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~ विटामिन डी



विटामिन डी शरीर में पाया जाने वाला एक बेहद महत्त्वपूर्ण विटामिन है। विटामिन डी का सबसे अच्छा और एकदम मुफ्त स्रोत सूरज की खुली धूप है। जो शरीर को कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फेट और जिंक को अब्सॉर्ब करने में सहायता करता है। सनशाइन विटामिन के नाम से जाना जाने वाला विटामिन डी शरीर द्वारा तब प्रोड्यूस होता है जब हमारी त्वचा सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आती है। यह कैल्शियम के अवशोषण, दिल, मस्तिष्क, प्रतिरक्षा तंत्र और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरुरी होता है। विटामिन डी की कमी का सबसे बड़ा नुकसान है कि इससे भूलने की बीमारी होने लगती है। आज हम आपको शरीर में विटामिन डी को पूरा करने वाले स्त्रोत के बारे में बताएंगे...




~ एक गिलास संतरे के या मौसमी के जूस में आपको 100 iU के लगभग विटामिन-डी की मात्रा प्राप्त होती है।




~ विटामिन डी 3 कोलेकैल्सीफेराल सूर्य की रोशनी से पैदा होता है। इसलिए हमारे शरीर पर सूर्य की रोशनी पड़ना जरुरी होता है।


विटामिन डी की भरपूर मात्रा लेने के लिए मशरूम का सेवन भी कर सकते हैं क्योंकि 100 ग्राम मशरूम में 450 iU की मात्रामें आपको विटामिन डी के तत्व प्राप्त हो जाते हैं।


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~ सूरजमुखी के बीज में विटामिन डी के साथ साथ मोनोअनसैचुरेटेड वसा और प्रोटीन भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है।



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~ अनाज विटामिन डी का समृद्ध स्रोत है। विटामिन डी की पूर्ति के लिए नाश्ते से दृढ़ अनाज शामिल कर आप अपने दिन की शुरुआत अच्‍छे से कर सकते है।




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~ काड लिवर ऑयल में भी विटामिन डी पाया जाता है जो जोड़ों के दर्द को दूर करने में मददगार होता है।

विटामिन डी की कमी : लक्षण, रोग, उपाय
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विटामिन डी
सूरज की पराबैंगनी किरणों को विटामिन डी की परम मित्र कहा जाता है। इन किरणों में विटामिन डी की प्रचुर मात्रा पाई जाती है।

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सर्दियों में जब हम ठंड से बचने के लिए अपने शरीर को सूरज की गर्मी से सेक रहे होते हैं तो वास्तव में हमें विटामिन डी भी मिल रहा होता है। सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के अलावा विटामिन डी के कई अन्य स्रोत हैं।


वैसे विटामिन डी को आसानी से प्राप्त होने वाला विटामिन कहा जाता है लेकिन यदि शरीर में इसकी कमी हो जाए तो हमें अनेक घातक रोगों का सामना करना पड़ सकता है।
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स लेख में हम विटामिन डी की महत्ता पर प्रकाश पर डालेंगे। आइए देखते हैं कि विटामिन डी की कमी से कौन से रोग हो जाते हैं और उनके लक्षण और निवारण क्या हैं। सबसे पहले बात करते हैं कि विटामिन डी को किन किन चीज़ों से प्राप्त किया जा सकता है।
विटामिन डी की कमी में क्या खाना चाहिए?
दूध
सालमन मछली
अंडे की ज़र्दी
टूना मछली
फैटी फ़िश
चीज़
बीफ़ लीवर
सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें


