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दांतों की देखभाल


गंदे दांत कैसे साफ़ करें:
केंटकी। अगर आपके जोड़ों में दर्द रहता है तो आप इसका आसानी से इलाज कर सकते हैं। आपको करना बस इतना है कि अपने दांतों को रोजाना अच्‍छे से साफ करना है। हाल ही में सामने आए एक रि‍सर्च में ये दावा कि‍या गया है कि अगर आप अपने दांतों को अच्‍छे से ब्रश करेंगे तो बढ़ती उम्र में आपको जोड़ों में तकलीफ की समस्‍या नहीं होगा। रि‍सर्च के अनुसार गंदे दांतों में ऐसे बेक्‍टि‍रया पैदा होते हैं जो जोड़ों के दर्द को बढ़ा देते हैं। नीचे की स्‍लाइड्स में जानि‍ए, कैसे करें बचाव- खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि और हमें फॉलो करें ट्विटर पर


गठिया रोग न केवल जोड़ों के लिए बल्कि दांतों की सेहत के लिए भी खतरनाक होता है। एक अध्ययन से यह पता चला है कि गठिया रोग से पीड़ित व्यक्ति में दांत से सम्बंधित जिंजीवाइटिस रोग का खतरा होता है, जिसमें मसूड़े लाल हो जाते हैं और दांतों को सहारा देने वाली हड्डियां व ऊतक कमजोर हो जाते हैं।



जानें, जीरा कैसे आपके स्वास्थ्य के लिए है फायदेमंद


जीरा एक ऐसा मसाला है जिसके छौंक से दाल और सब्जियों का स्वाद बहुत बढ़ जाता है। चाट का चटपटा स्वाद भी जीरे के बिना अधूरा सा लगता है। अंग्रेजी में इसे क्यूमिन (cumin) कहा जाता है। इसका वानस्पतिक नाम क्यूमिनम सायमिनम है। यह पियेशी परिवार का एक पुष्पीय पौधा है। मुख्यत: पूर्वी भूमध्य सागर से लेकर भारत तक इसकी पैदावार अधिक होती है।


दिखने में सौंफ के आकार का दिखाई देने वाला जीरा सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता यह बहुत उपयोगी भी है। यही कारण है कि कई रोगों में दवा के रूप में भी जीरे का उपयोग किया जा सकता है। कई रोगों के उपचार के लिए जीरा बहुत उपयोगी होता है।


– 3 ग्राम जीरा और 125 मि.ग्रा. फिटकरी पोटली में बांधकर गुलाब जल में भिगो दें। आंख में दर्द होने पर या लाल होने पर इस रस को टपकाने से आराम मिलता है।

दही में भुने जीरे का चूर्ण मिलाकर खाने से डायरिया में आराम मिलता है। 


– जीरे को नींबू के रस में भिगोकर नमक मिलाकर खाने से जी मिचलाना बंद हो जाता है।


– जीरा में थोड़ा-सा सिरका डालकर खाने से हिचकी बंद हो जाती है।


– जीरे को गुड़ में मिलाकर गोलियां बनाकर खाने से मलेरिया में लाभ होता है।


– एक चुटकी कच्चा जीरा खाने से एसिडिटी में तुरंत राहत मिलती है।


– डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए एक छोटा चम्मच पिसा जीरा दिन में दो बार पानी के साथ लेने से लाभ होता है।


– जीरा आयरन का सबसे अच्छा स्रोत है। इसे नियमित रूप से खाने से खून की कमी दूर हो जाती है। गर्भवती महिलाओं के लिए जीरा अमृत का काम करता है।


– जीरा, अजवाइन, सौंठ, कालीमिर्च, और काला नमक अंदाज से लेकर इसमें घी में भूनी हींग कम मात्रा में मिलाकर खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है। पेट का दर्द ठीक हो जाता है।


– जीरा, अजवाइन और काला नमक का चूर्ण बनाकर रोजाना एक चम्मच खाने से तेज भूख लगती है।


– कब्जियत की समस्या हो तो जीरा, काली मिर्च, सौंठ और करी पाउडर को बराबर मात्रा में लें और मिश्रण तैयार कर लें। इसमें स्वादानुसार नमक डालकर घी में मिलाएं और चावल के साथ खाएं।राहत मिलेगी।


– पके हुए केले को मैश करके उसमें थोड़ा-सा जीरा मिलाकर रोजाना रात के खाने के बाद लें। अनिद्रा की समस्या दूर हो जाएगी।


– इसमें एंटीसेप्टिक तत्व भी पाया जाता है। सीने में जमे हुए कफ को बाहर निकलने के लिए जीरे को पीसकर फांक लें। यह सर्दी-जुकाम से भी राहत दिलाता है।


– जीरा उबाल लें और छानकर ठंडा करें। इस पानी से मुंह धोने से आपका चेहरा साफ और चमकदार होगा।


