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नॉर्मल डिलीवरी के लिए एक्सरसाइज़


नॉर्मल डिलीवरी के लिए एक्सरसाइज़
 (Pregnancy exercises for Normal Delivery in Hindi)
व्यायाम का नॉर्मल डिलीवरी (pregnancy exercise for normal delivery in hindi) में काफी अहम योगदान है। डॉक्टर्स का भी यही कहना है कि गर्भावस्था में व्यायाम (pregnancy exercise in hindi) करने से नॉर्मल डिलीवरी की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। आप डॉक्टर की देखरेख में रहकर और उनके दिशा-निर्देशों के अनुसार व्यायाम करें।ध्यान रखें -किसी भी व्यायाम को करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर ले लें।
गर्भावस्था के दौरान ऐसा हो तो एक्सरसाइज़ ना करें या डॉक्टर की सलाह से करें
अगर आपकी पहली गर्भावस्था में समय पूर्व डिलीवरी हुई हो।
अगर पहले आपको मिसकैरेज (गर्भपात) हुआ हो।
अगर गर्भावस्था के 36 सप्ताह बाद भी प्लेसेंटा (placenta in hindi) गर्भाशय में काफी नीचे ओर स्थित हो।
अगर आपकी ग्रीवा (cervix in hindi) कमज़ोर हो तो।
अगर आपको मांसपेशियों और जोड़ों की तकलीफ हो तो।
योनि से लगातार खून निकलता हो तो।
शुगर नियंत्रित ना हो तो।ध्यान दें -अगर आप गर्भावस्था में पहली बार एकसरसाइज़ कर रही हैं तो शुरुआत में केवल पांच से दस मिनट तक ही एक्सरसाइज़ करें। फिर धीरे-धीरे आप समय बढ़ाकर 30 मिनट तक कर सकती हैं।
नॉर्मल डिलीवरी के लिए एक्सरसाइज़ (Exercises for normal delivery in hindi)यहां हम आपको नॉर्मल डिलीवरी के लिए कुछ एक्सरसाइज़ (pregnancy exercise for normal delivery in hindi) बता रहे हैं जो आपको फायदा पहुंचाएंगी।1. नॉर्मल डिलीवरी के लिए क्लेम शेल एक्सरसाइज़ (clam-shell exercise for normal delivery in hindi)


क्लेम शेल एक्सरसाइज़ के फायदे (clam-shell exercise ke fayde) - इस एक्सरसाइज़ (pregnancy exercise in hindi) से आपके एब्स, जांघ, कूल्हे और श्रोणी (pelvic area in hindi) की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसके अलावा इस एक्सरसाइज़ से पैरों और कूल्हों की मांसपेशियों के बीच संतुलन बनता है।
क्लेम शेल एक्सरसाइज़ कैसे करें? (Clam-shell exercise for pregnancy in hindi)
सबसे पहले चटाई पर पैर मोड़कर एक ओर करवट करके लेट जाएं।
अपने एक हाथ को अपने सिर के नीचे रखें और दूसरा हाथ अपने कूल्हे तक सीधा रखें और अपनी एड़ियों को एक के ऊपर एक रखें।
एड़ियों को एक साथ सटा कर रखें और अपने घुटनों के बीच से जितना हो सके ऊपर नीचे पैर खोलें।
अपनी शुरुआती अवस्था में वापिस आने के लिए एक दो सेकेंड रुके और फिर अपनी अवस्था में लौट आएं।
इस एक्सरसाइज़ (pregnancy exercise in hindi) को आप रोज़ाना करें और पांच बार दोहराएं।
बरतें ये सावधानियां
गर्भावस्था में आपका पेट जब बढ़ने लगे तो यह व्यायाम पीठ से दीवार का सहारा लेकर करें।
हमेशा एक्सरसाइज़ करते समय आरामदायक और ढीले ढाले कपड़े पहनें।

2. नॉर्मल डिलीवरी के लिए हिप रेज़/ब्रिज एक्सरसाइज़ (Hip raise/bridge exercise for normal delivery in Hindi)

