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गोमूत्र ऐलोवेरा होर्मोँस कब्ज

इसका सेवन करने भर से होंगी, सारी बड़ी बीमारियां दूर
ऐसी क्या खासियत है, जो शरीर की हर बीमारियों में रामबाण का काम करती है|
1 – गोमूत्र में पानी के अलावा 18 सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद है, जो हर तरह की बीमारियों में रामबाण का काम करता है|
2 – गोमूत्र एक ऐसी चीज है जो वात, पित और कफ को सम में ला देता है|
3 – गोमुत्र में सबसे ज्यादा पानी है|लेकिन पानी के अलावा इसमें कैल्शियम, सल्फर, आयरन, सिलिकॉन, बोरॉन, मैग्नेशियम इत्यादि जैसे कुल 18 पोषक तत्व मौजूद हैं, जो शरीर के लिए बहुत हीं ज्यादा उपयोगी है|
4 – गोमूत्र के अलावा यह 18 पोषक तत्व अगर किसी चीज में पाई जाती है, तो वो है खेतों की मिट्टी| और दूसरी है गोमुत्र|इसलिए ये गोमूत्र चमत्कारिक औषधि है|
5 – शरीर की बीमारियों को खत्म करने के लिए जितने भी घटक की आवश्यकता होती है, वो सब के सब गोमुत्र में मौजूद हैं|
6 – एक उदाहरण के तौर पर हम आपको बता रहे हैं, कि जैसे त्वचा के रोग में भी गोमुत्र उपयोगी है| दोस्तों त्वचा का कोई भी रोग सल्फर की कमी के कारण होता है| और गाय के मूत्र में सल्फर भरपूर मात्रा में पाया जाता है|इसलिए गोमूत्र के लगातार सेवन से त्वचा के रोग जल्दी हीं ठीक हो जाते हैं|गौर करने वाली बात है कि त्वचा से संबंधित जितने भी रोग हैं वो सब के सब गोमुत्र के सेवन से जल्द ठीक हो जाते हैं|
7 – जोड़ों के दर्द में भी है लाभदायक|किसी भी तरह का जोड़ों का दर्द हो| गौमूत्र के सेवन से ठीक हो जाता है|
8 – कफ वालों के लिए रामबाण है गोमूत्र| कफ से संबंधित जितनी भी बीमारियां हो, वो सब के सब गोमूत्र के सेवन से जड़ से ठीक हो जाते हैं| और दुबारा नहीं होते|
9 – गौमूत्र हमारे शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देता है| जिसकी वजह से कोई भी बीमारी वापस नहीं होती|
10 – आधुनिक विज्ञान के अनुसार शरीर में करक्यूमिन नामक केमिकल की कमी के कारण कैंसर रोग पैदा होता है| इस केमिकल की कमी की वजह से कोशिकाएं अनकंट्रोल हो जाती है| और ये कोशिकाएं एक दूसरे के साथ मिलकर ट्यूमर जैसा बना लेती है| जिसे कैंसर कहा जाता है|
गौमूत्र में भरपूर मात्रा में करक्यूमिन नामक केमिकल होते हैं, जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लोगों को निजात दिलाने में असरदार है|

