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क्या आपकी हथेली गरम रहती है? ये कारण हो सकते हैं


क्या कैसे?
क्या आपकी हथेली गरम रहती है? ये कारण हो सकते हैं
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कई लोग महसूस करते है की उनकी हथेलियां हमेशा गरम रहती है, क्या आप भी इसी समस्या से परेशान है? यदि हां तो इसे अधिक समय तक इग्नोर नहीं करना चाहिए क्योंकि कई बार यह आपके शरीर में होने वाली किसी बिमारी का भी संकेत दे सकते है, साथ ही गरम रहने के साथ कई बार आपको जलन का भी अहसास होता है, यदि आपकी भी हथेलियां गरम रहती हैं तो इसका कारण आपकी बढ़ती उम्र भी हो सकती है, क्योंकि उम्र बढ़ने पर शरीर की नसे डैमेज होने लगती है, जिसके कारण आपको अपनी हथेलियां गरम लगने लगती है, इसके अलावा हथेलियाँ गरम होने के और कौन कौन से कारण हो सकते है आइये जानते है।
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विटामिन की कमी के कारण:-
अल्कोहल का सेवन करने के कारण:-
एड्स होने के कारण:-
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ड्रग्स का अधिक सेवन करने पर:-
हाइपरटेंशन के कारण:-
खून का दौरा सही न होने के कारण:-
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विटामिन की कमी के कारण:-
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यदि आपके शरीर में विटामिन की कमी होती है तो भी आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है, खासकर विटामिन बी 12, और विटामिन बी 3 की कमी अधिक होने के कारण आपको ये परेशानी होती है।
अल्कोहल का सेवन करने के कारण:-

जो लोग अधिक मात्रा में अल्कोहल का सेवन करते हैं उन्हें भी हमेशा अपने हथेली गरम महसूस होती है, कई बार हाथों के साथ पैरों में भी ये परेशानी होने लगती है।
एड्स होने के कारण:-

यौन रोगो से परेशान होने वाले व्यक्ति के शरीर में हो रहे बदलाव के कारण भी व्यक्ति अपनी हथेलियों में गर्माहट को महसूस करता है।
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ड्रग्स का अधिक सेवन करने पर:-

जो व्यक्ति ड्रग्स का सेवन अधिक मात्रा में करता है, या फिर उसकी ओवरडोज़ ले लेता है, तो उसके शरीर के तापमान मैं तेजी से परिवर्तन आता है, जिसके कारण उसे अपनी हथेलियों के गरम होने का आभास होने लगता है।
हाइपरटेंशन के कारण:-

तनाव आज कल हर व्यक्ति को किसी न किसी कारण लगा ही रहता है, जिसके कारण वो शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी प्रभावित होता है, और यही कारण है की हाइपरटेंशन के कारण आपकी मांसपेशियां बहुत अधिक प्रभावित होती हैं जिसके कारण भी कई बार आपको अपने शरीर के साथ हथेलियों में भी गर्माहट का अहसास होता है।
खून का दौरा सही न होने के कारण:-

आपके स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरुरी है की आपके शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से हो, लेकिन यदि आपके शरीर में यदि खून का दौरा अच्छे से नहीं होता है जिसके कारण कई बार आपको अधिक गरम हथेली होने का अहसास होता है।

तो ये हैं कुछ कारण जिनकी वजह से आपको हथेली की गर्माहट की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, इसके अलावा आप इससे बचने के लिए कुछ उपाय का भी इस्तेमाल कर सकते है, जैसे की अदरक का टुकड़ा चबाने से आपको राहत मिलती है, विटामिन बी 3 का अधिक सेवन करने से आपको फायदा मिलता है, नारियल या जैतून के तेल से मसाज़ करने पर आपको आराम मिलता है, आदि और यदि आप इस समस्या से अधिक परेशान हैं तो आपको डॉक्टर से भी आवश्य राय लेनी चाहिए।

ये अक्सर पैरों में 'झुनझुनी' क्यों चढ़ जाती है?


अकसर कुछ देर आराम करने के बाद जब उठते हैं तो पता चलता है कि पैर सो गया. कभी-कभी ऐसा हाथों के साथ भी होता है. बहुत देर तक आलती-पालती मारकर बैठने से पैर में झनझनाहट शुरू हो जाती है. ऐसी फ़ीलिंग आती है जैसे पैर है ही नहीं या उस पर कई सूइयां चुभोई जा रही हैं. कितना भी मार लो, चूंटी काट लो, उस पर कोई असर नहीं होता. लेकिन कुछ देर हिलने-डुलने या चलने के बाद सब सही हो जाता है.

