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सोशल मीडिया पर समय बितानेवाली लड़कियों को हो सकती है यह गंभीर बीमारी

सोशल मीडिया पर समय बितानेवाली लड़कियों को हो सकती है यह गंभीर बीमारी


सोशल मीडिया पर समय बितानेवाली लड़कियों को हो सकती है यह गंभीर बीमारी

आज के समय में सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है. हर कोई अपना ज्यादा से ज्यादा समय इसी पर बिताना चाहता है. लेकिन इसे लेकर एक ऐसा शोध हुआ है, जिसे सुनकर लड़कियां हैरान हो सकती हैं. इस शोध के रिपोर्ट की मानें तो सोशल मीडिया पर अपना ज्यादा समय बितानेवाली लड़कियां डिप्रेशन का शिकार हो सकती हैं.


समाचार एजेंसी सिन्हुआ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) की यवोन्ने केली की अगुवाई में शोधकर्ताओं ने पाया कि सोशल मीडिया पर एक दिन में पांच घंटे से ज्यादा समय बितानेवाली लगभग 40 फीसदी लड़कियाें में अवसाद के लक्षण दिखे हैं. इसमें शोध दल ने 14 साल की उम्र के करीब 11,000 लोगों के साक्षात्कार शामिल किये.


अब आप यह पूछेंगे कि सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव का शिकार लड़के नहीं होते हैं क्या. तो जवाब यह है कि लड़कों में यह दर बहुत कम है. इनमें यह 15 फीसदी से कम है. रॉयल कॉलेज ऑफ सायकायट्रिस्ट्स के पूर्व अध्यक्ष साइमन वेस्ली कहती हैं कि सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव का अंतर लड़के और लड़कियों में इतना ज्यादा क्यों हैं, यह कहना मुश्किल है.


अंग्रेजी अखबार ‘गार्जियन’ ने वेस्ली के बयान के हवाले से कहा कि शोधकर्ता अभी निश्चित तौर पर नहीं कह सकते हैं कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल से मानसिक स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ता है, लेकिन साक्ष्य इसी दिशा में संकेत देना शुरू कर चुके हैं. इस शोध को ‘ईक्लिनिकलमेडिसीन’ पत्रिका में प्रकाशित किया गया है.




रोजाना सेक्स करने से होते हैं फायदे ढेरों


रोजमर्रा की जिन्दगी में इंसान का सामना अक्सर तनाव और अवसाद से होता है। ऐसे में वह अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान नहीं दे पाते हैं और उदास रहने लगते हैं। कहते हैं कि इंसान का मन जब उदास रहने लगता है तो आपके विचारों में नकारात्मकता आने लगती है और काम बिगड़ने लगते हैं। इसलिए सबसे जरूरी है कि आप के पास लाख परेशानियां क्यों न हों आप उसका शांतिपूर्वक ढंग से समाधान निकालें। रोजमर्रा की जिन्दगी में तनाव का होना तो लाजमी है लेकिन तनाव को कम करना आपके मन और दिमाग में निर्भर करता है।


आपका मन जिस दिशा में लगता है आपके पास वैसे ही विचार उत्पन्न होने लगते हैं। इसलिए जरूरी है कि तनाव के वक्त भी आपकी सोच सकारात्मक हो। अगर हम सेक्स की बात करें तो, सेक्स मानव जिन्दगी का एक अभिन्न अंग है और खुशियों की वजह भी। क्योंकि सेक्स से तनाव और अवसाद दोनों कम होते हैं। इसलिए हम चाह कर भी इसे अनदेखा नहीं कर सकते हैं।



आपको सेक्स से जुड़ी ऐसी बात इस स्टोरी में बताने वाले हैं जिससे आपको अद्भुत स्वास्थ्य लाभ के बारे में मालूम होगा। जब आप सेक्स करते हो- महिला हो या फिर पुरुष, दोनों की ही भावनाएं चरम पर होती हैं और भावनात्मक लाभ की भी प्राप्ति होती है। हाल ही में सेक्स यानी की संभोग को लेकर एक अध्ययन किया गया था जिससे पता चला कि सेक्स के दौरान हमारा शरीर कुछ प्रकार के केमिकल कंपाउंड दिमाग में छोड़ता है, जिसकी वजह से हमारा शरीर रिलैक्स फील करता है।




