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खूबसूरत व कोमल आर्मपिट्स



तो चमक उठेंगी आर्मपिट्स
खूबसूरत व कोमल आर्मपिट्स पाने की चाह रखती हैं, तो ये सुझाव आप के बेहद काम आएंगे...




बौलीवुड हौलीवुड सब की चहेती सिनेतारिका पीसी यानी प्रियंका चोपड़ा पत्रपत्रिकाओं, टीवी चैनलों में चर्चा में रहती हैं. फिर चाहे बात उन के विदेशी धारावाहिक ‘क्वांटिको’ में काम करने की हो अथवा उन की आर्मपिट्स यानी बगलों की. उन की कोमल बगलों को देख कर लगता है जैसे उन्हें फोटोशौप में जा कर तराशा गया हो.


हर महिला के भीतर दर्पण निहारते समय नारी सौष्ठव, चिकनी मुलायम त्वचा और बालों रहित मुलायम बगलों की इच्छा बलवती हो उठती है.


कई बार तो इन छोटीछोटी बातों के कारण रिश्ता भी दरक जाता है. सामने वाला शर्म के चलते यह कह नहीं पाता कि आप के पसीने से बदबू आती है और आप हैं कि यह मानने को तैयार ही नहीं होतीं कि आप के पसीने से बदबू आती है, क्योंकि आप को स्वयं इस बात का एहसास ही नहीं होता.


नियमित साफसफाई


हमारे शरीर में पसीना निकालने वाली अनेक ग्रंथियां हैं, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने का काम करती हैं. कौस्मैटिक डर्मेटोलौजिस्ट डा. अमरजीत रेखी के अनुसार, पसीने की ये ग्रंथियां शरीर के अन्य भागों के मुकाबले बगलों में कई गुना अधिक होती हैं.


चिलचिलाती गरमी, अनजाना भय, कुतुहल या ऐसी किसी अन्य स्थिति के चलते बगलों से पसीना अधिक निकलने लगता है. घबराहट से चेहरे, हथेलियों, माथे पर भी पसीना आता है, लेकिन बगलों में आने वाले पसीने में बदबू भी आती है.

ऐसे में यदि आर्मपिट्स की ढंग से साफसफाई न हो, तो पसीने में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जो कई बार फंगस का भी कारण बनते हैं. आर्मपिट्स शरीर के बाकी रंग की जगह गहरी या काली दिखाई देने लगती हैं.


कोलंबिया अस्पताल की डर्मेटोलौजिस्ट डा. नवदीप के अनुसार, बहुत टाइट कपड़े पहनने से पैदा हुई नमी शरीर के इन भागों से निकलते पसीने के वाष्पीकरण में बाधक होती है, जिस से त्वचा में मौजूद बैक्टीरिया पसीने में मिल कर दुर्गंध पैदा करते हैं और बगलों की त्वचा काली होने लगती है.




दुर्गंधयुक्त पसीना


टोटल हैल्थ की आहार विशेषज्ञा एवं संस्थापिका अंजलि मुखर्जी का कहना है कि आहार में विशेष पौष्टिक तत्त्वों की कमी जैसे मैग्नीशियम या जिंक की कमी से भी पसीने की गंध प्रभावित होती है. जिस प्रकार मधुमेह का रोग या कब्ज कई बार दुर्गंध का कारण भी बनती है, ठीक उसी प्रकार मांसाहारी भोजन के अत्यधिक सेवन के कारण भी पसीना दुर्गंधयुक्त हो जाता है. मांसाहारी पदार्थों में पाए जाने वाले प्रोटीन में कोलीन नामक तत्त्व प्रचुर मात्रा में होता है. यदि किसी व्यक्ति विशेष में विशेष प्रकार का ऐंजाइम मौजूद न हो और वह कोलीन मांसाहारी भोजन का अधिक सेवन करता रहे, तो ऐसे में उस के पसीने के बदबूयुक्त होने की संभावना बढ़ जाती है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

मोटापे के कारण आर्मपिट्स में सलवटों के कारण, बारबार वैक्सिंग करना, बारबार बगलों की शेव करते रहने या हेयर रिमूवल क्रीम के कैमिकल के कारण, किसी विशेष डियोड्रैंट से, पाउडर के अत्यधिक छिड़काव, मौसम में बदलाव के कारण काफी हद तक आर्मपिट्स काली हो जाती हैं. यह लगभग सभी त्वचा रोग विशेषज्ञों का मानना है.

