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गर्दन दर्द में आहार का होता है विशेष महत्व,

गर्दन दर्द में आहार का होता है विशेष महत्व, कुछ इन तरीकों से दर्द पर पाया जा सकता है काबू

सिर इंसान के शरीर का सबसे वजनी हिस्सा होता है जिसका पूरा भार गर्दन पर टिका होता है। गर्दन या सर्वाइकल का दर्द बहुत ही तकलीफ देने वाला होता है। इसमें तकलीफ हो जाने पर सिर घुमाने में काफी परेशानी हो जाती है। चिकित्सक की सलाह पर लोग इसमें गर्म पट्टा तक बांधने पर मजबूर हो जाते हैं। उपचार की दुनिया मे कई पद्धतियां मौजूद हैं जिनसे इस तरह के दर्द का इलाज किया जाता है। उपचार के अलावा गर्दन दर्द का आहार वास्तव में बेहद लाभदायक होता है। एक हेल्थ सर्वे के मुताबिक आहार या खान पान की विसंगतियों की वजह से ही 90 फीसदी हड्डियों संबंधित रोग हो जाते हैं। वास्तव में इंसानी ढांचा ही हड्डियों से निर्मित होता है। इस लेखक माध्यम से आहार से किस तरह गर्दन दर्द में लाभ प्राप्त हो सकता है इस बारे में चर्चा तो करेंगे ही अपितु गर्दन की समस्याओं से संबंधित प्रमुख जटिलताओं के बारे में भी जानेंगे।

गर्दन दर्द संबंधित प्रमुख जटिलताएं

वास्तव में गर्दन के दर्द की समस्या के पीछे कई ऐसे कारण होते हैं जो बेहद ही सामान्य हो सकते हैं। सामान्य स्थिति वाले दर्द अक्सर हल्की मालिश के बाद समाप्त हो जाते हैं। दिनचर्या में निरंतर बदलाव और खान पान में दूषित पदार्थों के सेवन से भी इस तरह तकलीफों का सामना हो ताकत है। एक सर्वे के मुताबिक दुनिया मे स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले हर चौथे से पांचवें इंसान को सर्वाइकल की समस्या हो रही है। ऑफिस में देर तक काम करने वाले लोगों में भी इस तरह की समस्याएं देखी जाती हैं। स्त्रियों में यह समस्या पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा होती है। हल्का सा भी दर्द होने के साथ ही फौरी राहत की दवाओं का इस्तेमाल बेहद नुकसान पहुंचाता है।

गर्दन के दर्द की कई तरह की विकृतियां होती हैं। ज्यादा सेर तक एक जगह खड़े होकर सिर झुकाकर या उठाकर काम करने वाले लोग इस समस्या का शिकार हो जाते हैं। कई बार शल्य चिकित्सा की नौबत बेहद जटिल स्थिति उत्पन्न कर देती है। धूम्रपान या फिर शराब के आदी लोग इसके सामान्यतः शिकार हो जाते हैं जो लत छोड़ देने पर आराम प्राप्त कर सकते हैं। धूम्रपान के लती लोगों में टॉन्सिल के कारण भी ऐसा दर्द पैदा कर देता है। मदिरा सेवन करने वाले लोगों में फेफड़ा संबंधित रोग या गले मे परेशानी के चलते यह समस्या उत्पन्न हो जाती है। रक्त संचार में असंतुलन के साथ मोटापा और मधुमेह रोगी ऐसी विकृतियों से बेहद परेशान होते हैं। गर्दन में दर्द के कई तरह के लक्षण प्रकट हो सकते हैं ।
गर्दन के पीछे अकड़न, गले मे दर्द, गले के अंदर दर्द के साथ ही कंधों में सूजन और दर्द भी इसकी प्रमुख जटिलताओं में शामिल हैं।
गर्दन दर्द का आहार में अपनाएं दूध और सूखे मेवे


गर्दन का दर्द आहार के लिए सूखे मेवे में बादाम की गिरी के साथ काजू और किशमिश तो फायदेमंद होता ही है बल्कि अखरोट और चिरौंजी का सेवन भी हड्डियों को बेहद लाभ देता है। इन सूखे मेवों में भरपूर मात्रा में मल्टी विटामिन सहित कैल्शियम और खनिज तत्व मौजूद होते हैं। इन पदार्थों में प्राकृतिक एन्टी ऑक्सीडेंट मौजूद होता है जो शरीर से यूरिक एसिड सहित अवशिष्ट पदार्थों को बाहर निकलने का काम करता है। 2 स 3 बादाम छिलका उतारा हुआ के साथ इतनी मात्रा में काजू और 3 से 4 दाना किशमिश के साथ 34 से 5 दाना चिरौंजी लेकर खल में पीस लें। इसके साथ काली मिर्च और सोंठ भी मिला सकते हैं। सोंठ प्राकृतिक पेन किलर का काम करता है। इस पेस्ट को आधे लीटर दूध में उबाल कर गुनगुना कर लें। रोज रात सोने से पहले इस दूध को पीने से हड्डियों में मौजूद ऊतकों की सुरक्षा होती है और गर्दन दर्द दूर होने लगता है। मरीज हो या स्वस्थ व्यक्ति सब को अपने आहार में इस तत्व का सेवन करना चाहिए। हर रोज अपने आहार में इसे शामिल करने से हड्डियों से संबंधित रोग नही होते।
गर्दन के दर्द में मौसमी फलों के लाभ


गर्दन दर्द का आहार में मौसमी फलों का सेवन बहुत ही लाभ दायक होता है। सेब से लेकर अंगूर और केले में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम उपलब्ध होता है। इनका सीधे तौर पर सेवन हड्डियों के लिए बेहद लाभ पहुंचता है। इन फलों के अलावा मौसम में होने वाले फल जैसे आम, जामुन, अमरूद सहित बेर के भी बहुत से गुण होते हैं। गर्दन के दर्द में इनके जूस का सेवन भी बहुत लाभ पहुंचाता है। इसके अलावा गाजर और नींबू का रस शरीर से अवशिष्ट पदार्थो को बाहर करने का कार्य करता है। रोजाना एक गिलास पानी मे आधा नींबू काटकर उसके रस को मिलाकर पीने से बेहद लाभ प्राप्त होता है। इसके अलावा चुकंदर के रास में संतरे का जूस मिलाकर पीने से शरीर की हड्डियों को नई ऊर्जा प्राप्त होती है। इनके सेवन से हड्डियों को कैल्शियम के साथ ही प्रचुर मात्रा में एन्टी ऑक्सीडेंट प्राप्त होता है। इस तरह के फलों का अपने आहार में रोजाना इस्तेमाल करना चाहिए।
गर्दन दर्द का आहार संबंधित जरूरी सलाह

गर्दन दर्द का आहार के लिए ऊपर दिए गए तरीके वास्तव में बेहद लाभ पहुंचाते हैं। हड्डियों को मजबूत बनाने में इनके लाभ तो होते हैं लेकिन इनकी मात्रा की जानकारी बेहद जरूरी होता है। ज्यादा मात्रा में इनके सेवन से पेट खराब होने के साथ ही वजन भी बढ़ सकता है जो हड्डियों के लिए किसी भी रूप में उचित नही होता। जब भी इस तरह के नुस्खे या आहार प्रयोग में लाएं अपने डाइट चार्ट को जरूर बनाएं।


योग के इन नियमों से पाया जा सकता है गर्दन दर्द से छुटकारा


गर्दन दर्द का योग वाकई एक ऐसा प्राकृतिक इलाज है जिसमें किसी भी तरह की दवा का सेवन नही करना होता। सर्वाइकल पेन या फिर गर्दन की समस्या से परेशान लोग कई तरह के उपचार माध्यमों से इसका इलाज करते हैं। हालांकि हर उपचार माध्यम का किसी ना किसी तरह का दुष्परिणाम हो सकता है लेकिन योग के सटीक प्रयोग से सेहत सुधारी जा सकती है। गर्दन शरीर का ऐसा संवेदन शील हिस्सा होता है जिसपर दिमाग सहित पूरे सिर का भार स्थित होता है। हल्की चोट या मोच के साथ गर्दन में अकड़न आने से सिर को मोड़ने में भी परेशानी का अनुभव होता है। वैसे मर्ज में योग का प्रयोग करना भारत देश के लिए कोई नई बात नही है। सदियों से भारत योग के मामले में विश्व गुरु रहा है। कैल्शियम युक्त प्राकृतिक आहार का सेवन।

