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जानिए क्यों होता है कमर दर्द


जानिए क्यों होता है कमर दर्द और इसके होने की वजह, कमर के दर्द को दूर करने के उपाय के बारे 
अगर आप भी कमर दर्द की परेशानी से परेशान है तो हो जाइये सावधान क्योकि यह हिप बर्साइटिस हो सकता है। यह स्थिति हिप क्षेत्र के आसपास दर्द और सूजन का कारण बनती है जो दैनिक जीवन में परेशानी का कारण बनता है। यदि आपको कमर में दर्द है तो कोई बात नहीं इस लेख को पढने के बाद आप खुद इसका उपचार कर सकते हैं। इस आर्टिकल में आप जानेंगे कमर के दर्द को दूर करने के उपाय के बारे में।


बर्साइटिस का अर्थ है बर्सा की जलन। बर्सा तरल पदार्थ से भरी हुई थैली है जो मांसपेशियों, अस्थिबंधन टेंडन या त्‍वचा की रक्षा करने में मदद करती है यह हड्डीयों के खिलाफ घर्षण उत्‍पन्‍न कर सकती है। पूरे शरीर में 160 बर्स होती हैं। लेकिन एड़ी, घुटनों, कोहनी, कंधे और कूल्‍हों के पास मौजूद बर्स अन्‍य भागों में उपस्थित बर्स की तुलना में अधिक सूजन प्राप्‍त करती हैं। आप आगे जानेगें कि हिप बर्साइटिस कैसे हो सकता है।


यदि हिप बर्साइटिस या ट्राकेनेटरिक बर्साइटिस हिप क्षेत्र में बर्सा की सूजन है, तो यह उन गतिविधियों के कारण होता है जो हड्डियों या बर्सा पर दबाव डालते हैं। हिप बर्साइटिस के लिए आम कारण हैं :

# घर पर ज्‍यादा काम या गलत मुद्रा।
# अधिक परिश्रम के कारण कूल्‍हे की मांसपेशियों और जोड़ों में तनाव।
# रीढ़ की हड्डि के मुद्दे
# यदि आपके दोनों पैर असामान्‍य रूप से छोटे और बड़े हैं तो यह ट्रोक्‍नेट्रिक बर्साइटिस के खतरे को बढ़ा सकता है। मधुमेह, रूमेटोइड गठिया, गठिया और थायराइड रोग जैसी चिकित्‍सा स्थितियां भी कमर दर्द का कारण बन सकती हैं।


# उल्‍टी को ठीक करने के लिए अदरक अच्‍छा होता है, लेकिन यह कमर के दर्द को भी ठीक करने के लिए भी उपयोग किया जाता है। अदरक में उपस्थित एंटी-इंफ्लामैट्री योगि‍क आपको कमर के दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं।


# कमर दर्द को ठीक करने के लिए अदरक की चाय का उपयोग करना चाहिए।अदरक की चाय बनाने के लिए, ताजा अदरक की जड़ को 4-6 पतली स्‍लाइसों में काटें और उन्‍हें ढ़ाई कप पानी में डाल कर इसे 10 – 15 मिनिट तक उबालें। इस मिश्रण को ठंड़ा हाने दें और फिर इसे छान लें। आप इस अदरक की चाय में शहद मिला कर सेवन करें। जब तक आपको आराम नहीं मिलता है तब तक आप इस चाय को दिन में 2-3 बार तक पी सकते हैं।


# कमर दर्द के लिए आप एक हर्बल चाय भी बना सकते हैं जिसमें आधा चम्‍मच काली मिर्च के दाने, अदरक और लौंग के आधा-आधा चम्‍मच पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। ये उपचार निश्चित ही आपको कमर के दर्द से राहत दिलाने में मदद करेगें।



कमर दर्द कारण :-

* मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव।

* अधिक वजन।

* गलत तरीके से बैठना।

* हमेशा ऊंची एड़ी के जूते या सेंडिल पहनना।
* गलत तरीके से अधिक वजन उठाना।
* शरीर में लम्बे समय से बीमारियों का होना।
* अधिक नर्म गद्दों पर सोना।


कमर दर्द से बचने के घरेलू उपाय

1. रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।

2. नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।

3. कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।

4. अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।

5. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।

6. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।

7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।

8. कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।

9. कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा।

10. कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं।

11. कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें।

12. ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें। अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहे। गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है।


