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गर्भावस्था में कमर दर्द : कारण और घरेलू उपाय

गर्भावस्था में कमर दर्द : कारण और घरेलू उपाय
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गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझना पड़ता है, जिसमें से एक कमर दर्द भी है। कमर या पीठ दर्द होना सामान्य सी बात हैै, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यह समस्या तनावपूर्ण होती है। इस ब्लॉग में हम गर्भावस्था में कमर दर्द (
 से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं, जिनकी मदद से महिलाएं गर्भावस्था के दौरान पीठ दर्द के तनाव से मुक्त रहेंगी।1.गर्भावस्था में कमर दर्द क्यों होता है?
(Garbhavastha me kamar dard kyun hota hai)
2.क्या प्रेगनेंसी में कमर दर्द होना सामान्य है?
(Kya garbhavastha me kamar dard hona normal hai)
3.गर्भावस्था में कमर दर्द कम करने के घरेलू उपाय क्या हैं? (Garbhavastha me kamar dard kam karne ke gharelu upay kya hai)4.
गर्भावस्था में कमर दर्द से कैसे बचें?
(Garbhavastha me kamar dard se kaise bache)5
.गर्भावस्था में कमर दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह कब लें? (Pregnancy me kamar dard hone par doctor ki salah kab le)1.
गर्भावस्था में कमर दर्द क्यों होता है?
(Garbhavastha me kamar dard kyun hota hai)गर्भावस्था में कमर दर्द (pregnancy me kamar dard) से प्रसव के समय तक हर महिला को जूझना पड़ता है, जिसमें किसी को कम तो किसी को ज्यादा होता है। गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय का आकार बढ़ने की वजह से कमर दर्द होता है और यह उन महिलाओं को ज्यादा होता है, जोकि पहले भी मां बन चुकी हैं। गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं के शरीर में प्रोटीन (protein in hindi), कैल्शियम (calcium in hindi) आदि ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी होती है, जिसकी वजह से उन्हें इस दौरान कमर दर्द हो सकता है। जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान बिल्कुल भी व्यायाम नहीं करती हैं, उन्हें कमर दर्द की शिकायत अक्सर बनी रहती है। गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था के समय हल्का फुल्का व्यायाम करती रहें, ताकि उन्हें कमर दर्द की शिकायत न हो। तो चलिए अब बात करते हैं कि गर्भावस्था में कमर दर्द होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं? गर्भावस्था में शरीर में दर्द होना स्वाभाविक है, जिसमें कमर दर्द भी शामिल है। यूं तो कमर दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन हम आपको गर्भावस्था में कमर दर्द होने के कुछ महत्वपूर्ण कारणों के बारे में नीचे बता रहे हैं -
तनाव (stress in hindi) - गर्भवती महिलाओं को तनाव नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह मां के साथ साथ शिशु पर भी बुरा असर डालता है। तनाव की वजह से उन्हें गर्भावस्था में कमर दर्द हो सकता है। इस दौरान तनाव बढ़ने के साथ - साथ उनका कमर दर्द बढ़ सकता है।
हार्मोन बदलाव - गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव भी सामान्य है। गर्भावस्था के दौरान आपका शरीर रिलैक्सिन हार्मोन (relaxin hormone in hindi) बनाता है, यह कमर की हड्डियों के जोड़ों को ढीला करता है, ताकि शिशु का जन्म आसानी से हो सके। इस हार्मोन की वजह से आपको प्रेगनेंसी में कमर दर्द हो सकता है।
वजन बढ़ना (weight gain in hindi) - आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का वजन 12-15 किलो तक बढ़ता है। जिसका प्रभाव रीढ़ की हड्डी और कमर पर पड़ता है और उन्हें गर्भावस्था में कमर दर्द हो सकता है। इसके अलावा गर्भाशय के बढ़ने की वजह से कमर की रक्त वाहनियों पर प्रभाव पड़ता है, यह भी उनके कमर दर्द का एक कारण हो सकता है।
पेट की मांसपेशियों में बदलाव - प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती के पेट की मांसपेशियों में बदलाव होता है। जैसे जैसे प्रसव का समय नजदीक आता है, वैसे वैसे गुदा और पेट की मांसपेशियां (जोकि समांतर होती है) अलग होने लगती हैं, इसलिए गर्भावस्था में कमर दर्द की समस्या होती है।
