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कैसे करता है लीवर काम

कैसे करता है लीवर काम

यकृत या लिवर शरीर का सबसे बड़ा ग्रंथि अंग है और इसके सैकड़ों महत्वपूर्ण कार्य हैं। इसके तीन सबसे आवश्यक कार्य पाचन की सहायता के लिए पित्त का उत्पादन करना, रक्त से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को साफ करना और शरीर की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना है। आज हम जानेंगे कि लीवर कैसे काम करता है।
कैसे करता है लीवर काम
हम जो भी खाते हैं वह पहले आंतों (Intestines) में जाता है। वहां मौजूद एंजाइम भोजन को बारीक कणों में परिवर्तित कर देते हैं। इसके बाद आंतों से आधा पचा हुआ भोजन लिवर में जाकर स्टोर हो जाता है। आपको बता दें कि लिवर एक ऐसे फैक्ट्री की तरह होता है जो अधपचे भोजन के बारीक कणों में से पोषक तत्वों को छाटकर अलग करता है और रक्त प्रभाव के साथ सभी विटामिन और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचते हैं जहां इसकी जरूरत होती है।
लीवर के कार्य

1. यह उन विषैले तत्वों को अलग करता है जो पानी में घुलनशील होते हैं। फिर भी यह उन्हें किडनी में भेज देता है। इस तरह हानिकारक तत्व पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इसके अलावा जो अवशेष पानी में घुलने लायक नहीं होते वह लिवर मलाशय में चला जाता है और स्टूल के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है।

2. लिवर दवाओं के विषैले तत्व को निष्क्रिय करने का भी काम करता है।

3. लिवर रक्त में वसा, एमिनो एसिड और ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है।

4. इसके लावा लिवर शरीर को संक्रमण तथा हैमरेज से भी बचाता है।

5. लिवर प्रोटीन, एंजाइम और हार्मोन बनाने का भी काम करता है जो हमारी बॉडी को कई तरह की बीमारियों से बचाते हैं तथा कोशिकाओं की रिपेयर भी करता है।


6. लिवर बॉडी को एनर्जी भी देना है। इसके लिए वह स्टोर किए हुए कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में परिवर्तित करके शरीर को तुरंत उर्जा देता है।
7. आपको बता दें कि लिवर में आयरन, जरूरी विटामिंस और केमिकल्स का संग्रह होता है और यहीं से शरीर की जरूरतों के मुताबिक इन तत्वों की आपूर्ति होती है। – लीवर की देखभाल – ये 9 आहार करते हैं लीवर साफ
लीवर को मजबूत करने के टिप्स

1. लो शुगर, कम विषैले तत्व वाले आहार जो उच्च-फाइबर खाद्य पदार्थों से भरे हुए हैं, आपके लीवर के लिए सही माने जाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर की उच्च मात्रा लीवर क्षति और बीमारी को भी उलट सकती है।

2. ग्रेपफ्रूट विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट का एक बड़ा स्रोत है। दोनों अपने लीवर की सफाई के लिए आवश्यक हैं। यह फल एंजाइमों के उत्पादन को भी उत्तेजित करता है और लीवर फंक्शन का समर्थन करता है।


3. ग्रीन टी एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर है। इसमें आपके लीवर में जमा वसा को कम करने की क्षमता है और इस प्रकार लीवर फंक्शन को अनुकूलित करने में मदद मिलती है।

4. हल्दी का एक विशिष्ट स्वाद और सुगंध से भरा हुआ है। यह आपके लीवर के “पसंदीदा” आहारो में से एक है क्योंकि यह डिटॉक्सिफिकेशन और कैंसरजन्य कोशिकाओं से निपटने में मदद करता है।

5. अखरोट आपको ग्लूटाथियोन और ओमेगा 3 फैटी एसिड की एक अच्छी खुराक देता है। यह लीवर फंक्शन में सुधार करने का काम करता है।6. नींबू में आपके स्वास्थ्य के लिए इतने सारे फायदे हैं कि यह हमेशा घर में होना चाहिए। यह लीवर के लिए बहुत ही अच्छा होता है।


डॉक्टरों के मुताबिक उम्र के तीसरे दशक के बाद हर किसी को अपने स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान देना चाहिए। लिवर हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर से गंदगी को बाहर निकालता है तथा पाचन तंत्र को ठीक करता है और खुन को फिल्टर भी करता है। डॉक्टर कहते हैं कि 35 साल की उम्र के बाद एक बार लिवर फंक्शन टेस्ट करा लेना चाहिए, क्योंकि इस दौरान लिवर में एला-नाइन और एस-पारटेट एंजाइम्स का बढ़ा सीरम स्तर, लिवर गड़बड़ी का संकेत देता है।


वैसे आम धारणा है कि केवल एल्कोहल की वजह से ही लिवर खराब होता है, जबकि ऐसा नहीं है। केवल एल्कोहल ही लिवर का दुश्मन नहीं है, बल्कि खराब जीवनशैली और जंक फूड का ज्यादा सेवन भी आपके लिवर को खराब कर सकता है। ऐसा देखा गया है कि लिवर से जुड़ी परेशानी को समझने में देर हो जाती है। इसलिए आइए जानते हैं उन लक्षणों के बारे में, जिससे यह पता चल सके कि आपका लिवर खराब है।