डाक्टर अमरजीत रेखी के अनुसार, यह कोई रोग नहीं जिस का उपचार न हो सके. निम्न छोटीछोटी बातों को ध्यान रख कर आर्मपिट्स की इस परेशानी से बचा जा सकता है:


– शरीर के हिस्से की साफसफाई का विशेष ध्यान रखें.


– स्नान करते समय लूफ का प्रयोग करें. आर्मपिट्स को उस से अच्छी तरह रगड़ कर धोएं. फिर अच्छी तरह पोंछ लें.


– अंडरआर्म्स को हमेशा किसी अच्छे नैचुरल मौइश्चराइजर से नम रखें.


– टाइट कपड़े न पहनें.

– ज्यादातर सूती कपड़े ही पहनें. पौलिएस्टर, नायलौन, सिंथैटिक कपड़े कम से कम पहनें.


– बाजार में उपलब्ध ग्लाइकोलिक या ऐजेलिक ऐसिड युक्त क्रीम का इस्तेमाल करें.


– बाहर निकलते समय पूरी बाजू के ढीलेढाले कपड़े ही पहनें.


– कौस्मैटिक सर्जरी करवाएं. किसी अच्छे डर्मेटोलौजिस्ट से ट्रीटमैंट लें.




– परमानैंट लेजर हेयर रिमूवर एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. यह पसीने की दुर्गंध और कालेपन से छुटकारा दिलवाता है. इस का कोई साइडइफैक्ट भी नहीं होता.


– केसर में त्वचा को साफ करने के गुण मौजूद रहते हैं. केसर की कुछ पत्तियां 2 चम्मच लोशन में मिक्स कर अंडरआर्म्स पर कुछ देर लगाए रखें. कुछ दिनों तक नियमित ऐसा करने पर धीरेधीरे त्वचा का कालापन दूर हो जाएगा और पसीने की बदबू से भी छुटकारा मिलेगा.


– हरे सेब को हलका सा स्टीम कर अच्छी तरह मसल लें. अब इस गूदे को अंडरआर्म्स में कुछ दिन नियमित लगाएं. कालापन धीरेधीरे दूर हो जाएगा.


– सप्ताह में 1 बार औलिव औयल की कुछ बूंदें चीनी में डाल कर उसे अंडरआर्म्स वाले एरिया में फेशियल की तरह लगा कर रगड़ें. नतीजा कुछ ही दिनों में दिखने लगेगा.


– दही का लेप करें. फिर अच्छी तरह रगड़ें और धो कर पोंछ लें.


– बगलों के कालेपन को दूर करने के लिए इमली का पेस्ट भी अच्छा नतीजा देता है.


– खीरे के रस में कुछ बूंदें नीबू का रस डाल कर काली त्वचा पर लगाएं. ध्यान रहे शेविंग या वैक्सिंग करने के पूर्व या बाद में कुछ भी सिट्रिक न लगाएं. कई बार अधिक शेव करने से फौलिक्यूलाइटिस की स्थिति बन जाती है, जिस से त्वचा पर छोटेछोटे दाने उभर आते हैं. इसलिए सिट्रिक ऐसिड से गुरेज करें. शेव या वैक्सिंग से पहले या बाद में नीबू का प्रयोग भी न करें.

– आर्मपिट्स को सुंदर बनाने के लिए सफेद चने के आटे में कुछ बूंदें नीबू का रस, थोड़ी सी हलदी डाल कर पेस्ट बना कर बगलों में लगाएं. निरंतर प्रयोग से फायदा होगा.


– शलगम का रस भी कालापन दूर करता है.


