Header Ads

उत्तान पादासन से तुरंत पेट अंदर


उत्तान पादासन से तुरंत पेट अंदर

आधुनिकता की अंधी दौड़ में खान-पान, रहन-सहन, आचार-विचार और जीवन पद्धति के विकृत हो जाने से आज सारा समाज अनेक प्रकार के रोगों से ग्रस्त हैं। खासकर वह अपच, कब्ज, मोटापा, तोंद और अन्यपेट संबंधी बीमारियों से परेशान हो गया है। सभी के निदान के लिए लिए योग ही एकमात्र उपाय है। यहां प्रस्तुत है पेट को अंदर करने के लिए अचूक आसन उत्तान पादासन।

सावधानी : जब कमर में दर्द तथा मांसपेशियों में ऐंठन की शिकायत हो, उस समय इस आसन का अभ्यास नहीं करें। गर्भावस्था के दौरान महिलाएं अभ्यास न करें।

इस आसन को स्त्री पुरुष समान रूप से कर सकते हैं। छह सात वर्ष के बालक-बालिकाएं भी इसे कर सकते हैं। यह बहुत आसान आसन है एवं अधिक लाभदायक है। करने की शर्त यह कि आपको पेट और कमर में किसी प्रकार का कोई गंभीर रोग न हो। यदि ऐसा है तो किसी योग चिकित्सक से पूछकर करें। 

पहली विधि : पीठ के बल भूमि पर चित्त लेट जाएं। दोनों हथेलियों को जांघों के साथ भूमि पर स्पर्श करने दें। दोनों पैरों के घुटनों, एड़ियों और अंगूठों को आपस में सटाए रखें और टांगें तानकर रखें।

अब श्वास भरते हुए दोनों पैरों को मिलाते हुए धीमी गति से भूमि से करीब डेढ़ फुट ऊपर उठाएं अर्थात करीब 45 डिग्री कोण बनने तक ऊंचे उठाकर रखें। फिर श्वास जितनी देर आसानी से रोक सकें उतनी देर तक पैर ऊपर रखें।

फिर धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए पांव नीचे लाकर बहुत धीरे से भूमि पर रख दें और शरीर को ढीला छोड़कर शवासन करें।

आसन अवधि : इस आसन का प्रात: और संध्या को खाली पेट यथाशक्ति अभ्यास करें। जब आप श्वास को छाती में एक मिनट से दो तीन मिनट तक रोकने का अभ्यास कर लेंगे तब आपका आसन सिद्ध हो जाएगा।

https://www.healthsiswealth.com/
इसका लाभ :
*इसके अभ्यास से पेट और छाती का थुलथुलापन, पेडू का भद्दापन दूर हो जाता है।
* पेट के स्नायुओं को बड़ा बल मिलता है जिससे कद बढ़ता है।
* इसे कहते रहने से पेट कद्दू की तरह कभी बड़ा नहीं हो सकता।
* यह आसन पेट का मोटापा दूर करने के अतिरिक्त पेट की आंतें सुदृढ़ कर पाचन शक्ति को बढ़ाता है।
* इस आसन के नियमित अभ्यास से गैस और अपच का नाश होता है।
* पूराने से पुराना कब्ज का रोग दूर होता है और खूब भूख लगती है।
* उदर संबंधी अनेक रोक नष्ट होते हैं।
* नाभि केंद्र जो बहत्तर हजार नाड़ियों का केंद्र है। उसे ठीक करने के लिए उत्तान पादासन सर्वश्रेष्ठ है।
* इसके अभ्यास द्वारा नाभि मंडल स्वत: ही ठीक हो जाता है।
*यदि नाभि जगह से हट गई हो तो गिरी हुई धरण पांच मिनट उत्तान पादासन करने से अपने सही स्थान पर आ जाती है।

दूसरी विधि : पीठ के बल भूमि पर चित्त लेटें। दोनों हाथों को नितम्बों से लगाकर कमर के ऊपर तथा नीचे का हिस्सा भूमि से लगभग एक फुट उपर उठाएं। केवल कमर का हिस्सा जमीन पर लगा रहे। इसमें संपूर्ण शरीर को कमर के बल पर तौलते हैं। जिसका प्रभाव नाभि स्थान पर अच्छा पड़ता है।