इंसानी हड्डियों की संरचना ही कैल्शियम से निर्मित होती है। बढ़ती उम्र या फिर कुपोषण की वजह से कई बार हड्डियों के जोड़ प्रभावित होने लगते हैं। सर्वाइकल पेन शरीर की ऐसी कष्टकारक स्थिति होती है जो कई बार सामान्य परिस्थितियों के चलते सामने आती है। गर्दन के पीछे स्थित मांसपेशियों में चोट या मोच के दौरान अकड़न और तेज दर्द के चलते कई बार लोग अपनी गर्दन मोड़ तक नही पाते। अक्सर इस स्थिति में लोग चिकित्सक की सलाह पर गर्म पट्टा तक बांधने पर मजबूर हो जाते हैं।

अनेक उपायों के बाद भी जब इस तरह के दर्द से राहत ना मिले तब योग ही ऐसा रास्ता है जिससे राहत प्राप्त की जा सकती है। इस लेख के माध्यम से योग द्वारा गर्दन दर्द के प्रमुख कारणों सहित योग द्वारा उपचार के कुछ ऐसे तरीकों पर प्रकाश डाला जाएगा जिसके समय पर नियमित प्रयोग से समस्या का समाधान मिल सकता है।

गर्दन दर्द से संबंधित जटिलताएं
गर्दन में दर्द या फिर सर्वाइकल पेन एक ऐसी समस्या है जो कई कारणों से बेहद गंभीर हो जाती है। शराब या धूम्रपान के आदी लोगों में इस तरह के दर्द बेहद आम होते हैं। ऐसे इंसानों में यह कई रूपों में मर्ज बनकर फैलता है। तम्बाकू सेवन करने वाले लोगों में टॉन्सिल सहित गले में घाव के चलते दर्द होने की संभावना बढ़ जाती है।

रीढ़ या फिर उससे जुड़े जोड़ों की हड्डियों में संक्रमण एक बड़ी वजह है जो सर्वाइकल के रूप में सामने आता है। इसके अलावा कुपोषण और शरीर मे कैल्शियम की कमी भी इसका कारण मानी जाती है। फेफड़ों में संक्रमण की स्थिति में भी इस तरह के दर्द सामने आते हैं। अनुवांशिक कारणों सहित हार्मोनल विसंगतियों से होने वाली सर्वाइकल की परेशानियां बेहद जटिल होती हैं। इनकी जटिलताएं ऐसी होती हैं कि मरीज ताउम्र इलाज ही कराता रहता है।
गर्दन दर्द का योग

आसन से जहां शरीर को शांति मिलती है वहीं यह सभी दवाओं से होने वाली साइड इफेक्ट के मामले में भी सबसे उत्तम होता है। यह शारीरिक रूप से किया जाने वाला ऐसा प्रयोग है जो पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर करता है। हवा वाली जगह और खुले स्थान पर योग के नीचे दिए तरीकों से गर्दन की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
गर्दन दर्द योग में नटराज आसन के फायदे


योग माध्यमों में नटराज आसन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हिंदुओं के देवता भगवान शिव को उनके रूप को दर्शाया गया है। इस आसन से शरीर मे मौजूद हड्डियों के सभी रोग समाप्त होने लगते हैं। गर्दन दर्द का योग के लिए इस आसन को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इस योग से गर्दन की समस्या से छुटकारा मिलता है। इस योग से हड्डियों के जोड़ों को कैल्शियम का संचार होता है। इस योग से हड्डियों से जुड़ी मांसपेशियों के नर्म ऊतकों की क्षति भी नही होती। सूर्योदय के समय इस योग को करने से बेहद लाभ मिलता हौ।

नटराज आसन योग की विधि
नटराज आसन के लिए फर्श पर या जमीन पर चटाई बिछाकर लेट जाएं। अब अपने बाएं पैर को मोड़ते हुए दाएं हाथ पर ले जाएं और गहरी सांस अंदर खींचें। अब धीरे-धीरे सांस को बाहर करें। अब दाएं पैर को उठाकर बाएं हाथ पर ले जाएं और गर्दन को दायीं तरफ ले जाकर सांस खींचे और धीरे-धीरे बाहर निकालें। ऐसा करीब 4 से 5 बार अमल में लाएं। इस योग को खाली पेट करने से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। यह योग वैसे तो बेहद सरल होता है जिसे बड़ी आसानी से किया जा सकता है।
गर्दन दर्द का योग में बाल आसन के लाभ

बालासन ऐसा योग है जिससे कंधे ओर गर्दन की मांसपेशियों में रक्त का संचार तेज होता है जिससे हड्डियों को कैल्शियम सहित नई ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके निरंतर और नियमित प्रयोग से गर्दन की मांसपेशियों सहित रीढ़ के प्लेट में मौजूद नर्म ऊतकों में लचीलापन आता है और दर्द भी दूर होने लगता है।

बाल आसन की विधि
नित्य क्रिया से निवृत होकर सूर्योदय के समय जमीन या फर्श पर चटाई बिछाकर बैठ जाएं। अब अपनी दोनों पिण्डलियों को एक साथ जोड़ लें। पैरों की दोनों एड़ियों को पीछे की तरफ ले जाकर पंजों के बल बैठ जाएं। हाथों को आगे की तरफ करते हुए कमर को एक दम से झुकते हुए चेहरे को नीचे की तरफ ले जाएं। कोशिश करें कि आपका सिर आगे की तरफ जमीन से छू जाए। इस स्थिति में पैरों पर जांघों सहित पूरे बल कूल्हों पर आ टिकता है। इस प्रक्रिया को करीब 4 से 5 बार अमल में लाएं। ऐसा करने से मांसपेशियों को बल तो मिलता ही है बल्कि गर्दन के दर्द भी दूर होने लगते हैं। यह आसन रोजाना अपनाने से गर्दन संबंधित रोग तो दूर होते ही हैं बल्कि हड्डियों से संबंधित विकार नष्ट हो जाते हैं।
गर्दन का दर्द योग संबंधित जरूरी सुझाव

योग वास्तव में एक ऐसी प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसके प्रयोग से शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं। कुछ परिस्थितियों में चिकित्सक मरीज को पूरी तरह आराम की सलाह देते हैं। आसन या योग, उम्र सहित मौके की जटिलताओं के आधार पर निर्धारित किये जाते हैं। बिना चिकित्सक की सलाह के गर्दन दर्द के दौरान योग करना स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुंचा सकता है। योग की ऊपर दी गई विधि को प्रयोग से पहले फिजियो की सलाह जरूर लें।

आहार के इन नियमों को अपनाकर दूर भगाया जा सकता है घुटने का दर्द


खान पान या फिर घुटना दर्द का आहार किस तरह से जीवन में सार्थक साबित होता है यह बात हर किसी को शायद ही पता हो! इन बातों पर चर्चा कर लाखों, करोड़ों लोगों को दर्द से निजात दिलाई जा सकती है। अक्सर खान पान की विसंगतियां ही इस तरह की समस्याओं को और भी गंभीर बना देती हैं। सामान्य तरीकों में इस तरह का दर्द गलत बैठने और ज्यादा वजनी समान उठाने के चलते भी हो सकता है।
कई बार खेल के दौरान या व्यायाम करते हुए हड्डी हड्डी के जोड़ों से जुड़ी मांसपेशियों के खिंचाव की वजह से भी घुटना दर्द हो ही जाता है। सामान्य परिस्थितियों में होने वाला दर्द वैसे तो कुछ सामान्य उपाय के बाद खुद बखुद खत्म होने लगता है लेकिन भागदौड़ की इस दुनिया मे गलत आहार का प्रयोग बेहद नुकसान दायक होता हम अपने दैनिक जीवन मे हल्का सा भी दर्द होने के बाद बाजार में मौजूद आसानी से उपलब्ध होने वाली दवाओं का सेवन करना आरंभ कर देते हैं जो तुरंत राहत पहुंचाने का काम करती हैं। इंसान की यह आदत आगे चलकर भविष्य में उसे बेहद नुकसान पहुंचाती है। दुनिया मे मौजूद नाना प्रकार की उपचार पद्धतियों का इस्तेमाल कर कहां लोग घुटने के दर्द का इलाज करते हैं तो दूसरी तरह हर उपचार विधा का कुछ ना कुछ दुष्परिणाम भी होता है। उपचार की जरूरत ही ना पड़े, या दर्द के शुरुआती लक्षणों के दौरान आहार का सटीक प्रयोग काफी हद तक घुटनों से संबंधित रोगों में बेहद फायदा पहुंचाता है। हड्डियों से संबंधित मर्ज में आहार किस तरह प्रभावी साबित हो सकता है यह जानना बेहद जरूरी है।

