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गर्भवती महिलाओं के लिए

गर्भवती महिला गर्मियों में यह नहीं खाए नुकसान होगा
Helthy food for pregnancy
गर्भवती महिला गर्मियों में यह नहीं खाए नुकसान होगा
गर्भावस्था
गर्भवती महिला गर्मियों में यह नहीं खाए नुकसान होगा
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गर्मियों में गर्मी, पसीना, धूप से दिक्कत, आलस अधिक आना, आदि परेशानियों का होना आम बात होती है। और गर्भवती महिलाओं को तो गर्मियों में ज्यादा परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। क्योंकि बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण शारीरिक परेशानी, गर्मी का अधिक अनुभव होने के कारण ज्यादा परेशानी हो सकती है। लेकिन फिर भी महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए किसी भी तरह की लापरवाही न करते हुए अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की दिक्कत न हो, ऐसे में कुछ चीजें हैं जिनका सेवन महिला को अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए, जैसे की जिन चीजों की तासीर अधिक गरम होती है, या जो बॉडी के तापमान को बढ़ाती है, आदि। क्योंकि इसके सेवन के कारण प्रेगनेंसी के दौरान महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिलाओं को किन की चीजों का सेवन गर्मियों में नहीं या फिर कम करना चाहिए।
ठंडी चीजें

ठंडी चीजें
नमक
मसालेदार भोजन
ड्राई फ्रूट
कैफीन
अंडे
अदरक
मटन
गर्मी से राहत पाने के लिए ठंडा खाने की इच्छा सबसे ज्यादा होती है, जैसे की आइस क्रीम, ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक, आदि। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान ठंडी चीजों का अधिक सेवन बॉडी के तापमान को बढ़ाने के काम करता है, साथ ही बाहर की मीठी और ठंडी चीजों में कैलोरी भी अधिक होती है, ऐसे में ज्यादा ठंडी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। हाँ आप चाहे तो खीरा, दही, केला, या अन्य फल आदि को ठंडा करके उसका सेवन कर सकती है।
नमक

गर्मियों में प्रेगनेंसी के दौरान आपको नमक का सेवन भी अधिक नहीं करना चाहिए। क्योंकि गर्भवती महिला की बॉडी में सोडियम की अधिक मात्रा के कारण अतिरिक्त पानी इक्कठा होने के लगता है, जिसके कारण गर्भवती महिला को सूजन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
मसालेदार भोजन

प्रेग्नेंट महिला को ज्यादातर चटपटा खाने की इच्छा होती है, लेकिन गर्मियों में अधिक चटपटा और मसालेदार भोजन खाने से गर्भवती महिला को परेशानी हो सकती है। जैसे की एसिडिटी, सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट में ऐंठन आदि। ऐसे में गर्भवती महिला को गर्मियों में हल्का और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए जिससे प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी से बचाव में मदद मिल सके।
ड्राई फ्रूट


ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम, किशमिश आदि की तासीर बहुत ही गरम होती है। और गर्मी में अधिक गरम करने वाली चीजे खाने से पेट में गर्मी बढ़ सकती है, जिसके कारण गर्भाशय में संकुचन आदि की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में इन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए, और साथ ही बादाम आदि खाने हो तो रात भर के लिए इन्हे पानी में भिगोकर इनका सेवन करना चाहिए।
कैफीन

चाय, कॉफ़ी, में कैफीन की मात्रा अधिक होती है, और कैफीन का अधिक सेवन गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकता है। ऐसे में गर्मियों में प्रेगनेंसी के दौरान चाय या कॉफ़ी का सेवन भी अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।
अंडे

प्रेगनेंसी के दौरान अंडे का सेवन गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है। लेकिन गर्मियों में आपको इसका अधिक सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि अंडे की तासीर भी गरम होती है, और आवश्यकता से अधिक इसका सेवन करने से आपको परेशानी का अनुभव हो सकता है।
अदरक

बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेगनेंसी के समय कमजोरी व् थकान का अनुभव होना आम बात होती है। ऐसे में अदरक की चाय का सेवन आपको इस समस्या से निजात दिला सकता है, लेकिन गर्मियों में यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको अदरक का सेवन सोच समझ कर करना चाहिए। क्योंकि अदरक का सेवन अधिक मात्रा में करने से गर्भवती महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि अदरक की तासीर गरम होती है।
मटन

गर्मियों में यदि गर्भवती महिला मटन, नॉन वेज आदि का अधिक सेवन करती है, तो ऐसा करने से पेट में गर्मी हो सकती है। जिसके कारण पेट सम्बन्धी समस्या का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ बातें जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ध्यान रखनी चाहिए ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें। साथ ही क्या खाना चाहिए और क्या नहीं इसके बारे में आप चाहे तो अपनी डॉक्टर से भी राय ले सकते है। साथ ही जितना हो सकें गर्मियों में प्रेगनेंसी के दौरान तरल चीजों का भरपूर सेवन करें क्योंकि गर्मियों में यह गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रखने और डिहाइड्रेशन की समस्या से बचाव करने में मदद करता है।

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गर्मियों में क्या नहीं खाना चाहिए

गर्भावस्था
खीरा खाने के 10 फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए

Cucumber during pregnancy
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प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ऐसे आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है जो की महिला को फिट रखने में फायदेमंद हो, क्योंकि यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्वस्थ रहती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। तो लीजिये आज हम आपको खीरे का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान कौन कौन से फायदे मिलते हैं इसके बारे में बताने जा रहें हैं। क्योंकि खीरे में भी बहुत अधिक मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते है।