– एक चम्मच जीरा भूनकर रोजाना चबाने से याददाश्त अच्छी रहती है।


– जिनको अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या अन्य सांस संबंधी समस्या है, उन्हें जीरे का नियमित प्रयोग किसी भी रूप में करना चाहिए।

– दक्षिण भारत में लोग अक्सर जीरे का पानी पीते हैं। उनके अनुसार, इसके सेवन से मौसमी बीमारियां नहीं होतीं और पेट भी तंदुरुस्त रहता है।


– हींग को उबाल लें। इस पानी में जीरा, पुदीना, नींबू और नमक मिलाकर पिलाने से हिस्टीरिया के रोगी को तत्काल लाभ होता है।


– थायराइड (गले की गांठ) में एक कप पालक के रस के साथ एक चम्मच शहद और चौथाई चम्मच जीरा पाउडर मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।


– मेथी, अजवाइन, जीरा और सौंफ 50-50 ग्राम और स्वादानुसार काला नमक मिलाकर पीस लें। एक चम्मच रोज सुबह सेवन करें। इससे शुगर, जोड़ों के दर्द और पेट के विकारों से आराम मिलेगा।


– खुजली की समस्या हो तो जीरे को पानी में उबालकर स्नान करें। राहत मिलेगी।


– एक गिलास ताजी छाछ में सेंधा नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर भोजन के साथ लें। इससे अजीर्ण और अपच से छुटकारा मिलेगा।


– आंवले की गुठली निकालकर पीसकर भून लें। फिर उसमें स्वादानुसार जीरा, अजवाइन, सेंधा नमक और थोड़ी-सी भुनी हुई हींग मिलाकर गोलियां बना लें। इन्हें खाने से भूख बढ़ती है। इतना ही नहीं, इससे डकार, चक्कर और दस्त में लाभ होता है।


चंदन, मुल्तानी, हल्दी से ऐसे पाएं गोरी और निखरी त्वचा ऑयली स्किन है? तो ज़रूर ट्राई करें ये फेस पैक!

गर्मियों के दौरान ठंडे कमरे से बाहर आने पर मेरी त्वचा में जलन होने लगती है। इतना ही नहीं अगर गलती से मैं धूप में चली जाऊं, तो हाल और ज्यादा बुरा हो जाता है। दरअसल मेरी स्किन ऑयली है और ये मौसम इस तरह की त्वचा वाले लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक होता है। इन दिनों धूप, पसीना और धूल से मेरे चेहरे की रंगत उड़ जाती है। खैर, खोई हुई रंगत पाने के लिए धूप से वापस लौटकर चेहरे को साफ करना बहुत ज़रूरी है। इसके लिए मैंने चंदन, मुल्तानी और हल्दी के फेस पैक का इस्तेमाल किया। इससे मेरे चेहरे पर निखार आया अब धूप में भी जलन नहीं होती है। मैं आपको इस फेस पैक को बनाने का तरीका बता रही हूं। उम्मीद है इससे आपको भी लाभ होगा।

ऐसे बनाए फेस पैक


एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी, एक चम्मच चंदन पाउडर और एक चुटकी हल्दी लेकर अच्छी तरह मिला लें।
इसमें थोड़ा सा दूध डालकर पेस्ट बना लें। पेस्ट ज्यादा पतला न हो।
इस पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर लगायें और 10 से 20 मिनट तक छोड़ दें।
सूखने के बाद चेहरे पर थोड़ा पानी छिड़ककर उंगलियों से धीरे-धीरे सर्कुलर मोशन में मूव करें। इसके बाद सादे पानी से धो लें।
इस क्रिया को हफ्ते में एक बार करें या तब करें, जब धूप के संपर्क में आने से स्किन की रंगत खो जाती है।

इससे होता है ये फायदा


ये फेस पैक मुल्तानी मिट्टी से बना होता है। मुल्तानी मिट्टी स्किन से ना केवल अतिरिक्त तेल को अवशोषित करती है बल्कि स्किन से गन्दगी और मृत कोशिकाओं को भी हटाती है। चंदन स्किन को मॉश्चराइज करता है और इसका स्किन पर कूलिंग इफ़ेक्ट पड़ता है। इसमें सैंटानोल (santanol) तत्व होते हैं, जो छिद्रों को खोलते हैं और नेचुरल टोनर के रूप में काम करते हैं। इसके अलावा हल्दी का एंटी-इन्फ्लैमटोरी और स्किन लाइटिंग गुण होते हैं। हल्दी को दूध के साथ मिलाकर लगाने से चेहरा मुलायम और चमकदार बनता है।
मसूड़ों के रोग- प्रकार, कारण, लक्षण, बचाव और उपचार