जब शरीर को रिलैक्स मिलता है तो तनाव भी हो जाता है। वहीं, रोजना सेक्स करने से शरीर से जुड़ी कई सारी बीमारियां दूर हो जाती हैं और तो और आपको कभी भी दिल की बीमारी नहीं होगी। रोजमर्रा की जिन्दगी में सेक्स करने से आपको हर वक्त खुशी की अहसास होता है और आपका आपके पार्टनर के प्रति विश्वास गहरा होता है।



सेक्स का सबसे बड़ा फायदा है कि यह हार्मोन और अन्य कम्पाउंड रिलीज करता है, जिसकी वजह से संक्रमण कम होता है और यह शरीर की प्रतिरक्षा को भी बढ़ावा देता है। जिसकी वजह से संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है। वहीं, रोजाना सेक्स करने से आपकी जिन्दगी लंबी होती है।
जैतून के तेल का नाम आते ही दिमाग में सिर्फ और सिर्फ इसके लाभ ही आते हैं। इसे एक स्वास्थ्यवर्धक तेल माना जाता है। इसी कारण आजकल इसका अधिक से अधिक प्रयोग की सलाह दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जैतून के तेल से कुछ नुकसान भी होते हैं। इसलिए इसका प्रयोग बेहद सोच−समझकर व सीमित मात्रा में करना चाहिए। तो चलिए जानते हैं जैतून के तेल के कुछ नुकसानों के बारे में−


हो सकती है एलर्जी


जैतून का तेल कई तरह की एलर्जी जैसे डर्मटाइटिस, एक्जिमा और श्वसन एलर्जी हो सकती है। इसलिए जिन लोगों को हमेशा एलर्जी का खतरा रहता है, वह अगर ऑलिव ऑयल को भोजन में शामिल करते हैं तो इससे उन्हें परेशानी हो सकती है।


स्किन रैशेज की संभावना

ऑयली स्किन के लोगों को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। दरअसल, अनियंत्रित सीबम स्त्राव के कारण त्वचा तैलीय होती है और जब ऐसी स्किन पर जैतून के तेल का प्रयोग होता है तो इससे स्किन पर जलन, रैशेज व रेडनेस की समस्या पैदा होती है। वैसे ऑयली स्किन के अलावा नवजात शिशु व बेहद छोटे बच्चों पर भी ऑलिव ऑयल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।


सैचुरेटिड फैट संबंधित बीमारी


जैतून का तेल मोनोअनसैचुरेटेड वसा का एक समृद्ध स्रोत है। इस तेल के प्रत्येक चम्मच में लगभग 14 प्रतिशत सैचुरेटिड फैट और 120 कैलोरी होती हैं। जिसके कारण अगर नियमित रूप से अनप्रोसेस्ड ऑलिव ऑयल का सेवन किया जाए तो इससे मोटापा, दिल का दौरा, स्ट्रोक, स्तन कैंसर और पेट के कैंसर जैसी घातक बीमारियों के होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

कम करे ब्लड शुगर

ऑलिव ऑयल का सेवन ब्लड शुगर को सामान्य स्तर से भी कम कर सकता है। जैतून का तेल इंसुलिन रेसिसटेंस को बढ़ाता है, जिसके कारण यह रक्त में शर्करा के स्तर को कम करता है। जैतून के तेल का अधिक सेवन हाइपोग्लाइसीमिया, पसीना, कांपना, कमजोरी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

पित्त की पथरी का खतरा

जैतून के तेल का यह एक सबसे गंभीर दुष्प्रभाव माना जाता है। आवश्यकता से अधिक ऑलिव ऑयल का सेवन पित्ताशय को अवरूद्ध कर सकता है या फिर पित्त की पथरी की वजह बन सकता है। इसलिए ऑलिव ऑयल का लाभ तभी तक है, जब तक आप इसे सीमित मात्रा में प्रयोग करते हैं।