बिलकुल ऐसा हाथों के साथ भी होता है. बहुत देर से हाथ कुर्सी पर टिकाए रखने या हाथ के बल सोने से उसमें झनझनाहट होने लगती है. साइंस के मुताबिक हाथ-पैर का सोना आम बात है.


असल में एक ही पोज़िशन में बहुत देर तक रहने से कुछ नसें दब जाती हैं जिनके कारण हाथ या पैरों को सही अमाउंट में ऑक्सीज़न नहीं मिल पाती. ऑक्सीज़न की कमी होने से शरीर के पार्ट्स बचाव की मुद्रा में आ जाते हैं. दिमाग को इसका पता लगता है तो वो इन झटपटाते हाथों की मदद करने के लिए हमें झनझनाहट के सिग्नल देता है, जिससे हम चहलकदमी करने के लिए मजबूर हो जाते हैं.

लोग सोचते हैं कि ऐसा खून के बहाव में कमी आने से होता है, लेकिन ये सच नहीं है. ये एक कारण हो सकता है, लेकिन रेयर से रेयर केस में.

हाथ या पैर दिन में कई बार सोने लगें या झनझनाहट खत्म होने में बहुत ज़्यादा देर लगने लगे, तो डॉक्टर के पास जाना बहुत ज़रूरी है. ब्लड टेस्ट, MRI और दूसरे टेस्ट भी होते हैं जिनसे नसों की हालत का पता चलता है. अगर झनझनाहट बहुत ज़्यादा है तो ये 7 कारण हो सकते हैं:

1. गले या पीठ की कोई नस दबी हुई है
गले से लेकर हाथ या पीठ से लेकर पैर के तलवे तक झनझनाहट महसूस हो, तो हो सकता है किसी चोट या गलत तरह से बैठने या गठिया जैसी बिमारी के कारण नस दब गई हो. फ़िज़िकल थेरेपी और दवाइयों से इसका इलाज हो सकता है.



2. विटामिन की कमी

अगर आपके सिर्फ एक नहीं दोनों हाथों में झनझनाहट होती है तो इसके लिए विटामिन B12 की कमी ज़िम्मेदार है. इसके साथ ही थकावट महसूस होती होगी और हो सकता है आपको एनीमिया भी हो. ब्लड टेस्ट में अगर ये दिक्कत सामने आती है तो B12 विटामिन की चीज़ों और इंजेक्शन से इसे सही किया जा सकता है.



3. कार्पल टनल सिंड्रोम (Carpal tunnel syndrome )

अगर आप दिन भर अपने कंप्यूटर स्क्रीन के आगे बैठकर टाइपिंग करते रहते हैं, तो हो सकता है अंगुलियों के रिपीट मोशन से उनकी नसें दब जाएं. जिसकी वजह से हाथ में झनझनाहट होने लगे. अगर झनझनाहट की वजह यही है तो आपको अपनी दिनचर्या में ख़ासे बदलाव लाने की ज़रूरत है. फिज़ीकल थेरेपी, दवाइयों और सर्जरी से इसका इलाज संभव है.



4. सर्विकल या स्पाइनल स्टेनोसिस (Cervical or spinal stenosis)
रीढ़ की हड्डी में दिक्कत आने से झनझनाहट महसूस होने लगती है. इसका MRI या CT scan से पता चल सकता है. इलाज ये देखकर किया जाता है कि दिक्कत कितनी बढ़ी हुई है. इसका इलाज फ़िज़िकल थेरेपी, इंजेक्शन या सर्जरी से पॉसिबल है.



5. डायबिटीज़

अगर आपका डायबिटीज़ बहुत बढ़ा हुआ है, तो हो सकता है आपका हाई ब्लड शुगर ज़हर की तरह काम करे. इससे आपको हाथ और पैरों में झनझनाहट महसूस हो सकती है. अगर आपको हद से ज़्यादा प्यास या भूख लगती है, या जल्दी-जल्दी पिशाब करने की ज़रूरत हो रही है, तो आपको अपना ग्लूकोज़ लेवल चैक करवाने की ज़रूरत है. दवाइयों और खान-पान में अंतर लाने से आप इसे कंट्रोल में ला सकते हैं.


