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प्रेग्नेंट महिलाएं जरूर खाएं ये 5 फल

प्रेग्नेंट महिलाएं जरूर खाएं ये 5 फल होता हैं भरपूर मात्रा में कैल्शियम

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अपना खास ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके गर्भ में पल रहे बच्चे का स्वास्थ्य भी निर्भर करता है। जंक फूड्स और तैलीय खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। फलों और सब्जियों को डाइट में भरपूर शामिल करें। प्रेग्नेंसी के दौरान कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन भी करना चाहिए। इससे आपकी मांसपेशियों और हड्डियों के साथ-साथ बच्चे की भी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती मिलेगी। कैल्शियम कई स्वास्थ्य समस्याओं से तो बचाता ही है, भ्रूण का विकास भी सही ढंग से होता है। जानें, उन पांच फलों के बारे में जो कैल्शियम से होते हैं भरपूर…

कीवी


कीवी का सेवन प्रेग्नेंसी के दौरान लाभकारी होता है। इसमें उच्च मात्रा में कैल्शियम और विटामिन-सी होता है। ये पोषक तत्व प्रेग्नेंट महिलाओं के शरीर को कई लाभ प्रदान करते हैं।

सूखे अंजीर


अंजीर का सेवन गर्भावस्था में जरूर करना चाहिए। एक कप सूखे अंजीर में लगभग 240 एमजी कैल्शियम होता है। साथ ही इसमें उच्च मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए लाभकारी होता है।

खजूर

लेबर पेन से छुटकारा पाने के लिए आप चाहें तो खजूर का सेवन कर सकती हैं। यह दर्द को काफी हद तक कम कर देता है। इसमें उच्च मात्रा में कैल्शियम होता है। एक खजूर में लगभग 15.36 एमजी कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को तो मजबूती देता ही है, प्रेग्नेंसी के कारण होने वाली समस्याओं को भी कम करता है।

सूखे खुबानी

इसमें भी कैल्शियम उच्च मात्रा में होता है। इसमें आयरन, फोलिक एसिड और पोटैशियम भी होता है, जो शरीर को पर्याप्त पोषण देता है। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास भी बेहतर तरीके से होता है।

शहतूत


शहतूत भी कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ है। इसे हर प्रेग्नेंट लेडी को खाना चाहिए। शहतूत का सेवन शरीर में कैल्शियम की कमी को दूर करके हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है।


कब शुरू होगा पहला पीरियड्स? ये 3 शारारिक बदलाव देते हैं संकेत

लड़कियों की उम्र 10 वर्ष होते ही उन्‍हें पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। किसी-किसी के पीरियड्स 11 से 16 वर्ष के बीच भी शुरू होते हैं। मगर, फर्स्‍ट पीरियड्स में मां और स्‍कूल में पीरियड्स पर दी गई जानकारी भी कभी-कभी प्रैक्टिकली काम नहीं आती और बच्चियों को शर्मिंदा होना पड़ता है। आप चाहें तो अपनी बेटियों को पहले से ही चेता सकती हैं। इसके लिए आपको अपनी बेटियों शरीर में होने वाले वो 3 बदलावों के बारे में बताना होगा, जो पीरियड्स शुरू होने का संकेत होते हैं। चलिए हम आपको बताते हैं।

ब्रेस्‍ट साइज का बढ़ना
बेटियों को समझाएं अगर उनके ब्रेस्‍ट का साइज बढ़ रहा हो तो समझ जाएं कि उनके पीरियड्स स्‍टार्ट होने में अब समय नहीं है। आपको बता दें कि जब लड़की के ब्रेस्‍ट उभरना शुरू होते हैं तो उन्‍हें पूरे आकार में आने में 4 से 5 वर्ष लगते हैं मगर, जब ब्रेस्‍ट उभरना शुरू हों तो उसके 2 वर्ष बाद से पीरियड्स शुरू होने लगते हैं। यही सही वक्‍त होता है जब आपको अपनी बेटी को पीरियड्स के बारे में जानकारी देनी चाहिए और उसे बताना चहिए कि उसे जब भी ऐसा महसूस हो तो उसे घबराने के जरूरत नहीं है बल्कि यह एक सामान्‍य प्रक्रिया है।

