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डिलीवरी के कितने दिन बाद से पीरियड होना चाहिए



डिलीवरी के कितने दिन बाद से पीरियड होना चाहिए

अगर आप अपने शिशु को स्तनपान नहीं कराती हैं तो इस स्थिति में 4 से 6 सप्ताह के अंदर अंदर आपके पीरियड फिर से शुरू हो सकते हैं। लेकिन अगर आप अपने शिशु को ब्रेस्ट फीडिंग करवा रही हैं तो इस स्थिति में आप का महावारी चक्र फिर से शुरू होने में 6 महीने तक का समय लग सकता है। यह भी हो सकता है कि जब तक आप शिशु को स्तनपान कराना जारी रखें तब तक आप पर महावारी चक्र फिर से शुरू ना हो।

शिशु के जन्म की बात अक्सर माताओं के मन में यह सवाल आता है कि उनकी महावारी कब से शुरू होगा। महिलाओं में मासिक धर्म चक्र की वापसी कई कारणों से प्रभावित होती है - उदाहरण के लिए यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप अपने शिशु को स्तनपान करा रहे हैं या नहीं। 

अगर स्तनपान कराती है तो कितनी मात्रा में। लेकिन अधिकांश मामलों में प्रसव के बाद चार सप्ताह से लेकर 6 महीने के बीच में कभी भी फिर से मानसिक धर्म चक्र शुरू हो सकता है। 

इस लेख में हम आपको देंगे महावारी यानी पीरियड से संबंधित आपकी हर सवालों के जवाब। 
इस लेख में:
सिजेरियन डिलीवरी के बाद मासिक धर्म चक्र आने में कितना समय लगता है?

मानसिक धर्म शुरू ना होने पर कब डॉक्टर से मिले

क्या डिलीवरी के बाद महावारी शुरू होने से पहले फिर से प्रेग्नेंट हो सकती है?

क्या स्तनपान गर्भनिरोधक का तरीका है?

प्रसव के बाद समस्या - मासिक चक्र में बदलाव

अनियमित मासिक धर्म के कारण और उपचार

डिलीवरी के बाद मासिक धर्म ना होने के गंभीर कारण

डिलीवरी बाद मानसिक धर्म में निम्न लक्षण दिखें तो डॉक्टर से संपर्क करें

डिलीवरी के बाद First Period में निम्न बातों का ध्यान रखें

महावारी से पहले गर्भधारण की संभावना

स्तनपान कराने वाली महिलाओं में महावारी


सिजेरियन डिलीवरी के बाद मासिक धर्म चक्र आने में कितना समय लगता है?

डिलीवरी के बाद फिर से पीरियड शुरू होना इस बात पर निर्भर करता है कि क्या आप अपने शिशु को स्तनपान करा रही है या नहीं। अगर आप अपने शिशु को स्तनपान करा रही हैं तो प्रोलैक्टिन (Prolactin) हार्मोन जो आपके शरीर में दूध उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं यह आपके शरीर में ओव्यूलेशन (Ovulation) रुकता है जिससे फिर से मासिक धर्म शुरू होने में समय लगता है। 

जो महिलाएं शिशु के जन्म के बाद स्तनपान नहीं कराती हैं उनमें फिर से महावारी धर्म चक्र शुरू होने में चार हफ्तों से लेकर 8 हफ्तों तक का समय लगता है। यानी जो महिलाएं स्तनपान कराती हैं उनमें फिर से मानसिक धर्म शुरू होने में ज्यादा समय लगता है।
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मानसिक धर्म शुरू ना होने पर कब डॉक्टर से मिले

अगर आपकी शिशु की डिलीवरी के बाद 6 महीने से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन अभी भी मानसिक धर्म की शुरुआत नहीं हुई है तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। ऐसा भी देखा गया है कि कई महिलाएं जब तक स्तनपान कराती रहती है तब तक उनकी पीरियड शुरू नहीं होते हैं। 
क्या डिलीवरी के बाद महावारी शुरू होने से पहले फिर से प्रेग्नेंट हो सकती है?