पहला – त्वचा, नाखून और आंखों का पीलापन। ऐसा पित्त की अधिकता के कारण होता है, जिस कारण पेशाब में भी पीलापन नजर आता है।


दूसरा – लिवर में खराबी होने पर बाइल (पित्त ) एंजाइम मुंह तक आ जाता है, जिससे मुंह कड़वा रहने लगता है।


तीसरा – पेट में सूजन व हर समय भारीपन का एहसास हो रहा है तो यह लिवर खराब होने का संकेत हो सकता है।


चौथा – हर समय घबराहट व उल्टी की शिकायत रहती है। ऐसा शरीर में बनने वाले पित्त के कारण होता है।


पांचवा – हर समय आलस महसूस होना, किसी काम में मन न लगना और हर समय नींद आना आदि भी लिवर खराब होने का संकेत है।
आपके मन में यह सवाल उठता होगा कि लिवर खराब हो तो उसके लिए क्या किया जाए।


तो सबसे पहले यदि आप शराब पी रहे हैं, तो उसे आप सीमित कीजिए या फिर बिलकुल ही बंद कर दीजिए। क्योंकि यह आपके सेहत को तो खराब करता है, साथ ही आपके घर को भी तभा करता है।


दूसरा – नमक केवल हाई ब्लड प्रेशर का कारण नहीं होता बल्कि यह लिवर को भी हानि पहुंचाता है। इसलिए इसका भी सीमित मात्रा में सेवन कीजिए।


तीसरा – एक शोध में पाया गया है कि जिनके शरीर का निचला हिस्सा भारी होता है, वे आमतौर पर नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज से पीड़ित होते हैं। देर तक एक ही जगह बैठे रहने की वजह से नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है। हमारे शरीर की बनावट ऐसी है कि उसे स्वस्थ रखने के लिए सक्रिय रहना जरूरी है। अगर शरीर का मूवमेंट्स कम हैं, तो लिवर की सेहत बिगड़ सकती है।


इसके अलावा अपने लिवर को हेल्दी रखने के लिए आप कुछ आहार भी खा सकते हैं – जैसे आप ग्रेपफ्रूट का सेवन कीजिए। इसमें एंटीऑक्सिडेंट होता है जो लिवर के सूजन को कम करता है और उसकी रक्षा भी करता है। इसके अलावा आप ब्लूबेरी और कैनबेरी का भी सेवन कर सकते हैं।


इसमें भी एंटीऑक्सिडेंट पाया जाता है, जो लिवर को नुकसान से बचाने में मदद करता है। अगर आप ब्रोकोली और फूलगोभी का सेवन करते हैं, तो यह अच्छी बात है, क्योंकि यह लिवर को डैमेज से बचाता है और लिवर एंजाइमों के रक्त स्तर में सुधार करता है।



लिवर शरीर में सबसे बड़ा ग्रंथियों वाला अंग है और यह शरीर की शुद्धि के लिए विषाक्त और हानिकारक पदार्थों को निकालने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य करता है। लेकिन लिवर का सही तरह से देखभाल नहीं किया गया तो यह कमजोर भी हो सकता है।

वैसे लिवर रोग को हेपेटाइटिस भी कहा जाता है। शराब या वसा की खपत, या एक विरासत में मिली बीमारी के कारण हेपेटाइटिस होता है। बहुत ज्यादा शराब पीने से सिरोसिस के जोखिम बढ़ जाते हैं। यह लिवर में वसा और सूजन का कारण बनता है। आइए लिवर की कमजोरी के लक्षणों के बारे में जानते हैं।
स्किन का पीला होना

जब त्वचा रंगरहित तथा आँखें पीली दिखती हैं तब यह लिवर खराब या कमजोर होने के लक्षण हो सकते है। इसे हम पीलिया भी कहते हैं। इसमें त्वचा तथा आंखों का इस प्रकार सफ़ेद और पीला होना यह दर्शाता है कि खून में बिलीरूबिन ( एक पित्त वर्णक) का स्तर बढ़ गया है तथा इसके कारण शरीर से व्यर्थ पदार्थ बाहर नहीं निकल जाते हैं। उच्च बिलीरुबिन स्तर लिवर रोग का संकेत हो सकता है। समस्या बढ़ने पर क्रोनिक सक्रिय हेपेटाइटिस या सिरोसिस जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

नवजात शिशुओं में पीलिया होना आम बात है जिसे हम नियोनेटल जॉन्डिस के नाम से जानते हैं। हल्के मामलों वाले किसी विशेष उपचार के बिना शिशु ठीक हो जाते हैं। लेकिन उच्च सीरम बिलीरुबिन के स्तर वाले लोगों को चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है। इसमें पीले रंग का मलिनकिरण अकेले त्वचा तक सीमित नहीं है, बल्कि आंखों और मुंह को भी प्रभावित कर सकता है।
थकान होना

लिवर की कमजोरी का एक लक्षण यह भी है कि आपको थकान महसूस होने लगता है। जिगर या लिवर की बीमारी में रोगियों में थकावट सबसे आम लक्षण है, और उनके जीवन की गुणवत्ता पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। त्वचा का रूखा होना और आंखों के आसपास काले घेरे यह बताते हैं कि आपका लिवर सही नहीं है। यदि आपका लिवर उर्जा प्रदान करने के काम को सही से नहीं कर पाता है तो आपके शरीर का उर्जा प्रभावित होता है। और आप थका हुआ महसूस करते हैं।
ब्रेन फंक्शन पर असर

