Header Ads

लीवर • शराब से होने वाले नुकसान


लीवर •
शराब से होने वाले नुकसान 

यदि आप पार्टी, शादियों या फिर किसी इवेंट में शराब का ज्यादा सेवन करते हैं तो यह आपकी सेहत के लिए बिलकुल भी सही नहीं है। शराब से होने वाले नुकसान बहुत है जिसमें इम्यून सिस्टम को नुकसान और हड्डियों का कमजोर होना तथा सर्कुलेटरी सिस्टम को प्रभावित करता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इससे होने वाले नुकसान क्या है।


शराब से होने वाले नुकसान
शराब से हड्डियां हो सकती हैं कमजोर


बेहतर स्वास्थ्य और दिनचर्या के लिए हड्डि यों का मजबूत होना बेहद आवश्यक है, लेकिन हमारी लाइफस्टाल में ऐसे भी कुछ कारण हैं, जो हड्डिकयों को कमजोर करते हैं। शराब का ज्यादा और लंबे समय तक सेवन आपकी हड्डियों को कमजोर कर सकता है।


यह आदत आपकी हड्डियों को पतली बना सकती है और यदि आप गिर जाते हैं और फ्रैक्चर के जोखिम को बढ़ा सकती है। शराब पीने से मांसपेशियों को कमज़ोरी और ऐंठन का एहसास होता है। इसलिए कोशिश कीजिए कि आप इससे दूरी बनाकर रखें।
शराब से इम्यून सिस्टम को नुकसान


इम्यून सिस्टम पर्यावरण के हानिकारक प्रभावों से एक अभिभावक की तरह शरीर को बचाता है। स्वस्थ रहने के लिए इसका बढ़े रहना बहुत ही जरूरी है। लेकिन यदि आप शराब पीते हैं, तो यह कहीं न कहीं यह आपके स्वास्थ्य को जरूर खराब करता है।

शराब पीने से आपके शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली या इम्यून सिस्टम कम हो जाती है। इससे आपके शरीर के लिए हमला करने वाले रोगाणुओं और वायरस से लड़ने में अधिक कठिन हो जाता है और आपका शरीर बीमार होने लगता है।
शराब सर्कुलेटरी सिस्टम को करता है प्रभावित

सर्कुलेटरी सिस्टम, जिसे कार्डियोवस्कुलर सिस्टम या वैस्क्यूलर सिस्टम भी कहा जाता है, एक अंग प्रणाली है जो ब्लड को अनुमति देता है कि वह पोषक तत्वों (जैसे अमीनो एसिड और इलेक्ट्रोलाइट्स), ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और हार्मोन को सर्कुलेट और ट्रांसपोर्ट करे। शराब का ज्यादा सेवन आपके सिस्टम को खराब कर सकता है। शराब आपके दिल और फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है।


जो लोग शराब का सेवन बहुत ही पहले से कर रहे हैं, उनके लिए दिल से संबंधित समस्या का खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा जो महिलाएं शराब का सेवन करती हैं उनमें पुरुष के मुकाबले हृदय रोग विकसित होने की अधिक संभावना होती है।


जब सर्कुलेटरी सिस्टम प्रभावित होता है तो अनियमित दिल की धड़कन, शरीर के माध्यम से रक्त पंप करने में कठिनाई, आघात, दिल का दौरा, दिल की बीमारी और ह्रदय का रुक जाना आदि जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।
शराब शारीरिक संबंध को करे खराब



शराब का ज्यादा सेवन आपकी शारिरिक संबंध की स्थिति को खराब कर सकता है। ज्यादा शराब पीने से संबंध बनाने की इच्छा कम हो सकती है। जो पुरुष अधिक शराब पीते हैं उन्हें इरेक्टाइल डिसफंक्शन का सामना करना पड़ सकता है। इसे हम स्तंभन दोष या नपुंसकता के नाम से भी जानते हैं। यह आपकी शादीशुदा जिंदगी को बर्बाद करने के साथ-साथ आपके रिश्तों में भी दरारा पैदा कर सकता है।

इसके अलावा जो महिलाएं ज्यादा शराब पीती हैं उनका मासिक धर्म रुक सकता है। उनमें बांझपन का खतरा हो सकता है। यदि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं भारी मात्रा में शराब पीती हैं, तो समय से पहले डिलीवरी, गर्भपात, या जन्मजात दोष का अधिक जोखिम हो सकता है।
कैंसर का खतरा


