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सुबह का नाश्ता राजा की तरह

सुबह का नाश्ता राजा की तरह, दोपहर का भोजन राजकुमार की तरह और रात का भोजन भिखारी की तरह करना चाहिए।’

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सुबह का नाश्ता राजा की तरह, दोपहर का भोजन राजकुमार की तरह और रात का भोजन भिखारी की तरह करना चाहिए।’



कामकाजी हो या गृहिणी, घर-बार के अलावा उन्हें खुद को संभालने का वक्त बहुत कम मिल पाता है। कम वक्त और सही जानकारी के अभाव में, सैकड़ों बार कोशिश करने के बावजूद हमारा वजन कभी कम नहीं हो पाता। लेकिन इस बार होगा, कैसे? आइए जानते हैं वजन कम करने के सही तरीके, बता रही हैं रुचि गुप्ता
आमतौर पर हम लोग अपने वजन को लेकर कुछ ज्यादा ही परेशान रहते हैं और साल में दो-चार बार अपने वजन को कम करने की कोशिश भी करते हैं, खासतौर पर महिलाएं। लेकिन हमारी यह कोशिश अकसर नाकामयाब रहती है। वजह, सिर्फ एक। मेहनत तो बहुत की, खाना भी कुछ खास नहीं खाया, पर... पर इन दोनों के बीच तालमेल सही नहीं बिठाया। अगर आपको वजन सच में कम करना है तो एक्सरसाइज और खानपान के बीच सही तालमेल के साथ ही अपने शब्दकोश से न, नहीं कर सकती, नहीं होगा, जैसे शब्दों को भी मिटा देना होगा। हर सुबह उठिए और खुद से कहिए कि मैं अपना वजन कम कर सकती हूं। मैं आज 30 मिनट सैर कर सकती हूं। आइए जानें ऐसी बातें, जिन्हें अपनाकर आप सेहतमंद रहेंगी और वजन भी कंट्रोल में रहेगा:
डाइट में छुपा है राज
अकसर महिलाओं को जैसे ही वजन बढ़ने का कमेंट मिलता है, उनका सबसे पहला हथियार होता है, भोजन। सबसे पहले वे अपने खाने पर रोक लगाने लगती हैं, वह भी बिना किसी प्रोफेशनल सलाह के। न्यूट्रीशनिस्ट एवं न्यूट्रीहेल्थ की संस्थापक डॉं. शिखा शर्मा का कहना है, ‘हमें वजन घटाने के लिए कभी क्रैश डाइट या खाने की मात्रा को कम नहीं करना चाहिए। आपको जितना वजन घटाना है उसे ध्यान में रखते हुए अपने भोजन को सही मात्रा में लेना चाहिए। हमारा पेट खुद ही हमारे भोजन की मात्रा के लिए संकेत देता है। वैसे भी कहा जाता है कि सुबह का नाश्ता राजा की तरह, दोपहर का भोजन राजकुमार की तरह और रात का भोजन भिखारी की तरह करना चाहिए।’
कब करें भोजन
माना जाता है कि एक सेहतमंद महिला को हर रोज 1800 से 2000 कैलोरी की जरूरत होती है। इस कैलोरी सेवन को अगर आप सही प्रकार से बांट लें तो, इन्हें खर्च करने में आपको अधिक श्रम भी नहीं करना पड़ेगा। वजन घटाने को ध्यान में रखते हुए अगर आप हर दो घंटे में कम मात्रा में भोजन करें, तो इससे आपको खाना पचाने में मुश्किल भी नहीं होगी। आप दिन की शुरुआत नाश्ते से कर सकती हैं। उसके दो घंटे के बाद फिलर के तौर पर दोपहर के खाने से पहले फल खा सकती हैं। दोपहर के भोजन के बाद शाम को चाय के समय पर आप प्रोटीन स्नैक का सेवन करें। फिर रात को सोने से लगभग तीन घंटे पहले भोजन करें। ध्यान रहे, यह भोजन काफी हल्का हो।
व्यायाम से हल होगी समस्या
खाने में हम भले कितनी भी कटौती कर लें, लेकिन अगर हमने उसके साथ शारीरिक व्यायाम पर ध्यान नहीं दिया तो वजन घटाना एक मुश्किल चुनौती साबित हो सकती है। विशेषज्ञों की मानें तो हमें सप्ताह में कम से कम 6 दिन और दिन में कम से कम 1 से 1-1/2 घंटे तो व्यायाम करना ही चाहिए। जरूरी नहीं है कि आप एक साथ समय निकालें। आप चाहें तो कुछ समय सुबह तो बाकी शाम को भी एक्सरसाइज कर सकती हैं। अपने लिए ऐसा एक्सरसाइज चुनें, जिसे आप आसानी से और लंबे समय तक कर सकें। कुछ दिन एक्सरसाइज करना और उसके बाद एक्सरसाइज करने की इच्छाशक्ति का खत्म हो जाना आम बात है। अगर वजन घटाना है तो ऐसी गलती करने से बचें और अपने एक्ससाइज के वक्त को भी रोचक बनाने की कोशिश करें।
व्यायाम आप चाहें घर पर करें या किसी प्रोफेशनल की देख-रेख में जिम में, उसकी शुरुआत वॉर्म-अप सेशन से ही होती है। आमतौर पर वॉर्म-अप सेशन में हम हल्के-फुल्के बॉडी स्ट्रेच और जंप के साथ शुरुआत करते हैं। साथ ही सैर भी एक अच्छा वॉर्म-अप एक्सरसाइज है।

