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'कोबरा पोज' आपकी पीठ की मांसपेशियों को बनाता है मजबूत!


योगा

'कोबरा पोज' आपकी पीठ की मांसपेशियों को बनाता है मजबूत!



पीठ पर शरीर का अधिकतम भार रहता है।
सभी आसनों में भुजंगासन एक प्रसिद्ध आसन है।
यह आसन पीठ को विशेष रूप से लचीला बनाता है।

मानव शरीर की संरचना में पीठ पर शरीर का अधिकतम भार रहता है। इसके अलावा आज के समय में अधिकतर लोग दिन में लगभग 10 घंटे अपने कंप्‍यूटर के सामने बैठकर बिताते हैं, ऐसे में पीठ में दर्द होना लाजिमी है। इनसे बचने के लिए पीठ की मांसपेशियों का मजबूत होना बहुत जरूरी है। पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए कोबारा पोज यानी भुजंगासन बहुत फायदेमंद होता है।


जिन लोगों को पीठ और मेरुदंड से जुड़ी समस्याएं होती हैं, उन्हें नियमित रूप से भुजंगासन करना चाहिए क्‍योंकि इससे पीठ में लचीलापन बढ़ता है और मांसपेशियों में मजबूती आती है। साथ ही यह कई रोगों में भी काफी लाभप्रद होता है। आइए जानें पीठ को मजबूत बनाने के लिए भुजंगासन कैसे मददगार होता है।


इस आसन को करते समय शरीर का आकार फन उठाए हुए सर्प के समान हो जाता है इसलिए इसे 'भुजंगासन' कहा जाता हैं। इसे कोबारा पोज के नाम से भी जाना जाता हैं। सभी आसनों में से भुजंग आसन एक प्रसिद्ध आसन है। पीठ के दर्द के रोगीयों के लिए यह आसान अत्यंत गुणकारी होता है। सम्पूर्ण व्यायाम कहे जाने वाले सूर्य नमस्कार में भुजंगासन सातवें क्रम पर आता है। इस लाभदायी आसन को नियमित रूप से करने से कंधे, हाथ, कुहनियां, पीठ, किडनी, और लीवर को मजबूती मिलती है, तथा अनेक रोगों से मुक्ति मिलती है।

भुजंगासन करने की विधि
साफ और समान जगह पर चटाई/दरी बिछाकर यह आसन करना चाहिए। और पैरों को सीधा, लंबा और फैलाकर रखना चाहिए। 
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जायें। 
अपने हथेलियों को कंधो के नीचे जमीन पर रखें। माथे को जमीन से लगाकर रखें। 
अपनी कोहनियो की दिशा ऊपर आसमान की ओर रखें। 
अब धीरे-धीरे सिर को और कंधों को जमीन से ऊपर उठाइये। सिर को ऊपर उठाते समय श्वास अंदर लेनी है। 
हाथो का अंदरूनी हिस्सा शरीर से स्पर्श कर रखें। लेकिन हाथों पर अधिक दबाव न आने दें। 
अब धीरे-धीरे हाथों को कोहनियो से सीधा कर, पूरी पीठ को पीछे की ओर झुकाना है। नाभि को जमीन से लगाकर रखें। इस स्थिति में श्वास सामान्य रखें। इस स्थिति में 20 से 30 सेकेण्ड तक रुकें और अभ्यास के साथ अंतराल बढ़ायें। 
इस अंतिम स्थिति में कुछ देर रुकने के बाद धीरे-धीरे नीचे आइए तथा पूर्व स्थिति में विश्राम करें। यह क्रिया श्वास को बाहर छोड़ते हुए करनी है।


