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तो इन कारणों से होती है वैजाइना में ड्रायनेस

तो इन कारणों से होती है वैजाइना में ड्रायनेस

उन महिलाओं के लिए जिनका मीनोपॉज का समय पास आ रहा है या फिर वह इस फेज से गुज़र चुकी हैं, वजाइना का शुष्क होना एक आम बात होगी।

ऐसा इसलिए क्योंकि इस समय में महिलाओं में एस्ट्रोजन का उत्पादन नहीं होता। पर अगर ऐसी परेशानी उन महिलाओं को होती है जो पचास साल से नीचे हों और अठारह साल से ऊपर हैं, तो यह परेशानी का कारण हो सकता है



सर्विक्स पर वजाइनल मॉइस्चर बनता है जिससे वजाइना नम रहती है। यह बहुत ज़रूरी है क्योंकि इससे डेड सेल हट जाते हैं और वजाइना स्वस्थ रहता है। इससे वजाइनल इन्फेक्शन भी नहीं होता।

जो वजाइना की शुष्की से पीड़ित होते हैं उन्हें सम्भोग या पेशाब करते वक़्त, एक्सरसाइज करते वक़्त या सामान्य समय भी जब वह बैठे या खड़े रहते हैं, काफी पीड़ा, खुजली और जलन होती है। इससे महिला की सामान्य गतिविधियों पर भी असर पड़ता है।

इतना सहने के बाद भी महिला अपने नज़दीकियों से भी इस बारे में खुल कर बात करने से शर्माती है। हालांकि, एक बार इसका पता लग जाने के बाद इसका जल्दी से जल्दी उपचार करना बेहद ज़रूरी है नहीं तो इससे बांझपन भी हो सकता है। वजाइना में शुष्की के कुछ कारण यहाँ बताये गए हैं:
1. हॉर्मोन में बदलाव: यह एक सबसे ज़्यादा आम कारण है। जब महिला के हॉर्मोन में बदलाव आते हैं खासकर मीनोपॉज या बच्चे होने के बाद उनके शरीर में एस्ट्रोजन की कमी हो जाती है। इससे वजाइना में शुष्की हो जाती है।
2. कीमोथेरेपी: जब एक महिला कीमोथेरेपी से गुज़रती है तो इसका असर अंडाशय पर पड़ता है और इससे एस्ट्रोजन का बना कम हो जाता है। इससे वजाइना में लुब्रिकेशन कम हो जाती है और शुष्की बन जाती है।
3. स्प्रे और साबुन: कुछ कड़े साबुन और स्प्रे के इस्तमाल से भी वजाइना में शुष्की आ सकती है। स्विमिंग पूल में इस्तमाल किये जाने वाले केमिकल भी वजाइना में शुष्की का अहम कारण हो सकता है।

4. दवाइयां: ज़्यादा दवाइयों का इस्तमाल जैसे सर्दी की दवाई या डिप्रेशन दूर करने के लिए दवाई लेने से वजाइना के टिश्यू सूखने लगते हैं जिससे वजाइना में शुष्की आ जाती है।

5. ज़्यादा तनाव: स्ट्रेस वजाइना में शुष्कता का सबसे प्रमुख कारण है। इससे कामेच्छा नहीं होती और एस्ट्रोजन भी कम बनता है।
6. ज़्यादा एक्सरसाइज: रोज़ थोड़े एक्सरसाइज से काफी फायदा होता है पर ज़्यादा एक्सरसाइज से एस्ट्रोजन का बनना कम हो जाता है जिससे वजाइना ड्राई हो जाती है।
7. धूम्रपान और शराब: धूम्रपान और शराब भी वजाइना में शुष्की का प्रमुख कारण है। इससे एस्ट्रोजन के स्तर में असर पड़ता है जिससे वजाइना में शुष्कता की समस्या सामने आती है।
8. डाउचिंग: जैसा की कई शोधों से पता चला है, डाउचिंग भी वजाइना के शुष्क होने का अहम कारण हो सकता है।