सर्दियों में मूंगफली खाने के है बड़े फायदे

सर्दियों में मूंगफली खाना सभी पसंद करते है। इससे टाइम भी पास होता रहता है। मूंगफली स्वाद में जितनी अच्छी है सेहत के लिए भी उतनी ही फायदेमंद है। जी हां, मूंगफली खाने से बहुत से लाभ मिलते है।
मूंगफली खाने से मिलते है ये स्वास्थ्य लाभ:-
- मूंगफली में कैलोरी की मात्रा कम होती है। इसका सेवन करने से मोटापा नहीं बढ़ता है साथ ही भूख भी मिट जाती है।
- इसके सेेवन से शरीर का कॉलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल रहता है। मूंगफली में मौजूद मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड ह्रदय संबंधी रोगों को खत्म करने का काम करता है।
- मूंगफली एंटी-ऑक्सीडेंट और ट्रिप्टोफेन गुण काफी मात्रा में मौजूद होते है, जो तनाव की समस्या को दूर करते है। इसलिए रोजाना मूंगफली का सेवन करें।
- गर्भवती महिला के लिए मूंगफली काफी फायदेमंद होती है। इसमें मौजूद फॉलिक एसिड शिशु में होने वाले न्यूरल ट्यूब डीफेक्ट का खतरा कम करता है।
- इतना ही नहीं, मूंगफली के सेवन से त्वचा में ग्लो आता है। इसमें मिले मोनो-सैचुरेटेड एसिड और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण स्किन को नमी देते है। साथ ही त्वचा निखरती है।
- डायबिटीज के मरीजों के लिए मूंगफली काफी फायदेमंद है। इसमें मौजूद मैग्नेशियम रक्त में शुगर लेवल को कंट्रोल करता है।
- मूंगफली में विटामिन ए भरपूर मात्रा होती है, जिससे बाल लंबे और घने होते है। इसलिए रोजाना मूंगफली का सेवन करें।
- मूंगफली से मिलने वाले प्रोटीन शरीर में नई कोशिकाओं का निर्माण करते है और हड्डियों को मजबूत बनाते है।
रोने के ये 5 फायदे जानकार आप रोना मत शुरू कर दीजियेगा !
दोस्तों आपको जानकर आश्चर्य होगा कि रोना हमारे लिए उतना ही आवश्यक है जितना कि हंसना.
जी हां दोस्तों आज मैं आप को रोने के फायदे बताने जा रहा हूं, जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे
अगर आप भी उनमें से हैं जो अपने दर्द को छुपाते हैं तो अपनी आदतों को बदल डालिए और जब मन करे तो दिल खोल कर रो लीजिए. इससे आपका मन हल्का हो जाएगा और आप अपने आपको काफी फ्रेश महसूस करेंगे.
आइए दोस्तों एक-एक कर मैं आपको रोने के फायदे बताने जा रहा हूं
रोने के फायदे –
1 – डिप्रेशन से बाहर निकालने में मददगार
कोई भी इंसान डिप्रेशन में तब चला जाता है जब वह अंदर ही अंदर घुटता रहता है. उसके दिल में किसी तरह का दर्द, किसी तरह की तकलीफ इत्यादि दबी हो. और वो उसे बाहर ना निकाल पाता हो. ऐसे में कोई भी इंसान धीरे – धीरे कर डिप्रेशन में चलता चला जाता है. लेकिन अगर वो इंसान दिल खोलकर किसी के पास रो लेता है, या नहीं तो अकेले में भी रो ले, तो उसका मन काफी हद तक हल्का हो जाता है. और ऐसे में उसे डिप्रेशन से बाहर निकलने में काफी मदद मिल जाती है.
2 –आंखों की रोशनी बनाए रखने में मददगार
आंखों में मेंब्रेन के सूखने की वजह से आंखों की रोशनी कम होने लगती है. लेकिन आपके आंसू अगर निकलते रहें तो इसे सूखने नहीं देते हैं. और आंखों की रोशनी बनी रहती हैं. इसलिए आंखों से आंसू का निकलना आपकी आंखों की रोशनी के लिए काफी फायदेमंद है.
3 –बैक्टीरिया को खत्म करने में मददगार
हमारे आंसुओं में लोसोजोम नाम का एक तत्व पाया जाता है. जो बाहरी बैक्टीरिया को खत्म करने में 90 फ़ीसदी तक सफल है.
4 – तनाव मुक्त करने में मददगार
हम जब भी तनाव में होते हैं, और रोते हैं, तो आसुओं के साथ एड्रेनोकार्टिकोट्रोपिक और ल्यूसिन जैसे हार्मोन निकलते हैं. जिससे हमें तनाव से मुक्ति पाने में मदद मिलती है.
5 – दिल दिमाग और लिंबिक सिस्टम को ठीक रखने में मददगार
रोने के कारण हमारा मन हल्का होता है जिससे दिमाग लिंबिक सिस्टम और दिल स्वस्थ बना रहता है.
ये है रोने के फायदे – आपको एक उदाहरण के तौर पर मैं बताना चाहूंगा कि आप ध्यान दें तो पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में हार्ट की समस्या कम होती है. इसके पीछे मेरे ख्याल से सबसे बड़ी वजह है रोना. गौर करने वाली बात है कि महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा खुल कर रो लेती है. जिससे उनका मन हल्का हो जाता है. जबकि वहीं पुरुष अपने दर्द को दबा कर रखते हैं. जल्दी रो नहीं पाते. कहीं ना कहीं उनमें हर्ट की समस्या बढ़ने का ये भी एक बड़ा कारण हो सकता है.
इसलिए मेरा तो हर किसी से यही सजेशन होगा, कि जब भी दिल करे खुल कर रो लेना चाहिए.


