Header Ads

शरीर में आयरन की कमी के दुष्परिणाम

शरीर में आयरन की कमी के दुष्परिणाम

क्या आपको अपने भोजन से पूरा आयरन मिल रहा है? शरीर में इस खनिज की कमी के परिणामों के बारे में जान लीजिये। पता लगाएं कि आपकी सेहत के लिए आयरन कितना अहम है!
0शेयर किया गया 

एयर कंडीशनिंग में रहते हुए ध्यान रखें, आपकी सेहत पर डालता है यह नुकसानदेह असर
हृदय रोगों के 7 सबसे आम लक्षण
इन 6 आदतों से आपके गुर्दों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है!


शरीर में लोहा यानी आयरन की कमी का सबसे अहम संकेत एनीमिया है। हालांकि लोहे की कमी के कई दूसरे गंभीर परिणाम भी हैं जिन्हें जान लेना चाहिए। अगर आपको लगता है कि खाने में कम आयरन का सेवन कर रहे हैं, तो हम निम्न लक्षणों पर गौर करने की सलाह देंगे।
आयरन की कमी एक ग्लोबल समस्या है


इसके अपर्याप्त सेवन के कारण विकसित और अविकसित दोनों देशों में करोड़ों लोग इस पोषक तत्व की कमी के शिकार हैं। किसी को भी लोहे की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके नतीजे गंभीर होते हैं।

इसके कई कार्यों में जो अहम है, वह यह कि लोहा हीमोग्लोबिन को सही ढंग से काम करने और सभी कोशिकाओं तक ऑक्सीजन ले जाने की सहूलियत देता है। यह स्वास्थ्य के लिए आवश्यक तत्व है। इसके अलावा, चूंकि आयरन हमारे शरीर में कम मात्रा में पाया जाता है, हमें इसे संतुलित भोजन और कई किस्म के खानों से हासिल करना चाहिए।

आयरन दो तरह का होता है:
पहला हीम आयरन (haem iron) है जो जानवरों के मांस में पाया जाता है। यह शरीर में बहुत आसानी से अवशोषित होता है।
दूसरा है गैर हीम-आयरन (non-haem iron)। यह सब्जियों में पाया जाता है और शरीर द्वारा आसानी से अवशोषित नहीं होता। इसलिए बहुत से शाकाहारी लोग एनीमिया से पीड़ित होते हैं।

आयरन दूसरे कई तरह के शारीरिक कार्यों में भी अहम भूमिका निभाता है। यह :
खून से दूसरे तत्वों के निर्माण में भाग लेता है।
डीएनए सिंथेसिस में हस्तक्षेप करता है।
कोशिका में श्वसन प्रक्रिया का हिस्सा है।
रोग प्रतिरोध क्षमता (immune system) को बनाए रखने में सहायक है।

इसके अलावा, लोहा शरीर की कई रासायनिक प्रतिक्रियाओं में भी भाग लेता है और ऊर्जा उत्पन्न करने में अहम रोल रखता है।


इसे भी जानें : विटामिन बी12 की कमी घातक हो सकती है, ये हैं इसके लक्षण
आपके शरीर में आयरन का लेवल

आयरन की कमी है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए आप अपने खून की जांच करा सकते हैं:
वयस्क पुरुषों में आयरन की स्टैण्डर्ड मात्रा 80 से 180 माइक्रोग्राम/डेसीलीटर (ug/dl) के बीच होनी चाहिए।
वयस्क महिलाओं में यह 60 से 160 माइक्रोग्राम/डेसीलीटर (ug/dl) है।
बच्चों के लिए यह 50 से 120 माइक्रोग्राम/डेसीलीटर (ug/dl) है।
एक वर्ष से कम उम्र के शिशुओं में इसका मान 100 और 250 माइक्रोग्राम/डेसीलीटर (ug/dl) के बीच होना चाहिए।

यदि आपमें आयरन का स्तर औसत से अधिक है, तो ऐसी बीमारियों के कारण हो सकता है:
हीमोक्रोमैटोसिस
हेपेटाइटिस
हीमोलिटिक एनीमिया
आयरन पॉइजनिंग

इसी तरह ऐसी कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में आपके आयरन का स्तर घट सकता है:
गर्भावस्था
कुपोषण
कैंसर
लगातार रक्त क्षय
क्रोनिक हाइपरमेनोरिया (hypermenorrhea)।
आयरन की कमी के दुष्परिणाम (Consequences of Iron Deficiency)


उन संकेतों पर ध्यान दें जो आपको बता सकते हैं कि कहीं आपके शरीर में इस आवश्यक पोषक तत्व की कमी तो नहीं है। यदि आपमें इनमें से कई लक्षण इकट्ठे दिख रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से मिलना और ब्लड टेस्ट करवाना ठीक रहेगा।


इसे बहे आजमायें : सुबह ब्रेकफ़ास्ट में किशमिश खाने के 6 कारण
1. कमजोरी और थकान

आप चाहे जितने घंटे सोयें या दिन में भले ही खूब आराम कर लें, आपको हमेशा सुस्ती और ताकत की कमी महसूस होती है। आपके लिए सुबह उठना मुश्किल होता है और कहीं भी गिरते ही सो जाते हैं। यह कमजोरी और थकान आयरन की कमी के कारण हो सकती है।

दरअसल यह पोषक तत्व ऑक्सीजन को कोशिकाओं में ले जाने की सहूलियत देता है। इसलिए अगर शरीर में यह पर्याप्त मात्रा में नहीं है, तो आपके टिशू को “ईंधन” नहीं मिल पाता। वे उस तरह से काम नहीं कर पाते जैसा उन्हें करना चाहिए।

अतः कम तीव्रता वाली गतिविधियों के बाद भी आपमें जीवनी शक्ति की कमी और अत्यधिक थकान महसूस होगी और इसका सम्बन्ध आयरन की कमी से हो सकता है।
2. कमजोर प्रदर्शन और खराब मूड

खून में आयरन की कमी का हमारे इमोशनल स्टेट पर सीधा असर होता है। इसलिए जब शरीर में आयरन की कमी हो, तो बहुत चिड़चिड़ापन, उदासी या मूडी हो जाना आम बात होती है।

इसके अलावा, अगर हम इसमें थकान को जोड़ दें तो परिणाम समझ में आते हैं। वे कामकाज में हमारे प्रदर्शन की समस्याओं से लेकर पढ़ाई पढ़ाई-लिखाई और रोजमर्रा के कार्यों को पूरा करने से जुड़े हो सकते हैं। ध्यान दें कि क्या सबकुछ ही गड़बड़ हो रहा है और आप अपनी एक्टिविटी पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं।

लोहे की कमी का स्मृति और एकाग्रता पर नेगेटिव असर होता है। आपको हर चीज में दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। आप जल्दी ही अपनी प्रेरणा खो देते हैं, यहाँ तक कि अपने पसंदीदा कामों में भी।
3. अवर्णता या पैलर ( Pallor)

जब आपको एनीमिया हो, तो आपकी त्वचा का सामान्य से अधिक पीलापन या सफेदी लिए होने की संभावना होती है। कारण यह है कि डर्मिस और म्यूकोसा दोनों ही ऊतक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं ले पाते हैं। कुछ लोगों की आँखों नीचे एक सफेद रंग भी दिख सकता है (जहां पलकें शुरू होती हैं)।


इसे भी पढ़ें : जानना चाहती हैं, अपने बालों के पतले हो जाने का कारण? खानपान में बदलाव करके राहत पायें
4. चक्कर आना और मतली (Dizziness and nausea)


आयरन की कमी और सेल्स को मिलने वाली ऑक्सीजन की मात्रा में कमी के परिणामों में से एक है, लगातार चक्कर आना। इसके अलावा, सांस लेने की कोशिश करते समय आपको हवा की कमी महसूस हो सकती है। आप तेजी से और ज्यादा बार (polypnea) हवा अन्दर ले सकते हैं।

