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प्राकृतिक नुस्खों से वेजाइनल कैंडिडिऑसिस का इलाज कैसे करें


प्राकृतिक नुस्खों से वेजाइनल कैंडिडिऑसिस का इलाज कैसे करें
वेजाइनल कैंडिडिऑसिस आपकी जिंदगी पर बहुत बड़ा असर डाल सकती है क्योंकि दूसरे लोग आपको होने वाली खुजली पर ध्यान देते हैं। सौभाग्य से इनसे बचने के कई प्राकृतिक तरीके मौजूद हैं।
0शेयर किया गया 

9 नेचुरल नुस्ख़े जो झटपट हटाएंगे मस्से
5 हैरान करने वाले फायदे अदरक का पानी पीने के
ट्राइग्लिसराइड्स कम करने के लिए वीकली डाइट प्लान

वेजाइनल कैंडिडिऑसिस वह संक्रमण है जो फंगस की कई नस्लों के कारण होता है, खासतौर पर कैंडिडा एलबाइकंस (Candida albicans) से। यह संक्रमण सामान्य इम्यून सिस्टम वाले लोगों में आम है। फिर भी यह इंफेक्शन खासतौर पर सामान्य या लम्बे समय से डायबिटीजसे पीड़ित लोगों, एड्स के रोगियों और प्रेगनेंट महिलाओं में होता है।

इस आर्टिकल में हम आपको इस बीमारी के बारे में, वेजाइनल कैंडिडिऑसिस का कारन, इसके लक्षण और इलाज के कुछ प्राकृतिक नुस्खों के बारे में बताएंगे। हम आपको इसे फिर होने से रोकने के लिए कुछ सावधानियां अपनाने की भी जानकारी देंगे।
वेजाइनल कैंडिडिऑसिस: एक आम इन्फेक्शन (Vaginal Candidiasis: A Common Infection)

यह संक्रमण सबसे आम बीमारियों के समूह का एक हिस्सा है। लगभग हर इंसान को जिंदगी में कभी ना कभी इसका सामना करना ही पड़ता है।
इंसानों में होने वाले यीस्ट इन्फेक्शन तीन तरह के होते हैं: बाहरी, बीच वाले (जैसे कैंडिडिऑसिस),और गंभीर।
वेजाइनल कैंडिडिऑसिस होने का कारण

ज्यादातर महिलाओं को उनके जीवन में कभी ना कभी वेजाइनल यीस्ट इनफेक्शन होता है। यह यीस्ट अक्सर थोड़ी-सी मात्रा में वेजाइना, मुंह, डाइजेस्टिव ट्रैक्ट और स्किन में मौजूद होता है। ज्यादातर समय यह इनफेक्शन या ऐसे किसी लक्षण का कारण नहीं बनता है।

कैंडिडा और दूसरे बहुत सारे माइक्रोऑर्गनिज्म जो आमतौर पर एक दूसरे के साथ संतुलनबनाते हुए वेजाइना में रहते हैं। फिर भी, कई बार कैंडिडा की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे वेजाइनल कैंडिडिऑसिस होता है।

वेजाइनल कैंडिडिऑसिस के लक्षण



योनि में खुजली होना (Vulvar itching) कैंडिडिऑसिस होने का आम लक्षण है, हालांकि किसी इंसान में ये लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं:
वेजाइना के आस-पास के हिस्से में दर्द या जलन होना
पेशाब करते समय दर्द होना
यौन सम्बन्ध बनाने के दौरान दर्द होना
रोकथाम

आदमी और औरत दोनों को ही अपनी जिंदगी में इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। फिर भी, कुछ एहतियात बरतने से इसके होने के खतरे को कम करने में आपको मदद मिलेगी।


हमेशा अच्छी साफ़-सफाई को बनाए रखना वजाइनल कैंडिडिऑसिस होने से बचाता है। नहाने के बाद अपनी स्किन को अच्छे से सुखाना बहुत जरूरी है।

