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प्राइवेट पार्ट की सफाई में जरूर


मेल हो या फीमेल, प्राइवेट पार्ट की सफाई में जरूर रखें इन बातों का ध्‍यान

प्राइवेट पार्ट की ठीक ढंग से सफाई न होने से हो सकते हैं कई तरह के संक्रमण।





प्‍यूबिक हेयर को नहाने से पहले काटें, जिससे कि कटे हुये महीन बाल भी धुलकर निकल जाएंं। प्राइवेट की सफाई के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें। इससे इंफेक्शन नहीं होती। ध्यान रखें कि पानी अधिक गर्म न हो। कई बार पसीने या फिर सफाई न रखने के कारण प्राइवेट पार्ट से बदबू आने लगती है। एेसे में कई लोग इसे दूर करने के लिए परफ्यूम का इस्तेमाल करते हैं। भूलकर भी परफ्यूम का इस्तेमाल न करें। अपने आहार में लहसुन को शामिल करें। यह प्राइवेट पार्ट को नैचुरली साफ रहने में मदद करता है।

पुरुषों के लिए


शेव से पहले प्‍यूबिक हेयर्स को नर्म करने के लिए कुछ समय पानी में डुबाकर रखें या उन्हे गीला कर लें। इससे शेव करने में बहुत आसानी होगी।


जब आप शावर लें, तो क्रॉच यानी पेल्विस के नींचे वाले भाग को अच्‍छे साबुन से धोएं।

पेनिस के नींचे की त्वचा (foreskin) को भी साफ करें। ऐसा न करने से आपकी त्वचा के नीचे सफ़ेद पदार्थ बनेगा जिसे स्‍मेगमा कहते हैं। यह प्राइवेट प्रार्ट की हाइजीन के लिए ठीक नहीं है।


पेनिस की सफाई का पूरा ध्‍यान रखें।

रोज साफ अंडरवियर पहनें। साफ और बिना इस्तेमाल किए हुए अंडर गारमेंट्स को ठंडी और सूखी जगह पर रखें।

कोशिश करें कि धोने के बाद इन्‍हें धूप में ही सुखाएं, इससे इनमें मौजूद बैक्‍टीरिया खत्‍म हो जाते हैं।






महिलाओं के लिए

पीरियड के दिनों में अपने नैपकिन को प्रत्येक 4 घंटे में बदलें। इससे बदबू नहीं आती।


बाथरूम जाने के बाद प्राइवेट पार्ट को टिशू पेपर से साफ करें। इसे साफ करने के लिए कपड़ें का इस्तेमाल न करें क्योंकि उससे बैक्टीरिया फैलता है।

समय-समय पर प्राइवेट पार्ट के बालों को साफ करते रहें क्योंकि इससे खुजली की समस्या हो सकती है।

हेयर रिमूविंग क्रीम का दस मिनट से ज्‍यादा इस्‍तेमाल न करें। वरना जलन और वेजाइना इन्‍फेक्‍शन की समस्‍या का सामना करना पड़ सकता है।

रोजाना अपने अंडरगारमेंट को बदलें। ऐसे अंडरगारमेंट का चुनाव करें जो कॉटन के कपड़ें से बने हो।


मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल करें, खासकर की शेव करने के बाद त्वचा पर लगाएँ जिससे आपकी त्वचा नर्म और कोमल रहेगी।

बेबी वाइप्स (baby wipes) का इस्तेमाल करें, जो संवेदनशील त्वचा के लिए होती हैं और बदबू से भी बचाती है।

30-40 की उम्र में महिलाओं में क्‍यों बढ़ जाती है वेजाइनल ड्रायनेस ? जानिए कारण और उपाय 
पर 30-40 की उम्र में महिलाओं में होने वाले हार्मोनल बदलावों और स्‍ट्रेस के कारण यह समस्‍या कुछ ज्‍यादा ही बढ़ जाती है। जिसका असर उनकी सेक्‍स लाइफ पर भी देखने को मिलता है।



पर 30-40 की उम्र में महिलाओं में होने वाले हार्मोनल बदलावों और स्‍ट्रेस के कारण यह समस्‍या कुछ ज्‍यादा ही बढ़ जाती है। जिसका असर उनकी सेक्‍स लाइफ पर भी देखने को मिलता है। ©Shutterstock.

वेजाइनल ड्रायनेस एक आम समस्‍या है, जिसका ज्‍यादातर महिलाओं को कभी न कभी सामना करना ही पड़ता है। पर 30-40 की उम्र में महिलाओं में होने वाले हार्मोनल बदलावों और स्‍ट्रेस के कारण यह समस्‍या कुछ ज्‍यादा ही बढ़ जाती है। जिसका असर उनकी सेक्‍स लाइफ पर भी देखने को मिलता है। अगर आप भी इस तरह की किसी समस्‍या से गुजर रहीं हैं, तो आपको जानने चाहिए इसके कारण और उपाय। 

क्‍या है वेजाइनल ड्रायनेस 


वेजाइनल ड्रायनेस की समस्‍या अमूमन 30-40 वर्ष की उम्र की महिलाओं में देखने में आती हैं। जिसकी वजह से उनका वेजाइना सेक्‍स के दौरान कम ल्‍यूब्रीकेंट हो पाता है। इससे उन्‍हें सेक्‍स के दौरान दर्द का सामना करना पड़ता है। कई बार घर्षण के कारण वेजाइना का त्‍वचा छिल जाती है, जिससे रेशेज भी हो सकते हैं। 