ज्यादा गंभीर मामलों में, जो लोग इस पोषक तत्व का पर्याप्त मात्रा में सेवन नहीं करते, वे दिन के किसी भी समय बेहोश हो सकते हैं। उन्हें कानों में रिंगिंग सुनाई पड़ सकती है या लिपोडिस्ट्रोफी (lipodystrophies) से पीड़ित हो सकते हैं।
5. धकधकी (Palpitations)

जब आप ज्यादा मेहनत न कर रहे हों, या एक्सरसाइज नहीं कर रहे हों, तो ऐसे में तेजी से दिल का धड़कना (Palpitations) आयरन की कमी का परिणाम हो सकता है।

शरीर में रक्त संचालन ठीक से न होने पर कार्डियक सिस्टम प्रत्येक अंग में इसे भेजने के लिए कड़ी मेहनत करता है। टैकीकार्डिया (Tachycardia), एरिद्मिया (arrhythmia) या यहाँ तक कि मायोकार्डियल रोधगलन (myocardial infarction) अर्थात हार्ट की दीवारों की बीच वाली परत मायोकार्डियम में टिशू की क्षय हो सकती है।
6. नाजुक और टूटते नाखून और बालों का झड़ना

यदि आपके नाखून आसानी से टूट रहे हैं, बहुत पतले हो गए हैं, क्यूटिकल के पास सफ़ेद निशान हैं, तो इसका कारण खून में लोहे की कमी भी हो सकती है। बालों के झड़ने का कारण सिर में खून का कम मात्रा में पहुंचना है। इसलिए यह हेयर फॉलिकल का पोषण नहीं कर पाता।

जैसा कि आप देख सकते हैं, आयरन की कमी के कई गंभीर परिणाम होते हैं। इसलिए आपको भोजन में पर्याप्त आयरन लेने की कोशिश करनी चाहिए।





जानें लिपेडेमा नाम की गंभीर बीमारी के बारे में
इस बीमारी का मोटापे से कोई लेना-देना नहीं होता। कुछ लोग इसे सेल्युलाइटिस समझने की भूल भी कर बैठते हैं। पर दरअसल लिपेडेमा नाम की इस दर्दनाक और गंभीर अवस्था का वास्तविक कारण तो अभी भी एक राज़ ही बना हुआ है।
0शेयर किया गया 

सपाट पेट पाने के लिए रात को अपनाएं ये 9 आसान-सी आदतें
इस नेचुरल शेविंग क्रीम से बिना केमिकल के शेव कीजिये
एटिपिकल डिप्रेशन: सबसे मुश्किल डायग्नोसिस वाले रोगों में से एक


लिपेडेमा (जिसे “पेनफुल फैट सिंड्रोम” के नाम से भी जाना जाता है) मुख्य रूप से महिलाओं में पाया जाने वाला एक स्थायी रोग होता है। इस बीमारी में हमारे कूल्हों के पास चरबी की एक अनुपातहीन मात्रा जमा होने लगती है।

सेल्युलाइटिस या “लव हैंडल्स” के विपरीत, यह बीमारी आपकी पिण्डलियों और टखनों तक भी फ़ैल सकती है। इसकी वजह से आपके शरीर में बहुत तेज़ दर्द होता है।

इस बीमारी से पीड़ित लोगों को अपनी खूबसूरती में लगे इस दाग के साथ-साथ उसके मनोवैज्ञानिक प्रभावों से भी जूझना पड़ता है। अचानक ही, बिना किसी स्पष्ट कारण के उनके कूल्हों और टांगों का आकार इतना बढ़ जाता है कि उनके लिए चलना-फिरना दूभर हो जाता है।

पुरुषों में लिपेडेमा इतना आम नहीं है। हाँ, कुछ मामलों में वह उनके चेहरे के आसपास काफ़ी सूजन पैदा कर देता है।

यहाँ हम यह भी साफ़ कर देना चाहेंगे कि इस बीमारी को मोटापा समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए। इस अवस्था में रोगी के खान-पान और जीवन-शैली का उसके शरीर में होने वाले चरबी के अत्यधिक जमाव से कोई लेना-देना नहीं होता।

यह तो काफ़ी तेज़ दर्द पैदा करने वाली एक आनुवंशिक बीमारी होती है।

लिपेडेमा से जूझते लोगों को इस बीमारी के बारे में जानकारी देने की उम्मीद से आज हम इस बारे में आपके साथ कुछ बातें साझा करना चाहेंगे।
लिपेडेमा वाली ज़िन्दगी: एक दैनिक चुनौती


माँ बनने तक 29 वर्षीय सारा का जीवन किसी साधारण महिला जैसा ही था। माँ बनने के बाद, अपने बच्चे की देखभाल करते-करते गर्भावस्था के दौरान बढ़े अपने वज़न को कम करने के लिए उन्होंने एक सख्त डाइट का पालन करना शुरू कर दिया।

लेकिन अगले कुछ महीनों के दौरान उनके शरीर में कुछ असामान्य-से बदलाव आने लगे।

उनकी कमर, धड़ और बाज़ुयें पतली होकर अपने पुराने आकार में वापस आ गईं। लेकिन उनके कूल्हों और टांगों पर जमा होती चरबी तो जैसे रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी।

डेढ़ साल बाद उनका चलना-फिरना भी दूभर हो चुका था। नतीजतन उन्हें मजबूर होकर व्हीलचेयर का इस्तेमाल करना पड़ा।

जल्द ही डॉक्टरों की समझ में आ गया कि उन्हें लिपेडेमा हो गया था। इस बीमारी के बारे में सारा ने पहले कभी सुना तक नहीं था।

उनकी ज़िन्दगी पूरी तरह से बदल चुकी थी।

बदकिस्मती से, इलाज के काफ़ी सीमित विकल्प मौजूद होने की वजह से कुछ कम्प्रेशन उपकरण व हल्की-फुल्की कसरत उन्हें दिए जाने वाले एकमात्र उपचार थे।

उनके सामने लिपोसक्शन का विकल्प भी खुला था। यह और बात थी कि उस विकल्प के लिए उनके पास पैसे नहीं थे।

वैसे भी, डॉक्टरों ने यह साफ़ कर दिया था कि उनका लिपेडेमा जल्द ही लौट आएगा, जिसका मतलब था कि उनकी टांगों का वज़न दुबारा बढ़ना तय था।

सारा इस बात से भलीभांति वाकिफ़ थी कि अपने बच्चे का ख्याल रखने के लिए उन्हें किसी की मदद लेनी पड़ेगी व हो सकता है कि उन्हें कोई और नौकरी भी ढूंढनी पड़े। आज, शीशे में दिखाई देने वाला उनका प्रतिबिंब एक बदली हुई महिला का है, जिसे अपनी वर्तमान अवस्था को स्वीकार कर उसकी मदद करने का कोई रास्ता खोज निकालना होगा।


इसे भी पढ़ें : फाइब्रॉइड के 7 चेतावनी सूचक संकेत
लिपेडेमा आख़िर क्यों होता है?

सुनने में यह बात भले ही कितनी भी अजीब क्यों न लगे पर लिपेडेमा और टांगों, बाज़ुओं या (पुरुषों के संदर्भ में कहें तो) चेहरे में चरबी के इस अत्यधिक जमाव के कारणों के बारे में कोई भी स्पष्ट और विषयपरक अध्ययन मौजूद नहीं हैं।

यह माना जाता है कि इसके पीछे आनुवंशिक कारणों का हाथ होता है व कुछ मेटाबोलिक, सूजन पैदा करने वाले और हॉर्मोनल कारण भी इसके लिए ज़िम्मेदार हो सकते हैं।
इसके लक्षण क्या-क्या होते हैं?

