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कमर दर्द से छुटकारा पाने के उपाय



कमर दर्द से छुटकारा पाने के उपाय – Kamar Dard ka Ilaj


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कमर दर्द भगाने के घरेलू उपाय | Back Pain Remedies in Hindi :

जीवनशैली है कमर दर्द की बड़ी वजह।व्‍यायाम से पाया जा सकता है इस पर काबू।योग को अपने जीवन का हिस्‍सा बनायें।अपने वजन को काबू में रखकर पायें राहत

कमर दर्द की यह समस्या आजकल आम हो गई है। सिर्फ बड़ी उम्र के लोग ही नहीं बल्कि युवा भी कमर दर्द की शिकायत करते रहते हैं। कमर दर्द की मुख्य वजह बेतरतीब जीवनशैली और शारीरिक श्रम न करना है।

अधिकतर लोगों को कमर के मध्य या निचले भाग में दर्द महसूस होता है। यह दर्द कमर के दोनों और तथा कूल्हों तक भी फ़ैल सकता है। बढ़ती उम्र के साथ कमर दर्द की समस्या बढ़ती जाती है। नतीजा काम करने में परेशानी । कुछ आदतों को बदलकर इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। आज हम आप को बताते हैं कि किन घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप कमर दर्द से निजात पा सकते हैं।

क्‍यों होता है कमर दर्द मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव।अधिक वजन।गलत तरीके से बैठना।हमेशा ऊंची एड़ी के जूते या सेंडिल पहनना।गलत तरीके से अधिक वजन उठाना।शरीर में लम्बे समय से बीमारियों का होना।अधिक नर्म गद्दों पर सोना।

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कमर दर्द से बचने के घरेलू उपाय

1. रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।



2. नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।

3. कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।

4. अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।

5. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।

6. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।

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7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।

8. कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।
9. कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा।
10. कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं।

11. कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें।

12. ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें। अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहे। गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है।

आपको भी होता है कमर में दर्द, जानिए कारण व उपचार


कमर दर्द का मुख्य कारण मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव होता है। जोड़ों में खिंचाव से भी यह होता है। कैल्शियम की कमी से हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं। अधिक वजन होने से भी कमर दर्द होता है। प्रसव के बाद स्त्रियों को योगाभ्यास शुरू कर देना चाहिए।


गलत तरीके से बैठने से कमर दर्द होता है। हमें सीधा बैठना व सीधा चलना चाहिए। लेटकर टी.वी. देखना, लेटकर पढ़ना भी दर्द का मुख्य कारण है। ऊँची एड़ी के जूते पहनने से कमर दर्द हो सकता है। बिस्तर रूई या टाट का होना चाहिए। कुर्सी अधिक नरम नहीं होना चाहिए। तनाव के कारण भी दर्द होता है। व्यायाम या योगाभ्यास नहीं करने वालों को भी कमर दर्द होता है। रसोईघर का प्लेटफार्म उपयुक्त ऊँचाई पर होना चाहिए अन्यथा दर्द हो सकता है।

गलत तरीके से खड़ा रहना, कार चलाना, काम करना, व्यायाम करना, योगाभ्यास करना, सोना, भारी सामान उठाना आदि भी दर्द का कारण हो सकता है।

कमर दर्द का मुख्य कारण मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव होता है। जोड़ों में खिंचाव से भी यह होता है। कैल्शियम की कमी से हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं। अधिक वजन होने से भी कमर दर्द होता है। प्रसव के बाद स्त्रियों को योगाभ्यास शुरू कर देना चाहिए।

गलत तरीके से बैठने से कमर दर्द होता है। हमें सीधा बैठना व सीधा चलना चाहिए। कमर दर्द को रोकने के लिए निम्नलिखित क्रियाएँ लाभदायक हैं : सीधा चलना, सीधा बैठना, लेटकर नहीं पढ़ना, टी.वी. आदि लेट कर नहीं देखना। भारी चीजों को या किसी सामान को नीचे से उठाते समय अपनी उम्र के अनुसार, पहले घुटने को झुकाकर फिर उठाना चाहिए। 

कार चलाते वक्त सीट सख्त होना चाहिए व स्टेयरिंग के पास बैठना चाहिए। खड़े रहते समय पैरों के आगे के भाग पर वजन रखकर खड़े होना चाहिए। पेट के बल नहीं सोना चाहिए। करवट से सोते वक्त घुटने को थोड़ा मोड़कर सोना चाहिए। अधिक काम करने के बाद थोड़ा आराम करना चाहिए।

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महिलाओं में कमरदर्द आम समस्या हो गई है, क़रीबन 90 प्रतिशत महिलाएं इससे ग्रस्त हैं। इसका प्रमुख कारण हमारी ग़लत ढंग की दिनचर्या है। महिलाओं में कमरदर्द में मोटापा, मासिक की अनियमितता, मासिक प्रवृत्ति वेदना युक्त, मासिक के पूर्व गर्भाशय में सूजन, गर्भाशय बाहर आना, गर्भावस्था, प्रसूतावस्था, सिज़ेरियन प्रसव के पश्चात् अतिश्रम, अतिआराम, व्यायाम का अभाव, ऊँची हील की सैंडल पहनना इत्यादि कारणीभूत घटक हैं।