इस आसन से लाभ :
* मोटापा दूर करने के लिए यह रामबाण है।
* महिलाएं प्रसव के बाद स्वाभाविक स्थिति में आने के बाद करें तो पेडू का भद्दापन दूर हो सकता है।
* इस आसन के करने से हार्निया रोग नहीं होता। जिन्हें हार्निया हो भी गया हो तो इस आसन से यह रोग दूर हो जाता है।
* इससे घबराहट दूर हो जाती है। दिल की धड़कन, श्वास फूलना, आदि रोग भी दूर हो जाते हैं।
* सामान्य रूप से दस्त, पेचिश, मरोड़, खूनी दस्त, नसों की खराबी, आंत्र वृद्धि, जलोदर, पेट दर्द, कब्ज, फेफड़ों के रोग आदि अनेक रोग दूर होते हैं।


https://www.healthsiswealth.com/




पेट-पीठ को स्वस्थ बनाए उष्ट्रासन
https://www.healthsiswealth.com/


वर्तमान युग में हममें से अधिकांश व्यक्तियों की आम शिकायत या तो पीठ के बारे में होती है या पेट के बारे में। उष्ट्रासन के नियमित अभ्यास से इन दोनों परेशानियों से हम बच सकते हैं। 

उष्ट्रासन, वज्रासन समूह का आसन कहलाता है, क्योंकि यह आसन करने हेतु हमें सर्वप्रथम वज्रासन लगाना पड़ता है। वज्रासन लगाने के बाद घुटनों के बल खड़े हो जाते हैं। इसके पश्चात दोनों हाथों को सामने की ओर से ऊपर ले जाते हुए पीछे की ओर लाते हैं एवं उन्हें दोनों पैरों के टखनों के पास रखते हैं। टखनों के पास जब दोनों हाथों को रखते हैं तो ध्यान रखें कि हाथों के अँगूठे अंदर की ओर तथा चारों उँगलियाँ बाहर की ओर एक-दूसरे से सटी रहें। अंतिम अवस्था में पैरों की उँगलियाँ अंदर की ओर मुड़ी रहेंगी, दोनों हाथ टखनों पर रहेंगे, गर्दन तथा शरीर यथासंभव पीछे की ओर झुका रहेगा। साँस सामान्य रूप से चलती रहेगी। 

इस आसन के लाभ ही लाभ हैं। गर्दन में स्थित थॉयरॉयड ग्रंथि का व्यायाम होता है। मेरूदंड स्वस्थ रहता है, जिससे पीठ के दर्द से छुटकारा मिलता है। अमाशय ठीक तरह से काम करता है, जिससे पेट के विकार दूर होते हैं। इस आसन से गर्दन, पेट और कमर में जमा अनावश्यक चर्बी दूर होती है और ये अंग सुडौल बनते हैं। कुछ लोगों को वज्रासन करते समय प्रारंभ में दर्द हो सकता है, अतः वे वज्रासन में बैठने का समय धीरे-धीरे बढ़ाएँ। कुछ समय बाद यह दर्द जाता रहेगा।


पॉजीटिव सोच के लिए कपालभाति योग करें
https://www.healthsiswealth.com/


एकांत में और आराम की स्थिति में किया जाने वाला योग है कपालभाती। इसे किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं। 

लाभ

डायबिटीज, जोड़ों का दर्द, आर्थराइटिस, सांस व पेट संबंधी रोग, कब्ज, मोटापा व तनाव जैसी बीमारियों को दूर करने के साथ ही सकारात्मक सोच विकसित होती है। दिल के रोगियों को धीमी गति से इस योग को करना चाहिए। 

कब करें 

यह योग खाली पेट सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद 10-15 मिनट के लिए कर सकते हैं। इसे खाने के तुरंत बाद न करके 3 से 4 घंटे बाद शांत वातावरण व खुली हवा में आसन पर बैठकर करें। इस योग को जल्दबाजी में न करके क्रमानुसार ही करना चाहिए। 

