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आओ टैंशन ख़त्म करें


आओ टैंशन ख़त्म करें

तीस साल की उम्र में आते-आते अक्सर ही हम चिंता, टैंशन, तनाव या डिप्रेशन के शिकार होने लगते हैं। हमें बात-बात पर गुस्सा या चिड़चिड़ाहट होने लगती है या हम उलझन में पड़ जाते हैं। बीमारियां, निराशा, उदासी जैसे नकारात्मक विचार हमें अपने शिकंजे में ले लेते हैं। हमको पता ही नहीं लगता कि हम कई गंदी आदतों के शिकार भी बन जाते हैं। अच्छा खाना पीना टॉनिक और दवाइयां भी हमारे ऊपर कम असर करने लगती हैं। परंतु यदि हम अपनी बुरी आदतों में सुधार कर लें और कुछ अच्छी आदतें और नियमों को अपने जीवन में जगह दें तो हम अपने तन-मन में नई हिम्मत और नई उम्मीद जगा सकते हैं। संभव है पहले-पहल हमें इन नियमों को अपनाने में असुविधा हो। पर अपनी सकारात्मक सोच के चलते हम आसानी के साथ इनको अपनी ज़िंदगी में शामिल कर सकते हैं। और तो और अपने रहन-सहन में लाए गए इस थोड़े से बदलाव से हम मामूली नज़ला-ज़ुकाम से लेकर हार्ट डिज़ीज़ और कैंसर जैसी नामुराद बीमारियों से अपने आप को दूर रख सकते हैं। क्या हो सकते हैं यह नियम आओ ज़रा इस पर नज़र डालें-
1. इस उम्र में आते-आते अक्सर हमें पता ही नहीं लगता कि हम अपने आप के बारे में सोचना छोड़कर दूसरों के बारे में अच्छा या बुरा सोचने लग जाते हैं क्योंकि हमारा विवाह हो चुका होता है। तब तक बच्चे भी हो जाते हैं। हमारी सकारात्मक सोच अपने जीवन साथी और बच्चों के प्रति केन्द्रित हो जाती है। नकारात्मक सोच हम अपने आसपास और व्यापारिक प्रतियोगी की तरफ़ लगाना शुरू कर देते हैं। यदि आप अपने जीवन में शांति का एहसास चाहते हो तो भूल जाओ इन सब के बारे में। पहले आप अपने ऊपर ध्यान दें। अपने आपको शारीरिक एवं मानसिक रूप से सेहतमंद महसूस करें। अपने भोजन और पहरावे की तरफ़ एक नज़र डालकर देखें यदि कुछ सुधार की ज़रूरत है तो उसमें भी सुधार लाएं।

2. इस उम्र में आते-आते अक्सर ही साइलेंट किलर के रूप में मोटापा घेरने लगता है। कुछ और बीमारियां भी अंदर ही अंदर हमारे शरीर में जगह ढूंढने लगती हैं। जिनसे बचने के लिए ज़रूरी है कि हम योगा, मेडिटेशन और कसरत को जीवन में अपनाने की शुरूआत कर दें। जैसे-जैसे इंसान की उम्र बढ़ती जाती है वैसे-वैसे उसकी मांसपेशियां कमज़ोर होने लगती हैं। शरीर और हड्डियों की ताक़त घटने लगती है। कसरत, योगा और मेडिटेशन इनकी भरपाई करने का सबसे आसान और सस्ता उपाय है। शारीरिक कसरत आपको शरीर के साथ-साथ मानसिक रूप से भी सेहतमंद रखती है। पर कोई भी कसरत करने से पहले अपने पारिवारिक डॉक्टर से पूरा-पूरा चैकअप करवा लें। यदि संभव हो तो एरोबिक और तैराकी को अपने फिटनेस प्रोग्राम में शामिल करने की कोशिश करें। कुछ समय व्यापार और पैसे की प्रतियोगिता छोड़कर खेलों में प्रतियोगिता की शुरूआत करें। सुबह की सैर की और शाम को टहलने की आदत बनाएं।

