Header Ads

जाने गाय के घी के अद्भुत स्वास्थ्यवर्धक चमत्कारिक गुणों के बारे में


जाने गाय के घी के अद्भुत स्वास्थ्यवर्धक चमत्कारिक गुणों के बारे में
https://healthtoday7.blogspot.com/
गाय के घी को अमृत कहा गया है। जो जवानी को कायम रखते हुए, बुढ़ापे को दूर रखता है। काली गाय का घी खाने से बूढ़ा व्यक्ति भी जवान जैसा हो जाता है । गाय के घी से बेहतर कोई दूसरी चीज नहीं है। 
गाय का घी और चावल की आहुती डालने से महत्वपूर्ण गैसे जैसे – एथिलीन ऑक्साइड,प्रोपिलीन ऑक्साइड,फॉर्मल्डीहाइड आदि उत्पन्न होती हैं । इथिलीन ऑक्साइड गैस आजकल सबसे अधिक प्रयुक्त होनेवाली जीवाणुरोधक गैस है,जो शल्य-चिकित्सा (ऑपरेशन थियेटर) से लेकर जीवनरक्षक औषधियाँ बनाने तक में उपयोगी हैं । वैज्ञानिक प्रोपिलीन ऑक्साइड गैस को कृत्रिम वर्षो का आधार मानते है । आयुर्वेद विशेषज्ञो के अनुसार अनिद्रा का रोगी शाम को दोनों नथुनो में गाय के घी की दो – दो बूंद डाले और रात को नाभि और पैर के तलुओ में गौघृत लगाकर लेट जाय तो उसे प्रगाढ़ निद्रा आ जायेगी । 


गौघृत में मनुष्य – शरीर में पहुंचे रेडियोधर्मी विकिरणों का दुष्प्रभाव नष्ट करने की असीम छमता हैं । अग्नि में गाय का घी कि आहुति देने से उसका धुआँ जहाँ तक फैलता है,वहाँ तक का सारा वातावरण प्रदूषण और आण्विक विकरणों से मुक्त हो जाता हैं । सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि एक चम्मच गौघृत को अग्नि में डालने से एक टन प्राणवायु (ऑक्सीजन) बनती हैं जो अन्य किसी भी उपाय से संभव नहीं हैं । 
दो बूंद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ढीक होता है। 
सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करे, सर दर्द ठीक हो जायेगा। 
नाक में घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तरोताजा हो जाता है। गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है। 
हाथ पाव मे जलन होने पर गाय के घी को तलवो में मालिश करें जलन ढीक होता है। 20-25 ग्राम घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांझे का नशा कम हो जाता है। फफोलो पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है। 
गाय के घी की झाती पर मालिश करने से बच्चो के बलगम को बहार निकालने मे सहायक होता है। 
सांप के काटने पर 100 -150 ग्राम घी पिलायें उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा। अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें। 
गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है। 
जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाइ खाने की मना ही है तो गाय का घी खाएं, हर्दय मज़बूत होता है। 
यह स्मरण रहे कि गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ताहै। वजन संतुलित होता है यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है। 
गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है। 
देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है। 
गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है। 
गाय का घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है। गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बहार निकल कर चेतना वापस लोट आती है। 
गाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग में भी उपचार होता है। 
गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है। 
गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना ओपरेशन के ठीक हो जाता है 
गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है। 
विशेष :- स्वस्थ व्यक्ति भी हर रोज नियमित रूप से सोने से पहले दोनों नशिकाओं में हल्का गर्म (गुनगुना ) देसी गाय का घी डालिए,गहरी नींद आएगी, खराटे बंद होंगे और अनेको अनेक बीमारियों से छुटकारा भी मिलेगा।
Translate



नाभि खिसकना / धरण जाना – Nabhi , Dharan खिसकना _ CLICK HERE*
नाभि खिसकना या धरण जाना आयुर्वेद और प्राकृतिक उपचार पद्धति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नाभि को मानव शरीर का केंद्र माना जाता