प्‍यूबिक हेयर्स की ग्रोथ
बेटी जब 10 वर्ष की हो जाए तो उसे इस बात पर ध्‍यान रखने के लिए कहें कि उसके प्‍यूबिक एरिया जो कि वैजाइना के आसपास के एरिया को कहते हैं। उसमें बालों की ग्रोथ तो नहीं हो रही अगर ऐसा हो रहा है तो उसे पीरियड्स के बारे में बताएं। यही सही मौका है जब आपको उसे सैनिटरी पैड्स की जानकारी देनी चाहिए। बेटी को बताना चाहिए कि जब भी पीरियड्स शुरू हों तो उसे सैनिटरी पैड्स का इस्‍तेमाल कैसे करना है। प्‍यूबिक ऐरिया पहले पतले और सॉफ्ट बाल आते हैं उसके बाद फिर वह धीरे से बढ़ना शुरू होते हैं। जब ऐसा हो तो समझ जाएं कि एक या दो वर्ष में ही उसे पीरियड्स शुरू होने वाले हैं।

व्‍हाइट डिसचार्ज शुरू होना
यह तीसरा सकेंत होता है। जब बेटी का व्‍हाइट डिसचार्ज शुरू होता है। यह वैजाइनल डिसचार्ज सफेद या पीले रंग का होता है। बेटी को समझाएं जब भी उसे ऐसा हो तो वह सतर्क रहे क्‍योंकि डिसचार्ज का मतलब ही होता है कि कुछ ही महीनों में पीरियड्स शुरू होने वाले हैं। ऐसे में आपको उनके बैग में सैनिटरी पैड्स रखना शुरू कर देना चाहिए।






शोध: प्रेगनेंसी में महिलाओं के लिए फायदेमंद होती है चॉकलेट, जानें 5 बड़े फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर महिलाओं को खाने पीने की कई चीजों से दूर रहने की सलाह देते हैं। चॉकलेट भी ऐसी ही कुछ चीजों में शामिल होती है। इसमें मौजूद फैट, शुगर और कैफीन मां और बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, एक नए शोध की मानें तो गर्भावस्‍था के दौरान चॉकलेट खाने से कई तरह की स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याओं को कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं गर्भावस्‍था के दौरान चॉकलेट खाने से होने वाले कुछ खास फायदों के बारे में।

ब्‍लड सर्कुलेशन ठीक रहता है
कोको से बनी चॉकलेट खाने का सबसे पहला फायदा यह होता है कि इससे शरीर में ब्‍लड सर्कुलेशन ठीक बना रहता है, जिसकी वजह से भ्रूण के पास मां का पर्याप्‍त खून पहुंच पाता है।

आयरन और मैगनीशियम से भरपूर
इसमें बहुत सारा मैगनीशियम और आयरन मौजूद होता है, जिसकी वजह से महिला के शरीर में खून की कमी नहीं होती है. इसमें मौजूद मैग्नीशियम से फैटी एसिड कामेटाबॉलिज्म बढता है।

दिल की बीमारी से राहत
प्रेगनेंसी के समय चॉकलेट खाने से दिल मजबूत बनता है। जिसकी वजह से व्यक्ति को दिल से जुड़ी बीमारी नहीं होती।

कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटती है
डार्क चॉकलेट में चीनी और वसा की मात्रा बेहद कम होने की वजह से यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटा कर रखती है।

तनाव से छुटकारा दिलाए
यह ब्‍लड प्रेशर को मेंटेन करने के साथ तनाव के लेवल को भी कम करती है।




