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आपके लिए मानसिक तनाव है,


आपके लिए मानसिक तनाव है, शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक


अध्ययन की शीर्ष शोधकर्ता टॉम रुस ने बताया, "मानसिक तनाव से शरीर पर खतरनाक पड़ सकता है। हम सीधे प्रभाव या कारण की पुष्टि नहीं कर सकते, लेकिन इस अध्ययन से ऐसे सबूत मिले हैं, जिन पर विचार के लिए और अध्ययन जरूरत है।" शोधकर्ताओं की टीम ने 165,000 से अधिक लोगों पर अध्ययन किया, और उनसे मिलने वाले जवाब के जरिए उनमें मानसिक तनाव का अध्ययन किया।
शोधकर्ताओं ने इसके बाद 10 वर्षो तक प्रतिभागियों के स्वास्थ्य पर नजर रखी और इस अवधि में इस बात की जांच की कि इनमें से किन प्रतिभागियों की मौत हुई और किस कारण हुई। अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में अत्यधिक मानसिक तनाव के लक्षण थे, उनकी मौत अधिकतर लीवर की बीमारियों से हुई। अध्ययन में शराब सेवन, मोटापा, मधुमेह, सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे कारकों पर भी विचार किया गया। शोधकर्ताओं ने बताया, "इसका कारण अस्पष्ट है क्योंकि अभी तक मानसिक बीमारी और लीवर की बीमारी के बीच जैविक संबंधों का पता नहीं लगाया जा सका है।"

मोटापा, और उच्च रक्तचाप जैसी हृदय संबंधी बीमारियां भी लीवर की बीमारियों का आम रूप हैं, जिन्हें 'नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर डिसीज' के तौर पर जाना जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, "इस तरह चिंता या अवसादग्रस्त व्यक्ति की अप्रत्यक्ष रूप से लीवर की बीमारी से मौत होने का खतरा ज्यादा होता है।" स्वास्थ्य विज्ञान पर आधारित शोध पत्रिका 'गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी' के ताजा अंक में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है।
डर से क्यों डरना जब आप आजमां सकते हैं आसान तकनीक

डर लगना स्वाभाविक होता है लेकिन आपको किसी एक चीज से डर लगने लगे जो वास्तविक ना हो तो यह फोबिया कहलाता है। जिसे कुछ आसान उपायों की मदद से दूर किया जा सकता है।





डर एक ऐसी चीज है जो वास्तविक नहीं होता है। कई लोगों को ऊंचाई, सांप, पानी जैसी कई चीजों से फोबिया(डर) होता है। ये किसी भी उम्र में हो सकता है। इस दौरान अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। अपने डर से बाहर आने के लिए आपको इसे समझना जरुरी होता है। इसका इलाज किया जा सकता है। आप चिंता और डर दोनों से बाहर आ सकते हैं फिर चाहे यह कितना ही कंट्रोल से बाहर क्यों ना चले जाए। कुछ आसान तकनीक की मदद से डर को दूर किया जा सकता है। तो आइए आपको कुछ आसान तकनीक के बारे में बताते हैं जो डर को दूर करने में मदद करते हैं। 

मेडिटेशन:
मेडिटेशन करने से आपकी नसों को आराम मिलता है जिससे पूरा शरीर आराम महसूस करता है। इसे करने के बाद भी आप फोबिया के रिएक्शन को महसूस कर सकते हैं। मेडिटेशन करके डर के लक्षणों को कम किया जा सकता है। इसे करने से चिंता भी कम होती हैं।
गहरी सांस लें:
गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज करने से कई फायदे होते हैं। इस एक्सरसाइज में आप सांस लेने के लिए चेस्ट की जगह डायफ्राम और पेट से सांस लेना सीखता है। ऐसा सीखने में कुछ समय लग सकता है लेकिन एक बार जब आप गहरी सांस लेना सीख जाते हैं तो शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है जिससे ज्यादा मात्रा में कार्बन डाइ ऑक्साइड बाहर निकलने लगती हैं। ऐसा करने से फोबिया को दूर किया जा सकता है। 

