वाले योद्धा जैसी हो जाती है, इसलिए इसे आकर्ण धनुरासन कहते हैं। इसके अलावा ये आसन आपके भुजाओं, कंधों, जांघों और पिंडलियों को मज़बूत और सुडौल बनाता है। आकर्ण धनुरासन आपके फेफड़ों के लिए भी बहुत फायदेमंद है। ये आसन फेफड़ों को मजबूत बनाता है, जिससे सांस के रोगियों को बहुत लाभ मिलता है।

कैसे करें आकर्ण धनुरासन
-इस आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने पैरों को सामने की तरफ फैलाएं।

-दोनों एड़ियों और पंजों को आपस में मिलाइए।

-अब दाएं हाथ से बाएं पैर के अंगूठे को पकड़िए और बाएं हाथ से दाएं पैर तक के अंगूठे को पकड़िए।

-बाएं हाथ से अपने दाएं पैर को मोड़ते हुए इसके अंगूठे को बाएं कान से स्पर्श करिए।

-इस दौरान कोहनी ऊपर की ओर रखें और सामने की तरफ देखें।

-इसी तरह बाएं पैर को खींच कर दाएं कान के पास लाकर इस आसन को दोहराइए।

-इस स्थिति में 15-30 सेकंड या जितनी देर रह सकें, रहें और फिर पहले वाली पोजीशन में आ जाएं।

-इस आसन के दौरान गहरी-गहरी सांसें भरते और छोड़ते रहें।

बैठकर काम करने वालों के लिए फायदेमंद है ये आसन 
जो लोग दिनभर बैठकर काम करते हैं, उनके लिए ये आसन बहुत फायदेमंद है। इस आसन के दौरान आपकी रीढ़ की हड्डियां अच्छी तरह स्ट्रेच हो जाती हैं और हाथ, पैर, फेफड़ों और पेट की अच्छी तरह मसाज हो जाती है, जिससे शरीर की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

फेफड़े बनते हैं मजबूत
शहरों के साथ-साथ गांवों में भी अब वायुप्रदूषण एक बड़ी समस्या बन गई है। प्रदूषण में सांस लेने के कारण आपके फेफड़े कमजोर हो जाते हैं। यही कारण है कि पिछले एक दशक में फेफड़ों और सांस के रोगियों की संख्या बहुत बढ़ गई है। आकर्ण धनुरासन का नियमित अभ्यास आपके फेफड़ों को मजबूत बनाता है। सांस के रोगियों के लिए ये योगासन फायदेमंद है मगर उन्हें अपने चिकित्सक से एक बार इस बारे में सलाह ले लेनी चाहिए।

शरीर में होता है बेहतर रक्त प्रवाह
आकर्ण धनुरासन के अभ्यास से पूरे शरीर की नसों और नाड़ियों में रक्त प्रवाह बेहतर है। अगर आपके शरीर में रक्त प्रवाह ठीक न हो, तो कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इस आसन के अभ्यास से दिल के रोगों से भी बचाव रहता है। देखने में ये आसन आपको कठिन और उलझाऊ लग सकता है, मगर इस आसन को एक-एक स्टेप करेंगे, तो ये बहुत आसान आसन है।




लिवर को रखना चाहते है दुरुस्त तो रोज करें ये योगासन


लिवर शरीर का एक जरूरी अंग है, जो ढेर सारे फंक्शन में शरीर की मदद करता है। आजकल गलत खानपान और आदतों के कारण लिवर के मरीजों की संख्या काफी बढ़ रही है। लिवर भोजन में मौजूद सभी पोषक तत्व जैसे- विटामिन्स, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स आदि को अलग करता है और शरीर की जरूरत के अनुसार इसे अलग-अलग अंगों को पहुंचाता है। ये कुछ पोषक तत्वों को स्टोर कर लेता है, ताकि इसे एनर्जी की तुरंत जरूरत होने पर इस्तेमाल कर सके। अगर आप अपने लिवर को जीवनभर दुरुस्त रखना चाहते हैं और शरीर को सेहतमंद रखना चाहते हैं, तो योगासन आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं। आइए आपको बताते हैं ऐसे 4 योगासन, जो लिवर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