6. हाइपोथाइरोइडिज़म (Hypothyroidism)

थाइरोइड से भी झनझनाहट का अहसास होता है. इसके साथ ही सर्दी जल्दी पकड़ती है, बेवजह वज़न बढ़ता है, त्वचा ड्राई होने लगती है और बाल अड़ने लगते हैं. बल्ड टेस्ट से इसका आसानी से पता लगाया जा सकता है. अगर आपको ये बीमारी है तो सिंथेटिक थाइरोइड हारमोन लेने की ज़रूरत है.



7. मल्टिपल स्क्लेरोसिस (Multiple sclerosis)

अगर आपको कमज़ोरी महसूस होती है. सुन्न या झनझनाहट का अहसास होता है. साथ ही डबल-डबल चीज़ें दिखाई देती हैं तो हो सकता है आपको मल्टिपल स्क्लेरोसिस हो. MRI से इस बिमारी का पता लगाया जा सकता है. ऐसे इलाज संभव हैं जिससे इस बिमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है.


हाथ-पैरो का सुन्न हो जाना और हाथ और पैरो में झनझनाहट होना जानें इस प्रकार



हाथ पैर किस प्रकार सुन्न हो जाते है आइए जानें 

अकसर जब आप कभी एक ही अवस्था में बैठे रह जाते हैं तो आपके हाथ और पैर सुन्नं पड़ जाते हैं, जिसके कारण आपको कभी कोई भी चीज़ को छूने का एहसास मालूम नहीं पड़ता है। यही नहीं, इसके अलावा आपको प्रभावित स्था न पर दर्द, कमजोरी या ऐठन भी महसूस होती होगी। लगभग सभी लोग इस अनुभव का शिकार जरूर हुए होंगे।

लगातार हाथों और पैरों पर प्रेशर के अलावा यह सुन्न पड़ना, किसी ठंडी चीज को बहुत देर तक छूते रहने से, तंत्रिका चोट, बहुत अधिक शराब का सेवन, थकान, धूम्रपान, मधुमेह, विटामिन या मैग्नीहशियम की कमी आदि से भी होता है।
शरीर के अंग का सुन्नाआ पड़ जाना एक आम सी समस्यात जरूर है लेकिन इसके कई कारण भी हो सकते हैं। अगर यह समस्या कुछ मिनटों तक रहती है तब तो घबराने वाली कोई बात नहीं है लेकिन अगर यही कई-कई घंटों तक बनी रहे तो आपको डॉक्ट र के पास जाने की आवश्यतकता जरूर है, क्योंकि यह किसी बड़ी बीमारी का भी लक्षण हो सकता है।

एक ही मुद्रा में ज्यादा देर तक रहने से हाथ-पैर जब सुन्न पड़ जाते हैं और उनमें झनझनाहट होने लगती है, तो कई बार व्यक्ति घबरा जाता है। खीज भी बहुत होती है, लेकिन क्या आपको मालूम है कि हाथ-पैर सुन्न होते क्यों हैं?

हाथ पैर को सुन्न होने से कैसे बचे , आइए जानें 
गरम पानी से सेंके
शरीर का जो भी अंग सुन्न पड़ गया हो वहां गरम पानी की बोतल का सेंक रखें। इससे वहां की रक्त संचालन ठीक हो जाएगी। इस टिप्स की मदद से आपकी मासपेशियां और नसें रिलैक्स होंगी। एक साफ कपड़े को गरम पानी में 5 मिनट के लिए भिगोएं रखें और फिर उससे प्रभावित जगह को सेंके। आप चाहें तो गरम पानी से स्नाेन भी कर सकती हैं।

व्यायाम करना ना भूलें
व्यावयाम (एक्सरसाइज़) करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन तेज़ी से होता है और सुन्न वाली जगह पर ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ जाती है। जिन लोगों को अकसर सुन्न होने की शिकायत रहती है उन्हें रोजाना हाथ और पैरों का 15 मिनट व्याेयाम करना चाहिए। इसके अलावा हफ्ते में 5 दिन के लिए 30 मिनट एरोबिक्सव करें, जिससे आप हमेशा स्वस्थ बने रहेंगे।

मसाज कैसे करें 
जब कभी हाथ-पैर सुन्न हो जाएं तब उन्हें और मसाज देना शुरू कर दें। बता दें कि इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। गरम जैतून तेल, नारियल तेल या सरसों के तेल से मसाज करना बहुत अच्छा होगा।

हल्दी और दूध पिये 
घर के खाने में प्रयोग होने वाली हल्दी में ऐसे तत्वट मौजूद हैं जो आपके ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं और साथ ही यह सूजन, दर्द और परेशानी को भी कम करती है। एक गिलास दूध में थोड़ा हल्दी मिक्स करके हल्की आंच पर पकाएं। आप चाहे तो इसमें हल्दी भी मिला सकते हैं। इसे पीने से आपको काफी राहत मिलेगी। आप चाहे तो हल्दी और पानी के पेस्ट से प्रभावित स्थान की मसाज भी कर सकते हैं।