हो सकते हैं दस्त

ऑलिव ऑयल में हाई फैट कंटेंट पाया जाता है, जो पाचन विकार पैदा करते हैं। दरअसल, जब जैतून के तेल का अधिक सेवन किया जाता है तो शरीर को इसे पचाने में परेशानी होती है। परिणामस्वरूप, कभी−कभी व्यक्ति को दस्त की शिकायत हो सकती है।




सीने में दर्द या छाती में दर्द होना एक आम समस्या है जो अक्सर लोगों को इमरजेंसी डिपार्टमेंट जाने के लिए मजबूर कर देती है। मेडिकल भाषा में इसे एंजाइना पेक्टोरिस (angina pectoris ) या सिर्फ एनजाइना (angina) कहा जाता है।

यह तब होता है जब हार्ट में ब्लड का फ्लो कम हो जाता है। इस दौरान व्यक्ति को छाती में tightness, squeezing, भारीपन, जलन और प्रेशर का अनुभव होता है।


एनजाइना या सीने में दर्द के मुख्य लक्षण निम्न हैं – पेट के ऊपरी भाग, छाती, पीठ, गर्दन या जबड़ों में दर्द होना, जी मिचलाना, थकान होना, सांस फूलना, पसीना आना और चक्कर आना। महिलायों में यह लक्षण बिना सीने में दर्द हुए भी हो सकते हैं या फिर उनके सीने में बेचैनी हो सकती है।

सीने में दर्द के मुख्य कारण निम्न हैं – धूम्रपान, मधुमेह (डायबिटीज), हाई कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्त चाप (हाई ब्लड प्रेशर), गतिहीन और आलस्य भरी जीवनशैली और हृदय रोग होने का पारिवारिक इतिहास।

कुछ मामलों में सीने में दर्द हार्ट अटैक का लक्षण भी हो सकता है। इसमें सिर्फ एक ही अंतर है कि एनजाइना का दर्द हार्ट अटैक एक दर्द के मुकाबले कम होता है और 5 से 10 मिनट से ज्यादा नहीं टिकता।



अक्सर सीने में दर्द एक्सरसाइज करने के दौरान हो सकता है और आराम करने के बाद अपने आप ठीक हो जाता है। एक्सरसाइज के दौरान शरीर के अंगों को ज्यादा ऑक्सीजन की जरुरत होती है जिसे ब्लड सप्लाई करता है, लेकिन एनजाइना होने पर हार्ट में ब्लड फ्लो कम होता है जिससे ऑक्सीजन की पूरी पूर्ति नहीं हो पाती और सीने में दर्द होने लगता है। साथ ही, यह कुछ प्रिस्क्रिप्शन मेडिसिन्स (डॉक्टर के द्वारा लिखी गई मेडिसिन्स) जैसे नाइट्रोग्लिसरीन (nitroglycerin) लेने से भी ठीक हो जाता है। लेकिन एनजाइना को आप हलके में न लें क्योंकियह भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक का शुरुआती संकेत हो सकता है।


एनजाइना अक्सर तब होता है जब हार्ट तक जाने वाली धमनियों में plaque जमा होने के कारण ब्लड फ्लो रुकने लगता है। लेकिन सीने में दर्द के अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे मांसपेशियों की ऐंठन (muscle spasm), ऊपरी श्वसन संक्रमण (upper respiratory infection), पेट में अल्सर (stomach ulcer), बदहजमी (indigestion) और मूत्राशय में रोग (bladder diseases).

सीने में दर्द और एनजाइना को पूरी तरह से ठीक करने के लिए आपको डॉक्टर उचित मेडिसिन लेना जरूरी है। इसके आलावा, कुछ घरेलू नुस्खों को अपनाकर भी धमनियों की रुकावट को कम किया जा सकता है, जिससे सीने में दर्द होने की फ्रीक्वेंसी कम हो जाती है या कभी-कभी पूरी तरह से ठीक भी हो जाती है।


यहाँ पर सीने के दर्द को ठीक करने के 10 सबसे कारगर घरेलू उपचार दिए जा रहे हैं –
1. लहसुन (Garlic)


