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सर्दियों में खाए जाने वाले पौष्टिक पदार्थो में गुड़

गुड़
सर्दियों में खाए जाने वाले पौष्टिक पदार्थो में गुड़ एक ऎसा शानदार मेवा है जिससे ना केवल आपकी सेहत में चार चांद लग जाते हैं बल्कि आपके बाल, हडि्डयां और सम्पूर्ण सेहत सुधर जाती है। गुड़ आपकी मीठा खाने की चाहत तो पूरी करता ही है, साथ ही आपकी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है।
झुर्रिया और पिंपल्स- गुड़ में भरपुर विटानि और मिनरल्स पाएं जाते हैं, जो स्किन को पोषित करते हैं। गुड़ से स्किन सॉफ्ट, हेल्दी, हाइड्रेट और ग्लोइंग बनती है। इससे चेहरे पर झुर्रिया भी नहीं पड़ती और यह पिंपल्स होने से भी रोकता है।
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कम करें वजन- मीठा खाने से कैलोरी बढ़ती है जिससे वजन ज्यादा होने लगता है, लेकिन गुड़ में पाएं जाने वाले मिनरल्स विशेषत पोटेशियम वजन को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। साथ ही यह मेटाबोलिज्म भी बढ़ाता है।
कब्ज- गुड़ पाचन का एक बहुत अच्छा साधन है। इससे पाचन तंत्रा दुरूस्त बना रहता है और कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याएं नहीं होती है। खाने के बाद गुड़ खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद रहता है।
घने बाल- गुड़ आयरन का एक अच्छा स्त्रोत है। इसे विटामिन सी से भरपुर चीजों जैसे नींबू, आंवला आदि के साथ खाने से बाल लंबे, घने, काले और हेल्दी बनते हैं। ऎसा माना जाता है कि महिने में दो बार शैंपू से पहले गुड़, मुल्तानी मिट्टी और दही का मिश्रण बालों में लगाने से बाल प्राकृतिक रूप से खूबसूरत और लंबे होते हैं।
लिवर की सफाई- गुड़ का एक छोटा सा टुकड़ा आपके शरीर से अपशिष्ट पदार्थो को बाहर कर देता है। अगर कोई एल्कोहल का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करता है तो लिवर की सफाई के लिए गुड़ बेस्ट है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गुड़ खाकर आप ज्यादा एल्कोहल पी सकते हैं। एल्कोहल शरीर के लिए हानिकारक होता है।
जोड़ों के दर्द में सहायक- गुड़ में कैल्शियम पाया जाता है, जो हडि्डयों को मजबूत बनाता है। गुड़ के सेवन से हडि्डयों से जुड़ी समस्याओं और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है। रोज अदरक के एक टुकड़े के साथ गुड़ खाने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है और ज्वॉइंट्स मजबूत बनते हैं।
अस्थमा गुड़ में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाने से यह गले और फेफड़ों के इंफेक्शन से बचाव करता है। साथ ही अस्थमा मरीज को सांस लेने में होने वाली दिक्कत को भी दूर करता है।
इम्यूनिटी- गुड़ में एंटिऑक्सीडेंट्स, जिंक, सेलेनियम पाया जाता है, जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। जिससे बैक्टीरिया से लड़ने में मदद मिलती है। इसलिए रोज एक छोटा सा गुड़ का टुकड़ा खाना चाहिए।
खून की सफाई- अगर रोजाना गुड़ खाया जाएं तो यह खून को प्योरिफाई करता है। इससे खून साफ रहता है। गुड़ खाने से ब्लड हीमोग्लोबिन बढ़ता है और खून संबंधी कई बीमारियों की जोखिम कम होती है।
सर्दियों मे सेहत का बादशाह खजूर अनेकों गुणों से भरपूर खजूर
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एनर्जी- खजूर एनर्जी के बड़ा स्त्रोत है। इसमें प्राकृतिक शुगर जैसे ग्लोकोज, सुक्रोज और फ्रुक्टोज पाई जाती है। ज्यादा एनर्जी के लिए खजूर को दूध के साथ लें। इससे यह एक अच्छा पोषक स्नेक्स बन जाता है।
कब्ज- अगर आप कब्ज से परेशान हैं तो खजूर इसमें बहुत फायदेमंद है। कब्जी दूर करने के लिए रात को खजूर भिगोकर रखें और सुबह खा लें। जिस पानी में आपने खजूर भिगोए थे, वह भी लाभदायक है।
बालों का झड़ना रोके- खजूर बालों के लिए बहुत अच्छे होते हैं। रोजाना 2-3 खजूर खाने से बाल मजबूत और हेल्दी बनते हैं। खजूर का तेल भी बालों को झड़ने से बचाता है।
एनिमिया- खजूर में भारी मात्रा में आयरन पाया जाता है, जो एनिमिया के इलाज में बहुत फायदेमंद है। इसे ज्यादा मात्रा में भी खाया जा सकता है क्योंकि यह शरीर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं डालता है।
एंटी एजिंग- खजूर में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो एजिंग प्रोसेस को धीमा करता है और आपकी स्किन को जवां बनाता है और झुर्रियों मिटाता है। खजूर स्किन की समस्याओं को दूर करता है। 
कैंसर- खजूर का बॉडी पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है और यह पूरी तरह से प्राकृतिक है। खजूर पेट के कैंसर की जोखिम को कम करता है। साथ ही खजूर से आंखों की रोशनी तेज होती है और रात के वक्त होने वाले अंधेपन से भी बचाता है।
लो फैट- खजूर में कोलेस्ट्रॉल फ्री होते है। मोटापा नहीं बढ़ता है। इसमें विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं। साथ ही यह पाचन तंत्र को भी दुरूस्त रखता है। इसमें बहुत कम कैलोरी पाई जाती है।
त्वचा संबधी समस्या--2-3 खजूर खाने से स्किन समस्या में फायदा होता है।