दिल का ख्याल रखेगा कार्डियो 
दिल्ली के गोल्ड जिम, पूसा रोड के महा प्रबंधक और मास्टर ट्रेनर अभिषेक चटर्जी का कहना है, ‘आपको एक सप्ताह में 6 दिन और हर रोज कम से कम 20 मिनट कार्डियो सेशन जरूर करना चाहिए। दिल तंदरुस्त रहेगा तो शरीर भी तंदरुस्त रहेगा। कार्डियो सेशन की शुरुआत ट्रेडमिल, साइकलिंग, स्ट्रेर्प्स और क्रॉस ट्रेनर से कर सकती हैं। आम तौर पर कार्डियो सेशन को वेट ट्रेनिंग के पहले और बाद में दो भागों में बांट के किया जाता है।’

वेट ट्रेनिंग से घटाएं वजन
अभिषेक का कहना है, ‘वजन घटाने के लिए वेट ट्रेनिंग के दौरान किए गए स्ट्रेचिंग, लेग प्रेस, डेड लिफ्ट, लेग एक्सटेंशन और पुश-अप जैसे एक्सरसाइज और पावर योगा बेहद कारगर हैं। जहां पाइलेट्स एक्सरसाइज में योगा मैट या जिम बॉल पर लेट कर अपने पेट, जांघों और टांगों की मांसपेशियों की कसरत की जाती है, वहीं वेट ट्रेनिंग के बाद स्ट्रेचिंग खुली मांसपेशियों को सुंदर और सुडौल बनाने में मददगार साबित होती है। इसी के साथ आपको कम्पाउंड एक्सरसाइज, जिसमें एक से अधिक जोडमें पर ध्यान दिया जाता है, करनी चाहिए। इसके अलावा आप पावर योगा के सेशन भी ले सकती हैं। एक बार में 20 मिनट तक आप वेट ट्रेनिंग कर सकती हैं। आप एक्सरसाइज के अपने पूरे टाइम को तीन-तीन के दो सेटों में बांट सकती हैं। ताकि किसी एक एक्सरसाइज से आपको बोरियत भी न होने लगे। इस दौरान आप बीच में दो-दो मिनट का ब्रेक भी लें।
क्या खाएं, क्या न खाएं
जो महिलाएं अपना वजन घटाना चाहती हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि उन्हें खाने में वसायुक्त भोजन कम करना चाहिए और फाइबरयुक्त भोजन अधिक खाना चाहिए। डॉं. शर्मा बताती हैं, ‘आप अपने भोजन में आम चावल की जगह ब्राउन राइस का इस्तेमाल करें, जिनमें फाइबर बहुत है। ठीक ऐसे ही आप सामान्य ब्रेड की जगह ब्राउन ब्रेड और अपने गेहूं के आटे को मल्टीग्रेन आटे से बदल दें। जहां तक मीठे की बात है तो उसके लिए जितना भी कृत्रिम मीठा या चीनी है, उसे आप प्राकृतिक मीठे से बदलें। यानी आप नीबू पानी में चीनी की जगह शहद और चाय में गुडम् का इस्तेमाल करें। इससे आपके शरीर की मीठे की आवश्यकता भी पूरी होगी और कैलोरीज में कटौती भी होगी।’