कपालभाति प्राणायाम
कपालभाति प्राणायाम मानव शरीर की पाचन शक्ति बढ़ाता है। आंतों की कमजोरी दूर करने के लिए भी लाभदायी है। इससे पेट के सभी प्रकार के रोगों से राहत मिलती है। गैस, कब्ज और खून के विकार की समस्याएं दूर होती हैं। इससे कई लीवर समस्‍याओं जैसे पीलिया, हेपेटाइटिस आदि ठीक होती है। शरीर में एनर्जी का संचार करने और तनाव दूर करने के लिए कपालभाती प्राणायाम करें।

एक मैट पर सीधे बैठें और फिर पद्मासन की स्थिति में आएं। दोनों घुटनों को मोड लें और बाएं पैर को दाएं पैर पर हाथों को आकाश की तरफ रखते हुए सांस को भरें और फिर पेट को भीतर की ओर संकुचित करते हुए सांस को बाहर की तरफ छोड़ें। इस क्रिया को लगातार करें। कपालभाति में प्रत्येक सेकंड में एक बार सांस को तेजी से बाहर छोड़ने के लिए ही प्रयास करना होता है। सांस को छोड़ने के बाद बिना प्रयास किए सामान्य रूप से सांस को अंदर आने दें। थकान महसूस होने पर बीच-बीच में रुक कर विश्राम अवश्य लेते रहें।

अग्निसार क्रिया
पेट, लिवर और किडनी के लिए अग्निसार क्रिया बहुत फायदेमंद है। यह क्रिया बैठ कर या खड़े होकर की जा सकती है। सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच बराबर दूरी बना लें। थोड़ा आगे की तरफ झुकते हुए दोनों हाथों को अपनी जांघों पर रखे और सांस को भर लें। एक साथ सांस को भर लें और फिर उसे तेजी से बाहर छोड़ दें। फिर सांस को रोकते हुए पेट की मांसपेशियों को अंदर की ओर खींचें और फिर बाहर की तरफ ढकेलें। ये क्रिया लगातार करें। सांस को रोकते हुए इस क्रिया को जितना दोहरा सकते हैं, दोहराएं। शुरुआत में 5 बार इस क्रिया को करें फिर क्षमता अनुसार इसे बढ़ाएं। जब थकान महसूस हो तब इस क्रिया को रोकें और सांस लें। कुछ देर बाद इस क्रिया को वापस दोहराएं और पेट को अंदर बाहर करें।

नौकासन
यह आपके लीवर को मजबूत बनाता है। यह पोज आपके लीवर को क्लीन करता है साथ ही साथ हानिकारक पदार्थो को भी दूर करता है। सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं। अपने हाथ जांघ के बगल और शरीर को एक सीध में रखें। फिर अपने शरीर को ढीला छोड़े और सांस पर ध्यान दें। अब आप सांस लेते हुए अपने सिर, पैर, और पूरे शरीर को 30 डिग्री पर उठायें। ध्यान रहे कि आपके हाथ ठीक आपके जांघ के ऊपर हो। धीरे-धीरे सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़ें, इस अवस्था को अपने हिसाब से बनाये रखें। जब अपने शरीर को नीचे लाना हो तो लंबी गहरी सांस छोड़ते हुए सतह की ओर आयें। शुरुआती दौर में 3 से 5 बार करें। नौकासन की यह विधि तनाव दूर करने के लिए बहुत ही प्रभावी है।

पवनमुक्तासन
पवनमुक्तासन से शरीर की पाचन क्रिया रहती है। गैस की समस्या में इस योगासन से बेहतर कोई इलाज नहीं है। इसके अलावा इस योगासन के अभ्यास से कमरदर्द और गठिया जैसे रोगों में भी लाभ मिलता है। पवनमुक्तासन को करने के लिए सबसे पहले सीधे लेट जाएं। अब दाहिने पैर को मोड़कर अपनी छाती को घुटनों से छूने की कोशिश करें। फिर दोनों हाथों की मदद से दाएं पैर को अपनी ओर खीचें और सिर उठाकर घुटने से नाक छूने की कोशिश करें। अब इसी प्रक्रिया को बाएं पैर से करें। पवनमुक्तासन का रोज कम से कम 10 बार अभ्यास करें।

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.