पपीता ही नहीं इसकी #पत्तियां भी हैं फायदेमंद:~



पपीता खाना यूं तो हर किसी के लिए फायदेमंद हैं. लेकिन इसके कुछ खास फायदे भी हैं जानिए, पपीता और उसकी पत्तियों को खाने से आप किन बीमारियों से बच सकते हैं.

ये तो आप जानते ही हैं डेंगू फीवर में पपीते के पत्ते के रस को पिलाया जाता है जिससे प्लेटलेट्स बढ़ती हैं.

जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं हो अगर वे रोजाना एक कटोरी पपीता खाएंगे तो उनका हाजमा ठीक रहेगा.

कच्चा पपीता खाने के भी कई फायदे हैं. ये प्रोटीन डायजेशन माना जाता है यानी जिन लोगों को चना, राजमा या दालें हजम नहीं होती उन्हें थोड़ा सा कच्चा पपीता सलाद के तौर पर खाना चा‍हिए. इससे उनमें प्रोटीन की कमी नहीं होगी.




कच्चा पपीता छोटे बच्चों को नहीं देना चाहिए क्योंकि बच्चों का पाचन तंत्र कच्चे पपीते को डायजेस्ट नहीं कर पाएगा.

पपीते में पाए जाने वाला बीटा कैरोटिन विटामिन ए में तब्दील होता है जो कि स्वस्थ आंखों के लिए बहुत फायदेमंद हैं.

यदि किसी ने फ्राइड या हैवी खा लिया है तो उसे पपीता खाना चाहिए. पपीते को खाना खाने के बाद भी खाया जा सकता है.

गर्भवती महिलाओं को बहुत ज्यादा पपीता नहीं खाना चाहिए. 

इम्यूनिटी बढ़ाना चाहते हैं तो भी पपीता खा सकते हैं. ऐसे लोग यदि रोजाना पपीता खाएंगे उनको कफ, कोल्ड और बुखार जल्दी-जल्दी होना कम हो जाता है.

