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न बढ़ेगा मोटापा, न ही कोलेस्ट्रॉल बस इस सीजन रखें डाइट का खास ख्याल

न बढ़ेगा मोटापा, न ही कोलेस्ट्रॉल बस इस सीजन रखें डाइट का खास ख्याल


सर्दियों का सीजन आते ही तमाम तरह की सब्जियां भूख के साथ ही लालच भी बढ़ा देती हैं जिससे कई बार जरूरत से ज्यादा खाना खा लेते हैं। हालांकि सर्दियों में डाइजेशन की उतनी प्रॉब्लम नहीं होती लेकिन कैलोरी और कोलेस्ट्रॉल तो बढ़ता ही है। हेल्दी खाने के साथ ही अनहेल्दी आदतों से कैसे दूर रहा जा सकता है यह जानना जरूरी है। ये हेल्दी ऑप्शन कई तरह की बीमारियों को भी दूर रखने में कारगर होते हैं।

पानी पीती रहें
सर्दियों में कोल्डड्रिंक्स और हार्ड ड्रिंक्स का सेवन करने से बचें। चाय और कॉफी भी इस सीजन में डेली रुटीन से ज्यादा हो जाता है। इसलिए इसका इस्तेमाल भी कम करें। पानी जरूर पिएं। कोशिश करें कि पानी रूम टेम्प्रेचर वाला ही हो। ज्यादा ठंडा पानी पीना भी सेहत के लिए ठीक नहीं है। सबसे खास बात, खाना खाने के तुरंत बाद पानी न पिएं।

खाना छोड़ना ठीक नहीं
अकसर इस सीजन के दौरान किसी न किसी बहाने खाना ज्यादा हो जाता है, और उसे ठीक करने के चक्कर में लंच या डिनर छोड़ना बेहतर आइडिया नजर आता है। जबकि एेसा करना गलत है। लंच और डिनर जरूर करें, लेकिन उसकी मात्रा कम कर दें। चावल का इस्तेमाल कम कर दें। ऑयली फूड बिल्कुल न लें। यह डाइट सेहत को ठीक रखेगी।
डेज़र्ट की मात्रा कम लें
सर्दियों में डेजर्ट की मात्रा डाइट में अपने आप बढ़ जाती है। इस पर ध्यान दें। दिन की चार में से एक ही मील में डेजर्ट लें। आइसक्रीम और डोनट जैसे डेजर्ट लेने से बचें। इनमें फैट्स की मात्रा काफी होती है।

ताजे फल खाएं
इस सीजन में घर पर मौजूद पहले से स्नैक्स और मिठाई खाने से बचें। उन्हें पूरे दिन में सिर्फ एक बार ही लें। बाकी दिन में भूख लगे तो फ्रेश फ्रूट लें। इससे एनर्जी मिलेगी, और भूख भी मिट जाएगी।

एक्सरसाइज़ करना न भूलें
इस सीजन में आलस और मन दोनों ही सुबह उठने की इजाजत नहीं देते जिससे एक्सरसाइज करने की हिम्मत नहीं रहती। इसलिए टाइम निकालकर कुछ वक्त वॉक जरूर करें। वॉक करने से आपके बॉडी मसल्स पहले की तरह काम करते रहेंगे और आपको होनी वाली थकान से भी छुटकारा मिल जाएगा। रोजाना 15 मिनट की वॉक भी काफी होगी।

नींद है सबसे ज़रूरी
एक्सपर्ट कहते हैं कि खाना खाने के चार घंटे बाद ही सोना चाहिए। इससे खाना पेट में पूरी तरह पच जाता है। अगर इस दौरान भूग लगे तो फ्रेश फ्रूट्स लें। कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लें। इससे शरीर और दिमाग को पूरी तरह से रेस्ट मिलेगा और आप अगले दिन फ्रेश रहेंगी।



प्रेग्नेंसी के बाद बढ़े हुए वजन को इन खास तरीकों से करें कम और रहें फिट


डिलिवरी के बाद ज्यादातर महिलाएं अपनी फिगर को लेकर परेशान रहती हैं। एकदम से बढ़े हुए वजन और साथ ही कमर पर पड़े हुए स्ट्रेच मॉर्क्स को दूर करने के लिए वो तमाम तरह के उपायों को अपनाती हैं जिसका सीधा असर उनके सेहत पर पड़ने लगता है और साथ ही बच्चे के ऊपर भी। सही जानकारी और सही तरीके से की जाने वाली एक्सरसाइज इन सभी परेशानियों को दूर करती है। वजन कम करने की शुरूआत खानपान से करें फिर एक्सरसाइज की ओर बढ़े। जानते हैं डिलिवरी के बाद झटपट फिट होने के तरीकों के बारे में।
वजन कम करने के लिए क्या खाएं
फाइबर

अंकुरित अनाज में कैलोरी बहुत कम होती है। साथ ही ये डाइजेशन को भी सही रखने का काम करते हैं। इसके लिए फलों, दालों को छिल्कों सहित बनाएं।
प्रोटीन

प्रोटीन से भरपूर चीजों को खाने में शामिल करें। कार्बोहाइड्रेट और वसा की मात्रा कम करके बढ़े हुए मोटापे को आसानी से कम किया जा सकता है।
हरी पत्तेदार सब्जियां

इनमें आयरन मौजूद होता है। जो ब्लड की कमी नहीं होने देता। प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं को उन चीजों का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए जिनसे बॉडी को आयरन मिलता हो। इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ ही आंखों की रोशनी के लिए भी फायदेमंद होते हैं। ब्रेस्ट कैंसर व लंग्स कैंसर की रोकथाम में भी कारगर हैं।
अंकुरित अनाज

अंकुरित अनाज में बहुत ज्यादा प्रोटीन मौजूद होते हैं, जो शरीर को मजबूत रखने के साथ ही उन्हें कई सारी बीमारियों से भी बचाते हैं। इनमें एंटी-ऑक्सीडैंट और विटामिन ए,बी,सी भरपूर मात्रा में होते हैं।
डेयरी

डेयरी प्रोडक्ट्स में शामिल पनीर को कच्चा खाने के साथ ही सब्जी बनाकर भी खाएं। इसमें मौजूद मिनरल्स, कैल्शियम और फास्फोरस, बोन्स को मजबूती प्रदान करते हैं साथ ही दांतों के इनैमल के लिए भी रक्षा करते हैं।
फल