जवान दिखते रहना चाहते हैं तो ऐलोवेरा का करें सेवन
आमतौर पर लोग अपने घरों में ऐलोवेरा का पौधा लगाना पसंद करते हैं लेकिन इसके सेहत संबंधी गुणों के बारे में पता नहीं होने के कारण इस पौधे का उस तरह प्रयोग नहीं हो पाता जैसे होना चाहिए। यह एक ऐसा पौधा है जिसे उगने के लिए ज्यादा धूप या पानी की आवश्यकता नहीं होती। यह पौधा ही आपकी कई स्किन और सेहत संबंधी परेशानियों को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है। ऐलोवेरा पौधे में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उसकी पत्तियां होती हैं जिसमें जेल जैसी चीज़ पाई जाती है जिसका प्रयोग उसी रूप में या फिर जूस बनाकर किया जाता है। अगर आप अपनी ब्यूटी को और निखारना चाहते हैं तो ऐलोवेरा जैल से आप अपनी स्किन को सिर से लेकर पैर तक निखार सकते हैं और ये जैल हर तरह की स्किन टाईप के लिए फायदेमंद माना गया है।
चलिए आज़ आपको बताते हैं इससे होने वाले फायदों के बारे में-
शरीर के सही विकास के लिए इक्कीस अमिनो एसिड की जरूरत होती है जिसमें से अठारह ऐलोवेरा में पाये जाते हैं। साथ ही अन्य पोषक तत्व जैसे कि आयरन, मैगनीज़, कैल्सियम और सोडियम भी इसमें हैं। संभव हो तो प्रतिदिन ऐलोवेरा जूस का सेवन करना चाहिए। अगर आप गैस की समस्या से परेशान हैं तो ऐलोवेरा जूस में नींबू का रस लेने ये बंद हो जाएगी और साथ ही आपकी पाचन शक्ति भी अच्छी होता जाएगी। कब्ज़ की समस्या में खासकर ऐलोवेरा जूस से बहुत राहत मिलती है।
आजकल प्रदूषण बहुत बढ़ रहा है ऐसे में बच्चा हो या बड़ा, सबकी ही रोग प्रतिरोधक क्षमता जिसे कि हम इम्यूनीटी कहते हैं, कम होती जा रही है। ऐसे में ऐलोवेरा जूस आपके शरीर को एक्टिव बनाये रखता है और सर्दी जुकाम जैसी बीमारियों से बचाये रखता है। ये हमारे दिल का ख्याल रखते हुए कोलेस्ट्राल को बढ़ने से रोकता है। आर्थराइटिस या गठिया में होने वाले जोड़ों के दर्द को कम करने में भी ऐलोवेरा सहायक हो सकता है इसके लिए आप चाहें तो ऐलोवेरा की पत्तियों पर हल्दी लगाकर सीधे ही दर्द वाली जगह पर लगा सकते हैं या फिर चाहें तो रोज़ ऐलोवेरा जूस का सेवन भी कर सकते हैं। दोनों तरह से ही ये जोड़ों के दर्द को कम करता है। अगर कोई जख्म हो गया हो या कहीं कट छिल गया हो ऐलोवेरा जैल लगाने से वह जल्दी ही सही हो जाता है तथा घाव भी भर जाता है।
फोड़े फुंसी होने पर ऐलोवेरा जैल में हल्दी मिलाकर लगा लें फिर पट्टी कर लें। थोड़ी देर में अपने आप ही मवाद भी निकाल जाएगा और कोई निशान भी नहीं रहेगा। जो लोग डायबिटीज़ की समस्या से पीड़ित हैं या फिर जिनकी अभी पहली ही स्टेज़ ही उन्हें ऐलोवेरा जूस में करेला का रस मिलाकर पीना चाहिए। ऐलो वेरा का जैल हमारी स्किन के लिए के एंटी एजिंग जैल की तरह काम करता है और रिंकल एवम फाईन लाइनों को कम करता है लेकिन शुरू से ही से इस जैल को लगाने की आदत डाली जाए तो ज्यादा समय के लिए आप जवान दिख सकते हैं। बालों के लिए भी ऐलोवेरा का जैल काफी फायदेमंद रहता है जोकि बालों के लिए एक नेचुरल कंडीशनर का काम करता है।
बालों की जड़ों में ये जैल लगाने से बाल मज़बूत होते हैं और अगर बालों में रूसी हो गई है तो उससे भी छुटकारा मिलता है। यह जैल धूप से होने वाले सनर्बन से बचाता है और सनस्क्रीन की तरह काम करता है आप चाहें तो धूप में निकलने से पहले इस जैल को अपने शरीर पर लगा सकते हैं। ऐलोवेरा जूस खून को साफ करता है और हीमोग्लबिन की कमी को पूरा करता है। ड्राई स्किन के लिए ये जैल मॉशचराइज़र का काम करता है। अगर चेहरे पर मुहांसा हो गया हो तो भी ये जैल लगाकर उसे दूर किया जा सकता है। हमारी कोहनियों और घुटनों पर गंदगी जमा होने के कारण ये हिस्से काले नज़र आते हैं लेकिन ऐलोवेरा जैल में नारियल का तेल मिलाकर लगाने से धीरे धीरे ये कालापन दूर होता जाता है। चेहरे पर इंस्टेट ग्लो लाने के लिए ऐलोवेरा जैल में नींबू का रस 15 मिनट लगाए रखें और फिर धो दें रोज़ ऐसा करने से आप खुद ही फर्क देखना शुरू कर देंगे। त्वचा संबंधी रोगों को ठीक करने में भी ये जैल मदद करता है।


महिलाओ के मोटापे के लिए जिम्मेदार है ये होर्मोँस 
महिलाओ में ज्यादातर मोटापे की तकलीफ का मुख्य कारण   के स्त्राव की गडबडि है । ज्यादातर महिलाओ को पहली बार माँ बनने के बाद मोटापे की तकलीफ शुरू हो जाती है । इसका कारण भी ए होर्मोँस की गडबडि ही है । तो चलो देखे की महिलाओ के मोटापे के लिए कौनसे होर्मोँस जिम्मेदार है । 
कार्टिसोल हारमोन्‍स -
इस हारमोन्‍स को स्‍ट्रेस हारमोन भी कहा जाता है। जब किसी महिला को बहुत ज्‍यादा तनाव होता है तो इस हारमोन का स्‍तर सबसे उच्‍च बिंदू पर होता है। शरीर में इस हारमोन के स्‍त्रावित होने से मोटापा बढ़ाने वाले कारक सक्रिय हो जाते हैं।
टेस्‍टोस्‍टेरॉन हारमोन -
जो महिलाएं पोलिसिस्‍टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) नामक सिंड्रोम से पीडित होती हैं, उनमें इसकी मात्रा बहुत ज्‍यादा होती है। इस कारण, चेहरे पर बाल आने लगते हैं और मांसपेशियां सख्‍त हो जाती हैं। 
एस्‍ट्रोजन हारमोन -
मेनोपॉज के दौरान, इस हारमोन की मात्रा शरीर में कम हो जाती है। इससे महिलाओं के पेट में टायर बनना शुरू हो जाते हैं। ये महिलाओं को मोटा कर देना वाला हारमोन होता है। 
इंसुलिन हारमोन -
जिस महिला के शरीर में इंसुलिन हारमोन की अधिकता होती है, वह जल्‍दी वजन बढ़ा लेती हैं। इसमें हारमोन के असंतुलित से शरीर में वसा और कार्बोहाईड्रेट की अधिकता हो जाती है। 
प्रोजेस्‍टेरॉन हारमोन -
प्रोजेस्‍टेरॉन हारमोन की शरीर में कमी होने पर, वसा की मात्रा नहीं बढ़ती है लेकिन शरीर, पानी को बनाएं रखने के लिए फूल जाता है जिससे महिला मोटी प्रतीत होती है। इस हारमोन के शरीर में कम होने पर ऐसी दिक्‍कत आ जाती है।