3. यदि आप अब तक पानी के असली महत्त्व से अंजान रहे हो तो आज से ही इसके असली महत्त्व की तरफ़ ध्यान दें। इसको ज़िंदगी में महत्वपूर्ण स्थान दें। पानी शरीर को पोषक तत्त्व तो देता है साथ ही यह शरीर का तापमान भी संतुलित रखता है। हमारे पाचन को ठीक करने के साथ-साथ हड्डियों और जोड़ों के लिए चिकनाई पैदा करता है। शरीर की गंदगी को बाहर निकालकर चमड़ी को सेहतमंद, जवान और आकर्षक बनाता है। इसलिए आज से ही रोज़ाना आठ-दस गिलास पानी पीने का एक नियम ज़रूर बना लें। गर्मियों में पानी हमेशा ताज़ा पीयें न कि फ्रिज का। इसी तरह सर्दियों में ताज़ा पानी पिया जा सकता है। पानी का सही उपयोग हमें कई प्रकार की बीमारियों से दूर रखता है। जहां पानी मोटापे को दूर रखता है वहीं दुबले-पतले लोगों को सेहतमंद रखता है। यदि आप किसी समय अचानक ही किसी टैंशन के शिकार हो जाते हो तो तुरंत ही बाथरूम में जाएं यदि सर्दी है तो गर्म पानी के साथ स्नान करें और दूसरे मौसम में ताज़े पानी का उपयोग करें। यदि स्नान की सुविधा पास में न मिल सके तो बस मुंह हाथ ही धो लें। यह छोटा सा उपाय टैंशन दूर करने का बहुत ही बढ़िया तरीक़ा है।

4. क्या कुछ ईश्‍वर द्वारा दी गई कमज़ोरियां जैसे कोई सामाजिक कमज़ोरी, पैसे की कमी, रुतबे में कमी, अतीत में मिली असफलता ने आपको नकारात्मक सोचने का आदी बना दिया है? यदि यह सच है तो अब भी इसके ऊपर रोक लगा लें नहीं तो शारीरिक रूप से आपको कमज़ोर होने में देर नहीं लगेगी। नकारात्मक विचार एक छूत की बीमारी की तरह होते हैं। जिसको सकारात्मक सोच वाली दवाई ही क़ाबू कर सकती है। यदि आप इस बीमारी के शिकार हो गए हैं तो सबसे पहले तो अपने आसपास के अन्य ऐसे बीमार लोगों से दूर रहें। इसके उल्ट सकारात्मक सोच से युक्‍त लोगों की निकटता हासिल करें। आप अपनी अब तक की नाकामयाबियों को समय का फेर समझते हुए उनके कारण ढूंढने के लिए सकारात्मक सोच उत्पन्न करके आगे बढ़ सकते हैं। सबसे ज़रूरी है कि आप अपने जीवन में किसी ख़ास व्यक्‍त‍ि को अपना आदर्श बनाएं। उसके जीवन का अध्ययन करें। जैसे आप अमिताभ बच्चन के जीवन से प्रेरणा ले सकते हैं कि किस तरह उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों में अपनी हिम्मत नहीं छोड़ी थी। हर वस्तु के हमेशा दो पहलू होते हैं। एक सकारात्मक और दूसरा नकारात्मक। आप अपने दिमाग़ में सकारात्मक सोच को सेट करके अपने अंदर की कमज़ोरियों को नज़रअंदाज़ करके अपनी अच्छाइयों को पहचानें और उन अच्छाइयों पर ध्यान दें। फिर देखेंगे कि आपके अंदर अच्छाइयां बढ़ती जा रही हैं। एक समय ऐसा आएगा यह इतनी ज़्यादा बढ़ जाएंगी कि आपकी कमज़ोरियां इसके आगे फीकी पड़ जाएंगी और आप भी एक स्टार बन जाएंगे।