योग: अगर सही तरीके से योग किया जाए तो इससे डर को आसानी से दूर किया जा सकता है। कई तकनीक से योग करने से शरीर को आराम मिलता है। योग तनाव के लेवल को कम करने में मदद करता है। प्रतिदिन योग करके इसे दूर किया जा सकता है।
कल्पना करना: कल्पना करना एक आर्ट है जो आपके दिमाग में चल रहे सारे विचारों की छवि आपके सामने बनने लगती है। कुछ लोग फोबिया में कल्पना करके इसके रिएक्शन को कम करते हैं।

फोकस थेरेपी: इस थेरेपी में किसी चीज का इस्तेमाल करके उस पर फोकस करते हैं जिससे सकारात्मक भावनाओं को बढ़ाने में मदद मिलती है। इस थेरेपी में व्यक्ति को अपना सारा ध्यान उस चीज पर लगाना होता है ताकि अपने डर को कम किया जा सके

युवा पीढ़ी क्यों मानसिक समस्याओं से ज्यादा ग्रसित होती है 


आजकल की युवा पीढ़ी हर छोटी चीज का तनाव ले लेते हैं जिसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है और वह इससे संबंधित कई समस्याओं से ग्रसित होने लगते हैं। मानसिक समस्याओं से ग्रसित होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।





समय के साथ लोगों के लाइफस्टाइल में भी बदलाव आने लगे हैं। आज की युवा पीढ़ी को पहले की पीढ़ी से ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आजकल युवा पीढ़ी के तनाव,डिप्रेशन और अन्य मानसिक समस्याओं से ग्रसित होने की खबर आती रहती है। एक रिसर्च के अनुसार भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। जिसमें ज्यादातर युवा पीढ़ी है। यह सवाल सभी के दिमाग में आता है कि युवाओं में मानसिक समस्याओं की परेशानी क्यों बढ़ती जा रही है। तो आइए आपको बताते हैं कि क्यों युवा पीढ़ी मानसिक समस्याओं से ज्यादा ग्रसित हो रही है। 

सोशल मीडिया: सोशल मीडिया कई मानसिक समस्याओं के लिए जिम्मेदार होता है। सोशल मीडिया की वजह से लोगों में असंतुष्टि की भावना बढ़ती जाती है। जिसकी वजह से किसी काम को करने में दिक्कत आने लगती हैं और आऐप उस काम को टालने लगते हैं। आज के युवाओं को सोशल मीडिया की इसतनी आदत लग गई है कि इसके बिना कोई काम नहीं कर पाते हैं। जिसकी लत उनके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
पढ़ाई, नौकरी और करियर का तनाव: आजकल कॉम्पिटिशन इतना बढ़ गया है कि हर कोई हमेशा आगे रहना चाहता है। फिर चाहे वो पढ़ाई हो या नौकरी सभी को बेस्ट चाहिए होता है। जिसका परिणाम यह होता है कि बच्चों में तनाव का लेवल बढ़ जाता है। मानसिक समस्याओं की वजह से ही तनाव होता है। 

आपसी समझ में कमी होना: आज के समय में लोग एक-दूसरे के बारे में सभी बाते जानते होते हैं लेकिन वह उनकी भावनाओं से के बारे में नहीं जानते होते हैं। जीवन में किसी के पास इतना समय नहीं होता है कि वह रिलेशनशिप और बांड को बेहतर बना सके। यह युवा पीढ़ी की मानसिक स्थिति को दर्शाता है।

डेस्टिनेशन एडिक्शन सिंड्रोम: डेस्टिनेशन एडिक्शन एक परिस्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी खुशी को दूसरी चीजों में ढूंढते हैं। यह आपकी नौकरी, पार्टनर और दूसरी जगहों में हो सकती है। कई युवाओं को इसकी लत लग जाती है। जिसकी वजह से वह किसी भी चीज से संतुष्ट नहीं हो पाते हैं।