कैसे करें

https://www.healthsiswealth.com/
पालथी मारकर आसन पर बैठें। कमर सीधी रखें। हाथ घुटनों पर व हथेली ऊपर की ओर रखें। तर्जनी अंगुली को अंगूठे से मिलाएं। 3-4 मिनट तक नाक से सांस झटके से छोड़ें। पेट अंदर जाएगा। थकने पर आंखे बंद करें व नाक पर ध्यान केंद्रित कर दोहराएं






परफेक्ट फिगर के लिए करें त्रिकोणासन
https://www.healthsiswealth.com/


यह आसन खड़े होकर किया जाता है। इस आसन में शरीर में अलग-अलग तीन कोण बनते हैं, इसलिए इसको त्रिकोणासन कहा जाता है।

विधि- खड़े होकर दोनों पैरो को अधिक से अधिक साइड में फैला दे। पैरों के पंजे सामने की ओर रहेंगे। अब दोनों हाथों को कन्धों के समानांतर साइड में उठा लें। लंबी-गहरी सांस भरें और सांस निकालते हुए कमर को बाई तरफ घुमाएं और आगे की ओर झुककर, उल्टे हाथ से सीधे पैर के पंजे को छूने की कोशिश करें। यदि पंजा आसानी से छू पाएं, तब हाथ की हथेली को पैर के पंजे के बाहर की तरफ ज़मीन पर टिका दें। साथ ही सीधा हाथ कंधे की सीध में आकाश की तरफ उठायें और ऊपर की ओर अधिक से अधिक खींचे। नीचे वाला हाथ नीचे की तरफ और ऊपर वाला हाथ ऊपर की तरफ खिंचा रहेगा। गर्दन को ऊपर की तरफ घुमाकर ऊपर वाले हाथ की ओर देखें। सांस की गति सामान्य रखते हुए इस आसन में यथाशक्ति रुके रहें। फिर सांस भरते हुए धीरे से वापस आ जाएं। इसी प्रकार दूसरी ओर बदलकर करें। दोनों ओर यह आसन तीन से चार बार कर लें।

सावधानियां- जितना आराम से कमर को आगे झुकाकर मोड़ सके उतना ही करें। जल्दबाजी और झटके से बचें। गर्दन दर्द, कमर दर्द, साईटिका दर्द, ऑस्टियोपोरोसिस में इसका अभ्यास न करें। साथ ही माईग्रेन, हाईपर एसिडिटी व हाई ब्लड प्रेशर में भी इसका अभ्यास न करें।


https://www.healthsiswealth.com/

लाभ- यह आसन कमर व गर्दन की मांशपेशियों को लचीला बनाकर उसकी ताकत को बढ़ाने वाला है। इसके अभ्यास से पैरों, घुटनों, हैमस्ट्रिंग, पिंडलियों, हाथों, कन्धों व छाती की मांशपेशियां लचीली बनी रहती हैं। कूल्हे की हड्डी को मज़बूती देने वाला है त्रिकोणासन। पाचन तंत्र को बल मिलता है, कब्ज, गैस व डायबटीज़ को दूर करने वाला है। इसके निरंतर अभ्यास से शरीर पर चढ़ी हुई अनावश्यक चर्बी कम होने लगती है, जिससे मोटापा दूर होता है और शरीर सुडौल बना रहता है। यह शरीर की जकड़न-अकड़न को दूर कर पूरे शरीर में लचीलापन प्रदान करता है और शरीर को हल्का कर देता है। नर्वस सिस्टम को स्वस्थ कर यह आसन मन व मस्तिष्क को बल देने वाला है। बच्चों की लम्बाई को बढ़ाने में भी विशेष सहायक है।

दिमाग बनाना हो तेज तो नियमित करें योग
https://www.healthsiswealth.com/


एक अध्ययन में पता चला है कि प्रतिदिन योग करना वयस्कों के लिए दिमाग को स्वस्थ और तरोताजा बनाए रखने में सहायक है। युवावस्था में दिमाग में रक्त का प्रवाह और संज्ञानात्मक कार्य अपने उच्चस्तर पर होता है। योग से होने वाले 20 सर्वोत्तम स्वास्थ्य लाभ एक अध्ययन के तहत 52 युवियों पर किए गए शोध में पता चला है कि दिमाग के अच्छे स्वास्थ्य और सुचारू रूप से काम करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की उपलब्धता उन वयस्कों में उच्चस्तर पर होती है, जो प्रतिदिन नियमित रूप से योग करते हैं। 

