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गाय के पेशाब के फायदे & गौमुत्र के लाभ


गाय के पेशाब के फायदे & गौमुत्र के लाभ
गौमुत्र से लाभ
वैसे तो हिन्दू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया जाता हैं , यहाँ तक कि गाय के गोबर की पूजा भी की जाती है । भारत के लोग गाय के पेशाब और गोबर को बहुत ही पवित्र मानते हैं । लेकिन जब बात गौ मूत्र को पीने की आती है , तो बहुत सारे लोग अपना मुँह बना लेते है ।
किसी अमृत से कम नहीं, महौषधि है गौमूत्र – Gomutra Ke Labh Hindi me

जी हाँ , ये बात बिलकुल सही है कि हर इंसान और शायद आप भी गौ मूत्र पीने से इनकार करते होंगे । लेकिन शायद आप ये भूल जाते है कि इसके फ़ायदे कितने होते हैं ।


अगर एक इंसान रोजाना सही मात्रा में गौ मूत्र पीता है तो उसे दिल की बीमारी , मधुमेह , कैंसर , टीवी , एड्स , माइग्रेन आदि कभी नहीं हो सकती हैं ।


गौ मूत्र स्वाद में गर्म , कसैला और कड़क जैसा जरूर लगता हैं , लेकिन ये जहर नाशक , जीवाणु नाशक और जल्दी ही पचने वाला होता है ।
गाय मुत्र का उपयोग Gomutra Chikitsa in Hindi
आयुर्वेद की माने तो गौ मूत्र सेहत का खजाना हैं , ये सभी रोगों का नाश करता है । आयुर्वेद के अनुसार हमारे बॉडी के अंदर तीन दोषो की कमी बीमारियाँ होती हैं , लेकिन गौ मूत्र ये कमी पूरी कर देता है और हमारे शरीर को बिल्कुल सवास्थ्य रखता है । सबसे बड़ी बात तो यह है ये कभी ख़राब भी नहीं होता है , इसे आप काफी लम्बे समय तक भी रख सकते हैं । आयुर्वेद में गौ मूत्र से ही दवाइयाँ बनाई जाती हैं । यहाँ तक कि आयुर्वेद कहता हैं कि किसी अमृत से कम नहीं , महौषधि हैं गौ मूत्र !!!


ठहरिए! चाय के साथ तला-भुना खाना हो सकता है सेहत के ल‍िए खतरनाक,ये खाने से भी बचें

हम में से कई लोग की सुबह चाय के बगैर हो भी नहीं सकती है। कुछ लोग चाय के इतने बड़े शौकीन होते हैं कि जब तक पेट में दो से चार कप चाय की न उड़ेल दे तो उनसे कोई काम नहीं होता है। पूरे द‍िन में मॉर्निंग और ईवनिंग टाइम चाय के ल‍िए फिक्‍स होता है। ईवनिंग में चाय के साथ लोग स्‍नैक्‍स खाना बहुत पसंद करते हैं।


लेकिन ईवन‍िंग टाइम में चाय के साथ स्‍नैक्‍स का चुनाव करना बहुत जरुरी होता है क्‍योंकि चाय के साथ कुछ चीजों का सेवन करना सेहत के ल‍िए सचमुच नुकसानदायक साबित हो सकता है। हम में से कई लोग चाय के साथ मैदा या बेसन से बने स्‍नैक्‍स खाना पसंद करते है। स्‍नेक्‍स टाइम में चाय के साथ सोच समझकर चीजों का सेवन करें। वरना गलत चीजों को खाने से ये आपके सामने साइडइफेक्‍ट्स बनकर नजर आ सकते हैं।

पानी

घर के बड़े-बुर्जुग अक्‍सर चाय के पहले पानी पीने की हिदायत देते है, और अक्‍सरहमें चाय के तुरंत बाद पानी पीने से रोकते हैं, ये सही भी है। क्योंकि चाय पीने के बाद पानी पीने से हमारे पेट में कई तरह की समस्या होने लगती है। चाय के तुरंत बाद पानी पीने से चेहरे पर झुर्रियों की समस्या होने लगती है।
नींबू

चाय के साथ नींबू कभी भी भूलकर नहीं खानी चाह‍िए। ये आपके पेट में जहर का काम कर सकता है, इससे एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है।