चरबी का यह असामान्य जमाव आमतौर पर युवावस्था में, गर्भावस्था के बाद या यहाँ तक कि मेनोपॉज के दौरान भी शुरू हो सकता है।

इसके रोगियों को दिखाई देने वाले सबसे शुरुआती लक्षण ये होते हैं:
आराम करते, चलते या उसे स्पर्श करते वक़्त हमारे सॉफ्ट टिशू में होने वाला दर्द।
कमर से घुटनों या टखनों तक लिपेडेमिक चरबी का आकस्मिक जमाव। हाँ, रोगियों के पैरों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।
गांठों या छोटी-छोटी थैलियों में जमा होकर वह चरबी उनके जोड़ों पर इतना दबाव डालती है कि सामान्य रूप से चल-फिर पाना भी उनके लिए एक नामुमकिन-सा काम हो जाता है।
उनकी त्वचा अपना लचीलापन खो बैठती है।
उस पर चोट और सूजन के निशान दिखाई देने लगते हैं।

इस पहली स्टेज के कुछ महीने बाद मरीज़ को ये लक्षण दिखाई देने लगते हैं:
लगातार ठंड लगना।
थकान।
उनकी त्वचा रबड़ जैसी होने लगती है।
स्थायी दर्द और चलने में आने वाली बढ़ती दिक्कतें। इसके साथ ही उन्हें अपने शरीर के बदसूरत हो जाने से पैदा होने वाली समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है, जो निराशा, गुस्से और दुःख जैसी भावनाओं को तब तक पोषित करती रहती हैं, जब तक कि वे डिप्रेशन में न बदल जाएँ।


इसे भी पढ़ें : 7 पॉजिटिव बातें, इन्हें हर दिन दोहरायें
क्या लिपेडेमा का कोई इलाज होता है?

जैसाकि हमने आपको बताया था, लिपेडेमा का ख़राब आहार या अस्वस्थ जीवन-शैली से कोई नाता नहीं होता।

यह तो दरअसल एक स्थायी रोग होता है, जो आपकी चाल को सीमित कर आपके शरीर में कमज़ोरी पैदा कर देता है। इसीलिए इसके उपचार को बड़ा और हरेक रोगी की ज़रूरत के अनुसार होना चाहिए। ज़ाहिर है कि लिपेडेमा के इलाज के दौरान इस बीमारी के मनोवैज्ञानिक पहलू को भी नज़रंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।

डाइट करने और व्रत रखने से इस समस्या का कोई समाधान नहीं होता। आपके शरीर में मौजूद अत्यधिक चरबी का किसी भी दवा से कोई उपचार भी नहीं किया जा सकता।

आज के ज़माने में इसके सबसे आम इलाज हैं:
चरबी को “बहाने” और हटाने वाले कम्प्रेशन उपकरण।
मैन्युअल लिम्फैटिक ड्रेनेज पर केन्द्रित मालिशें।
प्रेसोथेरेपी।
शॉक वेव्स।
मेसोथेरेपी।
रेडियो वेव थेरेपी।
लिपोसक्शन। ध्यान रहे कि लिपोसक्शन हमेशा कारगर नहीं होता। यह कोई स्थायी समाधान नहीं होता व कई मामलों में इससे आपकी हालत बद से बदतर भी हो सकती है।
तैराकी करके कई रोगियों को कमाल के नतीजे प्राप्त हो रहे हैं।

हरेक रोगी की हालत के हिसाब से उसके लिए सही रणनीति खोज निकालना ही इस समस्या का बुनियादी समाधान होता है। रोगियों को अपनी परेशानी के हल के बारे में सोचते वक़्त उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। इस अवस्था का अभी भी कोई रामबाण उपाय मौजूद न होने की वजह से फ़िलहाल अपने शरीर में आए बदलावों को स्वीकार कर लेने से आपका मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य ठीक बना रहता है।

खाली पेट अदरक का पानी पीने के 7 अद्भुत फायदे

हालाँकि यह अपने एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है, अदरक आपके पाचन की तंदरुस्ती के लिए भी बहुत अच्छा है। यह आपकी रोग प्रतिरोधी क्षमता को ताकतवर बनाता है। ज़रा आजमाकर देखिये!
0शेयर किया गया 

कपड़ों की दुर्गंध प्राकृतिक तरीकों से कैसे हटाएँ
रीफ्लक्स से राहत पाने के लिए घर का बने चार एन्टैसिड
5 हनी मास्क : इनसे आसानी से झुर्रियाँ घटाएं


अदरक की जड़ एक ऐसी प्राकृतिक सामग्री है जिसका उपयोग पारंपरिक भोजन और दवाओं में सदियों से होता रहा है। दरअसल इसमें आवश्यक पोषक तत्वों और शक्तिशाली कम्पाउंड की भारी मात्रा होती है। कुछ संस्कृतियों में अक्सर पाककला में इसका उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन विभिन्न नेचुरल नुस्खों में यह अनिवार्य सामग्री है। इन कारणों से अदरक का पानी बहुत ही हेल्दी नुस्खा है।

इसके अलावा, अदरक में एनाल्जेसिक (analgesic) और सूजनरोधी गुण (anti-inflammatory properties) होते हैं जो विभिन्न बीमारियों के इलाज में सहायक का काम कर सकते हैं।

वास्तव में एंटीऑक्सिडेंट की अपनी ऊँची मात्रा की बदौलत अदरक को अब कोशिकाओं की क्षति की भरपाई करने और टॉक्सिन यानी विषाक्त पदार्थों को साफ़ करने के लिए सबसे अच्छे सहयोगियों में से एक माना जाता है।

अदरक के बारे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि आप इसे अपने खाने में कई अलग-अलग तरीकों से शामिल कर सकते हैं। साथ ही, खाली पेट इसका सेवन करने से इसके गुण सबसे ज्यादा असरदार होते हैं।

इस आर्टिकल में हम आपको इसका सेवन करने के सात कारणों के बारे में बताएँगे। फिर, हम आपको हर दिन आजमाने के लिए एक आसान नुस्खा देंगे।
1. अदरक का पानी शरीर में खून का प्रवाह सुधारता है


खाली पेट अदरक का पानी पीना एक अच्छी आदत है जो आपके ब्लड सर्कुलेशन में किसी किस्म की समस्या को सुधार सकती है।

इसके मौजूद मैग्नीशियम, जिंक और पोटेशियम सभी उन सूजन वाली प्रक्रियाओं को ठीक करने में मदद करते हैं जो अक्सर ब्लड सर्कुलेशन की समस्याएं पैदा करते हैं।

यह आपकी धमनियों में कोलेस्ट्रॉल को कम करता है, जिससे आपके ह्रदय की सेहत की सुरक्षा में मदद मिलती है।

इस लेख पर जाएँ: 9 संकेत जो आपने विषाक्त पदार्थों से भरे हैं


इसे भी आजमायें : माइग्रेन, पाचन समस्याएं और दर्द से निजात के लिए अदरक का पानी
2. यह स्वस्थ पाचन को बढ़ावा देता है

जो लोग रोज सुबह अदरक का पानी पीते हैं उन्हें अपच और कब्ज की समस्यायें बहुत कम होती हैं।

क्योंकि अदरक में कम मात्रा में ही सही लेकिन फाइबर होते हैं। फाइबर शरीर से कचरे की सफ़ाई करके आँतों को स्वस्थ रहने में मदद करते हैं।

अदरक के प्राकृतिक गुण पेट के अतिरिक्त एसिड और आंतों की गैस पर रोक लगाते हैं।
3. यह द्रव प्रतिधारण (fluid retention) को नियंत्रित करता है



अदरक के पानी के मूत्रवर्धक (diuretic) और सूजनरोधी गुण इसे फ्लूइड रिटेंशन से लड़ने के लिए एक नेचुरल व हेल्दी विकल्प बनाते हैं।

इसे रोज पीने से यह आपके टिशू में पानी जमा होने की समस्या को खत्म कर सकता है। इससे थकान कम होती है और आपका एनर्जी लेवल बढ़ जाता है।
4. अदरक का पानी रोग प्रतिरोधक क्षमता को ताकत देता है

हर दिन अदरक के पानी का सेवन भरपूर पोषक तत्व पाने का एक आसान तरीका है जो आपके शरीर की इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है।

यह अच्छी आदत आपके डिफेन्स सिस्टम को तंदरुस्त रखेगी और सूक्ष्मजीवों और बैक्टीरिया का मुकाबला करने वाले एंटीबॉडी के उत्पादन को उत्तेजित करेगी।

इसे खाली पेट पीने से इन्हें भी रोका जा सकता है:
मूत्र मार्ग में संक्रमण (Urinary tract infections)
खांसी और जुकाम
फ़्लू
योनि का संक्रमण
ऑटोइम्यून रोग