फलों में पपीते का सेवन ज्यादा से ज्यादा मात्रा में करें क्योंकि इसमें विटामिन ए, बी, सी और डी, प्रोटीन तथा बीटा कैरोटिन जैसे तत्त्व पाए जाते हैं जो वजन कम करने में मददगार होते हैं।
डिलिवरी के बाद की जाने वाली एक्सरसाइज
एक्सरसाइज का सही समय
नॉर्मल डिलिवरी के 6 हफ्तों के बाद आराम से एक्सरसाइज शुरू किया जा सकता है और अगर डिलिवरी सिजेरियन हुई हो तो कम से कम 3 महीनों के बाद एक्सरसाइज के बारे में सोचें। किसी भी एक्सरसाइज को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। डिलिवरी के समय लगभग हर महिला का वजन 9 किलोग्राम से 11 किलोग्राम तक बढ़ता ही है। हेल्दी खाने के चक्कर में खाई जाने वाली चीजें ज्यादातर ऑयली और कैलोरी युक्त होती हैं। बढ़े हुए वजन को कम करने के लिए डाइटिंग का सहारा बिल्कुल भी न लें।
एक्सरसाइज टिप्स
सबसे अच्छी एक्सरसाइज वॉक है। सुबह या शाम, जब भी वक्त मिले पैदल टहलें। इससे बॉडी का मूवमेंट होगा जिससे उसकी अकड़न खत्म होगी।
टोनिंग, ब्रीदिंग जैसी एक्सरसाइज से शुरूआत करें। धीरे-धीरे एक्सरसाइज करने के वक्त को बढ़ाएं।
हैवी पीरियड्स होने पर एक्सरसाइज अवॉयड करें।
ज्यादा थकाने वाली एक्सरसाइज करने से बचें।
ऐसी एक्सरसाइज भी न करें जिस से शरीर में खिंचाव या दर्द महसूस हो।
पेट की ऐक्सरसाइज
पेट के एक्स्ट्रा फैट को दूर करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और घुटनों को मोड़ लें। पेट पर दोनों हाथ क्रौस की मुद्रा में रखें। फिर सिर को उठाएं। गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे छोड़ें। नाव जैसी मुद्रा बनाएं। ध्यान रहें ज्यादा देर तक इस एक्सरसाइज को न करें।
केगेल ऐक्सरसाइज
डिलिवरी के बाद अक्सर हंसते या खांसते समय यूरिन पास होने लगता है। इस समस्या से निपटने के लिए केगेल ऐक्सरसाइज का सहारा लिया जा सकता है। यह ढीली हो चुकी मसल्स को मजबूती देता है।
मॉर्निंग वॉक
फिटनेस के साथ ही चेहरे की चमक को बरकरार रखने के लिए रोजाना कुछ देर वॉक करें। कोलेस्ट्रॉल कम होने के हार्ट अटैक का का खतरा भी कम होता है। हड्डियां मजबूत होती है और साथ ही डाइजेशन भी सही रहता है।



जानिए, कैसे वजन को रखें मेंटेन


वजन घटाना इतना मुश्किल नहीं है, जितना घटे हुए वजन को बरकरार रखना। वजन घटाने के ज्यादातर मामलों में वजन लौट आता है। वजन घटाने और मेंटेन करने के बीच तालमेल कैसे बिठाएं,

वजन कम घटाने वाले 60-70 फीसदी तक लोगों को फिर से वजन लौट आने की शिकायत होती है। एक्सपर्ट मानते हैं कि वजन घटाना 50 फीसदी जंग जीतना है, तो उसे मेंटेन करना बाकी 50 फीसदी जंग जीतने के बराबर है।
एक्सरसाइजः क्यों लौट आता है वजनः - वजन कम करने और उसे मेंटेन करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे पहले वजन तेजी से घटाने की कोशिश न करें। महीने में 2 किलो (ज्यादा-से-ज्यादा 3 किलो तक) वजन घटाने का टारगेट सही है। अगर बहुत तेजी से वजन घटाएंगे तो उसके लौटकर आने के चांस भी ज्यादा होंगे। वजह यह कि तेजी से वजन कम करने के लिए लोग क्रैश डाइटिंग पर चले जाते हैं। इससे बॉडी का मेटाबॉलिजम कम होता है। फिर जब नॉर्मल डाइट पर लौटते हैं तो मेटाबॉलिजम कम होने की वजह से वजन तेजी से बढ़ जाता है।
- अक्सर लोग डाइटिंग और भारी एक्सरसाइज का सहारा लेकर वजन कम कर लेते हैं, लेकिन लाइफस्टाइल में चेंज नहीं करते। लाइफस्टाइल चेंज से मतलब भूखे रहने के बजाय हेल्दी खाने की आदत डालना, एक्सरसाइज को लाइफ का हिस्सा बनाना और ऐक्टिव लाइफस्टाइल अपनाना है। इसके लिए अपने छोटे-मोटे ज्यादातर काम खुद करने की आदत डालें और चलने-फिरने का बहाना तलाशें।

- डाइटिंग में ज्यादातर लोग फास्ट करने यानी भूखे रहने लगते हैं। ऐसे में फास्ट के बाद फीस्ट यानी दावत उड़ाने से नहीं चूकते। इससे जितनी मेहनत से वजन कम किया था, उतनी ही तेजी से वापस आता है।

- लोग वजन कम करने के बाद एक्सरसाइज या तो बिल्कुल बंद कर देते हैं या फिर बहुत कम कर देते हैं। उन्हें लगता है कि वजन कम हो ही गया, अब एक्सरसाइज की क्या जरूरत। यह सही नहीं है। इससे भी वजन फौरन लौटने लगता है।

घटाते वक्त रखें ध्यानः - जब भी वजन कम करने की शुरूआत करते हैं, शुरू में वजन तेजी से गिरता है। फैट के साथ मसल्स वेट भी गिरता है तो वजन जल्दी कम होता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि बॉडी में मसल्स वेट कितना है और फैट कितना। यह जांच बड़े जिम या फिटनेस क्लीनिक में कराई जा सकती है। यह पता लगाना भी जरूरी है कि वर्कआउट से दोनों (मसल्स और फैट वेट) में से क्या गिर रहा है। अगर फैट ज्यादा है तो कार्डियो, स्ट्रेच और लाइट वेट को मिलाकर एक्सरसाइज करें।

- वजन कम करने के दौरान कुल एक्सरसाइज का 60 फीसदी कार्डियो और 40 फीसदी स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज का रखें तो बेहतर है। कभी एक्सरसाइज नहीं की है तो शुरुआत 20 मिनट के ब्रिस्क वॉक से करें। फिर 2 मिनट ब्रिस्क वॉक और 2 मिनट जॉगिंग के साथ करें। इसके बाद 2 मिनट ब्रिस्क वॉक और 3 मिनट जॉगिंग करें। इस तरह धीरे-धीरे आपकी क्षमता बढ़ जाएगी और बॉडी में से फैट कम होने लगेगा। रोजाना कुल 45 मिनट की एक्सरसाइज जरूर करें।

- कार्डियो के साथ मसल्स स्ट्रेंथनिंग भी बहुत जरूरी है। मसल्स को ट्रेंड नहीं कर रहे हैं तो वेट लॉस के साथ-साथ मसल्स लॉस भी होगा। मसल लॉस के साथ मेटाबॉलिजम कम होता है। इससे वजन तेजी से लौट आता है। मसल लॉस को रोकने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसे कि डंबल, पुशअप्स, स्क्वैट्स, सूर्य नमस्कार आदि करें।