ब्रिज एक्सरसाइज़ करने के फायदे (Hip raise/bridge exercise for pregnancy ke fayde) - गर्भावस्था में यह व्यायाम (pregnancy exercise in hindi) बढ़ते हुए पेट के लिए आपके पीठ के निचले हिस्से को सहारा देता है। इसके अलावा कूल्हों को मजबूती मिलती है जिससे प्रसव के दौरान फायदा पहुंचता है।
कैसे करें ब्रिज एक्सरसाइज़? (Hip raise/bridge exercise for pregnancy kaise kare)
सबसे पहले आप ज़मीन पर पैर मोड़कर लेट जाएं और हथेलियों को अपने कूल्हों के नीचे रखें।
कंधे और सिर को नीचे लगाए हुए हिप और शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊंचा उठाएं। एक या दो सेकेंड के लिए उस अवस्था में रहें और फिर शरीर को नीचे ले आएं।
इस अवस्था को पांच बार दोहराएं और दिन में एक बार ये एक्सरसाइज़ (pregnancy exercise in hindi) करें।
बरतें ये सावधानियां
गर्भावस्था में आपका पेट जब बढ़ने लगे तो यह व्यायाम पीठ से दीवार का सहारा लेकर करें।

3. नॉर्मल डिलीवरी के लिए लाइंग कॉब्लर पोज़ (Lying cobbler exercise for pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था में लाइंग कॉब्लर पोज़ करने के फायदे (Lying cobbler exercise for pregnancy ke fayde) - यह एक्सरसाइज़ (pregnancy exercise in hindi) आपकी जांघों को टोन करती है और घुटने व टखनों में लचीलापन लाती है। इसके अलावा इन एक्सरसाइज़ से कूल्हों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
कैसे करें लाइंग कॉब्लर पोज़? (Lying cobbler exercise for pregnancy kaise kare)
सबसे पहले दीवार की ओर पैर करके लेट जाएं । पैरों को स्ट्रेच करें और दीवार पर लगाएं।
पंजों को एक साथ मिलाएं और नीचे लेकर आएं और इस अवस्था में कुछ सेकेंड तक रहें।
अब अपनी हथेलियों को घुटनों पर रखें और पैरों पर नीचे की तरफ दबाव डालें।
इस तरह आप अपने पैरों को खुलते हुए महसूस करेंगी और हिप और जांघों पर दबाव पड़ेगा।
अब आराम करने के लिए अपने दोनों हाथों को दो सेकेंड के लिए सिर के ऊपर रखें।
इसे पांच बार दोहराएं और दिन में एक बार ये एक्सरसाइज़ करें।
बरतें ये सावधानियां
अगर ज़मीन पर बैठने में मुश्किल हो रही है तो तो एक्सरसाइज़ करते समय कंबल बिछा लें।
जांघों को खोलने के लिए ज्यादा ज़ोर से दबाव ना डालें।4. नॉर्मल डिलीवरी के लिए स्क्वॉट (उठक-बैठक) व्यायाम (squat exercise for pregnancy in hindi)

स्क्वॉट (उठक-बैठक) व्यायाम करने के फायदे (squat exercise for pregnancy ke fayde) - इससे आपकी एकाग्रता बढ़ेगी और पैल्विक मांसपेशियां ढीली होंगी। इसके अलावा इस व्यायाम से प्रसव-पीड़ा को कम होने में मदद मिलेगी।
कैसे करें स्क्वॉट (उठक-बैठक) एक्सरसाइज? (squat exercise for pregnancy kaise kare)
अपने पैरों को कंधे जितनी चौड़ाई में खोलें और अपने हाथ कंधे की सीध में सामने करके हथेलियां जोड़ लें।
सांस लेकर अपनी हिप्स झुकायें, जैसे आप कुर्सी पर बैठती हैं। एक सैकण्ड रुकें और सांस छोड़ते हुए वापिस खड़ी हो जायें।
अपनी कोहनियों को जांघ के भीतरी हिस्से पर लगाकर हिप्स को खोलने के लिए हल्के से धक्का देते हुए स्क्वॉट करें।
ऊपर उठते समय फ्लोर को उंगलियों से धक्का दें, ताकि आपको उठने में आसानी हो। आप इस व्यायाम (pregnancy exercise in hindi) को दिन में पांच बार करें।
बरतें ये सावधानियां
अगर आपको स्क्वॉट की अवस्था बनाये रखने में परेशानी है, तो एक कम ऊंचाई के स्टूल पर स्क्वॉट की अवस्था में बैठें।
एक्सरसाइज़ करते समय आरामदायक और ढीले ढाले कपड़े पहनें।

5. नॉर्मल डिलीवरी के लिए अपर बैक स्ट्रैचिंग (upper back stretching exercise for normal delivery in Hindi)