तली-भुनी चीजें
हम में से कई लोग चाय के साथ नमकीन या तला-भुना खाना पसंद करते हैं। ज्‍यादात्तर लोगों का चाय के साथ फेवरेट कॉम्बिनेशन पकोड़ा होता है। बारिश हुई या घर में कोई मेहमान आ गया। चाय और पकौड़ों के बिना बात नहीं बनती है। मगर आपको जानकर थोड़ा बुरा लगेगा कि चाय के साथ बेसन की चीजें खाने से नुकसान होता है। चाय के साथ अगर आप बेसन की बनी चीजें खाते हैं, जो ये कॉम्बिनेशन आपके बालों के ल‍िए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इतना ही नहीं इससे आपके बालों के सफेद होने की संभावना भी बढ़ सकती है।



मीठे बिस्किट

हम में से कई लोगों को चाय और बिस्किट का कॉम्बिनेशन बहुत भाता है। अगर आप भी चाय-बिस्किट प्रेमी है तो आपको इसे ज्‍यादा खाने से बचना चाह‍िए। क्‍योंकि मीठे बिस्किट में जरुरत से ज्‍यादा शुगर का इस्‍तेमाल किया जाता है, जो शरीर के ल‍िए नुकसानदायक साबित हो सकता है। यहीं नहीं इससे डायबिटीज और मुंहासें होने का खतरा रहता है।
शहद

कहीं आप मीठे से बचने के ल‍िए चाय में शहद मिलाकर पीने की बेवकूफी तो नहीं करते हैं। क्‍योंकि इससे शरीर के तापमान में फर्क पड़ता है और ये तनाव को बढ़ाने के साथ ही शरीर में बैचेनी और घबराहट की समस्‍या बढ़ाता है।


स्‍मोकिंग
अक्‍सर हमने कई लोगों को देखा है कि ब्रेकटाइम में चाय की चुस्कियों के साथ थोड़ा सिगरेट भी सुलगा लेते हैं। लेकिन यदि आप भी कुछ ऐसा ही शौक रखते है तो अभी से सम्‍भल जाइएं। वरना ऐसोफैगल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल गर्म चाय पीने से ऐसोफेगस टिशू नष्‍ट होने लगते है जिसके परिणामस्‍वरुप कैंसर की समस्‍या हो सकती है।
हल्दी

चाय पीने के तुरंत बाद हल्दी की चीजों से भी दूर रहनी चाहिए। चाय पीने के बाद हल्दी की चीजें खाने से बालों की कई समस्याएं होने लगती है। और ये कई तरह से एलर्जिक रिएक्‍शन भी दे सकता है।



सेहत के ल‍िए क्‍या अच्‍छा है बगीचे में या ट्रेडमिल पर दौड़ना, जानें दोनों के नुकसान और फायदे


फिटनेस के लिए रनिंग या जॉगिंग सबसे अच्छी एक्सरसाइज मानी जाती है। कई लोग बगीचे में भागते हुए देखा जाता है तो वहीं कुछ लोग जिम में ट्रेडमिल में दौड़ते हैं। तो बेहतर क्‍या है? यदि आप प्रतिदिन 30 मिनट या एक घंटे तक वॉक या रनिंग करते हैं तो आपका स्वास्थ्य अच्छा रहता है और विभिन्न बीमारियां दूर हो जाती हैं। लेकिन कई लोगों के दिमाग में ये एक सवाल चलता है कि खुली जगह में दौड़ना सेहत के ल‍िए अच्‍छा होता है या जिम में ट्रेडमिल पर दौड़ना बेहतर होता है?



कि‍स जगह पर दौड़ना है फायदेमंद?
वास्तव में, दौड़ने या वॉक करने के लिए सही जगह आपकी स्थिति पर भी निर्भर करती है। आम तौर पर खुली हवा में दौड़ना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है क्योंकि इससे आपके शरीर में साफ ऑक्सीजन जाती है। खुले पेड़ों के नीचे भागने से लेकिन अगर आप प्रदूषित शहर में रहते हैं या आप बगीचे में भागते हैं और इसके आसपास काफी ट्रैफ‍िक रहता है तो ट्रेडमिल पर चलना अच्छा होगा।

बगीचे या बाहर, रनिंग के लाभ
बगीचे में चलना आपके लिए अच्छा होगा, लेकिन वहां साफ हवा की आवश्यकता है। खुली जगह में अधिक ऑक्सीजन रहती है। जब आप दौड़ते हैं तो आप तेजी से सांस लेते हैं इसलिए शरीर भर में ऑक्सीजन का प्रवाह अच्छा हो जाता है। रक्त प्रवाह भी बढ़ता है, जो शरीर के लिए अच्छा है।