– संतरे के सूखे छिलकों को पीस कर उस पाउडर में गुलाबजल मिला कर पेस्ट बनाएं और अंडरआर्म्स में 10 मिनट लगाए रखें. धीरेधीरे संतरे में मौजूद विटामिन सी त्वचा को ब्लीच कर देगा और आर्मपिट्स नर्ममुलायम हो जाएंगी.
बगलों में दाने, फफोले, खुजली, जलन न हो, इसलिए इन नुसखों के साथ ही शरीर की साफसफाई पर भी पूरा ध्यान दें. साथ ही भोजन की पौष्टिकता का भी ध्यान रखें.

प्रेग्नेंसी के अलावा पीरियड्स ना आने के हैं ये 4 कारण
पीरियड्स में ना सिर्फ महिलाओं के आम दिनचर्या को प्रभावित करते हैं, बल्कि इस दौरान होने वाला दर्द उन्हें सबसे अधिक परेशान करता है.
हर महीने में 3-4 दिन हर लड़की के लिए मुश्किल भरा होता है. पीरियड्स में ना सिर्फ महिलाओं के आम दिनचर्या को प्रभावित करते हैं, बल्कि इस दौरान होने वाला दर्द उन्हें सबसे अधिक परेशान करता है. अगर पीरियड्स समय पर ना आए तो महिलाएं परेशान हो उठती हैं. आमतौर पर धारणा है कि प्रेग्नेंसी के वक्त ही पीरियड्स मिस होते हैं पर इस खबर में हम आपको ऐसे तमाम कारणों के बारे में बताएंगे जिससे महिलाओं के पीरियड्स मिस होते हैं या देरी से आते हैं.

तो आइए शुरू करें.

शरीर का कम वजन

अगर आपका वजन कम है तो आपका पीरियड साइकल प्रभावित होता है. कम वजन से आपका पीरियड में अनियमितताएं आती हैं.

तनाव

तनाव महिलाओं के पीरियड्स को बुरी तरह से प्रभावित होता है. अधिक तनाव आपके हार्मोंस को बुरी तरह से प्रभावित करता है. इस कारण कई बार पीरियड्स में देरी हो जाती है.


पौलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

आजकल की जैसी जीवनशैली हो चुकी है, महिलाओं में पौलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) की समस्या आम हो गई है. इस बीमरी के कारण महिलाओं में अनियमित पीरियड्स की शिकायत हो रही है. ना सिर्फ पीरियड्स बल्कि इस बीमारी के कारण महिलाओं में वजन बढ़ने, बाल झड़ने, चेहरे पर दाग:धब्बे जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है.
अधिक एक्सरसाइज

एक्सरसाइज शरीर के लिए बेहद जरूरी है. इससे हमारी सेहत पर काफी सकारात्मक असर पड़ता है. पर अत्यधिक एक्सरसाइज आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसका सीधा असर आपके हार्मोंस पर पड़ता है, और आपके पीरियड्स ठीक समय पर नहीं आते हैं.

अब घर बैठे पता करें गर्भ में पल रहे बच्चे की धड़कन
ये तकनीक उन महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद हैं जो गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप, मधुमेह, प्रीक्लैम्प्सिया और खून में शर्करा की अधिक मात्रा से पीड़ित होती हैं.

मां बनने का एहसास बेहद खास होता है. 9 महीने तक अपने एक अंग की तरह बच्चे को आप पालती हैं. उसका ख्याल रखती हैं. ये वक्त जच्चा और बच्चा दोनों के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है. इस वक्त को और ज्यादा खास बनाने के लिए हम आपको एक खास जानकरी देने वाले हैं. अब महिलाएं अपने गर्भ में पल रहे बच्चे की दिल की धड़कन घर बैठे ही नाप सकेंगी.

ब्रिटेन की एक युनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस सेंसर की खोज की है. इस सेंसर की मदद से गर्भावस्था के दौरान जन्मजात विकारों का भी पता लगाया जा सकता है. इसके अलावा प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं और समयपूर्व प्रसव की आशंका के चलते होने वाली परेशानियों के तुरंत इलाज की जरूरत का पता लगाया जा सकता है.
ये तकनीक उन महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद हैं जो गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप, मधुमेह, प्रीक्लैम्प्सिया और खून में शर्करा की अधिक मात्रा से पीड़ित होती हैं. इस तरह की परेशानियों से गुजर रही गर्भवती महिलाओं को अपने बच्चे के स्वास्थ्य पर नियमित तौर पर चिकित्सीय निगरानी की जरूरत होती है.