इम्युनिटी बढ़ाता है


प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए गर्भवती महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली का मजबूत होना बहुत जरुरी होता है। और खीरे का सेवन करने से इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है।
मूड रखता है बेहतर

बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला के मूड और व्यवहार में भी परिवर्तन देखने को मिलता है, और खीरे में विटामिन बी होता है जो मस्तिष्क को आराम पहुंचाने में मदद करता हैं और मूड को फ्रेश रखता है।
कब्ज़ से राहत

खीरे में फाइबर की मात्रा भी भरपूर होती है, जो प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कब्ज़ की समस्या से महिला को आराम पहुंचाने में मदद करती है।
सूजन से आराम

पैरों में सूजन का होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है, खासकर तीसरी तिमाही में महिला की यह परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में खीरे का सेवन करने से महिला को इस समस्या से राहत मिलती है और साथ ही यदि सुनाज की समस्या अधिक हो तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
गेस्टेशनल डाइबिटीज़ से बचाव


प्रेगनेंसी के दौरान महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ होने का खतरा रहता है। ऐसे में खीरे का सेवन करने से ब्लड में ग्लूकोस की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद मिलती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान इस समस्या से बचा जा सकता है।
डिहाइड्रेशन से निजात

खीरे में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है जो प्रेगनेंसी के दौरान इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की समस्या से बचाव करने में मदद करता है। और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता, साथ ही पानी की मात्रा पूरी होने से बॉडी से विषैले पदार्थो को बाहर निकालकर प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
वजन रखता है नियंत्रित

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ना आम बात होती है। लेकिन बॉडी पर एक्स्ट्रा चर्बी का जमाव महिला और शिशु दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में खीरे का सेवन करने से महिला के वजन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। क्योंकि इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है।
विटामिन के होता है

विटामिन के हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक पोषक तत्व है। और खीरे में यह भरपूर मात्रा में होता है, साथ ही विटामिन बी, आयरन, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी इसमें होते हैं जो दिल और दिमाग दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
स्किन के लिए होता है बेहतर
खीरे का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान स्किन में कोलेजन को बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे स्किन में खिंचाव आने के कारण होने वाली स्किन से जुडी परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।
गर्भ में शिशु का होता है बेहतर विकास

खीरे में विटामिन सी, बी 1, बी 2, बी 3, फोलिक एसिड, पोटेशियम, मैग्नीशियम, आयरन आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते है। जो न केवल गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद करते है, बल्कि उसे जन्म के समय होने वाली परेशानियों से भी सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान खीरे का सेवन करने से गर्भवती महिला को मिलते हैं। लेकिन जरुरत से ज्यादा भी खीरे का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भवती महिला को बार बार यूरिन पास करने की समस्या, गैस, पेट में ऐंठन, एलर्जी जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

केला खाने के 10 फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए

गर्भावस्था

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माँ बनना किसी भी महिला के जीवन का सबसे बेहतरीन लम्हा होता है। और हर महिला चाहती है की उसके गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व उसे मिल सके। और शिशु तक बेहतरीन न्यूट्रिशन पहुंचाने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। इसीलिए डॉक्टर्स भी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को फलों, सब्जियों आदि का भरपूर सेवन करने की सलाह देते हैं। तो लीजिये आज हम आपको ऐसे ही फल के बारे में बताने जा रहे हैं जो की प्रेगनेंसी के दौरान न केवल गर्भवती महिला बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होता हैं।


और वो फल है केला, केले में आयरन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, ओमेगा 3 और ओमेगा 6 जैसे फैटी एसिड, विटामिन सी, विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, मैंगनीज, मैग्नीशियम, पोटेशियम, कैल्शियम, जिंक, सेलेनियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद करते हैं और साथ ही गर्भवती महिला को भी प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली समस्याओं से बचने में मदद करते हैं। तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान केले का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।
विटामिन सी से होता है भरपूर
केले में विटामिन सी जिसे की एस्कॉर्बिक एसिड भी कहा जाता है भरपूर मात्रा में मौजूद होता है, जो की हड्डियों के बेहतर विकास, ऊतकों और मांसपेशियों की मरम्मत और स्किन को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही विटामिन सी एक बेहतरीन एंटीऑक्सिडेंट भी है जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।
ब्लड प्रैशर को करता है कण्ट्रोल

प्रेगनेंसी के समय ब्लड प्रैशर के घटने या बढ़ने की समस्या का होना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। और केले का सेवन करने से शरीर में रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, क्योंकि यह पोटेशियम से भरपूर होता है जो की ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल करने के लिए बहुत जरुरी होता है।
कैल्शियम से होता है भरपूर


केले में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो की गर्भ में पल रहे शिशु के साथ गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती और विकास के लिए आवश्यक है। और कैल्शियम का भरपूर सेवन शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद करता है।
फाइबर की मात्रा होती है भरपूर

कुछ गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ की समस्या से बहुत अधिक परेशान रहती है, ऐसे में केले में मौजूद फाइबर गर्भवती महिला की इस समस्या का समाधान करने में मदद करते हैं। साथ ही कब्ज़ की समस्या अधिक होने के कारण महिला को बवासीर की समस्या भी हो सकती है, तो केले का सेवन करने से आंतों में मांसपेशियों को आराम मिलता है, जिससे कब्ज़ से राहत के साथ इस परेशानी से भी निजात मिलता है।
एनीमिया से बचाव