है। नाभि स्थान से शरीर की बहत्तर हजार नाड़ियों जुड़ी होती है। यदि नाभि अपने स्थान से खिसक जाती है तो शरीर में कई प्रकार की समस्या

पैदा हो सकती है। ये समस्या किसी भी प्रकार दवा लेने से ठीक नहीं होती। इसका इलाज नाभि को पुनः अपने स्थान पर लाने से ही होता है।

आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इसे नहीं माना जाता है। परंतु आज भी इस पद्धति से हजारों लोग ठीक होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।
नाभि का अपने स्थान से खिसक जाने को नाभि हटना ( Nabhi Hatna) , धरण जाना ( Dharan Jana ) , गोला खिसकना

( Gola khisakna ) पिचोटी खिसकना ( Pichoti Khisakna ) , नाभि पलटना ( Nabhi Palatna ) या नाभि चढ़ना

( Nabhi Chadhna ) आदि नामों से भी जाना जाता है।
नाभि खिसकने के कारण पेट दर्द , कब्ज , दस्त , अपच आदि होने लगते है। यदि नाभि का उपचार ना किया जाये तो शरीर में कई प्रकार की

अन्य परेशानियाँ पैदा हो सकती है। जैसे दाँत , बाल , आँखें प्रभावित हो सकते है , मानसिक समस्या पैदा हो सकती है। डिप्रेशन हो सकता है।

अतः नाभि का पुनः अपने स्थान पर आना आवश्यक होता है।
नाभि खिसकने का कारण – Reason Of Dharan
Nabhi bar bar talne ka karan

यदि पेट की मांसपेशियां कमजोर होती है तो नाभि खिसकने की समस्या ज्यादा होती है । दैनिक जीवन के कार्य करते समय शरीर का संतुलन

सही नहीं रह पाने के कारण नाभि खिसक सकती है। इसके अलावा शरीर की मांस पेशियों पर एक तरफ अधिक भार पड़ने से भी धरण चली

जाती है , गोला सरक जाता है । पेट पर बाहरी या अंदरूनी दबाव नाभि टलने का कारण हो सकता है। सामान्य कारण इस प्रकार है :-



असावधानी से दाएं या बाएं झुकना।


संतुलित हुए बिना अचानक एक हाथ से वजन उठाना।


चलते हुए अचानक ऊंची नीची जगह पर पैर पड़ना।


खेलते समय गलत तरीके से उछलना।


तेजी से सीढ़ी चढ़ना या उतरना।


ऊंचाई से छलांग लगाना।


पेट में अधिक गैस बनना।


पेट में किसी प्रकार की चोट लगना।


स्कूटर या मोटर साइकिल चलाते समय झटका लगना।
गर्भावस्था में पेट पर आतंरिक दबाव ।
तनाव।
बचपन से किसी कारण से नाभि खिसकी हुई हो।
नाभि खिसकने की जाँच – Dharan Kaise Jane
Nabhi Talna kese jane

नाभि टलने या खिसकने का पता लगाने के बहुत आसान तरीके होते है। इनको जानकर आप भी नाभि खिसकने या धरण जाने का पता कर

सकते है। थोड़े से अनुभव के बाद तुरंत पता चल जाता है। अधिकतर पुरुष की नाभि बायीं तरफ तथा स्त्रियों की नाभि दायीं तरफ खिसकती

है।
नाभी के खिसकने का पता करने की विधि इस प्रकार है :-
( 1 )

सीधे खड़े हो जाएँ। दोनों पैर पास में सीधे रखें। अपने दोनों हाथ सीधे करें। हथेलियां खुली रखकर इस तरह समानांतर रखें की दोनों छोटी

अंगुलीयां (Little Finger ) पास में रहें। हथेली की रेखा मिलाते हुए छोटी अंगुली (Little Finger ) की लंबाई चेक करें। यदि छोटी

अंगुलियां की लंबाई में फर्क नजर आता है यानि कनिष्ठा अंगुलियां छोटी बड़ी नजर आती है तो नाभि खिसकी हुई है।
( 2 )

