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प्रेगनेंसी से जुड़े 19 मिथक और उनसे जुड़ी सच्चाई


प्रेगनेंसी से जुड़े 19 मिथक और उनसे जुड़ी सच्चाई


यूं तो नई मांओं के लिए प्रेगनेंसी से प्रसव तक का सफर सुहाना होता है, लेकिन मातृत्व का यह सफर चुनौतिपूर्ण तब बन जाता है, जब गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी से जुड़े मिथकों (pregnancy myths in hindi) पर भरोसा करने लगती है। देशभर में प्रचलित ये मिथक या तो पूरी तरह से गलत होते हैं या फिर इनमें आधी सच्चाई होती है। इस ब्लॉग में एेसे ही कुछ प्रचलित मिथक और उनकी पूरी सच्चाई के बारे में बताया गया है।

प्रेगनेंसी मिथक 1. प्रेगनेंसी में मॉर्निंग सिकनेस केवल सुबह के समय होती है 
(pregnancy myths in hindi: pregnancy me morning sickness keval subah ke samay hoti hai)
सच्चाई -यह मिथक है कि प्रेगनेंसी में मॉर्निंग सिकनेस केवल सुबह के समय होती है। प्रेगनेंसी में मॉर्निंग सिकनेस का मतलब जी मिचलाना, जी घबराना, चक्कर आना, घबराहट होना और उल्टी (pregnancy me vomiting in hindi) आना होता है, जो आमतौर पर गर्भावस्था में होने वाले हार्मोनल बदलाव यानी एचसीजी (hCG hormone in hindi) की वजह से होती है। ये गर्भवती महिला को दिन के किसी भी वक्त हो सकती है।

प्रेगनेंसी मिथक 2. प्रेगनेंसी में ज्यादा मॉर्निंग सिकनेस होना मतलब बच्चे को उचित पोषण न मिलना होता है

सच्चाई -इस मिथक के अनुसार गर्भवती महिला को मॉर्निंग सिकनेस (pregnancy me vomiting) होना इस बात का लक्षण है कि उसके शिशु को उचित पोषण नहीं मिल पा रहा है। यह मिथक सच नहीं है, बल्कि सच्चाई यह है कि गर्भावस्था में मॉर्निंग सिकनेस (pregnancy me morning sickness in hindi) गर्भावस्था का एक सामान्य लक्षण होता है।

प्रेगनेंसी मिथक 3. प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में पूरी तरह से आराम करना चाहिए 
(pregnancy myths in hindi: pregnancy ki pehli timahi me puri tarah se aaram karna chahiye)

सच्चाई -यह मिथक पूरी तरह से सच नहीं है। प्रेगनेंसी के दौरान जिन महिलाओं को गंभीर शारीरिक समस्याएं होती है, डॉक्टर केवल उन्हें ही पहली तिमाही के दौरान पूरी तरह से आराम करने की सलाह देते हैं। लेकिन जब बात स्वस्थ रूप से प्रेगनेंट महिलाओं की होती है तब डॉक्टर उन्हें पहली तिमाही के दौरान केवल सावधान रहने की सलाह देते हैं। प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में ज्यादा आराम करने से पैरों की मांसपेशियों में एेंठन और सूजन होती है।

प्रेगनेंसी मिथक 4. प्रेगनेंसी में व्यायाम करना शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है 
(pregnancy myths in hindi: pregnancy me exercise karna shishu ke liye hanikarak ho sakta hai)

सच्चाई -यह सच नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रेगनेंसी के दौरान नियमित रूप से व्यायाम करने से शिशु के विकास में मदद मिलती है। इसके अलावा रोजाना एक्सरसाइज करने से गर्भवती महिला को सामान्य प्रसव होने की संभावना बढ़ जाती है।

प्रेगनेंसी मिथक 5. पेट के आकार से लड़का या लड़की के होने का पता लगाया जा सकता है 
(pregnancy myths in hindi: pet ke aakar se ladka ya ladki ke hone ka pata lagaya jaa sakta hai)

सच्चाई -यह मिथक है। पेट के आकार से गर्भ में लड़का या लड़की होने का पता नहीं लगाया जा सकता। अल्ट्रासाउंड से ही गर्भ में शिशु के लिंग का पता लगाया जाता है। ध्यान रहे : भारत में लिंग परीक्षण कानूनी अपराध है।

प्रेगनेंसी मिथक 6. बार-बार पेट पर हाथ फेरने से बच्चे का विकास रूक जाता है 
(pregnancy myths in hindi: bar bar pet par hath ferne se bacche ka vikas ruk jata hai)

सच्चाई -यह मिथक सच नहीं है। गर्भवती महिला अगर अपने पेट पर बार-बार हाथ फेरती है तो इससे उसके बच्चे के विकास पर कोई असर नहीं पड़ता है, बल्कि इससे महिला और उसके बच्चे के बीच अापसी समझ व भावनात्मक जुड़ाव होता है।