भुजंगासन के लाभ
यह आसन पीठ को विशेष लचीला बनाता है तथा उदर अंगों की मालिश करता है। 
स्लिप डिस्क को सही स्थान पर ला सकता है और पीठ दर्द को दूर करता है। 
मेरुदंड लचीला होता है, तो शरीर और मस्तिष्क के बीच सही तालमेल बनता है। 
यह अभ्यास पीठ में रक्त-संचार बढ़ाने तथा तंत्रिकाओं को सबल बनाकर मस्तिष्क और शरीर के बीच संचार व्यवस्था ठीक करने में अहम है। 
महिलाओं के अंडाशय एवं गर्भाशय को मजबूत बनाता है तथा मासिक धर्म संबंधी समस्याओं एवं स्त्री रोगों को दूर करने में काफी सहायक है। 
यह आसन भूख को बढ़ाता है और कब्ज को दूर करता है। गुर्दो और एड्रिनल ग्रंथि पर भी काफी सकारात्मक प्रभाव डालता है।
भुजंगासन में निम्नलिखित सावधानी बरतें

हार्निया और हाइपर थायरायड से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए। 
अत्यधिक पेट दर्द होने पर यह आसन न करें। 
पीछे की ओर अकस्मात सिर और पीठ को नहीं झुकाना चाहिए। 
यह आसन अपनी क्षमता अनुसार ही करें। 

इस आसन से आप अपने शरीर को लचीला और फुर्तीला बना सकते हैं। अगर आपको पहले से कोई रोग या समस्या है तो किसी भी नए व्यायाम या आसन को करते समय अपने डॉक्टर और योग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।


जानें नर्वस सिस्‍टम को कैसे उत्‍तेजित करता है अर्द्ध पिंचा मयूरासन

नर्वस सिस्‍टम में ब्रेन भी शामिल होता है।
बाजुओं को मजबूती प्रदान करता है।
कंधों को मजबूत करने में मदद करता है।
थकान दूर करने के लिए मदद करता है।
नर्वस को मनुष्‍य की जीवन रेखा माना जाता है। क्योंकि इस सिस्‍टम में ब्रेन भी शामिल होता है। अगर यह सिस्‍टम किसी रोग या विकार से ग्रस्त हो जाए, तो उस पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है! यहां तक कि इसको थोड़ा सा नुकसान भी कई प्रकार की मस्तिष्‍क संबंधी बीमारियों और समस्‍याओं का कारण बनता है। और अगर इस पर समय रहते ध्‍यान नहीं दिया जाये तो यह मानसिक रूप से विकलागंता का कारण बन सकता है। इसलिए हमें तंत्रिका तंत्र के नुकसान से जुड़े जोखिम कारकों को समझना चाहिए। ऑटोइम्‍यून डिजीज, तनाव, अनिद्रा, दुर्घटना और एंटीबायोटिक दवाओं के साइड इफेक्‍ट आदि इसके जोखिम कारकों में से कुछ हैं। इससे बचने का एकमात्र उपाय इसके लक्षणों की जानकारी है। दर्द, सुन्‍नता, झुनझुनी, अनिद्रा आदि जैसे नर्वस सिस्‍टम संबंधी समस्‍याओं के प्रारंभिक लक्षण दिखने पर तुरंत अपने चिकित्‍सक से परामर्श करना चाहिए।

हालांकि तंत्रिका स्‍वास्‍थ्‍य का दवाओं और उपचार प्रक्रियाओं से इलाज किया जा सकता है, लेकिन इन सब के अलावा योग इस समस्‍या का सबसे अच्‍छा इलाज हो सकता है। अर्द्ध पिंचा मयूरासन एक ऐसा ही आसन है, जो नर्वस सिस्‍टम को प्रोत्‍साहित करने में मददगार है। शब्द अर्द्ध पिंचा मयूरासन को सामान्यतः डॉल्फिन पेाज के रूप में जाना जाता है। यह संस्कृत शब्द 'अर्द्ध' जिसका मतलब आधा, 'पिंचा' का मतलब पंख, 'मयूरा' का मतलब मोर और 'आसन' का मतलब पोच होता है। यहां अर्द्ध पिंचा मयूरासान को स्‍टेप-बाइ-स्‍टेप करने के उपाय दिये गये हैं। 