ब्रेन फंक्शन का नुकसान तब होता है जब लिवर खून से विषाक्त पदार्थों को हटाने में असमर्थ होता है। इसे लिवर इंसेफेलोपैथी कहा जाता है। यह समस्या अचानक हो सकती है या समय के साथ धीरे-धीरे विकसित हो सकती है।
भूख कम लगना
जब अचानक भूख कम लगे तो आप समझिए कि आपको लिवर की बीमारी हो सकती है। दरअसल भूख कम लगना भी लिवर खराब होने का एक लक्षण हो सकता है। वैसे यह लिवर फेलियर के पहले लक्षणों में से एक है।

लिवर की बीमारी से पीड़ित ज्यादातर लोग, विशेष रूप से अल्कोहल लिवर की बीमारी वाले लोगों को ट्यूमर नेक्रोटिक कारकों और खून में साइटोकिन्स के सर्कुलेशन के कारण भूख कम लग सकती है। भूख कम लगने से वज़न कम हो जाता है। ऐसे स्थिति में जहां रोगी बहुत अधिक अशक्त हो जाता है उन्हें नस के माध्यम से पोषक तत्व दिए जाते हैं।
खुजली होना

खुजली वाली त्वचा, या प्रुरिटस, कई प्रकार के मेडिकल कंडीशन में देखी जा सकती है और यह आपको बहुत ही परेशान कर सकती है। खुजली वाली त्वचा एक असहज रूप से होने वाली जलन की अनुभूति है, जिसमें आपको खुजलाने की इच्छा होती है। पित्त की रुकावट के साथ लिवर की बीमारियां आमतौर पर एक लक्षण के रूप में खुजली होती हैं, लेकिन इसे खुजली का कारण स्पष्ट रूप से नहीं समझा जाता है।
पेट में दर्द
लिवर की कमजोरी के अन्य लक्षण में पेट में दर्द होना भी शामिल है। पेट के ऊपरी दाहिने भाग में या पसलियों के नीचे दाहिने भाग में दर्द, लिवर के खराब होने का लक्षण है।

आपको बता दें कि आपका लिवर चोट या टॉक्सिन के जवाब में एंजाइम पैदा करता है। जब ये एंजाइम सामान्य की अपेक्षा उच्च स्तर पर आपके ब्लड स्ट्रीम में प्रवेश करते हैं तो इससे लिवर का कार्य शरीर के हर हिस्से को प्रभावित करता हैं। इससे पेट में दर्द, मतली और उल्टी हो सकती है।
मूत्र में परिवर्तन

लिवर की कमजोरी से अक्सर मूत्र या मल के रंग में भी बदलाव हो सकता है। यह लिवर की कमजोरी या खराब होने के लक्षण हो सकते हैं। मूत्र में परिवर्तन शरीर में बहने वाले रक्त में बिलीरूबिन का स्तर बढ़ जाने के कारण मूत्र का रंग गहरा पीला हो जाता है।




लीवर हमारे शरीर में कई महत्वपूर्ण काम करता है जैसे की भोजन पचाना और कार्य पित्त का उत्पादन करना होता है। जो भी हम खाते हैं, दवाओं समेत, वह हर चीज हमारे लीवर से होकर जाती है इसलिए इसका स्वस्थ्य होना बहुत ही जरूरी है। यदि आप लीवर की देखभाल करना चाहते हैं, लीवर की बीमारियों से खुद को दूर करना चाहते हैं या फिर लीवर की गंदगी को साफ करना चाहते हैं, तो नीचे दिए आहार पर एक बार नजर दौड़ाएं।
ये 9 आहार करते हैं लीवर साफ
#1 लहसुन

लहसुन की एक कली हमारे अंदर पैदा होने वाले अनेको रोगों का नाश कर सकता है। यह लिवर की गंदगी को साफ करने में मदद करता है। यह लिवर में उपस्थित उन एन्ज़ाइम्स को सक्रिय कर देता है जो लिवर को साफ करने में सहायक हैं। इसमें मौजूद ऐलिसिन और सेलेनियम लीवर की सफाई करने में सहायक हैं।
#2 ग्रेपफ्रूट

ये रसीले खट्टे फल होते हैं और प्राकृतिक रूप से लीवर की सफाई करता है। एंटीऑक्‍सीडेंट और विटामिन सी से भरपूर ये फल कई तरह के रोगों में एक दवा के रूप में काम करता है। यह फल न केवल वजन को कम करते हैं बल्कि जिगर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। इसका जूस पीने से किडनी स्टोन की भी समस्या नहीं रहती।
#3 चुकंदर और गाजर

जो व्यक्ति नियमित रूप से चुकंदर का जूस पीता है उससे न केवल कमजोरी से मुक्ति मलती है बल्कि लीवर के सभी कार्यों में सुधार होता है। फ्लेवोनॉइड और बीटा कैरोटीन से समृद्ध चुकंदर लीवर की कोशिकाओं की मरम्म्त करने का काम करता है। लीवर के लिए चुकंदर के अलावा आप गाजर का भी सेवन कर सकते हैं।
#4 साबुत अनाज

