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6 7 8माह के बच्चे का baby food chart


6 माह के बच्चे का baby food chart और Recipe
बच्चों में आहार शुरू करने की सबसे उपयुक्त उम्र होती है जब बच्चा 6 month का होता है। इस उम्र में बच्चे को दूध के साथ साथ पौष्टिक आहार की भी आवश्यकता पड़ती है। लेकिन पहली बार बच्चों के ठोस आहार शुरू करते वक्त (weaning) यह दुविधा होती है की क्या खिलाएं और क्या नहीं। इसीलिए पढ़िए baby food chart for 6 month baby.


अक्सर माता-पिता के लिए यह चिंता का विषय रहता है की 6 महीने के बच्चे को क्या खिलाएं। अब 6 months baby food chart for Indian की मदद से आप अपने 6 माह के बच्चे को पौष्टिक आहार दे सकेंगे। 6 month के बच्चे को ऐसा आहार देना चाहिए जिससे उसके शरीर को सभी प्रकार के पोषक तत्त्व मिल सके। सिर्फ बच्चे का पेट भरने से काम नहीं चलेगा। अगर बच्चे को उसके आहार से उसके शरीर की जरूरत के अनुसार पोषक तत्त्व नहीं मिलते तो बच्चा कुपोषण का शिकार तक हो सकता है। 
Weekly sample food chart - 6 महीने के बच्चे के लिए

बच्चों में आहार शुरू करने की सबसे उपयुक्त उम्र होती है जब वो 6 month का होता हैं। हो सकता है की कुछ लोग आपको 3-से-4 महीने मैं ही ठोस आहार की शुरुआत करने की सलाह दें। मगर आप ऐसा न करें। 6 माह से पहले ठोस आहार शुरू करने से बच्चे में पाचन तथा food allergy से सम्बंधित समस्या हो सकती है। 6 month से पहले बच्चे को पानी तक नहीं देना चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञों की राय माने तो 6 महीने से पहले बच्चे को पानी पिलाना खतरनाक (जानलेवा) तक हो सकता है। बच्चों में भोजन पचाने वाले enzyme का बनना 4-से-6 महीने के बाद ही शुरू होता है जो की पाचन के लिए आवश्यक है। ठोस आहार की शुरुआत करने से पहले 6 माह तक इंतज़ार करें जब तक की बच्चे का पाचन तंत्र भोजन पचाने वाले enzyme को बनाना शुरू न कर दे। इसके आधार पे आप खुद का '6 month baby food chart in hindi' बना सकेंगी - संतुलित आहार चार्ट। 



अगर आप का बच्चा 6 माह से ज्यादा मगर 3 साल से कम उम्र का है तो आप इस लेख को जरूर पढ़ें - 3 years baby food chart in हिंदी।


पहला सप्ताह - [Week 1] Sample Baby Food Chart


Download Week 1 - Baby Food Chart in Hindi [PDF]

दूध छुड़ाने के तीन दिवसीय नियम का जिक्र हम ने इसी अध्याय (लेख) में आगे किये है। उसे पढ़ें और उसका पालन पहली सप्ताह में जरूर करें। चूँकि यह पहला सप्ताह है, बच्चे को बहुत थोड़ा सा ही खाने को दें। बच्चा मुख्या तौर पे आप के दूध पे या फिर formula milk पे निर्भर रहेगा। बस यूं समझ लीजिये की आप का बच्चा सिर्फ नाम के लिए ठोस आहार ले रहा है। ऊपर चार्ट में जो baby food recipes in hindi दिया गया है उसे बनाने की विधि आपको इस लेख के अंत में मिलेगी। 

विदेशी अंग्रेज़ी वेब-साइट पे आपको बच्चों को खिलने के लिए भारतिया आहारों का जिक्र नहीं मिलेगा। इसीलिए इस विशेष लेख में 6 month baby food chart Indian का जिक्र हम ने किया है ताकि baby food Chart में दी गई सारी सामग्री आपको आसानी से मिल जाये और recipes भी ऐसे हों जो हम भारतीयोँ के लिए आम हों।

यह भी पढ़ें - 7 month baby food recipes Indian और 8 month baby food recipes Indian. 

आज के दौर की तेज़ भाग दौड़ वाली जिंदगी मैं हर माँ के लिए यह संभव नहीं की अपने शिशु के लिए घर पे खाना त्यार कर सके। ऐसे में अगर आप बाजार का ब्रांडेड बेबी फ़ूड अपने 6 month baby के लिए खरीदतीं हैं तो आप को कुछ महत्वपूर्ण बात्तों का ध्यान रखना पड़ेगा। 6 माह के बच्चे के लिए उपलब्ध ready made baby food ने कई माताओं का जीवन सरल कर दिया है। लेकिन फिर भी घर पे त्यार बच्चों के आहार (संतुलित आहार चार्ट) का कोई मुकाबला नहीं है। 
दूसरा सप्ताह - [Week 2] Sample Baby Food Chart


Download Week 2 - Baby Food Chart in Hindi [PDF]

पहले सप्ताह में बच्चे को सिर्फ दो ही प्रकार के ठोस/तरल आहार दिया गया है। दूसरे सप्ताह में आप का बच्चा दो और नए आहार को चखेगा। दूसरे सप्ताह के अंत तक आपका बच्चा कुल मिलके चार नए आहार का स्वाद चख चूका होगा। दूसरे सप्ताह से आप को अपने बच्चे की दिनचर्या को निर्धारित करना शुरू कर देना चाहिए। उद्धरण के तौर पे बच्चे के सोने का समय, उठने का समय, खेलने का समय और खाने का समय। ऐसा करने पे आप बच्चे से सम्बंधित बहुत सी चीज़ों को व्यस्थित कर सकेंगी और आपका काफी काम भी आसान हो जायेगा। 

अगर आप का बच्चा दूसरे बच्चों से शारीरिक तौर पे कमजोर है तो उसका वजन बढ़ाने के लिए आप को उसे विशेष आहार देने पड़ेंगे जो उसका वजन बढ़ाने में उसकी मदद करेगा। बच्चों की अच्छी सेहत के लिए आप उनके आहार में ड्राई-फ्रूट्स मिला कर भी उन्हें दे सकते है। अगर आप अपने बच्चे को semi-solid food दे रहे हैं तो आप बच्चे के भोजन में dry-fruits को पीस कर भी मिला के दे सकते हैं। 

