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ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) को ठीक करने के 8 घरेलू उपचार


ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) को ठीक करने के 8 घरेलू उपचार

क्‍या आप को इन दिनों ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) की समस्‍या का सामना करना पड़ रहा है? अगर हां, तो फिर आपको यह आर्टिकल जरुर पढ़ना चाहिये क्‍योंकि आज हम आपको वेजाइनल डिस्‍चार्ज का आसान इलाज बताएंगे।
योनि मार्ग से सफेद, गाढे, चिपचिपे और बदबूदार पदार्थ का निकलन ल्‍यूकोरिया कहलाता है। इसकी वजह से योनि के अगल - बगल खुजली और जलन महसूस हो सकती है, जो कि रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकता है।

योनि को स्वस्थ रखने के आसान तरीके-
हमारे भारतीय समाज में जब भी महिलाओं को श्वेत प्रदर की बीमारी होती है तो, वह किसी को नहीं बताती। लेकिन अगर इसका इलाज न करवाया जाए तो शरीर में कमजोरी भी पैदा हो जाती है।
यह रोग ज्‍यादातर उन महिलाओं में देखा गया है जो सहवास के बाद योनि को जल से नहीं धोती या फिर बार बार गर्भपात करवाना भी बेहद खराब होता है।

आमला 
आमले में विटामिन सी होता है जो शरीर को ताकत प्रदान करता है। साथ ही यह वेजाइना के बैक्‍टीरिया का भी खात्‍मा करता है जो यह परेशानी पैदा करता है। इसलिये आपको नियमित रूप से अपने आहार में आमले का सेवन करना चाहिये।

बरगद के पेड़ की छाल का रस 
इसमें एंटीसेप्‍टिक गुण होते हैं। आपको केवल पानी में बरगद के पेड़ की छाल को उबाल कर छान लेना होगा। फिर इससे अपनी योनि को दिन में 3 बार धोएं। इससे आपकी योनि साफ, सूखी और स्‍वस्‍थ बनी रहेगी।
आम का पल्‍प 
पके आम का पल्‍प दिन में कई बार अपनी योनि के अंदर लगाएं। यह बेहद प्रभावशाली उपचार है। इससे यानि की खुजली और गंध दोनों ही दूर होगी। बाद में इसे 5 मिनट के बाद हल्‍के गरम पानी से धो लें।

एलोवेरा 
सुबह एलोवेरा का जूस पीजिये और इसके जैल को अपनी योनि पर संक्रमण रोकने के लिये लगाइये भी। ऐसा करने से योनि से दुर्गन्‍ध भी आना बंद हो जाएगी।

अखरोट की पत्‍ती 
मुठ्ठीभर अखरोट की पत्‍तियों को उबालिये और हल्‍का गर्म रह जाने तक इससे योनि को धोइये। इससे संक्रमण खतम होगा और योनि से बदबू भी नहीं आएगी।

अंजीर 
एक कटोरे में पानी के साथ थोड़ी सी सूखी अंजीर भिगो लें। फिर सुबह इसे हल्‍के गुनगुने पानी के साथ पीस कर खाली पेट पी लें। यह घातक बैक्‍टीरिया का नाश कर के आपको श्वेत प्रदर से मुक्‍ती दिलाएगा।

केला 
रोजाना एक केला खाने से श्वेत प्रदर से मुक्‍ती मिल सकती है। इसमें एंटी इंफेक्‍टिव गुण होते हैं जो कि घातक बैक्‍टीरिया को योनि के अंदर फैलने से रोकते हैं।

चौलाई की जड़ें 
चौलाई की जड़ों को पहले मिक्‍सी में पीस लें और फिर उसें पानी में 15 मिनट तक उबाल कर काढ़ा बनाएं। इसे दिन में दो बार पियें। इसमें एंटीबैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो कि वेजाइना के संक्रमण को दूर कर सकते हैं।