डायबिटीज मरीज भी पपीता खा सकते हैं**

निरोगी काया

अम्लपित्त ,एसिडिटी,उल्टी,दस्त,पेट के कीड़े सबका एक उपाय.... !

🌿🌿 जीरा,धनिया और मिश्री तीनों को बराबर मात्रा में मलाकर पीस लें | इस चूर्ण की २-२ चम्मच सुबह-शाम सादे पानी से लेने पर अम्लपित्त या एसिडिटी ठीक हो जाती है |

🌿🌿* एसिडिटी से तुरंत राहत पाने के लिये, एक चुटकी कच्‍चा जीरा ले कर मुंह में डाल कर खाने से फायदा मिलता है।

🌿🌿* जीरा,सेंधा नमक,काली मिर्च,सौंठ और पीपल सबको समान मात्रा में लेकर पीस लें | इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में भोजन के बाद ताजे पानी से लेने पर अपच में लाभ होता है

🌿🌿* पांच ग्राम जीरे को भूनकर तथा पीसकर दही की लस्सी में मिलाकर सेवन करने से दस्तों में लाभ होता है |

🌿🌿* १५ ग्राम जीरे को ४०० मिली पानी में उबाल लें | जब १०० ग्राम शेष रह जाये तब २०-४० मिली की मात्रा में प्रातः-सांय पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं |

🌿🌿* एक चम्मच भुने हुए जीरे के बारीक़ चूर्ण में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन भोजन के बाद सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है |

🌿🌿* इसमें एंटीसेप्‍टिक तत्‍व भी पाया जाता है, जो कि सीने में जमे हुए कफ को निकाल कर बाहर करता है और सर्दी-जुखाम से राहत दिलाता है। यह गरम होता है इसलिये यह कफ को बिल्‍कुल अच्‍छी तरह से सुखा देता है।

🌿🌿* यदि आप नींद न आने की बीमारी से ग्रस्त हैं तो एक छोटा चम्मच भुना जीरा पके हुए केले के साथ मैश करके रोजाना रात के खाने के बाद खाएं.
🌿🌿* जब भी सर्दी-जुखाम हो, तो एक ग्‍लास पानी में जीरा ले कर उबाल लें और इस पानी को पिएं। कई साउथ इंडियन घरों में सादा उबला पानी न पी कर 'जीरा पानी' पिया जाता है।

🌿🌿* जीरे को बारीक़ पीस लें | इस चूर्ण का ३-३ ग्राम गर्म पानी के साथ दिन में दो बार सेवन करने से पेट के दर्द तथा बदन दर्द से छुटकारा मिलता है |

🌿🌿* जीरा आयरन का सबसे अच्‍छा स्‍त्रोत है, जिसे नियमित रूप से खाने से खून की कमी दूर होती है। साथ ही गर्भवती महिलाएं, जिन्‍हें इस समय खून और आयरन की जरुरत होती है, उनके लिये जीरा अमृत का काम करता है।

🌿🌿* जीरा खाने से लीवर मजबूत होता है और उसकी शरीर से गंदगी निकालने की क्षमता में भी सुधार आता है।

🌿🌿* ब्लड में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए आघा छोटा चम्मच पिसा जीरा दिन में दो बार पानी के साथ पीएं। डायबिटीज रोगियों को यह काफी फायदा पहुंचाता है।

🌿🌿* कब्जियत की शिकायत होने पर जीरा, काली मिर्च, सोंठ और करी पावडर को बराबर मात्रा में लें और मिश्रण तैयार कर लें। इसमें स्वादानुसार नमक डालकर घी में मिलाएं और चावल के साथ खाएं। पेट साफ रहेगा और कब्जियत में राहत मिलेगी***