जो लोग बहुत ज्यादा शराब का सेवन करते हैं उनमें कैंसर का खतरा हो सकता है। जो लोग अक्सर शराब पीते हैं उनमें मुंह, गले, कोलोन या लिवर में कैंसर विकसित करने की अधिक संभावना रखते हैं। जो लोग नियमित रूप से शराब पीते हैं और तम्बाकू का उपयोग करते हैं उनमें कैंसर की संभावना और अधिक होती है।
पाचन शक्ति को शराब करे खराब



पाचन तंत्र हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम जो भी खाना खाते है, पाचन तंत्र उसे पचाने का काम करता है और हमारे शरीर के लिए आवश्यक पौषक तत्व ले लेता है और फालतू पदार्थ बहार निकाल देता है। शराब का ज्यादा सेवन आपकी पाचन तंत्र को खराब कर सकता है।

वैसे शराब का सेवन और आपके पाचन तंत्र के बीच का कनेक्शन तुरंत स्पष्ट नहीं हो सकता है। इसके दुष्प्रभाव अक्सर नुकसान होने के बाद ही दिखाई देते हैं और जितना अधिक आप शराब पीते हैं, उतना बड़ा नुकसान होगा। शराब पीने से आपके पाचन तंत्र में ऊतकों को नुकसान हो सकता है और आपने आंतों को भोजन पचाने और पोषक तत्वों और विटामिन को अवशोषित करने से रोक सकता है। नतीजतन आपको कुपोषण हो सकता है।
पाचन एंजाइमों का असामान्य सक्रियता


बहुत अधिक शराब पीने से अग्न्याशय या पेनक्रियाज द्वारा उत्पादित पाचन एंजाइमों का असामान्य सक्रियता हो सकता है। इन एंजाइमों का निर्माण अग्नाशयशोथ या पैनक्रियाटिटिस के रूप में जाना जाने वाला सूजन हो सकता है। पैनक्रियाटिटिस लंबी अवधि की स्थिति बन सकती है और गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।
डायबिटीज या मधुमेह की संभावना


अग्न्याशय या पेनक्रियाज आपके शरीर के इंसुलिन के उपयोग और ग्लूकोज की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है। जब आपका पेनक्रियाज और लिवर ठीक से काम नहीं करते, तो आप निम्न ब्लड शुगर या हाइपोग्लाइसेमिया के जोखिम का सामना कर सकते हैं। डैमेज पेनक्रियाज भी शुगर का उपयोग करने के लिए शरीर को पर्याप्त इंसुलिन बनाने से रोका जा सकता है। यह हाइपोग्लाइसेमिया का कारण बन सकता है।

यदि आपका शरीर आपके रक्त शर्करा या ब्लड शुगरके स्तर का प्रबंधन और संतुलन नहीं कर सकता है, तो आपको मधुमेह से संबंधित अधिक जटिलताओं और साइड इफेक्ट्स का अनुभव हो सकता है। इसलिए मधुमेह या हाइपोग्लाइसीमिया वाले लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह अत्यधिक मात्रा में अल्कोहल पीने से बचें।
शराब केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को करता है प्रभावित


इन सबके अलावा यदि आप शराब का ज्यादा सेवन करते हैं तो यह आपके केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करता है। अल्कोहल आपके मस्तिष्क और आपके शरीर के बीच संचार कम कर सकता है। यह समन्वय को और अधिक कठिन बनाता है।


आपके लिए संतुलन बनाना कठिन हो जाता है। इसलिए शराब पीने के बाद ड्राइव नहीं करनी चाहिए। शराब पीने से आपके दिमाग के लिए दीर्घकालिक यादें बनाने में भी मुश्किल होती है। यह स्पष्ट रूप से सोचने और तर्कसंगत विकल्प बनाने की आपकी क्षमता को कम कर देता है।

घरेलू नुस्खे - घरेलू उपचार • लीवर
लिवर का रामबाण इलाज 

स्वस्थ लिवर का फंक्शन स्वस्थ होने का एक संकेत है। यदि आपको अपने लिए लिवर को स्वस्थ रखना है, तो आपको अपने आहार में एंटी-इंफ्लेमेटरी खाद्य पदार्थ को शामिल करना चाहिए। आप अपने आहार में खट्टे खाद्य पदार्थ, पत्तेदार साग, जूस, सब्जियां, एंटीऑक्सिडेंट वाले फल, स्थानीय कच्ची शहद, नारियल का तेल, और सेब का सिरका, नींबू, पालक, अजमोद, जामुन, अनार और लहसुन को शामिल कीजिए।