यह भी पढ़ें - 3 month baby care tips in Hindi और 5 month baby care tips in Hindi. 
तीसरा सप्ताह - [Week 3] Sample Baby Food Chart


Download Week 3 - Baby Food Chart in Hindi [PDF]

तीसरा सप्ताह का अंत होते-होते आपका बच्चा 6 नए आहार का स्वाद चख चूका होगा। इस दौरान आप को भी यह पता लग चूका होगा की आपके बच्चे को कौन सा आहार (सब्जियों का puree, मुंग की दाल की खिचड़ी, सब्जी वाली खिचड़ी, पांच दालों वाली खिचड़ी इतियादी) पसंद आया। अपने बच्चे को जबरदस्ती कुछ भी खिलने का कोशिश न करें। धैर्य रखें, कुछ समय पश्च्यात आप को अनेक ऐसे आहार के बारे में पता लग चूका होगा जो आपका बच्चा बड़े चाव से खाता है। जो आहार आपके बच्चे को पसंद है वही उसे दें खाने को। 
चौथे सप्ताह - Week 4 Sample Baby Food Chart


Download Week 4 - Baby Food Chart in Hindi [PDF]

बच्चे को mashed/pureed आहार देना जारी रखें। इस सप्ताह के अंत तक आप का बच्चा आठ नए आहार के बारे में जान चूका होगा। आपके बच्चे के दिनचर्या के आधार पे आप उसे दिन के किसी भी समय ठोस आहार दे सकते हैं। 

बच्चे में ठोस आहार की शुरुआत करते वक्त आपको कुछ चीज़ों की आवशकता पड़ेगी। इन चीज़ों की मैंने एक लिस्ट बनायीं है। ये ऐसी चीज़ें हैं जिनकी आवश्यकता आप को आहार बनाते वक्त पड़ेगा या फिर बच्चे को आहार खिलाते वक्त। 

ऊपर दिए गए baby food chart को सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए निचे दिए गए दिशा निर्देश ध्यान से पढ़ें। 
दूध छुड़ाने के तीन दिवसीय नियम 6 माह के बच्चे में

दिन मात्रा समय
पहला दिन 1 बड़ा चम्मच दोपहर का भोजन 
दूसरा दिन 2 बड़ा चम्मच दोपहर + नाश्ता 
तीसरा दिन 3 बड़ा चम्मच दोपहर + नाश्ता 

6 माह के बच्चे में जब आप पहली बार ठोस आहार की शुरुआत कर रहें हैं तो इसकी शुरुआत या तो सुबह के नाश्ते से करीये या फिर दोपहर के भोजन से। रात्रि भोजन में या सोने से पहले शरुआती दिनों में ठोस आहार न दें। इसी नियम का पालन उस वक्त भी करें जब आप कोई नई भोजन भी बच्चे को पहली बार दे रहीं हों तो। 

यह भी पढ़ें:
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2 साल के बच्चे का मांसाहारी food chart
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6 माह के बच्चे का baby food chart




6 महीने के बच्चे का आहार - 6 month baby Food Chart/ Meal Plan 

आहार जो आप अपने 6 माह के बच्चे को दे सकते हैं। 

सुबह उठने के बाद - Wake up 

जितने बजे भी सुबह आपका बच्चा उठे, सबसे पहले आप उसे या तो अपना दूध पिलायें या formula milk पीने को दें।

सुबह का नाश्ता 6 माह के बच्चे के लिए - Breakfast for 6 month baby 

सुबह उठते ही दूध पिलाने के बाद डेढ़ से दो घंटे के बाद आप अपने बच्चे को नाश्ते (breakfast) मैं ठोस आहार दे सकते हैं। यहां निचे दिए 6 recipes में से आप अपने बच्चे को हर दिन एक नया रेसिपी दे सकते हैं। पहले एक सप्ताह बच्चे को नाश्ते में सिर्फ फल खाने को दें। 


केला - सप्ताह में तीन से चार बार दें 
सेब - इसे हर दिन दिया जा सकता है
चीकू - इसे भी हर दिन दिया जा सकता है
नाशपाती - सप्ताह में तीन से चार बार दें 
पपीता - सप्ताह में चार से पांच बार दें
अवोकाडो (avocado) - इसे चाहें तो हर दिन दे सकते हैं



दोपहर का खाना - Lunch


पहला सप्ताह - गिला चावल या खिचड़ी 
दूसरा सप्ताह - गाजर के साथ खिचड़ी को पका के दें 
तीसरा सप्ताह - रागी का खिचड़ी ये गेहूं/ओट्स का दलीय 
चौथा सप्ताह - मूंग दाल या मुंग दाल की खिचड़ी 



बाकी का दिन - Rest of the day 

बाकी का आधा दिन आप अपने बच्चे को अपना दूध पिलायें या formula milk पीने को दें। दोपहर का खाना खिलने के दो घंटे के बाद ही बच्चे को दूध पिलायें। 
6 महीने के बच्चे का baby food recipe - ठोस आहार की शुरुआत करने के लिए recipe




Ingredients - सामग्री 


१/२ छोटा सेब
१/२ छोटा नाशपाती
१/२ cup चीकू (सपोटा)
१/२ cup पपीता 
१/२ केला 



विधि: 6 महीने के बच्चे के बच्चे के लिए नाश्ता बनाने की विधि

हर दिन अलग-अलग फल देने से बच्चे में अनेक प्रकार के nutrients की कमी को पूरा किया जा सकता है। बच्चों को आप सप्ताह में इस तरह से फल दे सकतें हैं। 