ओरल कैंडिडिऑसिस को होने से रोकने के लिए आपको दांतों को ब्रश करना होगा और माउथवॉश इस्तेमाल करना होगा। स्मोकिंग नहीं करनी चाहिए।
जननांगों वाले हिस्से में कैंडिडिऑसिस को होने से रोकने के लिए आपको कॉन्डोम काइस्तेमाल करना चाहिए।
प्रेग्नेंट महिलाओं को बायोएक्टिव दही खाना चाहिए जो वेजाइनल फ़्लोरा में एसिड को कम करने में मदद करती है।
कैंडिडिऑसिस के प्रकार (Types of candidiasis)
कैंडीडल इंटरट्रिगो (Candidal intertrigo)

यह सबसे आम किस्म की समस्या है। यह शरीर के बड़े फोल्ड बल जैसेआर्मपिट, ग्रोइन,इंटरग्लूटल क्लेफ्ट, इन्फ्रामैमेरी फोल्ड, गर्दन, और छोटे फोल्ड जैसे हाथ-पैर की उँगलियों में हो सकती है।

इस इंफेक्शन के कारण आदमी की त्वचा लाल हो जाती है और उसमें सूजन आ जाती है। इसके आलावा, इन हिस्सों में चकत्ते और सेटेलाईट लीशन (satellite lesions) दिखाई देते हैं। जिस आदमी को इन्फेक्शन होता है वह जलन और खुजली महसूस करता है।
पाचन तंत्र में कैंडिडिऑसिस
ईसोफेगेल (Esophageal) : सूजन होती है, जो खाना निगलने में परेशानी, सीने में जलन और सीने में दर्द होता है।
गैस्ट्रिककैंडिडिऑसिस : यह खासतौर पर उन रोगियों में दिखायी देता है जो गैस्ट्रिकअल्सर से पीड़ित हैं।
कैंडीडा एंटेराइटिस (Candida enteritis): इसमें लगातार पेट दर्द और बार-बार टॉयलेट लगने की समस्या होती है। मल में खून आ सकता है, डायरिया की वजह से डिहाइड्रेशन हो सकता है।
एनो–रेक्टल कैंडीडाइसिस (Ano-rectal candidiasis): इसकी वजह से मलद्वार में खुजली, जलन और दर्द होता है।
प्रजनन अंग में कैंडिडिऑसिस

अगर नीचे बताये गए लक्षणों में से कोई भी आपको दिखाई देता है, तो आपको इस पर खास ध्यान देना होगा:
वल्वो वेजाइनल कैंडिडिऑसिस (Vulvovaginal candidiasis): यह वेजाइनल pH लेवल में बदलाव के कारण होता है, खासतौर पर प्रेगनेंट महिलाओं को। इसमें वेजाइना में खुजली और जलन होती है।
बेलेनाइटिस (Balanitis):इसमें ग्लांस और पेनिस की ऊपरी त्वचा में इंफेक्शन होता है,जिसकी वजह से खुजली वाले दाने हो जाते हैं।

इसे भी पढ़ें : लहसुन आधारित 3 उपचार वेजाइनल यीस्ट इन्फेक्शन होने पर
कैंडिडिऑसिस के इलाज के लिए कारगर प्राकृतिक नुस्खे
सादी दही (Plain yogurt)
सबसे पहले, महिलाओं में होने वाले यीस्ट इन्फेक्शन के इलाज के लिए सबसे अच्छा घरेलू उपाय वेजाइना में सादी दही लगाना है। दही से वेजाइना की एसिडिटी कम होगी, जिससेफंगस की बढ़त कम हो जायेगी। यह इसलिए क्योंकि फंगस को बढ़ने के लिए एसिडिक वातावरण की जरूरत होती है।
जरूरी चीजें
2 चम्मच सादी दही (30 मिलीग्राम)
इस्तेमाल करने का तरीका
सबसे पहले, वेजाइना के अंदर और उसके आसपास सादी दही लगाएं।
अब इसे 1 से 2 घंटे के लिए रहने दे।
कैंडिडिऑसिस का इलाज करने के लिए माउथवॉश