प्रेगनेंसी मिथक 7. प्रेगनेंसी में पपीता खाने से गर्भपात होता है 
(pregnancy myths in hindi: pregnancy me papaya khane se garbhpat hota hai)


सच्चाई -यह पूरी तरह से सच नहीं है। कच्चे पपीते में लैटेक्स (latex in hindi) के तत्व पाए जाते हैं जिससे गर्भावस्था में प्रवस पीड़ा का अनुभव और समय पूर्व प्रसव (premature delivery in hindi) हो सकता है, लेकिन अभी तक इससे गर्भपात की बात वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हुई है। हालांकि अच्छी तरह पका हुआ पपीता खाना सुरक्षित है और इसमें विटामिन ए (vitamin A in hindi) होता है, लेकिन सावधानी के तौर पर गर्भावस्था में डॉक्टर की सलाह से ही पपीता खाएं।
प्रेगनेंसी मिथक 8. पूरी प्रेगनेंसी में किसी सुदंर बच्चे की तस्वीर देखने से आपको सुंदर बच्चा हो सकता है
(pregnancy myths in hindi: puri pregnancy kisi sundar bacche ki tasvir dekhne se aapko sundar bacha ho sakta hai)


सच्चाई -कहते हैं कि पूरी प्रेगनेंसी किसी सुंदर बच्चे की तस्वीर देखने से आपको भी सुंदर बच्चा हो सकता है, लेकिन यह सच नहीं है। दरअसल, सुंदर बच्चे की तस्वीर देखने से पूरी प्रेगनेंसी के दौरान आपका मन प्रसन्न रहता है और इससे आपके गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी मिथक 9. गर्भ में पल रहे शिशु के सिर पर अधिक बाल होने से आपको एसिडिटी हो सकती है
(pregnancy myths in hindi: garbh me pal rahe shishu ke sir par adhik baal hone se aapko acidity ho sakti hai)
सच्चाई -इस मिथक के अनुसार गर्भ में पल रहे शिशु के सिर पर अधिक बाल होने से आपको एसिडिटी हो सकती है, लेकिन यह सच नहीं है। गर्भावस्था में एसिडिटी (pregnancy me acidity) होना एक आम समस्या है और इसका गर्भ में पल रहे शिशु के बालों से कोई संबंध नहीं होता है। आमतौर पर प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन (progesterone hormone in hindi) की मात्रा बढ़ने से एसिडिटी होती है। इसके अलावा दूसरी एवं तीसरी तिमाही में जब गर्भाशय का आकार बढ़ने लगता है तो इससे पेट पर दबाव बनता है और एसिडिटी होती है।

प्रेगनेंसी मिथक 10. प्रेगनेंसी में मोबाइल या कंप्यूटर के इस्तेमाल से शिशु के दिमागी विकास पर असर पड़ता है 
(pregnancy myths in hindi: pregnancy me mobile ya computer ke istemal se shishu ke dimagi vikas par asar padta hai)

सच्चाई -यह मिथक सच नहीं है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल हानिकारक नहीं होता है और ना ही इससे शिशु के दिमागी विकास पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है।

प्रेगनेंसी मिथक 11. गर्भावस्था में कॉफी पीने से गर्भपात हो सकता है 
(pregnancy myths in hindi: garbhavastha me coffee pine se miscarriage ho sakta hai)

सच्चाई -गर्भावस्था में कॉफी पीने से गर्भपात (miscarriage in hindi) हो सकता है, यह मिथक पूरी तरह से सही नहीं है, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान पहली तिमाही में गर्भवती को ज्यादा कॉफी नहीं पीनी चाहिए। कॉफी में मौजूद कैफीन की मात्रा से गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंच सकता है। अगर प्रेग्नेंट महिला कॉफी पीने की आदी हैं तो वह रोजाना एक से दो कप कॉफी पी सकती है।

प्रेगनेंसी मिथक 12. प्रेगनेंसी में नौ महीनों तक सेक्स नहीं कर सकते 
(pregnancy myths in hindi: pregnancy me nine months tak sex nahi kar sakte)

सच्चाई -यह मिथक पूरी तरह से सच नहीं है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान सेक्स करने से महिलाओं में प्री-एक्लेमसिया (preeclampsia in hindi) का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान सावधानीपूर्वक सेक्स करने से गर्भवती महिलाओं को तनाव से राहत मिलती है और उन्हें अच्छी नींद आती है। हालांकि कुछ विशेष मामलों में अगर किसी महिला को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो तो डॉक्टर उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान सेक्स न करने की सलाह देते हैं।
प्रेगनेंसी मिथक 13. दूध में केसर मिलाकर पीने से गोरा बच्चा होता है 
(pregnancy myths in hindi: dudh me kesar milakar pine se gora bacha hota hai)

सच्चाई -इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पुराने वक़्त से चली आ रही परम्पराओं की वजह से अक्सर गर्भवती को गोरा बच्चा पाने के लिए केसर वाला दूध पीने को कहा जाता है। मगर ज्यादा केसर लेना आपके और बच्चे की सेहत के लिए बुरा हो सकता है, इसलिए डॉक्टर से पूछकर सीमित मात्रा में ही केसर वाला दूध पीयें।