दालचीनी का उपयोग करें
दालचीनी में कैमिकल और न्यूरट्रियंट्स दोनों ही मौजूद होते हैं जो हाथ और पैरों में ब्लड फ्लो को बढ़ाते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि रोजाना 2-4 ग्राम दालचीनी पावडर को लेने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। इसको लेने का अच्छाे तरीका है कि एक गिलास गरम पानी में 1 चम्मच दालचीनी पावडर मिलाएं और दिन में एक बार पियें। दूसरा तरीका है कि 1 चम्मच दालचीनी और शहद मिला कर सुबह कुछ दिनों तक सेवन करें।
मैग्नीशियम का सेवन जरूर करें इस प्रकार 

हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवे, बीज, ओटमील, पीनट बटर, ठंडे पानी की मछलियां, सोया बीन, अवाकाडो, केला, डार्क चॉकलेट और लो फैट दही आदि जरूर खाएं। पैर सुन्न नहीं होंगे। आप रोजाना मैग्नीशियम 350 एम जी की सप्प लीमेंट भी ले सकती हैं। पर इस बारे में डॉक्टर से जरूर बात कर लें।

विज्ञान के मुताबिक, हाथ पैर का सुन्न पड़ जाना बेहद आम-सी बात है। किसी एक मुद्रा में लगाता बैठे रहने या सोने के बाद जब आप उठते हैं, तो कई बार आपने महसूस किया होगा कि आपका पैर काम ही नहीं कर रहा। शरीर का वह हिस्सा सुन्न पड़ जाता है और उसमें एक खास तरह की झनझनाहट होने लगती है। जब आप चलने की कोशिश करते हैं या फिर पैरों में जूते या चप्पल डालने की कोशिश करते हैं, तो पैर काम करना बंद कर चुका होता और ऐसा लगता है, कि खड़े होते ही आप गिर जायेंगे, लेकिन कुछ देर हिलने-डुलने या चलने पर स्थिति सामान्य हो जाती है।

बिल्कुल ऐसा ही हाथ के साथ भी होता है। कुर्सी के हत्थे पर देर तक हाथ टिकाने या बिस्तर में बांह के बल सोने या हाथ का तकिया बनाकर सोने से हाथ भी सुन्न होकर झनझनानेलगता है। हालांकि हाथ-पैर का इस तरह सुन्न पड़ जाना कोई परेशानी की बात नहीं है। असल में एक ही मुद्रा में देर तक रहने से कुछ नसें दब जाती हैं। इस कारण हाथ-पैर को पर्याप्त मात्रा में अॉक्सीजन नहीं मिल पाती। अॉक्सीजन के अभाव में अंग बचाव की मुद्रा में आ जाते हैं और सिर्फ बहुत ज़रूरी काम ही करते हैं।

शरीर के किसी भी अंग में होने वाली सुन्नता का पता मस्तिष्क को भी चल जाता है, जिसके चलते मस्तिष्क आॉक्सीजन के लिए परेशान होते हाथ-पैर की मदद करने लगता है। दिमाग झनझनाहट का सिग्नल भेज कर शरीर को हिलने-डुलने के लिए बाध्य करता है। आमतौर पर हाथ या पैर का सुन्न होना सामान्य-सी ही बात है। लेकिन यदि सुन्नता लंबे समय तक बनी रहे, दिन में कई-कई बार हाथ-पैर सुन्न पड़ने लगें या फिर झनझनाहट खत्म होने में बहुत अधिक समय लग रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि कभी-कभीझनझनाहट और सुन्नता स्लिप डिस्क, मल्टीपल स्क्लेरोसिस या डायबिटीज के चलते भी होती है।

विटामिन बी फूड को डायट में करें शामिल
अगर हाथ-पैरों में झन्न-झन्नाहट सी होती है तो अपने आहार में ढेर सारे विटामिन बी, बी6 और बी12को शामिल करें। इनकी कमी से भी हाथ, पैरों, बाजुओं और उंगलियों में सुन्न पैदाहो जाती है। आपको अपने आहार में अंडे, अवाकाडो, मीट, केला, बींस, मछली, ओटस...