शरीर में तेजी से खून बढ़ाने के घरेलु उपाय
शरीर में तेजी से खून बढ़ाने के घरेलु उपाय
शरीर में तेजी से खून बढ़ाने के घरेलु उपाय।
शरीर में खून की कमी से बहुत बीमारियां लग सकती हैं। जिस वजह से इंसान कमजोर हो जाता है और उसका शरीर बीमारियों से लड़ नहीं पाता है। इसलिए महिलाओं और पुरूषों को शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने के लिए इन आयुवेर्दिक उपायों को अपनाना चाहिए।
1. तिल और शहद:-
दो घंटे के लिए 2 चम्मच तिलों को पानी में भिगों लें और बाद में पानी से छानकर इसका पेस्ट बना लें। अब इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और दिन में दो बार सेवन करें।
2. काफी और चाय खतरनाक:-
काफी और चाय का सेवन कम कर दें। एैसा इसलिए क्योंकि ये चीजें शरीर को आयरन लेने से रोकते हैं।
3.ठंडा स्नान:-
दो बार दिन में ठंडे पानी से नहाए और सुबह नहाने के बाद सूरज की रोशनी में बैठें।
4. अंकुरित भोजन :-
आप अपने भोजन में गेहूं, मोठ, मूंग और चने को अंकुरित करके उसमें नींबू मिलाकर सुबह का नाश्ता लें।
5. आम :-
पके आम के गुदे को मीठे दूध के साथ सेवन करें। एैसा करने से खून तेजी से बढ़ता है।
6. मूंगफली और गुड़ :-
शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए मूंगफली के दानों को गुड़ के साथ चबा-चबा कर सेवन करें।
7. सिंघाड़ा :-
सिंघाड़ा शरीर में खून और ताकत दोनो को बढ़ाता है। कच्चे सिंघाड़े को खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से बढ़ता है।
8. मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालें और गाजर :-
मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालें और गाजर का नियमित सेवन करें और रात को सोने से पहले दूध में खजूर डालकर उसको पीएं।
9. फलो का सेवन:-
अनार, अमरूद, पपीता, चीकू, सेब और नींबू आदि फलो का अधिक से अधिक सेवन करें।
10. आंवले और जामुन का रस:-
आंवले का रस और जामुन का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।
11. टमाटर का रस:-
एक गिलास टमाटर का रस रोज पीने से भी खून की कमी दूर होती है। इसलिए टमाटर का सूप भी बनाकर आप ले सकते हो।
12. हरी सब्जिया:-
बथुआ, मटर, सरसों, पालक, हरा धनिया और पुदीना को अपने भोजन में जरूर शामिल करें।
13. फालसा:-
फालसे का शर्बत या फालसे का सेवन सुबह शाम करने से शरीर में खून की मात्रा जल्दी बढ़ती है।
14. लहसुन:-
शरीर में खून को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से लहसुन और नमक की चटनी का सेवन करे। यह हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करता है।
15. सेब का जूस:-
सेब का जूस रोज पीएं। चुकंदर के एक गिलास रस में अपने स्वाद के अनुसार शहद मिलाकर इसे रोज पीएं। इस जूस में लौह तत्व ज्यादा होता है।




नहाने का वैज्ञानिक तरीका
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अपने स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन के लिये इस पोस्ट को अवश्य पढे और पढ़ायें.
क्या आपने कभी अपने आस पास ध्यान से देखा या सुना है कि नहाते समय बुजुर्ग को लकवा लग गया? दिमाग की नस फट गई ( ब्रेन हेमरेज), हार्ट अटैक आ गया । छोटे बच्चे को नहलाते समय वो बहुत कांपता रहता है, डरता है और माता समझती है की नहाने से डर रहा है, लेकिन ऐसा नहीँ है; असल मे ये सब गलत तरीके से नहाने से होता है ।
दरअसल हमारे शरीर में गुप्त विद्युत् शक्ति रुधिर (खून) के निरंतर प्रवाह के कारण पैदा होते रहती है, जिसकी स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक दिशा ऊपर से आरम्भ होकर नीचे पैरो की तरफ आती है। सर में बहुत महीन रक्त् नालिकाये होती है जो दिमाग को रक्त पहुँचाती है। यदि कोई व्यक्ति निरंतर सीधे सर में ठंडा पानी डालकर नहाता है तो ये नलिकाएं सिकुड़ने या रक्त के थक्के जमने लग जाते हैं।और जब शरीर इनको सहन नहीं कर पाता तो ऊपर लिखी घटनाएं वर्षो बीतने के बाद बुजुर्गो के साथ होती है। सर पर सीधे पानी डालने से हमारा सर ठंडा होने लगता है, जिससे हृदय को सिर की तरफ ज्यादा तेजी से रक्त भेजना पड़ता है, जिससे या तो बुजुर्ग में हार्ट अटैक या दिमाग की नस फटने की अवस्था हो सकती है। ठीक इसी तरह बच्चे का नियंत्रण तंत्र भी तुरंत प्रतिक्रिया देता है जिससे बच्चे के काम्पने से शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है , और माँ समझती है की बच्चा डर रहा है । गलत तरीके से नहाने से बच्चे की हृदय की धड़कन अत्यधिक बढ़ जाती है स्वयं परीक्षण करिये।
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हम आपको नहाने का सबसे सही तरीका बताते है।
बाथरूम में आराम से बैठकर या खड़े होकर सबसे पहले पैर के पंजो पर पानी डालिये, रगड़िये, फिर पिंडलियों पर, फिर घुटनो पर, फिर जांघो पर पानी डालिये और हाथों से मालिश करिये।फिर हाथो से पानी लेकर पेट को रगड़िये । फिर कंधो पर पानी डालिये, फिर अंजुली में पानी लेकर मुँह पर मलिए । हाथों से पानी लेकर सर पर मलिए।इसके बाद आप शावर के नीचे खड़े होकर या बाल्टी सर पर उड़ेलकर नहा सकते है।
इस प्रक्रिया में केवल 1 मिनट लगता है लेकिन इससे आपके जीवन की रक्षा होती है। और इस 1 मिनट में शरीर की विद्युत प्राकृतिक दिशा में ऊपर से नीचे ही बहती रहती है क्योंकि विद्युत् को आकर्षित करने वाला पानी सबसे पहले पैरो पर डाला गया है।
बच्चे को इसी तरीके से नहलाने पर वो बिलकुल कांपता डरता नहीं है। इस प्रक्रिया में शरीर की गर्मी पेशाब के रास्ते बाहर आ जाती है आप कितनी भी सर्दी में नहाये कभी जुखाम बुखार नहीं होगा।
कृपया इस पोस्ट को आगे भेजें ,यह छोटे बच्चों ,बुज़ुर्गों के लिये बहुत उपयोगी है ।



