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बेहतर स्वास्थ्य के लिए पैदल चलना हितकर


बेहतर स्वास्थ्य के लिए पैदल चलना हितकर

कुछ साल से मेरे साथी रमेश की तबियत खराब रहती थी। हल्का फुल्का बुखार भी रहता था और शरीर सुस्त रहता था। कुछ डॉक्टरों से इलाज भी कराया मगर दवाई का असर कम ही हुआ। जब मैंने उससे एक दिन सुबह सैर करने के लिए कहा तो रमेश अनमने मन से पैदल सैर के लिए चलने को तैयार हो गया।
कुछ साल से मेरे साथी रमेश की तबियत खराब रहती थी। हल्का फुल्का बुखार भी रहता था और शरीर सुस्त रहता था। कुछ डॉक्टरों से इलाज भी कराया मगर दवाई का असर कम ही हुआ।
जब मैंने उससे एक दिन सुबह सैर करने के लिए कहा तो रमेश अनमने मन से पैदल सैर के लिए चलने को तैयार हो गया। कुछ दिनों बाद वह चुस्त-दुरुस्त हालत में नजर आने लगा।
यह आश्चर्यजनक परिवर्तन उसको भा गया। अब वह प्रतिदिन 3.4 किमी. की दूरी तय कर देता है। उसका बुखार भी समाप्त हो गया तथा दूसरा फायदा उसे यह हुआ कि उसकी दुकान पर भी फायदा होने लगा। घूमना, पैदल सैर करना प्रत्येक स्त्री, पुरुष बच्चे व बूढ़ों के लिए हितकर है।
 इससे शरीर में तन्दुरुस्ती महसूस होती है।घूमने तथा पैदल चलने से मानसिक एवं शारीरिक तनाव भी समाप्त होता है जिससे तन मन को शान्ति मिलती है।
घूमने से मांसपेशियों तथा रक्तप्रवाह सुचारु रूप से चलने के कारण हृदय तथा फेफड़ों से सम्बन्धित रोगों से बचा जा सकता है।सुबह सैर के लिए चलने से पहले पानी पी कर चलना चाहिए जिससे पेट की सफाई हो जायेगी और पाचन क्रिया ठीक रहेगी।
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सुबह के शुद्ध वातावरण में घूमना सेहत के लिए बेहतर रहता है क्योंकि इस समय प्रदूषण की मात्रा कम रहती है।पैदल घूमने से पाचन क्रिया सुचारु रूप से चलती रहती है एवं भूख भी लगती है। पैदल चलने से शारीरिक मोटापा तथा वजन कम किया जा सकता है क्योंकि शरीर में जितनी चर्बी एवं विषैले पदार्थ होते हैं वे पसीने के साथ बाहर निकल जाते हैं
जिससे शरीर को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।पैर स्वयं के प्राकृतिक वाहन हैं जिन्हें सुरक्षित एवं स्वच्छ रखना स्वयं का दायित्व बनता है। यदि सैर को निकलें तो ध्यान रहे कि पैरों पर सुविधाजनक जूते चप्पल ही पहनें। यदि छोटे जूतों द्वारा सैर की जायेगी तो चलने में परेशानी का सामना करना पडे़गा जिससे फायदे की जगह नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पैदल चलने से शारीरिक थकान महसूस हो सकती है। समय पर उस ऊर्जा की कमी को पूरा करना चाहिए। शारीरिक शक्ति को देखकर ही सैर की दूरी तय करें जिससे शुरू में ज्यादा थकान न हो अन्यथा बीमार हो सकते हैं। यदि पैदल सैर के लिए नहीं जाते तो आज से ही जाने की तैयारी करके देखिये कि कितना शारीरिक एवं मानसिक फायदा होता है।
 सैर करने में अकेले बोरियत महसूस हो तो एक साथी को तैयार कर सकते हैं।
स्वास्थ्य हेतु गुणकारी – आंवला



