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शादी शुदा लोग जरूर पढ़े आनन्द आएगा


शादी शुदा लोग जरूर पढ़े आनन्द आएगा 
कॉलेज में Happy married life पर एक कार्यक्रम हो रहा था, जिसमे कुछ शादीशुदा जोडे हिस्सा ले रहे थे। जिस समय प्रोफेसर मंच पर आए उन्होने नोट किया कि सभी पति- पत्नी शादी पर जोक कर हँस रहे थे... ये देख कर प्रोफेसर ने कहा कि चलो पहले एक Game खेलते है... उसके बाद अपने विषय पर बातें करेंगे। सभी खुश हो गए और कहा कोनसा Game ?प्रोफ़ेसर ने एक married लड़की को खड़ा किया और कहा
शादी शुदा लोग जरूर पढ़े आनन्द आएगा कॉलेज में Happy married life पर एक कार्यक्रम हो रहा था,
जिसमे कुछ शादीशुदा जोडे हिस्सा ले रहे थे। जिस समय प्रोफेसर मंच पर आए उन्होने नोट किया कि सभी
पति- पत्नी शादी पर जोक कर हँस रहे थे... ये देख कर प्रोफेसर ने कहा कि चलो पहले एक Game खेलते है... उसके बाद अपने विषय पर बातें करेंगे। सभी खुश हो गए और कहा कोनसा Game ?प्रोफ़ेसर ने एक married
लड़की को खड़ा किया और कहा कि तुम ब्लेक बोर्ड पे ऐसे 25- 30 लोगों के नाम लिखो जो तुम्हे सबसे अधिक प्यारे हों लड़की ने पहले तो अपने परिवार के लोगो के नाम लिखे फिर अपने सगे सम्बन्धी, दोस्तों,पडोसी और
सहकर्मियों के नाम लिख दिए... अब प्रोफ़ेसर ने उसमे से कोई भी कम पसंद वाले 5 नाम मिटाने को कहा... लड़की ने अपने सह कर्मियों के नाम मिटा दिए.. प्रोफ़ेसर ने और 5 नाम मिटाने को कहा...लड़की ने थोडा सोच कर अपने पड़ोसियो के नाम मिटा दिए... अब प्रोफ़ेसर नेऔर 10 नाम मिटाने को कहा... लड़की ने अपने सगे सम्बन्धी और दोस्तों के नाम मिटा दिए... अब बोर्ड पर सिर्फ 4 नाम बचे थे जो उसके मम्मी- पापा, पति और बच्चे का नाम था.. अब प्रोफ़ेसर ने कहा इसमें से और 2 नाम मिटा दो... लड़की असमंजस में पड गयी बहुत सोचने के बाद बहुत दुखी होते हुए उसने अपने मम्मी- पापा कानाम मिटा दिया...सभी लोग स्तब्ध और शांत थे
क्योकि वो जानते थे कि ये गेम सिर्फ वो लड़की ही नहीं खेल रही थी उनके दिमाग में भी यही सब चल रहा था अब सिर्फ 2 ही नाम बचे थे...पति और बेटे का... प्रोफ़ेसर ने कहाऔर एक नाम मिटा दो...लड़की अब सहमी सी रह गयी... बहुत सोचने के बाद रोते हुए अपने बेटे का नाम काट दिया... प्रोफ़ेसर ने उस लड़की से कहातुम अपनी जगह पर जाकर बैठ जाओ... और सभी की तरफ गौर से देखा... और पूछा-क्या कोई बता सकता है कि ऐसा क्यों हुआ कि सिर्फ पति का ही नाम बोर्ड पर रह गया। कोई जवाब नहीं दे पाया...
सभी मुँह लटका कर बैठे थे...
प्रोफ़ेसर ने फिर उस लड़की को खड़ा किया और कहा... ऐसा क्यों !
जिसने तुम्हे जन्म दिया
और पाल पोस कर
इतना बड़ा किया
उनका नाम तुमने मिटा दिया...
और तो और तुमने अपनी
कोख से जिस बच्चे को जन्म दिया
उसका भी नाम तुमने मिटा दिया ?
लड़की ने जवाब दिया.......
कि अब मम्मी- पापा बूढ़े हो चुके हैं, कुछ साल के बाद वो मुझे और इस दुनिया को छोड़ के चले जायेंगे ......
मेरा बेटा जब बड़ा हो जायेगा तो जरूरी नहीं कि वो शादी के बाद मेरे साथ ही रहे। लेकिन मेरे पति जब तक मेरी
जान में जान है तब तक मेरा आधा शरीर बनके मेरा साथ निभायेंगे इस लिए मेरे लिए सबसे अजीज मेरे पति हैं.. फ़ेसप्रोर और बाकी स्टूडेंट ने तालियों की गूंज से लड़की को सलामी दी... प्रोफ़ेसर ने कहा तुमने बिलकुल सही कहा कि तुम और सभी के बिना रह सकती हो पर अपने आधे अंग अर्थात अपने पति के बिना नहीं रह सकती l

मजाक मस्ती तक तो ठीक है पर हर इंसान का अपना जीवन साथी ही उसको सब से ज्यादा अजीज होता है...
ये सचमुच सच है for all husband and wife कभी मत भूलना.....👌......
🙏 जीन्दगी के साथ भी ,जीन्दगी के बाद भी

1. आँखे बन्द करके जो प्रेम करे वो *'प्रेमिका'* है।
2. आँखे खोल के जो प्रेम करे वो *'दोस्त'* है।