अधिक वजन उठाना - अधिक वजन उठाने से भी आपको गर्भावस्था में कमर दर्द हो सकता है। इस दौरान अगर आप ज्यादा वजन उठाएंगी तो यह रीढ़ की हड्डियों पर बुरा असर डालता है, जिसकी वजह से आपको कमर दर्द की शिकायत हो सकती है।
रीढ़ की हड्डी का कमजोर होना - जिन महिलाओं की रीढ़ की हड्डी कमजोर होती है, उन्हें गर्भावस्था के दौरान कमजोरी के कारण काफी ज्यादा कमर दर्द होता है।नोट -अगर प्रेगनेंसी के दौरान आपको असहनीय कमर दर्द हो रहा है, तो एक बार डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।2.क्या प्रेगनेंसी में कमर दर्द होना सामान्य है? (Kya garbhavastha me kamar dard hona normal hai)गर्भावस्था में कमर दर्द (pregnancy me kamar dard) होना सामान्य है, इस दौरान लगभग हर महिला को इस समस्या का सामना करना पड़ता है। कई बार रात को ठीक से सो ना पाने की वजह से भी महिलाएं कमर दर्द महसूस करती हैं। इसके अलावा जरूरत से ज्यादा काम करने की वजह से भी कमर दर्द हो सकता है, इसलिए गर्भवती महिला को लगातार काम नहीं करना चाहिए। अगर आपको प्रेगनेंसी में कमर दर्द (back pain in hindi) ज्यादा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि यह प्रसव का संकेत हो सकता है। गर्भावस्था में पीठ या कमर के साथ ही बाकी हड्डियों में दर्द होना गठिया रोग लक्षण हो सकता है। प्रेगनेंसी में गठिया रोग से शिशु पर बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए इस बारे में एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह लें।3.गर्भावस्था में कमर दर्द कम करने के घरेलू उपाय क्या हैं? (Garbhavastha me kamar dard kam karne ke gharelu upay kya hai)
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गर्भावस्था में कमर दर्द महसूस होने पर महिलाएं नीचे लिखे खास उपायों को अपना सकती हैं -
व्यायाम करें (exercise in hindi) - गर्भावस्था में कमर दर्द (pregnancy me kamar dard in hindi) से राहत पाने के लिए आपको यह हल्का व्यायाम करना चाहिए। आप हाथों और घुटनों के बल आ जाएं, इसके बाद अपनी कमर को सहजता से सीधा करें। ऐसा करीब दस से पंद्रह सेकेण्ड के लिए करें। आप इसे दिन में कई बार दोहरा सकती हैं, इससे आपका कमर दर्द कम हो जाएगा।
गर्म पानी से नहाएं और सिकाई करें - गर्भावस्था में कमर दर्द को कम करने के लिए आप गर्म पानी से नहा सकती हैं। गर्म पानी दर्द को कम करने में कारगर होता है। इसके अलावा आप चाहे तो सिर्फ कमर की सिकाई भी कर सकती हैं।
कमर की मालिश करें - गर्भावस्था में कमर दर्द होने पर आप मालिश करवा सकती है, क्योंकि मालिश से आपको जल्द ही आराम मिलेगा, लेकिन ध्यान रहे कि मालिश के लिए आप सिर्फ तेल का इस्तेमाल करें, क्रीम का नहीं।
सही से लेटें - प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के अंतिम दौर से पीठ के बल सोने से परहेज करें, क्योंकि इस दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के वजन से आपकी पीठ व कमर की नसें दब सकती हैं और आपको कमर दर्द हो सकता है। कमर दर्द से छुटकारा पाने के लिए आपको दायीं करवट से सोना चाहिए और इस दौरान अपने दोनों घुटनो के बीच में एक या दो तकिये लगा लें।
आराम करें - गर्भावस्था में कमर दर्द को कम करने के लिए आपको पर्याप्त मात्रा में आराम करना चाहिए और इस दौरान आपको काम करने से बचना चाहिए। जब भी आपको कमर दर्द हो तो थोड़ी सी देर के लिए सही करवट से लेट जाएं या चाहें तो आरामकुर्सी पर बैठ जाएं।
टाइट कपड़े न पहनें - गर्भावस्था में टाइट कपड़े पहनने की वजह से गर्भवती की कमर की नसें दब जाती हैं और पीठ की मांसपेशियों में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे उसे कमर दर्द हो सकता है। ऐसे में गर्भावस्था में कमर दर्द से राहत पाने के लिए ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें।
सकारात्मक सोचें - गर्भावस्था में कमर दर्द को कम करने के लिए जरूरी है कि आप सकारात्मक सोच रखें। साथ ही आप किसी भी नकारात्मक ख्याल को अपने मन में ना लाएं और तनाव से बचें।