एनीमिया के होने के कारण खून में हीमोग्लोबिन की कमी का होना होता है, जिसके कारण शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का स्तर कम हो जाता है। और एनीमिया के होने के कारण कमजोरी, थकान, बॉडी में दर्द, शिशु के विकास में कमी जैसी परेशानी का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है। लेकिन केले का सेवन करने से महिला को इस परेशानी से निजात मिलता है क्योंकि केले में मौजूद आयरन गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने में मदद करता है।
एनर्जी मिलती है

केले मे मौजूद कार्बोहाइड्रेट, फ्रक्टोज, सुक्रोज, जैसे तत्व गर्भवती महिला को तुरंत एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करते हैं। खासकर प्रेगनेंसी की पहली और अंतिम तिमाही के दौरान, गर्भवती महिला बॉडी में कमजोरी या थकावट अधिक महसूस करती है। तो ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी को ऊर्जा से भरपूर रखने के लिए गर्भवती महिला को केले का सेवन जरूर करना चाहिए।
उल्टी से राहत देता है
केले विटामिन बी 6 भरपूर मात्रा में मौजूद होता है और विटामिन बी 6 मतली, उल्टी, मॉर्निंग सिकनेस आदि से राहत पहुंचाने में मदद करता है। और प्रेगनेंसी की पहली तिमाही मॉर्निंग सिकनेस बहुत अधिक रहती है, तो इससे निजात पाने के लिए केले का सेवन गर्भवती महिला की इस समस्या को कम करने में मदद करता है।
भूख बढ़ाता है

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ गर्भवती महिलाएं भूख न लगने के कारण परेशान रहती हैं, ऐसे में उन्हें केले का सेवन करना चाहिए जो की भूख को बढ़ाने के साथ बेहतर तरीके से पाचन में सहायता करने में मदद कर सकता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान खान पान में किसी भी तरह की लापरवाही गर्भवती महिला और शिशु दोनों पर ही बुरा प्रभाव डाल सकती है।
फोलेट से होता है भरपूर

गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के विकास के लिए फोलेट की मात्रा का बॉडी में भरपूर होना बहुत जरुरी होता है। और गर्भवती महिला यदि केले का सेवन करती है तो इससे शरीर में फोलेट की मात्रा को भरपूर रखने में मदद मिलती है, जिससे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर होने के साथ शिशु को जन्म के समय होने वाली बीमारियों से सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है।
गर्भ में पल रहे शिशु के तंत्रिका तंत्र का विकास होता है

विटामिन बी 6 गर्भ में पल रहे शिशु के तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए आवश्यक है, और केले में यह भरपूर मात्रा में होता है। ऐसे में प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में नियमित रूप से केले का सेवन शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका विकास के लिए फायदेमंद होता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो आपको प्रेगनेंसी के दौरान केले का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को मिलते हैं। साथ ही हमेशा ताजे केले का सेवन करना चाहिए, बासी केला या केले पर कोई दाग आदि लगा हो यानी की केला ज्यादा पका हुआ हो तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही यदि आपको केले के सेवन से एलर्जी है तो इसका सेवन नहीं करना चाहिए। और एक बार आपको डॉक्टर से भी जरूर राय लेनी चाहिए की केले का सेवन कितनी मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि प्रेगनेंसी के समय अधिक केले का सेवन गर्भवती महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या से परेशान कर सकता है।


अंगूर खाने के 10 फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भावस्था
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फलों का सेवन करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से फायदे मिलते हैं। ऐसा ही एक फल है अंगूर जिसका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी बहुत से फायदे मिलते हैं। क्योंकि इसमें फाइबर, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन, आयरन, फोलिक एसिड आदि भरपूर मात्रा में होते हैं। लेकिन प्रेगनेंसी में अंगूर का सेवन अधिक भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे गर्भवती महिला को परेशानी भी हो सकती है। पर्याप्त मात्रा में ही अंगूर का सेवन करने से गर्भवती महिला को फायदा मिलता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान अंगूर का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

पाचन क्रिया होती है बेहतर
प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पेट सम्बन्धी समस्या जैसे की खाने को पचाने में दिक्कत आदि की समस्या रहती है। ऐसे में अंगूर जो की फाइबर से भरपूर होता है, उसका सेवन करने से गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को बेहतर करने में मदद मिलती है, जिससे खाने को बेहतर तरीके से हज़म करने में मदद मिलती है, और मेटाबोलिज्म को बढ़ावा मिलता है।
इम्यून सिस्टम मजबूत होता है

विटामिन सी जैसे एंटी ऑक्सीडेंट की अधिकता होने के कारण यह प्रेगनेंसी के दौरान महिला के इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग रखने में मदद करता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान सर्दी, खांसी, जुखाम, फ्लू, इन्फेक्शन आदि की समस्या से बचाने में मदद मिलती है।
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है

प्रेगनेंसी के दौरान कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना गर्भवती महिला के साथ शिशु के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है। लेकिन गर्भवती महिला अपने आहार में अंगूर को शामिल करती है तो इससे कोलेस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
एनीमिया से बचाव

आयरन की मात्रा से भरपूर होने के कारण अंगूर का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन के लेवल को मेन्टेन को रखने में मदद मिलती है। जिससे बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर होने के साथ एनीमिया की समस्या से निजात मिलता है। जिसके कारण थकान, कमजोरी जैसी समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है। और डिलीवरी के दौरान खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचाव भी होता है।
कब्ज़ से राहत