जानें महिलाओं में होने वाली एनीमिया बीमारी के लक्षण, कारण और इलाज


विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के अनुसार दुनिया की कुल पॉपुलेशन का छठा हिस्सा एनीमिया से ग्रस्त‍ है। एनीमिया यानी बॉडी में खून की कमी। यह समस्या महिलाओं में अधिक पाई जाती है। हमारे देश में हर तीन में से एक महिला एनीमिया की शिकार है। लगभग 57.8 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित रहती हैं। इनमें से 7 में से एक महिला ऐसी होती है, जिसमें हीमोग्लोबिन की मात्रा 7 ग्राम/डीएल है। यह सिचुएशन उनके और उनके गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए घातक है। भारत में बच्चे भी बड़ी संख्या में इसके शिकार हैं।
एनीमिया क्या है- बॉडी के सेल्स को एक्टिव रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है और ऑक्सीजन को बॉडी के अलग-अलग भागों में रेड ब्लड सेल्स में मौजूद हीमोग्लो‍बीन द्वारा पहुंचाया जाता है। बॉडी में आयरन की कमी से रेड ब्लड सेल्स और हीमोग्लोबीन का बनने की क्रिया प्रभावित होती है। इससे सेल्स को ऑक्सीजन नहीं मिल पाता जो कार्बोहाइड्रेट और वसा को जलाकर एनर्जी पैदा करने के लिए जरूरी है। जिससे बॉडी और ब्रेन की काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है इस सिचुएशन को एनीमिया कहते हैं।
कारण- एनीमिया ब्लड से रिलेटेड सबसे आम समस्या है। जो कई प्रकार का होता है, जिसके कारण अलग-अलग होते हैं।
ज्यादा ब्लड सेल्स का नष्ट हो जाना।
रेड ब्लड सेल्स के बनने में कमी। हेमरेज या लगातार खून बहने से कमी।
फोलेट, विटामिन बी 12, विटामिन ए कम।
इन्फेक्शन या लंबी बीमारी। अनुवांशिक कारण।
पूरी दुनिया में आयरन की कमी को एनीमिया की सबसे खास वजह माना जाता है।
जोखिम ऐसे- एनीमिया किसी को कभी भी हो सकता है, लेकिन जो खासतौर से पहले से ही किडनी , डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम, रुमेटाइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियों का शिकार हैं, उनमें इसकी संभावना ज्यादा होती है। इसमें महिला होना एक बड़ा रिस्क फैक्टर है।

महिलाएं आसान शिकार- पुरुषों की तुलना में महिलाएं एनीमिया की अधिक शिकार होती हैं। डाइटिंग कर रही लड़कियां भी इसका शिकार हो जाती हैं। पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होने से, गर्भाशय में ट्यूमर होने पर भी एनीमिया की आशंका बढ़ जाती है। दूध पिलाने वाली महिलाओं में भी एनीमिया होने का खतरा रहता है। हेल्दी महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन का नॉर्मल लेवल 11 ग्राम/डीएल होता है। अगर यह लेवल 9-7 ग्राम/डीएल हो तो यह माइल्ड एनीमिया होता है। यह लेवल 6-4 ग्राम/डीएल हो तो उसे सीवियर एनीमिया कहते हैं। जिसमें तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है।

लक्षण- कमजोरी और थकान। एनीमिया लगातार रहना न्यूरोलॉजिकल गड़बड़ी भी करता है, खासकर बच्चों में चिड़चिड़ापन। सीरियस होने पर यह स्ट्रेस का रूप ले लेता है। हार्टबीट सही नहीं रहती है, सांस उखड़ना और चक्कर आना। यह नॉर्मल लक्षण हैं, लेकिन इसके लगातार रहने पर कई गंभीर लक्षण भी नजर आ सकते हैं। जैसे- चेस्ट पेन (एन्जाइना), सिरदर्द या पैरों में दर्द, जीभ में जलन, मुंह और गला सूखना, मुंह के कोनों पर छाले हो जाना, बाल गिरना, निगलने में तकलीफ, त्वचा, नाखून और मसूड़ों का पीले पड़ जाना।