इसके अलावा हम विटामिन डी को कुछ प्रकार कि दालों और सब्ज़ियों से भी प्राप्त कर सकते हैं। अब हम विटामिन डी की कमी के लक्षणों के विषय पर चर्चा करेंगे।
विटामिन डी की कमी के लक्षण
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बच्चों में विटामिन डी की कमी के लक्षणरिकेट्स
छोटे बच्चों में विटामिन डी की कमी से अत्यंत घातक रोग हो जाते हैं। इनमें से प्रमुख रोग को हम रिकेट्स या सूखा रोग कहते हैं।
विटामिन डी की कमी से बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। उनमें पोषण की इस क़दर कमी हो जाती है कि उनकी हड्डियां हद से ज़्यादा कमज़ोर हो जाती हैं।
सूखा रोग हो जाने पर उनकी हड्डियां कमज़ोर होकर टेढ़ी मेढ़ी हो जाती हैं। पैरों की हड्डियाँ शरीर का भार उठाने में असमर्थ हो जाती हैं। सूखा रोग एक अत्यंत घातक रोग है जिसमें कि बच्चे की जान भी जा सकती है।
सूखा रोग के कारण बच्चे के शरीर का विकास रुक जाता है। बच्चे में बिना वजह है कि चिड़चिड़ाहट होती है जिससे कि वह ख़ूब रोता है।
बच्चे की हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द होता है और दांत भी गिरने लगते हैं।
हृदय की मांसपेशियां अत्यंत कमज़ोर हो जाती हैं जिससे कि कम उम्र में ही बच्चे को रक्तचाप और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याएं होने लगती हैं।
बच्चे के शरीर से मांस इस तरह ग़ायब हो जाता है कि उसकी हड्डियाँ उसकी खाल के नीचे साफ़ देखी जा सकती हैं। सूखा रोग बच्चे को एक कंकाल का रूप दे देता है।
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बड़ों में विटामिन डी की कमी के लक्षण
बड़े लोगों में विटामिन डी की कमी होने से मांसपेशियों में दर्द और थकावट का अनुभव होता है। हड्डियों पर बुरी तरह प्रभाव पड़ता है जिससे कि वे कमज़ोर हो जाती हैं।
जोड़ों में दर्द होता है। रीढ़ की हड्डी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिससे कि झुकने और बैठने में परेशानी होती है। बाल तेज़ी से गिरने लगते हैं और डैंड्रफ की समस्या भी होने लगती है।
कुछ लोगों में देखा गया है कि विटामिन डी की कमी से उनको भूलने की समस्या हो जाती है। वे किसी भी चीज़ को आसानी से याद करने में असफल होते हैं। विटामिन डी की कमी से लोगों की याददाश्त पर प्रभाव पड़ता है।


इस तरह हम देख सकते हैं कि विटामिन डी हमारे शरीर के लिए कितना महत्वपूर्ण है। चाहे बच्चा हो, बड़ा हो या बूढ़ा हो, विटामिन डी की प्रचुर मात्रा शरीर में होना अत्यंत आवश्यक है।


आइए इस बात को ध्यान में रखते हुए चर्चा करते हैं कि विटामिन डी की कमी से कौन कौन से रोग हो जाते हैं।
विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग


विटामिन डी की कमी से शरीर में कई रोग हो जाते हैं। ये रोग निम्नलिखित हैं:


सूखा रोग या रिकेट्स


विटामिन डी की कमी से शरीर में पोषण की अत्यधिक मात्रा में कमी हो जाती है। बच्चों में पोषण की कमी होने से सूखा रोग या रिकेट्स हो जाता है।
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बड़े लोगों में विटामिन डी की कमी होने से शरीर में थकावट, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द और भूलने की समस्या हो जाती है।


इतना ही नहीं विटामिन डी की कमी से ना सिर्फ़ पोषण की कमी होती है बल्कि इंसान की फर्टिलिटी पावर पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


मस्तिष्क पर प्रभाव


विटामिन डी की कमी से मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है। याददाश्त कमज़ोर हो जाती है और व्यक्ति को भूलने की समस्या हो जाती है।


यदि शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है तो व्यक्ति के लिए किसी भी चीज़ को याद करना या सीखना बहुत मुश्किल हो जाता है।
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विटामिन डी की कमी से व्यक्ति को तनाव,बाइपोलर डिसऑर्डर और शिंजोफ़्रेनिया जैसी ख़तरनाक बीमारियां हो जाती हैं।


एक तरह से विटामिन डी की कमी मस्तिष्क की नसों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।


बच्चों में विटामिन डी की कमी मस्तिष्क के पूर्ण विकास को बाधित करती है। बच्चों में विटामिन डी की कमी हो जाने से मस्तिष्क की मांसपेशियां और तंत्रिका तंत्र सुचारु रूप से विकसित नहीं हो पाते हैं। इस तरह बच्चा अनेक मेंटल डिसॉर्डर से जूझ सकता है।