जायदातर महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ की समस्या से परेशान रहती है। ऐसे में अंगूर में मौजूद फाइबर गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है, इसीलिए अंगूर को भी गर्भवती महिला को अपने आहार में शामिल करना चाहिए।
सूजन से राहत
एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों और पानी की मात्रा से भरपूर होने के कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली सूजन की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
मांसपेशियों में होने वाली ऐंठन से आराम

अंगूर में मैग्नीशियम की मात्रा भी अधिक होती है जो की प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या से आराम दिलाने में मदद करती है।
हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है

अंगूर में पानी की मात्रा भी अधिक होती है, जो प्रेगनेंसी के दौरान हाइड्रेटेड रहने में मदद करती है, और इससे बॉडी में पानी की मात्रा को भरपूर रखने में भी मदद मिलती है।
शिशु की आँखों के लिए हैं फायदेमंद

विटामिन ए अंगूर में प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु की आँखों के बेहतर विकास में मदद करता है, इसीलिए गर्भ में पल रहे शिशु के आँखों के बेहतर विकास के लिए गर्भवती महिला को अंगूर का सेवन जरूर करना चाहिए।
नर्वस सिस्टम के लिए होता है बेहतर

अंगूर में मौजूद प्राकृतिक सोडियम की मदद से गर्भ में पल रहे शिशु के नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र के बेहतर विकास में मदद मिलती है।


तो यह हैं कुछ खास फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अंगूर का सेवन करने से मिलते है, लेकिन काले अंगूर का सेवन अधिक करने से बचना चाहिए क्योंकि इसके छिलके को पचने में समय लगता है, जिससे महिला को पाचन क्रिया से सम्बंधित समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और अंगूर का सेवन करने से पहले अच्छे से धोएं उसके बाद ही उसका सेवन करें।

लीची खाने के 10 फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भावस्था

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लीची गर्मियों में आने वाला फल है, और यह थोड़े समय के लिए ही आपको मार्किट में दिखाई देता है। मीठा व् रस से भरा यह फल पौष्टिक तत्वों से भी भरपूर होता है, इसमें विटामिन्स, फोलेट, कॉपर, मिनरल्स आदि भरपूर मात्रा में होते हैं जो गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन इसका अधिक सेवन भी नहीं करना चाहिए, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला को लीची का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

विटामिन सी मिलता है

लीची का सेवन करने से इम्यून सिस्टम को मजबूत होने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है जो की इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट है। और इम्यून सिस्टम के मजबूत होने से प्रेगनेंसी के दौरान शरीर को संक्रमण से बचाव करने में मदद मिलती है और यह बीमारियों को होने से रोकता है। लीची में फ्लेवोनोइड्स भी होते हैं जो की पुरानी बीमारियों और कैंसर को रोकने में भूमिका निभाते हैं।
ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है
लीची ब्लड में हीमोग्लोबिन के स्तर को कण्ट्रोल करने में मदद करती है साथ ही लीची में मैग्नीशियम, आयरन, मैंगनीज, विटामिन सी और फोलेट भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते है, जिससे यह सभी बॉडी में ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से होने में मदद करते हैं। साथ ही ब्लड प्रैशर को भी कम करते हैं और स्ट्रोक की संभावना कम करते हैं।
स्किन की ख़ूबसूरती को बरकरार रखता है

गर्भवती महिला के बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण स्किन का डल पड़ना, दाने की समस्या होना ,झुर्रिया दिखाई देना, आदि आम बात होती है। ऐसे में लीची का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान भी आपकी स्किन को पोषण देता है जिससे चेहरे की चमक को बरकरार रहने में मदद मिलती है। क्योंकि लीची एंटीऑक्सिडेंट मौजूद होते हैं जो त्वचा को पोषण देने और त्वचा की कोमलता को बढ़ने के साथ त्वचा की टोन को निखारने में मदद करते है।
कब्ज़ से राहत

कुछ गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ की समस्या से बहुत अधिक परेशान रहती है। ऐसे में लीची का सेवन करने से पाचन क्रिया को बेहतर होने में सहायता मिलती है जिससे आपको कब्ज़ की समस्या से राहत मिलती है। और साथ ही लीची में पानी और फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण यह बवासीर और पेट के कैंसर के जोखिम को कम करते हैं।
पोटैशियम मिलता है


गर्भवती महिला को थकान की समस्या होना, कमजोरी महसूस होना, मांसपेशियों में ऐंठन आदि की समस्या प्रेगनेंसी के दौरान हो सकती है। ऐसे में लीची जो की पोटैशियम से भरपूर होती है उसका सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को इन सभी परेशानियों से बचाव करने में मदद मिलती है, साथ ही बॉडी में एनर्जी को भरपूर बनाये रखने में मदद मिलती है।
एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं
कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में होने वाली सूजन की समस्या से भी परेशान रहते हैं। ऐसे में लीची में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण गर्भवती महिला को सूजन की समस्या से राहत दिलाने में मदद करते हैं।
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है

ब्लड में यदि बेड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में लीची का सेवन करने से बेड कोलेस्ट्रॉल को कम करके रक्त में गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद मिलती है।
इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को नियंत्रित करता है

कई बार प्रेगनेंसी के दौरान डिहाइड्रेशन का होना एक आम समस्या है और ऐसे में यदि महिला लीची का सेवन करती है तो इससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट के असंतुलन को खत्म करती है। जिससे बॉडी में पानी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है और डिहाइड्रेशन की समस्या से आपको आराम मिलता है।
फोलेट लीची में होता है भरपूर