बगीचे या बाहर दौड़ने के नुकसान

शहरों में बढ़ते प्रदूषण और हरियाली की कमी के वजह से खुली जगह में सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। यदि आप प्रदूषित क्षेत्र में या शहर में रहते हैं, तो यह दौड़ना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होगा। हवा के माध्यम से छोटे जहरीले कण सांस के साथ फेफड़ों में प्रवेश करते हैं ज‍िससे गंभीर बीमार‍ियां हो जाती हैं। इसके अलावा, बरसात के दिनों में मिट्टी और बारिश के कारण भी आप बाहर या पार्क और बगीचें में नहीं दौड़ सकते हैं।
ट्रेडमिल पर चलने के लाभ

ट्रेडमिल पर दौड़ना आसान है क्योंकि जब आप बाहर निकलते हैं, तो आपको हवा प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है। वैसे ट्रेडमिल पर चलने पर प्रदूषित हवा का सामना नहीं करना पड़ता है। इसके साथ-साथ, गर्मी के दौरान और वातावरण में कुछ बदलाव आने पर बाहर दौड़ना मुश्किल होता है। लेकिन आप किसी भी वातावरण में किसी भी समय ट्रेडमिल पर दौड़ सकते हैं।

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ट्रेडमिल पर चलने के नुकसान

ट्रेडमिल पर चलते समय आपको ताजा हवा नहीं मिलती है। आप बाहरी स्वच्छ हवा में अधिक समय और बेहतर व्यायाम कर सकते हैं। आप कुछ दिनों में ट्रेडमिल पर दौड़ने से थक जाते हैं। हर दिन एक ही जगह पर, एक ही गति पर दौड़ने से लोग अक्सर थक कर दौड़ना छोड़ देते है। ट्रेडमिल में ज्‍यादा गति में दौड़ते हुए आप अपना नियंत्रण खो सकते हैं। और इससे आपको चोट भी लग सकती हैं। यही बाहर और बगीचे में दौड़ने पर आप कुछ ना कुछ देख सकते हो, तो आपको थकान महसूस नहीं होती है।

विटामिन डी का क्या महत्व है

विटामिन डी एक पोषक तत्व के साथ शरीर में बनने वाला हार्मोन भी है। दुनिया भर में लगभग 10 करोड़ लोगों के रक्त में विटामिन डी का स्तर कम पाया गया है और यह कमी सभी जाति और आयु वर्ग के लोगों पाई गई है। यहाँ पर विटामिन डी का महत्व के बारे में बताया जा रहा है- पिछले दशक में हुये शोधों के अनुसार शरीर में विटामिन डी का रोगों से लड़ने की क्षमता हमारी सोच से कहीं ज्यादा है। विटामिन डी की कमी होने पर आपमें कई गम्भीर बीमारियाँ और संक्रमण हो सकते हैं। जानी मानी डायटीशिन और स्वास्थ्य ब्लॉगर आकांक्षा झलानी विटामिन डी का महत्व बताती हैं।


विटामिन डी क्या है

विटामिन डी वसा में घुलनशील विटामिन के समूह में आता है और शरीर में कैल्शियम तथा फॉस्फेट के अवशोषण को बढ़ाता है। मानव में इस समूह में सबसे महत्वपूर्ण यौगिकों में विटामिन डी-3 और विटामिन डी-2 शामिल हैं। शरीर त्वचा में कोलेस्ट्राल से सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में विटामिन डी का निर्माण भी करता है। इसलिये इसे अक्सर सनशाइन विटामिन कहते हैं।
अनुशंसित दैनिक मात्रा
भारतीय डायटिक ऐसोसिएशन ने 2010 के पुनरीक्षित आँकड़ों के अनुसार पर्याप्त धूप के साथ प्रतिदिन 400 आईयू (10 ग्राम) की सलाह दी है।

विटामिन डी के फायदे

1. शरीर में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा से कैंसर, रिकेट्स, ऑस्टियोपोरेसिस, हृदय रोग, वृक्क रोग, तपेदिक, सर्दी-जुकाम, मोटापा, बालोंका झड़ना और अवसाद जैसे रोगों के खतरे कम होते हैं।

2. विटामिन डी प्रतिरक्षण तन्त्र को मजबूत करके सर्दी, फ्लू और निमोनिया से सुरक्षा प्रदान करता है।

3. विटामिन डी अच्छे प्रतिरक्षण तन्त्र के साथ स्वस्थ शिशु के विकास में सहायक है। यह समय पूर्व के जन्म से भी बचाता है।

4. विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा से गिरने, फ्रैक्चर, उच्च रक्तचाप और टाइप-1 मधुमेह से होने वाली चोटों के खतरों को कम करता है।