गर्मियों में लू से बचने के साथ कम करना है वजन, तो छाछ में मिलाएं ये खास चीजें

लस्सी एक ऐसा पेय है जिसे ज्यादातर लोग पीना पसंद करते हैं। कहीं मीठी तो कहीं नमकीन लस्‍सी पी जाती है। गर्मी में तो इसकी काफी डिमांड होने लगती है। क्योंकि इसमें ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो शरीर के बेहद जरूरी होते हैं। साथ ही यह लू से भी बचाती है। दही, पानी के साथ जीरा, काला नमक, काली मिर्च, हरा धनिया, हरी मिर्च, हींग और पुदीना जैसे मसालों से तैयार किसी औषधीय दवा से कम नहीं होती। लेकिन अगर इसमें कुछ दूसरी चीजें मिला दी जाएं तो यह वजन भी कम कर सकती है।

केला :- एक कप दही में 1-2 केले मिलाकर स्मूदी बना लें। इसे रोजाना सुबह पीने से तेजी से वजन कम होता है। जिन लोगों के सीने में जलन, अपच और पेट दर्द की परेशानी होती है, वे भी यह नुस्खा अपना सकते हैं।

काला नमक और काली मिर्च :- लस्‍सी या छाछ में मिश्री, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर रोजाना पीने से एसिडिटी की समस्‍या खत्‍म हो जाती है। इस छाछ से पेट का भारीपन, भूख न लगना, अपच व पेट की जलन की शिकायत दूर हो सकती है।

अजवायन :- जिन लोगों को कब्ज की शिकायत रहती है उन्हें अजवाइन वाली छाछ पीनी चाहिए। एक गिलास छाछ में 1 छोटा चम्मच अजवाइन का पाउडर मिलाकर पीएं। छाछ से पीलिया की बीमारी को कम किया जा सकता है। एक कप छाछ को दिन में 2-3 बार पीने से पीलिया का असर जल्द कम होता है।

पुदीना :- जिन लोगों को अपच की समस्या होती है, उन्‍हें पुदीने वाली छाछ का सेवन करना चाहिए। छाछ यूरिन इंफेक्‍शन को कम करती है। इसके अलावा प्यास लगना और स्किन संबंधी बीमारियों में भी छाछ पीना अच्छा हो सकता है







सोते समय पैरों की सही दिशा आपका जीवन को स्वस्थ और सुखमय बनाती हैं
इंसान अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी से थक हारकर रात को एक आराम की नींद लेना पसंद करता हैं। अगर उस नींद में कोई अड़चन आए तो इसका सीधा असर इंसान के स्वास्थ्य पर पड़ता हैं। जरा सोचिए रात की यह नींद आपको कई बिमारियों से बचाए तो। जी हाँ, ज्योतिष के अनुसार यदि सोते समय कुछ बातों को ध्यान मे रखा जाए तो टेंशन और बीमारियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बस जरूरत हैं तो सोते समय दिशाओं का सही ज्ञान रखने की। रात को सोते समय पैरों की सही दिशा आपका जीवन स्वस्थ और सुखमय बनाते हैं। तो आइये जानते हैं किस तरह सोएं.....

➺ सोते वक्त यदि सिर दक्षिण दिशा की ओर तथा पैर उत्तर दिशा की ओर रखा जाए तो इससे पृथ्वी की ऊर्जा का प्रवाह सही बना रहता है।

➺ दक्षिण दिशा की ओर सिर करने पर ऊर्जा शरीर में प्रवेश करती है और पैरों के जरिए बाहर निकल जाती है। यह शरीर का रक्त संचरण और पाचन तंत्र मे काफी मददगार रहते हैं।

➺ यदि अप मन को शांत रखना चाहते है तो दक्षिण दिशा की ओर सिर रखकर सोना चाहिए है और अवसाद तथा तनाव पर नियंत्रण करना आसान होता है।

➺ यदि दक्षिण दिशा की ओर सिर कर पाना संभव ना हो तो पश्चिम दिशा की और भी किया जा सकत है इस दौरान पैर पश्चिम की ओर रहते हैं।

➺ चूंकि पूर्व दिशा से सूर्य उदय होता है, सूर्यदेव सम्पूर्ण जगत को प्रकाश देते हैं। वे जीवन के लिए ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। अगर पूर्व की ओर सिरहाना किया जाए तो यह फलदायक होगा|

