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दिल के रोग से बचने के लिए इन टिप्स पर ध्यान दें


दिल के रोग से बचने के लिए इन टिप्स पर ध्यान दें

आज लोग अपने शरीर से ज्यादा फोन और टीवी को समय ज्यादा देते हैं। ऐसे में उनमें कई तरह के रोग उत्पन हो रहे हैं। बिगड़ती लाइफस्टाइल और फिजिकल एक्सरसाइज की कमी की वजह से आज दिल के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बॉलीवुड में इस तरह की खबरें तो आप सुनते ही होंगे। एक अनुमान के मुताबिक़ अगर दिल की सेहत को दुरुस्त कर लिया जाए, तो 75 साल से कम उम्र के लोगों को होने वाले 80 फीसदी हार्ट अटैक और स्ट्रोक रोके जा सकते हैं। अब चलिए जानते हैं कि दिल की सेहत को कैसे दुरुस्त किया जाए।
अपने वजन को बैलेंस में रखें


अकेले वजन को कम करके अपने शरीर के कई सारे रोगों को दूर कर सकते हैं, जिसमें दिल की बीमारी भी शामिल है। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है, सिर्फ आधा घंटा एक्सरसाइज के लिए निकालें और अच्छा खाना खाएं। अपनी डाइट में अधिक फल और सब्जियां शामिल करें। साथ ही यदि आप साबुत अनाज का सेवन करते हैं, तो यह और भी अच्छी बात है, क्योंकि यह फाइबर और पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। इससे वजन को कम करने में सहायता मिलती है।
खाने के तरीकों में बदलाव करें
जब हम खाना खाते हैं, तो हमें पता ही नहीं चलता कि हम कैसे खा रहे हैं, क्या खा रहे हैं और कितना खा रहे हैं। यहां आपको अपने खानपान को लेकर पूरी तरह से एलर्ट होना पड़ेगा। भोजन करते समय कौर छोटा रखिए, अपनी प्लेट को ओवरलोड करने से बचें, साथ ही अनहेल्दी फैट और कोलेस्ट्रॉल को कम करें। इसके लिए आप कम वसा वाले प्रोटीन का सेवन कर सकते हैं। इस तरह के नियम को फॉलो करके आप अपने शरीर के साथ-साथ अपने दिल को भी दुरुस्त रख सकते हैं।
सिर्फ एक घंटा एक्सरसाइज


आपका क्या जाएगा यदि आप अपने 24 घंटे में से एक घंटा अपने शरीर को दें। इससे आप अपने शरीर को हेल्दी रख पाएंगे और दवाईयों व तनाव से खुद को मुक्त कर पाएंगे। चलिए आपकी जानकारी के बता दें कि जब दिल का दौरा पड़ता है, तो उसके सबसे बड़े कारणों में एक कारण फिजिकल एक्टिविटी में कमी को भी माना गया है। इसके कारण दिल की मांसपेशियां समय से पहल कमजोर पड़ने लगती हैं और जरा सी दिक्कत काफी बड़ी हो जाती है। इसलिए यह समस्या पैदा न हो, आप रोजाना एक्सरसाइज करें।
धूम्रपान और अधिक शराब से बचें
आप अपने खाने-पीने की आदत को सुधारें, आप देखेंगे आपने कई सारी बीमारियों को खुद से दूर कर लिया है। शरीर के साथ-साथ दिल को हेल्दी रखना है, तो अपने बीपी, कोलेस्ट्रॉल और शुगर को नियंत्रण में रखें। अपने आहार में सोडियम का सेवन कम करें। धूम्रपान और अधिक शराब से बचें। दोस्तों थोड़ी सी सावधानी से दिल की सेहत को समय रहते सुधारा जा सकता है। इसलिए इन बदलावों को करने से हिचकिचाना ठीक नहीं है।
डॉक़्टर की जांच भी है जरूरी

सीने में तकलीफ, तालमेल, सांस फूलने या चक्कर आने की स्थिति में तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें। कल पर टालने की कोशिश न करें। इस स्थिति को एक सीमा के बाद टालना जानलेवा हो सकता है। ये इलाज करके देख लें, या वो कर लें के चक्कर में बेश्कीमती समय हमारे हाथ से निकल जाता है।
दिल हमारी बॉडी का सबसे जरूरी अंग है। इसमें थोड़ी सी भी दिक्कत आपके जान को खतरे में डाल सकती है। इसलिए एक उम्र के बाद दिल का खास ख्याल रखने की हिदायत दी जाती है। आप भी अपने दिल का जरूर ख्याल रखें और बताए गए टिप्स पर जरूर ध्यान दें।




हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण, कारण और उपचार


हार्ट ब्लॉकेज क्या है?
दिल की धड़कन से संबंधित ही एक समस्या है हार्ट ब्लॉकेज। कई बार तो यह बीमारी जन्म लेते ही बच्चोंब के साथ उन्हें अपना शिकार बना लेती है वहीं, कुछ लोगों में यह समस्याा बड़े होने के बाद शुरू होती है। बता दें कि जन्मिजात होने वाली समस्या को कोनगेनिटल हार्ट ब्लॉ क जबकि बड़े होने पर हार्ट ब्लॉ केज की होने वाली समस्याज को एक्वीयरेड हार्ट ब्लॉिक कहते हैं।
यूं तो इन दिनों कोनगेनिटल हार्ट ब्लॉजक के मुकाबले एक्वीयरेड हार्ट ब्लॉरक एक आम समस्या है। हार्ट मशल और इसके इलेक्ट्रिकल सिस्ट म के कारण एक्वीलरेड हार्ट ब्लॉरक की प्रॉब्ल म होती है। हालांकि इसका उपचार बाइपास सर्जरी, एंजियोप्लास्टी अथवा महंगी दवाएं है।

आइए बताते हैं हार्ट ब्लॉबकेज के लक्षण 

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपको किस डिग्री की ब्लॉ्केज हैं। फर्स्टै डिग्री हार्ट ब्लॉ केज का कोई खास लक्षण देखने को नहीं मिलता है। वहीं सेकेंड डिग्री और थर्ड डिग्री हार्ट ब्लॉ केज में दिल की धड़कनें निश्चित समय अंतराल पर न होकर रूक-रूक कर होती है। इस तरह की हार्ट ब्लॉ केज के अन्यन लक्षण हैं –
चक्कार आना या बेहोश हो जाना
सिर में दर्द की शिकायत रहना
थोड़ा काम करने पर थकान महसूस हो जाना
छोटी सांस आना व सीने में दर्द रहना आदि है।

अब बात थर्ड डिग्री हार्ट ब्लॉनकेज की जिसमें रोगी को तुरंत इलाज की जरूरत होती है क्योंॉकि यह घातक हो सकती है।
क्या है हार्ट ब्लॉीकेज का उपचार 

थर्ड डिग्री हार्ट ब्लॉीकेज की समस्या होने पर इसे ‘पेसमेकर’ मेडिकल डिवाइस की मदद से ठीक किया जा सकता है। कभी-कभी इस डिवाइस का इस्तेसमाल सेकेंड डिग्री हार्ट ब्लॉसकेज होने पर भी किया जाता है। फर्स्ट डिग्री हार्ट ब्लॉहकेज में पेसमेकर का यूज नहीं किया जाता। आपको बता दें कि पेसमेकर का इस्तेटमाल हार्ट की इलेक्ट्री कल पल्सज को बढ़ाने के लिए किया जाता है। किसी भी प्रकार की हार्ट ब्लॉसकेज आपके लिए खतरा बढ़ा सकती है। इसलिए उपचार में लापरवाही न करें।
हार्ट ब्लॉकेज का घरेलू उपचार यहां 

रोजाना सुबह में 3 से 4 किलोमीटर की सैर करें
सुबह को लहसुन की एक कली जरूर खाएं। इसको लेने से कोलेस्ट्रारल कम होता है।
खाने में बैंगन का प्रयोग करने से कोलेस्ट्रा ल की मात्रा में कमी आती है।
प्याज अथवा प्याज के रस का सेवन करने से आपकी हार्टबीट कंट्रोल में रहती है।
हार्ट के रोगियों को हरी साग-सब्जीह जैसे लौकी, पालक, बथुआ और मेथी जैसी कम कैलोरी वाली सब्जियों का प्रयोग करना चाहिए।
घी, मक्खन, मलाईदार दूध और तली हुई चीजों के सेवन से खुद को रोके।
अदरक अथवा अदरक का रस भी खून का थक्का बनने से रोकने में सहायक होता है।
शराब के सेवन और धूम्रपान से भी बचना चाहिए।