5. जब आपकी नई-नई शादी होती है तो सेक्स और शारीरिक आकर्षण का एक ख़ास स्थान होता है। परंतु धीरे-धीरे ज़िंदगी के दूसरे पहलू, कारोबारी उलझनें, बच्चों के सवाल और पारिवारिक झमेले इसके ऊपर हावी हो जाते हैं। जिस कारण लंबे समय तक सेक्स और शारीरिक ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ करना टैंशन को जन्म देता है। यदि किसी समय आपको लगे कि आपकी सेक्स लाइफ़ अपना प्रभाव कम करने लगी है तो दोनों पति-पत्‍नी इस बारे में खुलकर बातचीत करें। टैंशन को दूर करने के लिए अपने रोमांस को नये सिरे से शुरू करें। ठीक उसी तरह जिस तरह पहली बार शुरू किया था। दोनों मिलकर हंसने मुस्कुराने के मौक़े ढूंढें, अपने दुःख-सुख बांटें, टी.वी. बंद कर दें, किचन का काम कुछ समय तक करना भुला दें और दोनों मिलकर एकांत का मज़ा लूटें। सेक्स का आनंद लें। डॉक्टरों के अनुसार सेक्स आपके दिमाग़ में ओडोफिलन के लेवल को बढ़ा देता है। इसमें मानसिक खुशी बढ़ाने वाला रसायन होता है जो डिप्रेशन को ख़त्म कर देता है।

6. शुरू-शुरू में कुछ बातें हमने शौक़-शौक़ में अपना रखी होती हैं। परंतु अब तक यह शौक़ हमारी बुरी आदतों में बदल चुका होता है। जो कि अक्सर तनाव का कारण बनने लगता है। इसलिए आज से ही फ़ैसला करें कि हम इन गंदी आदतों का त्याग कर देंगे। शराब, सिगरेट, जुआ शुरू में मनोरंजन के रूप में अच्छे लगते हैं परंतु बाद में धीरे-धीरे सभी शौक़ परेशानियों का कारण बन जाते हैं। शराब और सिगरेट हमारी सेहत के लिए हानिकारक है। इस बारे में ज़्यादा बताने की ज़रूरत नहीं है। वैसे जुआ भी तो आजतक किसी का नहीं हुआ है पर यदि कुछ लोगों को यह लाभ देता है तो याद रखो कि शॉर्टकट तरीक़े से कमाया गया पैसा हमेशा शॉर्टकट में ही चला जाता है।
7. अब तक आपने जो मन में आया वह खा लिया कोई परवाह नहीं। परंतु अब तो आपको भोजन की तरफ़ ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए। भोजन केवल जीने के लिए ही ज़रूरी नहीं बल्कि आपको कई बीमारियों से भी बचाता है। अपने भोजन के लिए बेहतर है कि आप किसी डाइटीशियन की मदद लें। अपने रोज़ाना के भोजन में फल और हरी सब्ज़ियों को अधिक से अधिक स्थान दें। फल और सब्ज़ियों में उनको पहल दें जो आपको कैंसर आदि बीमारियों के विरुद्ध रक्षा कवच का काम देती हैं। पपीता और सोयाबीन को अपने दैनिक भोजन में शामिल करें। फल और सब्ज़ियां हमेशां ताज़े रूप में ही इस्तेमाल करना लाभदायक सिद्ध होता है। डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह से अपने भोजन में लोह तत्त्व शामिल करें। चाय और कॉफ़ी का इस्तेमाल कम करें। सीज़न में आंवला किसी भी रूप में हर रोज़ इस्तेमाल करें। आंवला में बुढ़ापा दूर भगाने की ताक़त होती है। पालक और गाजर का भी किसी भी रूप में अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। पालक और दही कभी भी एक साथ नहीं खाने चाहिए। भोजन को हज़म करने के लिए शरीर को ज़्यादा एनर्जी ख़र्च करनी पड़ती है। इसलिए यदि रात को पेट भर कर भोजन करोगे तो उस वक़्त आपके शरीर को मेहनत करने का कोई मौक़ा नहीं मिलता इसलिए आपकी नींद में ख़लल पड़ेगा। रात में दही या चावल तो कभी भी नहीं खाने चाहिए। दिनभर चुस्त-दुरुस्त बने रहने के लिए नाश्ता ज़रूर भारी करें। लंच ज़रूरत के मुताबिक़ करें पर डिनर हमेशा हल्का ही करना चाहिए।