नोट: एक्सरसाइज के बेहतर रिजल्ट के लिए एक्सपर्ट कंसल्टेंट या ट्रेनर से राय लेना जरूरी क्योंकि हर किसी की बॉडी टाइप अलग है। जैसे हर कपड़ा हर किसी को फिट नहीं बैठता, वैसे ही हर एक्सरसाइज हर किसी को सूट नहीं करती।

मेंटेन करने के लिएः - वजन को लगातार कम करते रहने की कोशिश न करें। ऐसा करना बेहद खतरनाक हो सकता है। एक टारगेट तय करें कि कितने किलो वजन कम करना है। उस टारगेट को पाने के बाद उसे मेंटेन करने की कोशिश करें। जितना वजन घटाने के बाद है, उसमें 1-2 किलो का उतार चढ़ाव सामान्य है, लेकिन अगर 3 किलो से ज्यादा वजन वापस लौट आए या फिर इंच बढ़ने लगे तो ध्यान देना जरूरी है।

- वजन कम करने के लिए कार्डियो पर जोर दिया जाता है, जबकि मेंटेन करने के लिए स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज बढ़ाएं। इसके लिए स्ट्रेंथनिंग 65 फीसदी और कार्डियो 35 फीसदी का कॉम्बिनेशन रखें। कार्डियो एक्सरसाइज में वे एक्सरसाइज आती हैं, जिनसे दिल की धड़कन बढ़ जाए मसलन अरोबिक्स, जॉगिंग, रनिंग, साइकलिंग, स्वीमिंग, ब्रिस्क वॉक, रस्सी कूदना, जुंबा या दूसरे डांस आदि। स्ट्रेंथनिंग के लिए वेट लिप्टिंग, स्क्वैट्स, पुश-अप्स, सूर्य नमस्कार आदि कर सकते हैं।
- रोजाना एक्सरसाइज नहीं कर पा रहे तो भी हफ्ते में कम-से-कम 4-5 दिन तो जरूर करें। 30 मिनट की रेग्युलर ब्रिस्क वॉक वजन मेंटेन करने के लिए काफी है। जो लोग ज्यादा चल-फिर नहीं सकते, वे योग जरूर करें। इससे मसल्स टेंशन कम होती है और तन व मन, दोनों रिलैक्स होते हैं। शरीर में लचीलापन भी बढ़ता है। वैसे, एक्सरसाइज का कोई भी मौका न छोड़ें। हर 5-10 मिनट के छोटे वर्कआउट के भी फायदे हैं।

डाइटः - वजन घटाने के लिए अगर 1200-1500 कैलरी तक रोजाना ले रहे हैं तो मेंटेन करने के लिए उसमें कुछ बढ़ा सकते हैं। हालांकि उम्र, बॉडी टाइप और काम के मिजाज के अनुसार हर किसी के लिए कैलरी की जरूरत अलग-अलग होती है। जैसा कि एथलीट्स और जो लोग एक्सरसाइज करते हैं, उन्हें ज्यादा कैलरी की जरूरत होती है, जबकि जो लोग बैठे रहने वाला जॉब करते हैं, उन्हें कम।

- खाने में कार्बोहाड्रेड कम करें और प्रोटीन ज्यादा लें। हमारी डाइट 30-40 फीसदी कार्बोहाड्रेड, 20 फीसदी फैट और 40-50 फीसदी तक प्रोटीन हो तो बेहतर है। आम लोगों को हर किलो वजन के लिए 0.8 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती। मसलन अगर आपका वजन 70 किलो है तो 70x.8 = 56 ग्राम प्रोटीन की रोजाना जरूरत होगी। वहीं, एक्सरसाइज करने वालों को हर किलो वजन के लिए 1.2 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। रेग्युलर एक्सरसाइज करनेवाले 70 किलो वजनी शख्स को रोजाना 84 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होगी। अंडे और चिकन में अच्छी मात्रा में प्रोटीन होता है। वेजिटेरियन लोगों के लिए सोयाबीन, दाल, तोफू और पनीर प्रोटीन के बेहतर सोर्स हैं।

- डाइटिंग बंद करते ही फौरन कुछ भी खाना न शुरू कर दें। वैसे भी डाइटिंग का मतलब भूखा रहना नहीं है, बल्कि पेट भरकर समझदारी से वे चीजें खानी हैं, जिनमें कैलरी कम हो और सेहत के लिए फायदेमंद हो। मसलन हाई फाइबर (होल ग्रेन, दालें आदि) और रसीले फल (संतरा, तरबूज, माल्टा आदि) ज्यादा खाएं। ये मेटाबॉलिजम भी बढ़ाते हैं।
- सिंपल कार्ब (आलू, अरबी, मैदा, चावल, चीकू, अंगूर, केला आदि) के बजाय कॉम्पलेक्स कार्ब (साबुत अनाज, ओट्स, दालें, चना/राजमा, ब्राउन राइस आदि) को खाने में शामिल करें। सिंपल कार्ब जल्दी शुगर में तब्दील हो जाते हैं और बॉडी में फैट और शुगर लेवल बढ़ाते हैं। कॉम्प्लेक्स कार्ब फाइबर की वजह से देर तक पेट भरे होने का अहसास कराता है।
- डाइटिंग बंद करने के बाद भी ध्यान रखें कि तीनों मील हेवी न हों। अपने एक मील यानी एक वक्त के खाने खासकर डिनर को हल्का रखें। इसमें ज्यादा सलाद और सब्जियों को शामिल करें और रोटी कम ही रखें। खाने से आधा घंटा पहले फल खाएं। खाने की शुरूआत सलाद से करें। डिनर रात 8 बजे तक कर लें और उसमें मीठा बिल्कुल न खाएं। डिनर के बाद हल्का वॉक करें या घर में ही इधर-से-उधर टहल लें। सीधे सोने न पहुंच जाएं।

- खुद को भूखा न रखें। दिन भर में छह बार थोड़ा-थोड़ा खाना बेहतर है। अगर एक बार में बहुत ज्यादा मात्रा खाएंगे तो पेट की कैपेसिटी बढ़ जाएगी और आपको ज्यादा भूख लगेगी। हालांकि हाई कैलरी खाने को कम मात्रा में खाने के बजाए लो-कैलरी फूड (संतरा, तरबूज, पपीता, चना, स्प्राउट्स आदि) को ज्यादा मात्रा में खाएं। इससे शरीर में कैलरी भी कम जाएंगी और पेट भरा होने का अहसास होने पर फालतू स्नैकिंग भी नहीं करेंगे।

- स्नैकिंग (मेन मील्स के बीच-बीच में छुट-पुट खाना) पर कंट्रोल करना जरूरी है। जो ऐसा नहीं कर पाते, वे हेल्दी स्नैक्स (फल, मुरमुरे, प्लेन पॉपकॉर्न, स्प्राउट्स, सलाद आदि) का ऑप्शन अपने पास रखें। इसके अलावा प्रॉपर खाने के बाद दांत ब्रश कर लें। मुंह फ्रेश लगेगा तो कुछ खाने का मन नहीं करेगा। इसके अलावा, खाने का टाइम तय कर लें कि कुछ भी हो, डेढ़-दो घंटे से पहले कुछ नहीं खाएंगे।