हृदय रोग का रामबाण इलाज


कार्डियोवैस्कुलर बीमारी आमतौर पर उन स्थितियों को संदर्भित करता है जिनमें ब्लड वैसेल अवरुद्ध हो जाता है और जो दिल का दौरा, छाती का दर्द या स्ट्रोक का कारण बन सकता है। ऐसे में आपको हृदय रोग का रामबाण इलाज के बारे में सोचना चाहिए। वैसे आपको बता दें कि एक अस्वास्थ्यकर दिल हृदय रोग, स्ट्रोक, मोटापे और संबंधित बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है।
हृदय रोग का रामबाण इलाज
लहसुन

लहसुन का उपयोग सदियों से दिल के स्वास्थ्य के साथ-साथ अन्य चीजों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। इसमें एलिसिन नामक एक यौगिक होता है जो आपके स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। हृदय रोग में यह रामबाण इलाज के तौर पर काम करता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह आपके धमनियों को लचीला रखने में सहायता करता है और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है। यह कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप और सूजन को कम करने में सहायता करता है। इसका संयुक्त प्रभाव दिल के दौरे और स्ट्रोक दोनों के जोखिम को कम करने में सहायता कर सकता है।
अलसी का बीज

अलसी के बीज कोलेस्ट्रॉल को ठीक रखने में मदद के लिए एक प्राकृतिक विकल्प है। लेकिन यदि आप कोलेस्ट्रॉल के उच्च जोखिम में है, तो आपको शायद इसे अपनी दवा के स्थान पर नहीं लेना चाहिए। फ्लैक्स सीड या अलसी का बीज ओमेगा 3 फैटी एसिड में समृद्ध है, जो अक्सर दिल के लिए बहुत ही अच्छा है।

ओमेगा 3एस कम रक्तचाप और सूजन में मदद करता हैं। इसमें फाइबर समृद्ध यौगिक भी होता हैं जिन्हें लिग्नान कहा जाता है जिन्हें धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और प्लाक बिल्डअप को कम करने के लिए जाना जाता है।
विटामिन के2

विटामिन के2 अक्सर बेहतर हृदय स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। 2014 के अध्ययन से पता चला है कि विटामिन के में समृद्ध आहार से बीमारी के लिए उच्च जोखिम वाले लोगों में हृदय की समस्याओं के कारण मौत का खतरा कम हो गया है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन लोगों को पर्याप्त विटामिन के2 नहीं मिलता है, उनके धमनियों में अधिक कैल्शियम जमा होता है और हृदय रोग का उच्च जोखिम भी होता है। यह देखने के लिए क्लिनिकल अध्ययन चल रहे हैं कि क्या विटामिन के 2 दिल के दौरे और स्ट्रोक की वजह से अवरोध को कम करने में मदद कर सकता है।
ब्रोकोली


ब्रोकोली एक क्रूसिफेरस सब्जी है जो विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के, और फोलेट, आहार फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फास्फोरस, और ओमेगा -3 और ओमेगा -6 फैटी एसिड से भरी हुई है।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि ब्रोकोली में पाए गए फिनोल कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों और कैंसर सेल प्रसार के खिलाफ कुशलतापूर्वक कार्य कर सकता है। आप अपनी भूख को तृप्त करने और अपने दिल को स्वस्थ रखने के लिए आप इसका सूप बनाकर भी पी सकते हैं। –
  ब्रोकली के फायदे
गाजर

गाजर विटामिन ए, विटामिन के, विटामिन ई, और फोलेट और खनिज जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम और फास्फोरस में समृद्ध हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये एंटीऑक्सीडेंट का भी एक अच्छा स्रोत हैं जो डीएनए डैमेज को रोकता है, सूजन को कम करता है और कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करता है।
मछली

मछली लीन प्रोटीन और ओमेगा -3 फैटी एसिड में समृद्ध हैं। ओमेगा -3एस पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड हैं जो सूजन को कम करने और कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों को रोकने में मदद करता है।

ओमेगा -3 और ओमेगा -6 फैटी एसिड दोनों आवश्यक हैं। तो, अपने दिल की स्थिति में सुधार करने के लिए आप सैल्मन, सार्डिन और अन्य फैटी मछली का सेवन करें।
संतरा

संतरा विटामिन सी और खनिज में समृद्ध हैं, और इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, लिपिड-कम करने, एंटी एलर्जिक, और एंटी ट्यूमर गुण हैं। वैज्ञानिकों ने पाया है कि संतरे का रस खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है।
एलडीएल कोलेस्ट्रॉल जितना कम होगा, धमनी अवरोध की संभावना कम होगी। तो, अपने दिल को स्वस्थ रखने के लिए एक संतरा या ताजा संतरे का जूस लें।

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