8. यदि आपने अपने आपको आध्यात्मिकता की तरफ़ नहीं मोड़ा है तो आज ही आध्यात्मिकता को अपनाएं। हर रोज़ 15 मिनट के लिए अपने आपको अकेला करें। प्रकृति के क़रीब होते हुए लंबी और गहरी सांस लें। क़ुदरत को समझने की कोशिश करें। यह सबसे बड़ी पूजा है। मन ही मन परमात्मा से एक प्रार्थना करें। इंसानी जीवन देने के लिए धन्यवाद करें। इसके बाद कुछ समय के लिए मन को सांसारिक बंधनों से आज़ाद करें। अपने मन में कोई ऐसी शक्‍त‍ि या मंत्र को बैठा लें जो आपको ताक़त देती हो। ऐसा करने से आपका डिप्रेशन छू मंतर हो जाएगा। इसके बाद क़ुदरत को और क़रीब से होकर देखने के लिए पंछियों को दाना डालें, पेड़-पौधों को पानी दें। आपके जीवन में कभी कोई परेशानी नहीं आएगी।

इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि आध्यात्मता को हमेशा ज़िम्मेदारी के बीच रहकर ही अपनाना चाहिए। दुनियादारी भूलकर, चोला पहन लेना, आज के जीवन में यह आध्यात्मिकता नहीं बल्कि पाखंड है। आध्यात्मिकता को अपनाने के लिए कभी-भी किसी पाखंडी डेरे के महंत की मदद बिल्कुल न लें।

9. जीवन में टैंशन को दूर भगाने के लिए कभी भी एलोपैथिक दवाइयां, शराब या और किसी नशे की मदद न लें। यह आपकी बीमारी को घटाने की बजाए बढ़ाते हैं। यदि दवाई की ज़रूरत ही हो तो होम्योपैथिक दवाइयों की मदद लें। होम्योपैथी का ही एक और रूप बैजलावर रैमेडी भी तनाव घटाने में मदद कर सकती है। होम्योपैथी में कैंसर तक को ख़त्म करने की ताक़त है। परंतु यह दवाई हमेशा किसी योग्य होम्योपैथिक डॉक्टर की देख रेख में ही लेनी चाहिए। कुछ हर्बल दवाइयां जैसे जिंकसेन और अश्‍वगंधा भी डिप्रेशन दूर करने में सहायक होती है।
तनावः सेक्स का दुश्मन



प्रकाश पटेल ने जब अपनी दिनचर्या पर ध्यान दिया तो वह अंदर तक घृणा से भर गया। उसकी पत्‍नी के चिकित्सक ने उसे अपने कार्यक्रम में सेक्स को भी जोड़ने के लिए कहा था क्योंकि उनकी शादी को 4 साल हो गए थे और उनका कोई बच्चा भी नहीं था। ऐसा इसलिए था क्योंकि वो हमेशा अपने निर्धारित कार्यक्रमानुसार ही चलता था।

उसके पास सेक्स के लिए समय नहीं था। जैसे-जैसे वो सफल हो रहा था उस पर अपनी क्षमता दिखाने का दबाव बढ़ता ही जा रहा था। इस कारण उसे थकान हो जाती और वो सेक्स की बजाए सोना पसन्द करता था। आज पहली बार उसे लगा कि उसने कभी अपने व अपनी पत्‍नी के साथ न्याय नहीं किया।