सीने का दर्द ठीक करने के लिए लहसुन को सबसे कारगर घरेलू खाद्य पदार्थ माना जाता है। 2006 में जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन में पब्लिश हुई एक स्टडी के अनुसार लहसुन का नियमित सेवन करने से दिल की बीमारी होने का खतरा काफी कम हो जाता है।


यह रक्त में से हाई कोलेस्ट्रॉल को कम करके धमनियों में जमने से रोकता है, जिससे हार्ट तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन से भरपूर रक्त पहुँच पाता है।
एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच लहसुन का जूस मिलाकर सेवन करें।
रोज सुबह खाली पेट दो कच्ची लहसुन की कलियों को पानी के साथ खाएं।
2. अदरक (Ginger)


अदरक भी सीने में दर्द के इलाज में साबित किया हुआ खाद्य पदार्थ है। अदरक में gingerol नामक केमिकल कंपाउंड होता है जो रक्त में से कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद करता है। यह रक्त वाहिकाओं को कोलेस्ट्रॉल से डैमेज होने से भी बचाता है।



जब भी आपको सीने में दर्द हो तो एक कप अदरक की चाय का सेवन करें। चाय बनाने के लिए एक कप गर्म पानी में एक चम्मच पिसे हुए अदरक को डालें और 5 मिनट के लिए उबलने दें। फिर इसे छानकर सेवन करें।
अपने हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए रोज सुबह खाली पेट कच्चे अदरक को चबाकर खाएं।
3. हल्दी (Turmeric)

सीने के दर्द को ठीक करने के लिए हल्दी भी काफी फायदेमंद होती है। इसमें curcumin नामक एक्टिव घटक पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल ऑक्सीडेशन, प्लेक बिल्डअप और क्लॉट फार्मेशन को कम करने में मदद करता है। साथ ही, इसमें एंटी-इन्फ्लामेट्री प्रॉपर्टीज होती हैं जो सीने के दर्द में आराम प्रदान करने में मदद करती हैं।
एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी डालकर उबालें। अब गर्म अवस्था में ही इसमें शहद मिलाकर सेवन करें।
अपने हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से अपने भोजन में हल्दी का इस्तेमाल करें।
डॉक्टर से सलाह लेकर आप हल्दी के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं।
4. लाल मिर्च (Cayenne Pepper)


लाल मिर्च भी सीने के दर्द में आराम प्रदान कर सकती है। इसमें अत्यधिक मात्रा में capsaicin पाया जाता है, जिसमें एंटी-इन्फ्लामेट्री प्रॉपर्टीज होती हैं। यह हार्ट के ब्लड फ्लो को ठीक करने में भी मदद करता है।
एक गिलास दूध या फलों के जूस में एक चम्मच लाल मिर्च मिलाएं। अब इसे पी लें, कुछ ही देर बाद आपका दर्द दूर हो जायेगा।
आप डॉक्टर की सलाह लेकर लाल मिर्च के सप्लीमेंट्स भी ले सकते।
5. तुलसी (Basil)


तुलसी भी सीने में दर्द के उपचार में काफी फायदेमंद औषधि है। इसमें मैग्नीशियम होता है जो दिल और धमनियों को नर्म करके रक्त के संचार को बढ़ाता है। साथ ही इसमें विटामिन ए एंटीऑक्सीडेंट भी होता है जो धमनियों में कोलेस्ट्रॉल को जमने से रोकता है।

जब भी आपको सीने में दर्द हो तो 8 से 10 तुलसी कि पत्तियों को चबाकर खाएं या तुलसी की चाय बनाकर पियें।
सीने में दर्द को रोकने के लिए और अपने हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए रोज सुबह खाली पेट एक-एक चम्मच के रस और शहद को मिलाकर सेवन करें।
6. अल्फाल्फा (Alfalfa)

