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गर्भावस्था की पहली तिमाही में होने वाली शारीरिक परेशानियां और उपाय



गर्भावस्था की पहली तिमाही में होने वाली शारीरिक परेशानियां और उपाय
(pregnancy ke 1st trimester me hone wali sharirik pareshaniya aur upay)
गर्भावस्था की पहली तिमाही में अचानक जल्दी-जल्दी होने वाले बदलाव महिला की ज़िंदगी ही बदल देते हैं। इसी समय में पहली बार होने वाला मां बनने का अहसास बहुत ही खास होता है। यूं तो इस दौरान कई तरह की शारीरिक परेशानियां होती हैं लेकिन एक नन्हीं सी जान के आने के बाद उसके पहले स्पर्श का अहसास ही आपके लिए तमाम शारीरिक परेशानियों को छोटा बना देती हैं। यही कारण है कि एक महिला खुशी-खुशी इन सभी तकलीफों को झेल लेती है। आज इस ब्लॉग में गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में महिला को होने वाली परेशानियों के बारे में बताएंगे और जानेंगे कि इन समस्याओं से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है। पढ़िए आप भी विस्तार से -
1. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में उल्टी आना, जी मिचलाना (vomiting in 1st trimester of pregnancy)
गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में उल्टी आना, जी घबराना, थकान होना आदि आम समस्याएं हैं। इसे मॉर्निंग सिकनेस (morning sickness in hindi) कहा जाता है। आमतौर पर यह लक्षण गर्भावस्था के पहले महीने में नज़र आते हैं। वहीं कभी-कभी खाना सामने आने पर गर्भवती महिला का मन खराब भी हो जाता है और किसी-किसी को भूख लगनी भी कम हो जाती है। गर्भावस्था के शुरुआती चरण में जी घबराना (जी मिचलाना) काफी सामान्य बात है। ऐसा शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन (estrogen in hindi) के बढ़ने के कारण होता है। गर्भावस्था में उबकाई आना, उल्टी आाना (vomiting in hindi) जैसी समस्याएं आमतौर पर चौथे से 12वें सप्ताह में देखने को मिलती हैं। लेकिन कुछ महिलाओं को यह समस्या दूसरी तीसरी तिमाही में भी देखने को मिलती है।2. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में उल्टी से राहत पाने के उपाय 
(pregnancy ke 1st trimester me vomiting band karne ke tips)
सबसे पहले तो आप इस बात का ध्यान रखें कि जी मिचलाने और उल्टी आने पर आप अपनी मर्ज़ी से कोई दवा ना लें। अगर यह समस्या ज्यादा हो रही है तो डॉक्टर से संपर्क करें।
सुबह जब भी उठें तो कभी भी एक झटके से ना उठें। उठते समय पहले सहारा लें, फिर बैठें और उसके बाद खड़े होने की कोशिश करें।
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जब भी खाना खाएं तो सारा खाना एक साथ खाने की बजाये चार-पांच बार थोड़ा-थोड़ा करके खाएं।
कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate in hindi) युक्त भोजन लें जैसे छोले, शकरकंद, आदि।
इतना काम ना करें जिससे थकान हो। थकान होने से जी घबरा सकता है और उल्टी भी आ सकती है।
3. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में उल्टी से बचने के घरेलू नुस्खे 
(pregnancy ke 1st trimester me vomiting se bachne ke gharelu upay)
नींबू पर थोड़ा सा काला नमक डालकर चाटने से जी मिचलाने से राहत मिलती है।
हरे धनिये की पत्ती का रस निकालकर एक एक चम्मच पीने से उल्टी होना बंद होता है।
रोज़ाना सुबह अदरक की चाय पीने से भी आपको फायदा होगा।ध्यान दें- किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले एक बार डॉक्टर से परामर्श ले लें।
4. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में ब्राउन डिस्चार्ज, ब्लीडिंग और स्पॉटिंग (pregnancy ke 1st trimester me brown discharge, bleeding and spotting)गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में कई महिलाओं में ब्लीडिंग (bleeding in pregnancy in hindi) या स्पॉटिंग की समस्या देखी गई है। लगभग 20 से 30 प्रतिशत महिलाओं को गर्भावस्था में ब्लीडिंग की समस्या होती है। यह गर्भाशय की दीवार पर प्रत्यारोपित (implatation in hindi) होने के कारण होती है। हालांकि हर बार स्पॉटिंग होना खतरनाक नहीं है लेकिन कई बार यह ज्यादा होने पर चिंता का कारण बन सकती है।

5. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में ब्राउन डिस्चार्ज, ब्लीडिंग और स्पॉटिंग के 7 अन्य कारण (7 causes of brown discharge, bleeding and spotting in pregnancy 1st trimester)
महिला की योनि में इन्फेक्शन (infection in hindi) होने के कारण भी शुरुआती तीन महीनों में स्पॉटिंग हो सकती है।
एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy in hindi) के कारण भी ब्लीडिंग की समस्या होती है। इसमें भ्रूण का विकास गर्भाशय में होने् की बजाए फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube in hindi) में होता है। आपको बता दें कि जब निषेचित अंडा गर्भाशय के बाहर फैलोपियन ट्यूब में आरोपित होता है तो अंडे के बड़़े हो जाने पर फैलोपियन ट्यूब टूट जाती है और ब्लीडिंग हो जाती है। यह अधिकतर खतरनाक साबित होती है।