इसे भी आजमायें : जानिए, अदरक का इस्तेमाल करके का पेट की चर्बी कैसे घटायें
5. यह जोड़ों के दर्द से राहत दिलाता है

अदरक का प्रयोग सैकड़ों वर्षों से मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द के लिए नेचुरल ट्रीटमेंट के रूप में किया जाता रहा है।

अदरक के मुख्य तत्वों में जिंजरोल होता है। इसका एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक असर होता है जो दर्द से राहत देता है।
6. यह ऐंठन को रोकने में मदद करता है

जो लोग मांसपेशियों में ऐंठन (cramping) से पीड़ित हैं, उन्हें अदरक के पानी के रूप में एक प्राकृतिक और सुरक्षित नुस्खा मिलेगा।

दरअसल इसमें बड़ी मात्रा में मिनरल होते हैं जो आपके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट को संतुलित रखने में मदद करते हैं और इससे जुड़ी किसी गड़बड़ी को रोकते हैं।

क्या आपकी और अधिक जानने की इच्छा है?
देखें: मांसपेशियों में ऐंठन को कैसे रोकें
7. यह असमय बूढ़ें होने से रोकता है


एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और खनिजों की अपनी उच्च मात्रा की बदौलत अदरक का पानी आपके टिशू पर फ्री रेडिकल्स के नेगेटिव असर का मुकाबला करने के लिए बिलकुल सही ड्रिंक है।

ये पदार्थ किसी किस्म की सेलुलर क्षति को रोकते हैं और कैंसर, अल्जाइमर और अर्थराइटिस जैसी पुरानी बीमारियों को रोकते हैं।

अदरक आपके शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। इसलिए यह आपकी त्वचा को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाती है।
घर पर अदरक का पानी कैसे बनायें?

अदरक का पानी तैयार करना बहुत ही आसान है और इसके लिए किसी भी ऐसी सामग्री की ज़रूरत नहीं है जो महंगी हो या जिसे हासिल करना मुश्किल हो।

इन फायदों को उठाने के लिए आपको दिन में कुछ मिनट खर्च करने होंगे।
सामग्री
ग्रेटेड अदरक की जड़ : 1 बड़ा चम्मच (10 ग्राम)
3 कप पानी (750 मिलीलीटर)
आधे नींबू का रस
ऑर्गनिक शहद : 1 बड़ा चम्मच (25 ग्राम)
तैयारी
सबसे पहले अदरक को तब तक पीसें जब तक कि आपको इसकी बड़े चम्मच भर की मात्रा न मिल जाए। फिर इसे तीन कप पानी के साथ एक बर्तन में डालें।
अब इसे एक उबलने दें और फिर मध्यम आँच पर 15 मिनट गर्म करने के बाद नींबू का रस डालें।
फिर आँच से उतारें और बड़े चम्मच से इसमें शहद मिलाकर परोसें।
इसका एक कप खाली पेट पियें और अगर ज़रूरत हो तो दिन में तीन बार इसे लें।

अब आप अदरक के कई फायदों को जान चुके हैं। यह आपके शरीर के लिए कितनी अच्छी है, यह जान लेने के बाद अगर आप स्वस्थ भी हैं तो इसका सेवन करें।



वजन घटाने वाला अदरक का पानी कैसे बनाएं?
· जून 29, 2018
आपके शरीर में शुगर लेवल को ठीक करने और पाचन प्रक्रिया को दुरुस्त रखने के साथ-साथ अदरक से बना यह पेय आपका वजन कम करने में भी बेहद कारगर है।
4 स्टेप : ये फैट बर्न करने की आपकी क्षमता बढ़ाने में शानदार हैं
आपके मोटापे के 5 कारण जिनका आपकी डाइट से कोई सम्बन्ध नहीं है
अदरक का पानी शरीर का वजन कम करके आपको दुबला-छरहरा रखने में बहुत मदद करता है। वजन घटाने वाला अदरक का पानी दूसरे कई कारणों से भी बहुत उपयोगी है।कई लोगों के लिए वजन घटाना बहुत गंभीर समस्या होती है। संतुलित आहार और रेगुलर एक्सरसाइज की एक सख्त रेजीम को अपनाकर भी लोग अपनी इच्छा के मुताबिक दुबले नहीं हो पाते हैं।ऐसा शरीर में पानी जमा होने के कारण और मेटाबोलिज्म जैसी शारीरिक प्रक्रियाओं के सुस्त होने के कारण हो सकता है। ऐसी परिस्तिथि में ज़्यादा से ज़्यादा पानी पीना चाहिए। पाचन प्रक्रिया में सुधार लाने के साथ-साथ, पानी हमारी किडनी को भी सक्रिय रखता है।किडनी के ठीक ढंग से काम करने पर शरीर में जमा अतिरिक्त पानी आसानी से निकल जाता है। साथ ही साथ शरीर से विषैले पदार्थ यानी टॉक्सिन भी निकल जाते हैं। इससे पेट और कमर के निचले हिस्से में वजन नहीं बढ़ता है।पानी से हमारा पाचन तंत्र तो दुरुस्त रहता ही है, मेटाबोलिज्म में भी तेज़ी आती है।ऐसे कई विकल्प उपलब्ध हैं जिन्हें पानी में मिलाकर हम पानी के प्राकृतिक गुणों में इज़ाफा कर सकते हैं। लेकिन सबसे अधिक फ़ायदा अदरक को पानी में मिलकर पीने से मिलता है। क्या आप वजन घटाने वाला अदरक का पानी कैसे बनाएं, यह जानना चाहेंगे? क्या इसके अन्य गुणों के बारे में भी और अधिक जानना चाहेंगे? हमारे साथ बने रहिए और आगे पढ़ते रहिए।


वजन घटाने में अदरक के फायदे


आश्चर्यजनक ढंग से शरीर में शुगर लेवल को ठीक रखती है

अदरक से शरीर में चीनी की सही मात्रा बनी रहती है। इससे आपका शरीर सुचारू रूप से काम करता है। इस बात से ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता है कि आपने कितनी अदरक का सेवन किया है; इसके सेवन से आपके शरीर में ग्लूकोस का सही स्तर बना रहता है।


पर हाँ, बहुत ज़्यादा या कम मात्रा में सेवन से भी बचें!

चीनी का सही मात्रा में सेवन वजन नियंत्रित रखने की मुख्य रणनीतियों में से एक है। शरीर में ज्यादा चीनी का जमा होना मेटाबोलिज्म की प्रक्रिया को सुस्त कर देता है।

नियमित रूप से वजन घटाने वाला अदरक का पानी पीकर इस समस्या से छुटकारा मिलता है। इसके साथ-साथ, अदरक मधुमेह यानी डायबिटीज होने के खतरे को भी दूर करती है।
अदरक का पानी पीने से पाचनशक्ति में तेज़ी आती हैअदरक के सेवन से शरीर में गैस्ट्रिक एसिड बनते हैं। गैस्ट्रिक एसिड की सहायता से खाए जाने वाले भोजन से हमें पोषण मिलता है और शरीर से विषैले पदार्थ निकाल जाते हैं।अदरक में भरपूर मात्रा में फाइबर भी पाया जाता है। फाइबर से खाना आसानी से पचता है।हमारे लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि किस प्रकार इस पेय के सेवन से हम अपना वजन नियंत्रित रख सकते हैं।
अदरक आपके शरीर की गर्मी को बढ़ाती हैअगर हम कैलोरी की बात करें, तो क्या आपको ऐसा नहीं लगता है कि हमें शरीर में जमा होने वाली चर्बी को कम करने के बारे में सोचना चाहिए?

आपको अपने शरीर के तापमान को इस प्रकार बढ़ाए रखना होगा जिससे शरीर में पानी न जमा हो सके।

हम आपको सलाह देंगे कि आप वजन घटाने वाला अदरक का पानी रात को ही पियें। रात के समय आपका शरीर प्राकृतिक ढंग से अपना तापमान बढ़ाता है। इसके चलते शरीर में सेरोटोनिन लेवल बढ़ता है। इससे आपको बेहतर नींद आती है और भरपूर आराम मिल पाता है।
वजन घटाने वाला अदरक का पानी कैसे बनाएँ?