कुछ समय से देखा जा रहा है कि स्त्री-पुरुष सेक्स की बजाए सोना पसंद करते हैं क्योंकि उन पर थकान हावी रहती है। उनकी यह समस्या बढ़ती जा रही है वे समझ नहीं पा रहे कि सोते समय सेक्स कैसे करें। दोष किसको दिया जाये? मल्टीनेशनल कम्पनी के कॉल सेंटर व आई.टी. बूम ने पुरुषों की एक ऐसी प्रजाति विकसित कर दी है जो कि उत्साहहीन प्रेमी हैं। उनके कार्यक्रमों की भीड़-भाड़ में से सेक्स काटकर वर्क़ आवर, तनाव, यात्राएं आदि शब्द जुड़ गए हैं जिससे उनकी पर्सनल लाइफ भी अछूती नहीं रही है।


1950 की अपेक्षा हमारा खाली समय अब लगभग 40 प्रतिशत कम हो गया है। हम अब समय प्रबन्धन के फन्दे में बंधे रहते हैं और एक नई परेशानी से भी जूझ रहे हैं वह है “समय की कमी।” जब भी घर, काम व सेक्स को बैलेंस करने की बात आती है तो या तो सेक्स को नज़रअंदाज़ कर देते हैं या फिर सबसे नीचे कर देते हैं। वैसे भी कामकाजी जोड़ों के पास समय की भारी कमी रहती है, यह एक गंभीर सेक्स समस्या है। तनाव स्त्री-पुरुष दोनों की ही सेक्सुअल इच्छा को समाप्‍त कर रहा है। यह मानव के यौन जीवन का अदृश्य दुश्मन है। थकावट व तनाव यौन उत्तेजना को एक तरह से प्रतिबंधित कर रहे हैं। अगर देखा जाए तो केवल शारीरिक थकावट ही दोषी नहीं है बल्कि मानसिक थकावट भी उतनी ही दोषी है।

सबसे ज़रूरी बात यह है कि सेक्स को कभी भी किसी खाली दिन का आख़िरी काम न मानें बल्कि इसे जीवन व स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण अंग मानें क्योंकि सन्तुष्‍ट‍िदायक सेक्स आपको शारीरिक व मानसिक शक्‍त‍ि तो प्रदान करेगा ही साथ ही एक आराम भरी रात तथा एक प्यारी सुबह भी देगा।
इच्छानुरूप सेक्स केवल फ़िल्मों में ही नहीं होता बल्कि इसे आप हक़ीक़त में भी बदल सकते हैं। इसके लिए आपको सेक्स के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्‍त करनी होगी तथा अपने अन्दर सेक्स की चाहत पैदा करनी होगी।

सेक्स को नज़र अंदाज़ न करें

शराब पीने से भी उत्साह में कमी आती है तथा धूम्रपान से भी ऐसा ही होता है। वैसे तो रात में सोते समय हल्का खाना लेना चाहिए और यह एक बेहतर तरीक़ा भी है। अगर आप सेक्स के समय भारीपन नहीं चाहते तो सेक्स के बाद ही खाना खाएं या फिर हल्का खाना खाने के दो घंटे बाद सेक्स क्रिया करें तथा सेक्स क्रिया से निवृत्त होने के बाद हल्का मीठा डाल कर गुनगुना दूध पीएं इससे आपको अच्छी नींद आयेगी तथा सुबह आप तरो-ताज़ा उठेंगे और पूरा दिन अपने कार्यों का संचालन सुचारू रूप से करेंगे।

30 वर्षीय अनीता अपनी आँखों में आँसुओं को समेटे हुए मदद लेने के लिए डॉक्टर के पास गई। उसका कहना था कि पिछले 6 साल से पति उससे प्यार नहीं करता। उसने बताया कि वह उसके साथ सेक्स करने के बजाए केवल सोना पसंद करता है।