मसूड़े हमारी दांतों को सुरक्षा प्रदान करते है | टाइट और पूरी तरह से क्लोज्ड मसूड़े दिखने में भी अच्छे लगते है और दांतों की bones की रक्षा भी करते है | माउथ में पाए जाने वाले बैक्टीरिया और भोजन के कण हमारे दांतों के मुलायम मसूड़ो के ऊतको को नुकसान पहुचाते है | जिससे मसूड़ो के रोग होते है | मसूड़ो की साधारण सूजन ही आगे चलकर दांतों की हड्डी और मुलायम ऊतको को नष्ट करते है | तो लीजिये आज हम मसूड़ो के रोगों के प्रकार,लक्षण,बचाव,और उपचार के बारे में चर्चा करेंगे |

मसूड़ो के रोगों के प्रकार

मसूड़े के निम्न रोग होते है :-
मसूड़े की सुजन
मसूड़ों से खून आना
मसूड़ो में दुर्गन्ध
मसूड़ों से पानी आना
मसूड़ों में स्कर्वी

रोग के कारण
मसूड़ो के रोगों के कई कारण हो सकते है | महत्वपूर्ण कारण निम्न है :-
दांतों में सही ढंग से ब्रश न करना |
दांतों में प्लाक का बनना |
स्मोकिंग करना |
कुपोषण का शिकार होना |
विटामिन C की कमी होना |
डायबिटीज के कारण मसूड़ो के घाव का जल्दी न भरना |
कुछ दवाइयों जैसे कि phenytoin का इस्तेमाल करना |
जब आप सुगर और स्टार्च वाले भोजन करते है, तो यह भोजन जो मसूड़े के बीच में जमा रह जाता है | जो ओरल बैक्टीरिया को ग्रोथ करने के लिए पर्याप्त पोषण प्रदान करता है | और यदि सही ढंग से proper ब्रश न किया जाये, तो दांतों में मैल की परत जम जाती है जो आगे चल कर plaque बनती है | और मसूड़े मे सूजन और अन्य बीमारियाँ पैदा करती है |

मसूड़ो के रोग के लक्षण

रोग की प्रारम्भिक अवस्था में मसूड़े में लालिमा प्रगट होती है | और बाद में मसूड़े में सूजन पैदा होने के साथ-साथ थोड़ी सी भी धक्का लगने पर मुँह में मसूड़े से रक्त निकलने लगता है | कुछ महत्वपूर्ण लक्षण निम्न हैं :-
मसूड़े के कुछ भाग या पुरे मसूड़े में सूजन हो सकती है |
मसूड़े में नेक्रोसिस या छरण होता हैं |
गम्भीर किसम के रोग में सूजन,रक्तस्त्राव,और नेक्रोसिस की समस्या ओंठो तक भी पहुच सकती है |
मसूड़े में खुजली और दर्द की शिकायत होती है |
मसूड़े और मुँह से दुर्गन्ध आती है |
मसूड़े में गांठ पैदा हो सकती है |
दांत की इनेमल में धब्बे और गड्ढे नजर आते है |
दांतों में ठंडा और गर्म पानी या चाय के प्रति असहनीयता प्रगट होती है |
मसूड़ों के रोग के बचाव
ज्यादा मीठा न खायें |
अच्छी तरह से नियमित ब्रश करें |
नशे आदि का सेवन न करें |
खान-पान में दे विशेष ध्यान |

मसूड़ों के रोग का उपचार
कैल्शियम से भरपूर आहार का सेवन करें |
नियमित चेक-अप कराएँ |
संतुलित आहार |
दन्त विशेषज्ञ से ले सलाह |

दाढ़ का दर्द का इलाज और लक्षण


दाढ़ जिसे हम अक्ल दाढ़ के नाम से भी जानते हैं। ऊपरी और निचले जबड़े के प्रत्येक किनारे पर अक्ल दाढ़ तीसरे और आखिरी चबाने के दांत होते हैं। इसमें व्यक्ति को बहुत ही दर्द महसूस होता है इसलिए आज हम दाढ़ का दर्द का इलाज के बारे में बात करेंगे।

अक्ल दाढ़ आम तौर पर 17 और 25 की उम्र के बीच उगते हैं। लेकिन कई लोगों में ये 25 के बाद भी आती है। ये हमारे मुंह के सबसे आखिरी, मजबूत दांत होते हैं और सबसे अंत में आते हैं।
अक्ल दाढ़ के लक्षण

अक्ल दाढ़ जो केवल आंशिक रूप से उभरे या क्रुक्ड में आते हैं, ये दर्द और बीमारी का कारण बन सकते हैं। अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन ने सिफारिश की है कि 16 से 1 9 के बीच के लोगों को उनके अक्ल दाढ़ का मूल्यांकन किया जाए ताकि ये जाना जा सकें कि उन्हें हटाया जाना चाहिए या नहीं।

पेरिकोरोनाइटिस अक्ल दाढ़ या विजडम टीथ सबसे आम लक्षणों में से एक है और यह आमतौर पर तब होता है जब निचले जबड़े में सभी दांतों के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती है।
दाढ़ का दर्द का इलाज
अक्ल दाढ़ के दर्द को शांत करे लौंग