संतुष्ट नहीं होना: खुश रहने के लिए संतोष होना जरुरी होता है। आज की युवा पीढ़ी संतुष्ट ना होने की वजह से जीवन खुश रहकर नहीं जी पाते हैं। महत्वाकांक्षाएं जीवन की शांति को नष्ट कर देते हैं। जिसकी वजह से युवा पीढ़ी डिप्रेशन और तनाव से ग्रसित हो जाते हैं।

तनाव को कम करने में योगा कैसे मदद करता है

Yoga for stress: योग आपके दिमाग से सभी नकारात्मक विचारों को खत्म करके आपको राहत प्रदान करने में मदद करता है। योग का हर रोज अभ्यास करने से मानसिक शांति मिलती है जिससे तनाव कम होता है। इसके अलावा, यह रक्त संचार को बढ़ाता है और हमें कई बीमारियों से दूर रखता है।





योग आपको मानसिक शांति देकर तनाव को कम करता है।


Yoga for stress: योग का अभ्यास करना सबसे स्वस्थ गतिविधियों में से एक है। शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए लंबे समय से योग एक बेहतरीन विकल्प रहा है। योग ना केवल आपके शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर करता बल्कि यह आपको मानसिक रुप से भी स्वस्थ बनाता है। इतना ही नहीं, यह आपके शरीर में रक्त संचार को बढ़ाता है, एकाग्रता में सुधार करता है, और हमें कई बीमारियों से दूर रखता है। आजकल की भागादौड़ में तनाव होना लाजमी है। तनाव आपके शरीर को बुरी तरह प्रभावित करता है। तनाव के कारण आपको कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जरुरी है कि आप योग को अपने फिटनेस रुटीन में शामिल करें। योग आपके दिमाग को शांत करके इसे तनाव से दूर रखने में मदद करता है। आइए जानते हैं योगा तनाव को कम करने में कैसे मदद करता है। 
तनाव को कम करने के लिए योगा
शरीर को रिलैक्स करता है
एक्सरसाइज शामिल होती हैं
स्ट्रेस हार्मोन को कम करता है
दिमाग को शांत करता है
सांसों को नियंत्रित करता है
शरीर को रिलैक्स करता है
जब आप सही तरह से योग का अभ्यास करते हैं तो यह आपके शरीर के लिए एक मालिश की तरह काम करता है। यह शारीरिक तनाव को कम करता है और शरीर को रिलैक्स करता है जिससे आपका तनाव कम होता है।

एक्सरसाइज शामिल होती हैं
योग में एक्सरसाइज शामिल होती है। जब आप योग करते हैं तो आपके शरीर का हर हिस्सा मूव करता है जिससे आपकी मसल्स स्ट्रेच होती हैं और शरीर में रक्त का संचार बढ़ता है। इससे आपका दिमाग और मन दोनों रिलैक्स होते हैं और तनाव कम होता है।

स्ट्रेस हार्मोन को कम करता है
शोध के अनुसार, योग करने से आपके शरीर में स्ट्रेस हार्मोन जैसे कोर्टिसोल का स्तर कम होता है। कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाने से आपको अधिक तनाव होता है। इसलिए तनाव को कम करने के लिए हर रोज योग का अभ्यास करें। 
दिमाग को शांत करता है
योग आपको मानसिक शांति पाने में मदद करता है। जब हमारे दिमाग में हजारों विचार एक साथ चलते रहते हैं तो हम रिलैक्स नहीं कर पाते हैं। योग हमारी एकाग्रता को बढ़ाता है और हमें ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। जिससे आपका दिमाग शांत होता है और तनाव कम होता है।
सांसों को नियंत्रित करता है
प्राणायाम करने से आपको ब्रीदिंग पर कंट्रोल पाने में मदद मिलती है। प्राणायाम के दौरान आप जब गहरी सांस लेते हैं तो आपके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है जिससे शरीर के हर हिस्से में सही तरीके से ऑक्सीजन पहुंच पाती है और आपको तनाव कम करने में मदद मिलती है।

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