ऊंची एड़ी की सैंडल न पहनें - कुछ महिलाएं गर्भावस्था के दौरान ऊंची एड़ी की सैंडल पहनती हैं, लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। दरअसल, ऊंची एड़ी की सैंडल कमर पर बुरा असर डालती है, जिससे दर्द बढ़ सकता है। गर्भावस्था में कमर दर्द से राहत पाने के लिए आप सपाट चप्पलें ही पहनें।4. गर्भावस्था में कमर दर्द से कैसे बचें? (Garbhavastha me kamar dard se kaise bache)
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प्रेगनेंसी में कमर दर्द (pregnancy me kamar dard) लगभग हर महिला को होता है, लेकिन अगर आप थोड़ी सी सावधानी रखेंगी, तो आपको इससे राहत मिल सकती है। गर्भवती महिला को गर्भावस्था की शुरूआत से ही अपना खास ध्यान रखना चाहिए।व्यायाम करें -गर्भावस्था में कमर दर्द से बचने के लिए आपको शुरूआत से ही व्यायाम करने की आदत डालनी चाहिए, लेकिन अगर आपको व्यायाम करने की आदत नहीं है, तो धीरे धीरे व्यायाम करने की शुरुआत करें। दरअसल, व्यायाम वजन को नियंत्रित करता है, इससे कमर दर्द कम होता है।सुबह टहलें -गर्भावस्था में कमर दर्द से बचने के लिए आपको प्रेगनेंसी की शुरूआत से ही सुबह टहलने की आदत डालनी चाहिए। इस दौरान ज्यादा तेज चलने या दौड़ने की कोशिश ना करें, जितना आपके लिए संभव हो उतना तेज चलें।झुक कर न बैठें -प्रेगनेंसी में कमर दर्द (pregnancy me kamar dard) से बचने के लिए आपको गर्भावस्था की शुरूआत से ही सही अवस्था में उठना-बैठना चाहिए। आपको हमेशा पीछे की तरफ होकर या पीठ किसी सहारे पर टिका कर ही बैठना चाहिए, क्योंकि आगे की तरफ झुक कर बैठने से कमर दर्द की संभावना बढ़ जाती है।भारी कामकाज से बचें -प्रेगनेंसी के दौरान भारी कामकाज ना करें और जितना हो सके आराम करें। इसके साथ ही कुर्सी पर बैठने की आदत डालें, इस दौरान कुर्सी पर पीठ टिकाकर बैठें ताकि कमर को आराम मिल सके। प्लास्टिक और लोहे वाली कुर्सी पर बैठते समय कूल्हों के नीचे और कमर के पीछे तकिया रख लें, इससे आपको कमर दर्द से राहत मिल सकती है।सही कपड़े का चुनाव करें -गर्भावस्था में कमर दर्द से बचने के लिए आपको सही कपड़े ही पहनने चाहिए। साथ ही ऐसे बिस्तर पर सोएं, जोकि आरामदायक हो।मखमल के तकियों का इस्तेमाल करें -गर्भावस्था में कमर दर्द से बचने के लिए आप डॉक्टर की सलाह से, छोटे छोटे मखमल वाले दो तकिये अपनी कमर के नीचे भी लगा सकती हैंं। प्रेगनेंसी में कमर पर ज्यादा भार होता है, ऐसे में आप ज्यादा समय तक बैठी या खड़ी न रहें।बड़े बच्चे को गोद में ना उठाएं -अगर आप किसी तीन साल से छोटे बच्चे माँ हैं और वर्तमान समय में गर्भवती हैं, तो उसे गोद में ना उठाएं। इसके लिए अपने पति या घर के अन्य सदस्यों की मदद लें। इसके साथ ही किसी भी अन्य भारी वस्तु को उठाने से बचें।5.गर्भावस्था में कमर दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह कब लें?
प्रेगनेंसी में लगातार दो सप्ताह से ज्यादा कमर दर्द होने पर आपको डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए। इसके साथ ही गर्भावस्था में कमर दर्द की निम्न स्थितियों में आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए -
कमर में बहुत तेज या असहनीय दर्द होना।
कमर में अचानक दर्द होना।
कमर में दर्द के साथ लगातार नियमित ऐंठन महसूस होना।
कमर में दर्द के साथ ही बुखार, उल्टी, मूत्रत्याग करने में दिक्कत आना या पेशाब करते समय जलन होना।
कमर में दर्द के साथ एक या दोनों पैर सुन्न होना या पैरों में अचानक कमज़ोरी महसूस करना।
टाँगों के बीच में, कूल्हों में, मूत्राशय में, गुदा में कुछ महसूस ना होना।
पसलियों के पीछे ओर एक तरफ या दोनों तरफ असहनीय दर्द होना।गर्भावस्था मेंं कमर दर्द होना बेहद सामान्य है, इसलिए इस दौरान घबराएं नहीं और ब्लॉग में बताई गई बातों का ध्यान रखें। इसके साथ ही आप ब्लॉग में बताए गए घरेलू उपायों से प्रेगनेंसी में कमर दर्द से राहत पा सकती हैं। अगर आपको गर्भावस्था के दौरान ज्यादा कमर दर्द हो रहा है या आप किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या से परेशान हैं, तो डॉक्टर की सलाह लें।

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