पुरुष की नाभि चेक करने के लिए एक धागे से उसकी नाभि और एक छाती के केन्द्रक के बीच की दूरी नापें। अब नाभि से दूसरी छाती के

केन्द्रक की दूरी नापें। यदि नाप अलग अलग आती है तो नाभि खिसकी हुई है।
( 3 )

सुबह खाली पेट चटाई पर पीठ के बल लेट जाएँ। हाथ और पैर सीधे रखें। हथेलियाँ जमीन की तरफ रखें। अब अंगूठे से नाभि पर हल्का दबाव

डालकर स्पंदन चेक करें। यदि स्पंदन नाभि पर महसूस होता है तो नाभि सही है। यदि स्पंदन नाभि के स्थान पर ना होकर नाभि से ऊपर ,

नीचे , दाएं या बाएं महसूस होता है तो नाभि अपने स्थान से खिसकी हुई है। जिस प्रकार कलाई पर अंगूठे के नीचे नाड़ी देखने पर स्पंदन

महसूस होता है। इसी प्रकार का स्पंदन नाभि पर महसूस होता है। 
( 4 )

सीधे पीठ के बल लेट जाएँ। दोनों पैर पास में लाएं यदि पैर के अंगूठे ऊपर नीचे दिखाई दें तो नाभि अपने स्थान से हटी हुई है।
नाभि खिसकने से नुकसान – Dharan Jane Ke Nuksan
Nabhi Talne Ke Nuksan

यदि नाभि नीचे की ओर खिसक गई है तो दस्त , अतिसार , पेचिश आदि की समस्या हो जाती है।


नाभि के ऊपर की तरफ खिसकने पर कब्ज रहने लगती है। गैस अधिक बनती है। इसके कारण लंबी अवधि में फेफड़ों की समस्या , अस्थमा , डायबिटीज आदि बीमारियां हो सकती है।


बाईं और खिसकने पर सर्दी , जुकाम , खाँसी , कफ आदि की समस्या बार बार हो सकती है।


दायीं तरफ खिसकने पर लीवर पर असर पड़ सकता है। एसिडिटी हो सकती है , अपच या अफारा हो सकते है।


यदि नाभि अधिक गहराई में महसूस हो तो व्यक्ति कितना भी खाये शरीर कृशकाय ही बना रहता है।
*नाभि को ठीक करने के उपाय – Dharan Theek Kaise Kare_
Nabhi Vapas Kese Laye*
नाभि खिसके या गोला सरके हुए अधिक समय नहीं हुआ हो तो नीचे दिए गए तरीके अपनाने से जल्द वापस अपनी जगह आ जाती है। यदि

समय अधिक हो गया हो तो थोड़ा अधिक प्रयास करना पड़ता है। यदि नीचे दिए गए तरीको से लाभ ना हो तो किसी अनुभवी से नाभि सही

करवानी चाहिए। कुछ लोग खुद का पेट तेल लगा कर मसल कर नाभि सही करने का प्रयास करते है ,जो उचित तरीका नहीं है। पेट को

मसलना नहीं चाहिए।

यहाँ जो नाभि ठीक करने के तरीके ( Dharan theek karne ke tareeke ) दिए गए है उनमे से अपनी शारीरिक अवस्था के अनुसार
नाभि को वापस अपनी जगह ला सकते है। 

(1 )

जिस हाथ की छोटी अंगुली की लंबाई कम हो उस हाथ सीधा करें। हथेली ऊपर की तरफ हो। अब इस हाथ को दुसरे हाथ से कोहनी के जोड़

के पास से पकड़ें। अब पहले वाले हाथ की मुट्ठी कस कर बंद करें। इस मुट्ठी से झटके से अपने इसी तरफ वाले कंधे पर मारने की कोशिश

करें। कोहनी थोड़ी ऊंची रखें। ऐसा दस बार करें।



अब अंगुलियों की लंबाई फिर से चेक करें। लंबाई का फर्क मिट गया होगा। यानि नाभि अपने स्थान पर आ गई है। यही ऐसा नहीं हुआ तो एक

बार फिर से यही क्रिया दोहराएं।

( 2 )