क्‍या है कारण 


इसके कुछ कॉमन कारणों में से एक स्‍ट्रेस भी माना जाता है। जब आप तनाव में होती है तो आपके शरीर से सेक्‍स हार्मोन का रिसाव कम हो जाता है। जिसकी वजह से वेजाइना प्राकृतिक तरीके से ल्‍यूब्रीकेंट नहीं हो पातीं। वहीं कई बार संक्रमण या निजी अंगों की ठीक से सफाई न रखने के कारण भी यह समस्‍या बढ़ सकती है। वेजाइनल ड्रायनेस के कारण सेक्स के दौरान काफ़ी दर्द होता है। 

यह हो सकता है उपचार 

वेजाइनल ड्रायनेस की समस्या 30 से 40 वर्ष के बीच की महिलाओं में बहुत आम हो गई है। यदि आप भी इसके चलते सेक्स का भरपूर आनंद नहीं उठा पा रही हैं तो अपनी गायनाकोलॉजिस्ट से मिलें। आमतौर पर डॉक्टर्स ऐंटी बायोटिक्स द्वारा इसका इलाज करते हैं। वहीं दूसरे नुस्ख़ों में लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करना भी एक कारगर तरीक़ा है। लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करने से घर्षण कम होता है। आप अपने पार्टनर को अच्छे लुब्रिकेंट वाला पतला कॉन्डम इस्तेमाल करने को भी कह सकती हैं। वेजाइनल पेसरीज़ भी वेजाइना को लुब्रिकेट करके, ड्रायनेस से छुटकारा दिलाती हैं और सेक्स को और भी आनंददायक बनाती हैं। 
रने के सही तरीके के बारे में जानें 
ब्रेस्टफीडिंग करवाने का सही स्टाइल पता है आपको? 







ब्रेस्टफीडिंग या स्तनपान नवजात शिशु और शिशु के लिए बहुत ज़रूरी होता है। डब्ल्यु.एच.ओ. के सलाहानुसार स्तनपान कराना नवजात शिशु से लेकर छह माह तक के शिशु के लिए बहुत ही ज़रूरी होता है। लेकिन पहली बार माँ के लिए सही तरीके स्तनपान करवाने के बारे में अक्सर जानकारी देना लोग भूल जाते हैं। सही जानकारी के अभाव में अक्सर माँ अनेक प्रकार के समस्याओं का सामना करती हैं जिससे कारण वे सही पौष्टिकता देने के लिए बोतल से दूध पिलाना बेहतर समझने लगती हैं। इसके लिए ज़रूरी है कि उन्हें स्तनपान करने के सही तरीके के बारे में बताया जाय- 


1. पहले अपना पोज़िशन ठीक करें। 15 से 45 मिनट तक ही स्तनपान करवायें और ऐसे पॉश्चर में बैठे ताकि आपको पीठ या पैर में दर्द का अनुभव न हो। हमेशा पीठ के पीछे तकिया आदि रखकर आराम से बैठे। 


2. शिशु को सही तरीके से गोद में ले। याद रहे कि शिशु का सिर आपके हाथों में हो जब उसे आप दूध पिला रहे हो। अगर आप दायें स्तन से दूध पिला रही हो तो शिशु का सिर दायें हाथ में होना चाहिए, उसी तरह बायें तरफ से दूध पीते वक्त भी होना चाहिए। दूध पिलाते वक्त शिशु का पीठ आपके हाथ के सहारा लिये हुए होना चाहिए और दूसरे हाथ से आप उसको सहलाते रहें, धीरे-धीरे प्यार से सहलाते रहें और उसके उंगलियों से खेलते रहें। 


3. शिशु का पूरा शरीर, उसका गला, गर्दन, पेट सब समानांतर होना चाहिए और आपके तरफ मुँह करके जितना हो सके आपके पास होना चाहिए। शिशु का ठुड्डी स्तन को स्पर्श किए हुए होना चाहिए। 


4. शिशु का मुँह इतना खुला होना चाहिए जिससे कि वह आसानी से स्तन से दूध पी सके। ब्रेस्ट का निप्पल सिर्फ उसके मुँह में होना ही काफी नहीं होता बल्कि स्तन का कुछ भाग भी होना चाहिए जिससे कि वह अच्छी तरह से दूध पी सके। 


5. जब आप शिशु को दूध पिलायें तब उसके होंठो से ब्रेस्ट के निप्पल को स्पर्श करवायें। अगर शिशु भूखा होगा तो वह खुद ही मुँह खोलकर पीने लगेगा। 


6. जैसे ही शिशु दूध पीने लगे तब इस बात का ध्यान दे कि उसके होंठ का ऊपरी भाग बाहर के तरफ और नीचे का होंठ भीतर के तरफ हो। तभी शिशु सही तरह से दूध पी पायेगा। 


7. दूध पिलाते वक्त ब्रेस्ट के निप्पल में किसी भी प्रकार का दर्द नहीं होना चाहिए। अगर हो रहा है तो कुछ गलत तो है, इस बात का ध्यान रखें। 


8. अगर सब कुछ ठीक है तो शिशु आराम से दुध पीकर संतुष्ट हो जाएगा और शांत होकर या तो सो जाएगा या खेलगा। 

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