➺ पूर्व दिशा की ओर पैर करके सोना उचित नहीं माना जाता है। इससे जीवन में दोषों का प्रवेश हो सकता है। यह सूर्यदेव की दिशा है इसलिए पूर्व की और पैर नहीं करना चाहिए।


आयुर्वेद के चुनिंदा उपचारों में से एक, नाभि में तेल लगाने से दूर होती है ये परेशानियाँ

आयुर्वेद को हमारे जीवन की अच्छी सेहत के लिए संजीवनी के तौर पर देखा जाता हैं। जिसमें ऐसे कई उपचार बताए गए है जो बेहद आसान होने के साथ ही कारगर भी साबित होते हैं। आज हम आपको आयुर्वेद के कुछ ऐसे ही उपचार के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी मदद से कई बिमारियों और तकलीफों से छुटकारा पाया जा सकता हैं। यह उपचार है नाभि में तेल लगाना। तो आइये जानते है इससे जुड़ी पूरी जानकारी के बारे में कि किस तरह से नाभि में तेल लगाना फायदेमंद होगा।

➺ क्या आपको सर्दी, जुकाम है? तो रुई के फ़ोहे को एल्कोहल में डुबोए और पेट की नाभि पर लगाएं। बस हो गया। ये सर्दी और जुकाम की अचूक दवा है।

➺ चेहरे में चमक लाने के लिए बादाम का तेल लगाएं। इस उपाय से आपके चेहरे पर चमक आ जाएगी। तथा चेहरे पर लालिमा भी आ जाएगी।
➺ महिलाओं को पीरियड्स में बहुत सी परेशानीयों से दो चार होना पड़ता हैं। ऐसे में अगर किसी भी लड़की को पीरियड्स के दिनों में बहुत ज्यादा दर्द होता हैं तो वो अपनी नाभि के जरिये अपने पीरियड्स के दर्द को मिटा सकती हैं।

➺ जवान होते होते मुहांसों की समस्या लगभग हर किसी को होती है। इसके लिए हम बहुत से उपचार भी करते हैं। वो इसलिए क्योंकि इनकी वजह से बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। ऐसे में अगर आपको अपने मुहांसें दूर करने हैं तो इसका सबसे आसान और सरल तरीका यह हैं कि आप अपनी नाभि में नीम का तेल लगाना शुरू कर दीजिए। फिर इसका असर आपको बहुत ही जल्दी दिखने भी लग जाएगा।

➺ अगर आप नाभि पर सरसों का तेल लगाते हैं। तो आपके होंठ बिल्कुल भी नहीं फटेंगे। इसके अलावा चेहरे पर दाग धब्बे भी नहीं आएंगे। इसके अलावा इस उपाय से आँखों की जलन, खुजली, और खुश्की भी दूर होती है।

➺ अगर आप नाभि पर तेल लगाते हैं। तो आपके शरीर में जहां जहां पर हल्की हल्की चोट है। वह बिल्कुल ठीक हो जाती है। यह बात बिल्कुल सच है। तो इस उपाय को जरूर अपनाएं।

➺ नारियल या जैतून के तेल की कुछ बूंदें नाभि पर लगाएं और धीरे-धीरे मसाज करें। इससे प्रजनन क्षमता बढ़ती है।

➺ अगर आप अपने चेहरें को एक अलग तरह का ग्लो देना चाहते हैं तो आपको अपनी नाभि में बादाम का तेल लगाना चाहिए। इससे आपको अपने चेहरें पर बहुत ही जल्दी फर्क दिखने लगेगा। साथ ही आपका चेहरा बहुत ही जल्दी चमकदार भी बन जाएगा।
➺ अगर आप नाभि पर तेल लगाते हैं। आपके पेट में दर्द जैसी समस्या नहीं होगी। इसके अलावा पेट में कभी भी गैस नहीं बनेगी। पेट में दर्द हो तो हट जाएगा। पथरी जैसी बीमारियों से छुटकारा मिलता है।




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