3. आँखे दिखाके जो प्रेम करे वो *'पत्नी'* है ।
4. अपनी आँखे बंद होने तक जो प्रेम करे वो *"माँ"* है।
5. परन्तु आँखों में प्रेम न जताते हुये भी जो प्रेम करे वो *"पिता"* है। *दिल से पढ़िये और ग़ौर करें*।
💓💞💕💓💗💓💕💖 *(मम्मी और पापा ) का पैग़ाम* 📨।
1. जिस दिन तुम हमें बूढ़ा 👴👵 देखो तब सब्र करना और हमें समझने की कोशिश करना💓।
2. जब हम कोई बात भूल जाएं तो हम पर गु़स्सा😡 मत करना औरअपना बचपन 👼👶 याद करना🔱।
3.जब हम बूढ़े 👵👴 होकर चल 🏃ना पायें तो हमारा सहारा 👫 बनना और अपना पहला क़दम👣याद
करना।
4.जब हम बीमार🌾 हो जाएं, तो वो दिन याद करके हम पर अपने पैसे💰खर्च करना, जब हम तुम्हारी ख्वाहिशों 👔🎅🎁💝🎂को पूरी करने के लिये अपनी ख्वाहिशें क़ुरबान 💔🙇करते थे।
👪 हमें अपने से अलग करने से पहले याद करना वो दिन जब हमारे 🏡 से बाहर होने पर तुम्हारे
😭 आँख के आँसू नहीं रुकते थे!
👏👏👏👏👏👏👏🙌 कृपया इस खूबसूरत संदेश हर *दिल अज़ीज* के साथ शेयर करें🙏 ☝और अपने माँ बाप 👴👵का आदर करें। *दुनियाभर के मैसेज तो * *हर कोई शेयर करता है । *
*एक मैसेज माँ बाप के * *नाम भी. ......।* जनो को यह संदेश भेजो और देखो अब आपका अच्छा समय शुरु हो जायेगा
गहरी बात लिख दी है किसी नें
गहरी बात लिख दी है किसी नें 👌👌👌😳😳😳😳😇😇 👉बेजुबान पत्थर पे लदे है करोडो के गहने मंदिरो में। उसी दहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथो को देखा है।। 😘😘😘 👉सजे थे छप्पन भोग और मेवे मूरत के आगे। बाहर एक फ़कीर को भूख से तड़प के मरते देखा है।।😘😘😘 👉लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार। पर बाहर एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है।।😘😘😘 👉वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हॉल के ल 



गहरी बात लिख दी है किसी नें 👌👌👌😳😳😳😳😇😇
👉बेजुबान पत्थर पे लदे है करोडो के गहने मंदिरो में।
उसी दहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथो को देखा है।।
😘😘😘
👉सजे थे छप्पन भोग और मेवे मूरत के आगे। 
बाहर एक फ़कीर को भूख से तड़प के मरते देखा है।।😘😘😘


👉लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार।
पर बाहर एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है।।😘😘😘
👉वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हॉल के लिए।
घर में उसको 500 रूपये के लिए काम वाली बाई को बदलते देखा है।।😘😘😘
👉सुना है चढ़ा था सलीब पे कोई दुनिया का दर्द मिटाने को।
आज चर्च में बेटे की मार से बिलखते माँ बाप को देखा है।।😩😩😩😩
👉जलाती रही जो अखन्ड ज्योति देसी घी की दिन रात पुजारन।
आज उसे प्रसव में कुपोषण के कारण मौत से लड़ते देखा है।।😘😘😩
👉जिसने न दी माँ बाप को भर पेट रोटी कभी जीते जी।
आज लगाते उसको भंडारे मरने के बाद देखा है।।😳😳😳
👉दे के समाज की दुहाई ब्याह दिया था जिस बेटी को जबरन बाप ने।
आज पीटते उसी शौहर के हाथो सरे राह देखा है।।
👉मारा गया वो पंडित बे मौत सड़क दुर्घटना में यारो।
जिसे खुद को काल, सर्प, तारे और हाथ की लकीरो का माहिर लिखते देखा है।।
👉जिसे घर की एकता की देता था जमाना कभी मिसाल दोस्तों।
आज उसी आँगन में खिंचती दीवार को देखा है।।
👉बन्द कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर।
अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।।
👉आत्म हत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर।
अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता।।
👉गिद्ध भी कहीं चले गए लगता है उन्होंने देख लिया कि।
इंसान हमसे अच्छा नोंचता है।।
👉कुत्ते कोमा में चले गए, ये देखकर।
क्या मस्त तलवे चाटते हुए इंसान देखा है।y।
इस कविता को मैने आप तक पहुंचाने मे र्सिफ उंगली का उपयोग किया है।। आगे बढ़ाने वाले को सादर प्रणाम- 🙏🙏🙏🙏🙏


"पापा मैंने आपके लिए हलवा बनाया है" 11साल की बेटी अपने पिता से बोली जो कि अभी office से घर आये ही थे ! , 
पिता "वाह क्या बात है ,ला कर खिलाओ फिर पापा को,"




बेटी दौड़ती रसोई मे गई और बडा कटोरा भरकर हलवा लेकर आई ..
पिता ने खाना शुरू किया और बेटी को देखा ..
पिता की आँखों मे आँसू थे...
-क्या हुआ पापा हलवा अच्छा नही लगा
पिता- नही मेरी बेटी बहुत अच्छा बना है ,
और देखते देखते पूरा कटोरा खाली कर दिया; इतने मे माँ बाथरूम से नहाकर बाहर आई ,
और बोली- "ला मुझे भी खिला तेरा हलवा"
पिता ने बेटी को 50 रु इनाम मे दिए , बेटी खुशी से मम्मी के लिए रसोई से हलवा लेकर आई मगर ये क्या जैसे ही उसने हलवा की पहली चम्मच मुंह मे डाली तो तुरंत थूक दिया और बोली- "ये क्या बनाया है, ये कोई हलवा है, इसमें तो चीनी नही नमक भरा है , और आप इसे कैसे खा गये ये तो जहर हैं , मेरे बनाये खाने मे तो कभी नमक मिर्च कम है तेज है कहते रहते हो ओर बेटी को बजाय कुछ कहने के इनाम देते हो...."
पिता-(हंसते हुए)- "पगली तेरा मेरा तो जीवन भर का साथ है, रिश्ता है पति पत्नी का जिसमें नौकझौक रूठना मनाना सब चलता है; मगर ये तो बेटी है कल चली जाएगी, मगर आज इसे वो एहसास वो अपनापन महसूस हुआ जो मुझे इसके जन्म के समय हुआ था। आज इसने बडे प्यार से पहली बार मेरे लिए कुछ बनाया है, फिर वो जैसा भी हो मेरे लिए सबसे बेहतर और सबसे स्वादिष्ट है; ये बेटियां अपने पापा की परियां , और राजकुमारी होती है जैसे तुम अपने पापा की हो ..."
वो रोते हुए पति के सीने से लग गई और सोच रही थी 
*इसीलिए हर लडकी अपने पति मे अपने पापा की छवि ढूंढती है..*
दोस्तों यही सच है हर बेटी अपने पिता के बडे करीब होती है या यूं कहे कलेजे का टुकड़ा इसीलिए शादी मे विदाई के समय सबसे ज्यादा पिता ही रोता है ....
इसीलिए हर पिता हर समय अपनी बेटी की फिक्र करता रहता है !