केला - कांटा चमच से mash कर लीजिये या फिर blender में blend कर लीजिये 
सेब - सेब को दो टुकड़े में काट लीजिये। उसके बीच का बीज निकल लीजिये। सेब को हल्का सा उबाल कर blender में blend कर लीजिये।
चीकू (sapota) - कांटा चमच या साधारण चमच से mash कर के बच्चे को खाने को दें।
नाशपाती - सेब को दो टुकड़े में काट लीजिये। उसके बीच का बीज निकल लीजिये। नाशपाती को ५ से ६ मिनट तक उबाल कर blender में blend कर लीजिये। फिर बच्चे को खाने को दें।
पपीता - कांटा चमच या साधारण चमच से mash कर लीजिये या फिर blender में blend कर लीजिये।
पका अवोकेडो (ripe avocado) - blender में इसे puree कर बच्चे को खिलाएं। 
सब्जियों को उबाल कर उनका puree बच्चों को दे सकते हैं। गाजर, कदु, लौकी, और french beans कुछ चुनिंदा सब्जियों में से हैं जिन्हे आप अपने बच्चों को दे सकते हैं। 

कितनी मात्रा आहार की उचित है 6 माह के बच्चे के लिए

6 माह के बच्चे से ये उम्मीद न करें की वो बहुत भोजन कर लेगा। इतने छोटे बच्चे का पेट भी बहुत छोटा होता है। बच्चे को अधिकांश (nutrition) पोषण दूध से ही मिल जायेगा। इस उम्र में बच्चे को उतना दूध पिलाते रहें जितना की उसे जरुरत है। जितनी बार आवश्यकता पड़े उतनी बार बच्चे को दूध पिलायें। पहले कुछ सप्ताह बहुत थोड़ा खाना ही बच्चे को खिलाएं। इस दौरान बच्चा मुख्यता स्तनपान और formula milk पे ही निर्भर रहेगा। 6 माह के बच्चे को कम से कम हर दिन 500ml - से - 600ml के बीच दूध पीना चाहिए। 
6 month बच्चे को भोजन कराते वक्त निम्न बातों का ध्यान रखें


हर 6 माह के बच्चे को जरुरी नहीं की वो दो वक्त ठोस आहार ग्रहण करें। अगर बच्चा सिर्फ एक वक्त ही ठोस आहार ग्रहण कर रहा है और बाकि वक्त दूध पे निर्भर है तो भी कोई चिंता का विषय नहीं। 
शुरुआती दौर मैं बच्चे को दिन में सिर्फ एक बार आहार दें और वो भी बहुत थोड़ा सा। आहार की मात्रा धीरे-धीरे कर के आप बढ़ा सकते हैं। 
बच्चे को ठोस आहार शुरू करने के बाद भी उसके प्रथम वर्ष मैं दूध ही उसका मुख्या पोषक आहार होगा।
बच्चे के प्रथम साल में उसे दूध पिलाना ना बंद करें। 


लक्षण: कैसे जाने की आप का बच्चा ठोस आहार के लिए तैयार है? 

तीन से चार महीना का होते-होते आप का बच्चा अपने सर को स्थिर रखना सीख लेगा। जब तक वो 6 महीना का होगा, तब तक उसके सर और गर्दन की मासपेशियां मजबूत हो चुकी होंगी। ठोस आहार ग्रहण करते वक्त आप के बच्चे को मजबूत सर और गर्दन की आवश्यकता पड़ेगी ताकि वो आसानी से आहार को घोंट सके। जब तक आपका बच्चा 6 माह का होगा तब तक उसका पाचन तंत्र भी पूरी तरह विकसित हो चूका होगा। 
6 महीने के बच्चे का ठोस आहार शुरू करने सम्बन्धी सवाल 

जब आपका बच्चा 6 महीने का होगा तो वो अलग अलग आहार की तरफ आकर्षित होने लगेगा। वो अपने सर को भी खुद ही स्थिर रखना सीख लेगा। ये कुछ निशानियां हैं की आपका बच्चा अब त्यार है ठोस आहार ग्रहण करने के लिए। क्या आप का बच्चा निचे दी गयीं चीज़ीं कर पता है।


क्या आप का बच्च कुर्सी पे बिना किसी सहारे के बैठ पाता है?
क्या उसका सर और गर्दन स्थिर हो गया है? 
जब आप अपने बच्चे के मुँह में चमच डालते हैं तो क्या वो मुँह बंद कर लेता है?
क्या स्तनपान करने या दूध पिलाने के बाद भी आप के बच्चे को भूख लगती है?



ऊपर दिए गए सवालों के लिए अगर आप के जवाब हाँ में है तो समझिये की आप का बच्चा त्यार है ठोस आहार के लिए। 

जब तक आप का बच्चा एक साल का नहीं हो जाता, ठोस आहार शुरू करने के बाद भी उसे दूध पिलाना जारी रखें। कम से कम 6 महीने की आयु तक अपने बच्चे को अपना ही दूध पिलायें। बच्चे के लिए माँ का दूध सबसे महत्वपूर्ण है। अगर आप व्यावसायिक, निजी या चिकित्सीय कारणों से अपने बच्चे को अपना दूध नहीं पीला सकती तो कम-से-कम उसे एक साल तक formula milk तो पिलाइये ही। माँ का दूध सिर्फ बच्चे के लिए फायदेमंद ही नहीं है वरन शिशु को दूध पिलाने पर माँ को भी होते हैं अनेक फायदे। 
क्या है 6 माह के बच्चों को ठोस आहार

आप के बच्चे ने गर्दन को स्थिर रखना सीख लिए है और तरह-तरह के भोजन की तरफ भी आकर्षित होता है इसका मतलब यह नहीं की वो table पे बैठ के आपके साथ भोजन करने के लिए शारीरिक तौर पे तैयार हो गया है। 6 माह के बच्चे का ठोस आहार किसी भी तरह से ठोस नहीं होता। इस दौरान बच्चे को भोजन पीस के दिया जाता है। भोजन ग्रहण करना एक कौशल है और आप के बच्चे को अभी थोड़ा समय लगेगा इस कौशल को सिखने में। 
सावधानियां: बच्चों में ठोस आहार शुरू करने सम्बन्धी 