मौजूदा समय में स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से जूझ रही गर्भवती महिलाओं को अपने बच्चे की धड़कन की जांच कराने के लिए अस्पताल जाना पड़ता है. लेकिन इस नई तकनीक से महिलाएं घर बैठे गर्भ में पल रहे बच्चे की धड़कन नाप सकेंगी



इन चीजों को खाने से होती है प्रेग्नेंसी में परेशानी, रहें सतर्क
जिन खाद्य पदार्थों में ज़िंक और फोलिक एसिड की मात्रा प्रचुर होती है उनके सेवन से गर्भधारण की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है.

आपकी प्रेग्नेंसी पर आपके खानपान का काफी असर पड़ता है. और ये बात केवल प्रेग्नेंसी के दौरान के खानपान की नहीं है. बल्कि लंबे समय से चली आ रही आपकी डाइट, प्रेगनेंसी पर असर डालती है. एक शोध से स्पष्ट हुआ है कि जो महिलाएं जंक फूड का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं वो देर से प्रेग्नेंट होती हैं. इसमें ये भी स्पष्ट हुआ कि जो महिलाएं सप्ताह में तीन या चार बार या इससे भी अधिक फास्ट फूड खाती हैं, उनको कम फास्टफूड खाने वाली महिलाओं की अपेक्षा, प्रेग्नेंट होने में एक महीना अधिक वक्त लगता है.

औस्ट्रेलिया में हुए इस शोध के मुताबिक जो महिलाएं हेल्दी फूड खाती हैं वो ज्यादा फिट होती हैं. उन महिलाओं के समय पर गर्भवती होने की संभावना ज्यादा रहती है. सेहतमंद खानपान से महिलाओं की फर्टिलिटी में सुधार होता है.
इस शोध में करीब 5,500 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया था. इनमें जिन महिलाओं ने ज्यादा फास्टफूड का सेवन किया है उन्हें प्रेग्नेंट होने में ज्यादा समय लगा.

आपको बता दें कि जिन खाद्य पदार्थों में ज़िंक और फोलिक एसिड की मात्रा प्रचुर होती है उनके सेवन से गर्भधारण की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है. हरे पत्तेदार सब्जियों, मछली, बीन्स और नट्स में गर्भावस्था के लिहाज से फायदेमंद तत्व पाए जाते हैं.
पीरियड्स के ‘बर्दाश्त ना होने वाले दर्द’ को चुटकियों में करें दूर
पीरियड्स पेन से बचने के लिए दवाइयों का सेवन महिलाओं के स्वास्थ के लिए काफी हानिकारक होता है. स्वास्थ


पीरियड्स के दौरान महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कई बार इस दौरान महिलाओं को बहुत तेज दर्द का सामना करना पड़ता है. ऐसे में वो दवाइयों का सहारा लेने लगती हैं. पीरियड्स पेन में इस्तेमाल होने वाले पेन किलर्स हाई पावर वाले होते हैं. स्वास्थ पर उनका काफी बुरा असर होता है.

इस खबर में हम आपको पांच घरेलू टिप्स के बारे में बताएंगे जिनको अपना कर आप हर महीने होने वाले इस परेशानी से राहत पा सकेंगी.
तो आइए शुरू करें.

तले आहार से करें परहेज
पीरियड्स में आपको अपनी डाइट पर खासा ख्याल रखना होगा. इस दौरान तले, भुने खानों से दूर रहें. अपनी डाइट में हरी सब्जियों और फलों को शामिल करें. ये काफी असरदार होते हैं.

तेजपत्ता

तेजपत्ता से होने वाले स्वास्थ लाभ के बारे में बहुत कम लोगों को पता होता है. पीरियड्स से होने वाली परेशानियों में तेजपत्ता काफी कारगर होता है. महावारी के दर्द को दूर करने के लिए महिलाएं इसका इस्तेमाल करती हैं.