दिल छू लेगी ये Story एक बार जरूर पढें...
...............* . एक 14 साल के लड़के को अपनी ही क्लास की लड़की जिसकी उम्र 10 साल थी उसे ,से प्यार हो गया पर वो कह नही पा रहा था क्योकि वो लड़की अमीर थी।.....वह लड़की बहुत ही खुबसूरत थी।.....वो कई बार अपने प्यार का इजहार करना चाहता था पर बार बार उसे अपनी गरीबी का एहसास हो जाता था तभी वो कभी कह ना सका।......लड़की के लिये उसके दिल मे प्यार और बढ़ता गया।.....दि 



दिल छू लेगी ये Story
एक बार जरूर पढें..................*
.
एक 14 साल के लड़के को अपनी ही क्लास की लड़की जिसकी उम्र 10 साल थी उसे ,से प्यार हो गया पर वो कह नही पा रहा था क्योकि वो लड़की अमीर थी।.....वह लड़की बहुत ही खुबसूरत थी।.....वो कई बार अपने प्यार का इजहार करना चाहता था पर बार बार उसे अपनी गरीबी का एहसास हो जाता था तभी वो कभी कह ना सका।......लड़की के लिये उसके दिल मे प्यार और बढ़ता गया।.....दिन बीतते गये. स्कूल का आखिरी दिन आ गया।......लड़का अपने घर से स्कूल आ रहा था तभी उसे रास्ते मे उसी लड़की की फोटो मिली। लड़का बहुत खुश हुआ,और उसे अपने प्यार की आखिरी निशानी समझ कर रख लिया।.....समय बीतता गया लड़का बड़ा होकर उस लड़की को जिंदगी भर तलासता रहा पर वो ना मिली।.....कुछ दिनो बाद लड़के की शादी एक खुबसुरत लड़की से हो गयी। लकिन वो आज भी लड़की से प्यार करता था।......एक दिन वो उसी लड़की की फोटो देख
रहा था तो उसकी पत्नी ने पुछा" कि ये कौन है और आपको कहां से मिली!?"लड़के ने कहा कि तुम इसे
जानती हो? लड़की ने कहा "ये मेरी बचपन की फोटो है । मै इक लड़के से प्यार करती थी और उसे देने जा रही
थी पर रास्ते मे खो गयी थी। शायद भगवान को मेरा प्यार मंजूर ना था।"लड़के ने उस लड़के का नाम पूछा और कहा कि तुम आज भी उससे प्यार करती हो?लड़की ने नाम बताया और कहा मै उसके सिवाय और किसी से प्यार नही करती".....लड़के ने नाम सुना और रोते हुये अपनी बचपन की फोटो दिखायी और कहा कि क्या ये ही वो लड़का हैँ....लड़की ने


कहा हां तो क्या आप ही वो......???दोनो अपनी 2
किस्मत पे रोकर खुश होते है
कि उन्हे
अपना प्यार मिल गया.....
अगर प्यार
सच्चा हो तो खुदा को भी उसे
मिलाना पड़ ता है......


अगर कहानी अच्छी लगी हो तो आप अपना विचार कमेंट मे लिख सकते हैं. Sandeep soni

बेटे के जन्मदिन पर .....
रात के 1:30 बजे फोन आता है, बेटा फोन उठाता है तो माँ बोलती है...."जन्म दिन मुबारक लल्ला"
बेटा गुस्सा हो जाता है और माँ से कहता है - सुबह फोन करती। इतनी रात को नींद खराब क्यों की? कह कर फोन रख देता है।


थोडी देर बाद पिता का फोन आता है। बेटा पिता पर गुस्सा नहीं करता, बल्कि कहता है ..." सुबह फोन करते "।
फिर पिता ने कहा - मैनें तुम्हे इसलिए फोन किया है कि तुम्हारी माँ पागल है, जो तुम्हे इतनी रात को फोन किया।
वो तो आज से 25 साल पहले ही पागल हो गई थी। जब उसे डॉक्टर ने ऑपरेशन करने को कहा और उसने मना किया था। वो मरने के लिए तैयार हो गई, पर ऑपरेशन नहीं करवाया।
रात के 1:30 को तुम्हारा जन्म हुआ। शाम 6 बजे से रात 1:30 तक वो प्रसव पीड़ा से परेशान थी । 
लेकिन तुम्हारा जन्म होते ही वो सारी पीड़ा भूल गय ।उसके ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा । तुम्हारे जन्म से पहले डॉक्टर ने दस्तखत करवाये थे, कि अगर कुछ हो जाये, तो हम जिम्मेदार नहीं होंगे।
तुम्हे साल में एक दिन फोन किया, तो तुम्हारी नींद खराब हो गई......मुझे तो रोज रात को 25 साल से, रात के 1:30 बजे उठाती है और कहती है देखो हमारे लल्ला का जन्म इसी वक्त हुआ था।
बस यही कहने के लिए तुम्हे फोन किया था। इतना कहके पिता फोन रख देते हैं।
बेटा सुन्न हो जाता है। सुबह माँ के घर जा कर माँ के पैर पकड़कर माफी मांगता है....तब माँ कहती है, देखो जी मेरा लाल आ गया।
फिर पिता से माफी मांगता है, तब पिता कहते हैं ..... आज तक ये कहती थी, कि हमे कोई चिन्ता नहीं;हमारी चिन्ता करने वाला हमारा लाल है।
पर अब तुम चले जाओ, मैं तुम्हारी माँ से कहूंगा कि चिन्ता मत करो। मैं तुम्हारा हमेशा की तरह आगे भी ध्यान रखुंगा।
तब माँ कहती है -माफ कर दो अपना बेटा है।
सब जानते हैं दुनियाँ में एक माँ ही है, जिसे जैसा चाहे कहो, फिर भी वो गाल पर प्यार से एक युवक ने विवाह के दो साल बाद परदेस जाकर व्यापार करने की इच्छा पिता से कही । पिता ने स्वीकृति दी तो 



एक युवक ने विवाह के दो साल बाद परदेस जाकर व्यापार करने की इच्छा पिता से कही । पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती पत्नी को माँ-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार करने चला गया । परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और वह धनी सेठ बन गया । सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए तो सन्तुष्टि हुई और वापस घर लौटने की इच्छा हुई । पत्नी को पत्र लिखकर आने की सूचना दी और जहाज में बैठ गया । उसे जहाज में एक व्यक्ति मिला जो दुखी मन से बैठा था । सेठ ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने बताया कि इस देश में ज्ञान की कोई कद्र नही है । मैं यहाँ ज्ञान के सूत्र बेचने आया था पर कोई लेने को तैयार नहीं है । सेठ ने सोचा 'इस देश में मैने बहुत धन कमाया है, और यह मेरी कर्मभूमि है, इसका मान रखना चाहिए !' उसने ज्ञान के सूत्र खरीदने की इच्छा जताई । 