अल्फाल्फा भी सीने में दर्द को कम करने में लाभकारी होता है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम्कर्ता करता, धमनियों में कोलेस्ट्रॉल को जमने से रोकता है और रक्त संचार को ठीक करता है। इसमें भरपूर मात्रा में क्लोरोफिल होता है जो धमनियों को नर्म बनाता है और ब्लड को धमनियों में ब्लाक होने से रोकता है।
जब भी आपको सीने में दर्द हो तो अल्फाल्फा की चाय बनाकर पियें। चाय बनाने के लिए एक कप पानी में एक चम्मच अल्फाल्फा की सूखी पत्तियों के पाउडर को डालकर 5 मिनट के लिए गर्म करें। फिर इसे छानकर सेवन करें।
या फिर, आप अल्फाल्फा के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं। इसके उचित डोज जानने के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
7. मेंथी (Fenugreek)


आयुर्वेद के अनुसार मेंथी कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को प्रमोट करती है और एनजाइना को रोकती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और कार्डियो-प्रोटेक्टिव प्रॉपर्टीज होती हैं जो कोलेस्ट्रॉल को कम करती हैं और दिल में रक्त संचार को बढ़ाती हैं।
डेढ़ कप पानी में एक चम्मच मेंथी के बीज डालकर 5 मिनट के लिए उबालें। अब इसे छानकर दो चम्मच शहद मिला दें और पी लें। जल्द ही आपका दर्द ठीक हो जायेगा।
या फिर, रात को एक चम्मच मेंथी के बीजों को पानी में डुबोकर रख दें और सुबह खाली पेट पानी के साथ सेवन करें।
8. बादाम (Almonds)


बादाम में भरपूर मात्रा में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड्स पाए जाते हैं जो ब्लड कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं और हार्ट हेल्थ को प्रमोट करते हैं। साथ ही इसमें प्लांट स्टेरॉल्स, फाइबर और मैग्नीशियम भी प्रचुर मात्रा में होते हैं जो टोटल कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं और भविष्य में आने वाले एनजाइना के अटैक की सम्भावना को कम करते हैं।
बादाम के तेल और गुलाब के तेल को बराबर मात्रा में मिलाएं। अब इसे अपनी छाती में धीरे-धीरे लगायें, कुछ ही समय में दर्द कम होने लगेगा।
एनजाइना और अन्य दिल की बिमारियों से बचे रहने के लिए रोज एक मुट्ठी भुने हुए बादामों का सेवन करें।
9. ओमेगा -3 फैटी एसिड्स (Omega-3 Fatty Acids)


यदि आपको कोई दिल की बीमारी है या हाई कोलेस्ट्रॉल है तो आपको अपने भोजन में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। यह ट्राइग्लिसराइड्स (रक्त में मौजूद फैट्स) को कम करने में मदद करती हैं और एनजाइना को रोकती हैं।


साथ ही, ओमेगा-3 फैटी एसिड्स में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लामेट्री प्रॉपर्टीज होती हैं जो हार्ट को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं।
हर हफ्ते दो या तीन फैटी फिश जैसे mackerel (छोटी समुद्री मछली), टूना (tuna), ट्राउट (trout), हिलसा (herring), सैल्मन (salmon), ब्लूफिश या सार्डिन फिश का सेवन करें।
ओमेगा-3 फैटी एसिड्स के शाकाहारी स्त्रोत हैं – अलसी के बीज (flax seeds), चिया बीज, अखरोट (walnut), सोयाबीन, कद्दू और जैतून का तेल (olive oil).
आप डॉक्टर की सलाह से ओमेगा-3 फैटी एसिड्स के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं। इसका जनरल डोज है 500 mg टेबलेट रोज एक।
10. ध्यान (Meditation)

सीने के दर्द को ठीक करने के लिए मेडिटेशन करना भी काफी फायदेमंद होता है। यह पूरे शरीर में रक्त और ऑक्सीजन के संचार को बढ़ा देता है। साथ ही, मेडिटेशन शरीर को आराम प्रदान करता है और स्ट्रेस और डिप्रेशन को कम करता है।
किसी आरामदायक जगह पर शांत बैठ जाएं।
अब अपनी नाक से एक लम्बी सांस अन्दर लें।
अब धीरे-धीरे इस सांस को मुंह के जरिये बाहर निकालें।
इस दौरान अपने दिमाग पर ध्यान लगाकर रखें।
इसे प्रक्रिया को बार-बार दोहराएं जब तक कि सीने में दर्द पूरी तरह से ठीक न हो जाये।