यदि आप बडे़-बडे़ भूरे रंग के चिकने सुडौल आँवले देखकर उन्हें लेने के लिये ललचा नहीं जाते तो निश्चित ही आप इस अमृतफल के गुणों से अनभिज्ञ हैं। रसायन (टॉनिक) के रूप में आंवला शरीर व स्वास्थ्य के लिए अमृत के समान है। आंवला विटामिन ‘सी’ का अनूठा भण्डार है।
जितना विटामिन ‘सी’ आंवले में होता है उतना किसी अन्य फल में नहीं होता। आंवले में विटामिन ‘सी’ नारंगी और मौसम्मी की तुलना में बीस गुना होता है। ध्यान देने योग्य बात तो यह है कि इसमें विटामिन ‘सी’ किसी भी सूरत में नष्ट नहीं होता।यदि आप बडे़-बडे़ भूरे रंग के चिकने सुडौल आँवले देखकर उन्हें लेने के लिये ललचा नहीं जाते तो निश्चित ही आप इस अमृतफल के गुणों से अनभिज्ञ हैं।
रसायन (टॉनिक) के रूप में आंवला शरीर व स्वास्थ्य के लिए अमृत के समान है। आंवला विटामिन ‘सी’ का अनूठा भण्डार है। जितना विटामिन ‘सी’ आंवले में होता है उतना किसी अन्य फल में नहीं होता। आंवले में विटामिन ‘सी’ नारंगी और मौसम्मी की तुलना में बीस गुना होता है।
 ध्यान देने योग्य बात तो यह है कि इसमें विटामिन ‘सी’ किसी भी सूरत में नष्ट नहीं होता।l स्वास्थ्य :- आंवले के सेवन से कई रोग मिटाये जा सकते हैं।
 आंवले में स्थित विटामिन ‘सी’ शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति में बेहद वृद्धि करता है। आंवला रक्तशुद्धि करता है, साथ ही नया रक्त उत्पन्न करने में बहुत उपयोगी है। आंवले में पाया जाने वाला विटामिन ‘सी’ नेत्र ज्योति, केश, बहरापन दूर करने, मधुमेह मिटाने, रक्त बुद्धि, मसूड़े व दांत, फेफडे़ व त्वचा के लिये बहुत उपयोगी है।l सौंदर्य :- सौंदर्य सजग महिलाओं के लिये यह वरदान है। आंवले का चूर्ण और पिसी मेंहदी मिलाकर लगाने से बाल पकते नहीं हैं और काले बने रहते हैं। आंवले के उपयोग से सुन्दर नेत्र, कान्तिपूर्ण स्वच्छ त्वचा और तेजस्वी मुख आपके रूप लावण्य को और बढ़ाते हैं यह शरीर को स्फूर्तिवान एवं बलवान रखकर वृद्धावस्था को दूर रखने के लिये अत्यंत गुणकारी है।l उपयोग :- आंवले का स्वाद पूर्णत: रुचिकर नहीं है, अत: इसका सेवन खाकर न करके इसके रस का सेवन कर अपेक्षित लाभ उठा सकते हैं। वैसे भी आंवले के मूल्यवान तत्वों का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिये उसका रसपान करना चाहिये।
प्रात:काल खाली पेट आंवले का रसपान विशेष गुणकारी है। इसका रस आसानी से सिल पर निकाला जा सकता है। 3-4 आंवलों का रस सुबह शाम लेना चाहिये। यदि थोड़ा बहुत जी मिचलाता है तो घबराना नहीं चाहिये। आंवला चटनी, मुरब्बा, अचार, चूर्ण आदि के रूप में भी गुणकारी बना रहता है।l
सावधानी :- रस आंवले का हो या किसी भी फल या साग का परन्तु रस हमेशा ताजा होना चाहिये। रस निकलने के पन्द्रह मिनट बाद इसमें विद्यमान सभी तत्व नष्ट हो जाते हैं।
 फ्रिज में रखने पर भी यह हानि रोकी नहीं जा सकती। रस में नमक, शक्कर, कालीमिर्च मिलाने से मूल्यवान तत्व नष्ट होते हैं।
 आंवले काटने के लिये स्टील के चाकू का प्रयोग करेंं क्योंकि लोहे के चाकू से लोहे के संसर्ग से आंवले में विकार उत्पन्न होता है।अलग-अलग रोग के लिये अलग अलग विधि से आंवले का सेवन करने की विशेष आवश्यकता नहीं होती। यदि आप नियमित रूप से प्रतिदिन किसी भी रूप में दो आंवलों का सेवन करेंगे तो नेत्र ज्योति, कमजोर खाल, मसूड़े व दांत, कब्ज, रक्त विकार, श्वास रोग, चर्मरोग, क्षयरोग, सिरदर्द, पेट में कीडे़, फेफडे़ की खराबी आदि रोगों से पीड़ित नहीं होंगे।
 इनमें से किसी भी रोग के शिकार हो भी नहीं गये होंगे तो आप रोगमुक्त होकर स्वस्थ एवं बलवान हो जायेंगे।