घुटना दर्द संबंधित जटिलताएं

एक अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य द्वारा किये गए हेल्थ सर्वे के मुताबिक देश का एक बड़ा युवा तबका आहार प्रणाली के दोष से हड्डियों आए संबंधित रोगों से जूझ रहा है। खान पान के दोष या दुर्गुण के चलते यूरिक एसिड की अधिकता इंसान में गठिया या अर्थराइटिस जैसे रोगों की वजह बन जाती है। आहार प्रणाली में दोष होने से निकिल जैसे पदार्थ हड्डियों के जोड़ों में फ्लूड के साथ जमा होकर नर्म ऊतकों में संक्रमण पैदा करने का काम करते हैं। गठिया या फिर अर्थराइटिस की समस्या इंसान में अनुवांशिक भी हो सकती है जो सामान्य से कहीं ज्यादा खतरनाक रूप ले लेती है। दवाओं का प्रयोग तो शरीर पर प्रभाव डालता ही है इसके साथ उचित खान पान के प्रयोग से काफी हद तक घुटना दर्द जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है। हमारा उद्देश्य इस लेख के माध्यम से आहारों के ऐसे तकनीकी तरीकों के चुनाव का है जिनके सटीक सेवन से आपको भविष्य में इस तरह की समस्याओं का सामना नही करना पड़ेगा, साथ ही यदि इस तरह की समस्या हो चुकी होगी तब भी काफी राहत का अनुभव कर पाएंगे।
घुटना दर्द में हरी पत्तेदार सब्जियों के लाभ

घुटना का दर्द आहार में पालक के साथ बथुआ और मेथी जैसी पत्तेदार सब्जियां शरीर मे कैल्शियम की आपूर्ति करती हैं। ऐसी वस्तुएं कैल्शियम के साथ आयरन का अच्छा स्रोत होती हैं। पालक और बथुआ को सब्जी या सलाद के रूप में सेवन करना घुटना दर्द समाप्त कर देता है। मेथी के पत्तों का जूस दिन में दो बार सेवन करने से हड्डियों को नई ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके अलावा हरी गोभी का सेवन हड्डियों के जोड़ों में मौजूद नर्म ऊतकों और फ्लूड की सुरक्षा कर उन्हें मजबूती प्रदान करता है।
घुटना दर्द में विटामिन सी युक्त आहार के लाभ


विटामिन सी ऐसा तत्व है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि कर रोगों से लड़ने की ताकत प्रदान करता है। प्रकृति ने हमें कई ऐसे तत्वों से नवाजा है जो बड़ी आसानी से उपलब्ध होती हैं। इनमें नीबू और आंवला ऐसा प्राकृतिक तत्व है जिसका घुटना दर्द का आहार के रूप में सेवन काफी फायदा पहुंचाता है। इन प्राकृतिक फलों में विटामिन सी की मात्रा प्रचुरता से पाई जाती है। विटामिन सी हड्डियों को मजबूत करने के साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करता है।

इसके अलावा नींबू में मौजूद विटामिन सी यूरिक एसिड जैसे तत्वों को पेशाब और पसीने के माध्यम से शरीर से निकलकर हड्डियों में मौजूद फ्लूड की सुरक्षा करता है। शरीर मे मौजूद यूरिक एसिड के चलते हड्डियाँ आपस मे घर्षण करती हैं जिससे मांसपेशियों में मौजूद नर्म ऊतकों के नष्ट होने का खतरा बना रहता है।
घुटना दर्द का आहार में कैल्शियम युक्त आहार के लाभ


इंसान के शरीर का पूरा ढांचा आंतरिक तौर पर हड्डियों से निर्मित होता है। हड्डियों की संरचना और विकास कैल्शियम से निर्मित होती है। बढ़ती उम्र या फिर कुपोषण की वजह से हड्डियों के जोड़ प्रभावित होते हैं। घुटने का सीधा संबंध पैरों से होता है। कैल्शियम की कमी से हड्डियों के जोड़ों में गठिया और अर्थराइटिस जैसे रोग पनपते हैं। गाजर का सेवन इस समस्या में काफी लाभ पहुंचता है।

गाजर एक ऐसा प्राकृतिक तत्व होता है जिसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम सहित आयरन का भंडार होता है। इसे सलाद सहित जूस के रूप में सेवन करना लाभदायक होता है। बदलते मौसम में गाजर के जूस को दिन में 2 बार सेवन करने से शरीर को कैल्शियम प्राप्त होता है। कैल्शियम की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए दूध का सेवन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। दूध को अपने आहार में नियमित प्रयोग करने से हड्डियों में कैल्शियम की मात्रा संतुलित रहती है।
घुटना दर्द के आहार सम्बन्धित जरूरी सलाह

डाइटीशियन या फिर चिकित्सक की सलाह पर आहार की मात्रा का सेवन वाकई लाभ पहुंचाने वाला होता है। डाइट एक्सपर्ट मरीज की मौजूदा स्थिति या फिर उम्र के लिहाज से कैलोरी की मात्रा का निर्धारण करते हैं। इसके अलावा खान पान की गुणवत्ता की जांच बेहद जरूरी होती है। आज के दौर में बाजार में कई ऐसे पदार्थ बिक रहे हैं जिनकी गुणवत्ता बेहद दूषित है। दाल, चावल से लेकर सब्जियों और मसालों के अलावा मांसाहारी पदार्थों में मिलावट शरीर पर प्रतिकूल असर डालता है। जब भी किसी खाद्य पदार्थ को खरीदें उसकी गुणवत्ता की जांच जरूर कर लें। चिकित्सक या फिर डाइट एक्सपर्ट की सलाह पर ली गई आहार प्रणाली हड्डियों के रोगों को पास नही फटकने देती।


योगासन के कुछ ऐसे उपाय जो घुटना दर्द में साबित हो सकते हैं लाभदायक


शारीरिक व्यायाम या योग ऐसा प्राकृतिक उपाय है जिसका जीवन में लगातार प्रयोग घुटना का दर्द योग के लिए बेहद असरदार तो होता ही है बल्कि रोग को समूल नष्ट करने में भी सहायक साबित हो सकती है। योगासन से जहां रोगों से मुक्ति मिलती है तो वहीं रोग हो जाने पर भी इसके बेहद लाभ होते हैं।

यह एक ऐसा प्राकृतिक उपाय है जिसका सटीक प्रयोग काफी हद तक हड्डियों से संबंधित समस्याओं से बचा जा सकता है। घुटना पैरों का ऐसा हिस्सा है जो बहुत ही संवेदनशील होता है। हड्डियों में किसी भी वजह से उठ रहे दर्द को दूर करने के लिए वैसे तो दुनिया मे कई उपचार विधियां काम करती हैं लेकिन पंचतत्व से बनी इंसानी शरीर को प्राकृतिक तरीके से सकारात्मक ऊर्जा दिलाने में योगासनों का बेहद अहम किरदार होता है। इस लेख के माध्यम से योगासन के ऐसे तरीकों पर प्रकाश डालने का प्रयास होगा, जिनके सही और सटीक प्रयोग से इस तरह की समस्याओं से छुटकारा प्राप्त किया जा सके।