5. विटामिन डी घाव भरने में भी सहायक है


विटामिन डी की कमी के लक्षण

विटामिन डी की कमी के लक्षणों में अवसाद, पीठदर्द, मोटापा, ऑस्टियोपोरेसिस, मल्टिपल स्केलेरॉसिस, मसूढ़ों के रोग, प्रीमेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम, दमा, ब्रान्काइटिस, तनाव और मधुमेह शामिल हैं।
वजन कैसे बढ़ाएं |
जल्दी से वजन बढ़ाने के घरेलू उपाय

अक्सर कम वजन स्वास्‍थ्य के लिए हानिकारक साबित होता है। ऐसे में वजन बढ़ाने के लिए वर्कआउट और अच्छी डाइट लेना बेहद जरूरी हो जाता है।

बहुत से लोग वजन बढ़ाने के लिये सप्लीमेंट का सहारा ले लेते हैं, लेकिन उसका हमारे शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं ।


वजन बढ़ाने में केला काफी मददगार साबित होता है। आप रोजाना कम से कम तीन केले खाएं और अगर दूध-दही के साथ केला खाएंगे तो ज्यादा फायदा पहुंचेगा। आप केले का शेक भी बना सकते हैं।


सोने से पहले गुनगुने दूध में शहद पीने से तेजी से वजन बढ़ता हैं।

मौसमी फल तो हमेशा खाते ही रहना चाहिये।

बॉडी बिल्डर्स और पहलवान वजन बढ़ाने के लिए मेवे वाले दूध का सेवन करते हैं। मेवे में आप बादाम, खजूर और अंजीर इत्यादि के साथ गर्म दूध ले सकते हैं।

अगर आप रोजाना 30 ग्राम किशमिश खाते है तो एक महीने में आपका वजन बढ़ जाएगा।

डायट में अधिक कार्बोहाइड्रेट व कैलोरी वाली चीजें लें। आटा, चावल, शहद, मेवे, मक्खन खाने से आप अपना वजन आसानी से बढ़ा सकते हैं।



क्‍यों आते है सेक्‍स से जुड़े सपने, जानिए इससे सेहत पर क्‍या पड़ता है असर

हम में से कई लोग ऐसे है जो सेक्‍स ड्रीमिंग की समस्‍या से गुजरते हैं, कोई सपने में अपने एक्‍स के साथ तो कभी अजनबी के साथ लवमेकिंग करते हुए का उत्तेजित सपना देखता हैं। इन सपनों को देखने के बाद लोग अक्‍सर लोग सुबह उठकर थोड़ा उत्तेजित सा महसूस करते हैं। और फिर बाकी सामान्‍य सपनों की तरह ही इस सपने को भूल जाते हैं।

लेकिन आपने कभी ये सोचा है कि आखिर इस तरह के इंटीमेट सपने आपको क्‍यों आते हैं और ऐसे सपनों आपको क्‍या संकेत दे रहे हैं?, दरअसल ये सपने कहीं न कहीं हमारे सेहत और मनोवैज्ञानिक से जुड़े होते हैं। कॅरियर और दूसरे तरह के तनाव कई बार आपके सेक्‍स लाइफ पर भी असर डालते हैं। आइए जानते है कि क्‍यों अक्‍सर इस तरह के इंटीमेसी के सपने आते हैं।


क्‍या हैं सेक्‍स ड्रीम्‍स

सेक्‍स ड्रीम्‍स असल में वो सपने हैं जिनमें हम खुद को किसी के साथ संभोग करता हुआ देखते हैं। पुरुष अकसर सपने में स्‍त्री अंगों को देखते हैं तो स्त्रियां भी अपने सपनों में पुरुष अंगों के बारे में ऐसा ही महसूस करती हैं।

सेक्स ड्रीम्‍स आने की वजह
सपने अक्सर अधूरी इच्छाओं और अनपेक्षित विचारों के रुप में सामने आते हैं। सपनें हमारी अवचेतना का हिस्सा होते हैं। इसकी वजह कुछ भी हो सकती है। अगर आपके रिश्‍तों में बोरियत आ गई है या कॅरियर में कोई टेंशन चल रही है तो आप अपने सेक्‍स लाइफ को खुलकर एंजॉय नहीं कर पाते हैं। तो ऐसे में सेक्स ड्रीम एक ज़रिया होता है जिसकी मदद से आप अपनी भावनाओं को ज़ाहिर कर सकते हैं। यदि आपके दिमाग में दिनभर यौन कल्पनाएं चलती रहती है तो ये सेक्‍स ड्रीमिंग बनकर दिमाग के पटल में उभरकर आ जाते हैं।

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