कुछ महिलाओं के मन में यह सवाल आता है कि शिशु के जन्म के बाद फिर से दोबारा पीरियड शुरू होने से पहले क्या वे गर्भवती हो सकती है? शिशु के जन्म के बाद जब महिलाओं में लंबे समय तक मानसिक धर्म शुरू नहीं होता है तो वे इस दुविधा में पड़ जाती हैं कि कहीं भी फिर से गर्भवती तो नहीं हो गई है। 
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नार्मल डिलीवरी के बाद बार-बार यूरिन पास की समस्या

सिजेरियन डिलीवरी के बाद मालिश कितना सुरक्षित

लेकिन हम आपको यह बताना चाहेंगे कि ऐसा होने की पूरी संभावना रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि आपका शरीर पहले ओव्यूलेट (Ovulate- अण्डोत्सर्ग) करता है और फिर उसके बाद मानसिक धर्म होता है। 

लेकिन ऐसी परिस्थिति में जब आपका शरीर ओव्यूलेट (Ovulate- अण्डोत्सर्ग) किया है और आपने मानसिक धर्म से पहले ही संसर्ग करती है तो आपके द्वारा गर्भवती होने की पूरी संभावना है। यानी कि आप डिलीवरी के बाद फिर से पीरियड शुरू होने से पहले ही गर्भवती हो सकती है। 
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क्या स्तनपान गर्भनिरोधक का तरीका है?

कई महिलाएं स्तनपान को गर्भ निरोधक की तरह मानती है। वे यह मानते हैं कि जब तक वे अपने बच्चों को स्तनपान करा रही हैं तब तक वो फिर से दोबारा गर्भवती नहीं होगी। 


लेकिन यह मात्र एक मिथक धारणा है। अगर आप पहले शिशु के बाद तुरंत दूसरा शिशु नहीं चाहती है तो गर्भनिरोधक (जन्म नियंत्रण) के दूसरे तरीकों को अपनाएं जिनसे फिर से गर्भधारण को विश्वसनीय तरीके से नियंत्रित किया जा सके। 
लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए गर्भनिरोधक गोलियां लेना उचित नहीं है। गर्भनिरोधक गोलियां दूध बनने की प्रक्रिया में रुकावट डाल सकती है और इसका शिशु के भी कुछ प्रभाव पड़ सकता है। इसीलिए गर्भ निरोधक से संबंधित उचित उपाय के लिए डॉक्टर की सलाह लें। 
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प्रसव के बाद समस्या - मासिक चक्र में बदलाव

मानसिक धर्म या आपकी पीरियड में प्रसव के बाद कुछ परिवर्तन आ सकते हैं या यह भी हो सकता है कि पहले और बाद के मासिक चक्र में आपको कोई बदलाव देखने को ना मिले। 


आपका मानसिक धर्म अधिक या कम हो सकता है यहां तक कि आपका मानसिक चक्र भी लंबा या छोटा हो सकता है। मानसिक धर्म के दौरान होने वाले तकलीफ और ऐठन का अनुभव भी ज्यादा और कम हो सकता है। 
प्रसव पूर्व और प्रसव के बाद के मानसिक धर्म में दर्द की भी मात्रा अधिक या कम हो सकती है। इसलिए होता है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान आपका गर्भाशय वह चुका होता है। 

जब बच्चे की डिलीवरी हो जाती है तब गर्भाशय फिर से सिकुड़ता है लेकिन फिर भी यह पूरी तरह से अपनी पहली वाली स्थिति में नहीं पहुंचता है और आकार में थोड़ा बड़ा होता है। 

साथ ही एक और गौर करने वाली बात है कि एंडोमेट्रियल अस्तर (Endometrial lining) जोकि पीरियड्स के दौरान खून के रूप में बाहर आता है उसे फिर से अपने आप को तैयार करने में समय लगता है। 

ऐसा इसलिए क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान या कई प्रकार के परिवर्तनों से गुजरता है - और एक बार जब शिशु का जन्म हो जाता है तब यह फिर से कुछ बदलावों से गुजरता है ताकि थोड़ा बहुत पहले जैसी स्थिति में पहुंच सके। 

इसीलिए यह संभव है कि हर स्त्री शिशु के प्रसव के बाद अपने मानसिक धर्म में कुछ परिवर्तन महसूस करें। इसके साथ ही अगर आप गर्भ धारण करने से पहले हार्मोनल गर्भ निरोधक (आईयूडी या गोलियों) का इस्तेमाल कर रही थी तो शिशु के जन्म के बाद आपकी मानसिक धर्म में रक्तस्राव की मात्रा अधिक हो सकती है। 

