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प्रेग्नेंसी में नींद नहीं आती



प्रेग्नेंसी में नींद नहीं आती? इन 6 तरीकों से दूर करें परेशानी 
प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिला के हार्मोंस में बहुत से बदलाव होते हैं जिससे उन्हें स्वास्थ संबंधी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. 



प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के लिए एक खास समय होता है. इस दौरान महिलाओं को खास देखभाल की जरूरत होती है. बच्चे की अच्छी सेहत के लिए जरूरी है कि गर्भवती महिला को पूरी नींद, अच्छा खानपान और स्ट्रेस फ्री माहौल मिले. इस दौरान गर्भवती महिला के हार्मोंस में बहुत से बदलाव होते हैं जिससे उन्हें स्वास्थ संबंधी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इन परेशानियों से उनकी नींद भी प्रभावित होती है. प्रेग्नेंसी के समय गर्भवती महिलाओं को कई बार घबराहट महसूस होती है. ऐसे में ठीक तरह से नींद न आने से गर्भवती महिलाओं के साथ उनके बच्चे की सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है. हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं, जिन्हें फौलो कर महिलाएं गर्भावस्था के दौरान भी सुकून भरी नींद ले सकेंगी.



तो आइए शुरू करें. 
रात में हल्के खाने का सेवन करें. हार्टबर्न की परेशानी से बचने के लिए मसालेदार और तली हुई चीजों से दूर रहें. 
दिन भर कुछ ना कुछ खाते रहें. खाली पेट रहने से जी मिचलता है. 
प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने से कमर के बल सोने से बचें. थोड़ी थोड़ी देर पर करवट बदलती रहें. कोशिश करें कि बाईं करवट अधिक सोएं. ऐसे सोने से ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है. 
सोने से पहले हल्का म्यूजिक सुनें, इससे मन शांत रहेगा और अच्छी नींद आएगी. 
सोने से पहले गुनगुने पानी से जरूर नहाएं. ऐसा करने से बौडी रिलैक्स होती है और नींद अच्छी आती है. 
गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी है कि सोते वक्त बिस्तर के दोनों ओर तकिया जरूर लगाएं. 


प्रेग्नेंसी में मिसकैरेज से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान 
प्रेग्नेंसी के वक्त आपको बेहद सीवधानी बरतनी होती है. इसमें आपका खानपान, दिनचर्या और मानसिक अशांति शामिल है. 


प्रेग्नेंसी के वक्त आपको बेहद सावधानी बरतनी होती है. इसमें आपका खानपान, दिनचर्या और मानसिक अशांति शामिल है. हालिया अध्ययन में ये बात सामने आई कि प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा तनाव में रहने वाली महिलाओं में मिसकैरेज (Miscarriage) का खतरा बढ़ जाता है.

शोधकर्ताओं का दावा है कि प्रेग्नेंसी के दौरान तनाव में रहने वाली महिलाओं में गर्भपात का खतरा 42 फीसदी अधिक हो जाता है. इससे पहले हुए अध्ययन की रिपोर्ट में यह पाया गया था कि 24 सप्ताह की प्रेग्नेंसी में होने वाले गर्भपात में 20 फीसदी मामले तनाव के कारण होते हैं. हालांकि बाद में हुए अध्ययन के बाद यह पाया गया कि आंकड़ें इससे कहीं ज्यादा हैं. क्योंकि गर्भपात के कई मामले दर्ज ही नहीं होते.

इसके अलावा रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई कि युवावस्था से ही तनाव और अवसाद का सामना करने वाले लोगों को आगे जीवन में कई तरह की बीमारियों का खतरा तेज हो जाता है.

जानिए कैसे करें प्रेग्नेंसी में तनाव पर काबू

घर का ज्यादा काम ना करें. कोशिश करें कि अपने लिए कुछ खास वक्त निकालें. खाली वक्त में आप किताबें पढ़ सकती हैं या आराम कर सकती हैं. 
रात में जल्दी सोने की आदत डाल लें. आपके बच्चे के लिए ये बेहद जरूरी है. 
दूसरों की बातों का बुरा ना माने. इस दौरान अगर लोग आपको कुछ कहते भी हैं तो उन्हें अनसुना कर दिया करें. 