उस व्यक्ति ने कहा-मेरे हर ज्ञान सूत्र की कीमत 500 स्वर्ण मुद्राएं है ।
सेठ को सौदा तो महंगा लग रहा था.. लेकिन कर्मभूमि का मान रखने के लिए 500 स्वर्ण मुद्राएं दे दी । व्यक्ति ने ज्ञान का पहला सूत्र दिया-
कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट रूककर सोच लेना । सेठ ने सूत्र अपनी किताब में लिख लिया । कई दिनों की यात्रा के बाद रात्रि के समय सेठ अपने नगर को पहुँचा । उसने सोचा इतने सालों बाद घर लौटा हूँ तो क्यों न चुपके से बिना खबर दिए सीधे पत्नी के पास पहुँच कर उसे आश्चर्य उपहार दूँ । घर के द्वारपालों को मौन रहने का इशारा करके सीधे अपने पत्नी के कक्ष में गया तो वहाँ का नजारा देखकर उसके पांवों के नीचे कजमीन खिसक गई । पलंग पर उसकी पत्नी के पास एक युवक सोया हुआ था ।




अत्यंत क्रोध में सोचने लगा कि मैं परदेस में भी इसकी चिंता करता रहा औरm ये यहां अन्य पुरुष के साथ है । दोनों को जिन्दा नही छोड़ूगाँ । क्रोध में तलवार निकाल ली । वार करने ही जा रहा था कि उतने मेंही उसे 500 स्वर्ण मुद्राओं से प्राप्त ज्ञान सूत्र याद आया- कि कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट सोच लेना । सोचने के लिए रूका । तलवार पीछे खींची तो एक बर्तन से टकरा गई । बर्तन गिरा तो पत्नी की नींद खुल गई । जैसे ही उसकी नजर अपने पति पर पड़ी वह ख़ुश हो गई और बोली- आपके बिना जीवन सूना सूना था । इन्तजार में इतने वर्ष कैसे निकाले यह मैं ही जानती हूँ । सेठ तो पलंग पर सोए पुरुष को, देखकर कुपित था । पत्नी ने युवक को उठाने के लिए कहा- बेटा जाग । तेरे पिता आए हैं । युवक उठकर जैसे ही पिता को प्रणाम करने झुका माथे की पगड़ी गिर गई । उसके लम्बे बाल बिखर गए । सेठ की पत्नी ने कहा- स्वामी ये आपकी बेटी है । पिता के बिना इसके मान को कोई आंच न आए इसलिए मैंने इसे बचपन से ही पुत्र के समान ही पालन पोषण और संस्कार दिए हैं । यह सुनकर सेठ की आँखों से अश्रुधारा बह निकली ।पत्नी और बेटी को गले लगाकर सोचने लगा कि यदि आज मैने उस ज्ञानसूत्र को नहीं अपनाया होता तो जल्दबाजी में कितना अनर्थ हो जाता । मेरे ही हाथों मेरा निर्दोष परिवार खत्म हो जाता । ज्ञान का यह सूत्र उस दिन तो मुझे महंगा लग रहा था लेकिन ऐसे सूत्र के लिए तो 500 स्वर्ण मुद्राएं बहुत कम हैं । ज्ञान तो अनमोल है ' इस कहानी का सार यह है कि जीवन के दो मिनट जो दुःखों से बचाकर सुख की बरसात कर सकते हैं । वे हैं - 'क्रोध के दो मिनट' इस कहानी को शेयर जरूर करें क्योंकि आपका एक शेयर किसी व्यक्ति को उसके क्रोध पर अंकुश रखने के लिए प्रेरित कर सकता है ।हाथ फेरेगी।
पिता अगर तमाचा न मारे तो बेटा सर पर बैठ जाये। इसलिए पिता का सख्त होना भी जरुरी है





एक अधूरी लव स्टोरी....

…! जितनी रफ्तार से यह सहर चलता है उतनी ही थमी थमी सी जिंदगी है यहां की। इन लोगों को देखकर ऐसा लगता है जैसे इन्हें इंतजार है किसी के आने का| इन सबके बीच मैं भी इंतजार कर रही थी। लेकिन किसी के आने का नहीं बल्कि किसी के पास जाने का।
अब मेरे मन में थोड़ी सी भी उलझन नहीं थी बस इंतजार था, उससे मिलने का। अगर थोड़ी बहुत उलझन बची हुई थी तो उसमें इतना दम नहीं था कि वह मुझको रोक सके| मुझे लग रहा था कि मैं चिल्ला-चिल्लाकर सारी दुनिया से कह दू कि मुझे उससे प्यार हो गया है। और कल उससे इजहार करने वाली हूं।
पर बताऊं तो कैसे? काश मेरी कोई छोटी बहन होती या फिर कोई दोस्त! जिससे मैं अपने मन की बात कह पाती। मेरा मन किया कि मम्मी को बता दूं। लेकिन मेरी उलझन तब और बढ़ गई! जब मुझे ख्याल आया कि-अगर उन्हें पता चला तो वह मुझे घर से बाहर भी न निकलने देगे। उन्होंने गांव जरूर छोड़ा था लेकिन वहां के विचार नहीं।
वैसे भी पापा मम्मी इन चीजों में कहां विश्वास रखते है और मेरी कहां सुनने वाले थे। हम गांव से आकर शहर में जरूर रहते है! और पापा एक उच्च पद पर सर्विस मैन भी है। लेकिन उनके खयालात अभी भी गांव वाले हैं। मैं यही सोच कर डर जाती हूं|लेकिन करू तोह क्या करूँ! अपनी love story किसके साथ शेयर करू।


लेकिन में उसे भुला भी तो नही सकती हूं। क्योंकि उसको इतना पसंद जो करती हूं। खैर छोड़िए! यह उलझन दिमाग में लिए मैं अपने कमरे में आ गयी। और अपना हेडफोन लगाकर अपने कमरे गाने सुनने लगी और डांस करने लगी। कुछ समय हुआ ही था। तभी थोड़ी देर में दूसरे कमरे से आवाज आई -“आज सोना नहीं है क्या? बेटा 11:00 बज रहे हैं! सुबह कॉलेज नहीं जाना क्या?”
लेकिन आज मेरे कदम कहां रुकने वाले थे। इतनी खुशी जो हो रही थी कि शब्दो मैं बयान करना मुश्किल था। मैंने नाचते हुए ही कहा- “हां मम्मी बस सोने ही वाली हूं आप सो जाइए|”अगर आज मेरे कोई नाचने का कोई मजाक उड़ाता तो भी मुझे आज कोई परवाह नहीं थी|
अभी में नाच ही रही थी, तभी पानी की तेज बूंदे मेरे चेहरे से आकर टकराई और मुझे आंखें खोलने पर मजबूर किया| पता नहीं उस टाइम मुझे क्या सूझा? खिड़की के पास जाकर उन बूंदो के साथ खेलने लगी। और अपने मुंह पर बार-बार उन बूंदो को फेकने लगी|