6 महीने के बच्चे में ठोस आहार शुरू करते वक्त हमेशा एक भोजन से शुरू करें। या तो किसी एक फल से शुरू करें या फिर किसी एक सब्जी या आनाज से शुरू करें। दो तीन प्रकार के भोजन को मिला कर आहार तैयार ना करें। अगर किसी भोजन से बच्चे को food allergy होता है तो mixed आहार में पाता नहीं चलेगा। 
बच्चे में ठोस आहार की शुरुआत आप चाहें तो फल से कर सकते हैं। फलों में digestive enzymes होता है जो आहार को पचाने में बच्चे के पाचन तंत्र मदद करेगा। 
फल देने के एक सप्ताह बाद आप बच्चे को अगले सप्ताह से चावल का पानी (चावल का माड़) दे सकते हैं। उसके बाद वाले सप्ताह से आप बच्चे को दाल का पानी या सब्जयोँ का soup (boiled vegetable water) दे सकते हैं। 
शुरुआती दिनों में फलों को पीस कर बच्चे को खिलाये। पीसा हुआ फल आसानी से पच जायेगा। 
एक 6 महीने का बच्चा केवल एक चम्मच ही पीसा हुआ भोजन ग्रहण कर सकता है। जैसे-जैसे समय बीतेगा, आप आहार की मात्रा को भी बढ़ा सकते हैं। 
ठोस आहार की शुरुआत ऐसे भोजन से करें जो आसानी से पच जाये। 
आहार मैं कैलोरी की मात्रा बढ़ाने के लिए आप उसमे शुद्ध देशी घी या butter मिला सकते हैं। 
बच्चों का आहार त्यार करने और उन्हें परोसने के लिए Stainless steel या शीशे के बर्तनों का इस्तिमाल ज्यादा उपयुक्त रहेगा।
बच्चों का भोजन त्यार करने या उन्हें परोसने के लिए प्लास्टिक के सामानो का इस्तिमाल ना करें। अच्छे गुडवत्ता (quality) के प्लास्टिक के बर्तन जैसा की BPA free grade के products का भी इस्तेमाल ना करें। 
बच्चे को हमेशा शांत वातावरण में खिलाएं। भोजन कराते वक्त बच्चे से भोजन के रंग और उसके आकर के बारे मैं बात करें। भोजन कराते वक्त बच्चे को आप कोई अच्छी सी कहानी भी सुना सकते हैं। 
बच्चे को भोजन कराते वक्त हमेशा तीन दिवसीय नियम का पालन करें। इस नियम के अनुसार जब भी आप कोई नया भोजन बच्चे को पहली बार दें तो दूसरा भोजन देने से पहले तीन दिन का अंतराल रखें और चौथे दिन ही नया भोजन दें। 
अगर किसी नए भोजन से बच्चे में कोई allergy के लक्षण दिखे तो तुरंत उस भोजन को देना बंद कर दें। 
बच्चे को भोजन कराते वक्त हमेशा ध्यान रखें की आप का बच्चा या तो कुर्सी पे बैठा हो या फिर आप की गोद में। अगर बच्चा पीठ के बल लेटा हो तो उसे भोजन ना कराएं। 
बच्चे का भोजन नरम और मुलायम होना चाहिए। जरुरत पड़े तो भोजन को पतला करने के लिए उसमे आप दूध मिला सकते हैं। भोजन पकाते वक्त कभी भी breastmilk या formula milk ना मिलाएं। बल्कि भोजन जब तैयार हो जाये तब आप उसमें दूध मिलाएं। फल के puree को पतला करने के लिए पानी का इस्तेमाल करें, इसे पतला करने के लिए दूध ना मिलाएं। 
बच्चे को हमेशा ताज़ा बना भोजन कराएं। 
बच्चे को जबरदस्ती ना खिलाएं। समय के साथ धीरे-धीरे उसके आहार की मात्रा बढ़ जाएगी। 
बच्चे को पानी स्टील के कप से या शीशे के गिलास से पिलायें। जहाँ तक हो सके feeding bottle या sipper का इस्तेमाल ना करें। 






एलेर्जी वाले भोजन से बच्चों का बचाव

अगर आप भोजन से सम्बंधित तीन दिवसीय नियमो का पालन कर रहे हैं तो आप बहुत हद तक अपने बच्चों को भोजन से होने वाले एलेर्जी से बचा सकते हैं। 

छोटे बच्चों को आहार शुरू करते वक्त सिर्फ एक से दो बडा चम्मच भोजन देने की आवश्यकता पड़ती है इसी लिए भोजन की मात्रा कम रखें। 

कोई भोजन जब पहली बार करा रहें हों तो सतर्कता बरतें की कहीं नए भोजन से बच्चे को कोई एलेर्जी तो नहीं हो रही है। कुछ भोजन ऐसे हैं जिनसे एलेर्जी होने की सम्भावना रहती है। इस प्रकार के भोजन कराते वक्त विशेष सतर्कता की जरुरत रहती है। 
भोजन जिन से एलेर्जी होने की संभावना रहती है





अगर एलेर्जी है आपके बच्चे को किसी विशेष आहार से तो क्या करें

अगर आपके बच्चे को किसी विशेष आहार से एलेर्जी है तो आप अपने बच्चे में निम्न प्रकार के लक्षण देखेंगे:


किसी विशेष भोजन को खाने से अगर आपके बच्चे को दस्त होता है
उसे कब्ज होता है
भोजन करने के कुछ समय बाद आप का बच्चा भोजन को उलटी कर देता है
किसी विशेष भोजन को ग्रहण करने से आप के बच्चे के शरीर पे चकते (rashes) पड़ जाते हैं
भोजन के बाद आप का बच्चा अगर खूब रो रहा है (शायद पेट दर्द की वजह से) तो समझ लें की उसे आहार suit नहीं कर रहा है।