ऑस्टियोपोरोसिस का ख़तरा


विटामिन डी की कमी होने से हड्डियां कमज़ोर हो जाती है। हड्डियों के अंदर मौजूद बोन मेट्रिक्स कम होने लगता है। इस तरह हड्डियां अंदर से खोखली हो जाती हैं। हड्डियों के खोखली हो जाने से वे हल्के से दबाव या चोट पर टूट सकती हैं।


हड्डियाँ अपनी वास्तविक संरचना खोने लगती हैं और वे टेढ़ी मेढ़ी हो जाती हैं। हड्डियों के ऊपर मौजूद कैल्शियम की परत का तेज़ी से क्षरण होने लगता है जिससे कि ऑस्टियोपोरोसिस की संभावना बढ़ जाती है।


कैंसर का ख़तरा


शायद आप यह बात सुनकर चौंक रहे हैं कि विटामिन डी की कमी से कैंसर का ख़तरा हो जाता है लेकिन यह बात सच है!


शोधों से इस बात को सिद्ध किया गया है कि विटामिन डी की कमी होना अर्थात् शरीर में कैंसर को जन्म देना है।


शरीर में विटामिन डी की कमी होने से ब्रेस्ट कैंसर और कोलोन कैंसर का ख़तरा सर्वाधिक रहता है।
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कोशिका विभाजन के समय कोशिकाओं को अनियंत्रित रूप से विभाजित होने से रोकने के लिए कोशिकाओं पर कुछ चेक पॉइंट्स होते हैं। ये चेक पॉइंट्स शरीर में पोषण की प्रचुर मात्रा होने पर सही ढंग से कार्य करने में सफल होते हैं।


विटामिन डी चेक प्वाइंट को सही प्रकार से कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसे में यदि शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाए तो कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं और कैंसर का जन्म हो जाता है।


प्रतिरक्षा तंत्र का कमज़ोर होना


विटामिन डी की कमी से शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र कमज़ोर हो जाता है। इस तरह शरीर में अनेक प्रकार के संक्रमण और रोग होने लगते हैं।


कैम्ब्रिज जनरल में हुए एक शोध में यह कहा गया कि विटामिन डी की कमी होने से श्वसन तंत्र में सूजन आ जाती है।


शरीर में नज़ला, जुकाम और बुखार भी हो सकता है। बच्चों में विटामिन डी की कमी से न्यूमोनिया या सीने में जकड़न की समस्या हो जाती है।


बड़े लोगों में यदि विटामिन डी की कमी हो जाए तो ख़ांसी और श्वसन तंत्र में इंफेक्शन हो जाता है।


टीबी की समस्या


प्राचीन काल में टीबी की समस्या को अत्यंत घातक समस्या के रूप में देखा जाता था। टीबी से पीड़ित लोगों को लाइलाज क़रार दिया जाता था और अंत में उनकी मृत्यु हो जाती थी। 


उस समय में टीबी के लिए कोई दवा नहीं खोजी जा सकी थी जिसकी वजह से टीबी से पीड़ित लगभग हर व्यक्ति का समाधान सिर्फ़ मौत पर ही होता था।

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एक संक्रामक रोग है लेकिन क्या आप जानते हैं कि विटामिन डी की अत्यधिक कमी हो जाने से टीबी की समस्या हो सकती है? 


यदि आप नहीं जानते हैं तो आपको इस बात को जानना चाहिए। शरीर में विटामिन डी की कमी से टीबी अर्थात ट्यूबरकुलोसिस की समस्या हो जाती है।


कार्डियोवस्कुलर या हृदय रोगों की समस्या


शरीर में विटामिन डी की कमी होने से हार्ट अटैक या हार्ट स्ट्रोक की संभावना बनी रहती है। हृदय की मांसपेशियां अत्यंत कमज़ोर हो जाती हैं जिससे कि वे सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पाती हैं।


हृदय रक्त को शुद्ध करने में असमर्थ हो जाता है जिससे कि रक्त में पॉइज़न की मात्रा बढ़ने लगती है।


हावर्ड यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में इस बात का दावा किया गया कि जिन महिलाओं में विटामिन डी की कमी होती है उनमें हाइपरटेंशन या तनाव के 67% चांसेस होते हैं।


मधुमेह या डायबिटीज़ की समस्या
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जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है उसमें टाइप टू डायबिटीज़ होने की संभावना बढ़ जाती है।


एक रिसर्च में इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि जिन लोगों में विटामिन डी की प्रचुर मात्रा होती है उसमें डायबिटीज़ होने के चांसेस 43% तक कम हो जाते हैं।