इन सब उपायों को अपना कर आप भी कमर दर्द से कुछ निजात पा सकते है।



ठंड में कान के दर्द को ना ले हल्के में, ध्यान रखे ये बात

आजकल मौसम में काफी में काफी बदलाव देखने को मिल रहे है। और इस मौसम में कभी तेज ठंड तो कभी सामान्य ठंड की वजह से लोग बीमार हो रहे है। अक्सर ठंड का मौसम शुरु होने पर कान में दर्द की शिकायत होने लगती है। ये ज्यादातर बच्चों में आमतौर पर देखी जाती है लेकिन कई बार बड़ों को भी इस समस्या से दो चार होना पड़ता है। कान के इस दर्द को कई बार हल्के में लिया जाता है जो की काफी खतरनाक हो सकता है। कई बार सर्दी या जुकाम की वजह से भी कान में दर्द शुरु हो जाता है। इससे बचने और इसके इलाज के लिए कुछ आसान उपाय करने चाहिए...

ज्यादा दिनों तक सर्दी और जुकाम रहने से नाक के पिछले भाग से कान तक आने वाली यूस्टेकियन ट्यूब ठीक से काम करना बंद कर देते हैं जिससे संक्रमण, सूजन आ जाती है और कान में द्रव्य बढ़ने से कान में दबाव असामान्य हो जाता है और दर्द होने लगता है।


सर्दी जुकाम अगर हो तो पहले ही डॉक्टर को दिखाएं। इससे कान में दर्द की शिकायत हो सकती है। ज्यादा दिन तक जुकाम रहने और कफ के बाहर ना आने पर कान दर्द की समस्या से दो चार होना पड़ता है। बाहरी दबाव हवा या पानी का दबाव हो सकता है। इसलिए इयर बैरोट्रॉमा आमतौर पर स्काइडाइविंग, स्‍कूबा डाइविंग या हवाई जहाज उड़ानों के दौरान अनुभव होता है। कई बार प्लेन से उतरने समय एयर के दबाव के कारण भी ऐसा होता है।


कई बार दांतों की कोई समस्या होने पर भी कान में दर्द शुरु हो जाता है। इसका इलाज करने के लिए डॉक्टर की सलाह जरुर लें। साथ ही अगर घर पर भी कुछ घरेलू उपाय करके इससे निपटा जा सकता है। अगर कान में अचानक से दर्द होने लगे तो प्याज के रस की दो से तीन बूंदे डालें। इससे आराम मिलेगा। वहीं सरसों के तेल को हल्का सा गर्म करके एक बूंद कान में डालें को आराम मिलेगा लेकिन समस्या गंभीर होने पर डॉक्टर की सलाह लें। साथ ही तेल को गर्म करते समय साफ-सफाई का ध्यान जरुर रखें।


लहसुन भी कान के दर्द में कारगर है। लहसुन की एक या दो कलियां लेकर उसे सरसों के तेल में रखें और गर्म करें। जब कलियां थोड़ी सी पक जाएं और भूरी हो जाएं तो तेल के हल्का गुनगुना होने पर कान में एक या दो बूंद डालें। किसी भी तरह के फंगल इंफेक्शन होने पर डॉक्टर से ही इलाज करवाएं। खुद से किसी भी तरह के कोई नुकीली चीज कान के अन्दरना डालें।

अगर आप भी है फटी हुई एड़ियों से परेशान तो आज ही करे ये घरेलू उपाय
आजकल सर्दियों का मौसम चल रहा है और इस मौसम में लगभग लोग फ़टी एड़ियों की वजह से परेशान रहते है। फटी हुई एड़ियां पैर की एक सामान्य समस्या है। एक सर्वेक्षण में पाया गया है की 20 प्रतिशत वयस्क फटी हुई एड़ियों की समस्या से परेशान है। यह समस्या वयस्कों और बच्चों दोनों को हो सकती है। यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अक्सर अधिक प्रभावित करती है। आज के इस लेख में हम आपको फटी एड़ियों को ठीक करने के घरेलू इलाज और उपचार के बारे में बताने जा रहे है।

नारियल के तेल से फटी एड़ियों का इलाज - आपकी त्वचा के लिये नारियल के तेल से बेहतर कोई ओर मॉइस्चराइज़र नहीं है। नारियल का तेल पोषक तत्वों और स्वस्थ फैटी एसिड से परिपूर्ण है, जो तेजी से सूखता है, और स्थायी नमी प्रदान करता है। नारियल के तेल में पाये जाने वाले फैटी एसिड में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो फटी हुई एड़ियों के संक्रमण से होने वाली जलन और दर्द को राहत प्रदान करते हैं।