Omg! वैजाइना से जुडे़ ये Facts जान कर रह जाएंगी आप हैरान
वैजाइना से संबंधित कुछ ऐसे तथ्य हैं जिनके बारे में हम में से अधिकाँश लोग नहीं जानते। इसे मात्र एक ऐसा अंग समझा जाता है जो सेक्स करने के लिए है या यहाँ से बच्चे बाहर आते हैं।


इसके अलावा भी वैजाइना से संबंधित कुछ तथ्य है जिन्हें समझना और सीखना आवश्यक है। हम दावे से यह बात कह सकते हैं कि इनमें से कुछ तथ्य आपके दिमाग को हिलाकर रख देंगे।


कई बार ऐसा होता है कि महिलाओं को अपने शरीर की भी पूरी जानकारी नहीं होती। इसका मुख्य कारण प्रतिबंध तथा अपने शरीर के भागों और वजाइना के बारे में पूरी जानकारी न होना है क्योंकि यह शरीर का ऐसा अंग है जिसके बारे में जानकारी देना अक्सर टाला जाता है। तो आइए इस अँधेरे विषय के बारे में कुछ रोचक तथ्य जानें:
तथ्य #1 क्लाइटॉरिस पर लगभग 8000 तंत्रिकाएं समाप्त होती हैं। दूसरी ओर पुरुषों के पेनिस लिंग में 4000 तंत्रिकाएं होती हैं। यही कारण है कि यह भाग महिलाओं के शरीर में वासना को उत्तेजित करने वाला सबसे संवेदनशील भाग होता है!


तथ्य #2 वजाइना में एक प्राकृतिक लुब्रीकेंट (स्नेहक) उपस्थित होता है जिसे स्कुआलेन कहा जाता है। यही पदार्थ शार्क के लिवर में भी पाया जाता है। हमें यह सोचकर आश्चर्य होता है कि इसका परीक्षण किसने किया होगा?


तथ्य #3 आपको यह समझना होगा कि जब कोई महिला अधिक सेक्स करती है तो इसका लचीलापन कम नहीं होता। यह पुन: अपने पहले आकार में वापस आ जाता है। ध्यान रहे: वजाइना का लचीलापन केवल बच्चे के जन्म के समय खो जाता है।
तथ्य #4 वजाइना में कोई भी चीज़ गम नहीं सकती। यदि आप ऐसा सोचते हैं कि आपको महिला के गर्भाशय में पुराने टैम्पून आदि मिलेंगे तो आपको मायूस हो जायेंगे कि सर्विक्स (गर्भाशय की ग्रीवा) से स्पर्म (शुक्राणु) के अलावा अन्य कोई चीज़ अंदर नहीं जा सकती! 
तथ्यt#5 वजाइना के अंदर का भाग जुराब की तरह होता है जिसका एक सिरा गर्भाशय में खुलता है। तो अब इसके बारे में सोचना छोडिये। 
तथ्य#6 प्रिय महिलाओं, इस तथ्य को पढ़ते समय गर्व महसूस करें! एक खोज के अनुसार एक महिला द्वारा एक घंटे के अंदर प्राप्त चरम सीमा की संख्या 134 है जबकि पुरुषों में यह सिर्फ 16 है।
तथ्य #7 चेहरे के समान ही इसमें भी झुर्रियां पड़ती हैं तथा यह लटकने लगता है। हमें यह सोचकर आश्चर्य होता है कि दुनिया में किसको इतनी फुर्सत थी जिन्होंने इस तथ्य का पता लगाया!
तथ्य #8 हालाँकि प्युबिक हेयर (जघन क्षेत्र में पाए जाने वाले बाल) मोटे और लंबे होते हैं परन्तु इनकी उम्र अधिक नहीं होती क्योंकि इनका जीवन काल 3 सप्ताह तक का होता है जबकि सिर के बालों का जीवनकाल 7 वर्षों तक का होता है।
तथ्य #9 वजाइना पेनिस को पकड़कर रख सकता है! अत: पुरुषों के लिए यह जानना आवश्यक है कि पुरुषों का लिंग कई घंटों तक वजाइना में फंस कर रह सकता है। विश्वास करें, यह मज़ाक नहीं है! इस स्थिति को “पेनिस केप्टिवुस” कहा जाता है। हर औरत को यौन स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में पता होने चाहिये ये तथ्‍य