- बाहर खाने पर कंट्रोल रखें। कोशिश करें कि महीने में 2-3 बार से ज्यादा बाहर का खाना न खाएं, क्योंकि रेस्तरां के खाने में कैलरी काफी ज्यादा होती हैं। रेस्तरां में लो-कैलरी फूड के ऑप्शन पर जाएं। अगर आज पित्जा या गुलाबजामुन खाएं तो अगले दो दिन फल और सब्जियों पर ज्यादा जोर दें।

- वजन कम करने के दौरान बहुत-सी चीजों के खाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी जाती है, जबकि एक बार वजन कम होने के बाद हम इस पाबंदी को कुछ ढीला छोड़ सकते हैं। जिन चीजों (चावल, चीनी, मैदा, बटर, चॉकलेट आदि) के खाने पर पूरी तरह पाबंदी थी, उन्हें कभी-कभार खा सकते हैं, लेकिन लिमिट में। 70-30 का फॉर्म्युला रख सकते हैं। मसलन अगर महीने में 10 बार जंक फूड खाने का मौका आए तो 7 बार नहीं खाएं, लेकिन 3 बार खा सकते हैं।

- इसी तरह हाई कैलरी और लो कैलरी चीजों को मिक्स कर लें। मसलन चावल खाने का मन है तो थोड़ी मात्रा में चावल लें और हाथ में बिना घी लगाए एक रोटी भी खा लें। दाल और सब्जी ज्यादा लें। इससे कम कैलरी में पौष्टिक खाना खा पाएंगे।

-ग्रीन टी वजन कम करने में मददगार है। रोजाना 3-4 कप ग्रीन टी पीना जारी रखें। साथ ही ज्यादा मात्रा में तरल चीजें भी लेते रहें। दिन में 8-10 गिलास पानी के अलावा नीबू पानी, छाछ, नारियल पानी आदि रेग्युलर तौर पर लेते रहें।

- कुकिंग का तरीका बदलें। जितना हो सके, फ्राई करने के बजाय बेक करके चीजों को खाएं। इसी तरह अगर मीठा खाने का मन है तो शुगर मिलाए बिना टोंड मिल्क का बनाना या मैंगो शेक बना लें। आइसक्रीम के बजाय लो फैट की पुडिंग ले सकते हैं। समोसे के बजाय ढोकला या इडली, सॉफ्ट ड्रिंक के बजाय नीबू पानी, नारियल पानी आदि पिएं।
- टीवी देखते हुए या गपशप मारते हुए खाना न खाएं। इससे अक्सर ज्यादा मात्रा में खाना खाया जाता है।

लाइफस्टाइलः - वजन कम करने के बाद भी घर में वेइंग मशीन रखें और अपने वजन पर रेग्युलर तौर पर निगाह रखें। हर हफ्ते एक तय समय पर उन्हीं कपड़ों में वजन लें। इससे वजन के बढ़ने या स्थिर रहने का पता आसानी से लग जाएगा।

- वजन घटाना बंद करने के बाद डायरी मेंटेन करना फौरन न छोड़े। एक डायरी में अपने खानपान का हिसाब रखें। इससे आप खाने पर नजर रख पाएंगे और हाई कैलरी वाली चीजों पर कंट्रोल कर पाएंगे।

- वजन मेंटेन करने के लिए कुछ को मोटिवेट करना बहुत जरूरी है। पहले (जब आपका वजन ज्यादा था) के फोटो को बीच-बीच में देखें और खुद को शीशे में देखकर कंपेयर करें कि अब आप कितना बेहतर दिखने लगे हैं। साथ ही, हेल्थ के लिहाज से भी सोचें कि अब आप पहले के मुकाबले ज्यादा हेल्दी और स्टैमिना महसूस करते हैं। खुद को बीच-बीच में यह भी याद दिलाएं कि आपकी फैमिली और करीबियों के लिए भी आपको फिट रहना है।

- अपने रूम में कोई ऐसी जगह चुनें, जहां आपकी रोजाना निगाह जाती हो। वहां पर अपना पहले का फोटो और नया फोटो लगाकर रखें। साथ में नीचे वजन कम रखने की बात भी लिखें। इसे देखने से आपको अपना मिशन याद रहेगा।

- डेस्क पर बैठकर काम करते हैं तो हर आधे घंटे में 5 मिनट का राउंड लेकर आएं। इससे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। लगातार एक ही पॉश्चर में बैठे रहने से बॉडी को उसकी आदत बन जाती है और मेटालिजम वीक हो जाता है। इसके अलावा इससे जोड़ों आदि की समस्या भी परेशान नहीं करेगी। याद नहीं रहता तो मोबाइल में अलार्म लगा लें, जो हर आधे में आपको याद दिलाता रहेगा।

- हर छोटी-बड़ी ऐक्टिविटी मायने रखती है। चाहे ऑफिस में पेपर मैसेंजर से मंगाना हो या घर में पानी किसी और से। पानी लाना, अलमारी लगाना, डॉग को घुमाना आदि छोटे-मोटे काम खुद करें।

- सुबह उठते ही स्ट्रेच करें। खुद को एक्टिव रखें। बच्चों के साथ ग्राउंड या पार्क में जाकर खेलें। टीवी देखने या कंप्यूटर पर काम करने (ऑफिस से अलग) का वक्त एक-डेढ़ घंटे से ज्यादा न रखें।


सही खानपान और एक्सरसाइज से 90% तक कम हो सकती हैं हार्ट प्रॉब्लम


लाइफस्टाइल डेस्कः 29 सितंबर, विश्व हृदय दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिसके पीछे का मकसद लोगों को हार्ट डिसीज के प्रति सचेत करना होता है। भारत में भी कई सारे अस्पतालों में हार्ट के मरीजों को बचाव हेतु सलाह दी जाती है। समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर की जांच करवाकर काफी हद तक इस परेशानी से बचा जा सकता है। सिर्फ 10 प्रतिशत मरीजों को ही जरूरत पड़ती है सर्जरी की। बाकी के 90 परसेंट अगर डाइट कंट्रोल करें और रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करें तो उन्हें हार्ट डिसीज से छुटकारा मिल सकता है।
चावल खाना कम करें
हार्ट पेशेंट्स के लिए डॉक्टरों की सलाह है कि उन्हें चावल कम से कम खाना चाहिए। किसी भी फॉर्म में तंबाकू का सेवन न करें। शराब न पीएं। ज्यादा से ज्यादा पानी पानी पीएं। बीपी और शूगर हार्ट डिसीज के फर्स्ट स्टेज माने जाते हैं, इनके नियंत्रण में लापरवाही कतई न बरतें।
हार्ट डीसीज के फैक्ट्स एंड फिगर्स
1. दुनिया में हर साल 1.71 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हार्ट डिसीज के चलते होती है।
2. हार्टअटैक में भारत का नंबर सबसे पहला है। 35 से ऊपर की उम्र के लोगों को आ रहे हैं सबसे ज्यादा अटैक।
3. शहरी आबादी का 30 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में आबादी का 15 प्रतिशत हिस्सा भारत में हार्ट पेशेंट हैं।
4. इस समय देश में हार्ट पेशेंट्स की संख्या लगभग 3 करोड़ 20 लाख।
5. लापरवाह लाइफस्टाइल है हार्ट पेशेंट्स बढ़ने की वजह।
6. देश में हर साल लगभग 1.50 लाख बायपास सर्जरी होती हैं।
7. डायबिटीज, तंबाकू सेवन और हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण भी भारतीयों में हार्ट पेशेंट्स के मामले बढ़ रहे हैं।
8. फैमिली प्रॉब्लम्स और प्रेग्नेंसी के दौरान सही डाइट न लेने से हर साल 2 लाख नवजात भी बन रहे हार्ट पेशेंट।