1. दालचीनी-- कहने को दालचीनी एक सिर्फ एक मसाला है लेकिन ये एक बहुत बढ़िया जड़ी बूटी भी है। यदि रात को सोने से पहले नियमित रूप से एक चुटकी दालचीनी का पाउडर शहद के साथ मिलाकर ले तो इससे मानसिक तनाव में राहत मिलती है और दिमाग भी तेज होता है।
2. हल्दी--भारत के हर घर में प्रयोग होने वाली हल्दी न केवल कैंसर के इलाज में अचूक औषधि है बल्कि यह दिमाग को भी स्वस्थ रखने में मदद करती है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के अनुसार, हल्दी में कुरकुमीन नामक एक रसायन पाया जाता है जो की दिमाग की मृत या निष्क्रिय कोशिकाओं को सक्रीय करने में सहायक होता है।
3. शंख पुष्‍पी--दिमाग की शक्ति को बढ़ाने के लिए शंखपुष्पी के बहुत ही बढ़िया औषधि है। दिमाग को तेज करने के लिए रोज आधा चम्मच शंख पुष्पी को एक कप गरम पानी में मिला कर लें। यह दिमाग में रक्त का सही संचार करती है जिससे याद करने की क्षमता और सीखने की क्षमता को भी बढ़ाती है।
4. तुलसी--तुलसी एक जानी-मानी एंटीबायोटिक जड़ी बूटी है। इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्‍सीडेंट तत्व मष्तिष्क और हृदय में रक्त के प्रवाह को बेहतर करते है। इसलिए तुलसी को एक उत्तम औषधि के रूप में जाना जाता है।
5. ब्राह्मी--बाह्मी दिमाग तेज करने वाली सबसे उत्तम औषधियों में एक है। इसके नियमित प्रयोग से स्मरण शक्ति याद्दास्त बढती है। एक चम्मच शहद और आधा ब्राह्मी गर्म पानी में मिलाकर पीने से दिमाग तेज होता है।



केसर saffron

असली केसर की पहचान : असली केसर पानी में पूरी तरह घुल जाती है। केसर को पानी में भिगोकर कपड़े पर रगडने से यदि पीला केसरिया रंग निकले तो उसे असली केसर समझना चाहिए और यदि पहले लाल रंग निकले व बाद में पीला पड़े तो नकली केसर समझना चाहिए।

केसर बुखार की प्रारिम्भक अवस्था, दाने, चेचक व आन्त्रज्वर को बाहर निकालता है लेकिन दाने निकल आने पर विशेषत: बुखार आदि पित्त के लक्षणों में केसर का उपयोग सावधानी से करना चाहिए।


1. आंखों से कम दिखाई देना:

गुलाबजल में केसर घिसकर आंखों में नियमित डालने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

2. नपुंसकता: 

केसर, जायफल और जावित्री पान में रखकर दिन में 2 से 3 बार खाने से नपुसंकता दूर होती है।

3. मूत्राघात:

घी के साथ केसर मिलाकर प्रतिदिन खाने से मूत्रघात (पेशाब में वीर्य आना) रोग ठीक होता है।

4. सर्दी-जुकाम, खांसी:

केसर को दूध में घोटकर दिन में 3 बार नियमित रूप से कुछ दिनों तक पीने से सर्दी, जुकाम और खांसी नष्ट होती है।
बच्चों को सर्दी-खांसी के रोग में लगभग 24 से 36 मिलीग्राम केसर को गर्म दूध में मिलाकर सुबह-शाम पिलाएं और केसर को पीसकर मस्तक और सीने पर लेप करें। इससे खांसी के रोग में आराम आता है।


5. अंजनहारी:

केसर को घिसकर ठंडे पानी में मिलाकर आंखों में लगाने से `अंजनहारी´ (गुहेरी) दूर होती है।
केसर और अफीम को गुलाबजल में घिसकर आंखों पर लेप करने से आंखों का लाल होना ठीक होता है।


6. निमोनिया: 

बच्चे को सर्दी लगकर निमोनिया की शिकायत हो तो240 से 480मिलीग्राम केसर को गर्म दूध में मिलाकर बच्चे को पिलाएं। इसके साथ मस्तक व सीने पर केसर के लेप से मालिश भी करें। इससे निमोनिया में जल्दी लाभ मिलता है।