कब्ज का एकदम सरल अचूक उपचार ! एक बार जरूर ।

कब्ज होने की असली जड़ है भोजन का न पचना। कब्ज के रोग से अनेक बीमारी और हो जाती ह
कब्ज के कारण बीमारीया:-
अफारा, गेस, सर दर्द, हाथ पैरो में दर्द और बवासीर आदि।
इसका उपचार बहुत ही आसान है।।
1.एक कप पानी में एक निम्बू निचोड़ दे,5 दाने काली मिर्च का चूर्ण बनाकर दाल देर आधा चम्मच सेंधा नमक मिला दे।सवेरे ख़ाली पेट एक हफ्ते सेवन कीजिए ।पुराना से पुराना कब्ज दूर हो जायेगा।
2. अगर कब्ज की अधिकता के कारण बुखार में दस्त कराना हो तो
10 ग्राम अरंडी का तेल को 250 ग्राम गर्म दूध में मिलाकर दे।आजमाया हुआ ह।
3.साधारण कब्ज में 10 से 12 मुनक्का के बीज निकालकर,दूध में उबाल कर खाये ओर ऊपर से वही दूध पीना ह।सवेरे खुलकर सोच आएगा।कब्ज की अधिक शिकायत होने पे तीन दिन ले।
4. सवेरे संतरे का रस 7 से 8 दिन पियो कब्ज की परेशानी दूर हो जायेगी।
5,, दस ग्राम इसबगोल की भूसी को 150 ग्राम दंही में डालकर सवेरे शाम खाओ।