यह इस वजह से होता है क्योंकि हार्मोन अल गर्भनिरोधक एंडोमेट्रियल अस्तर (Endometrial lining) कि स्तर को पतला कर देता है। 
अनियमित मासिक धर्म के कारण और उपचार

डिलीवरी के बाद यानी शिशु के जन्म के बाद आप अपने मानसिक धर्म में अनियमितताएं अनुभव कर सकती हैं। कई बार ऐसा होता है कि प्रसव के बाद अनियमित अवधि तक पीरियड नहीं आते हैं। 

यह बिल्कुल भी सामान्य सी बात है और चिंता का विषय नहीं है क्योंकि डिलीवरी के बाद आपके शरीर में हार्मोन को फिर से सामान्य होने में थोड़ा समय लगता है, विशेषकर अगर आप अपने शिशु को स्तनपान कराती हैं। 

उदाहरण के लिए हो सकता है गर्भावस्था के बाद आपका पहला महावारी चक्र 24 दिन का हो, इसके बाद अगला 28 दिन का हो और फिर उसके बाद 35 दिनों का हो। 

एक बार जब आप अपनी शिशु को स्तनपान कराना बंद कर देती हैं तो कुछ महीनों में आप का महावारी चक्र फिर से स्थिर हो जाता है। 
डिलीवरी के बाद मासिक धर्म ना होने के गंभीर कारण

डिलीवरी के बाद मासिक धर्म में विलंब होना एक सामान्य बात है। लेकिन कई दुर्लभ घटनाओं में मानसिक धर्म का तरीका आप में किसी गंभीर परिस्थिति के लक्षण भी हो सकते हैं। 

उदाहरण के लिए अगर आप में शुरुआती महावारी में सामान्य से कहीं अधिक और ज्यादा ऐठन हो रहा है तथा रक्तस्राव भी सामान्य से ज्यादा हो रहा है तो यह चिंता का विषय हो सकता है। 

अगर आपको हर घंटे टैम्पोन या पैड बदलने की आवश्यकता पड़ रही है तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से इस विषय में परामर्श करना चाहिए। 

यह किसी संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं या गर्भाशय फाइब्रॉएड की ओर भी इशारा करते हैं। ऐसी परिस्थिति में आप डॉक्टर से एनीमिया या थाइरोइडरूल के लिए परामर्श कर सकती हैं। 

डिलीवरी बाद मानसिक धर्म में निम्न लक्षण दिखें तो डॉक्टर से संपर्क करें

प्रसव के बाद केवल शिशु को ही देखभाल की आवश्यकता नहीं पड़ती है वरन शिशु की माता की भी बहुत देखभाल की आवश्यकता होती है। अगर शिशु के जन्म के बाद आपको मानसिक धर्म में निम्न लक्षण दिखाई दें तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए
अगर आप की महावारी को 7 दिन से ज्यादा समय हो गए हैं और रक्त स्राव के समय रक्त के थक्के दिख रहे हो

मानसिक धर्म के फिर से शुरू होने के बाद महावारी ना हो

मानसिक धर्म के बीच में स्पॉटिंग हो

शिशु के जन्म के 3 महीने बाद भी अगर आपको मानसिक धर्म शुरू नहीं हुआ है या स्तनपान रोकने के 3 महीने बाद भी आपको मानसिक धर्म शुरू नहीं हुआ है तो

अगर आपको अपने में ऊपर दिए गए कोई भी लक्षण दिखे तो अपने डॉक्टर से इस विषय में बातचीत करें और उचित उपाय के लिए परामर्श ले। 


डिलीवरी के बाद First Period में निम्न बातों का ध्यान रखें
शिशु के जन्म के बाद शिशु के साथ साथ मां के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखने की आवश्यकता है। इस दौरान मां की सेहत बहुत नाजुक होती है। जन्म के बाद मां के शरीर में कई प्रकार के बदलाव होते हैं। आपको अपनी पहली माहवारी का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है क्योंकि इसमें भी बहुत बदलाव आता है। शिशु के जन्म के बाद आपकी पहली महावारी चक्र आपकी ब्रेस्ट फीडिंग पर भी निर्भर करती है। 