न्यूजीलैंड में युनिवर्सिटी ऑफ ओटैगो में मनोविज्ञान की वरिष्ठ प्रवक्ता लियाना मैचाडो ने कहा, "हमारे शोध के अनुसार, नियमित रूप से शारीरिक योग करने से दिमाग भी सुचारू रूप से काम करता है। यह खासकर युवाओं के लिए फायदेमंद है।" जर्नल साइकोफिजियोलॉजी में प्रकाशित हुए शोध के अनुसार, नियमित योग से दिमाग में रक्त का प्रवाह और संज्ञानात्मक कार्य सुचारू रूप से चलते रहते हैं। नियमित रूप से 30-45 मिनट के लिये योग करने से आपके दिमाग के स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। यह आपके मूड को भी ठीक करता है। योग से नई तन्त्रिका कोशिकोओं के निर्माण होता है जिससे अल्ज़ीमर्स और पार्किन्सन्स जैसी बीमारियाँ दूर ही रहती हैं। योग से जीवन के उत्तरार्ध में विकसित होने वाले पागलपन जैसे लक्षणों से भी बचा जा सकता है। यही नहीं योग द्वारा आने वाले शाँति के अहसास से लगातार आने वाली चिन्ताये दूर होती हैं और आत्मविश्वास के बढ़ने से दिमाग से परेशानियाँ दूर होती हैं।


फेंफड़े शुद्ध करने के योगा टिप्स
https://www.healthsiswealth.com/


व्यक्ति प्राकृतिक श्वास लेना भूल गया है। प्रदूषण और तनाव के कारण उसकी श्वास उखड़ी-उखड़ी और मंद हो चली है। यहां प्रस्तुत है श्वास को शुद्ध करने के योगा टिप्स।

1.जहां भी प्रदूषण भरा माहौल हो वहां केवली प्राणायाम करने लगें और उस प्रदूषण भरे माहौल से बच निकलने का प्रयास करें। यदि रूमाल साथ रखते हैं तो केवली की आवश्यकता नहीं।

2.बदबू से बचें, यह उसी तरह है जिस तरह की हम खराब भोजन करने से बचते हैं। बेहतर इत्र या स्प्रे का इस्तेमाल करें। श्वासों की बदबू के लिए आयुर्वेदिक इलाज का सहारा ले सकते हैं।

3.क्रोध, राग, द्वैष या अन्य नकारात्मक भाव के दौरान नाक के दोनों छिद्रों से श्वास को पूरी ताकत से बाहर निकाल कर धीरे-धीरे पेट तक गहरी श्वास लें। ऐसा पांच बार करें।

4.अपनी श्वासों पर विशेष ध्यान दें कि कहीं वह उखड़ी-उखड़ी, असंतुलित या अनियंत्रित तो नहीं है। उसे सामान्य बनाने के लिए अनुलोम-विलोम कर लें।

5.पांच सेकंट तक गहरी श्वास अंदर लेकर उसे फेंफड़ों में भर लें और उसे 10 सेकंट तक रोककर रखें। 10 सेकंट के बाद उसे तब तक बाहर छोड़ते रहें जब तक की पेट पीठ की तरफ ना खिंचाने लगे।

https://www.healthsiswealth.com/
6.नाक के छिद्रों का हमेशा साफ-सुधरा रखें। चाहें तो जलनेती या सूतनेती का सहारा ले सकते हैं।

7.सुगंध भी प्राकृतिक भोजन है। समय-समय पर सभी तरह की सुगंध का इस्तेमाल करते रहने से मन और शरीर में भरपूर उर्जा का संचार किया जा सकता है।

उचित, साफ, स्वच्छ और भरपूर हवा का सेवन सभी तरह के रोग और मानसिक तनाव को दूर कर उम्र को बढ़ाता है।




कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.