फाइबर से भरपूर साबुत अनाज पेट में गैस बनने वाली प्रक्रिया को कम करने में सहायक होते हैं। इससे हमारा पेट दुरुस्त रहता है साथ ही यह हमारे शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। साबुत अनाज में विटामिन बी कॉमप्लेतक्सर की मात्रा अच्छी खासी होती है। इसका नियमित सेवन लीवर की कार्यप्रणाली को सही रखता है।
#5 जैतून का तेल


जैतून का तेल त्वचा संबंधी समस्याओं और सौंदर्य बढ़ाने के लिए भी खूब प्रयोग किया जाता है। इसे लीवर के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है। विटामिन के साथ-साथ इस तेल में आयरन और पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो बालों की कोमलता और मजबूती बढ़ाने के साथ-साथ शरीर हानिकारक विषाक्त पदार्थों को सोख सकता है और लीवर के कार्य को आसान करता है।
#6 एवोकैडो

मखनफल के नाम से मशहूर और विटामिन ई से भरपूर एवोकैडो अमेरिकी महाद्वीप का फल है। यह विषाक्त पदार्थों से शरीर की रक्षा करता है। इसमें मौजूद लूटाथोनिन तत्वर और मोनोसैचुरेटेड फैट लीवर की सफाई का काम करते हैं। यह गर्मियों में आपके बालों के लिए भी फायदेमंद रहता है।
#7 सेब

लीवर के लिए सेब बहुत ही फायदेमंद है। एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर सेब से न केवल पाचनशक्ति मजबूत होती है बल्कि यह शरीर से विषाक्त पदार्थ को भी बाहर निकालता है। इसके अलावा सेब का रस आंतों के सूजन में लाभदायक है।
#8 ब्रोकोली

प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, क्रोमियम, विटामिन ए और विटामिन सी ये है ब्रोकली के स्रोत। इसमें मौजूद ग्लूककोसिनोलेट्स तत्वक लीवर में एंजाइम को पैदा करते हैं, जिसकी मदद से लीवर के अंदर की सफाई होती है। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जिोयों का भी सेवन कर सकते हैं।
#9 ग्रीन टी

ग्रीन टी हृदय रोग होने की संभावनाओं को कम करने कोलेस्ट्राल को कम करने के साथ ही शरीर के वजन को भी नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होता है। ग्रीन टी में ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो लीवर से फ्री रेडिकल्सा को बाहर निकालने में मदद करता है।
#10 ब्लूबेरी और क्रैनबेरी

ब्लूबेरी और क्रैनबेरी दोनों में एंथोकायनिन और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो जामुन को अपने विशिष्ट रंग देते हैं। ये कई स्वास्थ्य लाभों से भी जुड़े हुए हैं। कई अध्ययनों से पता चला है कि क्रैनबेरी और ब्लूबेरी का सेवन करने से लिवर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। इन फलों को 3-4 सप्ताह तक लेने से लिवर को क्षतिग्रस्त होने से सुरक्षित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, ब्लूबेरी में इम्यून सेल और एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम को बढ़ाने में मदद मिलती है। ब्लूबेरी और क्रैनबेरी को अपने आहार का हिस्सा बनाइए, जिसका आपका लिवर स्वस्थ्य रहे।
#11 अंगूर

अध्ययनों से पता चलता है कि अंगूर बहुत जिगर-अनुकूल भोजन हैं। अंगूर, विशेष रूप से लाल और बैंगनी अंगूर, में कई फायदेमंद यौगिक होते हैं। सबसे प्रसिद्ध एक रेस्वेराट्रोल है, जो कई स्वास्थ्य लाभ है। अध्ययनों से पता चला है कि अंगूर और अंगूर का रस लिवर को लाभ पहुंचा सकता है। अध्ययनों से पता चला है कि इससे सूजन कम करने, क्षति को रोकने और एंटीऑक्सिडेंट स्तर बढ़ने सहित विभिन्न लाभ मिल सकते हैं।








आज के समय में लीवर की समस्या बहुत ही तेजी बढ़ती जा रही है। खान पान पर विशष ध्यान नहीं देने से लीवर खराब हो जाता है। इसमें लीवर का फैटी होना, सूजन आ जाना और लीवर में इन्फेक्शन हो जाना आदि शामिल है। आज हम लीवर सिरोसिस के लक्षण तथा बचने के उपाय के बारे में बात करेंगे।
लीवर सिरोसिस क्या है


सिरोसिस लीवर की बीमारियों और स्थितियों, जैसे हेपेटाइटिस और क्रोनिक अल्कोहोलिस्म के कई रूपों के कारण लीवर के स्कार्रिंग (फाइब्रोसिस) का एक लेट स्टेज है। लीवर आपके शरीर से हानिकारक पदार्थों को निकालने, रक्त की सफाई करने और महत्वपूर्ण पोषक तत्व बनाने सहित कई आवश्यक कार्यों को पूरा करता है।