आज औरत व आदमी सभी की सेक्स व इससे जुड़े रोगों व व्याधियों के बारे में सोच बदल चुकी है। एक डॉक्टर के अनुसार 20 साल पहले मेरे पास आने वाले सभी 10 मरीज़ पुरुष थे आज 10 में से 4 मरीज़ स्त्रियाँ हैं। जब डॉक्टर ने अनीता से उसके पति को भी साथ लाने के लिए कहा तो वह खुद भी इस बात की इच्छुक थी। डॉक्टर ने उसके पति से बात की तथा उसे शराब, धूम्रपान आदि से दूर रहने तथा हर काम का कार्यक्रम बनाने की सलाह दी, जिसमें सेक्स का भी महत्वपूर्ण स्थान हो। डॉक्टर की उचित सलाह व मामूली चिकित्सा के बाद वह अपनी पत्‍नी से भरपूर प्यार व सेक्स करने लगा। पूर्व की भाँति अब महिलाएं घुट-घुट कर जीना नहीं चाहतीं। अब वे केवल शारीरिक संबंध ही नहीं चाहती बल्कि भावनात्मक रिश्ता भी चाहती हैं। यह एक रोचक तथ्य है कि अब औरतें भी प्रोएक्टिव हो रही हैं वे भी सेक्सुअल आनंद की बराबर मांग कर रही हैं।


मीडिया द्वारा नए-नए तरीक़ों की ख़बरें पाकर लोग डॉक्टरों के पास आ रहे हैं। आजकल के खास मुद्दे स्त्री यौन आवेग हीनता, सेक्सु्अल उत्साहहीनता या फिर कभी-कभी होने वाला सेक्स है। अब स्त्री-पुरुष सेक्स ही नहीं बल्कि बैटर सेक्स चाहते हैं। इसमें अधेड़ व उम्रदराज़ सभी तरह के मरीज़ हैं। आश्‍चर्यजनक तो यह है कि हर मरीज़ अपने साथ अपने साथी को भी लाना चाहता है। आजतक जिस सेक्सु अल आनंद को एक गुप्‍त विषय माना जा रहा था आज हर व्यक्‍त‍ि उस पर बात करने को इच्छुक है।

कुछ खास है ज़िंदगी में

सेक्स नज़रअंदाज करने की चीज़ नहीं है।

इसे जीवन व स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण अंग मानें।

तनाव यौन जीवन का छिपा हुआ दुश्मन है इससे बाहर निकलें।

हर काम का कार्यक्रम बनाएं, जिसमें सेक्स की भी जगह हो।

संतुष्‍टिदायक सेक्स शारीरिक व मानसिक शक्‍त‍ि देता है, साथ ही एक प्यारी-सी सुबह भी।





आधे सिर का दर्द
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आधे सिर का दर्द बहुत असहनीय होता है। आधे सिर का दर्द सूर्य निकलने के साथ ही शुरू हो जाता है। दिन में तेज़ दर्द रहने के बाद सूर्य अस्त होते-होते दर्द कुछ कम होने लगता है। इसका मुख्य कारण क़ब्ज़, बासी खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन, अधिक गर्मी व तेज़ हवा आदि हैं।

आधे सिर का दर्द सिर के बाएं या दाएं किसी भी भाग में हो सकता है। ऐसे में अधिक बेचैनी और कभी-कभी उल्टी हो जाती है। यदि आप भी परेशान रहते हैं आधे सिर के दर्द से तो।