घुटना दर्द से संबंधित जटिलताएं

घुटना दर्द की समस्या वैसे तो किसी बड़े रोग का संकेत नही होती लेकिन कई बार आंतरिक रोगों के चलते स्थिति भयावह हो जाती है। सामान्य स्थिति वाले दर्द मसलन ज्यादा बोझ उठाने से लेकर गलत तरीके से खड़े होने और खान पान की विसंगतियों के चलते हो जाते हैं। गठिया या अर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारियों में हड्डियों के ऊतकों ओर जोड़ों के फ्लूड में संक्रमण की स्थिति में घुटना दर्द जीवन को संकट में डाल देता है। ऐसी स्थिति में ट्यूबरक्लोसिस या किडनी फेल्योर जैसी समस्याओं को भी देखने को मिलता है। इंसान की ऐसी फितरत है कि हल्का सा भी दर्द होने पर तुरन्त फौरी राहत प्रदान करने वाली आधुनिक दवाओं का इस्तेमाल बिना चिकित्सक की सलाह के लेना शुरू कर देता है। यह आदत भविष्य में उसे बड़ी मुसीबत में डाल देती है। भारी चोट या फिर खेल के चलते शल्य चिकित्सा बेहद जटिलताएं पैदा कर देती है। इसके अलावा गठिया या फिर अनुवांशिक समस्याओं से इंसान काफी तकलीफों का सामना करता है।
घुटना दर्द में योगासन

योग ऐसी विधा है जो हड्डियों को ही मजबूत नही करती अपितु के तरह के शारीरिक और मानसिक तनावों को भी जीवन से निकाल फेंकती है। नीचे दिए गए योगासन के तरीके वाकई समय से अनुपालित करने पर बेहद असरदार साबित हो सकते हैं।
घुटना दर्द योग में सुखासन के फायदे

सुखासन या अनंदासन बेहद सरल आसान माना जाता है। इसके प्रयोग से जहां शरीर जो आराम मिलता है तो दूसरी तरफ घुटना दर्द की समस्या भी समाप्त होने लगती है। इस आसन से मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति से निजात मिलती है तो हड्डियों में रक्त संचार का प्रवाह भी निरंतर बना रहता

सुखासन योग की विधि

जमीन या चटाई बिछाकर पैरों को फैलाते हुए सीधा लेट जाएं। इस स्थिति में शरीर को पूरा हल्का छोड़ दें और आंखों को बंद कर लें। अब गहरी सांस अंदर की तरफ खींचें और धीरे- धीरे सांस को छोड़ते रहें। ऐसा करीब 4 से 5 मिनट करते रहें। ऐसा करने से सीने की मांसपेशियों के साथ रीढ़ के ऊतकों में रक्त संचार बढ़ता है और दर्द दूर होने लगता है। खाली पेट इस आसन को पीठ के बल लेटने के अलावा पेट के बल लेटकर भी किया जाना हितकारी होता है।
घुटना दर्द योग में वज्रासन के लाभ


घुटना दर्द का योग में बज्रासन का बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। यह ऐसा आसन है जो मानसिक स्थिरता प्रदान करने के साथ शरीर मे कैल्शियम की मात्रा का संचार करता है। इस योग से फेफड़ों के संक्रमण सहित गठिया रोग दूर होने लगते हैं।

वज्रासन योग की विधि

सुबह नित्य क्रिया के बाद जमीन पर पैरों के बल बैठ जाएं। अब घुटनों के बल पर बैठने के साथ पैर की हथेलियों पर शरीर का वजन रखते हुए शरीर को सीधा रखें और हाथ को आगे की तरफ फैलाते हुए हल्का सा झुकाव के साथ गहरी सांस लें। याद रहे ऐसी स्थिति में वजन पैरों के पंजों पर ही रहे। अब हाथों को जमीन पर रखते हुए सिर को झुकाकर सांस छोड़ें। ऐसा आसन खाली पेट करने से पैरों की हड्डियों में हो रही समस्या में लाभ मिलता है। यह आसन 5 से 10 मिनट तक करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी साबित होता है।
घुटना दर्द योग में सर्वहित आसन के लाभ


यह ऐसा आसन है जो रीढ़ की हड्डियों को नई ऊर्जा तो देता ही है अपितु शरीर मे मौजूद हड्डियों के जोड़ों में मौजूद नर्म ऊतकों और फ्लूड की भी सुरक्षा करता है। खाली पेट सूर्योदय के वक्त इस योग को सही और सटीक प्रयोग करने से शरीर मे पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम की आपूर्ति होती है।

सर्वहित आसन की विधि
पैरों को फैलाकर पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। अब दोनों हाथों को कंधे के समानांतर फैलायें। हथेलियों को ऊपर की तरफ रखते हुए पैरों को मुंह की तरह मोड़ लें। इस दौरान पैरों के तलवे को जमीन से लगे रहने दें। अब शरीर को बाईं तरफ झुकाव देते हुए गहरी सांस लें। अब धीरे- धीरे पैरों को फैलाते हुए सांस को छोड़ना आरम्भ कर दें। ऐसी ही स्थिति में दाईं तरफ शरीर को मोड़ते हुए सांस खींचे और थोड़ी देर के बाद शरीर को हल्का करते हुए सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया के दौरान ध्यान देने वाली बात यह है कि बाजू जमीन से लगे हुए होने चाहिए। यह आसन करीब 4 से 5 बार दोहराएं। इस आसन से पीठ की हड्डियों में खिंचाव होता है और मांसपेशियों में नई ऊर्जा का संचरण भी होने लगता है।
घुटना दर्द योग संबंधित जरूरी सुझाव

घुटना दर्द योग ऐसी स्थिति होती है जिसमें कई बार हड्डियों के चटकने का डर बना रहता है। बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों का कठोर होकर कमजोर होना स्वाभाविक होता है। मरीज की उम्र और मर्ज के अनुसार चिकित्सक योग या व्यायाम की सलाह देता है। घुटना दर्द होने के दौरान देर तक कठिन योग से बचने की जरूरत होती है। योग को अमल में लाने से पहले आने चिकित्सक की सलाह से प्रशिक्षित फिजियो की देखरेख में व्यायाम करना उत्तम माना जाता है।



आयुर्वेद के कुछ नायाब तरीकों से पाया जा सकता है पीठ दर्द से राहत

पीठ का दर्द आयुर्वेदिक दवा हड्डियों के तमाम दर्द का इलाज करने में बेहद कारगर साबित होती है। आमतौर पर पीठ की समस्या बेहद सामान्य होती है लेकिन अक्सर उपचार के अभाव या दर्द की अनदेखी रोग की बड़ी वजह बन जाती है। आम तौर पर होने वाले दर्द मसलन एक जगह ज्यादा देर तक बैठ कर काम करने या फिर खड़े होकर घंटों तक दिनचर्या निपटने के दौरान देखी जाती है। पीठ हमारे शरीर जा ऐसा हिस्सा है जो सीधे तौर पर फेफड़ों से जुड़ा होता है। फेफड़ों के अलावा हृदय से लेकर लिवर और रीढ की हड्डी का सीधा संपर्क पीठ से होता है। कई बार इस तरह की समस्या बड़े रोगों का कारण बन जाती है। हल्का दर्द को इग्नोर करना या फिर बिना चिकित्सक की सलाह के पेन किलर दवाओं का इस्तेमाल मरीज को बड़े संकट में डाल देता है।

कैसे करे कमर दर्द का जबर्दस्त ईलाज / kamar dard ka ilaj

पीठ का दर्द फेफड़ों में संक्रमण का बड़ा संकेत होता है। इस तरह के दर्द ट्यूबरक्लोसिस या फिर रीढ़ की हड्डियों में संक्रमण के चलते पनपते हैं। दुनिया मे उपचार की कई पद्धतियां ईजाद की गई हैं जिनसे हड्डी से जुड़ी परेशानियों का इलाज किया जाता है लेकिन परंपरागत जड़ी बूटियों से बनी आयुर्वेदिक दवाओं के की समस्याओं में क्या लाभ होते हैं इस लेख से इस बात पर प्रकाश डाला जाएगा। इसके अलावा हम आपको इसकी जटिलताओं से भी रूबरू कराएंगे।

पीठ दर्द से संबंधित जटिलताएं

एक जगह ज्यादा देर तक बैठकर काम करने की आदत दफ्तरों में काम काजी लोगों का शगल बन चुका है। लोग अपनी दिनचर्या में इस तरह मशगूल हो चुके हैं कि पता ही नही चलता कि जीवनशैली किस तरफ जा रही है। जीवनशैली में लगातार परिवर्तन सहित खान पान के सटीक प्रयोग ना करने से हड्डियां कमजोर होकर घिसने लगती हैं। काफी देर तक एक करवट लेटने से भी हड्डियों पर दबाव पड़ने से प्लेट या लिगामेंट कठोर होने लगता है और उनमें सूजन आने लगती है। इस तरह से चोट या मांसपेशियों में या फिर नर्म ऊतकों की क्षति के साथ ही जोड़ों में मौजूद फ्लूड की कमी होने लगती है।