स्वास्थ्य की दृष्टि से अगर देखा जाए तो लौंग के बहुत ही फायदे है। यह न केवल श्वसन संक्रमण से छुटकारा पाने में आपकी मदद करता है बल्कि सूजन कम करें तथा पाचन में सुधार भी करें। इसके अलावा यह यौन स्वास्थ्य को बढ़ाने में भी सहायता करता है।

वैसे इसे मुख्य रूप से दांत दर्द का इलाज के लिए भी जाना जाता है। अक्ल दाढ़ निकलने के दौरान भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका एनेस्थेटिक और एनाल्जेसिक गुण दर्द को शांत करने में मददगार होता है। इसके अलावा इसका एंटी-सेप्टिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी संक्रमण नहीं होने देता है।
नमक

ज्यादा नमक लेने से उच्च रक्तचाप बढ़ता है। इसके बावजूद इसके कई फायदे हैं। नमक के लाभों में आयरन की कमी को पूरा करना, मौखिक पुनर्निर्माण उपचार, मधुमेह नियंत्रण, गले में दर्द और मांसपेशियों की ऐंठन आदि शामिल है।
दांत दर्द में नमक का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है। ये न केवल मसूड़ों की जलन को कम करने में मददगार है बल्कि नमक के इस्तेमाल से इंफेक्शन का खतरा भी कम हो जाता है।
अक्ल दाढ़ के दर्द को कम करे लहसुन

नियमित रूप से लहसुन का सेवन (भोजन या कच्चे में) एलिसिन के एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों के कारण कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है। यह रक्तचाप और रक्त शर्करा या ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने के लिए भी बेहद फायदेमंद है।

इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट के अलावा एंटी-बायोटिक, एंटी इंफ्लेमेटरी और दूसरे कई औषधीय गुण पाए जाते हैं जो अक्ल दाढ़ के दर्द को कम करने में सहायता करते हैं और मुंह के बैक्टीरिया को भी पनपने से रोकते हैं।
अमरूद की पत्तिायां

यदि आपको अक्ल दाढ़ का दर्द का बहुत अधिक अनुभव हो रहा है, तो अमरूद फल आपका सबसे अच्छा दोस्त होगा। दर्द राहत के लिए अमरूद के पत्ते बहुत अच्छे हैं। अमरूद की पत्तियां दांत दर्द में दवा की तरह काम करती हैं। अमरूद की पत्तिययों में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुण भी पाया जाता है जो दांत दर्द में लाभकारी है।
अक्ल दाढ़ के दर्द से आराम दे प्याज

प्याज का उपयोग आमतौर पर लगभग सभी प्रकार के व्यंजनों में किया जाता है। प्याज में फाइटोकेमिकल्स उनके विटामिन सी के साथ इम्यूनिटी में सुधार करने में मदद करते हैं। प्याज में क्रोमियम होता है, जो ब्लड शुगर को विनियमित करने में सहायता करता है। प्याज में एंटी-सेप्टिक, एंटी-बैक्टीरियल और दूसरे कई गुण पाए जाते हैं।

इसके इस्तेमाल से अक्ल दाढ़ के दर्द और दांत दर्द में आराम मिलता है। ये मसूड़ों को भी इंफेक्शन से सुरक्षित रखने में सहायक है। प्याज प्रभावी है क्योंकि इसमें फाइटोकेमिकल्स होते हैं जो संक्रमण के लिए ज़िम्मेदार जीवाणुओं को रोकते हैं।
पुदीना
पुदीना या पेपरमिंट को अक्ल दाढ़ के लिए एक उत्कृष्ट दर्द राहत के रूप में भी जाना जाता है। पेपरमिंट एनेस्थेटिक गुणों में बहुत समृद्ध है जो दर्द को बहुत कम कर देगा और साथ ही संक्रमण के कारण मुंह में बैक्टीरिया को हटा देगा।



दांत दर्द में तुरंत आराम देंगे ये घरेलू उपाय


कई बार दांतों में अचानक दर्द होने लगता है। यह दर्द इतना ज्यादा हो जाता है कि हम पूरी तरह से बेचैन हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में हमारे पास तत्काल राहत के लिए दवा नहीं होती है जिससे दर्द से छुटकारा पाया जा सके।

इसलिए दांत दर्द में तुरंत आराम के लिए कुछ घरेलू उपाय के बारे में चर्चा करेंगे। दांत दर्द की वजह से कई अन्य समस्या जन्म ले सकती है। अगर समय पर इसका इलाज नहीं किया गया, तो दांतों में सड़न जैसे गंभीर समस्याएं उत्पन हो सकती है। आइए घरेलू उपाय पर नजर डालते हैं।
प्याज