सामग्री
6 कप पानी (1.5 लीटर)
5 चम्मच घिसी हुई अदरक (50 ग्राम)
2 नींबू का रस
बनाने की विधि
पानी गरम कर लें। जब पानी में उबाल आ जाए तो उसमें अदरक मिला दें।
इसे एक से दो मिनट के लिए पकने दें और फिर ओवन से हटा लें।
इसे 10 मिनट तक ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
इसके बाद इस मिश्रण को छान लें, इसमें नींबू का रस मिलाएं और पी लें।
इस मिश्रण के सबसे अच्छे परिणाम इसका खाली पेट सेवन करने से मिलते हैं।

मनचाहा परिणाम पाने के लिए आपको इसका नियमित सेवन करना होगा। लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है कि इसके फायदे मिलने में कुछ समय लग सकता है। आपको धैर्य बनाए रखना होगा।
हम आपको सलाह देंगे, इस पेय को सुबह खाली पेट पी लें। लेकिन, यदि दिन के किसी दूसरे समय इसका सेवन करना चाहते हैं, तो कोई पाबंदी नहीं है। इसे एक थर्मस में भरकर भी रख सकते हैं और पूरे दिन इसका सेवन कर सकते हैं।इस पेय को अपने रोज़ के खान-पान में शामिल करने से कतराएँ नहीं। अदरक का पेय आपके शरीर की अन्य प्रक्रियाओं को भी संतुलित करता है। तो इस पेय का नियमित सेवन करके क्यों न आप हमसे अपने अनुभव को सांझा करें? 

6 बड़े कारण जो आपको हर रोज केले खाने के लिये मजबूर कर देंगे
केले में बहुत कम कैलोरी होती है। तेजी से वजन घटाने में मदद पाने के लिए वे एक बेहतरीन फल हैं। इसके अलावा उनके और भी कई फायदे हैं। आइये इस आर्टिकल में जानते हैं!
0शेयर किया गया 

शरीफा खाने के 9 लाभ
4 स्टेप : ये फैट बर्न करने की आपकी क्षमता बढ़ाने में शानदार हैं
आपके मोटापे के 5 कारण जिनका आपकी डाइट से कोई सम्बन्ध नहीं है


केले खाना सबको पसंद है। वे स्वादिष्ट होते हैं और आप उन्हें कई खाद्य पदार्थों के साथ भी मिला सकते हैं, जैसे कि शहद, दालचीनी, ओट्स, और मेवे।

केले एथलीटों के भी पसंदीदा फल हैं। एक टुकड़ा केला थकान या ऊर्जा की अस्थायी कमी को पूरा करने के लिए ऊर्जा और पोषक तत्वों की आपूर्ति कर सकता है।


कुछ लोग ग़लती से यह सोचते हैं कि रोज़ाना इस फल को खाने से उनका वजन बढ़ जायेगा। यह बिल्कुल भी सच नहीं है।

आपको तथ्यों को ज्यादा निष्पक्ष रूप से देखने की जरूरत है: रोजाना एक केला, खासतौर पर सुबह के समय, किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुँचाता है और न ही आपके वजन बढ़ने का कारण बनता है।

मुख्य बात हमेशा की तरह संतुलन में है और इस बात को समझने में है कि एक अच्छा जीवन जीने का मतलब सही खान-पान से है।

केले आपके लिए बहुत फ़ायदेमंद होते हैं। इस आर्टिकल में, हम आपको छह बेहतरीन कारण बतायेंगे जो आपको हफ्ते में सातों दिन उन्हें खाने के लिए मना लेंगे।
1. केले सबसे पौष्टिक फलों में से एक हैं

केले बहुत पौष्टिक होते हैं। यह उन्हें नाश्ते के लिए एक बेहतरीन खाद्य बनाता है, जो आपके लिए ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा के साथ दिन की शुरूआत करने का सही समय है।

चलिये, एक केले में मौजूद सभी पोषक तत्वों के बारे में जानते हैं:
बड़ी मात्रा में फाइबर
बहुत सारे एंटीऑक्सिडेंट
मिनरल (पोटैशियम, मैग्नीशियम, कॉपर, मैंगनीज)
विटामिन (B6 और C)
कार्बोहाइड्रेट
प्रोटीन
आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि केले में बहुत सारा पानी और बहुत कम फैट होता है।
2. केले आपका ब्लड शुगर ठीक रखते हैं



केले पेक्टिन से भरपूर होते हैं। यह एक घुलनशील फाइबर है, जो आपके ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है।

यह आपकी भूख को नियंत्रित करने में मदद करता है और पेट खाली होने की प्रक्रिया को धीमा करता है।

अगर आप हल्के पके केले खाते हैं (लेकिन वे पूरी तरह से हरे न हों), तो आप बेहतर तरीके से अपने ग्लाइसेमिक इंडेक्स को नियंत्रित कर सकते हैं।


यह आपको उन शुगर स्पाइक्स से बचने में मदद करेगा जो कभी-कभी दूसरे मीठे फलों से पैदा हो सकते हैं।

लेकिन अगर आपको डायबिटीज़ है, तो बेहतर होगा कि पके केले खाने से बचें।


इसे भी आजमायें : आटा और दूध-दही के बगैर बनाएं पोषण से भरपूर बनाना ब्रेड
3. रोज एक केला पाचन सुधारता है

आपको जानकर खुशी होगी कि एक सामान्य आकार के केले में दो तरह के फाइबर होते हैं: पेक्टिन और स्टार्च (जैसा कि ऊपर बताया गया है)।

ये दोनों कम्पाउंड शानदार तरीके से आपके पाचन में सुधार करते हैं।

उदाहरण के लिए, स्टार्च आपके डाइजेस्टिव सिस्टम से सीधे बड़ी आँत में जाने के लिए “दौड़” लगाता है, जहां यह स्वस्थ इन्टेस्टिनल बैक्टीरिया के लिये भोजन बन जाता है।

ताक़तवर और स्वस्थ फ्लोरा का मतलब सेहत अच्छी होना है: इससे आप पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण करते हैं और कब्ज से बचते हैं।

पेक्टिन भी आपके कोलन की सेहत की सुरक्षा और देखभाल करने में मदद करता है।
4. जी हाँ, केले आपके दिल का भी ख्याल रखते हैं


जब बात ह्रदय के स्वास्थ्य की हो तो पोटैशियम महत्वपूर्ण मिनरल हो जाता है, खासकर आपके ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और संतुलित करने के लिए।

हर दिन एक केला खाने की आदत डाल लें तो आप अपने पोटैशियम के स्तर का ख्याल रख पायेंगे, जो हृदय की सेहत के लिये ज़रूरी है।

यह बात ध्यान में रखने लायक है!


इसे भी आजमायें : सेब के सिरके की मदद से कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर घटाएं
5. क्या आप अपना वजन कम करना चाहते हैं? रोज़ सुबह एक केला खायें

केले में कई विशेष गुण होते हैं जो उसे तेजी से वजन घटाने में मददगार बनाते हैं।

उसकी वजह है:
सबसे पहली बात, केले में बहुत कम कैलोरी होती है।
वे पेट भराऊ और नूट्रिशस होते हैं। बस कुछ प्रोटीन, नट्स और एक कप कॉफी या चाय के साथ उन्हें अपने नाश्ते में शामिल कीजिए आप “भरा हुआ” महसूस करते हैं और पूरी सुबह ऊर्जा से भरे होते हैं।
उनमें भरपूर मात्रा में फाइबर भी पाया जाता है: यह आपके डाइजेस्टिव हेल्थ की देखभाल करता है और आपको कब्ज से बचने में मदद करता है।

एक और दिलचस्प बात जो आप जानना चाहेंगे, वह यह है कि वजन कम करने वाली डाइट में आमतौर पर हरे केले मिलाये जाते हैं।

10 दिन तक उन्हें खाने की कोशिश करें और देखें कि उनका आप पर क्या असर रहता है।
6. अगर आप एक्सरसाइज करते हैं, तो हमेशा अपने बैग में एक केला रखें