तथ्य #10 यदि आप ऐसा सोचती हैं कि इरेक्शन केवल पुरुषों को होता है तो यह बिलकुल गलत है! वजाइना में भी इरेक्शन होता है तथा संभोग के समय यह 200% तक फ़ैल जाता है! उम्मीद है कि वहां से कोई राक्षस बाहर नहीं आएगा।

तथ्य #11 क्या आप जानते हैं कि महिलाओं का वजाइना बाहर आ सकता है और पैरो के बीच लटक सकता है! इस स्थिति को “पेल्विक प्रोलेप्स” कहा जाता है और सौभाग्य से इसे ठीक किया जा सकता है।


योनि में सूखेपन से निपटने के 7 प्राकृतिक तरीके


हालाँकि महिलाएं कभी भी इस बारे में बात नहीं करती परंतु इस समस्या के कारण निश्चित ही उन्हें बहुत परेशानी होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि योनि के सूखेपन की समस्या से निपटना बहुत अधिक मुश्किल है। ऊपरी तौर पर इस समस्या के कोई लक्षण नहीं दिखते परन्तु महिलाओं के स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।



और क्या? यह समस्या सेक्स जीवन को भी प्रभावित करती है जिसके कारण शारीरिक अंतरंगता सीमित होती है तथा संक्रमण और एलर्जी की संभावना बढ़ जाती है। हालाँकि कई ऐसे तरीके हैं जिनसे योनि के सूखेपन की समस्या से निपटा जा सकता है। यहाँ कुछ तरीके बताए गए हैं जिनकी सहायता से आप बिना रसायनों का उपयोग किये इस समस्या से निपट सकते हैं।

1. ओमेगा–3 फैटी एसिड :

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में हो, सूखेपन की समस्या से निपटने में सहायक होते हैं। अत: अपने आहार में मछली, कद्दू, तिल, सनफ़्लावर सीड्स आदि को शामिल करें जो योनि के सूखेपन की समस्या से निपटने में सहायक होते हैं।
2. प्रोबायोटिक्स लें:
प्रोबायोटिक्स अच्छे और स्वस्थ बैक्टीरिया होते हैं जो योनि की गुहा में पी एच के संतुलन को बनाकर रखते हैं। दही तथा दूध के अन्य उत्पादों में उपस्थित लेक्टोबेसिली प्रोबायोटिक्स की श्रेणी में आता है। अध्ययनों से पता चला है कि नियमित तौर पर प्रोबायोटिक्स का सेवन करने से प्री मेनोपॉज़ तथा पोस्ट मेनोपॉज़ के समय महिलाओं में होने वाले योनि के संक्रमण को रोका जा सकता है तथा योनि के स्त्राव को बढ़ाकर योनि को प्राकृतिक तरीके से लुब्रिकेट रखा जा सकता है।

3. विटामिन लेना न छोड़ें:
विटामिन की गोलियाँ या विटामिन से समृद्ध खाद्य पदार्थ न केवल आपकी त्वचा को चमकदार बनाते हैं बल्कि आपकी योनि को भी स्वस्थ रखते हैं तथा आपके सेक्स जीवन में भी सुधार लाते हैं। विटामिन ए, ई तथा सी योनि के सूखेपन की समस्या से निपटने में सहायक होते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थ खाएं जिनमें ये विटामिन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हों जैसे गाजर, कद्दू, शकरकंद और हरी पत्तेदार सब्जियां जिनमें विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। मुट्ठी भर मूंगफली, बादाम और सूरजमुखी के बीज खाएं तथा विटामिन ई के लिए पालक खाएं।
4. प्राकृतिक लुब्रीकेंट्स का उपयोग करें:
बाज़ार में कई तरह के लुब्रिकेंट्स उपलब्ध हैं जो आपको मनचाहा परिणाम देने का दावा करते हैं। हालाँकि कई महिलायें केमिकल्स के प्रति सेंसेटिव होती हैं या उन्हें एलर्जी हो जाती है। अत: सुरक्षित तरीका यह है कि ऐसे तेल का उपयोग करें जो आपके लिए आरामदायक हो। नारियल का तेल तथा जैतून का तेल सबसे उत्तम माने जाते हैं जो बिना कोई समस्या के लुब्रीकेशन में सहायक होते हैं।