प्याज एक और रूट की सब्जी है जो दांत दर्द से राहत देने में सहायता कर सकती है। इसके लिए आपको एक कच्चा प्याज चबाना होगा। इससे दांतों के दर्द में आराम मिलता है। बस कुछ मिनट के लिए ताजे प्याज के एक छोटे टुकड़े को चबाने से बहुत ही आराम मिलता है। – 
दांत दर्द का घरेलू इलाज है सेब का सिरका

सेब के सिरके में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं बल्कि यह अम्लीय है, यह आपके दांत दर्द के कारण होने वाले बैक्टीरिया को भी मारता है। इसके लिए आप सेब के सिरके में कॉटन बॉल को भिगोकर दांत दर्द वाली जगह पर रख दें। आपको तुरंत आराम मिलेगा।
सरसो का तेल

सरसो का तेल यह आपके मसूड़ों और दांतों को मजबूत करता है और प्लाक को हटाने में आसान बनाता है। प्लाक बैक्टीरिया से बना है जो फैटी झिल्ली से घिरा हुआ है। दांत दर्द में तुरंत आराम के लिए आप तीन से चार बूंद सरसो के तेल में एक चुटकी नमक डालकर दांतों व मसूड़ों पर मसाज करें। इससे न केवल दांतों में दर्द से आराम मिलता है बल्कि मसूड़े भी मजबूत होते हैं।
दांतों को आराम पहुंचाए लौंग


लौंग कई वर्षों तक खाना पकाने और पारंपरिक दवाओं में इस्तेमाल किया जाता रहा है। लौंग एंटीऑक्सीडेंट, एंटीसेप्टिक, एनेस्थेटिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी के लिए जाना जाता है। दांतों में दर्द हो तो मुंह में लौंग रखने से राहत मिलती है। तेज दर्द के दौरान दर्द वाले हिस्से पर लौंग का तेल लगाना बेहद लाभकारी है। इससे बहुत ही राहत मिलती है। 
खीरा
खीरे के लाभ में स्वस्थ त्वचा, कब्ज से राहत, मधुमेह, गुर्दे की समस्याएं, एसिडिटी और सनबर्न की समस्या को दूर करना शामिल है। आपने शायद इससे पहले सुना है कि दर्द और सूजन के लिए घरेलू उपचार के रूप में खीरा का उपयोग लोकप्रिय है। एक ठंडा खीरा का टुकड़ा दांत दर्द के खिलाफ बहुत ही अच्छा काम करता है।
दांत के दर्द का प्राकृतिक उपचार है आलू


आलू ग्रह पर सबसे आम और महत्वपूर्ण खाद्य स्रोतों में से एक हैं। माने या नहीं, एक कच्चा आलू अतिरिक्त नमी को अवशोषित कर सकता है और सूजन को कम करने में मदद करता है। दांतों में दर्द के साथ सूजन हो तो आलू छीलकर उसकी स्लाइस उस भाग पर 15 मिनट तक रखें, तुरंत राहत मिलेगी।
टी बैग
एक साधारण टी बैग दांत के लिए एक प्रभावी प्राकृतिक उपाय है। टी बैग दांत दर्द के उपचार और दांत दर्द से जुड़े दर्द को कम करने में मदद कर सकता है। इसके लिए गर्म पानी में टी बैग्स रखें और उससे दर्द वाले भाग की सेंकाई करें, दांतों के दर्द में आराम होगा।
दांतों के दर्द को दूर भगाने के लिए लहसुन


लहसुन लंबे समय से शरीर और दांतों के लिए अच्छा माना जाता है। इसमें मौजूद एलिसिन इसे एंटीफंगल, एंटीवायरल और जीवाणुरोधी बनाता है। एलिसिन को दांद दर्द से लड़ने में मदद करने के लिए जाना जाता है।

यह खराब बैक्टीरिया को नियंत्रित करता है जो कैविटी रोग और मसूड़े के रोग जैसी दांत रोग का कारण बनता है। लहसुन कली को नमक में डुबोकर चबाएं, दांतों के दर्द में आराम होगा। रोज सुबह लहसुन का एक कली चबाने से दांत मजबूत रहते हैं।



सरसों के तेल से 2 मिनट में दूर करें दांतों का पीलापन


दांतों का पीलापन, दांत का सड़न, रक्तस्राव और मसूड़े सूज जाना आदि दांत समस्याओं का हिस्सा है। दांत की समस्या तब होती है जब आप शुगर और प्रोसेस्ड फूड का आप उच्च सेवन करते हैं। इसके अलावा खराब मौखिक स्वच्छता और अनुचित दांत की सफाई भी इसके लिए जिम्मेदार है।

अनियमित दांत सफाई और दंत चिकित्सा चेकअप, किसी भी रूप में तम्बाकू का अत्यधिक सेवन और शराब का सेवन भी आपके दांतों में समस्या या दांतों का पीलापन आ जाता है। ऐसे में आपको सरसों के तेल से 2 मिनट में दूर करें दांतों का पीलापन। यह एक ऐसा घरेलू उपाय है जिसका इस्तेमाल भारत के कई घरों में किया जाता है।