यह पित्त का उत्पादन, जो आहार वसा, कोलेस्ट्रॉल, और विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘डी’, विटामिन ‘ई’, और विटामिन ‘के’ को अवशोषित करने में शरीर की मदद करता है।
लीवर सिरोसिस कैसे विकसित होता है
लीवर एक बहुत ही हार्डी ऑर्गन है और यह आमतौर पर क्षतिग्रस्त कोशिकाओं या डैमेज सेल्स को पुन: उत्पन्न करने में सक्षम है। सिरोसिस तब विकसित होता है जब लीवर को नुकसान पहुंचाने वाले कारक (जैसे शराब और क्रोनिक वायरल इंफेक्शन) लंबे समय तक मौजूद होते हैं। जब ऐसा होता है, तो लीवर को नुकसान पहुंचता है। खराब लीवर ठीक से काम नहीं कर सकता है और अंततः यह सिरोसिस की समस्या से गुजरता है।

सिरोसिस की वजह से लीवर सिकुड़ने और सख्त होने लगता है। यह लीवर में पोषक तत्व रक्त के प्रवाह को मुश्किल बनाता है। पोर्टल वेन पाचन अंग से लीवर तक रक्त ले जाता है। पोर्टल वेन में दबाव तब बढ़ता है जब रक्त लीवर में नहीं जा पाता।
लीवर सिरोसिस के कारण


सिरोसिस का सबसे आम कारण दीर्घकालिक वायरल हेपेटाइटिस सी इंनफेक्शन और शराब का ज्यादा इस्तेमाल है। मोटापा भी सिरोसिस का कारण है, हालांकि यह शराब या हेपेटाइटिस सी के रूप में ज्यादा प्रचलित नहीं है।
ऐसा माना जाता है कि जो लोग शराब का ज्यादा सेवन करते हैं उनमें लीवर सिरोसिस की समस्या ज्यादा होती है। ऑस्ट्रिया के वियना में इंटरनेशनल लिवर कांग्रेस 2015 में पाया गया कि यदि महिला एक ड्रिंक और पुरुष 2 ड्रिंक से ज्यादा शराब का सेवन करते हैं तो लीवर सिरोसिस का खतरा बढ़ सकता है।


वहीं अगर बात हेपेटाइटिस सी की करें तो यदि संक्रमित रक्त आपके शरीर में जाए या फिर आप असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं तो वायरल हेपेटाइटिस सी इंनफेक्शन होने का खतरा रहता है, जिससे लीवर सिरोसिस हो सकता है।
लीवर सिरोसिस के लक्षण

लीवर सिरोसिस के लक्षण तब दिखाई देता है जब लीवर रक्त को शुद्ध करने, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और प्रोटीन का उत्पादन करने में असमर्थ होता है। आइए जानते हैं इसके लक्षणों के बारे में – भूख का कम लगना, त्वचा के नीचे छोटे मकड़ी के आकार की धमनियां, वजन घटना, एनोरेक्सिया, त्वचा में खुजली और दुर्बलता या वीकनेस शामिल है। – लीवर की देखभाल – ये 9 आहार करते हैं लीवर साफ
लीवर सिरोसिस से कैसे बचा जाए

1. यदि आप शराब का सेवन करते हैं तो इसे आप बहुत सीमित या बंद कर दीजिए क्योंकि शराब पीने आपको लीवर सिरोसिस होने का ज्यादा खतरा रहता है।

2. अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा फलों और सब्जियों को शामिल कीजिए। इसके अलावा आप साबूत अनाज का सेवन कीजिए तथा लीन प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल कीजिए।


3. तले हुए आहार और फैटी आहार का कम से कम सेवन कीजिए।

5. शरीर में जमा अतिरिक्त फैट आपके लीवर को नुकसान पहुंचा सकते है। यदि आप मोटे या अधिक वजन वाले हैं तो वजन घटाने के प्लान के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

6. नीडल शेयरिंग और असुरक्षित यौन संबंध रखने से हेपेटाइटिस सी के जोखिम में वृद्धि हो सकती है। इसलिए सावधानी बरतें और डॉक्टर से बात करें।




हमारा लीवर आपके शरीर में 500 से अधिक कार्यों को करने वाला सबसे बड़ा आंतरिक अंग है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि लिवर को बीमारियों से दूर रखा जाए और इसे स्वस्थ बनाए रखने के लिए सही आहार का सेवन जाए। नीचे दिए गए कुछ खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करने से लीवर को इलाज करने में बहुत ही मदद मिलेगी।
#हल्दी

हल्दी का एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटोइड अर्थराइटिस के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। इसके अलावा यह लिवर रोग में भी बहुत फायदेमंद है। हल्दी का इस्तेमाल भारतीय भोजन में रंग, स्वाद और न्यूट्रिएंट्स के लिए होता है। इसे जादुई मसाला कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेट्री, एंटीबैक्टेरियल गुण होते हैं जो लिवर एकदम दुरूस्त रखने में मदद करते हैं।
#अदरक