7. अफारा (गैस का बनना):

केसर 120 से 240 मिलीग्राम की मात्रा में शहद के साथ पीने से अफारा ठीक होता है। यह दस्त और उल्टी के लिए भी लाभकारी है।

8. गर्भधारण:

केसर और नागकेसर 4-4 ग्राम की मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें और मासिकधर्म शुरू होने के तुरंत बाद खाएं। इससे गर्भधारण होता है।
गजकेसर की जड़, पीपल की दाढ़ी और शिवलिंगी के बीज 6-6 ग्राम की मात्रा में कूट-छान लें और इसमें 18 ग्राम की मात्रा में चीनी मिला लें। यह 5 ग्राम मात्रा में सुबह के समय बछडे़ वाली गाय के 250 मिलीलीटर कच्चे दूध में मिलाकर मासिकधर्म खत्म होने के बाद लगभग एक सप्ताह तक खाएं। इसके सेवन से स्त्रियां गर्भधारण के योग्य बन जाती है।


9. कब्ज: 

आधा ग्राम केसर को घी में पीसकर खाने से 1 साल पुरानी कब्ज़ दूर होती है।

10. दस्त:

असली केसर के 1 से 2 रेशे को देशी घी में मिलाकर सेवन करने से बच्चों को होने वाले पतले दस्त रोग ठीक होता है।
असली केसर 2 ग्राम की मात्रा में लेकर चावल के साथ देशी घी में मिलाकर बच्चे को चटाने से दस्तों का बार-बार आना बंद होता है।
हींग, अफीम और केसर को मिलाकर शहद के साथ खाने से अतिसार रोग ठीक होता है।
केसर 120 से लेकर 240 मिलीग्राम की मात्रा में शहद के साथ खाने से दस्त, पेट का फूलना और पेट का दर्द समाप्त होता है।


11. बहरापन: 

केसर, गुलाबी फिटकरी और एलुवा 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक पीस लें और तुलसी के 50 मिलीलीटर रस में मिलाकर 3-4 बूंद की मात्रा में कान में डालें। इससे कुछ दिन तक लगातार प्रयोग करने से बहरापन दूर होता है।

12. कष्टार्तव (मासिक धर्म का कष्ट के साथ आना):

200 मिलीग्राम केसर को दूध में मिलाकर दिन में 2 से 3 बार पीने से मासिकधर्म की पीड़ा दूर होती है।

13. मासिकधर्म की अनियमितता: 

केसर और अकरकरा को पीसकर गोलियां बनाकर खाने से मासिकधर्म नियमित होता है।

14. रक्तप्रदर: 

केसर का चूर्ण 60 से 180 मिलीग्राम की मात्रा में मिश्री मिले शर्बत में मिलाकर पीने से रक्तप्रदर रोग ठीक होता है।

15. स्तनों में दूध बढ़ाना: 

पानी में केसर को घिसकर स्तनों पर लेप करने से स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

16. शीघ्रपतन:

केशर को दूध में डालकर पीने से शीघ्रपतन रोग दूर होता है।

17. पेट के कीड़े:

केसर और दालचीनी को बराबर-बराबर मात्रा में बारीक पीस लें और फिर इसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से आंतों के कीड़े समाप्त होते हैं और पेट का दर्द ठीक होता है।
कपूर और केसर 60-60 मिलीग्राम की मात्रा में लेकर एक चम्मच दूध में अच्छी तरह मिलाकर दिन में 3 बार पिलाएं। इससे पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।
120 मिलीग्राम केसर को पीसकर दूध के साथ कुछ दिनों तक प्रयोग करने से पेट के कीड़े खत्म होते हैं।


18. पेट का दर्द:

3 ग्राम केसर को 3 ग्राम दालचीनी के साथ पीसकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट का दर्द समाप्त होता है।
केशर 120 से लेकर 240 मिलीग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से और पानी में मिलाकर पेस्ट के रूप में पेट पर लगाने से दर्द, अफारा (गैस) और दस्त में लाभ होता है।
केसर और कपूर को 120 मिलीग्राम की मात्रा में गर्म दूध के साथ सेवन करने से दर्द पेट का दर्द ठीक होता है।