जैसा कि मैंने आपको ऊपर बताया, डॉक्टरों के अनुसार स्तनपान कराने वाली माताओं और स्तनपान नहीं कराने वाली माताओं के महावारी चक्र में बहुत अंतर होता है। अगर आप अपने शिशु को स्तनपान नहीं कराती हैं तो इस स्थिति में 4 से 6 सप्ताह के अंदर अंदर आपके पीरियड फिर से शुरू हो सकते हैं। लेकिन अगर आप अपने शिशु को ब्रेस्ट फीडिंग करवा रही हैं तो इस स्थिति में आप का महावारी चक्र फिर से शुरू होने में 6 महीने तक का समय लग सकता है। यह भी हो सकता है कि जब तक आप शिशु को स्तनपान कराना जारी रखें तब तक आप पर महावारी चक्र फिर से शुरू ना हो। 

इस दौरान फिर से प्रेगनेंसी की संभावना बहुत बढ़ जाती है। स्तनपान कराने वाली माताओं में कई पार्टी का किया है कितने महीने तक पीरियड्स नहीं होते हैं और फिर पता चलता है कि वह प्रेग्नेंट है। इसीलिए इस दौरान अगर आप गर्भवती फिर से नहीं होना चाहती हैं तो इस बात का ध्यान रखें। यह ना सोचे कि इस दौरान गर्भधारण नहीं हो सकता है। हालांकि गर्भधारण की संभावना कम होती है लेकिन होती है। स्तनपान के दौरान गर्भ निरोधक गोलियों का इस्तेमाल ना करें क्योंकि इसका प्रभाव आपके शिशु के पड़ सकता है साथ ही दूध के निर्माण में भी कमी आ सकती है। 


महावारी से पहले गर्भधारण की संभावना

जैसा कि मैंने आपको ऊपर बताया कि अगर आप में मानसिक धर्म अभी शुरू नहीं हुआ है तो इस भ्रम में मत रहिएगा कि आप गर्भवती नहीं हो सकती हैं। 
इस बात का ध्यान रखिएगा कि आपका शरीर शिशु के जन्म के बाद अपना पहला डिम्ब महावारी से पहले ही जारी कर देता है। इसका पता तब चलता है जब महावारी शुरू होती है। 

यानी कि आपके शरीर के डिम्ब जारी करने [ओव्यूलेट (Ovulate- अण्डोत्सर्ग)] के बाद और महावारी की शुरुआत से पहले आप संभोग करती हैं तो आपके दोबारा गर्भधारण की संभावना पूरी तरह तय हो जाती है।

इसीलिए अगर शिशु के जन्म के बाद आप संभोग करती हैं और फिर 6 महीने से पहले महावारी के शुरू होने से पहले गर्भ धारण कर लेती हैं तो आश्चर्यचकित होने की आवश्यकता नहीं है। 
स्तनपान कराने वाली महिलाओं में महावारी

स्तनपान कराने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप की महावारी दोबारा देर से शुरू होगी। इस दौरान आपके शरीर को पूरी तरह स्वस्थ होने का भी मौका मिल जाता है। अगर आप अपने शिशु को दिन रात स्तनपान करा रही हैं, और आपका शिशु अपने आहार के लिए पूरी तरह स्तनपान पर निर्भर है तो पूरी संभावना है कि 1 साल तक आपको कोई महावारी दर्द महसूस ही ना हो।


लेकिन अगर आप का शिशु रात को 8 घंटे पूरा सोने लगे और आपको अपने शिशु को रात के दौरान उसे स्तनपान कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती है तब इन परिस्थितियों में आपकी महावारी फिर से जल्द ही शुरू हो सकती है। इसमें आमतौर पर 3 से 8 महीने का समय लग सकता है। 

इसके अलावा अगर आप अपने शिशु को स्तनपान के साथ साथ फॉर्मूला मिल्क (डिब्बाबंद दूध) भी दे रही हैं, तो इस परिस्थिति में भी आपका मासिक चक्र जल्दी शुरू हो सकता है। 



स्तनपान की स्थितियां



यद्यपि स्तनपान आपके बच्चे को पोषण देने का एक प्राकृतिक तरीका है, यह भोजन करने का एक ऐसा तरीका है जिसे आप और आपके बच्चे दोनों को एक साथ सीखना होता है। इसमें समय, धैर्य और अभ्यास लगता है। अपने बच्चे को पकड़ने के विभिन्न तरीकों का प्रयोग करें।
स्तनपान की स्थितियां और स्थान

यद्यपि स्तनपान आपके बच्चे को पोषण देने का एक प्राकृतिक तरीका है, यह भोजन करने का एक ऐसा तरीका है जिसे आप और आपके बच्चे दोनों को एक साथ सीखना होता है। इसमें समय, धैर्य और अभ्यास लगता है।
धीमी गति और शांति से शुरूआत करें