5. धूम्रपान न करें तथा शराब न पीयें:

याद रखें कि तंबाखू तथा अल्कोहल दोनों ही इस क्षेत्र को लुब्रीकेट रखने के लिए किये जाने वाले प्रयासों को नष्ट कर सकते हैं। धूम्रपान से आपके शरीर में टॉक्सिंस की मात्रा बढ़ती है जिसके कारण शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिलती और रक्त संचरण पर प्रभाव पड़ता है। दूसरी ओर अल्कोहल से मूत्र्की मात्रा बढ़ती है जिससे योनि के सूखने की समस्या बढ़ती है। इसी कारण कैफीन के सेवन को भी नियंत्रित करें।

6. बहुत सारा पानी पीयें:
शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलने के अलावा पानी योनि की गुहा तथा योनि की श्लेष्मा झिल्ली को नम रखने में सहायक होता है। इसकी कमी के कारण डिहाईड्रेशन और योनि में सूखेपन की समस्या आ सकती है। यहाँ योनि को स्वस्थ रखने के सात तरीके बताए गए हैं।
7. वजाइनल वॉश से दूर रहें:
वजाइनल वॉश योनि को साफ़ और स्वस्थ रखने का दावा करते हैं तथा सफ़ाई से कभी कभी फायदे से अधिक नुकसान हो जाता है। इन उत्पादों में पाए जाने वाले केमिकल्स योनि के क्षेत्र के पीएच संतुलन में बदलाव लाते हैं जिसके कारण योनि के सूखेपन की समस्या हो सकती है। अत: यदि आप इस क्षेत्र के पी एच संतुलन को बिगड़ना नहीं चाहते तो इनका उपयोग न करना ही ठीक है।



इन 10 खराब जीवनशैली के कारण होता है वेजाइनल डिस्‍चार्ज

वेजाइनल डिस्‍चार्ज यानी कि योनी से किसी चिपचिपे या बदबूदार पदार्थ का स्राव होना महिलाओं में बड़ी ही आम सी बात है। इसमें कोई परेशानी की बात नहीं होती क्‍योंकि यह शरीर का अपना ढंग है योनि को स्‍वस्‍थ और साफ रखने का।

योनि से डिस्‍चार्ज होने के कई कारण होते है, जिसमें से खराब जीवनशैली का होना आम बात है। महिलाओं में वेजाइनल इंफेक्‍शन तो बड़ा ही कॉमल होता है। इसके लक्षणों में से गहरे, बदबूदार और अजीब से रंग का डिस्‍चार्ज होना आम है।



अगर आप मोटी, शराब पीती हैं या फिर तेज दवाइयां खाती हैं तो आपको वेजाइनल डिस्‍चार्ज हो सकता है। आइये जानते हैं कौन सी जीवनशैली के कारण आपको वेजाइनल डिस्‍चार्ज हो सकता है।


खराब लाइफस्‍टाइल
अगर आपकी लाइफस्‍टाइल खराब है और आप अच्‍छी डाइट नहीं लेती या फिर समय पर नींद पूरी नहीं करती तो आपको यह समस्‍या हो सकती है।
मोटापा
मोटापे से कई बीमारियां पैदा हो सकती हैं। एक्‍सपर्ट कहते हैं कि अगर आप मोटी हैं तो इसका कारण है कि आप अच्‍छी डाइट नहीं लेती होंगी, जिसके कारण वेजाइनल डिस्‍चार्ज होने पर बदबू आती है।
प्रेगनेंसी के समय

शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण अचानक से यानि से डिस्‍चार्ज होने लगता है। इसके अलावा अंदर की मासपेशियों के सिकुड़ने तथा इंजेक्‍शन आदि लेने से भी यह समस्‍या गर्भवती महिलाओं में देखने को मिलती है।
रजोनिवृत्ति
महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ रजोनिवृत्ति होने के कारण से भी वेजाइनल डिस्‍चार्ज होता है।
मौसम
गर्मी का मौसम या फिर अगर आप ऐसी अंडरवियर पहनती हैं जिसमें से हवा पास नहीं होती, तो भी यह समस्‍या पैदा हो सकती है। नमी और गर्मी पैदा न होने दें।



कुछ दवाइयां

ऐसी कुछ प्रकार की दवाइयां होती हैं जो कि वेजाइनल डिस्‍चार्ज पैदा कर सकती हैं। दवाइयों में कुछ प्रकार के तत्‍व पाए जाते हैं जो कि शरीर से गंदी बदबू निकालते हैं। इसलिये इस चीज को दूर करने के लिये खूब सारा पानी पियें।
यौन सबंध
अगर आप एक से अधिक पार्टनर के साथ यौन संबन्‍ध बनाती हैं, तो आपको ईस्‍ट इंफेक्‍शन और योनी से डिस्‍चार्ज शुरु हो सकता है।
शारीरिक संक्रमण
अगर आप तेज बुखार या किसी अन्‍य वाइरस के अटैक में आ चुकी हैं तो इसका बुरा असर वेजाइनर डिस्‍चार्ज हो सकता है।

शराब का सेवन
शराब पीने के दूसरे दिन बाद आपके अंडरवियर से गंदी बदबू आ सकती है। अगर आप थोड़ी और चौकन्‍नी रहें तो आपको अपनी पेशाब से भी गंध आ सकती है।
मधुमेह

जिन्‍हें मधुमेह होता है उनको डिस्‍चार्ज के समय लहसुन जैसी अजीब सी गंध महसूस हो सकती है। ऐसा इसलिये क्‍योंकि इस दौरान आप कड़ी दवाइयों का सेवन कर रही होती हैं।



प्रेग्‍नेंसी के दौरान ब्‍लीडिंग और डिस्‍चार्ज की प्रॉब्लम
प्रेग्‍नेंसी के दौरान आखिरी समय में ब्‍लीडिंग की समस्‍या होने पर उसे बिल्‍कुल भी इग्‍नोर न करें। इस समय में हल्‍की ब्‍लीडिंग होना सामान्‍य है - 10 में से 1 महिला को ऐसी दिक्‍कत होती ही है, जब वह पूरे नौ महीने की गर्भावस्‍था में होती है। अगर ब्‍लीडि़ंग होती है तो उसका मतलब यह नहीं होता है कि मिस्‍कैरेज यानि गर्भपात हो गया।

किसी भी प्रकार की असामान्‍य घटना होने पर अपनी डॉक्‍टर से सम्‍पर्क करें। इसमें डर जैसी कोई बात नहीं होती है लेकिन फिर भी जरूरी होता है कि आप अपने और अपने बच्‍चे का परीक्षण करवा लें। अगर आपकी योनि से कुछ निकल रहा है पानी जैसा या कुछ चिपचिपा सा पदार्थ, तो उसकी जांच अवश्‍य करवा लें, कई बार ऐसा डिस्‍चार्ज, मृत प्रसव का कारण बन जाता है या बच्‍चे की जान जाने का खतरा हो जाता है। प्रेग्‍नेंसी के दौरान, नॉर्मल म्‍यूकस लुब्रीकेशन बढ़ जाता है क्‍योंकि उस दौरान शरीर में ब्‍लड़ का फ्लो ज्‍यादा होता है लेकिन अगर बदबूदार, परेशान करने वाला और प्रोफ्यूज डिस्‍चार्ज निकलता है तो उसकी जांच करने की जरूरत है।


अगर आपको गर्भावस्‍था के दौरान खून आता है तो परेशान न हों, शांत रहें। ध्‍यान दें कि क्‍या आपको ज्‍यादा दर्द है या फिर ब्‍लड़ ज्‍यादा निकल रहा है। इस बात को अपने डॉक्‍टर को सही - सही बताएं, जिससे वो आपको सही राय और उपचार दे सकें।