खान पान में दोष की वजह से हड्डियों में यूरिक एसिड की अधिकता होने से संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा पीठ का दर्द फेफड़ों के संक्रमण की सबसे बड़ी वजह बनता है। कफ जमने से सीने की हड्डियां संक्रमण का शिकार हो जाती हैं। हल्के दर्द के दौरान गफलत बरतने पर अक्सर ट्यूबरक्लोसिस जैसी बीमारी से पीठ की समस्या काफी बढ़ जाती है। इस तरह की समस्या विकट होती है और इनकी जटिलताओं की वजह से इलाज काफी लंबा चलता है।
पीठ का दर्द आयुर्वेदिक दवा के लाभ

पीठ का दर्द आयुर्वेदिक दवा वास्तव में हड्डियों के उपचार में खासा लाभ पहुंचाती है। पीठ की समस्या से ग्रसित मरीज की उम्र और समस्या किस वजह से हुई है इसके आधार पर इलाज की सलाह सी जाती है। यदि किसी सामान्य चोट या मोच की वजह से दर्द हो रहा होता है तो मरीज को दर्द समाप्त करने के लिए जड़ी बूटियों से तैयार कुछ औषधि को लेपन के लिए या खाने के लिए दिया जाता है। इस तरह की दवाएं थोड़े दिन के उपचार के बाद हड्डियों से जुड़ी मांसपेशियों का तनाव कम कर उनमें रक्त संचार बढ़ा देती हैं। रक्त संचार के बढ़ने के साथ कैल्शियम की मात्रा की प्रचुरता की वजह से दर्द समाप्त होने लगता है।

यदि मरीज को कफ की समस्या से पीठ दर्द का अनुभव हो था हो तब चिकित्सक कुछ ऐसे द्रवों को पीने की सलाह देता है जो शहद, काली मिर्च सहित पीपली जैसे तत्त्वों से निर्मित होती हैं। ऐसे द्रव शरीर मे पहुंचकर वात और कफ जैसे रोगों को खत्म कर पीड़ा से छुटकारा दिलाते हैं। दर्द की वजह यदि कैल्शियम की कमी है तब भी आयुर्वेद में ऐसे नुस्खे हैं जिनकी मदद से कमी को दूर करने वाली दवाओं के सेवन की सलाह दी जाती है। यदि मरीज फेफड़ों के संक्रमण या फिर ट्यूबरक्लोसिस जैसी गंभीर स्थिति से परेशान है तब इसके उपचार में एक से दो साल तक नियमित रूप से दवाओं के सेवन की सलाह दी जाती है। इस तरह की समस्याएं वैसे तो काफी जटिल होती हैं लेकिन कुछ परहेज के साथ समय से कुशल चिकित्सक की सलाह ओर नियमित ली गई खुराक क्षय जैसे रोगों को भी हराने के माद्दा रखती है। आयुर्वेद एक ऐसी उपचार पद्धति है जिसका साइड इफेक्ट लगभग ना के बराबर होता है। इस तरह के उपचार माध्यमों का सदियों से इस्तेमाल होता आया है वह भी बेहद सफलता पूर्वक। हालांकि इस तरह की दवाएं दर्द में तुरंत राहत तो नही पहुंचाती लेकिन मर्ज को जड़ से समाप्त करने में बेहद सहायक होती हैं।
आयुर्वेदिक दवा संबंधित जरूरी सुझाव/ सलाह
इसमें कोई शक नही कि पीठ के दर्द में सदियों पुरानी पारंपरिक उपचार माध्यम की दवाएं बेहद असरदार होती हैं। असर करने के अलावा ऐसी दवाओं का किसी भी तरह का साइड इफेक्ट भी नही देखा जाता। इस तरह की दवाओं का इस्तेमाल बिना चिकित्सकीय सलाह के बिल्कुल भी नही करना चाहिए। आयुर्वेद एक ऐसा माध्यम है जिसके साथ कई बार एलोपैथी दवाओं के सेवन की भी सलाह दी जाती है। हालांकि ऐसी मिश्रित दवाओं का सेवन अपने आप करना शरीर पर भारी पड़ सकता है। परहेज आयुर्वेदिक दवाओं में अमृत का कार्य करता है। यदि मरीज ने मर्ज के दौरान नियमित रूप से परहेज कर लाया तो उसके संपूर्ण तरीके से ठीक या स्वस्थ होने की संभावनाएं बढ़ काफी बढ़ जाती हैं।
एलोपैथिक दवाओं का पीठ के दर्द में होता है बेहद व्यापक असर


पीठ का दर्द एलोपैथिक दवा वास्तव में एक ऐसी आधुनिक औषधि है जो दर्द के दौरान तुरंत राहत तो देती ही है बल्कि काफी समय तक ऐसी समस्या का समाधान भी करती है। पीठ की समस्या से जूझ रहे लोग फौरी राहत के लिए जिस दवा का इस्तेमाल करते हैं उसी का नाम एलोपैथी है। इस तरह की दवाएं दर्द से राहत तो दिलाती ही हैं लेकिन बिना चिकित्सक की सलाह के ऐसी दवाएं शरीर को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। पीठ शरीर का ऐसा हिस्सा है जो सीधे तौर पर कई लेयर हड्डियों का ऐसा ढांचा होता है जिसकी संरचना बेहद जटिल होती है। इससे जुड़ी हड्डियां आपस में ऐसा चेन बनाती हैं जो आपस में हृदय से लेकर फेफड़ों को सीधे तौर पर जोड़ती है।

सामान्य परिस्थितियों में होने वाला दर्द लापरवाही के चलते बड़े रोग में तब्दील हो ही जाता है। एक अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस तरह की मर्ज की सबसे बड़ी खान पान और जीवनशैली को माना जाता है। भोजन में विसंगति के चलते शरीर में यूरिया की मात्रा के साथ ही हड्डियों को नुकसान पहुंचाने वाले अवशिष्ट पदार्थ जमना शुरू हो जाते हैं। वैसे तो दुनिया भर में इलाज की तमाम व्यवस्थाएं मौजूद हैं लेकिन आधुनिक उपचार की ऐलोपैथी दवा दर्द में तुरन्त राहत देने के साथ लंबे समय तक कारगर होती है। इस लेख से हम इस बात पर प्रकाश डालेंगे कि किस तरह से ऐसी दवाएं पीठ के दर्द में राहत देती हैं और इससे जुड़ी प्रमुख जटिलताओं पर भी चर्चा करेंगे।

पीठ दर्द से संबंधित प्रमुख जटिलताएं

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किसी भी जगह ज्यादा देर तक बैठकर काम करने की आदत हो या दफ्तरों में काम को निपटाने में लोग अपनी दिनचर्या में इस तरह मशगूल हो चुके हैं कि पता ही नही चलता कि जीवनशैली किस तरफ जा रही है। जीवन में तनाव के चलते नींद ना पूरी होने की वजह से हड्डियों का कमजोर होना स्वाभाविक है। खान पान के सटीक प्रयोग ना करने से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। काफी देर तक एक करवट के साथ सोने से भी हड्डियों पर दबाव पड़ने से प्लेट या लिगामेंट कठोर होने लगता है और उनमें सूजन आने लगती है। इस तरह से चोट या मांसपेशियों में या फिर नर्म ऊतकों की क्षति के साथ ही जोड़ों में मौजूद फ्लूड की कमी होने लगती है।