केले एथलीटों के लिए सबसे बढ़िया फल होते हैं, ऐसा क्यों? ऐसा इसलिये क्योंकि उनमें मिनरल और कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं जो उन्हें पचाने में आसान बनाते हैं।

एक और मजेदार बात यह है कि रोज़ाना केला खाने से एक्सरसाइज की जाने वाली मांसपेशियों की ऐंठन कम करने में मदद मिल सकती है।

अगर आप एथलीट नहीं हैं, लेकिन लगातार रात को मांसपेशियों की ऐंठन से परेशान हैं, तो अपने रात के खाने में केले (एक हल्का पका केला) को शामिल करने में हिचकिचायें नहीं। ऐंठन से राहत मिलेगी।

इसके अलावा, केले एक्सरसाइज के पहले, एक्सरसाइज के दौरान और बाद में बहुत सारे पोषक तत्व प्रदान करते हैं, खासकर जब आप रेजिस्टेंस ट्रेनिंग ले रहे हों।

याद रखें! जब भी आप दौड़ने के लिए जाते हैं या फिर जिम जाते हैं तो हमेशा अपने साथ एक केला ले जायें।

एक बात हमेशा याद रखना जरूरी है कि कुछ लोग केले खाना पसंद नहीं करते हैं।

अगर आपको लगता है कि हर दिन एक केला खाना आपके लिए बहुत ज्यादा है, तो इसे हफ्ते में कम से कम तीन बार अपने नाश्ते में शामिल करने की कोशिश करें।

आपका स्वास्थ्य आपका आभारी रहेगा!


8 अनूठे फ़ायदे जो आप पा सकते हैं केले के छिलके में
· जुलाई 1, 2018
केले के छिलके में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो विभिन्न बीमारियों से छुटकारा दिलाने में हमारी मदद कर सकते हैं। हम दो तरीकों से इसे उपयोग में ला सकते हैं। हम इसे त्वचा की ऊपरी सतह पर लगा सकते हैं, या फिर इसके अर्क का सेवन भी कर सकते हैं।

कपड़ों की दुर्गंध प्राकृतिक तरीकों से कैसे हटाएँ
रीफ्लक्स से राहत पाने के लिए घर का बने चार एन्टैसिड
5 हनी मास्क : इनसे आसानी से झुर्रियाँ घटाएं


हममें से अधिकतर लोग केले के छिलके को कूड़ा समझ कर हटा देते हैं।

पर यकीन मानिए, जब आपको इसके अनोखे फ़ायदों के बारे में पता चलेगा तो आप हैरान रह जाएँगे!

केला खाने के बाद हम छिलका फेंक देते हैं, लेकिन इसमें कई पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं। ये हमें कई तरह से फ़ायदा पहुंचा सकते हैं।

केले के छिलके इसके गूदे की तरह स्वादिष्ट तो नहीं होते हैं, लेकिन इसमें पाए जाने वाले फाइबर, एंटी-ऑक्सीडेंट और खनिज पदार्थ यानी मिनरल इसे बेहद उपयोगी बना देते हैं।
केले का छिलका एक तरह का प्राकृतिक उपचार है और कई बीमारियों और उनके लक्षणों से जूझने में हमारी सहायता करता है।
यह जलन को रोकने में सक्षम है।
इसके एंटी-माइक्रोबियल गुण बीमारी को बढ़ाने वाले सूक्ष्म जीवों को नष्ट करने में सहायक होते हैं।

हममें से कई लोग इन अनूठे फ़ायदों से अनजान हैं। आज हम आपको इनके बारे में जानकारी देंगे।

तो चलिए, हम आपके साथ केले के छिलके के आठ रोचक उपयोग शेयर करते हैं!
1. केले के छिलके कब्ज़ से लड़ने में मदद करते हैं


हालाँकि केला फाइबर से भरपूर होता है, लेकिन यह याद रखना बहुत ज़रूरी है कि अधिकांश फाइबर छिलकों में पाया जाता है।
इसके सेवन से आंतें सुचारू रूप से अपना काम करती हैं।
यह पाचन प्रक्रिया में भी मदद करता है।
इस प्रकार कब्ज़ की परेशानी से छुटकारा मिल सकता है।

आप इसे केले के गूदे में घोट लें और इस मिश्रण का सेवन करें।
2. मस्से को हटा सकते हैं केले के छिलके
केले के छिलके का अंदरूनी सफ़ेद हिस्सा फाइबर, एंटी-ऑक्सीडेंट और एसिडिक पदार्थों से समृद्ध होता है।
ये सभी पदार्थ त्वचा का pH लेवल नियंत्रित रखते हैं।
इनसे शरीर पर दिखने वाला भद्दा मस्सा भी हटाया जा सकता है।

मस्सा हटाने के लिए केले के छिलके को मस्से के ऊपर रखें और फिर किसी टेप की सहायता से उसे वहां चिपका दें।

ऐसा रोज़ रात को तब तक करते रहें जब तक मस्सा पूरी तरह से हट न जाए।
3. कीड़ों के काटने पर होने वाले दर्द से छुटकारा

जलन की रोकथाम करने में सक्षम और ठंडक पहुँचाने वाले गुणों से भरपूर यह प्राकृतिक उपचार कीड़े के काटे घावों पर भी अपना असर दिखाता है।
इसे घाव पर लगाने से तकलीफ में राहत मिलती है और खुजली और लाली में भी कमी आती है।

जिस जगह पर कीड़े ने काटा हो वहाँ इसे लगाएँ। आपको जल्द ही आराम मिलेगा।
4. शरीर में पानी जमा होने से रोकता है

केले के छिलके के अन्दर पोटैशियम पाया जाता है।
पोटैशियम से शरीर का तापमान सही रहता है और शरीर में पानी जमा होने की समस्या से छुटकारा मिलता है।
इससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट लेवल नियंत्रित रहता है।
साथ ही, में मांसपेशियों और जोड़ों में सूजन कम होती है।

केले के छिलके से तैयार किये गए मिश्रण को नियमित रूप से दिन में 2-3 बार पियें।
5. स्वस्थ कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम



यकीन करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन यह आपके ह्रदय के स्वास्थ्य की देखभाल करने में भी सक्षम है।
इसमें मौजूद प्राकृतिक फाइबर धमनियों में कोलेस्ट्रॉल को जमा होने से रोकते हैं।
इसमें मौजूद फॉस्फोरस रक्तचाप को भी नियंत्रित करता है।

इसके छिलके से तैयार की गई चाय का हफ्ते में कम से कम 3 बार सेवन करना चाहिए।
6. मुहाँसो की रोकथाम करता है
केले के छिलके में पाए जाने वाले ऑर्गेनिक एसिड शरीर के pH लेवल को नियंत्रित रखते हैं और मुहाँसों को उभरने से रोकते हैं।
यह छिद्रों में बनने वाले अतिरिक्त सेबम को हटाता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव के कारण दाग-धब्बों के आकार में कमी आती है।

केले के छिलके का अंदरूनी सफ़ेद हिस्सा लें और चेहरे पर हर प्रभावित जगह पर लगा लें।

इसे 15 मिनट तक लगे रहने दें। इस प्रक्रिया को रोज़ दोहराएँ।
7. चोट से छुटकारा दिलाता है



अगर चोट लग गई है और आपकी त्वचा पर उसके निशान हैं, तो केले के छिलके से आपको आराम मिल सकता है।
केले के छिलके उस प्रभावित जगह के रक्त प्रवाह में सुधार लाते हैं, और कोशिकाओं में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाकर चोट को ठीक करने में मदद करते है।

जहां पर चोट लगी है वहां केले के छिलके को रगड़ कर उसे ऐसे ही छोड़ दें।

एक अन्य विकल्प के रूप में आप इनके छिलकों से बनी चाय का सेवन करके भी अपनी चोट को ठीक कर सकते हैं।
8. सिरदर्द में आराम दिलाता है