अगर आप कामगर महिला हैं तो औफिस से छुट्टी लें और घर पर आराम कर अपना वक्त बिताएं. 
स्वीमिंग या वौक नियमित तौर पर करें. 
हेल्दी खाएं, संतुलित आहार आपके शरीर और मानसिक सेहत दोनों को ठीक रखेगा. 
अगर आप कोई काम नहीं करना चाहती तो मना करना सीखें. टेंशन ले कर किसी काम को करना आपके और आपके बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है. 
लाख कोशिशों के बाद भी आप तनाव से दूर नहीं हो पा रही हैं तो बेहतर है कि आप किसी डाक्टर या थेरेपिस्ट से संपर्क करें. 


समय पर होना है प्रेग्नेंट तो इस बात का रखें ध्यान 
हाल ही में हुए एक स्टडी में ये बात सामने आई कि जंकफूड का अधिक प्रयोग करने वाली महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत परेशानी होती है. 



खराब खानपान हमारी सहत को बुरी तरह से प्रभावित करता है. इसका असर दिखने में लंबा वक्त लग जाता है, जब तक असर सामने आता है तब तक काफी देरी हो चुकी होती है. कुछ ऐसा ही जंक फूड और फास्ट फूड के साथ है. इसका सेहत पर काफी बुरा असर होता है.

हाल ही में हुए एक स्टडी में ये बात सामने आई कि जंकफूड का अधिक प्रयोग करने वाली महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत परेशानी होती है. शोध में पाया गया कि हफ्ते में तीन चार बार से अधिक जंकफूड का सेवन करने वाली महिलाओं को प्रेग्नेंट होने में ज्यादा वक्त लगता है. वहीं जो महिलाएं जंकफूड का सेवन कम करती है वो ज्यादा सहूलियत और आसानी से प्रेग्नेंट होती हैं.

औस्ट्रेलिया में हुए इस शोध में ये बात सामने आई कि जो महिलाएं हेल्दी फूड खाती हैं वो ज्यादा फिट रहती हैं और सही वक्त पर गर्भवती भी होती हैं. फर्टिलिटी में भी हेल्दी फूड बेहद लाभकारी होते हैं. इसके अलावा ये बात भी सामने आई कि जिन खाद्य पदार्थों में जिंक और फोलिक एसिड की मात्रा प्रचुर होती है उनके सेवन से गर्भधारण की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है. हरे पत्तेदार सब्जियों, मछली, बीन्स और नट्स में ये तत्व पाए जाते हैं.

कमजोर है याददाश्त तो आज से ही ये फल खाना शुरू करें 
अगर आप भी याद्दाश्त की समस्या से जूझ रहे हैं तो हम आपके लिए ला रहे हैं एक ऐसा उपाय जिसके आपकी ये समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी. 



बहुत से लोगों को भूलने की बीमारी होती है. वो छोटी छोटी चीजों को भूल जाते हैं. कई बार वो कुछ सामान कहीं रख कर भूल जाते हैं. अगर आप भी इस तरह की परेशानियों से जूझ रहे हैं तो टेंशन छोड़ दीजिए. हम आपके लिए इसका एक बेहद आसान उपाय ला रहे हैं.


याददाश्त ठीक करने के लिए लोग तरह तरह की चीजें खाने की सलाह देते हैं. इन खाने की चीजों में से एक है अंगूर. हाल ही में सामने आई एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि अंगूर का नियमित सेवन करने से याददाश्त अच्छी होती है. इस स्टडी में बताया गया है कि रोजाना अंगूर खाने से अल्जाइमर रोग से बचाव होता है. बता दें कि अल्जाइमर दरअसल मस्तिष्क से संबंधित एक बीमारी है, जिसमें याददाश्त और सीखने की क्षमता का कमजोर होती जाती है.

अमेरिका की एक युनिवर्सिटी में हुए इस अध्ययन में शामिल एक डाक्टर के मुताबिक, अध्ययन इस बात का पता करने के लिए किया गया कि पृथक यौगिकों की तुलना में अंगूर का क्या प्रभाव पड़ता है और रोजाना आधार पर अंगूर के सेवन का प्रभाव अल्जाइमर रोग से संबंधित बीमारी पर क्या प्रभाव पड़ता है. जानकारों का मानना है कि पायलट अध्ययन इस बात का साक्ष्य प्रदान करता है कि अंगूर का सेवन मस्तिष्क व हृदय को स्वस्थ रखने में कारगर है, हालांकि अध्ययन के निष्कर्ष के लिए और अधिक अध्ययन की जरूरत है.



इस बारे में प्रकाशित एक रिपोर्ट की माने तो अंगूर चयापचय गतिविधियों में गिरावट से सुरक्षा प्रदान करता है. मस्तिष्क के खास भागों में चयापचय गतिविधियों का कम होना अल्जाइमर बीमारी की प्रारंभिक शुरुआत को दर्शाता है.


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