अर्द्ध पिंचा मयूरासन करने के उपाय
अर्द्ध पिंचा मयूरासन की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाओ।
फिर धीरे-धीरे घुटने टेकने वाली स्थिति में नीचे आ जाओ।
फोरआर्म, उंगालियों और हथेलियों को फर्श पर आराम से रखें।
ध्‍यान रखें कि आपके कंधे और कोहनी एक ही पंक्ति में हो।
धीरे-धीरे अपने हिप्‍स, पीठ और पैरों को ऊपर उठायें।

आपके पैर खुले और पैरों की उं‍गलियां आगे की ओर होनी चाहिए।
एक बार इस पॉजिशन में आने के बाद अपने सिर और गर्दन को घूमने की अनुमति दें।
फिर गहरी सांसें लें, थोड़ी देर के लिए इस स्थिति में रूकें फिर सांस को छोड़ दें।
धीरे-धीरे पॉजिशन में वापस आ जायें।

अर्द्ध पिंचा मयूरासन के अन्य लाभ
बाजुओं को मजबूती प्रदान करता है।
पाचन अंगों को प्रोत्‍साहित करने में मदद करता है।
सिर और पीठ दर्द को दूर करने में मदद करता है।
कंधों को मजबूत करने में मदद करता है।
अस्थमा से पीड़ित लोगों की सहायता करता है।
हैमस्ट्रिंग को मजबूत करने में मदद करता है।
थकान दूर करने के लिए मदद करता है।
प्रजनन अंगों को प्रोत्साहित करने में मदद करता है।


सावधानी
हाथ और पीठ दर्द से ग्रस्‍त, कंधे की चोट और उच्‍च रक्‍तचाप से ग्रस्‍त लोगों को अर्द्ध पिंचा मयूरासन करने से बचना चाहिए। इन लोगों को केवल योग प्रशिक्षक की देखरेख में इस योग को करना चाहिए। 

पाचन क्रिया, मासिक धर्म और तनाव की समस्याओं में फायदेमंद है पद्मासन, जानें तरीका


पद्मासन से आपके शरीर और मस्तिष्क दोनों को लाभ मिलता है।
ये आसन दिमाग को शांत करता है और मन को भटकने से रोकता है।
इसके नियमित अभ्यास से पाचन ठीक रहता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।




बढ़ती उम्र के साथ शरीर की चुस्ती-फुर्ती को बनाए रखना जरूरी है। ऐसे कई योगासन हैं, जिनसे आपके शरीर और मस्तिष्क दोनों को लाभ मिलता है साथ ही ये आसन कई शारीरिक समस्याएं भी ठीक करते हैं। पद्मासन भी एक ऐसा ही योगासन है। संस्कृत शब्द पद्म का अर्थ होता है कमल। इसीलिए पद्मासन को कमलासन भी कहते हैं। ध्यान मुद्रा के लिए यह आसन सबसे अच्छी मुद्रा है।
एकाग्रता के लिए पद्मासन
ये एक आसान आसन है और इसे कोई भी किसी भी उम्र का व्यक्ति कर सकता है। ये आसन दिमाग को शांत करता है और मन को भटकने से रोकता है। एकाग्रता के लिए ये आसन बहुत फायदेमंद है। इस आसन से ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है। पद्मासन गर्दन और रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाता है। इसके अलावा इस आसन से पेट की चर्बी कम होती है और तनाव कम होता है।

कैसे करें पद्मासन
पालथी मारकर बैठ जाएं।
अब बाएं पैर की एड़ी को दाई जांघ पर इस प्रकार रखें कि एड़ी नाभि के पास आ जाए।
इसके बाद दाएं पांव को उठाकर बाई जांघ पर इस प्रकार रखें कि दोनों एड़ियां नाभि के पास आपस में मिल जाएं।
अब रीढ़ के तान लें और कंधों को ढीला छोड़ दें।
हाथ घुटने पर टिका लें। तर्जनी और अंगूठे को मिलाकर ध्यान मुद्रा में आएं।
इस मुद्रा का अभ्‍यास करते समय गहरी सांस लेने का अभ्‍यास करें।
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क्या हैं पद्मासन के लाभ
पद्मासन के नियमित अभ्यास से पाचन क्रिया ठीक रहती है और पेट की बीमारियां दूर रहती हैं।
यह आसन मांसपेशियों के तनाव को कम करता है और इसके नियमित अभ्यास से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए यह आसन फायदेमंद होता है।
इस आसन के नियमित अभ्यास से मासिक चक्र में होने वाली समस्याओं से राहत मिलती है।
मानसिक तनाव और चिंता को भी ये आसम कम करता है, जिससे मन शांत होता है।