सेब का सिरका और नींबू के रस दोनों में ही एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुण होते हैं। इसके साथ ही, टी ट्री ऑयल में प्राकृतिक रीजेनरेटिव गुण होते हैं। इन तीनों चीजों को मिलाने पर इस बीमारी को ठीक करने के लिए एक शक्तिशाली प्राकृतिक नुस्खा बनता है।
जरूरी चीजें
1 कप सेब का सिरका (250 मिलीलीटर)
1 चम्मच नींबू का रस (15 मिलीलीटर)
2 बूंद टी ट्री ऑयल (चाय के पौधे का तेल)
बनाने का तरीका
सबसे पहले, इन तीनों चीजों को अच्छे से मिलाकर एक घोल तैयार कर लें।
कैंडिडा फंगस को जल्दी खत्म करने के लिए इस घोल से दिन में दो बार कुल्ला करें।



वेजाइनल इन्फेक्शन: टाइप और कारण
योनि के संक्रमण बहुत आम हैं। यदि आप अपनी अच्छी देखभाल करती हैं तब भी ऐसे संक्रमण हो सकते हैं। इस लेख में उनके बारे में और जानें।


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वेजाइनल इन्फेक्शन यानी स्त्री गुप्तांग के संक्रमण के कारण योनि क्षेत्र और भग दोनों में परिवर्तन हो सकते हैं।

इस लेख में, हम सबसे आम गुप्तांग संक्रमण और उन कारणों की बातें करेंगे जो ऐसे ज्यादातर संक्रमण को बढ़ावा देते हैं।
वेजाइनल इन्फेक्शन के कारण

कुछ महिलाएं इससे ज्यादा पीड़ित होती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि ये अपर्याप्त स्वच्छता, गलत आदतें या जोखिम भरी यौन क्रियाओं की वजह से हों।

गलत आदतें
वैसे तो कंडोम न बदलने का गुप्तांग संक्रमण से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है। लेकिन उन अस्वाभाविक मामलों में इसे वेजाइनल इन्फेक्शन का एक कारण माना जाता है, जब इसे बदले बिना प्राकृतिक और अप्राकृतिक रूप से यौन सम्बन्ध बनाये जाते हैं। इस मामले में मल के बैक्टीरिया गुदा से योनि तक फैल जाते हैं।

एंटीबायोटिक्स (Antibiotics)यह सुनने में अटपटा लग सकता है क्योंकि असल में एंटीबायोटिक बीमारी पैदा करने वाले एजेंटों को खत्म करने के लिए होते हैं। लेकिन आप इसकी वजह से गुप्तांग के संक्रमण से पीड़ित हो सकते हैं क्योंकि इस प्रकार की दवाइयां फायदेमंद बैक्टीरिया (bacterial flora)और हानिकारक बैक्टीरिया दोनों को प्रभावित करती हैं, इसलिए हम फंगस के संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।



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हार्मोन संबंधी बदलाव (Hormone alteration)

हार्मोनल परिवर्तन शरीर में एस्ट्रोजेन में वृद्धि के कारण गुप्तांग के फंगल संक्रमण भी पैदा कर सकते हैं। जिन क्षणों में हम सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं वे हैं, गर्भावस्था, हार्मोनल थेरेपी या रजोनिवृत्ति।

सिंथेटिक मटेरियल वाले कपड़े

जैसा कि हम सभी जानते हैं, गर्म, आर्द्र और कम ऑक्सीजन वाले स्थान, ऐसी जगहें हैं जहां संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया और फंगस ज्यादा आसानी से विकसित होते हैं। इस श्रेणी में निम्नलिखित शामिल हैं:
कसी हुई पैन्ट
सिंथेटिक सामग्री से बने अंडरवियर
लाइक्रा पैंट या लेगिंग्स