ये खाद्य पदार्थ आपके लिवर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से लड़ने और लिवर या जिगर एंजाइमों के स्राव को बढ़ावा देने में मदद करते हैं ताकि आपके लिवर शरीर से विषाक्त पदार्थ को निकाला सके।

लिवर का रामबाण इलाज
लिवर की कमजोरी का इलाज है हल्दी

हल्दी को सबसे ताकतवर मसालों के रूप में जाना जाता है। हल्दी हर भारतीय परिवारों की स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में सक्षम है अब चाहे वह लिवर की ही समस्या क्यों न हो। आपके लिवर के स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए हल्दी अत्यंत उपयोगी हो सकता है। इसमें एंटीसेप्टिक गुण हैं और यह एंटीऑक्सिडेंट के रूप में भी कार्य करता है। हल्दी हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी के कारण उत्पन वायरस को रोक सकता है। आप हल्दी को खाना पकाने के दौरान शामिल कर सकते हैं या इसे दूध के साथ मिकालर पी सकते हैं।
लिवर का रामबाण इलाज है सेब का सिरका


वजन घटाने, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने, ब्लड शुगर को स्थिर करने, त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ाने देने और एसिडिटी के लक्षणों से राहत में सेब का सिरका बहुत ही काम आता है। ऐप्पल साइडर सिरका जिसे हम सेब का सिरका भी कहते हैं। लिवर की विषाक्तता को दूर करने में मदद करता है। ऐसे बहुत से तरीके हैं जिसकी सहायता से आप सेब के सिरके का सेवन कर सकते हैं। आप एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका और शहद को मिलाकर पीजिए। इसे आप दिन में दो से तीन बार पी सकते हैं। यह लिवर को साफ करने में मदद कर सकता है।
पालक और गाजर का रस

पालक खाने से आपके स्वास्थ्य को बहुत् फायदे मिलते हैं। लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि अधिक मात्रा में पालक खाने से आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर भी पड़ सकता है। पालक और गाजर के रस का एक मिश्रण लिवर सिरोसिस के लिए एक उत्कृष्ट उपाय है। पालक और गाजर के रस को बराबर भाग में मिलाएं। लीवर के उपचार के लिए प्रतिदिन कम से कम एक बार इसका रस जरूर पीजिए।

लिवर के लिए फायदेमंद है आंवला


आंवला को सुपर फूड का दर्जा मिला है। इस छोटे से फल में कई ऐसे चमत्कादरिक गुण है, जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं। यह न सिर्फ हमारे शरीर की इम्यू निटी बढ़ाता है बल्किय कई रोगों को जड़ से भी खत्म करता है। इसमें विटामिन सी, विटामिन एबी कॉम्ले्म क्सू, कैलशियम, पोटैशियम, मैग्नीशशियम, कार्बोहाइड्रेट, आयरन और फाइबर पाए जाते हैं।


अगर अपने लिवर को सेहतमंद रखना चाहते हैं, तो आप आंवले का सेवन करना शुरू कर दीजिए। आमला लिवर को सुरक्षा प्रदान करता हैं और विटामिन सी का एक समृद्ध स्रोत है, जो लिवर के फंक्शन को बेहतर करता है।
लिकोरिस चाय

लिगर के इलाज करने के लिए आयुर्वेदिक में लिकोरिस का उपयोग बहुत ही किया जाता है। लिकोरिस चाय बनाने के लिए, लीकोरिस रूट को पीसकर उसे उबलते पानी में डालें और कुछ मिनटों के लिए इसे छोड़ दें। लिवर की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए दिन में दो बार इस चाय का सेवन करें।
लिवर को सेहतमंद रखे अलसी का बीज


इसमें कोई संदेह नहीं कि अलसी के बीज सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं। इसमें ओमेगा-3 एसिड पाया जाता है, जो कि कई रोगों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। अलसी का बीज लिवर पर तनाव को कम कर सकता है। फाइबर के गुणों से भरपूर अलसी को अपनी आहार में शामिल करने आपका लिवर स्वस्थ रहता है।
ग्रेपफूट
ग्रेपफूट एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं जो स्वाभाविक रूप से लीवर की रक्षा करते हैं। इसमें नरिनजेनिन और नारिनजिन दो तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। कई अध्ययनों से पता चला है कि दोनों एंटीऑक्सीडेंट लिवर को चोट से बचाने में मदद करते हैं। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि ये एंटीऑक्सिडेंट हेपेटिक फाइब्रोसिस के विकास को कम कर सकता है।