रीढ़ की हड्डी, कूल्हों और फेफड़ों के लिए फायदेमंद है उत्कटासन, जानें करने की आसान विधि


QUICK BITES
कमर और पीठ दर्द में उत्कटासन बहुत फायदेमंद है।
ये आसन रीढ़ की हड्डी और फेफड़ों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
उत्कटासन शरीर में हार्मोन्स के स्तर को संतुलित करता है।



उत्कटासन एक बहुत आसान योगासन है, जिसे कोई भी आसानी से कर सकता है। उत्कटासन पूरे शरीर के लिए फायदेमंद होता है, इसलिए अगर आप दिन में कोई भी एक्सरसाइज नहीं करते हैं, तो उत्कटासन जरूर करें। अगर आप पीठ दर्द, कमर दर्द से परेशान हैं या रीढ़ की हड्डी और फेफड़ों को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो उत्कटासन का अभ्यास करें, आपको फायदा मिलेगा। ये आसन शरीर में हार्मोन्स के स्तर को संतुलित करता है और ऊर्जा का संचार करता है। देर तक बैठने वाले लोगों जैसे- छात्र, डेस्क जॉब करने वालों आदि के लिए ये योगासन फायदेमंद है।
कैसे करें उत्कटासन
इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और अपने दोनों पैरों के बीच थोड़ा फासला रखें।
अब हाथों को सामने की तरफ ऐसे फैलाएं कि आपकी हथेलियां जमीन की तरफ हों।
अब रीढ़ को सीधे रखते हुए इस तरह नीचे झुकें, जैसे आप किसी कुर्सी पर बैठते हैं।
हवा में काल्पनिक कुर्सी पर बैठने का ये अभ्यास ही उत्कटासन कहलाता है।
इस स्थिति में 10-20 सेकंड रुकें और फिर पहले की पोजीशन में आ जाएं।
बैठते समय सांसों को अंदर खींचें और उठते समय बाहर छोड़ें।
इस आसन का अभ्यास दिन में 15-20 बार अपनी मर्जी के मुताबिक कर सकते हैं।

रीढ़ और कमर के लिए फायदेमंद है उत्कटासन

उत्कटासन करते समय आपके रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आता है और हड्डियां सीधी हो जाती हैं इसलिए रीढ़ के लिए ये आसन फायदेमंद है। इसके साथ ही ये आसन कमर दर्द, पीठ दर्द आदि में भी बहुत फायदेमंद है।

कूल्हों को लाए शेप में

अगर आपके कूल्हों के आसपास ज्यादा जर्बी जमा हो गई है या कूल्हे सही शेप में नहीं हैं, तो उत्कटासन का अभ्यास आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। इस आसन को नियमित करने से आपके कूल्हों का आकार अच्छा होता है और अतिरिक्त चर्बी घट जाती है। उत्कटासन कोरमांसपेशियों (जांघों और नितंबों) को मजबूत बनाने और टोन में मदद करता है।


फेफड़ों के लिए फायदेमंद है उत्कटासन
उत्कटासन के दौरान आप सांस को बाहर लेते और छोड़ते हैं इसलिए आपकी छाती में शुद्ध हवा का प्रवाह बढ़ जाता है। इसके साथ ही इस आसन के अभ्यास से आपके फेफड़ों की मांसपेशियां स्वस्थ रहती हैं, जिससे आपको फेफड़ों से जुड़े रोगों का खतरा कम हो जाता है।

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