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मेथी एक गुणकारी औषधि

मेथी न केवल एक लोकप्रिय हरी पत्तेदार सब्जी है बल्कि एक गुणकारी औषधि भी है। इसके नियमित उपयोग से शरीर स्वस्थ रहता है। आइए जानें इसके कई गुण:-
मेथी के उपयोग से पाचन संबंधी कई रोग दूर होते हैं जैसे बदहजमी, पेट में गैस बनना आदि।
मेथी के पत्तों में आयरन होता है जो रक्त में लाल रक्त कणों की कमी दूर करता है, इसलिए किशोरियों के लिए इसका सेवन अति लाभप्रद है।
मेथी न केवल एक सब्जी है बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन के रूप में भी अति गुणकारी है। नहाने से पूर्व मेथी के ताजा पत्तों को पीसकर सिर पर लगाने से बाल लम्बे होते हैं और बालों में कुदरती चमक आती है। बालों से रूसी भी दूर होती है।
मेथी के पत्ते ठण्डक प्रदान करते हैं इसलिए शरीर के किसी भाग में सूजन होने या जल जाने पर मेथी के पत्ते पीस कर लगाने से आराम मिलता है।
गला यदि साधारण रूप से खराब हो तो मेथी के बीजों के पानी से गरारे करने से लाभ मिलता है।
न्यूमेनिया, ब्रोंकाइटिस, जुकाम आदि का संदेह होने पर मेथी की चाय लेने से शरीर में बहुत ज्यादा पसीना आता है और बुखार जल्दी ही उतर जाता है।
डायबिटीज के इलाज में मेथी के बीजों को बहुत उपयोगी पाया गया है। मेथी के बीज रोज लेने से डायबिटीज के रोगियों में ग्लूकोज, सीरम कोलेस्ट्रोल व ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर में कमी आती है। 
अात्मसम्मान – जिंदगी जीने की सबसे बड़ी धराेहर