भोजन में दोष की वजह से हड्डियों में यूरिक एसिड की अधिकता होने से संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा पीठ का दर्द फेफड़ों के संक्रमण की सबसे बड़ी वजह बनता है। सीने में कफ जमने से सीने की हड्डियां संक्रमण का शिकार हो जाती हैं। हल्के दर्द के दौरान गफलत बरतने पर अक्सर ट्यूबरक्लोसिस जैसी बीमारी से पीठ की समस्या काफी बढ़ जाती है। एक सर्वे के मुताबिक दुनिया में हर साल ट्यूबरक्लोसिस जैसी जटिल समस्या से करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं। बढ़ता प्रदूषण इस तरह की बीमारी की सबसे बड़ी वजह माना जाता है।
पीठ का दर्द एलोपैथी दवा के फायदे
पीठ का दर्द एलोपैथी दवा वास्तव में एक ऐसी औषधि है जो शरीर पर तुरंत राहत देने का काम करता है। चिकित्सक इस प्रकार की दवाओं का इस्तेमाल मरीज की मौजूदा स्थिति के हिसाब से तय करता है। यदि सामान्य स्थिति के चलते दर्द हो रहा होता है तब चिकित्सक सामान्य पेनकिलर के साथ मरीज को हल्की एक्सरसाइज की सलाह देते हैं। इस तरह के उपायों से मरीज को आराम मिलता है। यदि इस तरह की दवा हल्का चोट या मोच जैसी दर्द को सही ना करने का कारण बनती है तब चिकित्सक एक्सरे से लेकर कई तरह के बायोस्कोपी की सलाह देते हैं। इसके साथ ही खून के कुछ नमूनों के साथ जांच के लिए कहा जाता है। खून की जांच में आये रिपोर्ट के साथ ही चिकित्सक दवा आरम्भ करता है। हालांकि मर्ज किस तरह जी है इस बात को जानने के साथ ही डॉक्टर कई तरह के एन्टी ऑक्सीडेंट के साथ एलर्जी को दूर करने वाली दवाओं के सेवन की साल देते हैं। इसके अलावा कफ और वात रोगों को दूर कर पीठ के दर्द को समाप्त करने के लिए कुछ सीरप के इस्तेमाल की भी सलाह दी जाती है।

इसके साथ मैरेज को कई सप्ताह तक लगातार दवाओं के सेवन की सलाह दी जाती है। यदि मरीज का पीठ ट्यूबरक्लोसिस की वजह से दर्द से कराह रहा हो तब चिकित्सक डॉट जैसी आधुनिक प्रणाली की दवाओं की सलाह देते हैं। हालांकि इस तरह के उपचार माध्यम काफी लंबे वक्त तक चलाये जाते हैं। जब दवा से मरीज को पीठ की समस्या से राहत नही मिलती तब आखिरी विकल्प शल्य चिकित्सा की बचती है। हालांकि यह प्रक्रिया काफी जटिल और कष्टकारी होती है लेकिन उपचार के बाद मरीज लंबे समय तक स्वास्थ्य लाभ उठा सकता है। इसके साथ ही कुछ परिस्थितियों में मरीज को पूरी जिंदगी दवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है।
पीठ का दर्द एलोपैथी दवा सम्बंधित जरूरी सलाह/ सुझाव

एलोपैथी एक ऐसी चिकित्सा व्यवस्था है जो तेज दर्द के समय तुरंत राहत देकर सकून देती है। या दुनिया की सर्वमान्य दवा मानी जाती है। इस चिकित्सा सेवा की अपनी कुछ दुश्वारियां भी होती हैं। एलोपैथिक दवाओं का ओवर डोज़ बेहद खतरनाक होता है। इस स्थिति में इंसान का जीवन खतरे में पड़ जाता है। इसके अलावा इसकी मात्रा का सेवन कम करने पर दवा शरीर पर असर नही करती। ज्यादा मात्रा में पेनकिलर या फिर एन्टी बायोटिक दवाओं के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है। जब भी एलोपैथी चिकित्सा विधा की दवाओं का इस्तेमाल करें, पंजीकृत 


हर बार सामान्य नहीं होता पीठ का दर्द, यूनानी दवा से इलाज हो सकता है बेहद कारगर


पीठ का दर्द यूनानी दवा वाकई हड्डियों के दर्द में बेहद लाभदायक होते हैं। वैसे तो पीठ में इस तरह के दर्द बेहद सामान्य होते हैं जो हल्की चोट या दबाव के बाद आरम्भ हो सकते हैं। ज्यादा देर तक झुककर बैठने की आदत या फिर झुककर खड़े होने की लत पीठ में रक्त संचार कम कर दर्द का कारण बन सकती है। हालांकि ऐसी परिस्थितियों में हल्का मसाज त आदत में सुधार के साथ ही दर्द में राहत प्राप्त हो जाती है। सामान्य स्थिति वाले दर्द समय पर उपचार के बाद ठीक होने लगते हैं लेकिन अक्सर इस तरह के दर्द की अनदेखी करना भारी पड़ सकता है। पीठ की संरचना ऐसी होती है जो हड्डियों के अलग- अलग कण्डरा या पिंडलियों से आपस में जुड़ी होती है। रीढ़ की हड्डी में मौजूद प्लेट में किसी भी वजह से आई विषमता से भी ऐसी समस्या उत्पन्न होने लगता है।

पीठ पर भारी वजन उठाने या फिर लगातार बोझ ढोने वाले लोगों में यह समस्या बेहद आम रूप धारण नर लेती है। दुनिया में वैसे तो कई उपचार माध्यमों से इस तरह के दर्द का इलाज किया जाता है लेकिन हर्बल पर आधारित यूनानी दवा के पीठ दर्द में क्या फायदे होते है, और इसकी जटिलताएं क्या होती हैं इस बात की चर्चा आवश्यक है। इस लेख के माध्यम से हम कुछ ऐसे बिंदुओं पर चर्चा करने वाले हैं।

पीठ के दर्द से संबंधित जटिलताएं

शरीर हड्डियों का ऐसा जाल होता है जिसके बिना शरीर की संरचना का निर्माण की कल्पना भी बेमानी होती है। पीठ शरीर का ऐसा भाग होता है जिसकी संरचना में सीने की हड्डियों का अहम रोल होता है। पीठ की पिंडलियों का सीधा संबंध हृदय और फेफड़ों के अलावा रीढ़ की हड्डी जुड़ा होता है। रीढ़ की हड्डी में किसी भी वजह से लगी चोट पीठ दर्द की वजह बन जाती है। हड्डियों की मांसपेशियों में चोट या लिगामेंट में सूजन के चलते जोड़ों में मौजूद ऊतकों में खिंचाव का अहसास होता है। पीठ की समस्या के चलते इंसान की जीवनशैली काफी प्रभावित होती है। कई बार चोट लगने के कुछ दिन बाद दर्द का उभार होता है। इस तरह के दर्द कई रूपों में अलग- अलग रोगों की वजह बन सकते हैं। पीठ की समस्या वैसे तो कई रोगों का जनक होती है लेकिन ट्यूबरक्लोसिस या गांठ का बनना बेहद खतरनाक स्थिति होती है। इस तरह के मर्ज में इलाज काफी लंबा चलता है। रोग की मौजूदा स्थिति पर यह बात ज्यादा लागू होती है।
पीठ का दर्द यूनानी दवा के लाभ

पीठ का दर्द यूनानी दवा वास्तव में बेहद लाभ वाली चिकित्सा मानी जाती है। यूनानी हड्डियों के रोगों को जड़ से समाप्त करने की कूबत रखती है यह कहना कतई गलत नही होगा। वैसे यह बात कई स्वास्थ्य शोधों में सिद्ध हो चुकी है। यूनानी एक ऐसी हर्बल आधारित चिकित्सा व्यवस्था है जिसके दुष्परिणाम ना के बराबर होते हैं। पीठ में दर्द के दौरान चिकित्सक इंसान की मर्ज के लिहाज से इलाज या उपचार करना आरम्भ करता है। इलाज के दौरान उम्र का भी ख्याल रखा जाता है। यदि दर्द हल्की चोट या मोच की वजह से है तब मेथी दाना से बनाते पेस्ट को लगाने जी सलाह दी जा सकती है। इसके अलावा भी कुछ हर्बल आधारित कैप्सूल या टेबलेट के साथ तेल मालिश की सलाह दी जाती है। आम तौर पर एक या दो सप्ताह इलाज के बाद दर्द में लाभ मिलना शुरू होने लगता है। यदि दर्द बढ़ती उम्र के लिहाज से हो रहा हो तब हकीम शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ाने वाली दवाओं के सेवन की सलाह देते हैं। बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों का कठोर होना स्वाभाविक होता ही है बल्कि उम्र के साथ हड्डियों में कैल्शियम की जरूरी आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसके अलावा सबसे जटिल रोग कफ जमने या फिर ट्यूबरक्लोसिस जैसे रोगों में होती है।