यह करें अगर आप के बच्चे को एलेर्जी है किसी विशेष आहार से तो


अगर किसी विशेष भोजन को ग्रहण करने के बाद उसमे एलेर्जी के लक्षण दिखे तो उस भोजन को तुरंत बंद कर दें और दुबारा उस आहार को ना दें। 
दो महीने के बाद फिर से सावधानीपूर्वक उस भोजन को देने की कोशिश। नया भोजन शुरू करते वक्त तीन दिवसीय नियम का पालन करें।
अपने बच्चे के लिए एक diary लिखना शुरू करें। उस डायरी में वो सब कुछ लिखें जो आप का बच्चा खाता है। यह भी लिखें की उस भोजन को खाने के बाद आप के बच्चे की क्या प्रतिक्रिया रही। कहीं उस भोजन को खाने से उसे कोई तकलीफ तो नहीं हुई। 
इस डायरी में आप अपने बच्चे से सम्बंधित उन सभी recipes का भी उल्लेख कर सकते हैं जिसे आप का बच्चा बहुत चाव से खाता है। 
डायरी में आप उन सभी भोजन का भी जिक्र करें जिसे खाने से आप के बच्चे में एलेर्जी के लक्षण दीखते हैं। 


गैस - आहार जिनसे आपके बच्चे को गैस हो सकता है

उन आहार के प्रति सावधान रहें जिन से आपके बच्चे को गैस हो सकता है। हम यहां कुछ गिने चुने आहार के नाम बता रहें हैं जिन्हे खाने से आप के बच्चे को थोड़ी तकलीफ हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो इंतज़ार करे की जब तक की आप का बच्चा 8 से 10 महीने का ना हो जाये। 
प्याज़
बोड़ा, राज़मा, beans 
गेहूं (रोटी, पाव-रोटी, डबल-रोटी, बिस्कुट, दलीय इत्यादि) 
दूध और उससे बानी वस्तुएं (पनीर, खोआ, लस्सी, दही, पेड़ा) 
गोभी, पत्ता गोभी, (cruciferous vegetables) 
अंडा

इस लेख में मैंने कोशिश की है की आप को 6 महीने के बच्चे को क्या खिलाना है उससे सम्बंधित जानकारी दे सकूँ। इन जानकारियोँ के साथ-साथ मैंने आहारों से सम्बंधित कुछ उदहारण भी दिए हैं। इन सबका इस्तिमाल कर के आप अपने 6 माह के बच्चे का diet plan तैयार कर सकते हैं। हमने उदहारण सिर्फ इस लिए दिए हैं ताकि आप को एक अंदाजा मिल सके। इस जानकारी के आधार पे आप खुद ही अपने बच्चे का Indian diet plan तैयार कर सकती हैं उन आहारों के द्वारा जिसे आप आम तौर पे अपने परिवार के लिए बनती हैं। इस लेख का उद्देश्य यही है की आप भोजन के समय सारणी और उस की मात्रा को समझ सकें।

7 माह के बच्चे का baby food chart और Indian Baby Food Recipe

6 से 7 महीने के बच्चे में जरुरी नहीं की सारे दांत आhttps://healthtoday7.blogspot.com/ये। ऐसे मैं बच्चों को ऐसी आहार दिए जाते हैं जो वो बिना दांत के ही आपने जबड़े से ही खा लें। 7 महीने के baby को ठोस आहार के साथ-साथ स्तनपान करना जारी रखें। अगर आप बच्चे को formula-milk दे रहें हैं तो देना जारी रखें। संतुलित आहार चार्ट



सातवें माह में अधिकांश बच्चे इतने त्यार हो जाते हैं की वे पिसे हुआ आहार (simple purees) को छोड़ कर ज्यादा महत्व वाले आहारों को ग्रहण कर सकें। 


चूँकि सातवें माह के होते-होते होते बच्चों के कई दांत भी निकल चुके होते हैं, अक्सर माताएं यह सोचते हैं की अब बच्चे को क्या खाने को दें और क्या नहीं।

ऐसे मैं "7 month baby food chart in hindi" की सहायता लें सकती हैं यह निर्धारित करने के लिए की बच्चे को सुबह, दोपहर और शाम को क्या खाने को दें (संतुलित आहार चार्ट)। 


7 Month Baby Food chart



Download: संतुलित आहार चार्ट

Recipes जिनका इस्तेमाल हुआ है 7 माह के बच्चे का baby food चार्ट बनाने मैं 




सूजी हलवा
मूंग दाल की खिचड़ी
रागी हलवा
पांच दालों की खिचड़ी
दलीय
सब्जियों की खिचड़ी
सेवइयां
सूजी उपमा
गाजर का हलवा
सब्जियों का puree



जब तक बच्चा 9 से 10 माह तक का न हो जाये तब तक उसे हर नया आहार देते वक्त संभावित एलर्जी से बचने हेतु भोजन के तीन दिवसीय नियम का पालन अवश्य करें। इस तरह अगर बच्चे को किसी नए आहार से एलर्जी होता है तो तुरंत पता चल जायेगा। 7 month baby इतना बड़ा होता है की उसे आप कई आहार मिला के भी दे सकते (combination food) हैं। 

Related terms: 7 month baby food recipes Indian, 7 month baby food in hindi



बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होगा उसे आप वैसे-वैसे आहार बढ़ा के खिला सकेंगे। कभी भी बच्चे को जबरदस्ती आहार न खिलाएं। 7 महीने के baby को ठोस आहार के साथ-साथ स्तनपान करना जारी रखें। अगर आप बच्चे को formula-milk दे रहें हैं तो देना जारी रखें। 

6 से 7 महीने के बच्चे में जरुरी नहीं की सारे दांत आये। ऐसे मैं बच्चों को ऐसी recipes दी जाती हैं जो वो बिना दांत के ही आपने जबड़े से ही खा लें। ऊपर दिए गए "7 माह के बच्चे का इंडियन baby food चार्ट" में सिर्फ उन्ही रेसिपीज का इस्तेमाल किया गया है जिन्हे बच्चे बिना दांत के भी खा सकते हैं। 

ऊपर दिए गए 7 माह के बच्चे के लिए baby food chart का इस्तेमाल करने से पहले 6 month baby food chart का पालन करें। ऐसा इसलिए क्योँकि इस उम्र में बच्चे का पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता जिस वजह से बच्चे को कुछ आहारों से food allergy हो सकता है। 6 month baby food chart में इस बात का ध्यान रखा गया है की बच्चे में ठोस आहार की शुरुआत करते वक्त सर्वप्रथम उसे सिर्फ एक ही आहार एक बार में दिया जाये। आहार देते समय ठोस-आहार-के-तीन-दिवसीय-नियम का भी पालन किया जाये। इससे बच्चे में होने वाले किसी भी संभावित food allergy के बारे में समय पे पता लगाया जा सकता है। 