19. हृदय की दुर्बलता:

120 मिलीग्राम केसर को 50 मिलीलीटर पानी में मिलाकर मिट्टी के बर्तन में रात को भिगो दें। सुबह 20-25 किशमिश खाकर इस पानी को पीएं। इसका सेवन 15 दिनों तक करने से हृदय की कमजोरी दूर होती है।

20. हिस्टीरिया: 

केसर, वच और पीपलामूल 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ लेने से हिस्टीरिया रोग ठीक होता है।

21. शीतला (मसूरिका):

चेचक निकलने की शुरुआत अवस्था में ही 60 मिलीग्राम केसर को बारीक पीसकर बिना बीज के मुनक्के के साथ रोगी को खिलाने से चेचक जल्दी ही बाहर निकलकर ठीक हो जाता है।
240 से 480 मिलीग्राम केसर को कच्चे नारियल के पानी के साथ सुबह-शाम सेवन कराने से चेचक (माता) के दाने जल्दी बाहर निकलकर ठीक हो जाते हैं।



23. बच्चों के विभिन्न रोग:

केसर को पीसकर और शहद में मिलाकर आंखों में लगाने से आंखों की जलन दूर होती है।
फलकटेरी के फूलों के रस, केसर और शहद मिलाकर चटाने से बच्चों की खांसी दूर होती है।
यदि बच्चे को ठण्ड लग गई हो तो थोड़ी सी केसर को दूध में मिलाकर पिलाएं। सर्दियों में 3 से 4 दिन के बाद केसर को दूध में घोलकर पिलाना बहुत ही फायदेमंद है।
बच्चों के पेट में कीड़े होने पर केसर और कपूर चौथाई चम्मच की मात्रा में खिला कर दूध पिलाने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।
केसर, मुलेठी, पीपल और निशोथ का काढ़ा बनाकर चिकनी मिट्टी में भिगोकर सुखा लें। इस तरह चार बार भिगोएं और सुखाएं और फिर यह मिट्टी बच्चे को खिलाएं। इसको खाने से बच्चे के पेट की मिट्टी बाहर निकल जाती है।


24. सिर का दर्द:

5 ग्राम केसर, 25 ग्राम गाय के घी और 50 ग्राम सेमल की पुरानी रुई को मिलाकर जलाएं और इसके धुएं को सिर दर्द के रोगी को सूंघना चाहिए। इससे सिर दर्द के साथ आधासीसी का रोग भी ठीक होता है।
केसर को घी में भूनकर और मिश्री डालकर सूंघने से सिर का दर्द ठीक होता है।
हवा या वात के कारण होने वाले सिर दर्द में केसर और सौंठ को मिलाकर सिर या माथे पर लेप करें। इससे सिर का दर्द ठीक होता है।
केसर और चन्दन को पीसकर लेप बना लें और इस लेप को सिर पर लगाएं। इससे सिर दर्द दूर होता है।
गाय के दूध में केसर और बादाम को पीसकर सूंघने से सिर का दर्द ठीक होता है।


25. आधे सिर का दर्द (माइग्रेन):

केसर और चीनी को घी में भूनकर सूंघने से आधे सिर का दर्द ठीक होता है।

26. चेहरे की सुन्दरता:

असली केसर की चार-पांच पंखुड़ियां तथा एक छोटी इलायची को 250 मिलीलीटर दूध में उबालकर प्रतिदिन पीने से चेहरे का रंग साफ होता है। सर्दियों में एक से दो महीने तक यह दूध पीना चाहिए।
दूध में थोड़ा सा केसर मिलाकर पीने से भी काले रंग वाले लोगों का रंग गोरा हो जाता है।

27. शरीर की सूजन: 

केसर को पानी के साथ पीसकर लेप करने से यकृत बढ़ने के कारण होने वाली सूजन दूर होती है।




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