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यूं रहें फ़िट



यूं रहें फ़िट: अगर आप हैं मध्यम शारीरिक गठनवाली
इस प्रकार की गठनवाली महिलाओं का वज़न तेज़ी से बढ़ता है, लेकिन सही डायट और एक्सरसाइज़ की मदद से उतनी ही तेज़ी से घट भी जाता है. आमतौर पर गठीली बांहों और पैरों के साथ ये हृष्ट-पुष्ट होती हैं. दिलचस्प है कि इनका वज़न इनके क़द के अनुपात में ज़्यादा हो सकता है, पर इसका कारण अतिरिक्त वसा के बजाय मांसपेशियां होती हैं. आपकी फ़िटनेस योजना कुछ ऐसी होनी चा‌हिए. 


फ़िटनेस योजना
एक्सरसाइज़ का समय: 45 से 60 मिनट
सही समय: जल्दी सुबह या फिर देर शाम 
वर्कआउट का प्रकार: मिलाजुला/ जैसा कि यह वर्ग ज़्यादातर मांसल होता है, अत: इन्हें आधारभूत मज़बूती, मांसपेशियों 
को आकार देने और दुरुस्त करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए.

उच्च-तीव्रतावाली कार्डियो ऐक्सरसाइज़: सप्ताह में 5 बार 20 से 30 मिनट, उन अतिरिक्त मांसपेशियों का प्रयोग करने के लिए, इसके साथ ही मांसपेशियों के समूहों को मज़बूत बनाने के लिए ट्रेनिंग दें. 
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: पेट कम करने के लिए विशेष एक्सरसाइज़ के साथ कोर को मज़बूत करने के लिए आधे घंटे तक पिलाटे करें. 
ऐरोबिक्स: पतले और तराशे हुए शरीर के लिए सप्ताह में 3 बार 30 मिनट के लिए ऐक्वेटिक एक्सरसाइज़ेस, हुला हूप वर्कआउट्स, पावर योगा और रोप जंपिंग करें. 
मेन्यू योजना 
यह खाएं: आदर्श आहार में 45प्रतिशत कॉम्पलेक्स कार्ब्स, 35 प्रतिशत स्वास्थ्यकर प्रोटीन और 20 प्रतिशत गुणकारी फ़ैट शामिल होने चाहिए. विशेषज्ञ उच्च प्रोटीन और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट वाले तीन छोटे-छोटे भोजन करने की सलाह देते हैं. भोजन के बीच-बीच में फल (पूरा, कच्चा), बादाम, दही और सूखे मेवे स्नैक के रूप में खाएं. 
यह न खाएं: रिफ़ाइन्ड कार्ब्स (शक्कर और मैदा से बने प्रॉडक्ट्स) कम से कम खाएं, क्योंकि ये शरीर में फ़ैट इकट्ठा कर वज़न बढ़ाते हैं.

यूं रहें फ़िट: अगर आप हैं थोड़ी भारी

बड़े गठनवाली महिलाओं के कूल्हे कंधों से चौड़े होते हैं और शरीर के निचले हिस्सों पेट, कूल्हों, जांघों में फ़ैट इकट्ठा करने की प्रवृत्ति इस प्रकार के बॉडी टाइप में देखी जाती है. आपकी फ़िटनेस योजना कुछ ऐसी होनी चा‌हिए.

फ़िटनेस योजना
एक्सरसाइज़ का समय: 1 घंटा प्रतिदिन
सही समय: जल्दी सुबह 
वर्कआउट का प्रकार: मिलाजुला/ रोटेशनल
बड़े शारीरिक गठनवाली महिलाओं को सख़्त फ़िटनेस और डायट दिनचर्या का पालन करना चाहिए. इन्हें अपनी चयापचय प्रक्रिया को फ़ैट इकट्ठा करने की बजाय फ़ैट नष्ट करने की दिशा में मोड़ने के लिए काफ़ी मेहनत करने की ज़रूरत होती है. इस वर्ग के लिए मिलाजुला वर्कआउट सबसे ज़्यादा कारगर होता है. 

योग/पावर योग: धनुरासन, नौकासन, भुजंगासन, पवन मुक्तासन काफ़ी प्रभावकारी हो सकते हैं. सेशन को शवासन और कुछ मिनटों के प्रणायाम से ख़त्म करें. बड़े शारीरिक गठनवाली महिलाओं को चोट लगने का ख़तरा ज़्यादा रहता है इसलिए ये एक्सरसाइज़ विशेषज्ञों की निगरानी में करना बेहद ज़रूरी है. ख़ासतौर पर सही मुद्राओं के लिए मार्गदर्शन आवश्यक है. 
कार्डियो: बाक़ी शारीरिक गठनवालों की तुलना में आपको वज़न घटाने और उसे बनाए रखने के लिए कार्डियो की ज़्यादा ज़रूरत होती है. एक अच्छे कार्डियो में तेज़ वॉक और कुछ मिनटों की स्ट्रेचिंग और कंधों, बाहों, गले, पेट, कूल्हों और पीठ को मज़बूती देनेवाली एक्सरसाइज़ शामिल होने चाहिए. स्पॉट जॉगिंग, गले को घुमाना, शोल्डर श्रग्स (कंधों को गोल-गोल घुमाना और उचकाना), पैर के अंगूठे को छूना और बगल में झुकना, चोट व मोच से बचने और जोड़ों और मांसपेशियों को गतिशील और लचीला बनाने का सबसे बेहतर तरीक़ा है. सप्ताह में 5 से 6 बार 45 मिनट तक उच्च तीव्रतावाले ऐरोबिक वर्कआउट करें. इस प्रकार की एक्सरसाइज़ चुनें, जिसे करने में आपको मज़ा आए और जो आपके गठन को मज़बूती, स्टैमिना, लचीलापन और इम्यूनिटी प्रदान कर सकें. हमारा शरीर ऐक्सरसाइज़ के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया देता है और इसके प्रति सकारात्मक रवैया अपनाने पर यह शरीर के गठन और कार्यप्रणाली में सहायक बन सकता है. नियमित ऐक्सरसाइज़ और सही आहार योजना इस बॉडी टाइप से जुड़ी हाइपरटेंशन, डायबिटीज़, हृदय विकार और ऑस्टिओपोरोसिस जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने में मददगार साबित हो सकती है. 