सुबह खाली पेट सीधे पीठ के बल चटाई या योगा मेट पर लेट जाएँ। दोनों पैर पास में हो और सीधे हो। हाथ सीधे हो और कलाई जमीन की

तरफ हो। अब धीरे धीरे दोनों पैर एक साथ ऊपर उठायें। इन्हें लगभग 45 ° तक ऊँचे करें। फिर धीरे धीरे नीचे ले आएं। इस तरह तीन बार

करें। नाभि सही स्थान पर आ जाएगी। यह उत्तानपादासन कहलाता है।

( 3 )

सुबह खाली पेट योगा मेट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएँ। अब एक पैर को मोड़ें और दोनों हाथों से पैर को पकड़ लें। दूसरा पैर सीधा ही रखें।

जिस प्रकार शिशु अपने पैर को पकड़ कर पैर का अंगूठा मुँह में डाल लेते है उसी प्रकार आप पैर को पकड़ कर अंगूठे को धीरे धीरे अपनी

नाक की तरफ बढ़ाते हुए नाक से अड़ाने की कोशिश करें। सर को थोड़ा ऊपर उठा लें। अब धीरे धीरे पैर सीधा कर लें।यह एक योगासन है

जिसे पादांगुष्ठनासास्पर्शासन कहते है

इसी प्रकार दुसरे पैर से यही क्रिया करें। इस प्रकार दोनों पैरों से तीन तीन बार करें। फिर एक बार दोनों पैर एक साथ मोड़ कर यह क्रिया करें।

नाभि अपनी सही जगह आ जाएगी।

यदि आपकी मांस पेशियाँ कमजोर है तो बार बार नाभि खिसक सकती है , गोला खिसक सकता है । अतः थोड़ा व्यायाम आदि करके उन्हें मजबूत करे।
*पैर के अंगूठे में काला धागा बांधने से नाभि बार बार नहीं खिसकती है*


*पानी पीने के 10 फायदे और नुक्सान _ CLICK HERE ND READ*
किसी तरह की शारीरिक परेशानी होने पर डॉक्टर पानी पीने की सलाह देते हैं। दिन में कम से कम रोज़ 8 गिलास पानी पीना चाहिए। इससे आपका डायजेस्टिव सिस्टम, स्किन और बाल हेल्दी रहते हैं। पानी शरीर से बेकार पदार्थ बहार निकालता है। पानी को लेकर कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। अगर पानी पीने के फायदे हैं, तो नुकसान भी हैं। पहले हम इन फायदों के बारे में जानते हैं

पानी पीने के 10 फायदे

यहां आपको कुछ सुझाव दिए जा रहे हैं, ताकि आपको पानी की कमी से होने वाली बीमारियां न घेरें। इसलिए कुछ बातों का ख़ास ध्य़ान रखें।

1.सुबह उठते ही एक गिलास पानी पीना अच्छा होता है। इसे अपनी आदत में शामिल करें। इससे पेट साफ रहता है। पानी पीने से स्किन में रूखापन नहीं होता।

2. सुबह उठने के बाद गरम या गुनगुने पानी में शहद और नींबू डालकर पिया करें। इससे टॉक्सिक एलिमेंट शरीर से निकल जाते हैं और इम्यून सिस्टम भी सही रहता है।

3.कुछ लोग ज़्यादा ही ठंडा पानी पीते हैं। इससे गुर्दे खराब हो सकते हैं। इसलिए ज़्यादा ठंडा पानी न पिएं।

4.अगर आप चाय या कॉफी ज्यादा पीते हैं तो उसकी जगह ग्रीन टी पिएं। इससे एनर्जी मिलती है।

5.सॉफ्ट ड्रिंक की जगह गुनगुना पानी या नींबू पानी पिया करें। आपका एनर्जी लेवल बढ़ेगा और डायजेस्टिव सिस्टम भी सही रहेगा।