अदरक लिवर को ऐसे तत्व देता है जिससे इसका काम की क्षमता बढ़ जाती है। अदरक एक शक्तिशाली सुगंधित जड़ी बूटी और विटामिन सी का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत है और इसमें कई तरह के खनिज पाए जाते हैं। यह भी एंटीऑक्सीडेंट गुणों का खजाना है। शोध में यह बात साबित हो चुकी है कि अदरक का प्रयोग आपके लीवर को तंदुरूस्त रखने मदद करता है। – अदरक और शहद के फायदे
#नींबू
विटामिन सी के समृद्ध स्रोत के रूप में, नींबू का रस शरीर को प्रतिरक्षा प्रणाली या इम्यून सिस्टम की कमी से बचाता है। इसके लिए हर सुबह गर्म पानी के साथ आप नींबू के रस का सेवन कीजिए। इसे पीने से शरीर के पीएच संतुलन को बनाए रखने में मदद मिलती है। नींबू का पेट या पाचन को दुरूस्त करने के लिए कई बार आपके सामने सलाह के रूप में आया होगा। हर दिन की शुरुआत नींबू और गर्म पानी के साथ करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा यह लीवर की क्रियाओं को नींबू जमकर बूस्ट देता है।
#चुकंदर
चुकंदर का रस विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है। विटामिन सी एक एंटीऑक्सिडेंट है, जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली या इम्यून सिस्टम को बढ़ावा देने में सहायता करता है और कोशिकाओं को मुक्त कणों को नुकसान पहुंचाने से बचाता है। इसके अलावा खून को हीमोग्लोबिन और आपको हेल्थ की लालिमा देने वाला चुकंदर कई गुणों का खजाना है। कई तरह की बीमारियों से आपकी रक्षा के अलावा चुकंदर आपके लिवर को भी कई गुना अधिक ताकतवर बनाने में सहायता करता है। – 

#एवोकाडो

एवोकाडो एक स्वस्थ वसा वाला फल है और यह फाइबर में समृद्ध हैं, जो वजन नियंत्रण में मदद कर सकता है। ग्लूटेथिओन एवोकाडो द्वारा उत्पादित एक कंपाउंड है जो शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को हटाने में मदद करता है। शोधकर्ताओं ने एवोकाडो में रसायनों की खोज की है जो सक्रिय रूप से लिवर की क्षति को कम करते हैं।
#अंगूर

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए डिटॉक्सिफिकेशन महत्वपूर्ण है और सबसे अच्छी चीज जो आपको ऐसा करने में मदद कर सकती है वह लहसुन है। लहसुन एलिसिन में समृद्ध है। यह एक एंटीऑक्सिडेंट है जो शरीर को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाता है। एलिसिन मुख्य बायोएक्टिव कंपाउड है, जो से हानिकारक पदार्थों को दूर करता है।
#कलौंजी का तेल

भारत के लगभग हर किचन में मिलने वाले कलौंजी में मौजूद शरीर की हर समस्या के समाधान के रूप देखा जाता है। कलौंजी के बारे में कहा जाता है कि यह कलयुग की संजीवनी बूटी है। टीऑक्सीडेंट से भरपूर कलौंजी शरीर की प्रतिरोधकता बढाने में पूरी तरह से समझ है। एंटीऑक्सीडेंट कैंसर से लडते हैं इसके अलावा लिवर की हेल्थ भी कलौंजी से बढ़िया रहेगी।


लिवर को स्वस्थ रखने के लिए 

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए 
लिवर मुख्य रूप से रक्त में विषाक्त पदार्थों के फ़िल्टर के रूप में कार्य करता है ताकि जहरीले पदार्थों को साफ किया जा सके जो आपके शरीर में कई तरह की समस्याएं पैदा कर सक सकती हैं। इस कारण से इसे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक माना जाता है और आपके अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए इसकी देखभाल करना करना चाहिए।
ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन कीजिए


पानी न सिर्फ आपकी प्याीस बुझाता है बल्किे यह आपके बॉडी के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। सिर्फ पानी पी लेने भर से ही आप कई तरह के रोगों से दूर रह सकते हैं। आपको दिन में लगभग दो लीटर या 7 से 8 गिलास पानी का सेवन करना चाहिए।

यह लिवर को डिटॉक्सीफाई करने के सबसे आसान तरीकों में से एक है। यह लिवर को अच्छी तरह से हाइड्रेटेड करता है। इसके जरिए आप लिवर से विषैले पदार्थ को बाहर निकाल सकता है। पानी कैलोरी को बर्न करने और वजन घटाने में सहायता करता है।
नींबू पानी

लिवर यानि जिगर, यह शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। अगर ऐसे में लिवर काम करना बन कर दे तो शरीर की कार्य करने की क्षमता ना के बराबर हो जाती है। नींबू में मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर्स बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है।
लिवर को साफ करने के उपाय में आप अपने आहार में नियमित रूप से नींबू को शामिल करें। लगातार नींबू के सेवन से पित्त के रिजनरेशन और प्रोडक्शन में मदद मिल सकती है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो आपके शरीर से जहरीले पदार्थों को हटाने में मदद कर सकता है। इसलिए अपने आहार में कम से कम आधा गिलास नींबू का रस शामिल कीजिए।
ग्रीन टी

ग्रीन टी दुनिया में सबसे ज्यादा पी जाने वाली पेय पदार्थों में से एक है। यह सबसे स्वस्थ पेय पदार्थों में से एक है। यह एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्वों से भरा हुआ है जिनका शरीर पर शक्तिशाली प्रभाव पड़ता हैं। ग्रीन टी कैचिन नामक कंपाउड से भरपूर है। कैचिन कंपाउड अपने एंटीमाइक्रोबायल गुणों के लिए जाना जाता है।