अलग-अलग उम्र के पड़ाव में हर बच्चे के आहार ग्रहण करने की छमता अलग-अलग होती होती है। इसीलिए दूसरे बच्चों से तुलना करके आपने बच्चे को न खिलाएं। वो जितना खा सकता है उसे उतना ही खिलाएं - जबरदस्ती न करें। हाँ इस दौरान बच्चे को स्तनपान करना जारी रखें। अगर आप स्तनपान नहीं करा सकती हैं तो बच्चे को formula milk देती रहें। क्योँकि एक साल तक बच्चे का मुख्या आहार दूध ही रहेगा। 
यह भी पढ़ें:


बच्चों को एलेर्जी से बचाने के तीन दिवसीय नियम
6 months baby food chart/ meal plan
8 months baby food chart/ meal plan
9 months baby food chart/ meal plan
10 months baby food chart/ meal plan
11 months baby food chart/ meal plan
12 months baby food chart/ meal plan
Vegetarian food chart/ meal plan for 2 years old
Non-vegetarian food chart/ meal plan for 2 years old toddlers


ठोस आहार देते वक्त इन बातों का ध्यान रखें:


नए आहार की शुरुआत करते वक्त तीन दिवसीय नियम का पालन करें
आप के बच्चे का मुख्या आहार अभी भी स्तनपान या formula milk होना चाहिए
जब आपका बच्चा सातवें महीने का हो तब उसके आहार को बढ़ा कर पिछले महीने से ज्यादा कर दें। इस दौरान आप आपने बच्चे को कुछ खड़े आहार (finger foods) चबाने के लिए भी दे सकते हैं। ऐसे आहार आप के बच्चे के बाकि के दांतों को निकलने में मदद करेंगे। 
ठोस आहार शुरू करने पर अकसर बच्चे कब्ज की समस्या से परेशान देखे गएँ हैं। अगर आप के भी बच्चे को ठोस आहार शुरू करने पर कब्ज सताए तो कब्ज निवारण के तरीके अपनाएं। 


7 month के बच्चे का baby food त्यार करने में आपको इन सामानो की आवश्यकता पड़ेगी: 

बच्चे का भोजन तैयार करने के लिए जरुरत के बहुत से सामान तो आप के kitchen में पहले से ही मजूद होंगे। फिर भी निचे दिए गए list को ध्यान से देखें और अगर कोई सामान ऐसा है जो आप के kitchen में नहीं है तो baby food बनाने से पहले उसे खरीदना न भूलें। 
छोटा कुक्कर (small pressure cooker)

Baby food बनाने के लिए आप को जरुरत पड़ेगी 1.5 liter के एक pressure cooker की। इसमें आप बना सकेंगे खिचड़ी, चावल, दाल, सब्जियों की puree (vegetable puree) और उबाल सकेंगे आलू। घरों में आम तौर पे बड़े size का cooker होता है जिसमे 7 month के baby के लिए थोड़े quantity का आहार बना मुश्किल काम है। दूसरा फायदा यह है की छोटा आकर होने की वजह से आप इस pressure cooker को कहीं भी आसानी से सफर के दौरान ले जा सकते हैं। 
Stainless Steel का Strainer 

Baby food बनाते वक्त अक्सर vegetable puree और juices को strain करने की आवश्यकता है। ऐसे मैं Stainless Steel का Strainer एक आवश्यक वास्तु है। इस strainer का इस्तेमाल आप बच्चे के लिए रोटी बनाते वक्त आटा छानने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 

Baby food बनाने के लिए इस्तेमाल में आने वाले पुरे सामानो के सूचि के लिए आप इस लेख को पढ़ सकते हैं - "इन चीज़ों की आवशकता पड़ेगी आपको बच्चे में ठोस आहार की शुरुआत करते वक्त"

उम्मीद है आपको 7 माह के बच्चे का baby food चार्ट बनाने में मदद मिलेगी। अगर यह आप के काम आयी तो इस लेख को अवशय Face Book पे like करें।



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8 माह के बच्चे का baby food chart और Indian Baby Food Recipe


आठ महीने की उम्र तक कुछ बच्चे दिन में दो बार तो कुछ बच्चे दिन में तीन बार आहार ग्रहण करने लगते हैं। अगर आप का बच्चा दिन में तीन बार आहार ग्रहण नहीं करना चाहता तो जबरदस्ती ना करें। जब तक की बच्चा एक साल का नहीं हो जाता उसका मुख्या आहार माँ का दूध यानि स्तनपान ही होना चाहिए। संतुलित आहार चार्ट

8 month old feeding schedule (७ महीने के बच्चे की आहार समय-सारणी) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी।

बच्चा का आठ महीना पूरा होने पर बच्चों को दिए जाने वाले आहार के बारे मैं बहुत सी चिंतायें होती हैं। अब तक आपका बच्चा कम-से-कम तीन-से-चार प्रकार के आहारों से परिचित हो चूका होगा। 


आठ महीने के बच्चे का आहार चार्ट 


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Download - 8 माह के बच्चे का शिशु आहार - 8 months baby food chart (Indian Baby Food Chart/Recipe) in Hindi [PDF]



अगर आप इस चिंता में हैं की आप अपने ७ माह के बच्चे को क्या आहार दे सकती हैं, उसे कौन सी सब्जी, फल या आहार दे सकती हैं या देना सुरक्षित है - इसे ध्यान से पढ़िए और साथ में download करिये आहार समय-सारणी (PDF file). इसका printout आप अपने fridge या kitchen में लगा सकती हैं। कहाँ से आप इसे आसानी से देख सकें। 

8 माह के बच्चे का baby food chart और Indian Baby Food Recipe की इस लेख में आप जानेगे की ८ महीने के बच्चे को आहार देने का सही तरीका क्या है। 