6.वजन कम करने के लिए ठंडे पानी की जगह गुनगुना गर्म पानी पीना फायदेमंद होता है।

7. पानी पीने से एसिडिटी हटती है, क्योंकि पानी पेट साफ रखता है।

8. हमारा दिमाग 90 प्रतिशत पानी से बना है। पानी न पीने से भी सिर दर्द होता है। 

9. पानी जोड़ों को चिकना बनाता है और जोड़ों का दर्द भी कम करता है।

10. हमारी मांसपेशियों का 80 प्रतिशत भाग पानी से बना हुआ है। इसलिए पानी पानी से मांसपेशियों की ऐंठन भी दूर होती है।
बीमारियों से भी दूर रखता है पानी:

निम्नलिखित दिक्कतें या स्थिति में भी पानी पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए

- बुखार होने पर।
- ज़्यादा वर्कआउट करने पर।
- अगर आप गर्म वातावरण में हैं।
- प्यास लगे या न लगे, बीच-बीच में पानी पीते रहें। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं रहेगी।
- बाल झड़ने पर।
- टेंशन के दौरान।
- पथरी होने पर। 
- स्किन पर पिंपल्स होने पर।
- स्किन पर फंगस, खुजली होने पर।
- यूरिन इन्फेक्शन होने पर।
- पानी की कमी होने पर।
- हैजा जैसी बीमारी के दौरान।

आयुर्वेद के अनुसार:

*आयुर्वेद के अनुसार हल्का गर्म पानी पीने से पित्त और कफ दोष नहीं होता और डायजेस्टिव सिस्टम सही रहता है। 10 मिनट पानी को उबालें और रख लें। प्यास लगने पर धीरे-धीरे पीते रहें। ऐसा करने से यह पता चलता है कि आप दिन में कितना पानी पीते हैं और कितने समय में पीते हैं। आप पानी उबालते समय उसमें अदरक का एक टुकड़ा भी डाल सकते हैं। इससे फायदा होगा।
उबालने के बाद ठंडा हुआ पानी कफ और पित्त को नहीं बढ़ाता, लेकिन एक दिन या उससे ज़्यादा हो जाने पर वही पानी नहीं पीना चाहिए, क्योंकि बासी हो जाने पर पानी में कुछ ऐसे जीवाणु विकसित हो जाते हैं, जो स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। बासी पानी वात, कफ और पित्त को बढ़ाता है। 
पानी पीने के नुकसान*

1- ज़रूरत से ज़्यादा पानी पीने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

2- पानी के ओवरडोज़ से आपके शरीर के सेल्स डैमेज हो सकते हैं।

3- जिन मरीज़ों की बाय-पास सर्जरी हुई है, उनमें से कुछ मामलों में भी डॉक्टर्स पानी कम पीने की सलाह देते हैं।

4- जरूरत से ज्यादा पानी पीने से हमारे शरीर में मौजूद वह पाचन रस काम करना बंद कर देता है, जिससे खाना पचता है। इस वजह से खाना देर से पचने लगता है और कई बार खाना पूरी तरह से डाइजेस्ट भी नहीं हो पाता है।
5- हेल्थ विशेषज्ञों के अनुसार, खाने के बाद ठंडा पानी पीने से आपको नुकसान पहुंच सकता है। दरअसल, गर्म खाने के बाद आप जैसे ही ठंडा पानी पीते हैं, शरीर में खाया हुआ ऑयली खाना जमने लगता है। इससे आपकी पाचन शक्ति भी कम हो जाती है। बाद में यह फैट में भी तबदील हो जाता है। इसलिए खाने के बाद गर्म पानी पीने की सलाह दी जाती है।


पानी पीने से जुड़े कुछ ज़रूरी TIPS

1- धूप से घर आकर तुरंत पानी न पिएं। यह खतरनाक हो सकता है।

2- कई बार खाली पेट पानी पीने से सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियां हो जाती हैं।

3- खाने के तुरंत बाद पानी पीने से फैट बढ़ता है और आप आलसी महसूस करते हैं।

4- चिकनाई वाले खाने या खरबूजा, खीरा के तुरंत बाद पानी पीने से खांसी, जुकाम हो सकता है।

5- कई लोगों को पानी पीने से एसिडिटी की भी शिकायत होती है।
क्या हेल्दी इंसान को भी दिन में 8 गिलास पानी पीना चाहिए ?