आपको बता दें कि हेपटाइटिस बी और सी में लिवर फाइब्रोसिस (लिवर का सख्त होना) और लिवर सिरोसिस (लिवर का सिकुड़ जाना) होने की आशंका बहुत ज्यादा होती है।
ब्लूबेरी और क्रैनबेरी


ब्लूबेरी और क्रैनबेरी दोनों में एंथोसायनिन, एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं। ये कई स्वास्थ्य लाभों से भी जुड़े हुए हैं तथा यह लिवर का रामबाण इलाज है। कई अध्ययनों ने दर्शाया है कि क्रैनबेरी और ब्लूबेरी लिवर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। लाल रंग की दिखने वाली क्रैनबेरी कई स्वास्थ्य संबंधित फायदों से भरी हैं। एक अध्ययन के मुताबिक क्रैनबेरी का रस पीने से महिलाओं में यूरीनरी ट्रेकट इंफेकशन (यूटीआई) दोबारा होने का खतरा कम हो सकता है।
चुकंदर का रस


चुकंदर का रस नाइट्रेट्स और एंटीऑक्सिडेंट्स का स्रोत है जिसे बेटालैन कहा जाता है, जो दिल के स्वास्थ्य को लाभ पहुंचा सकता है और ऑक्सीडेटिव डैमेज और सूजन को कम कर सकता है।

हेपेटाइटिस सी और लिवर की अन्य बीमारी के लिए स्वस्थ आहार 

लिवर की बीमारी हो या किसी प्रकार की कोई पुरानी बीमारी हो, अगर आप उससे निपटना चाहते हो, तो यह आपके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता। आप इसको नियंत्रण करके इस बीमारी से बाहर आ सकते हैं। इसके लिए आपको अपने आहार में कुछ नियंत्रण करने की आवश्कता होती है। जब आप कुछ खाते हैं, तो वो खाद्य पदार्थ हमारे पुरे शरीर विशेषकर जिगर को प्रभावित करता है। लिवर या जिगर शरीर की ताकत होती है। यह शरीर का दूसरा सबसे बड़ा अंग होता है और कई महत्वपूर्ण कार्यों को करने में मदद करता है। यह एक कुशल इंजन और फिल्टर का काम करता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली और आपके शरीर को कई अन्य कार्य करने के लिए मदद करता है।
हेपेटाइटिस सी के लिए 12 स्वस्थ आहार जिगर की बीमारी को ठीक करने में मदद करती है और जिगर को नुकसान होने से बचाती है। जब भी हम अस्वस्थ आहार लेते हैं, तो वह जिगर की बीमारी का मुख्य कारण होता है जैसे कि वसा युक्त भोजन का अधिक मात्रा में सेवन करने से वजन का अधिक होना और अधिक शराब का सेवन करने से लीवर का रोग होता है। अस्वस्थ आहार और खतरनाक रसायनों से जिगर को बहुत ही नुकसान होता है।
हेपेटाइटिस सी और किसी भी जिगर की बीमारी के लिए स्वस्थ आहार इस प्रकार से है: 
हेपेटाइटिस सी या जिगर की अन्य बिमारी होने पर आप साबुत अनाज, प्रोटीन, कम वसा वाले डेयरी, फल, सब्जियों आदि का सेवन कर सकते हो। 
ताजा फल, सब्जियां, दाल, सेम और साबुत अनाज के रूप में उच्च फाइबर जिगर के लिए स्वस्थ खाद्य पदार्थ हैं। यह फाइबर शरीर से विषाक्त पदार्थों को खत्म करने में मदद करते हैं। 
कच्चा मांस का सेवन करने से बचें। 
चीनी और नमक की उच्च मात्रा का सेवन करने से बचें। 
उच्च वसायुक्त खाद्य पदार्थ खाने पर नियंत्रित करें। 
फ्राइड या प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ खाने से बचें। 
साधारण भोजन लें और फास्टफूड से दूरी बनाएं। 
कच्चा और अधपका भोजन का सेवन करने से परहेज करना चाहिए। 
शुद्ध पानी का खूब सेवन करें, यदि संभव हो तो पानी को फिल्टर कर के पियें। शराब पीने से बचें, क्योंकि शराब पीने से जिगर की बीमारी और बढ़ जाती है। 

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.