इसके अलावा कमर झुकाकर बैठना, लगातार खड़े रहना, स्कूटर आदि वाहन अधिक चलाना, बैठने व सोने का ग़लत ढंग, नर्म बिछावन पर सोना, रीढ़ पर आघात, सिर पर या पीठ पर बोझ ढोना, वृद्धावस्था, रीढ़ की हड्डी में टी. वी. का संक्रमण, रीढ़ की हड्डी का क्षरण, क़ब्ज़ इत्यादि कारण भी पीड़ा के लिए ज़िम्मेदार हैं।


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आयुर्वेद में कमर को कटिप्रदेश कहते हैं व कमरदर्द को कटिशूल कहा जाता है। आयुर्वेदानुसार दोषों के स्थान के आधार पर वात दोष का प्रमुख स्थान कटिप्रदेश है। उसमें भी अपान वायु का स्थान कटिप्रदेश है, अतः अपान वायु की विकृति का लक्षण है- कमरदर्द।

क़ुदरती तौर पर मानव शरीर की रचना इस तरह हुई है कि उसमें रीढ़ की हड्डी का महत्वपूर्ण स्थान है। इस रीढ़ की हड्डी के कारण ही मनुष्य अपने शरीर को इधर-उधर घुमा सकता है, सीधा खड़ा हो सकता है, चल सकता है और अन्य गतिविधियां इसकी वजह से ही संभव हैं। इस रीढ़ की हड्डी में कोई ख़राबी या व्याधि होने से मुख्यतः कमरदर्द, चलने-फिरने में तकलीफ़ या असमर्थता आदि लक्षण दिखते हैं। रीढ़ की हड्डी की प्रमुख व्याधियां स्पाइनल स्टेनोसिस, आस्टियो आर्थराइटिस, स्लिप डिस्क, स्पॉण्डिलाइटिस, ऑस्टियोफाइट्स (हड्डी का बढ़ जाना) टी. वी. सायटिका के कारण कमरदर्द मुख्य लक्षण मिलता है। उपरोक्‍त बीमारियों का प्रमुख कारण आजकल की तनावयुक्‍त ज़िंदगी, ग़लत तरीक़े से उठना बैठना व बढ़ती उम्र में डिजेनेरेटिव परिवर्तन है।

स्पाइनल स्टेनोसिस मुख्यतः वृद्धावस्था में होता है, इसमें मेरुदण्ड (रीढ़ की हड्डी) की मोटाई सिकुड़ने लगती है जिससे उसमें से निकलने वाली नाड़ियों का दबाव बढ़कर कमरदर्द होता है। स्लिप डिस्क में मेरुदण्ड की दो हड्डियों को एक दूसरे से अलग रखने वाली स्पंज जैसी मुलायम डिस्क खिसक जाने से (किसी कारणवश) दोनों के बीच की हड्डियां आपस में मिल जाती हैं जिससे वहां से निकलने वाली नाड़ियों पर दबाव पड़ता है। परिणामतः असहनीय कमरदर्द इत्यादि लक्षण मिलते हैं।

स्पॉण्डिलाइटिस में मेरुदण्ड की हड्डियों में सूजन आने से कमरदर्द लक्षण मिलता है।

सायटिका में सायटिक नाड़ी में शोथ व क्षोभ होने से कमर से लेकर पैर तक तीव्र असहनीय वेदना होती है। मूत्रवह संस्थान में पथरी या अन्य विकृति होने के कारण कमरदर्द मुख्य लक्षण मिलता है। इसके अलावा पेट में कोई विकार होने पर भी कमरदर्द लक्षण पाया जाता है। अनेक मानसिक कारणों में भी कमरदर्द लक्षण मिलता है। डिप्रेशन के रुग्णों में अकसर कमरदर्द का इतिहास मिलता है।

चिकित्सा- कमरदर्द की चिकित्सा करते समय मूल कारण को निदान करने के पश्चात् ही तदनुसार चिकित्सा करें।

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घरेलू औषधि में- 1. सामान्यतः सभी कमरदर्द में विषतिंदुक वटी 1-1 सुबह-शाम महारास्नादि व दशमुलारिष्ट 2-2 चम्मच के साथ भोजनोत्तर सुबह-शाम 2-3 माह तक लीजिये।

2. मोटापे की वजह से कमरदर्द होने पर मोटापा कम करने का उपाय करना चाहिये।

3. स्पॉण्डिलाइटिस या अन्य रीढ़ की हड्डियों से दर्द होने पर त्रयोदेशांग गुग्गुल 10 ग्राम व लाक्षादिगुग्गुल 120 ग्राम को सुबह-शाम पुनर्नवासव व महारास्नादि 2-2 चम्मच सुबह-शाम अन्य औषधियों के साथ लें।


4. क़ब्ज़ होने पर त्रिफला चूर्ण 2 चम्मच रात को सोते समय लीजिए।


5. दर्द के स्थान पर महानारायण तेल की नित्य मालिश व सिंकाई करें।

कमरदर्द के निवारणार्थ ‘कटिबस्ति’ के परिणाम आशाजनक पाए गए हैं। इस कटिबस्ति से ही अनेक कमरदर्द से पीड़ित रुग्णों को आश्चर्यजनक लाभ मिलता है। कटिबस्ति व अन्य पंचकर्म की जानकारी लेखक द्वारा लिखित “पंचकर्म-स्वास्थ्य की कुंजी” पुस्तक से प्राप्त करें। योगासन में पद्मासन, योगमुद्रा, उत्तान हस्तपादासन, धनुरासन, नौकासन, शलभासन, भुजंगासन, सुप्त वज्रासन, मत्स्यासन, तोलांगुलासन, कोणासन, चक्रासन, पादहस्तासन इत्यादि आसन योग तज्ञ के मार्गदर्शन में करें। पदमासन

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