शरीर के दूसरे अंगों की तरह अपने दांतों की विशेष देखभाल करना महत्वपूर्ण है। अपने दांतों को साफ रखने के कुछ बुनियादी नियम जैसे दिन में दो बार ब्रश करना और उन खाद्य पदार्थों का सेवन करना जो दांतों को सफेद और मजबूत रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा फ्लोसिंग करवाना तथा नियमित रूप से डॉक्टर की जांच जरूर करवाना चाहिए। सरसों का तेल और नमक एक देशी उपचार है इसकी मदद से आप अपने दांतों का पीलापन दूर कर सकते हैं।
दांतों के लिए सरसों के तेल के लाभ

सरसों का तेल और नमक एक पुराना घरेलू उपचार है जिसका उपयोग आपके मसूड़ों को क्लीन करने और अपने दांतों पर पट्टिका या प्लाक को हटाने के लिए किया जाता है। नमक हल्के घर्षण के रूप में कार्य करता है जो दांत की समस्या को दूर करने और दांतों को चमकाने में मदद करता है।

इसके अलावा, इसमें फ्लोराइड का प्राकृतिक स्रोत होता है, जो आपके दांतों और मसूड़ों के लिए बोनस है।
दूसरी ओर, सरसों का तेल आपके मसूड़ों को मजबूत करने में मदद करता है और पट्टिका या प्लाक को हटाने में आसान बनाता है। प्लाक आमतौर पर फैटी झिल्ली से घिरे बैक्टीरिया के कारण बनता है। 

सरसों के तेल से सफाई वसा घुलनशील बैक्टीरिया को कम करने में मदद कर सकता है और मसूड़े रक्तस्राव से बच सकते हैं। इन दोनों (नमक और सरसो का तेल) अवयवों का उपयोग करके गम सूजन को कम किया जा सकता है और कुछ हद तक खून के बहाव को रोका जा सकता है। अपने औषधीय उपयोगों के अलावा, उत्तरी भारतीय महिलाओं द्वारा सरसों के तेल को खाना बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
सरसों के तेल से 2 मिनट में दूर करें दांतों का पीलापन

आपको केवल इतना करना है कि रॉक साल्ट की एक चुटकी लें, जिसे सेंधा नमक के नाम से भी जाना जाता है और इसमें कुछ बूंदे सरसों का तेल मिलाएं।

आप नमक और सरसों के तेल मिश्रण में एक चुटकी हल्दी भी जोड़ सकते हैं। मिश्रण लें और अपनी इंडेक्स उंगली का उपयोग करके अपने मसूड़ों और दांतों पर मालिश करें। गर्म पानी के साथ इसे धोने से पहले कुछ मिनट के लिए मसूड़े और दांतों की मालिश करें। नियमित रूप से इस मिश्रण का प्रयोग करें। आपको जरूर फायदा होगा। –
दांतों का पीलापन दूर करने के लिए सरसों के तेल का पेस्ट


सरसों का तेल ½ चम्मच, हल्दी पाउडर 1 चम्मच, और नमक ½ चम्मच मिलाकर अच्छी तरह से इसका पेस्ट बनाएं। स्वस्थ दांतों को बढ़ावा देने के लिए दिन में दो बार अपने दांतों और मसूड़ों पर इस पेस्ट को रगड़ें।



दांतों में सड़न को दूर करने के घरेलू उपाय



प्रोसेस्ड फूड और फाइटिक एसिड से समृद्ध खाद्य पदार्थों का बहुत अधिक सेवन तथा कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस की कमी की वजह से दांतों में सड़न देखने को मिलता है। इस सड़न की वजह से आपके दांत खराब हो जाते हैं। इससे दांतों दर्द और मसूड़े की समस्या तथा दूसरे अन्य समस्या देखने को मिलता है। आज हम दांतों में सड़न को दूर करने के घरेलू उपाय के बारे बात करेंगे।
क्या है दांतों में सड़न


दांतों में सड़न या कैविटी दांतों की कठोर सतह में छोटे छेद होते हैं। ये शुगर से एसिड बनाने वाले दांतों की सतह पर बैक्टीरिया के कारण होते हैं। बैक्टीरिया एक चिपचिपा पदार्थ बनाती है जिसे प्लाक कहा जाता है। प्लाक में एसिड आपके एनामेल से खनिजों को खत्म कर देती है।
दांतों में सड़न को दूर करने के घरेलू उपाय


दांतों में सड़न को दूर करे नमक पानी
यह दांत से संबंधित दर्द के लिए सबसे आम घरेलू उपाय है। यह मुंह से बैक्टीरिया को मुक्त रखता है और कैविटी से चिपचिपापन को हटा देता है। इसके लिए आप एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच नमक या सेंधा नमक डालिए। इसे अच्छी तरह से मिक्स करके गरारे कीजिए। आपको जरूर फायदा मिलेगा।
लौंग का तेल