तिल का तेल फटी हुई एड़ियों का घरेलू इलाज -तिल का तेल बहुत पौष्टिक और मॉइस्चराइजिंग होता है। यह सूखी और फटी हुई एड़ियों को बहुत कुशलता के साथ नरम करने और घाव भरने में मदद करता है।सीसम के तेल को फटी हुई एड़ियों और किसी भी अन्य सूखी त्वचा के इलाज के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।रात में सोने से पहले अपनी फटी हुई एड़ियों या सूखी त्वचा में तिल के तेल से अच्छी तरह मालिश करनी चाहिए।

नींबू और जैतून का तेल -नींबू के रस में अल्फा-हाइड्रॉक्सी साइट्रिक एसिड पाया जाता है, जिसका उपयोग मृत त्वचा और जीवित कोशिकाओं के बीच आणविक बंधनों को तोड़ने के लिए किया जा सकता है। नींबू का रस फटी हुई एड़ियों में दरारों को कम करने में मदद करता है।क्षतिग्रस्त एड़ियों में ताजे नींबू को रगड़ें, या फिर सोने से पहले पैर के लिए मॉइस्चराइज़र के रूप में नींबू के रस और जैतून के तेल को मिलाकर उपयोग करें।



कटे-फटे होंठों को सॉफ्ट और मुलायम बनाने के लिए अपनाये ये घरेलू नुश्खे
आजकल शुष्क मौसम चल रहा है और मौसम में नमि के कारण हाथ और चेहरा और होठ फट जाते है महिलाएं अपने होंठों को सुंदर बनाने के लिए तरह तरह के उपाय करती हैं। ऐसे में जब होंठ फटने लगते हैं तो यह वास्तव में चिंता का विषय हो सकता है। होंठ फटना अपने आप में काफी कष्टप्रद और दर्दनाक होता है। यहां तक कि होंठ फटने पर कई बार इसमें से खून भी निकलने लगता है। इसके अलावा होठों पर एक मोटी मृत परत जम जाती है जो होंठों की सुंदरता को खराब कर देती है। इसलिए बेहतर यह है कि हम अपने होंठों को फटने से बचाएं ताकि हमें अन्य परेशानियों का सामना न करना पड़े।

नारियल का तेल - नारियल का तेल सबसे अच्छा प्राकृतिक मॉश्चराइजर और ल्यूब्रिकेंट (lubricant) होता है। इसमें हेल्दी फैटी एसिड मौजूद होते हैं जो होठों को नमी प्रदान करते हैं और उन्हें कोमल बनाते हैं। अगर आपके होंठ ड्राई हों या होंठ फटते हों तो एक चम्मच नारियल के तेल में एक या दो बूंद टी ट्री ऑयल मिलाएं और इसे होंठ पर लगाकर छोड़ दें। दिन में दो से तीन बार यह ऑयल लगाएं और संभव हो तो रात को सोने से पहले भी लगाएं। कुछ ही दिनों में आपका होंठ फटना बंद हो जाएगा।

शहद और वैसलीन – शहद में अनोखा एंटी बैक्टीरियल गुण पाया जाता है और वैसलिन या पेट्रोलियम जेली होठों को पोषण प्रदान करती है और होठों को शुष्क होने एवं फटने से बचाती है। अगर आपके होंठ सामान्य से अधिक फटते हैं तो एक चम्मच शहद में थोड़ी सी वैसलिन मिलाकर अपने होठों पर एक पतली परत लगाएं और 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद टिश्यू पेपर या कॉटन से पोंछ लें। एक हफ्ते तक रोजाना यह क्रिया करने से होंठ फटना बंद हो जाता है।
मिल्क क्रीम –होठों की शुष्कता खत्म करने और इन्हें फटने से बचाने के लिए दूध की क्रीम बहुत प्रभावी तरीके से काम करती है। इसमें मौजूद चिकनाई होठों को नमी और पोषण प्रदान करती है जिससे होंठ स्वस्थ दिखायी देते हैं। यदि आपके होंठ फटते हैं तो दूध की ताजी क्रीम होंठों पर लगाकर 10 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर ठंडे पानी से धो लें या कॉटन से पोंछ लें। इससे आपके होंठ सुंदर तो दिखेंगे ही साथ में होंठ फटने की समस्या भी खत्म हो जाएगी।

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