फोलिक एसिड और फोलेट से भरपूर लीची का सेवन करने से केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी फायदा मिलता है। क्योंकि यह शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर करने के साथ, तंत्रिका तंत्र और दिमाग के बेहतर विकास में भी मदद करती है।
मीठेपन का अहसास दिलाता है

कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी में मीठा खाना पसंद करती है, लेकिन अधिक मात्रा में मिठाईया व् चॉकलेट आदि का सेवन करने से वजन बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है, जिसके कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशनियों का का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में लीची का सेवन करने से महिला की मीठा खाने की इच्छा भी पूरी हो जाती है और वजन भी नियंत्रित रहता है।
तो यह हैं कुछ फायदे जो लीची का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से होते हैं और प्रेगनेंसी के आलावा भी इसका सेवन किया जाएँ तो यह आपको फिट रखने के साथ उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करने के साथ आपकी ख़ूबसूरती को भी बरकरार रखने में मदद करते हैं। इसीलिए गर्मियों में जब भी लीची आये तो इसका सेवन जरूर करना चाहिए। लेकिन पर्याप्त मात्रा में ही सिका सेवन करें क्योंकि अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से गेस्टेशनल डाइबिटीज़, बॉडी का तापमान बढ़ना जैसी परेशानी प्रेगनेंसी के दौरान हो सकती है।


गर्मियों में डिलीवरी होने पर इन बातों का ध्यान रखना चाहिए

गर्भावस्था
गर्मियों में डिलीवरी होने पर इन बातों का ध्यान रखना चाहिए

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प्रसव के बाद महिला का शरीर बहुत ही कमजोर हो जाता है, ऐसे में महिला को अपना बेहतर तरीके से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है, जैसे की भरपूर मात्रा में पोषक तत्व लेना, बॉडी को भरपूर आराम देना, सही समय पर दवाइयों का सेवन करना, आदि। क्योंकि जन्म के बाद भी शिशु अपने विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए महिला पर ही निर्भर करता है। ऐसे में आपका प्रसव गर्मियों में होता या सर्दियों में यह बात भी अहमियत रखती है, क्योंकि सर्दियों में जहां रजाई की गर्माहट के साथ गरम तासीर वाली चीजें जैसे की सौंठ, ड्राई फ्रूट आदि का सेवन करके महिला को जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है। वहीँ गर्मियों में ज्यादा गरम चीजें शरीर में अंदर गर्मी बढ़ा सकती है जिससे महिला को परेशानी का अनुभव हो सकता है, ऐसे में गर्मियों में डिलीवरी के बाद महिला को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए आइये विस्तार से जानते हैं।

खान पान का ध्यान रखें
डिलीवरी के बाद महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, लेकिन गर्मियों में जितना हो सके पोषक तत्वों से भरपूर आहार ले लेकिन हलके भोजन का सेवन करें, ज्यादा मसालेदार, तेलीय खाने से परहेज करें। जैसे की सिर्फ जीरा का तड़का लगाकर दालें, हरी सब्जियां, खिचड़ी, दलिया, आदि का सेवन करें। और खाने को एक ही बार में पेट भरकर न खाएं बल्कि हर दो घंटे में कुछ न कुछ खाते रहें।
फलों का सेवन करें
गर्मियों में डिलीवरी होने पर फलों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए, खासकर जिनमे पानी की अधिकता हो, जैसे की संतरा, अंगूर, तरबूज आदि। आप चाहे तो घर में फलों का ताजा रस निकालकर भी उसका सेवन कर सकते हैं। फलों का भरपूर सेवन करने से गर्मियों में डिलीवरी के बाद फिट होने के लिए भरपूर पोषक तत्व भी मिलते हैं, और बॉडी को हाइड्रेटेड रहने में भी मदद मिलती है।
संक्रमण से बचें

पसीना आने के कारण गर्भवती महिला को इन्फेक्शन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि शुरुआत के दिनों में अधिक ब्लीडिंग का होना, बॉडी के तापमान के बढ़ने के कारण आदि। संक्रमण होने का खतरा रहता है ऐसे में साफ़ सफाई का ध्यान रखने के साथ महिला को विटामिन सी से भरपूर आहार जैसे की खट्टे फल, ब्रोकली, टमाटर आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए, क्योंकि विटामिन सी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है, जिससे इन्फेक्शन जैसी समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।
पेय पदार्थ ले भरपूर


बॉडी को हाइड्रेटेड रखने के लिए गर्मियों में डिलीवरी के बाद महिला को पानी को उबालने के बाद ठंडा करके उसका भरपूर सेवन करना चाहिए, इसके साथ फलों का ताजा जूस, निम्बू पानी, नारियल पानी आदि का सेवन भी भरपूर करना चाहिए। दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करने में बिल्कुल भी आनाकानी न करें। इससे गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी नहीं होती और महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
ज्यादा ठंडक न लें

गर्मियों में डिलीवरी होने पर गर्मी का महसूस होना आम बात होती है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है की आप ए सी या कूलर के सामने जाकर सो जाएँ। डिलीवरी के बाद शरीर काफी कमजोर होता है, ऐसे में ज्यादा ठण्ड के कारण आपको बॉडी पेन की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है। इसीलिए गर्मियों में डिलीवरी होने के बाद आप ए सी या कूलर या पंखे के नीचे भी सोते हैं तो हलकी चादर या हलके कम्बल से अपनी बॉडी को ढक कर सोना चाहिए।
कपड़ो का रखें ध्यान