इसके आलावा प्रतिदिन योग और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज भी करते रहें।
अतिरिक्त टिप्स
एक गिलास अनार का रस पीने से भी सीने का दर्द ठीक हो सकता है।
डॉक्टर की सलाह से Coenzyme Q10 सप्लीमेंट लें। यह आपके हार्ट की एनर्जी एफिशिएंसी और ब्लड सप्लाई को सुधरेगा।
अपने भोजन को एक्स्ट्रा-वर्जिन ओलिव आयल (अतिरिक्त शुद्ध जैतून का तेल) से पकाएं। यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है जिससे छाती में दर्द की समस्या नहीं होती।
भोजन करते समय खाने को धीरे-धीरे और अच्छी तरह से चबाकर खाएं।
संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों का ही सेवन करें, जिनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड्स, फोलिक एसिड, विटामिन बी12 और अन्य मिनरल्स प्रचुर मात्रा में हों।
अत्यधिक ठन्डे वातावरण में जाने से बचें। ठंडक मस्कुलर रिफ्लेक्स को स्टिमुलेट कर देता है जिसके कारण सीने में दर्द हो सकता है।
शराब और कॉफ़ी का कम सेवन करें। धूम्रपान और तम्बाखू का सेवन न करें।
अपने ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल को कण्ट्रोल में रखें।


यदि आपके सीने का दर्द बढ़ता ही चला जा रहा है और ऊपर दिए गए उपचारों से भी ठीक नहीं हो रहा तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। चूंकि सीने में दर्द हार्ट अटैक का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है इसलिए इसे अवॉयड न करें।



मधुमेह रोगियों से लेकर माइग्रेन तक का उपचार करते हैं अंगूर
अंगूर एक ऐसा फल है, जिसे खाने के लिए बिल्कुल भी मेहनत नहीं करनी पड़ती। बस जब भी मन किया, तुरंत खा लिया। वैसे यह खाने में जितना लाजवाब होता है, इसकी न्यूटिशन वैल्यू भी उतनी ही अधिक होती है। हालांकि बहुत से लोग इससे अनजान होते हैं। तो चलिए आज हम आपको अंगूर से होने वाले कुछ बेहतरीन फायदों के बारे में बता रहे हैं−



आपको शायद पता न हो लेकिन अंगूर ब्रेन हेल्थ के लिए काफी अच्छा माना जाता है। यह अल्जाइमर जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों को शुरूआत में ही रोकने में सक्षम है। ऐसा इसमें मौजूद पॉलीफेनोल्स के कारण होता है। इसलिए अगर आपको स्वयं को मस्तिष्क विकारों से बचाना है जो अंगूर का सेवन करना शुरू कर दीजिए।


अपच का उपचार

आज के समय में लोग जिस तरह किसी भी वक्त कुछ भी खा लेते हैं, उसके कारण पाचन संबंधी परेशानियां उत्पन्न होती है। अंगूर पेट की गर्मी को कम करता है और अपच को ठीक करता है। इसके लिए आप एक गिलास अंगूर के रस का सेवन करें। यह अपच के साथ−साथ पेट में सूजन व जलन को भी कम करेगा।



अगर आपको सिर में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो एक गिलास अंगूर के रस का सेवन कीजिए। वहीं जिन लोगों को माइग्रेन की शिकायत रहती है, वे हर सुबह ताजे अंगूर के रस का सेवन करें। दरअसल, अंगूर में पाए जाने वाले एंटी−ऑक्सीडेंट्स सिरदर्द व माइग्रेन के उपचार के लिए बेहद प्रभावी तरीके से काम करते हैं।



भारत में स्तन कैंसर के मामलों में हर दिन बढ़ोतरी होती जा रही है। इससे लड़ने में अंगूर आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए आप बैंगनी रंग के अंगूर के रस का सेवन नियमित रूप से करें। दरअसल, अंगूर में एंटीमुटाजेनिक और एंटी−ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो हर तरह के कैंसर खासतौर से स्तन कैंसर से निपटने में प्रभावी माने गए हैं।