रोज़ 8 गिलास पानी पीने के पीछे कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है। यह जरूरी नहीं कि आप 8 गिलास पानी 8 बार ही पिएं। अनेक बुद्धिजीवियों ने लेख लिखे हैं, जिनमें पानी कितना और कैसे पीना चाहिए, इस पर विचार किया गया है। इस बात को प्रामाणिकता के साथ कहा जा सकता है कि जो लोग स्वस्थ हैं, उन्हें ज़रूरत से ज़्यादा पानी नहीं पीना चाहिए।

हम रोज़ तरल पदार्थ के रूप में चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक लेते हैं। इसमें कैफीन की मात्रा अधिक होती है। शरीर में कैफीन की मात्रा अधिक होने पर ब्लड की मात्रा कम हो जाती है। ब्लड में कैफीन की मात्रा कम करने के लिए पानी बेहद ज़रूरी है। अगर आप दिन में 4 कप चाय या कॉफी पीते हैं तो कम से कम 8 गिलास पानी ज़रूर पिएं। इससे शरीर का सिस्टम सही रहता है।
शरीर को रोगमुक्त और स्वस्थ रखने के लिए पानी पीना बेहद ज़रूरी है।

वयस्क लोगों को दिन में 2.5 लीटर पानी पीना चाहिए। कैलोरी को शरीर में घुलने के लिए पर्याप्त पानी का होना जरूरी है। शरीर से पसीना निकलने, एक्सरसाइज़ करने, डायरिया और किडनी में स्टोन होने पर पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में, जीवन को भी खतरा हो सकता है। शरीर में पानी की कमी होने पर सबसे ज्यादा प्रभाव ब्लैडर पर पड़ता है। 
ज़रूरी जानकारी: 

1. हमारे शरीर का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना है। प्रतिदिन शरीर को 6 से 10 गिलास पानी की आवश्यकता होती है।
इस आवश्यकता का एक बड़ा भाग खाद्य पदार्थों के रूप में शरीर ग्रहण करता है। शेष पानी मनुष्य पीता है। 

2. पानी शरीर के अतिरिक्त तत्व को पसीना और मूत्र के रूप में बाहर निकालने में सहायक होता है, मल के निष्कासन में भी सहायक होता है। 

3. एक वयस्क पुरुष के शरीर में पानी उसके शरीर के कुल भार का लगभग 65 प्रतिशत और एक वयस्क स्त्री शरीर में उसके शरीर के कुल भार का लगभग 52 प्रतिशत तक होता है।

4. शरीर की हड्डियों में 22 प्रतिशत पानी होता है, दांतों में 10 प्रतिशत, त्वचा में 20, मस्तिष्क में 74.5, मांसपेशियों में 75.6 और खून में 83 प्रतिशत पानी होता है। 


गुडहल के फूलों का पाउडर Hibiscus powder गाल ब्लैडर स्टोन Gall Balder Stone की चमत्कारी दवा _ 
आयुर्वेद का एक ऐसा चमत्कार जिसे देखकर एलॉपथी डॉक्टर्स ने दांतों तले अंगुलियाँ चबा ली. जो डॉक्टर्स कहते थे के गाल ब्लैडर स्टोन अर्थात पित्त की थैली की पथरी निकल ही नहीं सकता, उनकी जुबान हलक से नीचे पेट में गिर गयी. सिर्फ एक नहीं अनेक मरीजों पर सफलता से आजमाया हुआ ये प्रयोग. इस प्रयोग को एक डॉक्टर तो 5000 से लेकर 10000 में करते हैं. जबकि इस प्रयोग की वास्तविक कीमत सिर्फ 30-40 रुपैये ही है. यह प्रयोग गाल ब्लैडर और किडनी दोनों प्रकार के स्टोन को निकालने में बेहद कारगर है.