सूती कपडे, खुले कपडे, आरामदायक महसूस करवाने वाले कपडे, नर्सिंग ब्रा, सूती अंडरवेअर महिला को पहनने चाहिए। क्योंकि अधिक टाइट कपडे या सिल्क के कपडे बॉडी को अधिक गरम महसूस करवाते हैं, साथ ही पसीना भी नहीं सोख पाते जिसके कारण खुजली व् रैशेस जैसी समस्या हो सकती है।
दूध व् दही
गर्मियों में डिलीवरी होने पर भरपूर मात्रा में दूध व् दही का सेवन करना चाहिए। क्योंकि न केवल गर्मियों में डिलीवरी होने पर यह आपको गर्मी से बचाने में मदद करते हैं, बल्कि शिशु के लिए दूध का उत्पादन भी बढ़ाने में मदद मिलती है।
नींद ले भरपूर

सोने से शरीर को आराम मिलता है, ऐसे में महिला को अपनी नींद को जरूर पूरा करना चाहिए। और यदि रात को नींद पूरी नहीं होती है तो सुबह शिशु को नहलाने के बाद खुद भी नहाकर खाना खाने के बाद आप भी थोड़ा आराम करें, इससे आपको एनर्जी मिलेगी, जिससे डिलीवरी के बाद जल्दी फिट होने में मदद मिलती है।


तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान गर्मियों में डिलीवरी के बाद महिला को रखना चाहिए। इन टिप्स का ध्यान रखने से डिलीवरी के बाद होने वाली परेशानियों से बचाव करने में मदद करता है। साथ ही डिलीवरी के बाद भी यदि कोई दिक्कत हो तो एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए। क्योंकि महिला का स्वस्थ रहने के कारण ही शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है और शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

आम खाने के 10 फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए
गर्भावस्था
आम खाने के 10 फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए
By Suruchi Chawala Last updated Mar 6, 2019 0


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आयरन, विटामिन सी, विटामिन ए, फाइबर, विटामिन बी 6, पोटेशियम, एंटी ऑक्सीडेंट्स, फॉलिक एसिड आदि पोषक तत्वों से भरपूर आम का सेवन प्रेग्नेंट महिला के लिए लाभदायक होता है। और यदि गर्भवती महिला को आम खाना पसंद हैं तो महिला इसका सेवन कर सकती है। क्योंकि गर्भवती महिला को फिट रहने के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों की जरुरत होती है। और आम पोषक तत्वों से भरपूर होता है, तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान आम का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

एनीमिया से बचाव

आयरन और विटामिन सी से भरपूर आम का सेवन करने से गर्भवती महिला को एनीमिया जैसी परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है। क्योंकि आम में मौजूद आयरन गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करता है।
पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है
आम में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है जो प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली पेट से सम्बंधित समस्याएं जैसे की कब्ज़, अपच, आदि से निजात दिलाने के साथ मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है।
इम्यून सिस्टम मजबूत होता है
एंटी ऑक्सीडेंट्स, फोलिक एसिड, विटामिन ए, विटामिन बी 6, पोटैशियम, व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो की गर्भवती महिला के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते है, और उसे बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
ब्लड प्रैशर कण्ट्रोल होता है

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर के घटने या बढ़ने की समस्या से परेशान होना पद सकता है, ऐसे में आम का सेवन गर्भवती महिला से जुडी इस परेशानी से बचाव के लिए फायदेमंद होता है।
वजन नियंत्रित रहता है


आम एक मीठा फल है ऐसे में जिन महिलाओं की प्रेगनेंसी के दौरान मीठा खाने की इच्छा होती है वो इसका सेवन कर सकती है, क्योंकि यह पचाने में आसान होता है जिससे मोटापे जैसी समस्या से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है। साथ ही यदि आप चॉकलेट, मिठाइयों का सधिक सेवन करती है तो इससे मोटापे की समस्या के कारण आपको परेशान होना पड़ सकता है।
स्किन के लिए है फायदेमंद


प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल प्रभाव के कारण कई बार गर्भवती महिला की स्किन भी प्रभावित होती है। ऐसे में प्रेगनेंसी में स्किन की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए भी आम का सेवन करने से बहुत फायदे मिलते हैं, साथ ही यह आँखों के लिए भी फायदेमंद होता है।
एमनियोटिक फ्लूड को बैलेंस करता है
पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स आम में भरपूर मात्रा में होते हैं। जो एमनियोटिक फ्लूड को बैलेंस में रखने में मदद करते हैं, साथ ही इससे गर्भवती महिला के शरीर में होने वाली क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है, जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्वस्थ रहती है।
शिशु का होता है बेहतर विकास

विटामिन ए की मात्रा आम में बहुत अधिक होती है, जो की गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद करती है। इससे शिशु की मसल्स, हड्डियों, इम्यून सिस्टम, तंत्रिका तंत्र, स्पाइनल कॉर्ड को मजबूत बनाने में मदद मिलती है, साथ ही शिशु के दिमाग के बेहतर विकास में भी यह मदद करता है।
समयपूर्व प्रसव का खतरा होता है कम

विटामिन सी जैसे एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर आम का सेवन करने से गर्भवती महिला को समयपूर्व प्रसव जैसी समस्या से बचने में भी मदद मिलती है।
गर्भ में शिशु को पोषण मिलता है

आम में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में मदद करते है। जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं। और शिशु के बेहतर विकास को होने में मदद मिलती है।
तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आम का सेवन करने से मिलते हैं, यदि आप भी गर्भवती है, और प्रेगनेंसी के दौरान इन फायदों को उठाना चाहती है तो आम का सेवन जरूर करें, ताकि गर्भवती महिला को फिट रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिल सके। साथ ही बिना मौसम के आम और कृत्रिम तरीको से पकाएं गए आम का सेवन नहीं करना चाहिए।