इसके अंदर कैंसर से लड़ने की क्षमता है। इसके कारण यह एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है, जो लिवर के कार्यों को उत्तेजित कर सकता है। इस प्रकार ग्रीन टी एक ऐसा पौधा है जो इस महत्वपूर्ण अंग की सफाई में काफी प्रभावी ढंग से मदद कर सकता है। – 
लाल फलों का सेवन

लिवर को साफ करने के उपाय में आप उन फलों का सेवन कर सकते हैं, जो लाल फल है। ये फल स्वादिष्ट होने के साथ-साथ आपके स्वास्थ्य को मजबूत करके आपकी मदद कर सकता हैं।

जब आप स्ट्रॉबेरी, मलबरी, ब्लूबेरी, क्रैनबेरी और रास्पबेरी से बने स्मूदी का सेवन करते हैं, तो आप लिवर की बीमारियों, जैसे सिरोसिस और हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, और हेपेटाइटिस सी के जोखिम को कम कर सकते हैं, क्योंकि इन फलों में कुछ फायदेमंद एसिड पाया जाता हैं, जो रक्त शर्करा या ब्लड शुगर के स्तर को कम करने में सहायता करता है और इसी कारण से ये लिवर में वसा की मात्रा को भी कम करता है।
लहसुन
लिवर हमारे शरीर का एक अहम हिस्सा होता है। लीवर खाना पचाने और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अपने लिवर को अच्छे तरह से काम करने और किसी भी समस्या से बचने के लिए आप लहसुन का सेवन कीजिए।





लिवर शरीर के कई जरूरी कामों जैसे पाचन, मेटाबॉलिज्म, इम्यूनिटी और पोषक पदार्थों के स्टोरेज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आपको बता दें एक स्वस्थ व्यक्ति के लिवर का वजन करीब एक से डेढ़ किलोग्राम होता है। लिवर का स्थान ज्यादातर डायाफ्राम के नीचे, पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में होती है। यह हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है।

लीवर हमारे रक्त की संचरना को नियंत्रित करता है, उसमें से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और आंतों के द्वारा भोजन में से अवशोषित किये गए पोषक पदार्थों को शरीर के उपयोग करने लायक बनाता है। यह ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में परिवर्तित करके एनर्जी मेटाबॉल्जिम को संतुलित करता है।

अनहेल्दी खानपान और ख़राब जीवनशैली की वजह से आपके लिवर पर कम का लोड बढ़ता है, जिससे यह विषाक्त पदार्थों और फैट को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता। यदि आपका लिवर सही तरह से काम न करे तो मोटापा, दिल की बीमारी, लंबी थकान, सिरदर्द, पाचन में गड़बड़ी, एलर्जी और अन्य बीमारियां हो सकती हैं।

दुर्भाग्य से, ऐसी कई बीमारियां हैं जो लिवर और उसके कामकाज को प्रभावित कर सकती हैं। लिवर को प्रभावित करने वाली सामान्य स्थितियों के उदाहरणों में शामिल हैं:- ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस, बिलारी अत्रेसिया, सिरोसिस, हेमोक्रोमैटोसिस, हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी।
लिवर के लिए काम करे लहसुन

लीवर को साफ, सक्रिय और विषाक्त पदार्थों से रहित बनाने के लिए आपको लहसुन का सेवन करना चाहिए। लिवर को साफ करने में लहसुन काफी गुणकारी होता है।

लहसुन प्रत्येक रसोईघर में एक आम घटक है, प्राचीन काल से ही, यह अपने कई स्वास्थ्य लाभकारी गुणों के लिए अत्यधिक मूल्यवान है। एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों से भरपूर लहसुन लिवर में एंजाइम्स को सक्रिय करने में मदद करता है, इससे विषाक्त पदार्थों को साफ करने में मदद मिलती है। – लीवर क्या है, उसके कार्य और लीवर के रोग

साथ ही इसमें एलिसिन और सेलेनियम नामक दो नैचरल कंपाउंड पाए जाते हैं, जो लिवर-क्लीनिंग प्रोसेस को बढ़ाते हैं। इसके अलावा, लहसुन कलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड स्तर को कम करता है। यह दोनों लिवर को ओवरलोड करते हैं।
लहसुन के अन्य फायदे


1. अमेरिकी वैज्ञानिकों ने पाया कि लहसुन एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को 10 फीसदी तक कम करने में मदद कर सकता है।
2. वैज्ञानिकों का प्रमाण है कि लहसुन हृदय रोगों को रोकने में मदद कर सकता है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल, लिपिड, और सीरम ट्राइग्लिसराइड को कम करके कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों को रोकने में मदद करता है।

3. यह पेट और पाचन तंत्र को ठीक करने में सहायता कर सकता है। इसलिए, यदि आप आंतों की समस्याओं से पीड़ित हैं, तो आप लहसुन का सेवन करना शुरू कर दीजिए।

4. हाई ब्लड शुगर मधुमेह, रक्तचाप, मोटापे आदि को बढ़ाने का काम करत है। यदि आप हाई ब्लड शुगर से पीड़ित हैं, तो आपको अपने आहार में लहसुन शामिल करना चाहिए।