इस तरह हम देख सकते हैं कि विटामिन डी की कमी से शरीर में कई गंभीर समस्या हो जाती है शरीर में विटामिन डी की प्रचुर मात्रा होना अत्यंत आवश्यक है।


आइए देखते हैं कि विटामिन डी को शरीर में किस तरह संतुलित किया जा सकता है।
विटामिन डी की कमी को कैसे पूरा करे?
शरीर में विटामिन डी की मात्रा को संतुलित करने का सबसे पहला उपाय यह है कि हमें ऐसे पदार्थों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए जिनमें कि विटामिन डी की प्रचुर मात्रा हो।
यक़ीनन सूरज की किरणों और धूप से हमारी त्वचा टैन हो जाती है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि हम धूप की किरणों से बिलकुल बचते फिरें। 
हमें सुबह की गुनगुनी धूप से अपना शरीर अवश्य सेंकना चाहिए। सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें विटामिन डी का अच्छा स्रोत होती हैं इसलिए हम इनके द्वारा अपने शरीर में विटामिन डी का स्तर संतुलित कर सकते हैं।
हमें समय समय पर अपनी जाँच करानी चाहिए ताकि शरीर में किसी भी प्रकार की कोई समस्या हो तो हम उसके बारे में जागरूक हो सकें।
यदि हमारी हड्डियों, मांसपेशियों या रीढ़ की हड्डी में किसी भी प्रकार का कोई दर्द है तो हमें फ़ौरन डॉक्टर के पास जाना चाहिए। हमें यह चेकअप करा लेना चाहिए कि हमारे शरीर में विटामिन डी की प्रचुर मात्रा है या नहीं।
यदि जाँच में हमारे शरीर में विटामिन डी की कम मात्रा निकलती है तो हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम विटामिन डी की मात्रा अपने शरीर में संतुलित करें।
इसके लिए हम विटामिन डी से भरपूर पदार्थों को ले सकते हैं। यदि इसके बावजूद भी हमारे शरीर में विटामिन डी का स्तर संतुलित नहीं हो पा रहा है तो हमें डॉक्टर विटामिन डी से युक्त इंजेक्शन दे सकता है।
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इस लेख में हमनें विटामिन डी की कमी को गहराई से जाना।

विटामिन डी : फायदे, नुकसान, स्त्रोत और खाद्य पदार्थ
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विटामिन डी को सूरज की रोशनी का विटामिन भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि मुख्य रूप से हमारे शरीर को विटामिन डी सूरज के संपर्क में रहने से मिलता है। यदि आप लम्बे समय तक सूरज के प्रकाश से दूर रहते हैं, तो आपको विटामिन डी की कमी हो सकती है।


विटामिन डी की कमी होने से शरीर में रिकेटस नामक बीमारी होने का खतरा रहता है जिससे हड्डियां कमजोर और विकृत हो जाती है। इससे बचाव के लिए यह आवश्यक है कि आप रोजाना कुछ देर के लिए सूरज के संपर्क में रहे। इसके अलावा विटामिन डी युक्त भोजन का भी सेवन करें।


इस लेख में हम विटामिन डी के फायदे, नुकसान, इसे पाने के स्त्रोत और भोजन आदि पर चर्चा करेंगे।

विटामिन डी के फायदे (benefits of vitamin d in hindi)

विटामिन डी हमारे शरीर के कई अंगों के विकास के लिए जरूरी है। इनमे सबसे जरूरी है, हड्डियां। हड्डियों के विकास के लिए कैल्शियम की जरूरत होती है, जो हमें सूरज के संपर्क में आने से मिलता है। कैल्शियम के बनने से हड्डियां और जोड़े मजबूत होते हैं। इसके अलावा विटामिन डी से शरीर में फॉस्फोरस की मात्रा बढ़ती है, जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनता है।


इसके साथ ही विटामिन डी के कई फायदे और हैं।


वजन कम करने में


शरीर में भरपूर मात्रा में विटामिन डी की मौजूदगी में तीव्रता और चुस्ती का अनुभव रहता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है। एक शोध के अनुसार यह पता चला है कि वजन कम करते समय यदि आप बाहरी विटामिन डी की दवाई या अन्य डोज लेते हैं, तो आपको वजन कम करने में मदद मिलती है।