मेन्यू योजना 
यह खाएं: एक अच्छे भोजन में 30 प्रतिशत कॉम्पलेक्स कार्ब्स, 45 प्रतिशत प्रोटीन और तक़रीबन 25 प्रतिशत तक अच्छे गुणोंवाला फ़ैट्स शामिल होने चाहिए. भोजन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट लें. भूखे मत रहें, हर दो से तीन घंटों के भीतर खाने के लिए अपने पास कुछ न कुछ हमेशा रखें. 
यह न खाएं: इस प्रकार के गठनवाले लोगों में मोटापा आने की ज़्यादा संभावनाएं रहती हैं, इसलिए प्रत्येक भोजन में ज़्यादा से ज़्यादा पौष्टिकता और कम से कम फ़ैट्स होने चाहिए. ख़ासकर यह ध्यान रखते हुए कि इस प्रकार के शारीरिक गठनवालों को वज़न घटाने में मुश्क़िल होती है, फ़ैट्स बढ़ानेवाले हाई कैलोरी फ़ूड और शक्कर की अधिक मात्रावाले फ़ूड प्रॉडक्ट्स से बचना चाहिए. सभी प्रकार के शक्कर (केला, आम, अंगूर जैसे फलों में पाए जानेवाले भी) और सरल कार्ब्स जैसे सफ़ेद आटे से बने प्रॉडक्ट्स और पास्ता, सफ़ेद चावल और आलू से बचें. ये सभी ब्लड शुगर के स्तर को तेज़ी से बढ़ाते हैं, जिससे फ़ैट को संचयित करनेवाला हार्मोन इन्सुलिन सक्रिय हो जाता है. साथ ही अपने चयापचय की प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए अपने प्रतिदिन के

यूं रहें फ़िट: अगर आप हैं दुबली-पतली
जिनका शारीरिक गठन छोटे जोड़ों और पतली मांसपेशियों से बना होता है, वे दुबले-पतले होते हैं. उन्हें छोटे शारीरिक गठनवाला भी कहा जाता है. इस प्रकार के गठनवाले लोगों का वज़न नहीं बढ़ पाता और इस वर्ग में आनेवाले ज़्यादातर लोग लगातार तेज़ चयापचय की प्रक्रिया के कारण भूख से अधिक खाते हैं. इनकी हड्डियां छोटी होती हैं और मांसपेशियां भी कम होती हैं, इसलिए ये बीएमआई (बॉडी माक्स इंडेक्स) स्केल के सबसे निचले छोर पर आते हैं. यदि आप भी इस श्रेणी में आती हैं तो आपकी फ़िटनेस योजना कुछ ऐसी होनी चा‌हिए. 


फ़िटनेस योजना
एक्सरसाइज़ का समय: 30 मिनट
सही समय: दिन का कोई भी समय 
वर्कआउट का प्रकार: मिलाजुला
इस वर्ग की महिलाओं को अपना वज़न नियंत्रित करने के लिए चिंतित नहीं रहना पड़ता इसलिए इनके एक्सरसाइज़ का मक़सद मूल रूप से शरीर को टोन करना और तनाव के स्तर को नियंत्रित करना ही होता है. 

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: बारी-बारी से मध्यम-भारी तीव्रतावाले एक्सरसाइज़ कर अपनी मांसपेशियां बनाएं, शरीर के विभिन्न हिस्सों पर एक के बाद एक बॉडी-वेट वर्कआउट की सहायता से काम करें. 
ऐरोबिक्स: ऐरोबिक वर्कआउट आपको ऊर्जावान और आपके दिल को स्वस्थ बनाता है. सप्ताह में तीन बार 15 से 30 मिनट का ऐरोबिक आपके लिए अच्छा होगा.

मेन्यू योजना
यह खाएं: आहार में 55 प्रतिशत कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स (होल ग्रेन्स, चावल, बादाम, सब्ज़ियां), 30 प्रतिशत सेहतमंद प्रोटीन (अंडे, लीन मीट) और १५ प्रतिशत तक ऑलिव ऑयल, अखरोट, अलसी और मछली आदि से प्राप्त होनेवाले गुणकारी फ़ैट्स शामिल होने चाहिए. बीन्स, फलों और हरी पत्तेदार सब्ज़ियों, होल ग्रेन्स, फलियों के सेवन पर विशेष ध्यान दें. इन महिलाओं द्वारा अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन आम है, लेकिन ज़्यादा प्रोटीन सेवन ख़तरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे कैल्शियम की हानि होती है, जिससे हड्डियों का घनत्व घटता है और ऑस्टिओपोरोसिस होने की संभावना बढ़ती है. 
यह न खाएं: ट्रांस-फ़ैट्स, पका हुआ ठंडा गोश्त, मायोनीज़, वसायुक्त डेयरी प्रॉडक्ट, मीठे डेज़टर्स, पैकेज्ड फ़ूड्स और चिप्स से बचें.

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