हार्ट प्रॉब्लम से बचना है तो ये करना ही होगा
1. रोज कम सेकम 30 मिनट वर्क आउट जरूर करें।
2. हैवी एक्सरसाइज की बजाए मॉर्निंग वॉक भी कर सकते हैं।
3. नमक जितना कम खाएं सेहत के लिए उतना ही अच्छा होगा।
4. ताजी सब्जियां और फल अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। फाइबर वाले फूड को डाइट में शामिल करें।
5. भूल जाएं तंबाकू, शराब और सिगरेट नाम की चीजें दुनिया में हैं।

6. साइकिलिंग या स्वीमिंग करें।
7. घंटों एक ही पोजिशन में बैठना दिल के लिए ठीक नहीं।
8. रोजाना 7 घंटेकी नींद जरूर लें।
9. बढ़ते वजन पर ध्यान दें।
10. ब्लड प्रेशर पर कंट्रोल रखें।
11. ब्लड शुगर की नियमित जांच करवाते रहें।


खुलकर ताली बजाओ और बीमारियां भगाओ


कोई परफ़ार्मेंस पसंद आने या कोई मज़ेदार बात सुनने पर ताली बजाना एक स्वाभाविक आदत होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ताली बजाकर आप कई बीमारियों से दूर रह सकते हैं? दरअसल ताली बजाने से मांसपेशियां प्रभावित होती हैं और एनर्जी का संचार भी होता है। नियमित रूप से ताली बजाने से आप चुस्त, फुर्तीले और तंदुरुस्ती बने रह सकते हैं।
सुबह-सुबह जॉगिंग करते समय आपने अक्सर पार्कों में लोगों को ताली बजाते देखा होगा। बिना बात के ताली बजाने का उनका मकसद सेहत से जुड़े कई फायदे लेना है। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं ताली बजाने के 4 फायदे।

1- कैसे फायदेमंद है ताली बजाना

एक्युप्रेशर के अनुसार हाथ की हथेलियों में शरीर के समस्त अंगों के संस्थान बिंदू होते हैं और ताली बजाने पर इन बिन्दुओं पर बार-बार दबाब यानी प्रेशर पड़ता है जिससे शरीर की समस्त आंतरिक संस्थान में एनर्जी जाती है और सभी अंग अपना काम सुचारू रूप में करने लगते हैं।

2- ताली बजाना रखे रक्त संचार को सुचारु
ताली बजाने से हमारा रक्त संचार ठीक होता है। ताली बजाने से बाएं हथेली के लंग, लिवर, गॉल ब्लैडर, किडनी, छोटी और बड़ी आंत तथा दाएं हाथ की अंगुली के साइनस के दबाव बिंदु दबते हैं। इससे शरीर के इन अंगों तक सही तरीके से रक्त संचार होने लगता है। लगातार ताली बजाने से ब्‍लड में सफेद कणों को भी शक्ति मिलती है जिससे शरीर में इम्‍यूनिटी में सुधार होता है।

3- पेट संबंधी रोगों से बचाव

पेट संबंधी समस्‍याएं जैसे गैस, कब्ज, अपच और मानसिक रोग जैसे तनाव, एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन की शिकायत होने पर दायें हाथ की चार अंगुलियों को बाएं हाथ की हथेलियों पर जोर-से मारना चाहिए और इस तरह से सुबह-शाम कम-से-कम 5 मिनट करना चाहिए।

4- लो ब्‍लड प्रेशर में फायदेमंद

लो ब्‍लड प्रेशर में ताली बजाना बहुत फ़ायदेमंद होता है। लो ब्‍लड प्रेशर के रोगियों को खड़े होकर दोनों हाथों को सामने लाकर ताली बजाते हुए नीचे से ऊपर की ओर गोलाकार घुमाना चाहिए और दिशा नीचे से ऊपर की ओर होनी चाहिए। यह उपाय लो ब्‍लड प्रेशर को नॉर्मल करने में बहुत लाभदायक है। इसके अलावा ताली बजाने से रक्त संचरण बढ़ता है और नसों तथा धमनियों में से खराब कोलेस्ट्राल सहित सारे अवरोध हट जाते हैं। ताली के द्वारा हृदय रोग, कमर दर्द, सरवाइकल जैसे रोग भी दूर होते हैं।

कैसे तय करें फैट टमी से फ्लैट टमी का सफर?


एक जमाना था जब बाहर निकले हुए पेट का मतलब होता था कि बंता खाते-पीते घर का है। अब जमाना सिक्स पैक्स का है। पेट से पैक्स तक की आपकी जर्नी को एक्सपर्ट्स की मदद से कुछ आसान बना रही हैं नीतू सिंह :

शरीर के कुल फैट की मात्रा से ज्यादा जरूरी फैक्ट है फैट का शरीर में सही डिस्ट्रिब्यूशन। यानी पूरे शरीर में फैट ज्यादा होना उतना खतरनाक नहीं है जितना सिर्फ पेट के आसपास जमा होना। पुरुषों के लिए 40 इंच से ज्यादा और महिलाओं के लिए 35 इंच से ज्यादा कमर का साइज मोटापे से जुड़ी बीमारियों का कारण बनता है।

क्या है पॉट बेली ओबेसिटी
यह पेट का मोटापा है जिसे सेंट्रल ओबेसिटी भी कहते हैं। इसमें पेट के आसपास एक्स्ट्रा फैट जमा हो जाता है।

हमारे शरीर में तीन तरह के फैट होते हैं:

1. ब्लड लिपिड्स यानी खून में फैट 2. सबक्युटेनियस फैट यानी स्किन के नीचे वाला फैट 3. विसरल फैट यानी अंदरूनी अंगों के बीच वाला फैट किसी भी वयस्क इंसान में विसरल फैट की आदर्श मात्रा 12 फीसदी तक होती है।

पेट का फैट है टफ

हमारे शरीर के फैट में 'बीटा 3' और 'अल्फा 2' नाम के रिसेप्टर होते हैं। शरीर के जिन हिस्सों में अल्फा 2 रिसेप्टर से ज्यादा बीटा 3 रिसेप्टर होते हैं, वहां का फैट घटना आसान होता है। पेट, कमर और हिप्स के आसपास के फैट में अल्फा 2 रिसेप्टर ज्यादा होते हैं, इसलिए वहां का फैट सबसे देर में घटना शुरू होता है। ऐसे में पेट का फैट पूरी तरह तभी घटेगा, जब बाकी शरीर से भी फैट घटना शुरू हो जाएगा। ऐसे में जरूरी है कि सिर्फ पेट को कम करने की एक्सर्साइज (क्रंच आदि) ही न करें बल्कि पूरे शरीर से फैट कम करें।