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सफेद दाग का आयुर्वेदिक इलाज

सफेद दाग को लोगों ने कुष्ट रोग का नाम दिया है, ऐसे नामों से प्रायः लोग घबरा जाते हैं मगर सफेद दाग छूत की बीमारी नहीं है।
संक्रामक रोग नहीं है। केवल त्वचा का रंग बदल जाता है किसी कारण से। अगर सही समय पर इसका इलाज किया जायें, तो समय जरूर लगेगा परंतु यह ठीक हो सकता है। इसके इलाज के लिये धैर्य की जरूरत होती है। इलाज करते-करते इन दागों के बीच में काले काले धब्बे पड़ते है। इसके लिये घबराइये नहीं। काले निशान फैलते जानने का संकेत सफेद दाग के ठीक होने का है। धीरे-धीरे काले निशान फैलते जायेंगे और सफेदी खत्म होती जायेगी। त्वचा का रंग सामान्य होता जाएगा। सफेद दाग त्वचा पर क्यों होते हैं इसका कोई विशेष कारण साफ-साफ पता नहीं चला है। मगर फिर भी कुछ कारण ऐसे है जिनकी वजह से सफेद दाग होते हैं व तेजी से फैलते भी हैं ।
आयुर्वेदिक उपचार :-
1. विरोधी भोजन लेने से तेजी से फैलते हैं ,दूध व मछली साथ-साथ न लें।
2. शरीर का विषैला तत्व बाहर निकलने से न रोकें जैसे- मल, मूत्र, पसीने पर रोक न लगायें।
3. मिठाई, रबडी, दूध व दही का एक साथ सेवन न करें।
4. गरिष्ठ भोजन न करें जैसे उडद की दाल, मांस व मछली।
5. भोजन में खटाई, तेल मिर्च,गुड का सेवन नकरें।
6. अधिक नमक का प्रयोग न करें।
7. ये रोग कई बार वंशानुगत भी होता है।
8. रोज बथुआ की सब्जी खायें, बथुआ उबाल कर उसके पानी से सफेद दाग को धोयें कच्चे बथुआ का रस दो कप निकाल कर आधा कप तिल का तेल मिलाकर धीमी आंच पर पकायें जब सिर्फ तेल रह जाये तब उतार कर शीशी में भर लें। इसे लगातार लगाते रहें । ठीक होगा धैर्य की जरूरत है।
9.अखरोट खूब खायें। इसके खाने से शरीर के विषैले तत्वों का नाश होता है। अखरोट का पेड़ अपने आसपास की जमीन को काली कर देती है ये तो त्वचा है। अखरोट खाते रहिये लाभ होगा।
10.रिजका सौ ग्राम, रिजका सौ ग्रा ककडी का रस मिलाकर पियें दाग ठीक होगा।
11. लहसुन के रस में हरड घिसकर लेप करें तथा लहसुन का सेवन भी करते रहने से दाग मिट जाता है।
12.छाछ रोजना दो बार पियें सफेद दाग ठीक हो सकता है।
13. लहसुन के रस में हरड को घिसकर कर लेप करें साथ साथ सेवन भी करें।
14. पानी में भीगी हुई उडद की दाल पीसकर सफेद दाग पर चार माह तक लगाने से दाद ठीक हो जायेगा।
15. हल्दी एक औषधि है। इससे त्वचा रोग में फायदा होता है। सौ ग्राम हल्दी, चार सौ ग्राम स्पिरिट (स्प्रिट) लेकर मिलायें और खाली शीशी में भर कर रख दें धूप में दिन में कम से कम तीन बार हिलायें जोर-जोर से। ये टिंचर का का करेगा दिन में तीन बार शरीर पर लगायें। हल्दी गर्म दूध में डालकर पियें छः महीने कम से कम।
16. तुलसी का तेल बनायें, जड़ सहित एक हरा भरा तुलसी का पौधा लायें, धोकर कूटपीस लें रस निकाल लें। आधा लीटर पानी आधा किलो सरसों का तेल डाल कर पकायें हल्की आंच पर सिर्फ तेल बच जाने पर छानकर शीशी में भर लें। ये तेल बन गया अब इसे सफेद दाग पर लगायें।
17. नीम की पत्ती, फूल, निंबोली, सुखाकर पीस लें प्रतिदिन फंकी लें। सफेद दाग के लिये नीम एक वरदान है। कुष्ठ जैसे रोग का इलाज नीम से सर्व सुलभ है। कोई बी सफेद दाग वाला व्यक्ति नीम तले जितना रहेगा उतना ही फायदा होगा नीम खायें, नीम लगायें ,नीम के नीचे सोये ,नीम को बिछाकर सोयें, पत्ते सूखने पर बदल दें। पत्ते,फल निम्बोली,छाल किसी का भी रस लगायें वएक च. पियेंभी।जरूर फायदा होगा कारण नीम खु में एक एंटीबायोटिक है।ये अपने आसपास का वातावरण स्वच्छ रखता है। इसकी पत्तियों को जलाकर पीस कर उसकी राख इसी नीम के तेल में मिलाकर घाव पर लेप करते रहें। नीम की पत्ती, निम्बोली ,फूल पीसकर चालीस दिन तततक शरबत पियें तो सफेद दाग से मुक्ति मिल जायेगी। नीम की गोंद को नीम के ही रस में पीस कर मिलाकर पियें तो गलने वाला कुष्ठ रोग भी ठीक हो सकता है।


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पेट कम करने के लिए आयुर्वेदिक आहर