चूँकि आप का बच्चा अब 8 months का है इसका मतलब पिछले के दो महीने वो कई प्रकार के फल, आहार और सब्जियों का स्वाद ले चूका है। 6 months के बाद से बच्चों में ठोस आहार की शुरुआत कर देनी चाहिए। 6 और सात महीने के बच्चे के आहार सरणी के लिए आप हमारी यह लेख पढ़ सकती हैं - Solid food for 7 month old baby और Solid food for 8 month old baby। 

शिशु आहार विशेषज्ञों की राय माने तो आठ महीने के बच्चो को दूध से बने उद्पाद (dairy products) जैसे की पनीर, दही, माखन इत्यादि दिया जा सकता है। हालाँकि कुछ विशेषज्ञों की राय में माँ-बाप को दूध से बने उद्पाद तबतक नहीं देने चाहिए जब तक की ९ महीने के बच्चे ना ही जाये। 

आप अपने बच्चे को दूध से बने उद्पाद (dairy products) तो दे सकती हैं मगर उसे अभी गाय का दूध देना प्रारम्भ ना करें। आठवें महीने में आप के बच्चे का पेट इतना परिपक्व नहीं हुआ है की वो गाय का दूध पचा सके। जब तक की आप का बच्चा एक साल का ना हो जाये तब तक उसे गाय का दूध ना दें। 

आहार आप के परिवार में ग्ध उत्पाद से एलर्जी का इतिहास है तो कुछ महीने और तहर जाने में ही समझदारी है। 

सुनने में अटपटा लगेगा लेकिन आप अपने बच्चे के आहार में शुद्ध देशी घी और माखन दे सकती हैं - लेकिन दूध नहीं दे सकती हैं। शुद्ध देशी घी और माखन के इस्तेमाल से आप baby food का स्वाद और जायका दोनों बढ़ा सकते हैं। 

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वैसे तो आठ महीने का शिशु दिन में तीन बार आहार ग्रहण करने योग्य हो जाता है - मगर फिर भी बच्चे को आहार खिलते वक्त उसके इस बात का ख्याल रखें की बच्चा असहज (uncomfortable) न महसूस करे। हर बच्चा अलग होता है और उसकी उसकी जरूरतें अलग होती हैं। आहार खिलते वक्त बच्चे के चहरे और उसके शरीर के हाव्-भाव का आंकलन करते रहें। इससे आपको पता चल जायेगा की आपको कब खाना खिलते वक्त रुक जाना चाहिए। 

एक बार जब आपका बच्चा एक निश्चित मात्रा का आहार आराम से खाने लगे तब आप कुछ दिन रुक कर उस आहार की दो-तीन चमच मात्रा बड़ा सकती हैं। अगर आप का बच्चा इसे आसानी से ग्रहण कर ले तब तो यह बड़ी हुई मात्रा का आहार अपने बच्चे को दें वार्ना पहले जितना ही दें। 

आठ महीने के बच्चे में कुछ दांतें आ जाती हैं मगर डटें न भी आयी हों तो बच्चे के जबड़े इस लायक होते हैं की वो आहार के छोटे टुकड़ों को खा सकें। 

अगर आप बच्चे को puree दे रहे हैं तो puree देना बंद कर दें और इसके बदले मसला हुआ आहार देना प्रारम्भ कर दें। जैसे की उबले मसले हुआ आलू। बच्चा को दिया जाने वाला आहार पूरी तरह पका हुआ और नरम होना चाहिए।

चलिए अब देखते हैं की 8 month old feeding schedule क्या होना चाहिए। 
8 माह के बच्चे को आप निम्न चीज़ें आहार में दे सकती हैं:


फल – केला, सेब, नाशपाती, आम, आड़ू, आलूबुखारा, खजुर, एवोकैडो, और पपीता। कोई खट्टे फल नहीं।
सब्जियां – शकरकंद, गाजर, हरे बींस, चुकंदर, कद्दू, मटर, तुरई, पालक, राजमा।
अनाज, साबुत अनाज – चावल, रागी, सूजी या रवा, जौ, साबूदाना, बाजरा, ज्वार, गेंहू और जई।
दाल – मूंग दाल, साबुत मूंग दाल
दुग्ध उत्पाद – मक्खन, घी और सादा दही (दूध नहीं)



क्या ना दें खाने को 8 माह के बच्चे को


दाल – मसूर दाल और तूर दाल
फल – कोई भी खट्टा फल ना दें
मांसाहार – कोई भी मांसाहारी आहार ना दें
दुग्ध उत्पाद – स्तनपान की जगह गाय का दूध ना पिलायें 
मसाले – Baby food में किसी भी मसाले का इस्तेमाल ना करें 


दिन में कितनी बार ठोस आहार दें 8 months old baby को 

आठ महीने की उम्र तक कुछ बच्चे दिन में दो बार तो कुछ बच्चे दिन में तीन बार आहार ग्रहण करने लगते हैं। अगर आप का बच्चा दिन में तीन बार भोजन ग्रहण करना नहीं चाहता तो इसमें कोई चिंता की बात नहीं। जब तक की बच्चा एक साल का नहीं हो जाता उसका मुख्या आहार माँ का दूध यानि स्तनपान ही होना चाहिए। स्तनपान के साथ साथ अगर बच्चा त्यार है तो तीन बार नहीं तो दिन दो बार या एक बार भी आहार सही है। जैसे-जैसे समय बीतेगा ठोस आहार की मात्रा आप बच्चे में बढ़ा सकती हैं। इसके साथ ही अगर बच्चा अभी दिन सिर्फ एक बार ही भोजन ग्रहण कर रहा है तो इसको बढ़ा कर दिन में दो बार, फिर कुछ समय पश्च्यात दिन में तीन बार कर दें। जल्दबाजी ना करें। अगर आप का बच्चा दिन में तीन बार आहार ग्रहण नहीं करना चाहता तो जबरदस्ती ना करें। बस इस बात का ध्यान रखें की अगर बच्चा ठोस आहार कम ग्रहण कर रहा है तो आप उसे स्तनपान के जरिये या फिर formula milk के द्वारा उसके आहार की आवश्यकता को पूरी कर दें। 