लक्षण क्‍या होते है?
योनि से निकलने वाले खून या डिस्‍चार्ज का रंग और महक पर ध्‍यान जरूर देना चाहिए, साथ वह कितनी तेजी से बहता है, गाढ़ा है सा पतला आदि को भी ध्‍यान में रखना चाहिए। इसके लक्षण निम्‍म प्रकार होते है :

- हल्‍के गुलाबी/ लाल या भूरे रंग का डिस्‍चार्ज 
- पीरियड्स की तरह दर्द होना। 
- पेट में तेज दर्द होना। 
- तेजी से गाढ़े लाल रंग का खून निकलना। 
- खून के गाढ़े थक्‍के निकलना। 
- अन्‍य दिनों से ज्‍यादा दर्द या खून बहना। किसे ऐसी समस्‍या होती है?

चार में से एक महिला को इस तरह की दिक्‍कत गर्भावस्‍था से पहले होती है और दस में से एक को गभर्ावस्‍था के बाद ऐसी समस्‍या होती है।

इसके पीछे कारण क्‍या होता है?

वॉम के सिरे पर नुकसानदायक परिवर्तन इसका प्रमुख कारण हो सकते है और इसकी वजह से खून भी आ सकता है। इस तरह में खून कम - कम आता है लेकिन उसमें रेशे होते है। कुछ महिलाओं को पीरियड की डेट पर हल्‍का खून आता है इसके लिए आपको हर महीने जांच के लिए जाना चाहिए, ताकि बच्‍चा सुरक्षित रहे।


अंडे का इम्‍पलीमेंटिंग होना

प्रेग्‍नेंट होने के बाद पहले महीने में पीरियड्स के दिनों में हल्‍का सा ब्‍लड़ आ सकता है क्‍योंकि महिला के वॉम में अंडे का इम्‍पलीमेंटेशन हो रहा होता है। यह काफी कम और एक दिन से भी कम होता है।

सरवाइकल संक्रमण

सरवाइकल इंफेक्‍शन आपको तक भी हो सकता है जब आप प्रेग्‍नेंट न हो। इसका परीक्षण करवाना बेहद आवश्‍यक होता है। सेक्‍स से सेरविक्‍स में जलन हो सकती है और थोड़ा सा ब्‍लड़ भी आ सकता है। इस तरह की ब्‍लीडिंग आमतौर पर संभोग के बाद होती है और तुंरत रूक भी जाती है।

म्‍यूकस प्‍लग

लेबर में पहुंचे से पहले गर्भवती महिला म्‍यूकस प्‍लग छोड़ देती है जो सेरविक्‍स से निकलता है। यह खूनी दिखता है और आपको सचेत करता है कि आप जल्‍द ही प्रसव पीड़ा में पहुंचने वाली है।

प्‍लेसेंटल एब्‍रूपशन

एक ऐसी स्थिति जहां आपकी नाल आंशिक रूप से गर्भ की परत से दूर आती है।

प्‍लेसेंटा प्राविया
एक ऐसी स्थिति जहां आपकी प्‍लेसेंटा, आपके वॉम के, आपकी सेरविक्‍स के निकट पहुंच जाते है। ऐसे में सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ सकती है।

एक्‍टोपिक प्रेग्‍नेंसी

ऐसा तब होता है जब आपके वॉम के बाहरी हिस्‍से में अंडे का निषेचन होता है, खासकर फेलोपियन ट्यूब में। इससे आपको हल्‍की सी ब्‍लीडिंग हो सकती है लेकिन भयानक दर्द हो सकता है। यह मेडीकल इमरजेंसी कंडीशन होती है और इस पर तुंरत ध्‍यान देने की

आवश्‍यकता होती है।

गर्भपात

एक थोड़ा सा ब्‍लड का थक्‍का भी गर्भपात की निशानी होता है। लेकिन गर्भावस्‍था के तीसरे महीने के बाद ऐसा होने की संभावना बहुत कम होती है।



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