अगर आपके सिर में दर्द है तो केले के छिलके से बहुत आराम मिल सकता है।
इसमें मौजूद सभी ज़रूरी मिनरल, फाइबर और एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर में रक्त के प्रवाह को ठीक करते हैं।
ये सिरदर्द से जुड़े ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं।

केले के छिलके के अंदरूनी सफ़ेद हिस्से को अपने सिर और गरदन पर लगाएँ।

इसे 15 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें।

यह तो निश्चित है कि केले के छिलकों के इतने सारे फायदों के बारे में जानने के बाद आप इन्हें प्राकृतिक उपचार के तौर पर उपयोग में लाना शुरू कर देंगे।

कोशिश करके इन्हें ताज़ा ही इस्तेमाल करें। फ्रिज में रखे छिलके अपने प्राकृतिक गुण खो सकते हैं।

उम्मीद है, आप इस ट्रीटमेंट का भरपूर लाभ उठाएँगे।



जानिए, अदरक का इस्तेमाल करके का पेट की चर्बी कैसे घटायें
· सितम्बर 14, 2018
फैट घटाने के लिए अदरक के थर्मोजेनिक गुणों का फायदा उठाने के साथ-साथ, आप इसे दूसरी चीजों के साथ भी जोड़ सकते हैं जिससे आपको शरीर में मौजूद टोक्सिन पदार्थों को खत्म करने और वजन घटाने में मदद मिलेगी
0शेयर किया गया
शरीफा खाने के 9 लाभ
4 स्टेप : ये फैट बर्न करने की आपकी क्षमता बढ़ाने में शानदार हैं
आपके मोटापे के 5 कारण जिनका आपकी डाइट से कोई सम्बन्ध नहीं है


इसमें कोई शक नहीं है कि पेट शरीर के उन हिस्सों में से एक है जहां फैट जमा होता है। हालाँकि, इससे बचने के लिये कई सारे तरीके पहले से मौजूद हैं, लेकिन बहुत से लोग उस तरह की कोशिश ही नहीं करते हैं जो उन्हें स्लिम और फिट रहने के लिए चाहिये होती है।

इस समस्या से निपटने का तरीका ये है कि आप अपनी डाइट, एक्सरसाइज और दूसरी स्वस्थ आदतों की मदद से अपने मेटाबोलिज्म को बढायें।

इसके अलावा, आपके शरीर की सफाई करना और फैट तथा शुगर को पचाने वाले अंगों जैसे लीवर, के काम करने की रफ़्तार को बढ़ाना भी जरुरी है।

आपको यह जानकर अच्छा लगेगा कि आपके शरीर को टोक्सिन से निजात दिलाने और पेट की चर्बी से लड़ने में मदद करने के लिये कुछ नेचुरल तरीके मौजूद हैं।

उन सब में आपको अदरक की जड़ मिलेगी, जो अपने खुशुबूदार गुणों और खाना पकाने में होने वाले तरह-तरह के इस्तेमालों के लिए जानी जाती है।

आज हम पेट की चर्बी से छुटकारा पाने के लिए अदरक के फायदों, और इसे खाने में इस्तेमाल करने के अलग-अलग तरीकों के बारे में जानकारी शेयर करना चाहते हैं।
पेट की चर्बी से मुकाबला करने में अदरक आपकी मदद कैसे करता है?



अदरक एक जड़ी-बूटी है जिसका इस्तेमाल सदियों से स्वास्थ्य पर असर डालने वाली अलग-अलग तरह की समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता रहा है।

इसमें एंटी-इन्फ्लैमटॉरी और एंटीऑक्सिडेंट गुण मौजूद होते हैं जो आपके पाचन और कोलेस्ट्रॉल लेवल की कमी को सुधारने में मदद करते हैं, तथा शरीर में बनने वाले टोक्सिन को खत्म करते हैं।

दशकों पहले ही इसे नुस्खों में शामिल किया जा चुका है, इसके वजन घटाने और शरीर को शुद्ध बनाने वाले गुणों के लिए धन्यवाद।


खाने में अदरक का इस्तेमाल आपके मेटाबोलिज्म को बढाता है और पाचन में सुधार करता है ताकि आप पेट के मोटापे से मुकाबला कर सकें।

अदरक में मूत्रवर्धक गुण भी होते हैं जो शरीर में रुके हुये यूरिन को बाहर निकालने और उसकी वजह से होने वाली जलन को ख़त्म करने में मदद करता है।

अदरक का एक और सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें ज्यादा कैलोरी नहीं होती हैं और इसके गुणों को बढ़ाने के लिए इसे दूसरी चीजों के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

हम आपके साथ कुछ नुस्खे शेयर करना चाहते हैं जो इसके गुणों का फायदा लेते हुये आपके स्वस्थ आहार को पूरा करते हैं।
पेट के मोटापे से लड़ने के लिए अदरक का इस्तेमाल कैसे करें
अदरक को लेने का सबसे आम तरीका इसकी जड़ों का काढा बनाकर इस्तेमाल करना है। हालांकि, ज्यादा अच्छे नतीजों के लिए, आप नेचुरल तरीके से फैट जलाने वाली दूसरी चीजों को भी इसके साथ मिला सकते हैं।
अदरक और लेमन टी (Ginger and lemon tea)



नींबू के रस में विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो लिवर को साफ करने और फैट के पाचन को बेहतर करने के लिये अदरक के गुणों को बढ़ा देते हैं।

इनसे आप एक चाय तैयार कर सकते हैं जो डेटॉक्स को बढ़ाती है और फालतू पानी को शरीर से बाहर निकालने का काम करती है, जिससे पेट के फैट से छुटकारा दिलाने वाली डाइट को मदद मिलती है।
जरुरी चीजें
आधा टुकड़ा नींबू का रस
1 टुकड़ा अदरक की जड़
1 कप पानी (250 मिलीलीटर)
शहद ( वैकल्पिक)
बनाने का तरीका
एक कप पानी गर्म करें, और उबलने से ठीक पहले, इसमें अदरक की जड़ का टुकड़ा डाल लें।
आंच से हटाने और नींबू का रस मिलाने से पहले कुछ मिनट तक इसे धीमी आंच पर उबालें।
अच्छी तरह से हिलायें और अगर जरुरत हो, तो मीठा करने के लिए इसमें थोड़ा शहद मिला दें।
खाने से पहले एक कप चाय पी लें।
मौसमी और अदरक का रस (Grapefruit and ginger juice)

मौसमी एक कम कैलोरी वाला फल है और अगर बात करें वजन घटाने की तो इसके शानदार फायदे देखने को मिलते हैं।

यह एक स्वादिष्ट फल है और जब आप इसे अदरक के साथ किसी नेचुरल जूस में मिलाते हैं तो यह अदरक के मसालेदार स्वाद के साथ अच्छा मिश्रण बनाता है।
जरुरी चीजें
4 बड़े मौसमी
1 चम्मच अदरक की जड़ (3 ग्राम)
1/4 नींबू का रस (वैकल्पिक)
बनाने का तरीका
चार बड़े मौसमी का रस निचोड़ें और एक चम्मच अदरक की जड़ और नींबू के रस के साथ मिलाएं।
सुबह जितनी जल्दी हो सके खाली पेट पर इसे पी लें।
अदरक के साथ ग्रीन टी (Green tea with ginger)


ग्रीन टी अपने एंटीऑक्सिडेंट्स और वजन घटाने वाले चमत्कारी गुणों के लिए जानी जाती है।ग्रीन टी पीने से आपके फैट को जमा होने से रोकने, कोलेस्ट्रॉल लेवल को काबू में रखने, और आपके पाचन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

इस ड्रिंक को थोड़े-से अदरक की जड़ के साथ मिलाकर लेने से आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और कम समय में अपने फिगर को ट्रिम करने का एक शानदार तरीका पा सकते हैं।
जरुरी चीजें
1 बड़ा चम्मच ग्रीन टी (10 ग्राम)
1 टुकड़ा ताजा अदरक
1 कप पानी (250 मिलीलीटर)
बनाने का तरीका
पानी उबालें, उसमें अदरक डालें, और कुछ मिनट तक उबलने दें।
आंच से निकाल लें और ग्रीन टी मिलायें।
इसे 10 मिनट तक भीगने दें और फिर इस चाय को पी लें।
आप हर दिन दो कप तक चाय का मज़ा ले सकते हैं।
आप इन नुस्खों का इस्तेमाल कितनी बार कर सकते हैं?