ये जननांग क्षेत्र में सूक्ष्मजीवों, विशेष रूप से यीस्ट के फलने-फूलने के लिए आदर्श माहौल बनाते हैं। यदि आपको कसी हुई पैन्ट पहनना पसंद है तो उन्हें हर 10 घंटों में उतार देने या बदलने की कोशिश करें। इसके अलावा, यह सिफारिश की जाती है कि आप इन पर दिए हुए लेबल की जांच करें और कम से कम 50% कॉटन वाले कपड़े ही चुनें।

हाई ब्लड शुगर लेवल
सिर्फ मनुष्यों को ही मिठाइयों का स्वाद पसंद नहीं है। यीस्ट को भी यह बहुत प्रिय है। इसलिए मधुमेह और यीस्ट के संक्रमण के बीच एक संबंध है। स्वास्थ्य सुधारने और कुछ बीमारियों को रोकने के लिए आहार में वसा और शर्करा दोनों को कम करना बहुत अहिमयत रखता है। अगर आप मधुमेह के मरीज हैं तो आपको जरूर अपने ग्लूकोज के स्तर को शारीरिक सीमा के भीतर रखने का प्रयास करना चाहिए।
वेजाइनल इन्फेक्शन के प्रकार

योनि के सभी संक्रमण एक से नहीं होते हैं। हर एक की अलग-अलग विशेषताएं होती हैं और हर मामले में इलाज किसी खास तरीके से किया जाना चाहिए।

वेजाइनल माइकोसिस (Vaginal mycosis)


यह कैंडिडिएसिस (candidiasis) का मामला है, एक किस्म का फंगल संक्रमण। फंगल संक्रमण सबसे आम हैं। कैंडिडिएसिस आम तौर पर इन समस्याओं का कारण होती है:
योनि से गाढ़ा स्राव
योनि और भग में लाली
खुजली

ज्यादातर मामलों में इनका ट्रीटमेंट सरल होता है। आप ओव्यूल्स या क्रीम खरीद सकती हैं जो आपको किसी भी फार्मेसी में मिल जाएगी।


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बैक्टीरियल वैजिनॉसिस (Bacterial vaginosis)

यह प्रजनन की आयु वाली महिलाओं में आम है। वैजिनॉसिस यौन संचारित बीमारियों के खतरे को बढ़ाता है। इसका पता इन लक्षणों से चलता है:
संभोग के बाद मछली जैसी गंध के साथ योनि स्राव
मूत्र त्याग करते समय दर्द
बदरंग या सफेद मलिनकिरण
योनि में खुजली और दर्द

ट्राइकोमोनास (trichomonas) से योनि संक्रमण

यह एक माइक्रोबियल एजेंट ट्राइकोमोनास वैजिनेलिस (Trichomonas vaginalis) के कारण होता है। इस प्रकार के संक्रमण का इलाज एंटीबायोटिक्स से किया जाना चाहिएक्योंकि यह यौन संभोग से फैलता है। इसकी विशेषताएं हैं:
फफूंदी की गंध
हरा पीला स्राव
योनि में जलन और खुजली
क्लैमाइडिया (Chlamydia)यह एक सेक्सुअली ट्रांसमिटेड संक्रमण है। यह न केवल जननांग क्षेत्र को प्रभावित करने में सक्षम है बल्कि गठिया, निमोनिया या कंजंक्टिवाइटिस जैसी अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है। यह योनि स्राव में गंदी बदबू पैदा करता है जो इन मामलों में सफेद रंग का होता है।


वायरल वेजाइनल इन्फेक्शन

इस प्रकार का वेजाइनल इन्फेक्शन हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस (herpes simplex virus) के कारण होता है। जननांग क्षेत्र में जलन के अलावा छाले भी हो जाते हैं जो अल्सर में बदल जाते हैं।

ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (human papilloma virus) इस तरह के संक्रमण का एक कारण है जिसकी वजह से जननांग में मस्से (genital warts) उत्पन्न होते हैं।

ध्यान रखें, किसी भी किस्म के वेजाइनल इन्फेक्शन के मामले मामले में अच्छे डॉक्टर से मुलाकात करना बहुत जरूरी है।


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