इतने में पता नहीं मेरे मन में क्या आया? खिड़की बंद की और अपनी डायरी निकाली जहां पर मैं अपने बारे में लिखती थीं। आज भी में कुछ अपनी love story के बारे में लिखने लगी। लेकिन आज जो लिख रही थी, वह सीधे मेरे दिल से आ रहा था। मानो ऐसा लग रहा था जैसे डायरी से अपने मन की बात कर रही हूं।-
आज पहली बार किसी को आंखों से मैंने बात करते हुए देखा था| मैं उससे पास जाकर कुछ कहती- इतने मै उसकी ट्रेन आ गई और उसे अपने साथ ले गयी।अगले दिन न जाने क्यों? उसेे सामने वाले प्लेटफार्म पर देखकर मैं खुश थी। शायद मैं इंतजार कर रही थी उसका। खैर अब आंखों से शुरू हुई बातें इशारों से होने लगी थी|
बड़े ही अजीब होते थे! “उसके इशारे”। समझ तो नहीं आते थे लेकिन मेरे चेहरे पर एक मुस्कुराहट जरूर दे जाते थे| अब समय के साथ में धीरे-धीरे में उसके इशारे भी समझने लगी थी| वह रोज कुछ न कुछ पागलपन करके मुझे हंसाता था। और एक दिन तो उसने हद ही पार कर दी। वह मुझे देख कर जोर जोर से गाना गाने लगा।



इससे पहले कि मैं उससे बात करती उसको स्टेशन मास्टर ने पकड़ लिया और उसे अपने साथ ले गया। उस दिन बहुत हँसी थी में। शायद मुझे भी उसके इसी बचपने और पागलपन से प्यार हो गया था| उसे देख कर मुझे ऐसा लगने लगता था कि जैसे मेरा बरसों का इंतजार खत्म हो गया हो|
अब जिंदगी ने एक रफ्तार पकड़ ली थी। यह दिन इतना तेजी से बीते कि हम दोनों को पता ही नहीं चला| हम दोनों हर रोज स्टेशन पर आकर अपनी अपनी मंजिलों की ओर निकल जाते थे| ना उसने कभी इस ओर आने की कोशिश की, ना मैने कभी उस ओर जाने की हिम्मत जुटाई |
कभी-कभी तो दिल करता था कि भागकर उसके पास चली जाऊं और उस से अपने दिल की बात कह दूं। और उसके साथ उस सफ़र पर चली जाऊं जहां वह जाता है| लेकिन कभी मेरे दिमाग ने तो कभी मेरे पैरों ने मुझे इसकी इजाजत नहीं दी। मुझे इंतजार था कल का। कल का दिन मेरे लिए स्पेशल है, कल के दिन वैलेंटाइन-डे जो है।
अगर मैं कल उससे अपने दिल की बात ना बता पायी तो शायद कभी ना उसे बता पाउंगी| तभी मेरा ध्यान डायरी से हटकर उन घड़ियों की टिक टिक करती सुइयों ने अपनी ओर खींचा जो वैलेंटाइन-डे शुरू होने का इशारा कर रही थी|
मेरी नजर घड़ी पर गई! रात के 12:00 बज रहे थे। आज वह दिन आ ही गया जिसका मुझे बेसब्री से इंतजार था| वह पूरी रात में नहीं सोई उससे मिलने की इतनी जल्दी जो थी |


सुबह जल्दी उठकर सभी काम कर तैयार हो गई। आज तो मैंने ब्रेकफास्ट भी नहीं किया था, उससे मिलना जो था|
आज मैं प्लेटफार्म पर समय से पहले ही पहुंच गयी और वहां पास में पड़ी बेंच पर इंतजार करने लगी उसके आने का।लेकिन काफी समय इंतजार करने के बाद भी वह नहीं आया। मुझे बेचैनी होने लगी आज तो ट्रेन भी निकल चुकी थी, लेकिन उसका कोई पता नहीं था| मेरे अंदर अजीब-अजीब ख्याल आ रहे थे। “पता नहीं क्या हुआ होगा , क्यों नहीं आया|”
वहां काफी समय इंतजार करने के बाद मुझे अंदर से रोना आ रहा था सच कहूं तो में दुखी हो गयी थी। मन तो कर रहा था कि आज अपनी जान ही दे दूं। लेकिन मरता क्या न करता उससे मिलना जो था| अब मेरी आंखों में आंसू थे और वहां बेंच बैठकर इंतज़ार कर रही थी उसके आने का…..!
बस इतनी सी थी यह कहानी………….!






गंदे पापा ....*मिडिल क्लास फॅमिली में पली बढ़ी खुशबू अपने जिंदगी में सबसे ज्यादा गुस्सा अपने पापा से थी। पापा के लिए उसके मन में नफरत के अलावा कुछ न था।22 साल की हो चुकी खुशबू ने आज तक एक भी वेलेंटाइन नहीं बनाया था...जबकि उसकी क्लास मेट्स.... हर साल अलग अलग बॉयज के साथ वेलेंटाइन डे मनाती थी ... खैर, आज खुशबू आग्नेय से शादी के वक़्त सबसे ज्यादा खुश थी... कि आखिर इस बेहद स्ट्रिक्ट, कड़क और डिसिप्लिनड



गंदे पापा ....
*
मिडिल क्लास फॅमिली में पली बढ़ी खुशबू अपने जिंदगी में सबसे ज्यादा गुस्सा अपने पापा से थी। पापा के लिए उसके मन में नफरत के अलावा कुछ न था।
22 साल की हो चुकी खुशबू ने आज तक एक भी वेलेंटाइन नहीं बनाया था...जबकि उसकी क्लास मेट्स.... हर साल अलग अलग बॉयज के साथ वेलेंटाइन डे मनाती थी ...
खैर, आज खुशबू आग्नेय से शादी के वक़्त सबसे ज्यादा खुश थी... कि आखिर इस बेहद स्ट्रिक्ट, कड़क और डिसिप्लिनड पापा से छुटकारा तो मिला।"ये न करो" "वो न करो" ऐसे कपड़े न पहनों",लेट नाईट पार्टियाँ नहीं,"लड़कों से दोस्ती नहीं।"
आज तक एक स्मार्टफोन खरीद तक नहीं दिया...!... सारे सपनों और अरमानों को अपने नैरो माइंडेड सोच के कारण कुचलकर रख दिया ।अब मैं आग्नेय के साथ सारी दबी इच्छाएँ पूरी करूँगी।....आग्नेय और खुशबू पिछले तीन सालों से एक ही कॉलेज में साथ साथ पढ़ते थे और एक दूसरे को अच्छी तरह जानते थे एक दूसरे की पसंद नापसंद का अच्छे से ख्याल रखते थे। खुशबू ने बहुत डरते डरते पापा से आग्नेय के साथ शादी की इच्छा जताई थी।और पापा ने आग्नेय और उसके परिवार वालों से मिलकर शादी के लिए हामी भर दी।
*
खुशबू ने विदाई समय पहली बार पापा को उससे लिपटकर बच्चों की तरह फूट फूट कर रोते देखा पर खुशबू को पापा के इमोशन से कोई मतलब न था वह बस पत्थर की बुत बन खड़ी थी,जाते जाते पापा ने ढ़ेर सारे गिफ्ट के साथ एक बंद लिफाफा भी खुशबू को दिया।
ससुराल पहुँचते ही सबसे पहले खुशबू ने लिफाफा खोल पापा की चिट्ठी को पढ़ना शुरु किया " खुशबू बेटा मैं जानता हूँ कि पिछले दस सालों से मैं तुम्हारे साथ बैड डैड की तरह पेश आता रहा।मैं तुम्हारे सामने स्ट्रिक्ट इसलिए बनता था क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि तुम्हारा भी हाल रागिनी जैसा हो ।रागिनी मेरे साथ कॉलेज में पढ़ने वाली एक बहुत अच्छे घर की पढ़ने में तेज शरीफ लड़की थी परंतु फैशन और नकली ग्लैमर के चक्कर में उसने अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर ली थी। 