अपनी योग्यताओं को जानें :- अपने आत्मसम्मान को आहत करने के बजाय आप अपनी खूबियों को पहचानें। यह समझें कि हर दुख के पीछे सुख और अंधकार के पीछे प्रकाश छिपा होता हैं। कामकाज के क्षेत्र में कभी भी खुद की तुलना अपने अन्य सहकर्मियों से न करें। अधिकतर कामकाजी महिलायें अपनी तुलना अन्य सहकर्मियों से करती हैं और ऐसा कर वे स्वयं को हीन या कमतर महसूस करती हैं।
याद रखिये हर व्यक्ति में खूबियां और खामियां दोनों ही होती हैं। कामकाजी महिलाओं को यह बातें समझनी चाहिए कि नौकरी करना ही जिंदगी नहीं है। जीवन में नौकरी के अलावा और भी बहुत कुछ है। इस सच को समझें कि जीवन में पैसा बहुत कुछ होता है पर सब कुछ नहीं होता। नौकरी आपको कुछ करने का आपके व्यक्तित्व की रिक्तता को भरने का सशक्त माध्यम है।
जीवन के प्रति सही दृष्टिकोण अपनायें :- एक मनोवैज्ञानिक कहती हैं कि उनके पास अनेक सुंदर महिलायें आती हैं। जो अपनी सुंदरता के बारे में कम ही ख्याल रखती हैं। वे देखने में तो निहायत सुंदर हैं पर खुद को मन से बदसूरत समझती हैं। उनके अनुसार ऐसी सोच वाली महिलाओं को अपना आत्मविश्लेषण करना चाहिए और उन्हें इस कार्य में अपनी किसी अंतरंग सहेली या दोस्त की मदद लेनी चाहिए।
अपनी मदद स्वयं करें :- आप ही अपने आत्मसम्मान की रक्षा कर सकती हैं। इन संदर्भ में कोई दूसरा आपकी मदद नहीं कर सकता। आत्मसम्मान का यह भाव मात्र एक दिन में ही पैदा नहीं होता। जैसे कि एक इमारत ईंट दर ईंट रखकर तैयार होती है, ठीक वैसे ही आत्मसम्मान का भाव भी एक-एक संकल्प से पैदा होता है।
स्वास्थ्य का ध्यान रखें :- अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा कदापि न करें। योगासन व व्यायाम करें। पौष्टिक आहार करें। पानी जमकर पीयें। खानपान में फलों को जरूर स्थान दें। स्वास्थ्य अच्छा रहने से जहां आपकी कार्यक्षमता बढे़गी। वहीं आपकी महत्ता का भी बोध होगा।
अपनी प्रतिभा को तलाशें :- हर व्यक्ति को प्रकृति ने कुछ न कुछ विशिष्ट शक्ति प्रदान की है। आप में भी प्रतिभा मौजूद है। जरूरत इस बात की है कि आप अपनी उस छिपी प्रतिभा को तलाशें।
आत्मप्रेम का विचार मन मेें विकसित करें :- आप जैसी हैं, जो भी हैं उसी रूप में स्वयं की कमियों को भी स्वीकारें, स्वयं को प्यार करें। आत्मप्रेम का भाव जागृत करने की इस मनोवैज्ञानिक विधि पर अमल करें। हर सुबह आइने में अपना चेहरा डूबकर देखें। खुद को चूमें, सराहें और स्वयं को देखकर मंद-मंद मुस्कुराएं।
कमियों से न घबरायें :- अपनी कमियों व आशंका से भयभीत हुए बगैर उनका मुकाबला करें। उदाहरण के लिए आपकी अंग्रेजी भाषा कमजोर है तो इस कारण खुद को कमतर न समझें व अपना अंग्रेजी शब्द ज्ञान बढ़ायें। अंग्रेजी की किताब व पत्रिकायें पढ़ें। घर में व बाहर अपने दोस्तों से अंग्रेजी में ही बात करने का आग्रह करें।
खुद को सराहें :- उन सहेलियों व दोस्तों के बीच रहें जिनके बीच आपके आत्मसम्मान को बढ़ने का मौका मिल सके। कभी-कभी अपनी सफलता पर खुद को शाबासी देना न भूलें। कोई शौक विकसित करें जिससे आपको प्रसन्नता मिले। साथ ही जिंदगी में सकारात्मक रवैया अपनाये।
दुनिया हंसने वालों के साथ :- आपकी स्वयं की सोच ही आपको कामयाब व नाकामयाब बनाती है। दुनिया उन्हीं लोगों को पसंद करती है जो खुशमिजाज होते हैं और जो दूसरों को भी खुशमिजाज रखते हैं। यदि आप अपने व्यक्तित्व से संतुष्ट हैं तो इसकी रौनक आपके चेहरे के आभामंडल पर भी दिखायी देगी। आपकी खुशमिजाजी की छाया चेहरे पर भी पडेगी। इस प्रकार आप स्वयं के अलावा दूसरों को भी प्रसन्न रख सकेंगे। इस सूरतेहाल में दूसरे व्यक्ति खुद ब खुद आपकी ओर खिंचे चले आयेंगे
हेल्दी रहने के लिए कैसा हो खानपान

उचित खानपान ही सेहत का राज है। उचित खानपान का अर्थ है पौष्टिक ब्रेकफास्ट, पौष्टिक लंच और सुपाच्य हल्का डिनर।उचित खानपान ही सेहत का राज है। उचित खानपान का अर्थ है पौष्टिक ब्रेकफास्ट, पौष्टिक लंच और सुपाच्य हल्का डिनर।

ब्रेकफास्ट कैसा हो : ब्रेकफास्ट राजाओं की तरह करना चाहिए क्योंकि डिनर और ब्रेकफास्ट करने में गैप अधिक होता है। प्रात: अगर हमने पौष्टिक नाश्ता किया होगा तो दिन भर हम ऊर्जापूर्ण महसूस करेंगे, इसलिए नाश्ता राजाओं की तरह करें।