मधुमेह का इलाज

अंगूर खाने में भले ही मीठे हो लेकिन फिर भी मधुमेह पीडि़त व्यक्ति बेफ्रिक होकर इनका सेवन कर सकते हैं। इतना ही नहीं, अंगूर मधुमेह को रोकने में भी मददगार हैं। अंगूर में एक ऐसा तत्व पाया जाता है, जो रक्त में शर्करा के स्तर को काम करता है, जिससे मधुमेह रोगियों को लाभ होता है।



अंगूर गुर्दे संबंधी बीमारियों को दूर करने में बेहद लाभदायक होता है। दरअसल, यह यूरिक एसिड की अम्लता को कम करते हैं। साथ ही वह सिस्टम से ही एसिड को भी कम करते हैं, जिसके कारण गुर्दे पर दबाव कम हो जाता है और व्यक्ति को गुर्दे संबंधी विकार होने की संभावना न के बराबर होती है।

हमारा अनुलोम-विलोम, विदेश में कहलाता है कार्डियक ब्रीथिंग, जानें अवसाद दूर करने के छह तरीके



सांस जीवन के लिए इतना जरूरी है कि इसके बिना हमारा कोई अस्तित्व ही नहीं है. शरीर और मन के कामकाज के लिए भी इसका काफी महत्व है.


चीन के ताओ और हिंदू धर्म ने शरीर के अंदर प्रवेश करने वाली वायु को एक प्रकार की ऊर्जा का माध्यम बताया, और श्वसन को इसकी अभिव्यक्तियों में से एक के रूप में देखा. भारत में हम इस क्रिया को अनुलोम विलोम कहते हैं,जो सदियों से यहां प्रचलित है. अब योग की इस विधा को विदेशों में कार्डियक ब्रीथिंग कहा जा रहा है और वहां यह काफी लोकप्रिय भी हो रहा है.



जर्मन मनोचिकित्सक जोहान्स हेनरिक शुल्त्स ने 1920 के दशक में ‘ऑटोजेनिक प्रशिक्षण’ को विश्राम की एक विधि के रूप में विकसित किया.



यह दृष्टिकोण आंशिक रूप से धीमी और गहरी सांस लेने पर आधारित है और संभवतः पश्चिम में यह विधि आज भी विश्राम के लिए सबसे प्रसिद्ध श्वास तकनीक है. इसी तकनीक को 2017 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के मार्क क्रास्नोव ने भी विकसित किया और इसे ‘कार्डियक ब्रीथिंग’ नाम दिया. इसमें प्रति मिनट छह बार सांस लेने और छोड़ने को कहा जाता है. इसे दिन में कम-से-कम तीन बार (हर बार पांच सेकेंड के लिए सांस छोड़ें) करने को कहा गया है.



इसे 365 दिन दुहराने की सलाह भी दी गयी है. क्रास्नोव के मुताबिक, गहरी सांस लेने और छोड़ने से हमारा दिमाग उचित तरीके से काम करता है. तंत्रिका तंत्र को अतिरिक्त ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है. हमारा दिमाग शांत और स्थिर होता है. भारत में हम इसे वर्षों से प्राणायाम के रूप में देखते आये हैं.





कार्डियक ब्रीथिंग प्राणायाम का दूसरा रूप




अवसाद दूर करने के छह तरीके



1. तनकर सीधे खड़े हों.


2. अपनी सांस को नियंत्रित करें.


3. सांस लेते हुए हवा को पहले पेट में भरें. जैसे ही पेट फूलने लगे, हवा को छाती में भरें. लेटकर भी इसे किया जा सकता है. लेटकर करते समय पेट पर अपना एक हाथ रखें.


4. सांस छोड़ते थोड़ी देर सांस रोकें. दिमाग में 1, 2, 3 गिनें. सांस लेते समय भी इसे दुहरायें.


5. सांस लेते समय एक बार में नाक के एक छिद्र का इस्तेमाल करें. अगली बार दूसरे छिद्र का.
6. सांस लेते समय दिमाग में अच्छे विचार रखें.

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