अपर बैक स्ट्रैचिंग के फायदे (upper back stretching exercise for pregnancy ke fayde) - इस एक्सरसाइज़ (pregnancy exercise in hindi) को करने से आपके शरीर में ताकत बनेगी और शरीर लचीला रहेगा। इसी के साथ ब्लड प्रेशर भी सही है और प्रसव पीड़ा को सहन करने की ताकत मिलती है।
कैसे करें अपर बैक स्ट्रैचिंग? (upper back stretching exercise for pregnancy in kaise kare)
सबसे पहले एक दरी पर पीठ सीधी करके बैठें। अपना बायां हाथ दायें घुटने पर और दायां हाथ पीछे रखें।
इस दौरान सांसों पर ध्यान देना ज़रूरी है। ऐसा करते समय सांस अंदर की ओर खींचें।
अब सांस छोड़ते हुए शुरुआती अवस्था में आ जायें।
अब ऐसा दूसरे हाथ के साथ करें।
एक दिन में दोनों तरफ के लिए पांच बार ये व्यायाम करें।
बरतें ये सावधानियां
इस दौरान अपने शरीर को ज्यादा ना मोड़ें।6. नॉर्मल डिलीवरी के लिए सिटिंग ग्लूट स्ट्रैच (Sitting glute stretch exercise for normal delivery)

सिटिंग ग्लूट स्ट्रैच के फ़ायदे (Sitting glute stretch exercise for pregnancy ke fayde) - इस व्यायाम से पैल्विक फ्लोर पेशी मजबूत होती है। इसके अलावा पीठ के निचले भाग और पैल्विक दर्द से राहत मिलती है।
सिटिंग ग्लूट स्ट्रैच कैसे करें? (Sitting glute stretch exercise for pregnancy kaise kare)
एक कुर्सी पर बैठें और इसके किनारे की तरफ बढ़ें।
दोनों पैरों को कमर के सामने सीधा करें।
अपने बायें पैर को अपने दायें घुटने के ऊपर से छाती की ओर खींचें।
हिप्स की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस करें।
अब अपने दायें घुटने को दायीं कलाई से धीरे से दबाएं और ग्लूट में खिंचाव महसूस करें।
यह प्रक्रिया दायें पैर के साथ भी दोहरायें।
एक दिन में पांच बार ऐसा करें।
बरतें ये सावधानियां
किनारे पर बैठते समय शरीर को संतुलित रखें।
घुटने को नीचे की तरफ जोर से ना दबायें।ध्यान दें - अगर आपको एक्सरसाइज़ (pregnancy exercise in hindi) करते समय किसी भी तरह का असामान्य दर्द महसूस हो रहा है जांघों में ज़रूरत से ज्यादा खिंचाव हो रहा है तो यह एक्सरसाइज़ तुरंत बंद कर दें।


7. नॉर्मल डिलीवरी के लिए डाउनवर्ड डॉग योग (Downward Dog yoga for pregnancy in Hindi)


डाउनवर्ड डॉग योग के फायदे  -इस व्यायाम (pregnancy exercise for normal delivery in hindi) को करने से आपके हाथ-पैर मजबूत होंगे और कमर और उसके आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसके अलावा पिंडलियों की नसें और मांसपेशियां खुलती हैं और रीढ़ की हड्डी भी मजबूत होती है।
डाउनवर्ड डॉग योग कैसे करें? (Downward Dog yoga for pregnancy in hindi)
सबसे पहले वज्रासन में आ जाएं। इस दौरान दोनों हथेलियां ज़मीन पर रखें और पीठ एकदम सीधी।
अब अपने हाथों पर ज़ोर डालते हुए पहले दाएं पैर को पीछे ले जाएं और फिर बाएं पैर को पीछे ले जाएं।
अब अपने कूल्हों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और सिर को नीचे रखें।
इस पॉजिशन में जितनी देर हो सकें रहें और फिर अपनी पुरानी अवस्था में लौट आएं।
इसे व्यायाम को चार से पांच बार दोहराएं और दिन में एक बार करें।
बरतें ये सावधानियां –
यह व्यायाम गर्भावस्था के आखिरी समय में ना करें।
ध्यान दें - अगर आपको इस दौरान हाथों में लचक, सांस लेने में तकलीफ आदि महसूस हो तो यह आसन ना करें।इन आसनों के अलावा (pregnancy exercise in hindi) गर्भावस्था के दौरान रोज़ाना सुबह शाम सैर पर जाएं (morning walk and evening walk), तैराकी आदि भी काफी फायदा पहुंचाता है। इसलिए आप गर्भावस्था के दौरान अपनी दिनचर्या में लगातार आधे घंटे की सैर को ज़रूर शामिल करें। इससे ना सिर्फ आपको शारीरिक रूप से फायदा होगा बल्कि मानसिक रूप से भी आप तंदरुस्त रहेंगी।

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