रोकथाम- अगर किसी को पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग अधिक हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि इससे शरीर में आयरन में तेजी से कमी आती है। अगर कोई महिला मां बनने वाली है या तो वह डॉक्टर की सलाह से आयरन के सप्लीमेंट जरूर लें। समय से पहले जन्मे बच्चों में आयरन की कमी हो जाती है। ऐसे बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान दे।

इलाज- एनीमिया का इलाज इसकी सीरियसनेस और कारणों पर निर्भर करता है। एनीमिया को ठीक होने में छह से नौ महीने का समय लगता है। इसमें आयरन, फॉलिक एसिड और विटामिन बी12 के सप्लीमेंट्स भी लिए जा सकते हैं। आयरन की गंभीर कमी को इंट्रावीनस आयरन थेरेपी के द्वारा ठीक किया जा सकता है। इसमें आयरन मसल्स या इन्ट्रावीनस लाइन में इंजेक्ट किया जाता है।


पीरियड्स के तेज दर्द को कम करने में असरदार हैं ये 15 उपाय


लाइफस्टाइल डेस्कः महिलाओं के लिए पीरियड्स हर महीने होने वाला एक नेचुरल प्रोसेस है जो 4 से 5 दिनों तक रहता है। इस दौरान मूड स्विंग होने के साथ ही पेट में भयंकर दर्द होने की शिकायत भी ज्यादातर महिलाओं के साथ होती है। कई बार ये दर्द इतना बढ़ जाता है कि दवा खाने और हॉस्पिटल जाने की नौबत तक आ जाती है। आखिर इस दर्द के पीछे क्या वजह है और कैसे इन्हें दूर किया जा सकता है इसके बारे में जानेंगे।
हरी सब्जियां
सब्जियां, जैसे- हरी प्याज, पत्तगोभी, मैथी, पालक आदि को डाइट में शामिल करें। इनमें मौजूद विटामिन्स और मिनरल्स बॉडी की कई सारी जरूरतों को पूरा करते हैं। साथ ही इनमें कैलोरीज की मात्रा भी बहुत कम होती है, जिससे वजन बढ़ने की समस्या भी नहीं होती। इसके अलावा इसके एंटी-ऑक्सीडेंट्स बॉडी से टॉक्सिन्स को बाहर निकालते हैं। हरी व पत्तेदार सब्जियों के अलावा हरी मटर, टमाटर, पत्तागोभी, एवोकैडो खाने से भी पीरियड्स का दर्द कम होता है।
पाइनएप्पल
अनन्नास में ब्रोमलेन जो प्रोटीन-डाइजेस्टिव एंजाइम का मिक्सचर है मौजूद होता है जो दर्द में आराम दिलाता है। सिर्फ पीरिडड्स में ही नहीं ये जोड़ों के दर्द की भी कारगर दवा है।
पपीता
पपीते का एंटी-इन्फ्लेमेटेरी तत्व, दर्द में आराम दिलाता है। इसके अलावा इसमें कैरोटिन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन ए और सी जैसे न्यूट्रिएंट्स भी मौजूद होते हैं जो ब्लड क्लॉटिंग नहीं होने देते साथ ही मसल्स कॉन्ट्रेक्शन को भी रोकते हैं।
Other beneficial things: दूध, खट्टी चीजें, अदरक, ऐलोवेरा, पानी, तुलसी की पत्तियां, पुदीना, दालचीनी, अजवायन, लैवेंडर ऑयल, गाजर, नमक
दूध
इन 4-5 दिन के दौरान होने वाले दर्द से बचने के लिए गर्म दूध पीने से फायदा मिलता है। दूध में थोड़ी सी खसखस की मात्रा मिलाकर पीएं।
खट्टी चीजें
पीरियड्स के एक हफ्त पहले से ही खट्टी व ठंडी चीजें खाना बंद कर दें। अचार, मसालेदार खाने को अवॉयड करें क्योंकि ये दर्द को बढ़ाते हैं।
अदरक
पीरियड्स शुरू होने के पहले से ही पानी में अदरक को उबालें और उसमें शहद मिलाकर पिएं। इससे उस दौरान होने वाले दर्द में आराम मिलता है। दिन में 2-3 बार इस नुस्खे का इस्तेमाल करें।