"उसने वो सब किया जिससे मैं तुम्हें हमेशा रोकता रहा।फैशनेबल कपड़े ,लड़को से दोस्ती,लेट नाईट पार्टियाँ सब करती थी ,सोचती चरित्र अच्छा है तो इन सब में कोई हर्ज नहीं।फिर एक दिन उसके ड्रिंक्स में नशा डालकर उसके कुछ दोस्तों ने .........।इस घटना से वो अपना दिमागी संतुलन खो बैठी और समाज के तानों और लोगों से बचने के लिए उसके पापा ने उसकी माँ और छोटी बहन के साथ सल्फास खाकर सुसाइड कर लिया।"
खुशबू बेटा, आज से तुम अब दो परिवारों की इज़्ज़त हो और मैं तुमसे यही उम्मीद करूँगा कि तुम ऐसा कोई काम नही करोगी जिससे दोनों परिवारों की इज़्ज़त पे कोई दाग लगे और हो सके तो अपने बैड डैड को माफ कर देना।
चिट्ठी पढ़कर खुशबू फूट फूट कर रोते हुए तुरंत फ़ोन लगाकर भर्राए आवाज़ में पापा से कहा" मुझे माफ़ कर दीजिए पापा ! मैं आपके गुस्से के पीछे के प्यार को नही देख पाई!!! आपके चिल्लाहट के पीछे की केअर नहीं देख पाई!आपकी झुंझलाहट के पीछे का समर्पण नही देख पाई !"
" मैं हर जन्म में आपकी ही बेटी बनना चाहूँगी पापा ......."
*
वक़्त बीतता गया ....
खुशबू को ससुराल आए लगभग एक साल होने को आया...मगर ऐसा कोई दिन ना था जिस दिन उसने अपने पापा को याद ना किया हो।आज उसके पापा का जन्मदिन था।सुबह मंदिर गई ।पूजा की ...पापा की खुशी और सलामती के लिए दुआएँ माँगी।फिर शाम में केक लाकर अपने ससुरालवालों के साथ उनका जन्मदिन मनाने का प्रोग्राम बनाया।


फिर केक काटने से पहले पापा को वीडियो कॉल लगाया उधर पापा मम्मी के साथ उदास बैठे थे।खुशबू उन्हें देखते ही चहक के बोली " हैप्पी बर्थडे टू यू माई स्वीट पापा !!!! पता है पापा ...... यहाँ मैं आपकी डाँट... आपके गुस्से... को हर दिन मिस करती हूँ ।यहाँ सारे लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं स्पेशली सासू माँ!पता है पापा .....एक दिन घर में मुहल्ले की औरतों सासु माँ को जब ये बोल रहीँ थीं कि कितनी अच्छी बहु मिली है तुम्हे ।....कपड़ो ,बोली और स्वभाव में शालीनता जरूर इसके मम्मी पापा से विरासत में मिले है।....आज कल की लड़कियों में इतने संस्कार अब कहाँ मिलते हैं।आपके लिए ये शब्द सुनकर पापा मेरा सर फक्र से ऊँचा हो गया।"
*
" आज मुझे आपपे प्राउड है पापा । आप मम्मा को हमेशा बोलते थे कि" सारी दुनिया को तो सुधार नही सकते बस अपना दामन बचा के रखना होगा।"
जानती हूँ पापा और महसूस भी किया है मैंने कि...आजकल लड़कियों के लिए बॉयफ्रेंड बनाना ,ड्रिंक्स करना, लिव इन रिलेशन रहना और ट्रांसपेरेंट ड्रेस पहनना फैशन सा है पर आपने एक सुरक्षा कवच बनकर मुझे इन बुराइयों से बचाये रखा।
आपको पता है पापा जब मैं यहाँ बी.एड. का एग्जाम पास कर टीचर बनूँगी ना....तो बच्चो को यही सिखाऊंगी कि "डैड के तेज गुस्से के पीछे का प्यार महसूस कर सको तो कर लो, ऐसा न हो कि बाद में सिर्फ पछताने के सिवा कुछ न रहे!!!"
*
दूसरी तरफ पापा के होंठ काँप रहे थे .. वो बोल रहे थे आँखों से लगातार आँसू लिए मुँह से अपनी खुशबू बेटी के लिए " खुश रहो भगवान करे तुम्हें मेरी उम्र और खुशियाँ लग जाए बेटा "



Ek ladka था जिसका pehla प्यार मर चुका था


Ek ladka था जिसका pehla प्यार मर चुका था
बो लड़का apni जिंदगी शराब और fb ki दुनिया mai duba देता h...
फीर कुछ दीन बाद Uski दोस्ती facebook me एक लड़की से हो जाती है..!
गर्ल : hi
बॉय : हैलो
गर्ल : क्या करते हो आप...??
बॉय : जीने कि कोशिश...
गर्ल : आपसे एक बात pouchu...??
बॉय : हा पूछो....
गर्ल : आप इतना sad क्यु रहते हो, मुझे aapki लाइफ ke बारे m janna है..!
बॉय : क्या karogi jankar...
गर्ल : कुछ नहीं पर plzz एक baar apne दिल कि बात, मुझसे शेयर kro, आपको अच्छा feel होगा....!
बॉय : उसे अपना पूरा पास्ट बता देता h, उसका पास्ट जानकर लड़की को उससे हमदर्दी हो jati h........
दोनो fb पर रोज chat करने लगते है..
देखते हि देखते 8 mahine गुजर जाते है...!!!
वक्त ke साथ दोनो को एक दूसरे से प्यार ho jata हैं......
पर दोनो मे से कोइ apne प्यार ka ijhaar नहीं कर pata.....
दोनो को एक दूसरे से बात करना बहुत अच्छा लगता था........
पर कुछ दिनो तक बो लड़की...
ऑनलाइन nhi aati है.... लड़का परेशान हो jata हैं...!! 