प्रेगनेंसी मिथक 14. गर्भवती महिला को दो लोगों का खाना खाना चाहिए 
(pregnancy myths in hindi: garbhvati mahila ko do logo ka khana khana chahiye)

सच्चाई -यह एक मिथक है। गर्भवती महिला को दो लोगों का नहीं बल्कि संतुलित भोजन खाना चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान दो लोगों का खाना खाने से महिला का वजन असामान्य रूप से बढ़ सकता है और प्रसव के दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी में महिलाओं को रोजाना थोड़ी मात्रा और हर थोड़े समय के अंतराल में भोजन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी मिथक 15. तीसरी तिमाही में नारियल का पानी पीने से बच्चे का सिर मजबूत होता है 
(pregnancy myths in hindi: tisri timahi me nariyal ka pani pine se bacche ka sir majbut hota hai)

सच्चाई -इस मिथक के अनुसार गर्भावस्था में तीसरी तिमाही के दौरान नारियल का पानी पीने से बच्चे का सिर मजबूत होता है, लेकिन यह मिथक सच नहीं है। नारियल के पानी में मौजूद विटामिन (vitamin in hindi) और खनिज (minerals in hindi) की मात्रा प्रेगनेंसी में काफी लाभदायक होती है, इससे महिलाओं को एसिडिटी (acidity), कब्ज (constipation), और मॉर्निंग सिकनेस (उल्टी आना/ vomiting in hindi) की समस्या से राहत मिलती है। यह गर्भवती के शरीर में पानी की कमी दूर करने में सहायक होता है।

प्रेगनेंसी मिथक 16. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को गरम पानी से नहीं नहाना चाहिए 
(pregnancy myths in hindi: garbhavastha ke dauran mahilayo ko garam pani se nahi nahana chahiye)

सच्चाई -यह मिथक पूरी तरह से सच नहीं है। प्रेगनेंसी के दौरान गुनगुने पानी से नहाने से महिलाओं को थकान और तनाव से राहत मिलती है, लेकिन ज्यादा गरम पानी से नहाने से महिलाओं के शरीर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ सकता है और इससे शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी मिथक 17. प्रेगनेंसी में मछली नहीं खानी चाहिए 
(pregnancy myths in hindi: pregnancy me machli nahi khani chahiye)

सच्चाई -यह सच नहीं है। प्रेगनेंसी में डॉक्टर, कुछ चुनिंदा मछलियों को छोड़ कर लगभग सभी मछलियों को खाने की सलाह देते हैं। गर्भावस्था के दौरान सप्ताह में दो से तीन बार अपने भोजन में मछलियों को शामिल करने से गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास में मदद मिलती है। गुणकारी मछलियों में रावस या सुरमई (salmon fish), तेलापिया (tilapia), टुना (tuna) और झींगा (shrimp) मछलियां प्रमुख हैं।

प्रेगनेंसी मिथक 18. पहली डिलीवरी देर से होती है 
(pregnancy myths in hindi: pehli delivery der se hoti hai)


सच्चाई -यह सच नहीं है। दरअसल, प्रसव की तिथि गर्भवती महिला के मासिक चक्र की अवधि पर निर्भर करती है। जैसे अगर किसी महिला का मासिक चक्र 28 दिनों का है तो वह प्रसव की अनुमानित तिथि के आसपास या उससे पहले बच्चे को जन्म दे सकती है। इसीलिए यह जरूरी नहीं है कि अगर महिला की पहली प्रेगनेंसी है तो उसकी डिलीवरी देर से होगी।
प्रेगनेंसी मिथक 19. शिशु के जन्म के पहले उसके लिए कुछ न खरीदें 


सच्चाई -यह मिथक पूरी तरह सच नहीं है क्योंकि शिशु के जन्म के बाद उसे पहनाने के लिए माता-पिता के पास कुछ कपड़े होना जरूरी है। इसीलिए शिशु के जन्म से पहले कुछ जरूरी कपड़े जैसे सूती पजामा, लंगोटी आदि खरीद लें। हालांकि यह सच है कि डिलीवरी से पहले शिशु के लिए बहुत ज्यादा कपड़े नहीं खरीदने चाहिए, क्योंकि बच्चे का वजन कम या ज्यादा होने पर आप उसे खरीदे हुए कपड़े नहीं पहना सकेंगे।
प्रेगनेंसी का समय काफी मुश्किल होता है। इस समय किसी भी प्रकार की लापरवाही आपको और आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है। प्रेगनेंसी से जुड़े प्रचलित मिथकों (pregnancy myths in hindi) पर विश्वास करने से पहले उनकी सच्चाई जान लें। हमारे इस ब्लॉग में एेसे ही कुछ प्रचलित मिथकों के बारे बताया गया है। इनके अलावा अगर अापके मन में कोई प्रश्न हो तो आप सीधे अपने डॉक्टर से संपंर्क करें।

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