अनार खाने के 10 फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए

गर्भावस्था
अनार खाने के 10 फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए
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गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान संतुलित व् पौष्टिक आहार खाने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके। तो लीजिये आज हम आपको पौष्टिक तत्वों से भरपूर एक फल के बारे में बताने जा रहें हैं जो गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है। और वो है अनार, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में अनार खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन की कमी को पूरा करता है
अनार खाने के 10 फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए
अनार का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें आयरन की मात्रा भरपूर होती है। साथ ही गर्भवती महिला की बॉडी में ब्लड की मात्रा का पूरा होना जरुरी होता है, क्योंकि इससे गर्भवती महिला को एनीमिया जैसी समस्या से बचाव करने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।
पेट सम्बंधित समस्या दूर होती है
कब्ज़, अपच, जैसी परेशानी से गर्भवती महिला अक्सर परेशान रहती है। और अनार का सेवन करने से महिला को पेट से सम्बंधित परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है। क्योंकि अनार में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जिससे गर्भवती महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद मिलती है।
डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचाव होता है

गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी का होना डिलीवरी के दौरान परेशानियों को बढ़ा सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान अनार का सेवन गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा रखता है, जिससे डिलीवरी के समय आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ नार्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
पोषण देता है

अनार में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अतिरिक्त कैलोरी की भी जरुरत होती है। ऐसे में अनार का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर पोषण मिलता है।
इम्यून सिस्टम मजबूत होता है

गर्भवती महिला का इम्यून सिस्टम यदि मजबूत होता है तो प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला को फिट रहने के लिए और बीमारियों से बचाव के लिए अनार का सेवन जरूर करना चाहिए, क्योंकि अनार का सेवन करने से इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।
हड्डियों और मांसपेशियों के लिए है जरुरी

कैल्शियम, फोलेट, विटामिन सी, आयरन, मिनरल्स, प्रोटीन से भरपूर अनार का सेवन करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हड्डियों व् मांसपेशियों को मजबूती को बनाएं रखने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों और मांसपेशियों को बनाने में मदद मिलती है।
रक्तचाप को नियंत्रित रखता है


प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रैशर गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन अनार का सेवन करने गर्भवती महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से बचाव करने से साथ हदय को सुरक्षित रखने और बॉडी में ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से होने में मदद करता है। और प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में ब्लड फ्लो का बेहतर होना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है।
तनाव से राहत
ऐसा माना जाता है की अनार दिमाग के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के स्ट्रेस लेवल को कम करने में मदद करता है। जिसे महिला को तनाव जैसी परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।
दिमाग का विकास होता है

अनार में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर मानसिक विकास में मदद करते हैं। जिससे शिशु के दिमाग को तेज होने में मदद मिलती है।
जन्मजात बीमारी से बचाव होता है
अनार का सेवन करने से शिशु को जन्म के समय होने वाली बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि शिशु को इस समस्या से बचाने के लिए बॉडी में फोलेट का पर्याप्त मात्रा में होना जरुरी होता है, और अनार में फोलेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, साथ ही इससे जन्म के समय शिशु के वजन में कमी की समस्या से भी निजात मिलता है।

तो यह हैं वो फायदे जो गर्भवती महिला को अनार का सेवन करने से मिलते है, लेकिन अनार के जूस का सेवन अधिक भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से इसमें मौजूद अतिरिक्त कैलोरी आपके शरीर में बढ़ने लगती है, जिससे वजन बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है। साथ ही यदि आप रक्त को पतला करने की दवाई या किसी अन्य दवाई का सेवन कर रही हैं तो अनार का सेवन करना चाहिए या नहीं इसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।


दस गलतियां जो गर्भवती महिला पहले तीन महीने के अंदर करती है
दस गलतियां जो गर्भवती महिला पहले तीन महीने के अंदर करती है
दस गलतियां जो गर्भवती महिला पहले तीन महीने के अंदर करती है, प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने, गर्भवती महिला पहले तीन महीनो में यह करने से बचे, प्रेगनेंसी टिप्स, गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की शुरुआत में इन बातों का ध्यान रखें

जैसे ही महिला को पता चलता है की वो माँ बनने वाली हैं, और साथ ही यह खुशखबरी घर के बाकी सदस्यों को भी मिलती है। तो हर तरफ से प्रेगनेंसी से जुडी राय आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। ऐसे में क्या सही है और क्या गलत हैं इसे लेकर महिला काफी परेशान हो सकती है। खासकर जब पहली बार आप माँ बनने वाली हैं, क्योंकि दूसरी बार प्रेगनेंसी के दौरान तो आप खुद लोगो को राय देना शुरू कर देती हैं। ऐसे में आपको प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी होना बहुत जरुरी है क्योंकि महिला द्वारा कुछ भी किये जाने का प्रभाव केवल महिला पर ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है।

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने गर्भवती महिला के लिए बहुत अहम होते हैं, क्योंकि इस दौरान गर्भ में शिशु के अंगो का बनना और उनका विकास होना शुरू होता है। लेकिन बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला परेशानी में कई बार लापरवाही कर सकती है, और यह लापरवाही इस दौरान गर्भपात जैसी समस्या को खड़ी कर सकती है। और डॉक्टर्स के अनुसार जो महिला प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में अपना अच्छे से ध्यान रखती है, इससे शिशु के विकलांग और समय पूर्व प्रसव होने के चांस न के बराबर होते हैं। तो लीजिये आज हम आपको ऐसी ही कुछ गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में महिला कर सकती है और उसे ऐसा नहीं करना चाहिए।
खाने से परहेज