मजबूत जोड़ों और हड्डियों के लिए

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विटामिन डी की कमी से शरीर पर सबसे बड़ा असर हड्डियों पर पड़ता है। इसकी कमीं से होने वाली बीमारी रिकेटस के दौरान हड्डियां विकृत और कमजोर हो जाती हैं। जाहिर है कि हमारी हड्डियों को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम की जरूरत होती है। कैल्शियम के अभाव में कमजोर हड्डियों की शिकायत हो जाती है।


बुड्ढे लोगों को अक्सर जोड़ों में दर्द होता है। इसके इलाज के लिए डॉक्टर कैल्शियम युक्त खाना और पर्याप्त मात्रा में सूरज के संपर्क में रहने की सलाह देते हैं।


तनाव कम करने में


यह जानकर आपको आश्चर्य होगा, लेकिन पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी लेने से आपका व्यवहार सुधरता है और तनाव आदि में आपको मदद मिलती है। विशेषज्ञों ने एक शोध के जरिये इस बात का खुलासा किया है कि यदि आप चीन और तनावग्रस्त रहते हैं, तो इसका कारण आपके शरीर में विटामिन डी की कमी भी हो सकती है।


अन्य रोगों से बचाव में


रिकेट्स के अलावा विटामिन डी कई बिमारियों से हमारा बचाव करता है। विटामिन डी के अभाव से शरीर में डायबेटीज, मोटापा, अस्थमा, जोड़ों आदि से सम्बंधित अनेक समस्याएं पैदा हो जाती हैं।

पौष्टिक आहार का सेवन करने से और पर्याप्त मात्रा में सूरज के सम्पर्क में रहने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और यह बाहरी हानिकारक तत्वों को दूर रखता है।
विटामिन डी की कमी के लक्षण (deficiency of vitamin d in hindi)


आपकी दिनचर्या में अनेक कार्य ऐसे होते हैं, जो आपको पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिलने में बाधा डाल सकते हैं। जैसे, पुरे दिन घर के भीतर रहना, बाहर का खाना खाना आदि। इन सब कारणों में शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है। इस कमी के होने से शरीर में कई लक्षण दिखाई देते हैं।
थकावट, कमजोरी और तनावग्रस्त मन
घुटनों, कोहनी, टखने आदि में दर्द की शिकायत
हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द
चढ़ने-उतरने में दिक्कत

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इसके अलावा भी मेडिकल जांच के जरिये आपके शरीर में विटामिन डी की कमी का पता लगाया जा सकता है। डॉक्टर अक्सर हड्डियों का एक्सरे करके बता सकते हैं कि इनमे विकृति या अन्य कोई शिकायत है। ऐसी स्थिति में आपको विटामिन डी की गोलियां या अन्य कोई साधन से विटामिन डी का सेवन करने को कहा जाता है।
विटामिन डी के स्त्रोत (source of vitamin d in hindi)


विटामिन डी का मुख्य स्त्रोत सूर्य की रोशनी है। हर सुबह थोड़ी देर सूरज के संपर्क में रहने से आपके शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल जाता है। इस विषय में ध्यान रहे कि तेज धुप में ज्यादा देर रहने से त्वचा को नुकसान भी पहुंच सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि आप कम धुप में बाहर निकलें। इसके अलावा तेज-धुप में सूर्य से बचाव के लिए सनस्क्रीन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।


सूर्य के अलावा भोजन के जरिये भी आप पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी का सेवन कर सकते हैं। भोजन में मांसाहारी चीज़ों में ज्यादा मात्रा में विटामिन डी पाया जाता है। ऐसे में यदि आप शाकाहारी है तो आपके लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
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मुख्य भोजन स्त्रोत जैसे दूध, मछली, अंडे, मीट आदि विटामिन डी के मुख्य साधन हैं। इसके अलावा दही, संतरा, अनाज, हरी सब्जियां, शलगम, मशरूम आदि का सेवन भी विटामिन डी पाने के लिए बहुत आवश्यक होता है।
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भोजन के अलावा दवाईओं के जरिये भी विटामिन डी की आपूर्ति की जा सकती है। विटामिन डी की गोलियां बाजार में आसानी से उपलब्ध होती है। इसका सेवन करने से पहले यह जरूरी है कि आप डॉक्टर की सलाह लें।     

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