5. लहसुन आपके इम्यून सिस्टम को बढ़ाने में मदद करता है। लहसुन में फाइटोन्यूट्रिएंट होते हैं जो नेचर में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। एंटीऑक्सिडेंट विषाक्त पदार्थों को दूर करते हैं और शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं और आपको बीमार पड़ने से रोकते हैं।

6. सामान्य सर्दी और अस्थमा के इलाज के लिए लहसुन का उपयोग लाभकारी माना जाता है। छाती के जमाव के इलाज के लिए नाक के पास और गले और फेफड़ों के क्षेत्र में लहसुन और सरसों के तेल की मालिश कीजिए। आपको आराम मिलेगा।


लिवर इन्फेक्शन से बचाए ये 5 टिप्स



लिवर मानव शरीर में सबसे आवश्यक अंगों में से एक है। यह सबसे बड़ा आंतरिक अंग है। यह हार्मोन से लड़ने से लेकर कई कार्य करता है। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के पाचन में भी लिवर की बड़ी भूमिका है। विभिन्न आवश्यक कार्यों को करने वाले इस महत्वपूर्ण अंग की ठीक से देखभाल करना बहुत ही जरूरी है। आइए जानते हैं कि लिवर इन्फेक्शन से कैसे बचा जाए।
शराब की मात्रा को सीमित करें

हम सभी जानते हैं कि शराब हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है। यह शारीरिक रूप से हमें नुकसान तो पहुंचाता ही है साथ ही यह परिवार में कलह का भी कारण बनता है।

इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपका लिवर स्वस्थ्य रहे और इन्फेक्शन से बचा रहे तो शराब की मात्रा को कम या सीमित करें। हो सके तो आप इसे छोड़ ही दें। यदि आप ज्यादा शराब का सेवन करते हैं तो आपको लिवर सिरोसिस होने का खतरा रहेगा जो एक लिवर की एक बीमारी है।
सही वैक्सीनेशन लीजिए
हेपेटाइटिस वायरस को लिवर के कार्य करने के लिए अत्यधिक हानिकारक माना जाता है। हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस बी लिवर को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे विषाक्त पदार्थों को बेअसर करने की अपनी क्षमता को कम करता है, इस प्रकार लिवर संक्रामक बीमारियों से ग्रस्त होता है। यदि आपको हेपेटाइटिस वायरस होने का खतरा है तो सही वैक्सीनेशन (टीकाकरण) लेने के लिए डॉक्टर से परामर्श लें।
दवाओं का सेवन करते समय सावधानी


यकृत संक्रमण या लिवर इन्फेक्शन का एक आम कारण दवाओं की अनियंत्रित मात्रा है। जब आप अनियंत्रित मात्रा में दवा लेते हैं तो आपका लिवर खराब हो सकता है। प्रेस्क्रिप्शन और नॉन प्रेस्क्रिप्शन वाली दवाओं का सेवन तभी किया जाना चाहिए जब आवश्यक हो और वह भी डॉक्टर द्वारा सिफारिश की गई हो।

किसी भी दवा लेने या अपनी दवा मिश्रण करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें। जब आप किसी वजह से दवाओं का ज्यादा सेवन कर रहे हैं तो शराब के सेवन से बचें ताकि लिवर पर अतिरिक्त भार से बचा जा सके। – 
प्रोसेस्ड पोर्क का करें परहेज
प्रोसेस्ड मीट, विशेष रूप से पोर्क लिवर इन्फेक्शन का एक प्रमुख कारण है। प्रोसेस्ड पोर्क को अक्सर नाइट्रेट्स जैसे रसायनों का उपयोग करके संरक्षित किया जाता है।

नाइट्रेट्स को नाइट्रोसामीनेस में परिवर्तित किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। पोर्क का अत्यधिक सेवन लिवर कैंसर का कारण बन सकता है। इसलिए, यह सिफारिश की जाती है कि लिवर संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए प्रोसेस्ड पोर्क से बचा जाए।


क्या है लिवर कैंसर – लिव कैंसर दो प्रकार का होता है। प्राथमिक लिवर कैंसर सीधे लिवर की कोशिकाओं में पनपता है, जबकि मेटास्टैटिक कैंसर लिवर का द्वितीय कैंसर है, जो दूसरे अंगों में प्रारंभ होता है और लिवर में फैल जाता है।
अपने वजन को रखें नियंत्रित


मोटापा बिना शराब के भी फैटी लिवर रोग का कारण बन सकता है। लिवर में कुछ वसा होता है लेकिन जब यह लिवर के वजन से 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ता है, तो इससे लिवर डिजीज होने का खतरा रहता है। अपने वजन को कम करने के लिए आप कम से कम एक घंटा जरूर व्यायाम करें। इसके स्वस्थ वजन और स्वस्थ लिवर को बनाए रखने के लिए प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड से बचें।
आपको बता दें कि 10 से 20 प्रतिशत लोगों में फैटी लिवर की समस्या देखी जाती है। यह 50 से 60 वर्ष वाले आयु वर्ग के लोगों में अधिक पाई जाती है। लिवर में वसा का जमाव अधिक होने से कई बार यह सूज जाता है और इसकी कार्य करने की गति धीमी हो जाती है। –

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