सेक्स (रिलेशन बनाने) के कारण भी कभी-कभी गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग होने लगती है।
मासिक धर्म नियंत्रित करने वाले हार्मोन के काम करने पर ब्लीडिंग (bleeding in hindi) हो सकती है। ऐसी ब्लीडिंग आपको एक से ज्यादा बार हो सकती है।
इसके अलावा गलत दवाओं का प्रयोग, शारीरिक चोट या अगर भ्रूण असामान्य है तो इससे गर्भपात (miscarriage in hindi) की स्थिति बन सकती है और ब्लीडिंग हो सकती है। इसलिए आपको प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
मोलर प्रेगनेंसी (molar pregnancy in hindi) के दौरान भी योनि से ब्लीडिंग की समस्या होती है। आप अल्ट्रासाउंड (ultrasound in hindi) में भ्रूण की जगह एक असामान्य उत्तक (टिश्यू) देखेंगे। हालांकि यह ज्यादातर जानलेवा नहीं होता लेकिन गंभीर मामलों में यह कैंसर बन सकता हैं। अगर यह ज्यादा बढ़ जाए तो यह गर्भाशय से बाहर निकलकर पूरे शरीर में भी फैल सकता है। इसलिए जितना जल्दी हो सके मोलर गर्भावस्था (molar pregnancy in hindi) को बाहर निकलवा देना चाहिए।
6. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में ब्लीडिंग रोकने के घरेलू उपाय (pregnancy ke 1st trimester me bleeding rokne ke upay)
आप जितना हो सके आराम करें - कोई भी भारी चीज़ ना उठाएं और ज्यादा ताकत लगने वाला कोई भी काम ना करें।
सेक्स ना करें (रिलेशन ना बनाएं)।
जितना हो सके पानी पिएं और खुद में पानी की कमी ना होने दें।
गर्भावस्था में किसी भी तरह की अधिकतर ब्लीडिंग होना अच्छा नहीं है, इसलिए जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से संपर्क कर लें।गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में ब्लीडिंग होने पर इस समय करें डॉक्टर से संपर्कयूं तो गर्भावस्था में ब्लीडिंग होने पर तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए लेकिन इस समय पर तो डॉक्टर से संपर्क करने में बिल्कुल देरी ना करें -
अगर आपको 24 घंटे से ज्यादा ब्लीडिंग होने पर।
ब्लीडिंग के साथ-साथ चक्कर आने पर या बेहोश हो जाने पर।
ब्लीडिंग के दौरान बुखार (100.5 फारेनहाइट) आने पर।
मासिक धर्म में होने जैसे दर्द (period pain in hindi) से भी ज्यादा दर्द होने पर।7. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में थकान होना ओर कमज़ोरी आना 
(pregnancy ke 1st trimester me thakan aur kamjori aana)
एस्ट्रोजन (estrogen in hindi) और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन (progesterone in hindi) बढ़ने के कारण गर्भावस्था में थकान बहुत जल्दी होती है। प्रेगनेंसी के दौरान आप जितना हो सके आराम करें और आयरन युक्त खाना (iron in hindi) जैसे सेब, पालक आदि और प्रोटीन (protein in hindi) से भरपूर खाना जैसे दालें, पनीर आदि खाएं।
8. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में स्तनों की परेशानी (pregnancy ke 1st trimester me breast problems)
गर्भावस्था में स्तनों के आकार में भी बदलाव होना सामान्य है और यह गर्भावस्था के मुख्य लक्षणों में भी आता है। यह एस्ट्रोजन (estrogen in hindi) और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन (progesterone in hindi) बढ़ने के कारण होता है। गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान आपको स्तनों में नीचे बताई गई समस्याएं हो सकती हैं -
आपको स्तनों में खुजली की समस्या हो सकती है।
आपको स्तनों के पास स्ट्रेच मार्क्स (stretch marks in hindi) भी नज़र आ सकते हैं।
स्तनों में सूजन, उनका बढ़ना और दर्द होना जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती है।
प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में काफी सारे हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान स्तनों में फाइब्रोसिस्टिक (Fybrocystic in hindi) में बदलाव होने के कारण ज्यादा रेशेदार टिश्यू बनने लगते हैं। यही कारण है कि स्तनों में दर्द होने लगता है।
आपको स्तनों पर नसें उभरी हुई नज़र आ सकती हैं।
9. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में स्तनों का दर्द दूर करने के उपाय (pregnancy ke 1st trimester me breast pain ke upay)
हमेशा आरामदायक ब्रा पहनें।
वायर (तार) लगी हुई ब्रा ना पहनें और सोते समय सूती ब्रा पहनें।
गर्भावस्था के दौरान भरपूर मात्रा में पानी पिएं (रोज़ाना 8-10 ग्लास)। इससे शरीर से हानिकारक तत्व बाहर आ जाएंगे और आपको आराम महसूस होगा।
इसके अलावा आप ज्यादा नमक ना खाएं। ज्यादा नमक आपके शरीर में पानी को रोककर रखता है जिससे स्तनों में दर्द बढ़ता है।10. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में कब्ज़ क्यों होती है?