ऊपर बताये गये नुस्खों का पूरा-पूरा फायदा लेने के लिए, हम आपको सलाह देते हैं कि आप उनका इस्तेमाल एक महीने तक लगातार करें। फिर इसके बाद, उन्हें 15 दिन तक पीते रहें और 15 दिन छोड़ दें।

याद रखें,अगर आप कोई एक्सरसाइज नहीं करते हैं और अपनी डाइट में सुधार नहीं करते हैं, तो आपको इनका कुछ भी असर नहीं दिखाई देगा।







7 एक्सरसाइज कुछ ही दिनों में कमर ट्रिम करने वाली
· जुलाई 29, 2018
हमारी कमर को ट्रिम करना आसान काम नहीं है। फैट कम करना हमारे खान-पान और एक्सरसाइज पर निर्भर करता है।

इस नेचुरल शेविंग क्रीम से बिना केमिकल के शेव कीजिये
5 कुदरती उपाय : इनसे अपनी गर्दन की झुर्रियाँ हटायें
इन 5 कुदरती नुस्खों की मदद से अपने रोमछिद्रों को कम करें


हालांकि, हमारे पेट पर और उसके आसपास की चर्बी कम करना हमारे शरीर के दूसरे हिस्सों की चर्बी कम करने के मुकाबले कहीं ज्यादा कठिन होता है। आज की पोस्ट में हम 7 ऐसी एक्सरसाइज बताएंगे, जिससे आपकी आपके लिए अपनी कमर को ट्रिम करना काफ़ी आसान हो जाएगा।
ये लव हैंडल क्यों बनते हैं?

दो मुख्य कारक जो शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने के लिए जिम्मेदार होते हैं वो हैं आहार और एक्सरसाइज। फिर भी कुछ ऐसी अन्य वजहें भी हैं जो उन बदनाम और अनचाहे लव हैंडल (कमर के दोनों ओर की चर्बी)के लिए ज़िम्मेदार होती हैं।


ये अंदरूनी अंगो के कार्यों, तनाव या हार्मोनल समस्याओं की वजह से हो सकते हैं। नीचे कमर को ट्रिम करने के लिए 7 कारगर एक्सरसाइज बताई गयी हैं।
7 कमर पतली करने वाले व्यायाम (7 waist trimming exercises)
1. प्लैंक्स


प्लैंक्स अधिक से अधिक लोकप्रिय होता जा रहा है। हालांकि यह पूरी तरह पेट पर केंद्रित होता है, फिर भी इस एक्सरसाइज के दौरान पूरे शरीर की मांसपेशीयों को महसूस किया जा सकता है।
जैसा कि इस पोस्ट में कहा गया है, प्लैंक जमीन से नीचे की और मूंह करते हुए पैर की उंगलियों से शरीर के वजन को सपोर्ट करते हुए शुरू करना है।
इस एक्सरसाइज को ठीक से करने के लिए पूरे शरीर को एक सीध में होना चाहिए।

यह एक्सरसाइज वास्तव में प्रतिरोध का एक परीक्षण है । इसलिए समय के साथ एक सत्र में आपको अपने सेट और अवधि में बढ़ोत्तरी करनी चाहिए।
2. माउंटेन क्लाइम्बिंग

प्लैंक से आप अपने चयापचय या मेटाबोलिज्म को बढ़ा सकते हैं और केवल एक ही आसान एक्सरसाइज से अपने कमर पर जमा हुई चर्बी को घटा सकते हैं।
उसी स्थिति में रहते हुए ऐसी कोशिश करें जैसे आप दौड़ रहे हैं या ऊँचाई पर चढ़ रहे हैं।
ऐसा करने के लिए, अपने घुटनों को अपनी कोहनी तक एक निरंतर गति में लाएं।
यह एक्सरसाइज बहुत अच्छी है क्योंकि यह टोनिंग और कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज दोनों को जोड़ती है।


इसे भी पढ़ें:

15 मिनट की फैट बर्निंग रूटीन: तुरंत घटेगा फैट
3. ट्रंक ट्विस्ट



यदि आप एक पतली कमर चाहते हैं, तो आपको अपने धड़ को दोनों साइड से जितना मुमकिन हो उतना लचीला रखना चाहिए और उन्हें लगातार हिलाते डुलाते रहना चाहिए।
ऐसा करने के लिए, आपको अपने पूरे धड़ को खींचना होगा जैसे कि आप ऊपर से कुछ उठा रहे हैं।
आप इस एक्सरसाइज को कुर्सी पर बैठकर और अपनी बाहों को फर्श की ओर खींचकर भी कर सकते हैं जैसे कि आप कुछ पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
जब भी संभव हो, दिन में कई बार दोनों तरफ से आप इस एक्सरसाइज को दोहराएं।
4. हॉरिजॉन्टल ट्विस्ट

कमर को गति में रखने के लिए आप हॉरिजॉन्टल ट्विस्ट कर सकते हैं। खुद को ट्विस्ट करें जैसे अपने कूल्हों को बिना घुमाए पीछे की तरफ मुड़ रहे हों।

हम इस एक्सरसाइज को अपने कमर पर अपने हाथ रखकर या इलास्टिक बैंड के इस्तेमाल से कर सकते हैं। साथ ही कुछ जिमों में, इस एक्सरसाइज को करने के लिए ख़ास मशीनें होती हैं।
5. नीज़ टू एल्बोज़ (Knees to elbows)


अपने सिर के पीछे अपने हाथों को रख खड़े हो जाएं और अपने पैरों को थोड़ा अलग कर दें, अपने घुटनों को विपरीत कोहनी की ओर उठाएं। इस एक्सरसाइज को दोहराएं, दोनों तरफ बारी-बारी से करें।

यह काफ़ी हद तक ऊपर दी गयी एक्सरसाइज जैसा ही है, लेकिन इसमें लेट कर छत की ओर देखना है। नीचे लेटकर इस एक्सरसाइज को करने से आपके पेट का और अधिक व्यायाम होगा।


6. कूदना या जंपिंग

सबसे जिद्दी और मोटे हिस्सों की चर्बी कम करने के लिए आपको कुछ प्रकार के कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज करना चाहिए। चर्बी को कम करने के लिए पेट या ऐब्सएक्सरसाइज काफ़ी नहीं हैं। बल्कि वे ढीली डील-डौल को ठीक करने के लिए मददगार होते हैं।
चर्बी को गलाने के लिए, आप एक आसान लेकिन थकानेवाली एक्सरसाइज कर सकते हैं जैसे कि कूदना। आप रस्सी (स्किपिंग रोप) से कूद सकते हैं, एक ट्रैमपोलिन पर कूद सकते हैं या बस ऐसे ही कूद सकते हैं।
हालांकि, आपको अपनी पीठ को सीधी रखते हुए और अपने घुटनों को मोड़ते हुए हमेशा अच्छी मुद्रा या पोस्चर के साथ कूदना चाहिए ।
हमेशा धीमी उछाल के साथ कूदें, जैसे कि आप किसी नरम सतह पर लैंडिंग कर रहे थे।
7. बैली डांसिंग



अंत में, हम कमर की हलचल पर टिके एक डांस का जिक्र करना भूल नहीं सकते। बेली डांस एक पारंपरिक मध्य पूर्वी डांस है, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों में लचीलेपन की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए जाना जाता है ।मुख्य भाग श्रोणि या पेल्विस है, जो कमर और कूल्हों, आदि की गतिविधियों को नियंत्रित करता है।

बेली डांस एक्सरसाइज का एक लोकप्रिय रूप है जिसमें मांसपेशीयों की टोनिंग और कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज का मेल शामिल है।

आप लचीलेपन में सुधार कर, पेट की मांसपेशियों को मजबूत कर और ख़ास तौर पर साप्ताहिक डांस कर के अपने कमर को ट्रिम करने में कामयाब होंगे ।

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.