चलते-चलते
हर दो घंटे पर आप पांच मिनट की सैर करें। ध्यान रहे आप ब्रिस्क वॉक या तेज कदमों से चलें।
सैर को बनाए रखने के लिए आप लिफ्ट या एस्कलेटर की जगह सीढियों का इस्तेमाल करें। अपनी कार या स्कूटर को पार्किंग में थोड़ा दूर लगाएं ताकि आप अधिक से अधिक कदम चल सकें।
हर रोज आधे घंटे की सैर की जगह 45 मिनट की सैर करें। रोज आधे घंटे की सैर से जहां बढ़ते वजन पर नियंत्रण लगेगा, वहीं 45 मिनट की वॉक से आप रोज 300 कैलोरी तक अधिक खर्च कर पाएंगी। तो जाहिर है, कम कैलोरी यानी शरीर में कम वसा।
प्रसंस्कृत या ऐसे प्रोसेस्ड फूड का सेवन न करें, जिसमें शुगर, फ्रूक्टोस या कॉर्न सिरप का इस्तेमाल हो। सूखे मेवे खाएं, जिनसे आपको कैलोरीज के साथ-साथ प्राकृतिक तेल और फाइबर भी मिले।
शाम को पांच बजे से पहले कैफीनयुक्त उत्पादों का सेवन कर लें ताकि रात को नींद में कोई बाधा न आए।
फेसबुक और ट्विटर पर रिश्तेदारों से मिलने की बजाए सप्ताह में एक बार दोस्त-रिश्तेदारों से मिलें। इसके लिए आप किसी पार्क में मिलने का कार्यक्रम रखें, जहां आप फास्ट फूड या तले और मसालेदार भोजन से भी दूर रहेंगी।
बाहर के खाने की जगह घर पर बने और पोषक तत्वों से भरपूर खाने को तरजीह दें। 
दोपहर तक अधिक कैलोरी वाला भोजन खाएं, उसके बाद कम से कम कैलोरीज लें, ताकि आप रात तक अपनी कैलोरीज का इस्तेमाल भी

सुबह का नाश्ता राजा की तरह और रात का खाना फकीर की तरह क्यू खाए....?

अमेरिका में लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अनुसंधानकर्ताओं ने पता लगाया कि नाश्ते और रात के भोजन के बीच वक्त अधिक होने का संबंध कम बीएमआई से है। वैज्ञानिकों ने सदियों पुरानी इस कहावत पर मुहर लगाई है कि सुबह का नाश्ता राजा की तरह करना चाहिए और रात का खाना फकीर की तरह। पचास हजार लोगों पर कराये गये एक अध्ययन में यह बात सामने आई कि दिनभर में सुबह के नाश्ते के समय सबसे ज्यादा आहार लेने वाले लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) उन लोगों की तुलना में कम होता है जो दिनभर कम खाने के बाद रात को छक कर खाते हैं जबकि दोनों ही तरह के लोग पूरे दिन में एक समान कैलोरी की खपत करते हैं। 

वैज्ञानिकों का कहना है कि लोगों को स्वस्थ और उचित वजन के लिए सुबह का नाश्ता और दोपहर का भोजन करना चाहिए, देर रात के खाने को छोड़ देना चाहिए, स्नैक्स से बचना चाहिए, दिनभर में सबसे ज्यादा आहार सुबह के नाश्ते में लेना चाहिए और रात में कम से कम 18 घंटे तक कुछ नहीं खाना चाहिए। जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन में प्रकाशित अध्ययन की मुख्य लेखिका हाना काहलेओवा ने कहा, भारी नाश्ता करने से भूख, खासतौर पर मिठाइयों और वसा बढ़ाने वाली चीजों की लालसा कम होती है और इससे वजन बढ़ने पर रोक लगती है। काहलेओवा ने ‘द टेलीग्राफ’ को बताया, नियमित सुबह का नाश्ता लेने से तृप्ति बढ़ती है, कुल ऊर्जा खपत कम होती है, समग्र आहार गुणवत्ता में सुधार आता है, ब्लड लिपिड कम होता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी और ग्लूकोज टॉलरेंस में सुधार होता है। उन्होंने कहा, दूसरी तरफ शाम के वक्त अधिक खाने से इसके विपरीत प्रभाव होते हैं और इनसे शरीर के वजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