पेट के मोटापे से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं

विसरल फैट कोशिकाएं त्वचा के नीचे वाले फैट की तुलना में ज्यादा सक्रिय होती हैं। ये फैट कोशिकाएं ज्यादा मात्रा में विभिन्न तरह के मेटाबॉलिक प्रॉडक्ट रिलीज करती हैं जिनका शरीर पर बुरा असर पड़ता है। अध्ययनों में यह पाया गया है कि दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाने में पेट के मोटापे की भूमिका सामान्य मोटापे कहीं ज्यादा होती है।




ऐसे नापें पेट का मोटापा
पेट के मोटापे का अंदाजा घर में उपलब्ध साधारण इंच टेप से पेट के घेरे को नाप कर भी लगाया जा सकता है। पेट की माप के लिए 5 रूल फॉलो करें:

1- शीशे के सामने खड़े होकर सबसे पहले पेट को ढकने वाले सभी कपड़ों को हटा दें। कपड़े की कोई भी लेयर पेट के साइज की सही माप में दिक्कत हो सकती है। 2- आपके कमर की हड्डी ऊपर की ओर जहां खत्म होती है और पसलियों की हड्डी (चेस्ट रिब्स) नीचे की ओर जहां खत्म होती है, दोनों के बीच का हिस्सा पेट कहलाता है। 3 - इंच टेप को जीरो की तरफ के छोर को नाभि के बीच में इस तरह से रखें कि वह जमीन के पैरलल हो। 4- टेप को इस तरह से पेट के आसपास घुमाएं कि वह पेट में धंसे बिना पूरा घूम जाए। अब माप को दर्ज करें। 5- दोबारा माप लें। अक्सर एक बार लिया गया माप सटीक नहीं होता इसलिए 3 बार माप लेना बेहतर रहता है।

नोट: पुरुषों में अगर कमर का घेरा 40 इंच (102 सेंटीमीटर) से ज्यादा है और महिलाओं में 35 इंच (88 सेंटीमीटर) से ज्यादा है, तो समझ जाएं कि वे पेट के मोटापे से पीड़ित हैं।

बड़े पेट की हमजोली बीमारियां:

पेट पर जमा चर्बी कई बीमारियों को साथ लेकर आती है। ये मुख्य हैं:
- टाइप-2 डायबीटीज - हाई बीपी - सोते वक्त सांस लेने में तकलीफ या स्लीप एप्निया - दिल की बीमारियां - महिलाओं में मेंसेस से जुड़ी परेशानियां, चेहरे पर एक्स्ट्रा बाल और इनफर्टिलिटी की समस्याएं - गाउट - कुछ तरह के कैंसर, जैसे कि मीनोपॉज के बाद महिलाओं में गर्भाशय और स्तन कैंसर

पेट के मोटापे की आम वजहें

- पेट का मोटापा महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा परेशान करता है, क्योंकि महिलाओं के सेक्स हार्मोंस पेट की कैविटी में फैट जमा नहीं होने देते। हालांकि, मीनोपॉज के बाद महिलाओं में भी पेट के मोटापे की आशंका पुरुषों जितनी ही हो जाती है। यही वजह है कि अक्सर 40-45 की उम्र तक बिल्कुल स्लिम दिखने वाली कुछ महिलाएं अचानक 50 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते पेट और हिप के मोटापे की शिकार हो जाती हैं। लाइफ स्टाइल और जेंडर के अलावा, चंद आदतें भी पेट के मोटापे के लिए जिम्मेदार होती हैं, जो हैं:

- किसी भी तरह की एक्सर्साइज न करना - ज्यादा कैलरी वाला खाना - स्मोकिंग - ज्यादा शराब पीना

पेट तेरे रूप अनेक

1. उभर हुआ पेट

- पेट ऊपर से नीचे तक फूला हुआ रहता है। - यह हजम न हो सकने वाला खाना ज्यादा खाने से होता है। ऐसा खाना, जिसमें विटामिन और मिनरल्स की मात्रा कम होती है।

क्या करें 

- ऐसे मामलों में हल्की एक्सर्साइज और बैलेंस डाइट से पेट कम करना आसान होता है। - साथ ही, ऐसे ड्रिंक्स लें, जिनसे डाइजेशन ठीक रहे। मिसाल के तौर पर छाछ, नींबू पानी आदि। इससे आपके पेट का उभार कम होगा।

2. टायर बेली फैट

- इस तरह के मोटापे में साइड से पेट टायर की शक्ल में बाहर की ओर निकलता है। - पेट का यह मोटापा घंटों एक जगह बैठे रहकर काम करने और फिजिकली एक्टिव न होने की वजह से होता है। - ऐसे लोगों में मीठी चीजें खाने की आदत समस्या को और बढ़ा सकती है।

क्या करें 

अगर आपका मोटापा इस कैटिगरी में आता है तो सबसे पहले आप अल्कोहल और सोडा वाले कोल्ड ड्रिंक्स फौरन बंद कर दें।

- इस समस्या से निजात पाने के लिए हेल्दी डाइट लें और फिजिकली एक्टिव हो जाएं। रोज तकरीबन 1 घंटे की ब्रिस्क वॉक करें।

3. लो बेली फैट

- पेट ऊपर की बजाय नीचे की ओर से ज्यादा निकला रहता है। पेट के निचले हिस्से का मोटापा अक्सर एक जगह बैठकर लगातार काम करने की आदत और एक ही तरह का खाना खाने की वजह से होता है। इस तरह के मोटापे से पीड़ित लोग शरीर के बाकी हिस्सों से पूरी तरह से स्लिम दिखते हैं, लेकिन पेट के निचले हिस्से में फैट जमा होने की वजह से मोटे नजर आते हैं।

क्या करें

इस समस्या से निजात का सबसे आसान तरीका है, अपनी दिनचर्या में एक्सर्साइज शामिल करें। खाने में वैरायटी रखें, संतुलित आहार लें और अनार, गाजर, मौसमी जैसे फलों के जूस पिएं, जो पेट से फैट हटाने में मददगार साबित होते हैं।

4. स्ट्रेस बेली ओबेसिटी

इस कंडिशन में पेट नीचे की तरफ लटका हुआ गोल होता है। इस समस्या के शिकार ज्यादातर लोग परफेक्शनिस्ट होते हैं, लेकिन उन्हें पाचन संबंधी समस्या होती है, जिसके चलते अक्सर पेट फूला रहता है।

क्या करें

वक्त पर खाना खाएं, जंक फूड और ज्यादा मात्रा में कैफीन (चाय, कॉफी, चॉकलेट ड्रिंक्स आदि) वाली चीजें लेने से बचें।