स्तनों को छोटा करने के घरेलू उपाय
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एक ओर स्तनों का आकार छोटा होना, जहाँ स्त्रियों में हीन भावना भर देता है, तो दूसरी ओर स्तनों का आकार बहुत बढ़ जाना भी उनके लिए परेशानियाँ पैदा करता है. स्तनों का आकार न तो बहुत छोटा होना चाहिए और न तो बहुत बड़ा. स्तनों का आकार ज्यादा बढ़ जाने से महिलाओं को रीड़ की हड्डी और कंधे में दर्द की समस्या हो सकती है, कई अन्य समस्याओं का उन्हें सामना करना पड़ता है. तो आइए जानते हैं कि कौन से उपाय और तरीके आजमाकर आप अपने स्तनों का आकार कम कर सकती हैं. क्या-क्या चीजें आपको करनी होंगी और क्या-क्या नहीं.
स्तनों (ब्रेस्ट) का आकार कम करने के उपाय :
अगर आप मोटापे से ग्रस्त हैं, तो पहले अपना वजन कम कीजिए. वजन कम किये बिना मोटी स्त्रियों के स्तनों का आकार कम नहीं हो सकता है.
सही फिटिंग वाली ब्रा पहनिए, सही फिटिंग वाले ब्रा स्तनों को बेडौल होने से रोकते हैं.
पैकेट बंद और डिब्बा बंद चीजें, तली हुई चीज़ें कम खाइए.
हर दिन कार्डियो एरोबिक्स करना शुरू कीजिए, इससे आपके स्तनों की चर्बी कम होगी.
साइकलिंग या ब्रिस्क वाक करने से भी ब्रेस्ट का आकार प्राकृतिक तरीके से कम होता है.
अगर आप ऐसे डांस स्टेप्स करती हैं, जिससे छाती के हिस्से में मूवमेंट होती हो, तो यह भी स्तन का आकार कम करने में मदद करेगा.
मसाज के जरिए भी स्तनों की चर्बी को कम किया जा सकता है. हालांकि इस तरीके से स्तनों का आकार कम होने में थोड़ा लम्बा समय लगेगा. मसाज के लिए आप किसी भी प्राकृतिक तेल का उपयोग कर सकती हैं.
एक कप गर्म पानी में पीसा हुआ अदरक और एक चम्मच शहद मिलाकर पिएँ. यह स्तनों की चर्बी को कम करने का एक असरदार तरीका है.
एक दिन में 2 बार ग्रीन टी पीने से स्तनों के आकार को कम करने में मदद मिलती है.
सप्ताह में दो बार, अंडे के सफेद भाग में एक चम्मच प्याज का रस मिलाकर पीने से आपके स्तनों में कठोरता आएगी और इसका आकार कम दिखने लगेगा.
एक मुठ्ठी नीम के पत्ते को उबाल लें, फिर इसमें थोड़ी हल्दी और एक चम्मच शहद मिला दलें. फिर पानी के साथ इसे खाएँ, कुछ सप्ताह में असर दिखना शुरू हो जायेगा.
खाना समय से खाएँ और पेट भरने से थोड़ा कम खाना खाएँ.
घर का खाना खाइए और जंक फ़ूड बिल्कुल मत खाइए.
पूरी नींद लीजिए और सुबह जल्दी उठकर व्यायाम कीजिए. सुबह-सुबह सैर पर जाइए.
दिन में दो बार शौच जाने की आदत डालिए, एक बार सुबह-सुबह और एक बार रात में सोने से पहले.
ताम्बे के जग में रात में पानी रखें और सुबह उठकर बिना मुँह धोए जग में रखे पानी को पिएँ, फिर शौच जायें. इससे आपके शरीर की सारी गंदगी साफ हो जाएगी.
अगर आप वर्किंग वीमेन हैं, तो आपको खास तौर पर शारीरिक श्रम करना चाहिए.
ध्यान रखें अगर आपके बड़े स्तनों का कारण आनुवांशिक है, तो इसका आकार एक हद तक हीं कम होगा.
अर्द्ध चक्रासन कीजिए. सीधे खड़े होकर अपने हाथों को एक साथ ऊपर की ओर फैलाइए. हथेलियों की मुटठी बांध लीजिए. हथेलियों को एक साथ मिलाएं. अपने शरीर को ऊपर की ओर खींचें, यह सुनिश्चित करें कि कंधे कान को छुएं. गहरी सांस लें, अपने शरीर को कूल्हों के सहारे ऊपर की ओर ले जायें. अपने घुटनों को मोड़ें. यह आसन 1 या 2 minute के लिए करें.
आप स्विमिंग भी कर सकती हैं.

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