हौट बैग

पीरियड्स में होने वाले दर्द में हौट बैग काफी कारगर होता है. इसको पेट के उस हिस्से पर रखना होता है जहां दर्द महसूस हो रहा है. ऐसा करने से आपको आराम मिलेगा.

कैफीन से रहें दूर

पीरियड्स के दौरान काफीन से दूरी बनाएं रखें. इस वक्त में इसके सेवन से गैस की परेशानी होती है. गैस के कारण कई बार दर्द बढ़ जाता है.

एक्सरसाइज को अपनी रूटीन में शामिल करें

डेली रूटीन में एक्सरसाइज को शामिल करने से आपको दर्द में काफी राहत मिलेगी. इससे ब्लौटिंग की परेशानी में भी काफी राहत मिलती है. ब्लौटिंग की वजह से ही दर्द महसूस होता है. ऐसे में लाइट एक्‍सरसाइज करने से आपकी मसल्‍स रिलैक्‍स महसूस करेंगी.

नमक से भी बना लें दूरी

पीरियड्स में ब्लौटिंग होना एक आम बात है. ऐसे में अगर आप पीरियड्स से कुछ समय पहले ही नमक का सेवन कम कर देती हैं तो आपकी किडनी को अत्यधिक पानी निकालने में मदद मिलने के साथ आपको दर्द में भी राहत मिलेगी.



प्रेग्नेंसी में नहीं आती है नींद? आजमाएं तुरंत असर करने वाली ये 6 आसान टिप्स
प्रेग्नेंसी में महिलाओं को अच्छी डाइट की जरूरत होती है ताकि जच्चा और बच्चा दोनों की सेहत पर किसी तरह का बुरा असर ना पड़े. इन्ही सारी जरूरी चीजों में अच्छी और पूरी नींद भी शामिल है.



प्रेग्नेंसी का वक्त महिलाओं के लिए बेहद खास होता है. इस दौरान महिलाओं को अधिक देखभाल की जरूरत होती है. इसके अलावा उन्हें अच्छी डाइट की जरूरत होती है ताकि जच्चा और बच्चा दोनों की सेहत पर किसी तरह का बुरा असर ना पड़े. इन्ही सारी जरूरी चीजों में अच्छी और पूरी नींद भी शामिल है.

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में ऐसे कई बदलाव होते हैं जो उनकी सेहत पर असर डालते हैं. इस दौरान महिलाओं के हार्मोन्स में भी बहुत से बदलाव होते हैं जो उनकी दिनचर्या पर बुरा असर डालते हैं. इन बदलावों का नतीजा है कि कई बार गर्भवती महिलाओं को घबराहट महसूस होती है. ऐसे में उन्हें नींद नहीं आती, जिसका सीधा असर उनके बच्चे पर भी होता है.

ऐसे में हम आपको कुछ टिप्स बताने वाले हैं, जिसे फौलो कर के प्रेग्नेंट महिलाएं सुकून की नींद ले सकेंगी.
सोने से पहले हल्का म्यूजिक सुने. इससे मन शांत रहता है और अच्छी नींद आती है.
प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने से कमर के बल ज्यादा देर तक ना सोएं. थोड़ी थोड़ी देर में करवट बदलते रहें. कोशिश करें कि अधिक समय बाईं करवट सोएं. इस तरह से सोने से ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है.
दिन भर हल्का ही सही, पर कुछ ना कुछ खाते रहें. खाली पेट रहने से जी मिचलता है.
सोने से पहले गुनगुने पानी से नहाएं. ऐसा करने से शरीर की थकान दूर होती है और आपको अच्छी नींद आएगी.
रात में हल्के खाने का सेवन करें. एसिडिटी और अपच की समस्या से बचने के लिए मसालेदार और तली हुई चीजों का सेवन ना करें.
हेल्दी रहने के लिए हल्के एक्सरसाइजेज करते रहें. इससे आपके पैर दर्द और ऐंठन कम होगी.

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