मोटापे पर पहले वार में खानपान हथियार:

कार्बोहाइड्रेट्स घटाएं

- कार्बोहाइड्रेट 2 रूपों मे आते है। पहले वे, जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम (अच्छा) होता है, इन्हें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट भी कहा जाता है और दूसरे ज्यादा ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले होते हैं, जो सिंपल कार्बोहाइड्रेट भी कहे जाते हैं।

- ज्यादा ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजें खून में तेजी से ग्लूकोज का लेवल बढ़ाती हैं और टाइप-2 डाइबीटीज (प्रौढ़ होने पर सामने आने वाली), हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा जैसी कई बीमारियों को बढ़ावा देते हैं।

- पास्ता, शहद और टेबल शुगर, मैदे और चावल से बनी चीजों से जहां तक हो सके, बचें। ये सब चीजें ज्यादा ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स हैं।

-एनर्जी के लिए कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स का इस्तेमाल करें जो कि साबुत अनाज, दालों, ओटमील और ज्वार आदि से मिलता है। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है।

प्रोटीन बढ़ाएं

- पानी के बाद शरीर में सबसे ज्यादा जो तत्व होता है, वह है प्रोटीन।

- प्रोटीन टूटकर अमीनो एसिड में बादल जाता है, जो कि शरीर में प्रोटीन्स बनने के लिए जरूरी होता है।

- प्रोटीन मेटाबॉलिजम बढ़ता है और खुराक घटाता है। प्रोटीन की वजह से बढ़े हुए मेटाबॉलिजम के साथ आपका शरीर पहले जैसे कार्बोहाइड्रेट और फैट खाने के बावजूद ज्यादा कैलरी बर्न कर पाएगा। इससे मसल्स बनने में मदद मिलेगी और पेट घटने लगेगा।

- प्रोटीन हरी मटर, ड्राई फ्रूट्स, बींस, हरी पत्तेदार सब्जियां, सोया मिल्क, दही, मछली और अंडे में होता है।

फाइबर जरूरी 

- फाइबर सॉल्युबल और इनसॉल्युबल यानी घुलनशील व अघुलनशील, दो तरह के होते हैं।

- सॉल्युबल फाइबर मोटापा कम करता है क्योंकि इससे बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता है।

- ओट्स यानी जई में दूसरे अनाजों के मुकाबले सबसे ज्यादा सोल्यूबल फाइबर होता है।

- सॉल्युबल फाइबर के अच्छे स्रोतों में ओटमील, बीन्स, मटर, रेशेदार फल, स्ट्रॉबेरी और सेब आदि शामिल हैं। -अच्छा फाइबर जल्द ही आपको पेट भर जाने का एहसास कराते हैं, ऐसे में आप कम कैलरी खाते हैं।

भरपूर पानी पिएं
- पानी आपका मेटाबॉलिजम ठीक करता है और पेट भरा होने का एहसास कराता है। रोज 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं

- अगर आपको स्वीटेंड ड्रिंक्स (कोक आदि) पीने की आदत है, तो इसे पानी से रिप्लेस कर दें।

- खाना खाने से आधा घंटा पहले एक गिलास पानी पिएं। इससे आपको कम खाने में पेट भरने का एहसास होता है।

- गुनगुना पानी पीने से मेटाबॉलिजम अच्छा होता है। इसकी वजह से एक्सट्रा कैलरी बर्न होती है।

- शरीर में अगर पर्याप्त नमी नहीं होगी तो आप लंबे वक्त तक बिना थके एक्सर्साइज नहीं कर पाएंगे।

एक्सर्साइज: ये एक्सर्साइज हो सकती हैं कारगरः

एरोबिक एक्सर्साइजः पेट का मोटापा कम करने के लिए एक्सर्साइज बहुत जरूरी है।

टहलना- पेट का मोटापा कम करने के लिए सबसे असरदार एक्सर्साइज है तेज कदमों से रोजाना 45-50 मिनट तक टहलें।

तैराकी- तैराकी पूरे शरीर के लिए एक अच्छी एक्सर्साइज होती है। इससे बहुत ज्यादा कैलोरी बर्न होती है। यह मेटाबोलिजम रेट बढ़ाता है, इसलिए काफी फायदेमंद साबित होता है।

जॉगिंग- यह एक अन्य लोकप्रिय एरोबिक एक्सर्साइज है जो आपके लिए बेहतरीन साबित हो सकता है। इससे आपके दिल की पंपिंग की क्षमता बढ़ती है और आपका मेटाबोलिजम बेहतर होता है। रोज तकरीबन 2 किलोमीटर जॉगिंग से काफी फैट बर्न होता है।

साइकलिंग- एक्स्ट्रा वजन हटाने के लिए साइकलिंग काफी कारगर है। रोज तकरीबन 1 घंटे तक खुले में साइकल चलाने से 300 कैलरी बर्न होती है।

इनसे मिलेगा फ्लैट टमी

वर्टिकल लेग क्रंच
जिसे आप क्रंच कहते हैं यह वही है। इसमें बस आपको अपनी टांगें एकदम सीधी ऊपर की ओर करनी हैं और धीरे-धीरे नीचे लानी हैं। ऐसा करते वक्त हाथों को सिर के पीछे रखें। इससे जोर पेट पर पड़ेगा। 10-10 के दो सेट से शुरुआत करके धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 20-20 तक जाएं।

रिवर्स क्रंच

कोर मसल्स मजबूत करने के बेहतरीन एक्सर्साइज माना गया है। पीठ के बल लेट कर पैरों को ऊपर की ओर उठाएं और 90 डिग्री पर रोकें। इसके बाद सिर के पीछे हाथों को रखें पेट का जोर लगा कर उठने की कोशिश करें। शुरुआत में 5 बार राइट और 5 बार लेफ्ट की तरफ जाएं। धीरे-धीरे 15-15 के सेट लगाने की कोशिश करें।

मिक्स करें एक्सर्साइज: हफ्ते में 5 दिन 20 मिनट

कार्डियो (ऐसी एक्सर्साइज जिनमें दिल सामान्य से तेज होकर तकरीबन 145 धड़कन प्रति मिनट तक धड़कने लगता है), 15 मिनट मसल बिल्डिंग (डंबल के 10-10 के 2 सेट लगाना, बेंच पर लेट कर वजन उठाना, मल्टी जिम में चेस्ट और पीठ की एक्सर्साइज करना आदि) और 10 मिनट ऐब्स एक्सर्साइज (क्रंच) के जरिए पेट कम हो सकता है।

योग का लें सहारा: अगर आपके पास जिम में पसीना बहाने का वक्त नहीं है तो योगासन भी पेट कम करने का बेहतरीन तरीका साबित हो सकते हैं।

1. ताड़ासन यानी माउंटेन पोज - इससे ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और आपका शरीर गंभीर एक्सर्साइज के लिए तैयार हो जाता।