3 week baad एक दिन उस लड़के ke पास एक no से call आता है..!
बॉय : आप kon
गर्ल : अंजलि जो आपसे chat karti थी, आपका no आपके profile से लीया है मेंने 
और एक बात आपको बतानी है की मेरे पास jada वक्त नहीं है तो plzz ek baar में आपसे मिलना चाहती हुं....
Plzz jaldi से city हॉस्पिटल aa jao...
बॉय : तुरंत हॉस्पिटल पहोंच jata हैं, पर तब तक बो लड़की dam तोड़ chuki होती है,
पर लडके को लड़की ke हाथ मे एक लेटर मिलता है....
लड़का लेटर पड़ता है....
लेटर mai लिखा था.......
I love you but कभी आपको बोल नहीं payi, आपके साथ जीना chahti थी but ज़िंदगी नहीं थी मेरे पास....
मुझे ब्रेन tayumer था इसलिये आपसे, i love u कभी नही कहा ताकी मेरे जाने के बाद आपको ज्यादा तकलीफ ना हो ..
अपना ध्यान रखियेगा....
दोस्तो अगर किसी से प्यार करते हो तो इजहार करना बहुत ज़रूरी होता है....
क्यूकी ये ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा..
अगर पोस्ट अच्छी लगी हो तो कमेंट मे जरूर बताना..



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संस्कार 
दो मिनट का समय निकाल कर हमारा ये article जरूर पढ़िए और अगर दिल को छू जाए तो इस पोस्ट को शेयर जरूर किजिये 🏘️
एक घर मे तीन भाई और एक बहन थी...बड़ा और छोटा पढ़ने मे बहुत तेज थे। उनके मा बाप उन चारो से बेहद प्यार करते थे मगर मझले बेटे से थोड़ा परेशान से थे।
बड़ा बेटा पढ़ लिखकर डाक्टर बन गया।
छोटा भी पढ लिखकर इंजीनियर बन गया। मगर मझला बिलकुल अवारा और गंवार बनके ही रह गया। सबकी शादी हो गई । बहन और मझले को छोड़ दोनों भाईयो ने Love मैरीज की थी।
बहन की शादी भी अच्छे घराने मे हुई थी।
आखीर भाई सब डाक्टर इंजीनियर जो थे।
अब मझले को कोई लड़की नहीं मिल रही थी। बाप भी परेशान मां भी।
बहन जब भी मायके आती सबसे पहले छोटे भाई और बड़े भैया से मिलती। मगर मझले से कम ही मिलती थी। क्योंकि वह न तो कुछ दे सकता था और न ही वह जल्दी घर पे मिलता था।
वैसे वह दिहाडी मजदूरी करता था। पढ़ नहीं सका तो...नौकरी कौन देता। मझले की शादी कीये बिना बाप गुजर गये ।
माँ ने सोचा कहीं अब बँटवारे की बात न निकले इसलिए अपने ही गाँव से एक सीधी साधी लड़की से मझले की शादी करवा दी।
शादी होते ही न जाने क्या हुआ की मझला बड़े लगन से काम करने लगा । दोस्तों ने कहा... ए चन्दू आज अड्डे पे आना।
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चंदू - आज नहीं फिर कभी
दोस्त - अरे तू शादी के बाद तो जैसे बिबी का गुलाम ही हो गया?
चंदू - अरे ऐसी बात नहीं । कल मैं अकेला एक पेट था तो अपने रोटी के हिस्से कमा लेता था। अब दो पेट है आज
कल और होगा।
घरवाले नालायक कहते थे कहते हैं मेरे लिए चलता है।
मगर मेरी पत्नी मुझे कभी नालायक कहे तो मेरी मर्दानगी पर एक भद्दा गाली है। क्योंकि एक पत्नी के लिए उसका पति उसका घमंड इज्जत और उम्मीद होता है। उसके घरवालो ने भी तो मुझपर भरोसा करके ही तो अपनी बेटी दी होगी...फिर उनका भरोसा कैसे तोड़ सकता हूँ । कालेज मे नौकरी की डिग्री मिलती है और ऐसे संस्कार मा बाप से मिलते हैं ।
इधर घरपे बड़ा और छोटा भाई और उनकी पत्नीया मिलकर आपस मे फैसला करते हैं की...जायदाद का बंटवारा हो जाये क्योंकि हम दोनों लाखों कमाते है मगर मझला ना के बराबर कमाता है। ऐसा नहीं होगा।
मां के लाख मना करने पर भी...बंटवारा की तारीख तय होती है। बहन भी आ जाती है मगर चंदू है की काम पे निकलने के बाहर आता है। उसके दोनों भाई उसको पकड़कर भीतर लाकर बोलते हैं की आज तो रूक जा? बंटवारा कर ही लेते हैं । वकील कहता है ऐसा नहीं होता। साईन करना पड़ता है।
चंदू - तुम लोग बंटवारा करो मेरे हिस्से मे जो देना है दे देना। मैं शाम को आकर अपना बड़ा सा अगूंठा चिपका दूंगा पेपर पर।
बहन- अरे बेवकूफ ...तू गंवार का गंवार ही रहेगा। तेरी किस्मत अच्छी है की तू इतनी अच्छे भाई और भैया मिलें
मां- अरे चंदू आज रूक जा।
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बंटवारे में कुल दस विघा जमीन मे दोनों भाई 5- 5 रख लेते हैं ।
और चंदू को पुस्तैनी घर छोड़ देते है
तभी चंदू जोर से चिल्लाता है।
अरे???? फिर हमारी छुटकी का हिस्सा कौन सा है?
दोनों भाई हंसकर बोलते हैं
अरे मूरख...बंटवारा भाईयो मे होता है और बहनों के हिस्से मे सिर्फ उसका मायका ही है।
चंदू - ओह... शायद पढ़ा लिखा न होना भी मूर्खता ही है।
ठीक है आप दोनों ऐसा करो।
मेरे हिस्से की वसीएत मेरी बहन छुटकी के नाम कर दो।
दोनों भाई चकीत होकर बोलते हैं ।
और तू?
चंदू मां की और देखके मुस्कुराके बोलता है
मेरे हिस्से में माँ है न......
फिर अपनी बिबी की ओर देखकर बोलता है..मुस्कुराके...क्यों चंदूनी जी...क्या मैंने गलत कहा?
चंदूनी अपनी सास से लिपटकर कहती है। इससे बड़ी वसीएत क्या होगी मेरे लिए की मुझे मां जैसी सासु मिली और बाप जैसा ख्याल रखना वाला पति।
बस येही शब्द थे जो बँटवारे को सन्नाटा मे बदल दिया ।
बहन दौड़कर अपने गंवार भैया से गले लगकर रोते हुए कहती है की..मांफ कर दो भैया मुझे क्योंकि मैं समझ न सकी आपको।