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण उल्टी, कमजोरी, जीभ में स्वाद में बदलाव आना, आदि होना आम बात होती है। ऐसे में उल्टी के डर या खाने का मन न करने के कारण महिला लापरवाही करती है। जो की आपकी परेशानी को बढ़ाता है, साथ ही इसे शिशु पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
गलत खाना
जीभ के स्वाद में परिवर्तन आना भी इस दौरान आम बात होती है, ऐसे में जंक फ़ूड का सेवन, कोल्ड ड्रिंक आदि का पीना, चाइनीज़ का सेवन करना, मसालेदार खाना, आदि का मन महिला का कर सकता है। और यदि महिला इसका सेवन अधिक करती है, जो की कुछ महिलाएं करती भी हैं, तो यह गर्भपात का कारण बन सकता है, खासकर चाइनीज़ फ़ूड में इस्तेमाल की जाने वाली सोया सॉस में मर्क्युरी की मात्रा अधिक होने के कारण बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
व्यायाम

फिटनेस को लेकर कुछ महिलाएं बहुत एक्टिव रहती है, लेकिन आपको इस बात का पता होना चाहिए की प्रेगनेंसी के तीन महीने में बॉडी में लगातार हार्मोनल बदलाव होते है, ऐसे में यदि आप शारीरिक श्रम भी अधिक करती है तो इससे गर्भ गिरने की समस्या या स्पॉटिंग जैसी परेशानी हो सकती है।
कैफीन का सेवन

चाय, कॉफ़ी कुछ महिलाओं के लिए पीना बहुत जरुरी होता है, क्योंकि उनके अनुसार चाय से ही दिन की शुरुआत होती है, और प्रेगनेंसी में होने वाले किसी भी दर्द से आराम दिलाने में यह आपकी मदद करती है। ऐसे में खाली पेट चाय का सेवन या चाय का अधिक सेवन दोनों ही गर्भवती महिला की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। चाय के साथ कॉफ़ी के अधिक सेवन से भी गर्भवती महिला को परहेज करना चाहिए।
पानी की कमी

खाने के साथ पानी की कमी भी गर्भवती महिला को परेशानी में डाल सकती है। इसीलिए बॉडी में पर्याप्त मात्रा में पानी का होना जरुरी होता है, लेकिन कुछ महिलाएं उल्टी आने के डर या जानबूझकर पानी के सेवन को भरपूर मात्रा में नहीं करती है।
तनाव

प्रेगनेंसी के दौरान तनाव गर्भवती महिला को नुकसान पहुंचाने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में भी बाधा डाल सकता है। लेकिन शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण कुछ महिलाएं तनाव में आ जाती है, ऐसे में उन्हें इससे बचना चाहिए ताकि प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।
कपड़ो में गलती

चाहे प्रेगनेंसी की शुरुआत हो या आखिरी महीना हो, प्रेगनेंसी में आपको थोड़े खुले, आरामदायक और जितना हो सके सूती कपडे पहनने चाहिए। क्योंकि ज्यादा टाइट कपडे भी पेट पर दबाव डाल सकते हैं, जिसके कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
तेजी से काम करना

प्रेगनेंसी कन्फर्म होते ही महिला को डॉक्टर्स भी तेजी से काम करने, झुककर काम करने, पेट पर दबाव पड़े ऐसे कामो को करने से मना करते हैं। और यदि कोई काम करना भी है तो आराम से काम करना चाहिए। लेकिन कुछ महिलाएं तेजी से काम करने के तरीके में बदलाव नहीं लाती है जो की महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। साथ ही इस दौरान भी कुछ महिलाएं शॉपिंग करना घूमना पसंद करती है जो महिला के लिए गर्भपात होने चांस को बढ़ा सकता है।
गुस्सा करना

मूड स्विंग्स होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है, ऐसे में महिला को गुस्सा, चिड़चिड़ापन महसूस होना आम बात होती है। लेकिन अधिक गुस्सा महिला के मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डाल सकता है, ऐसे में महिला के पार्टनर को उनके व्यव्हार को समझना चाहिए और उन्हें खुश रखना चाहिए। और महिला को भी अपने आप को बिज़ी रखने की कोशिश करनी चाहिए, अपने आपको खुश रखने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि गर्भवती महिला और शिशु दोनों को ही प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।
सोने में दिक्कत
कुछ महिलाओं को आदत होती है रात को देर से सोना, उल्टा होकर सोना, बहुत अधिक सोना, कम सोना, आदि। ऐसे में गर्भवती महिला का ऐसा करना महिला में कमजोरी, थकान, दर्द, तनाव जैसी परेशानी को बढ़ा सकता है, इसीलिए गर्भवती महिला को समय से सोना चाहिए, समय से उठना चाहिए, और भरपूर नींद लेनी चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।
तो यह हैं कुछ गलतियां जो प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में गर्भवती महिला कर सकती है। ऐसे में यह गलतियां करना किसी भी गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी दिक्कत में डाल सकता है। इसीलिए गर्भवती महिला को इन गलतियों को करने से बचना चाहिए, ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हर परेशानी के बचने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिल सके। साथ ही किसी भी तरह की परेशानी होने पर महिला को घर में खुद ही डॉक्टर नहीं बनना चाहिए बल्कि इसके लिए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

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