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जाने गर्भावस्था के दौरान यौन संबंध बनाने चाहिए या नहीं


जाने गर्भावस्था के दौरान यौन संबंध बनाने चाहिए या नहीं, सच्चाई जानकर हो जाएंगे अचंभित !!

बहुत से कपल सोचते हैं कि गर्भावस्था में यौन संबंध बनाना सेहत के लिए अच्छा होता है या हानिकारक इसके बारे में पूरी सच्चाई जा लीजिये ?


बहुत से कपल प्रेगनेंसी को लेकर कई बुरे ख्याल मन में रखते हैं लेकिन बता दे कि गर्भावस्था के दौरान ज्यादातर लोग यौन समबन्ध बनाना नुकसानदायक मानते है, इस वजह से वह सम्बन्ध बनाने से कतराते हैं। 



जब कोई महिला गर्भवती होती है तो उसके मन में भी काफी सारे सवाल पैदा होते हैं बच्चा कैसा होगा , अच्छा होगा या नहीं इस वजह से गर्भावस्था के डर की वजह से चैन की नींद भी नहीं ले सकती लेकिन अगर इस समस्या से छुटकारा पाना चाहती है तो आपको यौन संबंध बनाना चाहिए। 



क्योंकि शारीरिक संबंध बनाने से महिला के शरीर से ऑक्सीटोसिन हार्मोन बाहर निकलेगा जिससे आप रिलैक्स महसूस करेंगे और आपको अच्छी नींद आती है। 



अगर किसी महिला को यूरिन इन्फेक्शन की प्रॉब्लम है तो ऐसी कंडीशन में भी महिलाओं को यौन संबंध बनाना चाहिए क्योकि यौन संबंध एंटीबायोटिक का काम करता है जिसके कारण महिला को इन्फेक्शन की समस्या से छुटकारा मिलता है। 



गर्भावस्था के दौरान ज्यादातर महिलाओं को कमजोरी आ जाती है जिसके कारण कमर दर्द, सिर दर्द जैसी परेशानियां झेलनी पड़ती है लेकिन यौन संबंध बनाने वाली महिलाओं को गर्भावस्था में कमर दर्द से दर्द हो तो जैसी समस्या से छुटकारा मिलता हैं।




गर्भावस्था में तनाव से बचें


तनाव पूरे शरीर की संरचना को बिगाड़ देता है। इसका असर उन गर्भवती महिलाओं पर भी होता है जो एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म देने का ख्वाब देख रही होती हैं। एक नए अध्य्यन से पता चला है कि तनाव से संबंधित हॉर्मोन भ्रूण के विकास को प्रभावित करते हैं।

इसके लिए हाल ही में चूहियों पर इसका टेस्ट किया गया। तनाव से संबंधित हॉर्मोन चूहों की संतति पर प्रभाव डालते हैं या नहीं, गर्भवती चूहिया को विभिन्न समय पर स्वाभाविक ग्लूकोकॉर्टिकॉइड कॉर्टिकोस्टेरॉन हॉर्मोन दिया गया। अध्य्यनकर्ताओं ने पाया कि जिन गर्भवती चूहियों को तनाव हॉर्मोन दिया गया, उनकी भूख में तो बेहद बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन उनके अपरा (प्लासेंटा) से भ्रूण को मिलने वाले ग्लूकोज की मात्रा में कमी देखी गई। 
निष्कर्ष में इस बात का खुलासा हुआ कि मां के शरीर में मौजूद तनाव हॉर्मोन ग्लूकोकॉर्टिकॉइड भ्रूण के पोषण को नियंत्रित करता है। हॉर्मोन की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, अपरा से भ्रूण में ग्लूकोज का परिवहन उतना ही कम होगा, जिसका परिणाम बच्चे के वजन में कमी के रूप में सामने आएगा।

‘द जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी’ में प्रकाशित इस शोध में यह बात भी सामने आई कि तनाव से संबंधित हॉर्मोन की अधिकता के कारण अपरा के कुछ जिंस में विशेष परिवर्तन होता है, जिसका भ्रूण के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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