2. सूर्य नमस्कार- इसमें 12 योग पोजिशन होती हैं और हर एक पोज का आपके शरीर पर अलग असर पड़ता है। आगे और पीछे झुकने वाली पोजीशन से शरीर की स्ट्रेचिंग होती है। इसके साथ डीप ब्रीदिंग से डीटॉक्सिफिकेशन होता है। इसे रोज सुबह, जब सूर्य की रोशनी तीखी नहीं होती की तरफ मुंह करके करने से ज्यादा लाभ होता है।

3. पादहस्तासन यानी आगे की ओर झुकना- इसमें फर्श पर बैठकर पैर को आगे की ओर फैलाकार नाक से घुटनों को छूने का प्रयास करते हैं। इससे बहुत ज्यादा फैट बर्न होता है, खासतौर से पेट का फैट।

4. पवनमुक्तासन- इससे गैस्ट्रिक, अपच और कब्ज की परेशानी कम होती है। चूंकि इस आसन में आपके घुटने पेट पर दबाव बनाते हैं ऐसे में इससे पूरे एरिया से कुछ मिनटों में ही अच्छा खासा फैट बर्न होता है।

5. नौकासन- पेट का मोटापा कम करने में यह बेहद कारगर होता है। इस पोजीशन में एक मिनट भी रहने से पेट की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होता है और आपके ऐब्स की टोनिंग होती है।

6. उष्ट्रासन यानी कैमल पोज - यह पोज नौकासन के उलट होता है। इससे नौकासन के दौरान आपके पेट की मासंपेशियों पर पड़ी टेंशन कम होगी और मांसपेशियों की अच्छी टोनिंग होगी।

7. उत्तानपादासन- इससे पेट के निचले हिस्से, जांघ और हिप से फैट हटाने में मदद मिलती है। प्रेग्नेंसी के बाद कमर के आस-पास जमा फैट हटाने में यह बेहद कारगर आसन है।

8. भुजंगासन यानी कोबरा पोज- इस आसन से आपके पेट में अच्छा खासा स्ट्रेच पड़ता है। रेग्युलर इसे करने से पीठ की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। यही वजह है कि बच्चे के जन्म के बाद कमर दर्द से राहत के लिए भी यह आसन करने की सलाह दी जाती है।

9. धनुरासन- यह पोज आपके पेट की बढ़िया टोनिंग करता है। पेट की स्ट्रेचिंग के साथ-साथ इससे पीठ, जांघों, भुजाओं और छाती की मसल्स की भी टोनिंग होती है और आपका पॉश्चर सुधरता है।




फ्लैट टमी के सुपर सिक्स




1. सुबह उठने के बाद और वर्क आउट से पहले ओटमील या कॉर्नफ्लैक्स जैसा कुछ हेल्दी खाएं। इससे आपके मेटाबॉलिजम को अच्छी शुरुआत मिलेगी।

2. सलाद को अपने भोजन का मुख्य हिस्सा बनाएं। इससे बेहद कम कैलरी में आपका पेट भर जाएगा और जरूरी न्यूट्रिशन भी मिल जाएंगे।

3. दिन भर 8-10 गिलास पानी पिएं। इससे आपके शरीर से टॉक्सिन निकलता रहेगा।

4. कार्बोहाइड्रेट्स से पूरी तरह परहेज न करें। शरीर की एनर्जी की जरूरतें पूरी करने के लिए रोज 50-100 ग्राम तक कार्बोहाइड्रेट्स जरूर लें। अगर आप रोटी खाना पसंद करते हैं, तो दो या तीन की जगह एक रोटी खाएं। रोटी खाना बंद न करें।

5. डिनर में हमेशा हल्का खाना खाएं। ऐसे में अपने पेट को दिन भर की थकान के बाद थोड़ा आराम दे सकते हैं। रात के लिए कुछ हल्का खाएं, जैसे कि क्लियर सूप, एक पीस चिकन के साथ आधा कप सलाद या सिर्फ कुछ फल या एक गिलास दूध भी ले सकते हैं।

6. एक जरूरी बात यह भी है अगर पेट कम रखना है तो रात में 6 से 8 घंटे की नींद जरूर लें।

सेक्स जीवन को खुशगवार बनाने में मददगार है 'योग'


शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को बरकरार रखने के साथ ही शरीर को प्रकृति से एकाकार कर देने वाली 5,000 वर्ष प्राचीन क्रिया है- योग। वैसे तो पहले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के साथ ही योग, पूरी दुनिया में छा चुका है। लेकिन यह बात कम लोग ही जानते होंगे कि योग के कुछ आसन सेक्स जीवन को खुशगवार बनाने में भी काफी मददगार हो सकते हैं।

योग एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सेक्स के लिए मस्तिष्क का शांत होना जरूरी है, जिससे सेक्स के दौरान अत्यधिक सक्रिय मस्तिष्क को अधिक ऑक्सीजन और सूक्ष्म पोषक तत्व मिल सकें और जननांगों तक रक्त का बेहतर प्रवाह हो सके। प्रशिक्षित योग पेशेवर के मार्गदर्शन में योग व्यक्ति को चरम उत्कर्ष पर पहुंचा सकता है। सेक्स विशेषज्ञों की मानें तो, 'दैनिक तनाव, धूम्रपान, शराब और शर्करा का अत्यधिक सेवन पुरुषों और महिलाओं की सेक्स क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करता है। योग से दिमाग शांत होता है जो जननांगों तक रक्त प्रवाह बढ़ाने में सहायक होता है।'



आसन जो हैं मददगार
सेक्स जीवन बेहतर बनाने के लिए योग के दो आसनों- शवासन और वज्रासन करने की सलाह दी जाती है। शवासन जहां शरीर में नवीन ऊर्जा का संचार करता है और रक्तचाप, बेचैनी और अनिद्रा की परेशानी को कम करता है। वहीं वज्रासन शरीर को अत्यधिक मजबूत और स्वस्थ बनाता है। योग विशेषज्ञ दीपक झा की मानें तो, इन दोनों आसनों के अलावा पश्चिमोत्तासन, हलासन और भुजंगासन पुरुषों में सेक्स के लिए जिम्मेदार हर्मोन टेस्टोस्टेरोन का स्राव बढ़ाता है और जननांग को मजबूती प्रदान करता है।

योग से लाभ
योग पर किए गए वैश्विक अध्ययनों में भी खुलासा हुआ है कि योग से सेक्स जीवन में लाभ मिलता है। शोध पत्रिका 'जर्नल ऑफ सेक्शुअल मेडिसिन' में हाल ही में प्रकाशित दो अध्ययनों के अनुसार 20 से 60 आयुवर्ग के 100 पुरुषों और महिलाओं को 12 सप्ताह तक योग शिविर में रखा गया। योग शिविर में शामिल लोगों से योग शिविर में शामिल होने से पहले और बाद के उनके सेक्स जीवन से जुड़े कुछ सवालों के उत्तर देने को कहे गए। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि योग शिविर में हिस्सा लेने के बाद उनकी सेक्स से जुड़ी सभी तरह की गतिविधियों जैसे यौन उत्तेजना, यौन संतुष्टि, यौन क्षमता, आत्मविश्वास और चरम आनंद में इजाफा पाया गया।

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