एंटी बैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों के कारण लौंग एक बेहतरीन औषधि है तथा भारत के व्यंजनों में लौंग का इस्तेमाल कई तरीकों से किया जाता है। इससे बना तेल दांतों में सड़न को दूर करने का बहुत ही अच्छा रामबाण उपाय है।
लौंग का तेल कैविटी और दांत के सड़न के कारण होने वाले दर्द से आपको बहुत ही आराम देता है। लौंग में यूजीनॉल होता है, जो नैचुरल एंटीसेप्टिक हैं। इसके एंटीमाइक्रोबायल घटक विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया, कवक, और वायरस के विकास को रोकते हैं। आप लौंग के तेल को कॉटन में डिप करके दांत के प्रभावित क्षेत्र में रख सकते हैं।
सरसों का तेल और सेंधा नमक

सरसों का तेल सेहत और सुंदरता दोनों के ही लिए बहुत लाभकारी है। सेंधा नमक और सरसों का तेल भारतीय रसोई घरों में सालों से प्रयोग किया जा रहा है। खाना बनाने के लिए इन सामग्री का प्रयोग रोजाना किया जाता है।

सरसों का तेल एंटीमाइक्रोबायल है, जबकि सेंधा नमक मुंह में पीएच स्तर को संतुलित करने में मदद करता है। इसके लिए आप एक चम्मच सरसों का तेल और एक सेंधा नमक लीजिए और अच्छी तरह से मिक्स कर लीजिए। इसके बाद धीरे धीरे इससे अपने दांतों और मसूड़ों की मसाज कीजिए।
दांतों में सड़न से छुटकारा दिलाए नींबू

विटामिन सी के स्तर में सुधार, रक्त कोलेस्ट्रॉल में कमी, लिवर के कार्य को बढ़ावा देना, चयापचय को बढ़ावा देना, पाचन में मदद और मुंहासे का इलाज आदि कामों के लिए नींबू बहुत ही गुणकारी है।

इसके अलावा नींबू दांतों में सड़न से छुटकारा दिलाने में भी सहायता करता है। नींबू विटामिन सी का एक समृद्ध स्रोत हैं। नींबू के रस में पाए जाने वाले एसिड कैविटी के कारण होने वाले दर्द को कम करने में मदद करते हैं और बैक्टीरिया को मार देते हैं। इसके लिए कुछ मिनट के लिए नींबू को चूसे और पानी से मुंह धो लीजिए। – 
लहसुन

हम खाना बनाने के लिए लहसुन का बहुत ही इस्तेमाल करते है। इसमें एंटीफंगल और जीवाणुरोधी गुण होते हैं और साथ ही, दर्द निवारक के रूप में काम करके दांत दर्द से छुटकारा पाने में मदद करता है। इसके लिए आप सुबह खाली पेट लहसुन की एक कली को चबाएं।
बेकिंग सोड़ा

दांतों का पीलापन दूर करने के लिए बेकिंग सोडा बहुत कारगार है। जिस तरह हम दांत साफ करते वक्त नमक का इस्तेमाल करते हैं उसी तरह बेकिंग सोडा का इस्तेमाल भी आपके लिए फायदेमंद है। इस बात का ध्यान दीजिए कि आप इसका इस्तेमाल रोज न करें।
नीम

आपके दांतों को साफ रखने के लिए नीम को पुराने तरीकों की तरह इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह स्वस्थ दांत पाने का एक प्रभावी तरीका है। इसके लिए आप नीम की टहनी से अपने दांतों की सफाई कर सकते हैं। यदि आप नीम का यूज लेंगे तो इससे दांत और मसूड़ों की समस्या ठीक होगी। –
मसूड़े मजबूत करने के उपाय



जिस तरह आप अपने शरीर की देखभाल करते हैं, उसी तरह आपको मौखिक स्वच्छता पर भी ध्यान देना चाहिए। मौखिक स्वच्छता में मसूड़े साफ सफाई भी आती है। आज हम मसूड़े मजबूत करने के उपाय के बारे में बात करेंगे। दरअसल मसूड़े की कोई भी बीमारी होती है तो हमे पता ही नही चलता। आमतौर पर यह दर्द रहित होता है, ज्यादातर लोगों को यह नहीं पता चलता कि उनके मसूड़ों में कुछ भी गलत हो रहा है।
मसूड़े की बीमारी क्या है


गम या मसूड़े की बीमारी तब शुरू होता है जब प्लाक गम लाइन के नीचे और उसके साथ बनता है। प्लाक एक चिपचिपा पदार्थ है जो बैक्टीरिया से भरा हुआ है। यह मसूड़े और हड्डी को चोट संक्रमित कर सकता है।