गलत ढंग से आहार-विहार यानी खान-पान, रहन-सहन से जब शरीर पर चर्बी चढ़ती है तो पेट बाहर निकल आता है, कमर मोटी हो जाती है और कूल्हे भारी हो जाते हैं। इसी अनुपात से हाथ-पैर और गर्दन पर भी मोटापा आने लगता है। जबड़ों के नीचे गरदन मोटी होना और तोंद बढ़ना मोटापे के मोटे लक्षण हैं।
मोटापे से जहाँ शरीर भद्दा और बेडौल दिखाई देता है, वहीं स्वास्थ्य से सम्बंधित कुछ व्याधियाँ पैदा हो जाती हैं, लिहाजा मोटापा किसी भी सूरत में अच्छा नहीं होता। बहुत कम स्त्रियाँ मोटापे का शिकार होने से बच पाती हैं। हर समय कुछ न कुछ खाने की शौकीन, मिठाइयाँ, तले पदार्थों का अधिक सेवन करने वाली और शारीरिक परिश्रम न करने वाली स्त्रियों के शरीर पर मोटापा आ जाता है।
भोजन के अन्त में पानी पीना उचित नहीं, बल्कि एक-डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पीना चाहिए। इससे पेट और कमर पर मोटापा नहीं चढ़ता, बल्कि मोटापा हो भी तो कम हो जाता है।
आहार भूख से थोडा कम ही लेना चाहिए। इससे पाचन भी ठीक होता है और पेट बड़ा नहीं होता। पेट में गैस नहीं बने इसका खयाल रखना चाहिए। गैस के तनाव से तनकर पेट बड़ा होने लगता है। दोनो समय शौच के लिए अवश्य जाना चाहिए।
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भोजन में शाक-सब्जी, कच्चा सलाद और कच्ची हरी शाक-सब्जी की मात्रा अधिक और चपाती, चावल व आलू की मात्रा कम रखना चाहिए।
सप्ताह में एक दिन उपवास या एक बार भोजन करने के नियम का पालन करना चाहिए। उपवास के दिन सिर्फ फल और दूध का ही सेवन करना चाहिए।
पेट व कमर का आकार कम करने के लिए सुबह उठने के बाद या रात को सोने से पहले नाभि के ऊपर के उदर भाग को 'बफारे की भाप' से सेंक करना चाहिए। इस हेतु एक तपेली पानी में एक मुट्ठी अजवायन और एक चम्मच नमक डालकर उबलने रख दें। जब भाप उठने लगे, तब इस पर जाली या आटा छानने की छन्नी रख दें। दो छोटे नैपकिन या कपड़े ठण्डे पानी में गीले कर निचोड़ लें और तह करके एक-एक कर जाली पर रख गरम करें और पेट पर रखकर सेंकें। प्रतिदिन 10 मिनट सेंक करना पर्याप्त है। कुछ दिनो में पेट का आकार घटने लगेगा।
सुबह उठकर शौच से निवृत्त होने के बाद निम्नलिखित आसनों का अभ्यास करें या प्रातः 2-3 किलोमीटर तक घूमने के लिए जाया करें। दोनों में से जो उपाय करने की सुविधा हो सो करें।
भुजंगासन, शलभासन, उत्तानपादासन, सर्वागासऩ, हलासन, सूर्य नमस्कार। इनमें शुरू के पाँच आसनों में 2-2 मिनट और सूर्य नमस्कार पाँच बार करें तो पाँच मिनट यानी कुल 15 मिनट लगेंगे। इन आसनों की विधि वेबदुनिया के योग चैनल से प्राप्त की जा सकती है।
भोजन में गेहूँ के आटे की चपाती लेना बन्द करके जौ-चने के आटे की चपाती लेना शुरू कर दें। इसका अनुपात है 10 किलो चना व 2 किलो जौ। इन्हें मिलाकर पिसवा लें और इसी आटे की चपाती खाएँ। इससे सिर्फ पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा।
प्रातः एक गिलास ठण्डे पानी में 2 चम्मच शहद घोलकर पीने से भी कुछ दिनों में मोटापा कम होने लगता है। दुबले होने के लिए दूध और शुद्ध घी का सेवन करना बन्द न करें। वरना शरीर में कमजोरी, रूखापन, वातविकार, जोड़ों में दर्द, गैस ट्रबल आदि होने की शिकायतें पैदा होने लगेंगी।



सर्द मौसम के 10 रोग 10 उपचार

ठंड के मौसम में अक्सर जो रोग होते हैं, उनसे हम छुटकारा पा सकते हैं। बशर्ते यह उपाय आजमाएं।
1. पाचन दोष के रोगियों को ठंड से कब्ज बढ़ जाने का खतरा रहता है। उन्हें ठंड में पानी खूब पीना चाहिए।
2. सर्दी में सिर दर्द की शिकायत रहती है, दूध में जायफल घिसकर माथे पर लेप करें, आराम मिलेगा।
3. सर्दी में अक्सर होंठ फटते हैं। कोकम का तेल लगाने से आराम मिलेगा।
4. बिवाइयां फट जाने पर प्याज का पेस्ट लगाने से आराम मिलेगा।
5. सर्दियों में प्रायः छाती में बलगम जमा हो जाता है, अंजीर का सेवन करने से बलगम निकलेगा तथा खांसी में राहत मिलेगी।
6. भोजन के पश्चात जीरा पावडर खाएं पाचन क्रिया ठीक रहेगी।
7. आजवाइन के चूर्ण का आधा चम्मच दिन में तीन बार खाने से ठंड से आया बुखार उतर जाता है।
8. सर्दियों में खांसी, बुखार, जुकाम में पुदीने के पत्तों की चाय, शकर या नमक मिलाकर पीने से लाभ होता है।
9. कफ जमा हो जाने से व दमा बढ़ने पर आजवायन छोटी पीपर, पोस्त दाना का काढ़ा बनाकर पीने से शीघ्र आराम मिलता है।
10. ठंड के मौसम में अक्सर जोड़ों के दर्द की शिकायत रहती है, धतुरे के पत्तों पर तेल लगाकर गर्म करके दर्द वाले स्थान पर बाँध देने से आराम मिलता है।
11. सर्दियों में सरसों के तेल में 3-4 लहसुन की कली डालकर पका लें और ठंडा होने पर इसमें मालिश करें तो बदन दर्द में आराम मिलता है।
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गुड से करे बीमारियों को दूर