8 माह के बच्चे को आहार की कितनी मात्रा दें 
8 महीने के बच्चे को केवल २-३ बड़ा चम्मच ठोस आहार की जरूर पड़ती है। मगर इस उम्र में कुछ बच्चे पूरा कटोरा आहार का खा लेते हैं तो कुछ बच्चे २-३ बड़ा चम्मच ठोस आहार का खाने में नखड़ा करते हैं। हर बच्चे अलग होता है। अपने बच्चे को दूसरे बच्चों से तुलना ना करें।


12 माह के बच्चे का baby food chart (Indian Baby Food Recipe)


12 महीने या 1 साल के बच्चे को अब आप गाए का दूध देना प्रारम्भ कर सकते हैं और साथ ही उसके ठोस आहार में बहुत से व्यंजन और जोड़ सकते हैं। बढ़ते बच्चों के माँ-बाप को अक्सर यह चिंता रहती है की उनके बच्चे को सम्पूर्ण पोषक तत्त्व मिल पा रहा है की नहीं? इसीलिए 12 माह के बच्चे का baby food chart (Indian Baby Food Recipe) बच्चों के आहार सारणी की जानकारी दी जा रही है। संतुलित आहार चार्ट


जब बच्चा 12 महीने का होता है तो वो बहुत प्रकार के आहारों को ग्रहण करने के लिए शारीरिक तौर पे तैयार हो चुका होता है। 

यूँ कहें तो - आप का बच्चा हर वो आहार ग्रहण करने में अब सक्षम है जो आप खुद खाती हैं। बशर्ते खाना अच्छी तरह पका हुआ हो और उसको बनाने में बहुत ज्यादा मसाला, नमक या चीनी का इस्तेमाल नहीं हुआ हो। 


12 महीने के बच्चे का आहार तालिका (12 month Baby Food चार्ट - Feeding Schedule) 

Indian Meal Plan for 1 Year old baby 


आहार तालिका को बड़ा करने के लिए click करें - संतुलित आहार चार्ट

Download - 12 माह के बच्चे का शिशु आहार - 1 Year baby food chart (Indian Baby Food Chart/Recipe) in Hindi [PDF]

मै इस बात पे जोर देना चाहूंगा की ऊपर दिया गया चार्ट केवल guideline के लिए है। चूँकि हर बच्चा अलग है, इसीलिए चिन्ता करने की कोई जरुरत नहीं अगर आप का बच्चा कुछ आहारों को ग्रहण करना नहीं चाहता। 

ऊपर दिया गए चार्ट में आहार की मात्रा केवल उदहारण के लिए है। हर बच्चे की शारीरिक बनावट भिन-भिन होती है। इसीलिए किसी बच्चे के लिए आहार की मात्रा ज्यादा तो किसी बच्चे के लिए कम रहेगी। आप अपने बच्चे के बारे मैं ज्यादा जानती हैं। आप का बच्चा आहार की जितनी मात्रा बिना किसी दिकत के ग्रहण कर सके उसे उतना ही दें। अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से ना करें। तथा दूसरे बच्चों के आहार की मात्रा को देख कर अपने बच्चे के आहार की मात्रा का निर्धारण ना करें। अगर आप के बच्चे का वजन कम है तो आप उसे बच्चों का वजन बढ़ाने वाले आहार दे सकती हैं। जैसे की कई प्रकार के दलों को मिला के आहार तैयार कर के बच्चे को खिला सकती हैं। दाल में भरपूर protein होता है और protein मासपेशियां बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। 



जब आपका बच्चा एक साल का हो जाये तब आप को बच्चे के हिसाब से उसे आहार देना चाहिए। उदहारण के तौर पे अगर आप का बच्चा ठोस आहार ग्रहण नहीं करना चाहता तो उसके आहार को mash कर के उसे खाने को दें। मगर कोशिश करें की बच्चे को अब आहार puree के रूप में ना दें। 

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आपको यह भी ध्यान रखना पड़ेगा की आप के परिवार में food allergy का कोई इतिहास तो नहीं। अगर है तो अपने बच्चों को आहार देते वक्त उन आहारों के प्रति सतर्कता बरतें जिनसे आपके परिवार में food allergy का इतिहास है। ऐसे आहारों को पहली बार जब अपने बच्चों को दें तो सुबह या दोपहर पे वक्त दें। शाम को या रात में ना दें। 

महत्वपूर्ण जानकारी - 12 months old babies से सम्बंधित 


12 महीने के बच्चे को स्तनपान करना जारी रखें या उसे formula milk देते रहें। अभी भी आपके बच्चे का मुख्या आहार दूध ही रहेगा। 
अब समय आ गया है की आने वाले कुछ महीनो में आप चाहें तो अपने बच्चे का दूध पूरी तरह छुड़ा दें। एक ही झटके में बच्चे का दूध पूरी तरह बंद ना करें। बारी-बारी से एक-एक समय का दूध छुड़ाएं। 
अगर आप बोतल से अपने बच्चे को दूध पिलाती हैं तो बोतल से दूध पिलाना बंद कर सकती हैं इसके बदले बच्चे को ग्लास से दूध पीना सिखाएं। 
अगर आप अपने 12 months old baby को अभी भी आहार का puree बनके देती हैं तो अब बंद कर दीजिये वार्ना आगे चलके दिकत हो सकती है। एक साल का बच्चा इतना सक्षम होता है की वो आसानी से आहार को चबा के खा सके। 
अलग अलग प्रकार के आहारों को अपने बच्चे को खाने को दें। अगर आप का 1 year old baby कभी आहार को पूरी तरह ख़त्म नहीं करता है तो चिंता ना करें और जबरदस्ती खिलने की कोशिश भी ना करें। 
अगर आपने अभी तक अपने बच्चे को finger foods नहीं दिया है तो अब वक्त आ आ गया है की आप उसे finger food देना प्रारम्भ करें। 
क्या आपने अपने बच्चे का potty training शुरू कर दिया है? अगर हाँ तो आप potty training करने के सही तरीकों से सम्बंधित इस लेख को पढ़ सकती हैं। अगर आप का बच्चा इसके लिए अभी तक तैयार नहीं हुआ है तो चिंता की कोई बात नहीं। कुछ बच्चे potty training के लिए जल्दी त्यार हो जाते हैं तो कुछ बच्चे देर मैं। यह बिलकुल normal है।


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