सुबह का नाश्‍ता छोड़ा तो ये होगी परेशानी


सुबह का नाश्‍ता छोड़ा तो ये होगी परेशानी



अंग्रेजों की पुरानी कहावत है, सुबह का नाश्‍ता राजा की तरह, दिन का खाना आम आदमी की तरह और रात का भोजन भिखारी की तरह करने से शरीर स्‍वस्‍थ रहता है। इस कहावत का अर्थ ये है कि सुबह काम पर निकलने से पहले शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है इसलिए सुबह के नाश्‍ते में सारी अच्‍छी और पौष्टिक चीजें खानी चाहिए। दिन में भोजन उतना ही होना चाहिए जितने से शेष दिन के लिए ऊर्जा की जरूरत पूरी हो जाए और रात में तो शरीर को सिर्फ आराम करना होता है इसलिए बिलकुल कम भोजन से शरीर का काम चल जाता है। ये कहावत कही भले ही अंग्रेजों ने हो मगर ये भारतीयों पर भी उतना ही लागू होती है क्‍योंकि डॉक्‍टरों ने पाया है कि सुबह का नाश्‍ता छोड़ने वालों का बॉडी मास इंडेक्‍स बढ़ सकता है और इसके कारण लंबे समय में उनके मोटे होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

क्‍यों बढ़ जाता है वजन

दरअसल आजकल की जीवनशैली में अधिकांश युवा काम-काज या गैजेट के इस्‍तेमाल के चक्‍कर में रात में देर से सोते हैं और इसके कारण वो सुबह देर से उठते हैं। देर से उठने के कारण ऑफ‍िस जाने की हड़बड़ी में वो नाश्‍ता छोड़ देते हैं और सोचते हैं कि दिन में कुछ हैवी खा लेंगे। बस यहीं गलती हो जाती है क्‍योंकि दिन में हैवी खाने के चक्‍कर में वो अस्‍वास्‍थ्‍यकर और ज्‍यादा फैट वाला तला-भुना खाना खा लेते हैं और इसके कारण उनका वजन बढ़ जाता है।

डायबिटीज के मरीजों रखें खास ध्‍यान

टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए तो सुबह का नाश्‍ता छोड़ना कुछ ज्‍यादा ही खतरनाक हो सकता है। नए अध्‍ययनों ने साबित किया है कि टाइप 2 डायबिटीज के ऐसे मरीज जो अपना नाश्‍ता करने में देर करते हैं उनका बीएमआई बढ़ने की आशंका ज्‍यादा होती है। लंबे समय में इसकी वजह से और जटिलताएं हो सकती हैं इसलिए इस बात पर जोर दिए जाने की जरूरत है कि डायबिटीज के मरीज ही नहीं आम लोग भी अपना हर भोजन वक्‍त पर खाएं। ये ध्‍यान रखने की जरूरत है कि मोटे लोगों में टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा आम लोगों के मुकाबले 3 से 7 गुना तक ज्‍यादा होता है। यदि किसी व्‍यक्ति का बीएमआई 35 से अधिक हो तो उसे टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा 20 गुना तक बढ़ जाता है।

क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर
इस बारे में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्‍यक्ष और हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्‍यक्ष डॉक्‍टर के.के. अग्रवाल ने कहा कि भारतीयों में कमर का घेरा ज्‍यादा होने की टेंडेंसी होती है और कमर का ये घेरा इंसुलिन प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम कर सकता है। कमर के इस घेरे का मुख्‍य कारण आज की जीवनशैली है। तेज रफ्तार जीवन में लोग सुबह के स्‍वास्‍थ्‍यकर नाश्‍ते को छोड़कर दिनभर फास्‍ट फूड खाने में जुटे रहते हैं। ये समझने की जरूरत है कि स्‍वस्‍थ्‍य भोजन और हल्‍के या सामान्‍य कसरत के जरिये शरीर के वजन को 5 फीसदी तक कम करने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 50 फीसदी तक घट जाता है। इसी प्रकार जो लोग डायबिटीज के शिकार नहीं बने हैं उन्‍हें भी समय रहते स्‍वथ्‍य जीवनशैली की ओर मुड़कर अपने बीएमआई को नियंत्रित करना चाहिए।

सुझाव
रोज व्‍यायाम करें और तीनों वक्‍त स्‍वास्‍थ्‍यकर भोजन करें। नियमित रूप से अपने शरीर के ब्‍लड ग्‍लूकोज की जांच करवाएं। रिफाइंड चीनी का सीधा इस्‍तेमाल कभी न करें क्‍योंकि ये आसानी से खून में मिल जाती है और डायबिटीज की जटिलताओं को बढ़ा देती है। तनाव को घटाने के लिए मेडिटेशन और योग का सहारा लें।

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