आजमायें इन्हें भी:
प्रात: काल शौचादि से निवृत्त होकर एक सेब थोड़े से नमक के साथ खायें। इसका सेवन नियमित एक सप्ताह तक करें। सिर दर्द में लाभ मिलेगा।
सिर में बादाम के तेल की मालिश करने से भी आराम मिलता है।
पीपल के पत्तों की पानी में चटनी बना कर माथे पर लगाने से भी आराम मिलता है।
काली मिर्च के दस दाने और मिश्री 10 ग्राम पीस कर चूर्ण तैयार कर लें। प्रात: पानी के साथ लें।
गाय का ताज़ा घी या शुद्ध सरसों के तेल को सिर के जिस भाग में दर्द हो, उसी भाग के नथुने में दो चार बूंद डालने से दर्द ठीक हो जाता है। इस क्रिया को सुबह शाम 7 दिन तक नियमित करना चाहिए। आधे सिर के दर्द में आराम भी मिलेगा और नाक से खून गिरना भी बंद हो जायेगा।
गर्मी के दिनों में तरबूज के रस में मिश्री मिलाकर नियमित सुबह पीने से भी आधे सिर के दर्द में आराम मिलता है।
सफ़ेद चंदन को गुलाब जल में घिसकर उस लेप को माथे पर लगाएं।
नियमित रूप से खाना खाने के बाद दो चम्मच शहद लेने से आधे सिर का दर्द ठीक हो जाता है।




जिन दिनों अंगूर उपलब्ध हों, नियमपूर्वक खाने से आधे सिर का दर्द दूर होता है।
माथे पर देसी घी की मालिश करने से सिर दर्द में आराम मिलता है।
आधे सिर के दर्द में सौंठ या अदरक पानी में घिस कर उसका लेप माथे पर लगाने से भी आराम मिलता है।




पानी में दालचीनी पीसकर माथे पर लगाने से आराम मिलता है।
बादाम के तेल में केसर मिलाकर दिन में तीन बार सूंघने से लाभ होता है।
तुलसी के पत्तों को छाया में सुखाकर उसका चूर्ण बना लें। उसका सेवन शहद के साथ करने से आराम मिलता है।
इन से बचें:-
सर्दियों में ठंडे पानी में स्नान न करें।
अधिक समय तक गीले वस्त्रों में न रहें।
ठंडे पेयों का सेवन न करें।
अधिक चाय, कॉफी और मद्यपान न करें।
तेज़ धूप में बाहर न निकलें।
जब सिर का दर्द हो तो कुछ भी न पढ़ें, न टी.वी देखें।
अम्लीय भोजन का सेवन न करें। न ही तेज़ मसालों का सेवन करें। 
जो खाद्य पदार्थ क़ब्ज़ करते हों या गैस पैदा करते हों, ऐसे खाद्य पदार्थ न खाएं।

सिर दर्द से बचें


महानगरों में ख़ासकर लोगों में सिर दर्द का रोग बढ़ता जा रहा है। क्या है वास्तव में इस बढ़ते सिर दर्द का कारण। इसके लिए सबसे पहले तो महानगरों में तेज़ी से बढ़ता प्रदूषण ज़िम्मेवार है। चौराहे पर ट्रैफिक जाम में घंटों फंसा आदमी प्रदूषण का शिकार होता है और घर लेकर लौटता है सिरदर्द। ट्रैफिक जाम में सांसों में कार्बन की मात्रा अधिक जाती है। शुद्ध वायु का न मिलना एक बड़ा कारण है सिर दर्द का। हमारे शरीर में सिर का स्थान हृदय के ऊपर होता है इसलिए रक्त का परिभ्रमण ठीक से नहीं हो पाता है।

सिर दर्द का दूसरा प्रमुख कारण पैसे की होड़ में बढ़ रहा तनाव है। महीने का ख़र्च पूरा नहीं होने के कारण लोगों का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। अपने ख़र्च पूरे करने के लिए आदमी कई तरह के नए तरीक़े ढूंढ़ता है। सिर दर्द का कारण हमारा खानपान भी है। हम जल्दबाज़ी में खाते हैं। अन्न को पूरी तरह चबाकर नहीं खाते हैं। इस लिए अन्न की पूरी शक्ति शरीर को नहीं मिल पाती है। इससे चेहरे पर ओज भी नहीं दिखता। सिर दर्द से बचने के लिए हमें प्रातः काल उठकर लंबी सांसें लेनी चाहिए। हो सके तो रोज़ सुबह प्राणायाम करें। प्राणायाम शुद्ध वायु में ही करें।