जिससे मसूड़े की बीमारी और दांत में सड़न हो जाता है। प्लाक गिंगिवाइटिस का भी कारण बन सकता है। गिंगिवाइटिस के कारण आपके मसूड़े सूज सकते हैं या फिर लाल भी हो सकते हैं। इससे खून भी आ सकता है।
मजबूत मसूड़े के लिए नियमित रूप से कीजिए फ्लॉस

ऐसा देखा गया है कि लोग ब्रश तो करते हैं लेकिन फ्लॉस नहीं करते हैं या उन्हें फ्लॉस करने की आदत नहीं है। यदि मसूड़े मजबूत करना है तो आप एक दिन में कम से कम एक बार फ्लॉस करें।
आपको बता दें कि फ़्लॉसिंग उन जगहों पर प्लाक और खाद्य कणों को हटा देती है जहां टूथब्रश आसानी से नहीं पहुंच सकता है। चूंकि प्लाक का बढ़ना दांत के सड़न और मसूड़े की बीमारी का कारण बन सकता है।
नियमित तौर पर दांत की सफाई


मसूड़े को मजबूत करने के लिए आप नियमित रूप से अपने दांत की सफाई जरूर कराएं। यदि आप नियमित तौर पर अपने दांतों का चेकअप करवाते हैं तो आपका दंत चिकित्सक यानी दांत का डॉक्टर प्रारंभिक मसूड़े की बीमारी के लक्षणों का पता लगा सकता है। इससे पहले कि वे अधिक गंभीर बने लक्षणों का इलाज किया जाना चाहिए।
आपको बता दें कि टार्टर को हटाने का एकमात्र तरीका मौखिक सफाई है। इससे किसी भी तरह के प्लाक से छुटकारा पाया जा सकता है।
धूम्रपान करना छोड़ दें

धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, देश में युवाओं में धूम्रपान की लत पिछले कुछ सालों से बढ़ती जा रही है। मसूड़े की बीमारी के लिए धूम्रपान एक बड़ी वजह है। इससे मसूड़े के रोग की शुरुआत होती है।

इससे मसूड़े सिकुड़ जाते हैं और दांतों के आस-पास की हड्डियां गल जाती हैं। चूंकि धूम्रपान आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली या इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है, इसलिए यह मसूड़े के संक्रमण से लड़ना मुश्किल बनाता है। इसके अलावा, धूम्रपान करने से आपके मसूड़ों को ठीक करना मुश्किल हो जाता है।
एक दिन में दो बार करें ब्रश

मसूड़े को सेहतमंद रखने के लिए आपके दांतों के बीच दैनिक ब्रशिंग और सफाई महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्लाक को हटा देती है। आपको दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना चाहिए।

आप चाहे तो हर भोजन के बाद अपने दांत ब्रश कर सकते हैं। इससे आपके दांतों और मसूड़ों के बीच फंसे भोजन और प्लाक को दूर करने में मदद मिलती है।


इसके अलावा अपनी जीभ भी स्क्रब करें, क्योंकि यह बैक्टीरिया को उत्पन होने से रोक सकता है। इस बात का ध्यान दीजिए कि आपका टूथब्रश सॉफ्ट होना चाहिए और आपके दांत और मुंह के लिए फिट होना चाहिए।

आप बैटरी संचालित या इलेक्ट्रिक टूथब्रश पर भी विचार कर सकते हैं। ये मैन्युअल ब्रशिंग की अपेक्षा गिंगिवाइटिस और प्लाक को कम करने के लिए काफी मददगार सिद्ध हो सकता है। इसके अलावा तीन से चार महीने में आप अपने टूथब्रश को जरूर बदलें।
फ्लोराइड टूथपेस्ट का इस्तेमाल

मसूड़े मजबूत करने के उपाय में एक उपाय यह है कि आप फ्लोराइड टूथपेस्ट का ही इस्तेमाल करें। आपको बता दें कि टूथपेस्ट के लिए कई ब्रांड यह दावा करते हैं कि उनके टूथपेस्ट से गिंगिवाइटिस कम हो जाती है साथ ही इससे ताजा सांस, और दांतों को सफ़ेद करने में मदद मिलती है।

आपको जानना चाहिए कि स्वस्थ मसूड़ों के लिए कौन सा टूथपेस्ट आपके लिए अच्छा है? टूथपेस्ट चुनना सुनिश्चित करें, जिसमें फ्लोराइड होता है। उसके बाद, स्वाद और रंग आप पर निर्भर करता है।
थेरप्यूटिक माउथवाश
थेरप्यूटिक माउथवाश से गिंगिवाइटिस को रोकने या कम करने, टार्टर विकसित होने वाली गति को कम करने, या इन लाभों के संयोजन को कम करने में मदद मिल सकती हैं।

इस तरह के माउथवाश का उपयोग करके आपके मुंह में जो भी पार्टिकल या मलबे पड़े हो उसे साफ कर सकते हैं। हालांकि यह फ़्लॉसिंग या ब्रश करने का एक विकल्प नहीं है।

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