आपके और आपके बच्चे के लिए क्या सबसे अच्छा काम करता है यह जानने में थोड़ा समय लग सकता है। सफलता के लिए अभ्यास और उचित स्थिति लगता है।
स्तनपान कराने के दौरान अपना बच्चा कैसे पकड़ें

स्तनपान कराने की अलग-अलग स्थितियों के साथ आपके द्वारा प्रयोग करने के बाद, आप दोनों के लिए सबसे अधिक आरामदायक स्थिति हो जो यहां तक पहुंचेंगी। आप प्रत्येक स्तन से पर्याप्त और एकसमान निकासी के लिए स्थिति को बदल भी सकती हैं। यहां आजमाने के लिए कुछ स्थितियां दी जा रही हैं:
पालना पकड़ (क्रेडल होल्ड)

1. सीधे बैठें और अपने बच्चे के मुंह को अपनी ओर रखते हुए अपनी गोद में लिटायें।


2. अपने बाहों से अपने बच्चे के सिर, पीठ और निचले भाग को सहारा दें, और फिर उसके चेहरे को अपने स्तन के पास ले जाएं।

3. अपने निप्पल से उसके मुंह या गाल को हल्कास्पर्शकराएं।

4. जब आपका बच्चा चूसना शुरू करता है, तो सुनिश्चित करें कि वह निप्पल और एरोला पर्याप्त रूप से अपने मुँह में ले ताकि वह ठीक से चूस सके।
फुटबॉल पकड़

यदि आपका प्रसव सिजेरियन विधि से हुआ होता है, स्तन बड़े आकार के हों, या यदि आप जुड़वा बच्चों को स्तनपान करा रही हों, तो यह स्थिति सबसे उपयोगी होती है।

1. अपने बच्चे को अपने हाथ में टिका लें (जिस तरह से एक फ़ुटबॉल खिलाड़ी एक गेंद को अपने हाथ में टिकाता है उस विधि को कापी करें)।

2. उसके सिर और गर्दन को अपने हाथ में पकड़ें। उसके पैरों को अपनी पीठ की तरफ फैलाएं।

3. अपने हाथ को सहारा देने के लिए एक तकिया का प्रयोग करें, और अपने बच्चे के मुंह को अपने स्तनों की तरफ घुमाने के लिए अपने खाली हाथ का उपयोग करें।
करवट लेटी हुई स्थिति

सिजेरियन प्रसव के बाद या यदि प्रसव के बाद आप पीड़ा में हैं, तो यह विशेष रूप से उपयोगी स्थिति है।

1. अपने बच्चे के मुंह को अपनी तरफ रखते हुए करवट लिटा कर अपनी करवट लेटें।
2. अपने बच्चे के सिर को अपने निचले स्तन पर स्थित करें।

3. जब वह आपके स्तन से जुड़ जाता हैं, तो उसके सिर को सहारा देने के लिए अपने निचले हाथ का उपयोग करें।

4. सुनिश्चित करें कि आप इस स्थिति में दूध पिलाते हुए सो न जाएं।
सार्वजनिक स्थानों में स्तनपान कराना


एक शांत स्थान पर दूध पिलाते समय आपके बच्चे के स्थिर रहने की अधिक संभावना होगी, और अधिक उम्र के बच्चे कम विचलित होंगे। अपने बच्चे को स्तनपान कराना एक सामान्य और स्वाभाविक बात है और आपके बच्चे को जब और कहीं भी इसकी जरूरत महसूस हो ऐसा करना आपका कानूनी अधिकार है। ज्यादातर मातायें बाहर जाने पर यह अनुमान लगाती हैं कि वे अपने बच्चों को कहाँ और कैसे दूध पिला सकती हैं, ताकि वे सहज रहें। यदि आप सार्वजनिक स्थानों में स्तनपान कराते समय असुविधाजनक या आत्म-सचेत महसूस करती हैं, तो अपने कंधे पर हल्का मलमल लपेट लें, ताकि इससे अपने स्तन और बच्चे को ढँक सकें।

यूं समझ लीजिए कि आप का शिशु जितना अधिक समय के लिए स्तनपान करेगा आपके लिए महावारी को दोबारा शुरू होने में उतना ही ज्यादा समय लगेगा।

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