ऐलोवेरा
पीरियड्स के भयंकर दर्द बचने के लिए एक सप्ताह पहले से रोजाना ऐलोवेरा जेल को खाना शुरू करें।
पानी
पीरियड्स में बहुत तेज दर्द होने पर गुनगुने पानी में शुद्ध घी मिलाकर पिएं।
तुलसी की पत्तियां
तुलसी के पत्ते पीरियड्स के दर्द को दूर करने में बहुत ही फायदेमंद होते हैं। तुलसी के पत्तों को गर्म पानी में उबालकर उसमें 1 टीस्पून शहद मिलाकर दिन में तीन बार लेने से दर्द नहीं होता। इसके अलावा तुलसी के पत्तों को चबाने से भी दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।

पुदीना
पुदीने की पत्तियों केा पानी में उबालकर उसमें शहद मिलाएं और दो से तीन बार पीएं। इससे दर्द से तुरंत राहत मिलती है। इसके अलावा इसके तेल से 15 मिनट पेट की माशिल करने से भी आप दर्द में राहत पा सकती हैं।
दालचीनी
दालचीनी मसाले का एक प्रकार है जो कई सारे मिनरल्स का भी खजाना होता है। जो पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से राहत दिलाते हैं। इसके लिए दालचीनी पाउडर को शहद के साथ इस्तेमाल करें।
अजवायन
रसोई में मौजूद अजवायन इन दिनों को बहुत आसान बना सकती है। एक कप पानी गर्म कीजिए। इसमें एक चम्मच अजवायन डालकर उबलने दें। लगभग पांच मिनट उबलने के बाद गैस बंद कर दें। इसे छानकर पी लें। उबालना न चाहें, तो आधा चम्मच अजवायन मुंह में डालकर गुनगुना पानी पी लें। भुनी अजवायन एक कप गर्म दूध के साथ लेने से भी राहत मिलेगी।

लैवेंडर ऑयल
अपने पेट के पास लैवेंडर ऑयल लगाने से पेट दर्द व ऐंठन से 10-15 मिनट में ही आराम मिल जाता है।
गाजर
गाजर न सिर्फ आपकी आंखों के लिए अच्छी होती है बल्कि ये पीरियड्स में भी मददगार साबित होती है। इस दौरान एक ग्लास गाजर का जूस पीने से आराम महसूस होता है।
नमक
पीरियड्स में ब्लॉटिंग होना आम बात होती है। लेकिन अगर आप पीरियड्स से कुछ पहले से नमक खाना कम कर दें तो दर्द की समस्या कम हो जाएगी।
दर्द का कारण
पीरियड्स के दौरान पेट और कमर में दर्द होना बहुत आम बात है। इस दर्द का कारण प्रोस्टेग्लेंडाइन है। जो गर्भाशय के पास निकलने वाला एक हार्मोन होता है। ये हार्मोन डिलीवरी के दौरान भी एक्टिव रहता है। इससे गर्भाशय की लाइनिंग बाहर निकलती है। साथ ही, गर्भाशय में इस दौरान खून की कमी होती है जिसकी वजह से मसल्स में प्रॉब्लम होती है। साथ ही स्मोकिंग, ऐल्कोहल और ड्रग्स लेने से भी ये समस्या बढ़ जाती है।

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