 (pregnancy ke 1st trimester me kabj kyun hoti hai?)
गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में कब्ज़ होना भी काफी आम समस्या है, खासतौर पर पहली तिमाही में। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आप जो भी खाती हैं, उसे पचने में समय लगता है। खाना धीरे पचने के कारण उसके पोषक तत्वों को खून में मिलने में समय लगता है और इस वजह से आपको कब्ज़ की समस्या हो जाती है।
11. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में कब्ज़ दूर करने के घरेलू उपाय (pregnancy ke 1st trimester me kabj door karne ke gharelu upay)
फाइबर (fiber in hindi) युक्त भोजन खाएं जैसे दालें, फल, सब्जियां आदि।
मैदा से बना भोजन ना खाएं। मैदा अांतों में जाकर चिपक जाती है जिससे कब्ज़ की समस्या हो सकती है।
तला हुआ और मसालेदार खाना ना खाएं।
ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं (दिन में 8 से 10 ग्लास)।
नियमित रूप से व्यायाम करें - इससे आंतों में बल आएगा और कब्ज़ की समस्या दूर होगी।
12. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में गैस क्यों होती है? (pregnancy ke 1st trimester me gas kyun hoti hai?)इस दौरान गैस की समस्या भी काफी महिलाओं को होती है, जिसे अपच भी कहा जाता है। गैस होने से पेट फूलना, घबराहट होना आम बात है। प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ता प्रोजेस्टेरोन (progesterone in hindi) स्तर शरीर की मांसपेशियों को आराम देता है जिससे पाचन तंत्र धीमा पड़ जाता है और गैस बनने लगती है।
13. गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में गैस दूर करने के घरेलू उपाय (pregnancy ke 1st trimester me gas door karne ke gharelu upay)
रात को एक ग्लास पानी में एक मुट्ठी मेथी भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को छानकर थोड़ा-थोड़ा करके पिएं। आपको गैस से राहत मिलेगी।
एक चम्मच अदरक के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर पिएं। गैसे से राहत मिलेगी।
एक कप पानी को उबालें और इसमें एक चम्मच शहद और दालचीनी पाउडर मिलाकर पीने से गैस से राहत मिलेगी।
एक चुटकी अजवायन में एक चुटकी काला नमक डालकर गुनगुने पानी के साथ पीने से भी गैस से राहत मिलती है।
इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा कोई भोजन ना खाएं जिससे गैस बनती हो जैसे पत्ता गोभी, भिंडी आदि।ध्यान रहे -अगर गैस की समस्या ज्यादा हो रही है तो डॉक्टर से संपर्क करें।
14. गर्भावस्था के पहले दूसरे और तीसरे महीने में सर्दी-खांसी क्यों होती है? (causes of cough and cold in pregnancy 1st trimester)गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने में सर्दी-खांसी होना आम बात है क्योंकि इस दौरान आपकी बीमारियों से लडने की शक्ति कम पड़ जाती है, जिस कारण सर्दी-खांसी (cough cold) जैसी बीमारियां जल्दी हो जाती है।15. गर्भावस्था के पहले दूसरे और तीसरे महीने में सर्दी-खांसी के घरेलू उपाय (pregnancy ke 1st trimester me sardi jukham ke gharelu upay)
अदरक के रस में शहद डालकर खाने से फायदा होगा।
एक ग्लास गुनगुने पानी में नींबू और शहद डालकर पीने से सर्दी-खांसी से आराम मिलेगा।
गर्म पानी पिएं, आपको अच्छा महसूस होगा।
अगर नाक बंद हो रही है तो गर्म पानी की भांप लें।
इसके अलावा अगर आपको ज्यादा समस्या हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लें।हालांकि गर्भावस्था का शुरुआती समय बहुत से शारीरिक बदलावों से भरा हुआ होता है जिस कारण ऊपर बताई गई समस्याओं से अधिकतर गर्भवती महिला को जूझना पड़ता है। लेकिन थोड़ी सी समझदारी और जागरुकता से आप अपने गर्भावस्था के पहले, दूसरे और तीसरे महीने का लुत्फ उठा सकती हैं।

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