इस रोग से हड्डियों की मांसपेशियों में मौजूद नर्म ऊतकों और फ्लूड को कीड़े या बैक्टीरिया खाना या चाटना शुरू कर देते हैं। यदि समय से यूनानी चिकित्सा की दवाएं इस तरह के रोगियों पर आजमाई जाएं तो उपचार काफी आसान हो जाता है। यूनानी दवाओं का असर शरीर पर तभी होता है जब दवा के साथ बताये गए परहेजों को अमल में लाया जाए। अधिक खट्टे या तीखे लाल मिर्च जैसे खाद्य पदार्थ हड्डियों के लिए दुश्मन का काम करते हैं। हड्डियों में मौजूद यूरिक एसिड से जमाव पैदा कर रहे निकिल जैसे तत्वों को बाहर निकालने के लिए यूनानी दवाएं काफी असरदार होती हैं। गठिया या फिर अर्थराइटिस जैसी जटिल परिस्थितियों में कई तरह की हर्बल यूनानी दवायें उपयोग के लिए मरीज को दी जाती हैं। यूनानी दवाएं वास्तव में लाभ तो पहुंचाती हैं लेकिन तेज दर्द के दौरान ऐसी दवाओं का असर शरीर पर ना के बराबर होता है।
पीठ का यूनानी दवा संबंधित जरूरी सलाह/ सुझाव

पीठ का दर्द यूनानी दवा वास्तव में लाभदायक होती है लेकिन इसके साथ परहेज बेहद आवश्यक है। यदि मरीज को समय से स्वस्थ होना है तो परहेज आवश्यक होता है। इसके अलावा चिकित्सक की सलाह के बगैर किसी भी तरह की दवा का सेवन शरीर को बेहद नुकसान पहुंचा सकता है इस तरह की दवाओं के साथ अन्य विधा की दवाओं का सेवन सही नही होता। ऐसी स्थिति में चिकित्सक की सलाह पर दवाओं का सेवन करें। दो विधा की दवाएं आपस में अभिक्रिया कर सकती हैं जिसकी वजह से रोगी की जान तक जाने का खतरा बन जाता है।


होम्योपैथी चिकित्सा दिला सकती है पीठ के दर्द में स्थाई समाधान!


एक सर्वे बताता है कि पीठ का दर्द होम्योपैथी दवा वास्तव में काफी कारगर साबित हो रही है। यह जरूरी नही कि ऐसी समस्या के पीछे हर बार किसी बड़े रोग की ही वजह हो। पीठ पर ज्यादा वजनी या गलत आकार का बैग लादकर घंटों पैदल चलने की आदत से भी ऐसी समस्या होने के चांस बढ़ जाते हैं। ज्यादा देर तक एक जगह उकडू बैठने या फिर देर तक करवट लेकर लेटने से भी पीठ में समस्या होना शुरू हो जाता है। पीठ की कण्डरा में सूजन या फिर प्लेटों के नर्म ऊतकों में संक्रमण होने से भी दर्द बढ़ जाता है। हालांकि कई ऐसी चिकित्सकीय परिस्थितियों से लोगों का सामना होता है जिनसे कई बार लोग अनजान रहते हैं। एक स्वास्थ्य सर्वे की मानें तो खान पान के दोष के चलते करीब 90 फीसदी इस तरह के मरीज रोगों का शिकार होते हैं। इसके अलावा नींद कम लेने वाले लोग भी अवसाद का शिकार होकर दर्द का शिकार हो जाते हैं। दुनिया में उपचार की कई पद्धतियां मौजूद हैं लेकिन होम्योपैथी की तरफ लोगों का रुझान बढ़ा है। इस लेख को लिखने का मुख्य मकसद इस बात पर प्रकाश डालने का है कि किस तरह से यह जर्मन तकनीक पीठ के दर्द में राहत पहुंचाती है, और इस तरह की मर्ज की मुख्य जटिलता क्या है इस बात पर भी फोकस करेंगें।

पीठ का दर्द संबंधित प्रमुख जटिलताएं

पुराने से पुराना कमर का दर्द हो जायेगा जड़ से खत्म इस अचूक नुस्खे से |
 Kamar Dard ka Gharelu ilaj

पीठ शरीर का ऐसा हिस्सा है जिसकी संरचना हड्डियों के जाल की तरह होती है। इसका सीधा संबंध हृदय सीना, और फेफड़ों के अलावा रीढ़ की हड्डी से होता है। रीढ़ की हड्डी में किसी भी वजह से लगी चोट पीठ दर्द का कारण बन जाती है। कण्डरा में चोट या लिगामेंट में सूजन के चलते हड्डियों में मौजूद मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होता है। इस प्रकार की समस्या के चलते इंसान को अपनी दैनिक दिनचर्या करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार चोट लगने के कुछ दिन बाद दर्द का उभार होता है। इस तरह के दर्द कई रूपों में अलग- अलग रोगों की वजह बन सकते हैं। पीठ की समस्या वैसे तो कई रोगों का जनक होती है लेकिन ट्यूबरक्लोसिस या गांठ का बनना बेहद खतरनाक स्थिति होती है। इस तरह के मर्ज में इलाज काफी लंबा चलता है। रोग की मौजूदा स्थिति पर यह बात ज्यादा निर्भर करती है कि ऊSकी मौके पर स्थिति क्या है। ट्यूबरक्लोसिस जैसी स्थिति में इंसान के सीने में दर्द के अलावा कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है। अक्सर ऐसे इलाजों में आधुनिक युग की दवाओं के सहारे 80 फीसदी लोग स्वास्थ्य लाभ उठाते हैं।
पीठ का दर्द होम्योपैथी दवा के फायदे

पीठ का दर्द होम्योपैथी दवा का असर तुरंत तो नही होता बल्कि आगे चलकर नियमित उपयोग व्यापक असर दिखाता है। होम्योपैथी चिकित्सक सबसे पहले रोगी की वर्तमान स्थिति के अनुसार हल्की दवाओं के सेवन की सलाह देता है। हल्की दवाएं कुछ दिन खाने या पीने के बाद यदि मर्ज में आराम नही मिलता तब रोगी को कुछ ऐसी दवाओं के सेवन की सलाह दी जाती है जिससे रोग में एक बार उभार महसूस हो। हालांकि अलग मामलों चिकित्सक अलग तरह से इलाज प्रक्रिया अपनाता है। यह जरूरी नही कि हर होम्योपैथी चिकित्सक एक ही तरह की चिकित्सकीय विधा अपनाये।

रोग या दर्द के उभार के साथ डॉक्टर ऐसी दवा के सेवन की सलाह देता है जो काफी लंबे समय तक खाने या पीनी पड़ती है। ब्रायोनिया जैसी दवाएं जो दर्द कम करने में ऐ जाती है, इनका निरंतर प्रयोग शरीर से गठिया या अर्थराइटिस जैसे रोगों को जड़ से समाप्त करने का काम करता है। होम्योपैथी उपचार माध्यम की दवाएं काफी लंबे उपचार के बाद शरीर में असर दिखाने का काम करती हैं। इस उपचार पद्धति में कई तरह के परहेज बताये जाते हैं जो अलग- अलग चिकित्सक की अलग- अलग राय की तरह होते हैं। कुछ चिकित्सक लहसुन और प्याज को दवा के समय बिल्कुल भी छोड़ने की सलाह देते हैं। यदि दवा के समय किसी भी स्थिति में परहेज ना किया गया तो ऐसी दवाएं किसी भी कम की नही होती हैं। इसके अलावा खट्टे पदार्थों के सेवन से भी परहेज की सलाह दी जाती है। ज्यादा तैलीय भोजन या जंक फूड का सेवन मर्ज को कम करने की जगह बढ़ाने का काम करता है। ऐसी दवाओं की अपनी कई तरह की विसंगतियां भी होती हैं। हर होम्योपैथी चिकित्सक मरीज को भोजन के आधे घंटे बाद ही दवा के इस्तेमाल की सलाह देता है। विसंगति इस तरह की उपचार माध्यम में कुछ इस तरह की होती है कि ऐसी दवाएं दर्द के समय किसी काम की नही होती हैं और दवाएं काफी लंबे समय तक चलती हैं। होम्योपैथी उपचार माध्यम में चिकित्सक और मरीज दोनों को काफी धैर्य की जरूरत होती है।
पीठ का दर्द होम्योपैथी दवा संबंधित जरूरी सुझाव/सलाह