आमतौर पर यही समझा जाता है कि गुड़ से भोजन की मिठास बढ़ाई जाती है, लेकिन कम ही लोग ऐसे हैं जो यह जानते हैं कि गुड़ से जुड़ी कई प्राचीन परंपराएं और उपाय भी हैं। गुड़ केवल एक सामान्य सी चीज नहीं है, इससे चमत्कारी लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।
गुड़ सभी लोगों के घर में आसानी मिल जाता है। इसकी तासीर काफी गर्म होती है। इसी वजह से गर्भवती स्त्री को गुड़ से परहेज करना चाहिए।
ये है प्राचीन परंपरा
पुरानी परंपराओं में से एक परंपरा है घर से निकलने से पहले गुड़ खाना। अक्सर घर के वृद्धजन किसी भी व्यक्ति को घर से बाहर निकलने से पहले गुड़ खाने की सलाह देते हैं। इस परंपरा के पीछे कई चमत्कारी लाभ छिपे हुए हैं।
इस परंपरा को अच्छा शकुन भी माना जाता है। इससे हमारी वाणी भी गुड़ की तरह ही मीठी हो जाती है।
घर से निकलते वक्त गुड़ खाने से हमारी सोच सकारात्मक होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है, क्योंकि गुड़ की मिठास से मन शांत होता है। शांत मन से हम किसी भी कार्य को ठीक से कर पाते हैं और सफलता प्राप्त होती है।
हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। इन्हीं उपायों में से एक उपाय है बंदरों को गुड़-चना खिलाना। हर शनिवार को यदि भक्त बंदरों को गुड़-चना खिलाता है तो उसके ज्योतिषीय दोष दूर हो जाते हैं। रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगते हैं और भाग्य साथ देने लगता है। बंदरों को गुड़-चना खिलाने से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं क्योंकि स्वयं बजरंग बली को वानर रूप में ही पूजा जाता है।
मीठा खाने से बढ़ता है रक्त संचार
इसके साथ ही वैज्ञानिक मान्यता है कि मीठा खाने से रक्त संचार बढ़ जाता है। एनर्जी मिलती है। इसलिए घर से निकलने से पहले से थोड़ा गुड़ जरूर खाना चाहिए। जिससे दिनभर के कार्यों के लिए एनर्जी बनी रहे। कार्य स्थल पर तनाव महसूस न हो।
ज्योतिष में गुड़ का महत्व
ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली में सूर्य ग्रह अधिक मजबूत स्थिति में न होने पर या अशुभ स्थिति में होने पर नकारात्मक विचार अधिक आते हैं। माना जाता है कि गुड़ खाने से सूर्य ग्रह के अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं। गुड़ का दान करने से भी सूर्य के दोष दूर होते हैं और मान-सम्मान में बढ़ोतरी होती है।
गुड़ है एक औषधि भी
गुड़ खाने के कई आयुर्वेदिक लाभ भी प्राप्त होते हैं। गुड़ को एक औषधि माना गया है। ठंड के दिनों में गुड़ और तिल के लड्डू हमारे शरीर को विशेष लाभ पहुंचाते हैं। कफ, सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों में भी गुड़ लाभदायक रहता है।
गुड़ को शकर से अधिक पौष्टिक माना जाता है क्योंकि इसे बनाने में किसी भी प्रकार की रासायनिक क्रिया का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। गुड़ खाने से गले एवं फेफड़ों से संबंधित कई रोगों में लाभ पहुंचता है।


15 आसन हेल्थ टिप्स

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इन दिनों लोगों ने अपनी लाइफस्टाइल ऐसी बना ली है कि दिनों दिन वे नई-नई परेशानियों और बीमारियों से घिरते जा रहे हैं। चाहे खान-पान हो या आरामदायक जीवनशैली। और तो और शहरी वातावरण भी उन्हें इस तरह की दिनचर्या बनाने में काफी मदद की है। सभी ऐशोआराम की चीजें उन्हें घर बैठे हासिल हो जाती है। उन्हें उठकर कहीं जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां। अपनी आरामदायक जीवनशैली को बदलने के लिए कुछ संकल्प लें। यहां 15 आसान हेल्थ टिप्स दिये जा रहें हैं जिन्हें अपनाकर आप अपनी फिगर को मेंटन तो कर ही सकती हैं। साथ ही इन्हें अपनाकर आप दिन भर तरोताजा भी महसूस करेंगीं।
1.प्रतिदिन वॉक करें। अगर हो सके तो फुटबॉल खेलें यह एक प्रकार का एक्सरसाइज ही है।
2.ऑफिस में या कहीं भी जाएं तो लिफ्ट के बदले सीढिय़ों का इस्तेमाल करें।
3.अपने कुत्ते को वॉक पर खुद लेकर जाएं। बच्चों के साथ खेलें, लॉन में नंगे पांव चलें, घर के आसपास पेड़ पौधे लगाऐं, यानि कि वो सब करें जिनसे आप खुद को एक्टिव रख सकें।
4.ऐसी जगह एक्सरसाइज न करें जहां भीड़भाड़ ज्यादा हो।
5.तले-भुने भोजन, और अन्य फैटी चीजों से परहेज करें यह बहुत से बीमारियों की जड़ होती है।
6.डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें। जैसे कि चीज, कॉटेज चीज, दूध और क्रीम का लो फैट प्रोडक्ट आदि।
7.यदि खाना ही है तो, मक्खन ,फैट फ्री चीज और मोयोनीज का लो फैट उत्पाद प्रयोग में लाऐं।
8.तनाव हमारी जिंदगी में काफी निगेटिव असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव कम करने के लिए सकारात्मक विचार बहुत मददगार साबित हो सकते हैं।
9.तनाव कम करने के लिए रोज कम से कम आधा घंटा ऐसे काम करें, जिसे करने में आपको मन लगता हो।
10.तनाव कम करने के लिए आप योग का भी सहारा ले सकते हैं।
11.गुस्सा तनाव बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है इसलिए गुस्सा आने पर स्वंय को शांत करने के लिए एक से दस तक गिनती गिनें।
12.उन लोगों से दूर रहने की कोशिश करें जो आपके तनाव को बढ़ाते हों।
13.धूम्रपान से परहेज करें। धूम्रपान से शरीर और उम्र पर असर तो पड़ता ही है, साथ ही फेफड़ों का कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी हो सकती है।
14.धूम्रपान में कमी लाने के लिए उसकी तलब लगने पर सौंफ आदि का सेवन करें।
15.मार्केट में भी आजकल बहुत से प्रोडक्ट मिलने लगे हैं जो धूम्रपान की तलब को कम करते हैं।

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