चंदू - इस घर मे तेरा भी उतना ही अधिकार है जीतना हम सभी का।
बहुओं को जलाने की हिम्मत कीसी मे नहीं मगर फिर भी जलाई जाती है क्योंकि शादी के बाद हर भाई हर बाप उसे पराया समझने लगते हैं । मगर मेरे लिए तुम सब बहुत अजीज हो चाहे पास रहो या दुर।
माँ का चुनाव इसलिए कीया ताकी तुम सब हमेशा मुझे याद आओ। क्योंकि ये वही कोख है जंहा हमने साथ साथ 9 - 9 महीने गुजारे। मां के साथ तुम्हारी यादों को भी मैं रख रहा हूँ।
दोनों भाई दौड़कर मझले से गले मिलकर रोते रोते कहते हैं
आज तो तू सचमुच का बाबा लग रहा है। सबकी पलको पे पानी ही पानी। सब एक साथ फिर से रहने लगते है।


दो पत्ते 🍃🍃 एक समय की बात है गंगा नदी के किनारे पीपल का एक पेड़ था. पहाड़ों से उतरती गंगा पूरे वेग से बह रही थी कि अचानक पेड़ से दो पत्ते नदी में आ गिरे।एक पत्ता आड़ा गिरा और एक सीधा।जो आड़ा गिरा वह अड़ गया, कहने लगा, “आज चाहे जो हो जाए मैं इस नदी को रोक कर ही रहूँगा…चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाए मैं इसे आगे नहीं बढ़ने दूंगा.”वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा – रुक जा गंगा ….अब तू और आगे नहीं बढ़ सकती….मैं





दो पत्ते
🍃🍃
एक समय की बात है गंगा नदी के किनारे पीपल का एक पेड़ था. पहाड़ों से उतरती गंगा पूरे वेग से बह रही थी कि अचानक पेड़ से दो पत्ते नदी में आ गिरे। 
एक पत्ता आड़ा गिरा और एक सीधा। 
जो आड़ा गिरा वह अड़ गया, कहने लगा, “आज चाहे जो हो जाए मैं इस नदी को रोक कर ही रहूँगा…चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाए मैं इसे आगे नहीं बढ़ने दूंगा.”
वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा – रुक जा गंगा ….अब तू और आगे नहीं बढ़ सकती….मैं तुझे यहीं रोक दूंगा!
पर नदी तो बढ़ती ही जा रही थी…उसे तो पता भी नहीं था कि कोई पत्ता उसे रोकने की कोशिश कर रहा है. पर पत्ते की तो जान पर बन आई थी..वो लगातार संघर्ष कर रहा था…नहीं जानता था कि बिना लड़े भी वहीँ पहुंचेगा जहाँ लड़कर..थककर..हारकर पहुंचेगा! पर अब और तब के बीच का समय उसकी पीड़ा का…. उसके संताप का काल बन जाएगा।
वहीँ दूसरा पत्ता जो सीधा गिरा था, वह तो नदी के प्रवाह के साथ ही बड़े मजे से बहता चला जा रहा था।
यह कहता हुआ कि “चल गंगा, आज मैं तुझे तेरे गंतव्य तक पहुंचा के ही दम लूँगा…चाहे जो हो जाए मैं तेरे मार्ग में कोई अवरोध नहीं आने दूंगा….तुझे सागर तक पहुंचा ही दूंगा।
नदी को इस पत्ते का भी कुछ पता नहीं…वह तो अपनी ही धुन में सागर की ओर बढती जा रही है. पर पत्ता तो आनंदित है, वह तो यही समझ रहा है कि वही नदी को अपने साथ बहाए ले जा रहा है. आड़े पत्ते की तरह सीधा पत्ता भी नहीं जानता था कि चाहे वो नदी का साथ दे या नहीं, नदी तो वहीं पहुंचेगी जहाँ उसे पहुंचना है! पर अब और तब के बीच का समय उसके सुख का…. उसके आनंद का काल बन जाएगा।
जो पत्ता नदी से लड़ रहा है…उसे रोक रहा है, उसकी जीत का कोई उपाय संभव नहीं है और जो पत्ता नदी को बहाए जा रहा है उसकी हार को कोई उपाय संभव नहीं है।
जीवन भी उस नदी के सामान है और जिसमे सुख और दुःख की तेज़ धारायें बहती रहती हैं और जो कोई जीवन की इस धारा को आड़े पत्ते की तरह रोकना का प्रयास भी करता है तो वह मुर्ख है क्योंकि ना तो कभी जीवन किसी के लिये रुका है और ना ही रुक सकता है । वह अज्ञान में है जो आड़े पत्ते की तरह जीवन की इस बहती नदी में सुख की धारा को ठहराने या दुःख की धारा को जल्दी बहाने की मूर्खता पूर्ण कोशिश करता है । क्योंकि सुख की धारा जितने दिन बहनी है उतने दिन तक ही बहेगी आप उसे बढ़ा नही सकते , और अगर आपके जीवन में दुख का बहाव जितने समय तक के लिए आना है वो आ कर ही रहेगा , फिर क्यों आड़े पत्ते की तरह इसे रोकने की फिजूल मेहनत करना।
बल्कि जीवन में आने वाले हर अच्छी बुरी परिस्थितियों में खुश हो कर जीवन की बहती धारा के साथ उस सीधे पत्ते की तरह ऐसे चलते जाओ जैसे जीवन आपको नही बल्कि आप जीवन को चला रहे हो । सीधे पत्ते की तरह सुख और दुःख में समता और आनन्दित होकर जीवन की धारा में मौज से बहते जाएँ।
और जब जीवन में ऐसी सहजता से चलना सीख गए तो फिर सुख क्या ? और दुःख क्या ?
जीवन के बहाव में ऐसे ना बहो कि थक कर हार भी जाओ और अंत तक जीवन आपके लिए एक पहेली बन जाये,
बल्कि जीवन के बहाव को हँस कर ऐसे बहाते जाओ की अंत तक आप जीवन के लिए पहेली बन जायें।

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