होम्योपैथी चिकित्सा के पीठ दर्द में बेहद लाभ होते हैं लेकिन इसकी विसंगतियां भी कम नही होती हैं। तुरन्त दर्द या तेज दर्द के दौरान ऐसी दवाएं किसी काम की नही होती। यदि इस तरह की दवा के साथ किसी अन्य दवा का इस्तेमाल बिना चिकित्सक की सलाह के किया जाए तो बेहद खतरनाक हो सकता है। यह दवाएं शरीर में बड़ी तेजी से अभिक्रिया करती हैं। इसके अलावा ज्यादा मात्रा में दवा लेने से शरीर को बेहद नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। होम्योपैथी चिकित्सा की दवाएं बिना परहेज के किसी भी काम की नही होती हैं। जब भी होम्योपैथी दवा का इस्तेमाल करें अपने चिकित्सक की सलाह जरूर ले लें।






पैर दर्द में होम्योपैथी दवा से उपचार कुछ इस तरह देता है लाभ


पैर दर्द की होम्योपैथी दवा के बारे में इसलिए भी जानना आवश्यक होता है क्योंकि इस तरह की उपचार विधा की दवाएं कई तरह के साइड इफेक्ट और एलर्जी को समाप्त कर देती हैं। पैरों के बिना सम्मानजनक जीवन की कल्पना बेमानी होती है। गठिया बाई से लेकर अर्थराइटिस जैसी समस्या, पैरों के जोड़ों में आमतौर से होने रोग होते हैं। कूल्हे से लेकर तलवों तक कई ऐसे जोड़ होते हैं जिनका सीधा संबंध रीढ़ की हड्डियों से होता है। कूल्हे से लेकर घुटने टेक जाने वे हड्डी में 3 प्रकार के प्लेट होते हैं। इन प्लेटों से जुड़ी मांसपेशियों में संक्रमण या फिर खिंचाव आने को स्थिति में दर्द बढ़ ही जाता है।

हालांकि कुछ मामलों में पैर के दर्द बेहद सामान्य होते हैं। सामान्य परिस्थितियों वाले दर्द हल्का मसाज करने के बाद आसानी से स्वतः समाप्त हो जाते हैं। पैर के जोड़ घुटने सहित अन्य जगहों ओर तेज चोट या फिर अनुवांशिक स्थितियों के चलते कई बार जटिल दर्द का शिकार हो जाते हैं। वैसे दुनिया मे कई उपचार पद्धतियां मौजूद हैं लेकिन इन्हीं में एक दवा जर्मन पद्धति की होम्योपैथी भी है। इस लेख से हम यह बताने की कोशिश कर रहें हैं कि पैरों की समस्या में ऐसी दवाओं की क्या उपयोगिता होती है, साथ ही इस बात को जानने की भी कोशिश रहेगी कि इस तरह के रोगों की जटिलताएं किस तरह लोगों को गंभीर परेशानी में डाल देती हैं।

पैर दर्द से संबंधित जटिलताएं

एक्सीडेंट के दौरान हुई हड्डी की फ्रैक्चर एक ऐसी समस्या होती है जिससे हड्डियों के मजबूत लेयर या प्लेट टूट जाते हैं। हड्डियों के टूटने के साथ ही उससे जुड़ी मांसपेशियों के खिंचाव से स्थिति बेहद जटिल हो जाती है। पैरों की हड्डी के चटकने के साथ ही जोड़ों के फ्लूड भी सूख जाते हैं या फिर संक्रमित हो उठते हैं। इस तरह से शल्य क्रिया कर मरीज की हड्डियों को रिपेयर किया जाता है। इस तरह कई बार स्थिति ऐसी होती है कि यह समस्या गठिया या अर्थराइटिस में तब्दील होने लगती है। संक्रमण के चलते मरीज को आजीवन दवाओं के सहारे जीना पड़ता है। हालांकि चोट के अलावा भी कई ऐसी जटिलताएं हैं जिनसे मरीज को बेहद परेशानी होती है। कुछ आंतरिक रोगों मसलन किडनी में संक्रमण के चलते भी पैरों के दर्द का खतरा बढ़ जाता है। पेशाब में जलन के साथ मूत्र मार्ग में संक्रमण के चलते रीढ़ की हड्डियां प्रभावित होती हैं। इन सबकी वजहों से पैरों संबंधित समस्याएं बेहद जटिल स्थिति में पहुंच जाती हैं। पैर दर्द की होम्योपैथी दवा वाकई बेहद असर पहुँचाती है लेकिन इलाज काफी लंबा चलता है।
होम्योपैथी दवा से पैर दर्द में लाभ
पैर दर्द की होम्योपैथी दवा के रूप में जर्मन तकनीक की दवाओं का असर व्यापक तौर पर सकारात्मक असर डालता है। दवाओं की बात करें तो पैर की समस्या जैसे गठिया या अर्थराइटिस रोगों में यह दवाएं काफी लाभ की होती हैं। हालांकि कुछ मामलों में जब घुटने में गठिया की वजह से दर्द हो रहा हो तब ब्रायोनिया नामक जर्मन तकनीक की जेनरिक दवा का प्रयोग होम्योपैथी में काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके अलावा होम्योपैथी चिकित्सक, मरीज की मौजूदा उम्र के हिसाब से दवाओं के सेवन की सलाह देता है। उम्र, लिंग और मौजूद स्थिति के हिसाब से ही जर्मन तकनीक की होम्योपैथी दवाएं उपयोग के लिए दी जाती हैं। द्रव सहित खाने के लिए टेबलेट और चीनी की गोली जैसी दवाओं का असर वाकई काफी अच्छा होता है। पैर के रोगों से पीड़ित लोगों पर हुए एक सर्वे के मुताबिक यह दवाइयां असर तो करती हैं लेकिन इनमें काफी लंबा वक्त भी लग जाता है। होम्योपैथी चिकित्सा में शरीर में मौजूद किसी भी तरह की एलर्जी को जड़ से समाप्त करने केई कूबत होती है।

होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की दवाएं मर्ज के लिहाज से काफी लंबे वक्त तक चलती हैं। हालांकि यह बात मरीज की मौके की स्थिति पर निर्भर करता है गठिया या फिर अनुवांशिक कारणों से हीन वाले पैर दर्द में होम्योपैथी दवा काफी लंबे समय तक उपयोग की जाती है। मरीज और चिकित्सक दोनों को इस माध्यम की दवाओं के साथ उपचार में धैर्य की जरूरत होती है। इस उपचार माध्यम की सबसे बड़ी खासियत है परहेज। यदि इसे अमल में ना लाया जाए तो रोग समाप्त होने के मौके कम हो जाते हैं। कलाई का उपचार करने से पहले होम्योपैथी चिकित्सक कुछ ऐसी दवा के सेवन की सलाह देते हैं जिससे मर्ज उभरती है। मर्ज के उभरने के साथ ही उसका सटीक उपचार किया जाता है। होम्योपैथी दवा प्लाज्मा में जाकर क्षतिग्रस्त ऊतकों को रिपेयर तो करता ही है बल्कि संक्रमण को भी स्थाई समाधान देने का काम करता है। गठिया सहित पुरानी चोट के उभरने का मामला हो या फिर वात या कफ वृद्धि की वजह से दर्द हो तब भी ऐसी दवाएं काफी काम की होती हैं।
पैर दर्द की होम्योपैथी दवा संबंधित जरूरी सुझाव

पैर दर्द की होम्योपैथी दवा वाकई काफी लाभकारी होती हैं लेकिन इनकी जटिलताओं के बारे में भी जानना जरूरी है। इस तरह की दवाइयां काफी देर बाद असर करती हैं। पैर में तेज दर्द के दौरान ऐसी दवाइयां किसी भी काम की नही होती। यदि ऐसा कहा जाए कि दर्द को समाप्त करने में या फौरी राहत देने में इस दवा का कोई असर नही होता। इसके अलावा यदि आप इस दवा के साथ एलोपैथ या किसी अन्य दवा का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो तुरंत अपने चिकित्सक की सलाह लें। ऐसी दवाइयां अन्य दवाओं के साथ अभिक्रिया कर शरीर को हानि पहुंचा सकती हैं।

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