– उठने के बाद जितनी जल्दी हो ब्रेकफास्ट करें।n जो भी नाश्ते में ले रहे हैं, साथ में चाय न पीएं। चाय अगर पीनी है तो एक घंटे के अंतराल में पीएं। चाय अधिक से अधिक दो से तीन कप ही पीएं।

– नाश्ते में आप गेहूं के आटे में बेसन, सोयाबीन, ओट्स का आटा मिलाकर उसमें सब्जी स्टफ कर चपाती लें। अगर चपाती नहीं खानी तो एक तरफ हल्का सा तेल लगाकर परांठा बना सकते हैं। साथ ही छाछ का सेवन कर सकते हैं।

– गेहूं ,बाजरे या ओटस के दलिये में दूध व थोड़ी चीनी मिलाकर ले सकते हैं या इनमें हरी सब्जियां डालकर नमकीन दलिये के रूप में खा सकते हैं।
– बेसन, सूजी, मूंग की दाल का चीला ले सकते हैं। चीले नान स्टिक तवे पर थोड़ा तेल लगाकर बनाएं। इसमें चाहे तो गाजर,प्याज,घर का दूध फाड़कर पनीर, मटर पीस कर, टमाटर, धनिया, पालक, हरी मिर्च डालकर भी बना सकते हैं जिसे धनिए,पुदीने की चटनी की चटनी के साथ खा सकते हैं।

– स्प्राउटस पर खीरा, टमाटर, किशमिश, नारियल डालकर चाट बनाकर खा सकते हैं।n हरी सब्जियां मिलाकर इडली, पोहा या उपमा खा सकते हैं।

– मल्टीगे्रन ब्रेड के सैंडविच खीरे, टमाटर, पनीर वाले खा सकते हैं। सैंडविच पर हल्की सी टोमेटो सॉस और हरी चटनी लगाकर भी खा सकते हैं। उठने के डेढ़ से दो घंटे के अंदर ब्रेकफास्ट कर लेना चाहिए। डायबिटीज के रोगियों को प्रात: उठते ही फ्रेश होकर कुछ ले लेना चाहिए।

लंच क्या लें : शाकाहारी भारतीय लंच ही सेहत के लिए अच्छा होता है क्योंकि यह पौष्टिकता के आधार पर पूर्ण भी होता है।

– लंच में एक छोटी प्लेट सलाद, एक कटोरी दही, एक कटोरी दाल व चोकर युक्त आटे की चपाती लेें। अगर चावल खाने के शौकीन हैं तो चपाती न लें।

– खाने के बाद एक फल ले सकते हैं और अंत में छोटी टुकड़ी गुड़ की लें।

– खाना खाने से थोड़ा पहले सलाद खा लें।

शाम की चाय और स्नैक्स : शाम को 5 बजे के करीब एक कप चाय के साथ स्नैक्स लेने जरूरी हैं ताकि रात्रि तक ऊर्जा बनी रहे और थकान भी महसूस न हो।

– अगर चाय नहीं पीते तो शकरकंदी, भुने चने और गुड़, फल, स्प्राउटस ले सकते हैं।n एक मुट्ठी सूखे मेवे भी ले सकते हैं।
– चाय पीने वाले एक कप चाय के साथ 2 मेरी बिस्किट ,भुना नमकीन आधी कटोरी ले सकते हैं।

डिनर क्या लें : डिनर में खाने की मात्रा कम लें और सुपाच्य खाना खाएं ताकि रात्रि में पेट में भारीपन,गैस की समस्या न हो।

– रात्रि में एक चपाती या दो छोटी चपातियां हरी पत्तेदार या हरी सब्जी के साथ लें। थोड़ा सलाद लें।

– डिनर के बाद मीठा खाने का मन हो तो आधी कटोरी सूजी की खीर, एक पीस चाकलेट,छोटा मिठाई का टुकड़ा या थोड़ा सा गुड़ ले सकते हैं।

– रात्रि में दही,मूली,चावल का परहेज सेहत के लिए अच्छा होता है।

– रात्रि में दाल का सेवन भी न करें। –




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