खाने में तली हुई चीज़ें दिन में ही खाएं। अक्सर हम रात को खाने के बाद सो जाते हैं। अगर रात में तली हुई चीज़ें खा रहे हों तो खाने के बाद टहलने अवश्य जाएं। हो सके तो रात को भी खाने के कम से कम एक घंटे बाद ही सोएं। सिर दर्द से पीड़ित लोगों को मूत्र विसर्जन में कोताही नहीं करनी चाहिए। अगर मूत्र का ज़़ोर आ रहा हो तो इसे कदापि न रोकें। सिरदर्द से बचने के लिए मौसमी फलों का सेवन उचित होगा। कच्चे फल आतों के लिए लाभकारी होते हैं।

अगर आपको सिर दर्द रहता है तो इसका आयुर्वेद में इलाज कराएं। वहां इसके लिए त्रिफला व सत इसबगोल जैसी दवाएं हैं। इन दवाओं के सेवन से आदत नहीं पड़ती साथ ही इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है।

अगर आपके सिर में चक्कर आते हैं तो सफ़ेद जीरा को तवे पर भून लें उसमें चौथा हिस्सा काला नमक मिला लें। इसे एक चम्मच सुबह व शाम को लें। लाभ होगा। इसके अलावा सौंफ को तवे पर मल लें। उसमें चीनी मिला कर खाएं उससे भी लाभ होगा। इसके अलावा सिर दर्द में लक्ष्मी विलास रस (नारदीय) ले सकते हैं।

अगर आपको हमेशा सिर दर्द या तनाव रहता है तो बेहतर होगा कि आप किसी अच्छे आयुर्वैदिक चिकित्सक से सलाह लेकर दवाओं का सेवन करें।



महिलाओं में पनपता अम्लपित्त


मिलावट के इस युग में कई तरह के रोगों ने भी जन्म लिया है। खान-पान की तरफ़ बराबर सावधानी न बरतने से ‘अम्लपित्त’ (एसिडिटी) हो जाता है। अम्ल होने के मूल कारण हैं मस्तिष्क में तनाव का रहना, दूषित भोजन करना और शराब, चाय, कॉफी व सिगरेट का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल करना। इन्हीं कारणों से हमारी पाचन शक्ति ठीक नहीं रहती

अम्लपित्त रोग घरेलू महिलाओं की अपेक्षा नौकरीपेशा महिलाओं में जल्दी पनपता है क्योंकि वे अपने खान-पान की सीमा को लांघ जाती हैं।


अमेरिकन ट्रिब्यून के अनुसार अमेरिका में पिछले एक दशक में 35 प्रतिशत महिलाओं को अम्लपित्त ने अपना शिकार बनाया है। वैसे पुरुष वर्ग में भी अम्लपित्त के ख़तरे दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। इस रोग से बचने के लिए अपने आहार पर ध्यान देना होगा।

अम्लपित्त से कैसे बचें

.चार चम्मच मूली के रस में एक-दो चम्मच चीनी मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करें।

.करेले का रस खाना खाने के उपरांत सेवन करें।

.प्रातः शुद्ध हवा में घास पर नंगे पैर भ्रमण करें।

.आलू को रेत में भून कर सुबह-शाम खाएं।

.एक प्याला गर्म पानी व एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर दोपहर व रात को पिएं।

.किसी तरह का तनाव न पालें।
.एक केले को भली प्रकार मथ कर, दो छोटी इलायची के बीज पीसकर, साथ में एक चम्मच चीनी में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।

.बाज़ारू चाट-पकौड़ों से दूर रहें।

.मौसम के मुताबिक़ फलों का सेवन करें।

.देह पर खादी या सूती कपड़े पहनें।

.पैरों पर चमड़े के जूते चप्पल न पहनें।

.कंघी व साबुन अपनी ही इस्तेमाल करें।

.खट्टे-दाहकारक पदार्थ, जैसे उड़द या मट्ठा का प्रयोग न करें।

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