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पेट,कमर और पीठ की तकलीफ से निजात दिलाएंगे ..योग के ये आसन


पेट,कमर और पीठ की तकलीफ से निजात दिलाएंगे ..योग के ये आसन

देश में अमूमन हर शख्स पेट, कमर और पीठ की तकलीफ से जूझ रहा है। इसकी वजह है अपने दैनिक जीवन में व्यायाम से दूरी। लेकिन आप घर ही योग के माध्यम से इन तकलीफों से निजात पा सकते हैं। तो चलिए हम आज आपको घर बैठे योग के आसान आसन बताते हैं जिससे आप इन तकलीफों से राहत पा सकते हैं। 

यदि आपका पेट थुलथुल हो रहा है, कमर मोटी हो चली है या पीठ दुखती रहती है, तो योग की यह हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। इस एक्सरसाइज के नियमित अभ्यास करते रहने से निश्चितरूप से जहां पेट फ्लैट हो जाएगा वहीं कमर भी छरहरी हो जाएगी।

ऐसे करें-


दोनों पैरों को थोड़ा खोलकर सामने फैलाए। दोनों हाथों को कंधों के समकक्ष सामने उठाकर रखें। फिर दाहिनें हाथ से बाएं पैर के अंगूठे को पकड़े एवं बाएं हाथ को पीछे की ओर ऊपर सीधा रखें, गर्दन को भी बाईं ओर घुमाते हुए पीछे की ओर देखने का प्रयास करें। इसी प्रकार दूसरी ओर से करें। इन दोनों अभ्यासों से कमर दर्द व पेट स्वस्थ होता है तथा कमर की बढ़ी हुई चर्बी दूर होती है, परन्तु जिनको अत्यधिक कमर दर्द है वे इस अभ्यास को न करें। 

दोनों हाथों से एक दूसरे हाथ की कलाई पकड़कर ऊपर उठाते हुए सिर के पीछे ले जाएं। श्वास अन्दर भरते हुए दाएं हाथ से बाएं हाथ को दाहिनी ओर सिर के पीछे से खीचें। गर्दन व सिर स्थिर रहे। फिर श्वास छोड़ते हुए हाथों को ऊपर ले जाएं। इसी प्रकार दूसरी ओर से इस क्रिया को करें।

घुटने और हथेलियों के बल बैठ जाएं। जैसे बैल या बिल्ली खड़ी हो। अब पीठ को ऊपर खिठचें और गर्दन झुकाते हुए पेट को देखने का प्रयास करें। फिर पेट व पीठ को नीचे खिंचे तथा गर्दन को ऊपर उठाकर आसमान में देंखे। यह प्रक्रिया 8-12 बार करें।

आहार संयम : सर्वप्रथम तो अपना आहार बदलें। पानी का अधिकाधिक सेवन करें, ताजा फलों का रस, छाछ, आम का पना, जलजीरा, बेल का शर्बत आदि तरल पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करें। ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, खीरा, संतरा तथा पुदीने का भरपूर सेवन करें तथा मसालेदार या तैलीय भोज्य पदार्थ से बचें। हो सके तो दो भोजन कम ही करें।
योगासन : प्रतिदिन सवेरे सूर्य नमस्कार का अभ्यास करें। कपालभाति और भस्त्रिका के साथ ही अनुलोम-विलोम करें। खड़े होकर किए जाने वाले योगासनों में त्रिकोणासन, कटिचक्रासन, ताड़ासन, अर्धचंद्रासन और पादपश्चिमोत्तनासन करें।
बैठकर किए जाने वाले आसनों में उष्ट्रासन, अर्धमत्स्येंद्रासन, सिंहासन, समकोणासन, ब्रम्ह मुद्रा और भारद्वाजासन करें। लेटकर किए जाने वाले आसनों में नौकासन, विपरीत नौकासन, भुजंगासन, धनुरासन और हलासन करें। बंधों में जालंधर और उड्डियान बंध का अभ्यास करें।


कमर दर्द और पेट की समस्या से छुटकारा दिलाता है यह योग

शलभासन योग, पेट की समस्या से छुटाकारा पाने में बेहद फायदेमंद आसन है। इसके नियमित अभ्यास से वजन कम किया जा सकता है। इसके अलावा रीढ़ की हड्डी और पीठ की मजबूती के लिए यह आसन बेहद कारगर है। इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर की स्थिति शलभ कीट के आकार की होती है, इसलिए इसे शलभासन नाम दिया गया है। अंग्रेजी भाषा में इसे लॉट्स पोज कहा जाता है। आइए आज हम आपको शलभासन करने की विधि और इसके फायदों के बारे में बताते हैं।

ऐसे करें शलभासन : इस आसन के अभ्यास के लिए सबसे पहले जमीन पर एक चटाई बिछाकर पेट के बल लेट जाएं। अपने दोनों हाथों को जांघाओं के बराबर में सीधा करके के रखें। अपनी गर्दन ऊपर की ओर उठाएं, आपकी ठोडी जमीन पर टिकी होनी चाहिए। अब सांस अंदर लेते हुए पैरों को धीरे-धीरे बिना मोड़े ऊपर की ओर उठाने की कोशिश करें। अब आप शलभासन की पोजिशन में हैं। जितना हो सके इस स्थिति में रुकें। अब सांस बाहर छोड़ते हुए धीरे-धीरे पैरों को नीचे लाएं। शुरुआत में इस आसन का अभ्यास 3 से 4 बार करें, धीरे-धीरे अभ्यास का अंतराल सुविधानुसार बढ़ा सकते हैं।

शलभासन के फायदे
– इस आसन के नियमित अभ्यास से पेट की कई समस्याओं में फायदा होता है।
– पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए यह आसन बेहद कारगर साबित होता है।
– जो लोग कमर दर्द की समस्या से परेशान हैं, उनके लिए इस आसन का अभ्यास लाभदायक होता है।
– अस्थमा के रोगियों के लिए भी यह आसन फायदेमंद होता है।
– शलभासन का अभ्यास करने से कब्ज की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
– इस आसन के नियमित अभ्यास से बल्ड सर्कुलेशन ठीक होता है।
– इसके अभ्यास से शरीर लचीला और मजबूत बनता है।
– यह आसन साइटिका को ठीक करने के लिए अहम भूमिका निभाता है।
– वजन कम करने के लिए भी शलभासन बेहद लाभकारी साबित होता है। यह बेली फैट को कम करने में मददगार होता है।
– डायबिटीज रोगियों के लिए भी यह आसन लाभकारी होता है। यह पैंक्रियास को नियंत्रण करता है और मधुमेह के प्रबंधन में सहायक है।
– इस आसन के नियमित अभ्यास से गैस की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।



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