इस प्रयोग को हमने जिन पर आजमाया वो कोई छोटी मोटी हस्ती नहीं हैं, ये हैं डॉक्टर बिंदु प्रकाश मिश्रा जी, जो के महर्षि दयानंद कॉलेज परेल मुंबई में मैथ के प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं. और यूनिवर्सिटी सीनेट के सदस्य भी हैं. डॉक्टर साहब के 21 MM का स्टोन 8 साल से गाल ब्लैडर में था, और अत्यंत दर्द था. डॉक्टर ने इनको गाल ब्लैडर तुरंत निकलवाने की सलाह भी दे दी. मगर इन्होने आयुर्वेद की शरण में जाने की सोचा. और फिर क्या बस 5 दिनों में ये स्टोन कहाँ गायब हो गया, पता ही नहीं चला. 5 दिन बाद जब दोबारा चेक करवाया तो गाल ब्लैडर स्टोन की जगह बस थोड़ी बहुत रेत जैसा दिखा, जिसके बाद डॉक्टर ने उनको थोडा दवाएं लेने के लिए कहा. रहें only आयुर्वेद के साथ.



तो क्या है ये चमत्कारी दवा. ये कुछ और नहीं ये है गुडहल के फूलों का पाउडर अर्थात इंग्लिश में कहें तो Hibiscus powder. ये पाउडर बहुत आसानी से पंसारी से मिल जाता है. अगर आप गूगल पर Hibiscus powder नाम से सर्च करेंगे तो आपको अनेक जगह ये पाउडर online मिल जायेगा. और जब आप online इसको मंगवाए तो इसको देखिएगा organic hibiscus powder. आज कल बहुत सारी कंपनिया आर्गेनिक भी ला रहीं हैं तो वो बेस्ट रहेगा. कुल मिला कर बात ये है के इसकी उपलबध्ता बिलकुल आसान है. only आयुर्वेद के साथ.

अब जानिये इस पाउडर को इस्तेमाल कैसे करना है.

गाल ब्लैडर स्टोन निकालने के लिए गुडहल के पाउडर के इस्तेमाल की विधि.

गुडहल का पाउडर एक चम्मच रात को सोते समय खाना खाने के कम से कम एक डेढ़ घंटा बाद गर्म पानी के साथ फांक लीजिये. ये थोडा कड़वा होता है. इसलिए मन भी करडा कर के रखें. मगर ये इतना भी कड़वा नहीं होता के आप इसको खा ना सकें. इसको खाना बिलकुल आसान है. इसके बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है. डॉ. मिश्रा जी के अनुसार, क्यूंकि उनके स्टोन का साइज़ बहुत बड़ा था उनको पहले दो दिन रात को ये पाउडर लेने के बाद सीने में अचानक बहुत तेज़ दर्द हुआ, उनको ऐसा लगा मानो जैसे हार्ट अटैक आ जायेगा. मगर वो दर्द था उनके स्टोन के टूटने का. जो दो दिन बाद नहीं हुआ. और 5 दिन के बाद कहीं गायब हो गया था और पीछे रह गयी थी उसकी यादें रेत बनकर, जिनका सफाई अभियान अभी चल रहा है. इसके साथ में उनको प्रोस्टेट enlargement की समस्या भी थी, वो भी सही हो गयी.

इसके बाद यही प्रयोग उन्होंने एक दूधवाले और एक और आदमी पर भी किया जिनका स्टोन 8 mm और 10 mm था, उनको यही प्रयोग बिना किसी दर्द के बिलकुल सही हुआ. अर्थात अगर स्टोन का साइज़ बड़ा है तो वो दर्द कर सकता है.

एक मैसेज अगर आप ये प्रयोग करें, और आपको फायदा तो होगा ही तो आप कृपया गौशाला में अपनी यथा क्षमता सेवा ज़रूर करें. हम आपसे कुछ नहीं मांगते. आपको हमारे प्रयोग से फायदा हो तो बस गौशाला के नाम सेवा ज़रूर करें.

यही प्रयोग एक बहुत ही प्रतिष्ठित डॉ कम से कम 5 से 10 हज़ार लेकर लोगों को करवाते हैं. और आपके लिए onlyayurved इसको फ्री में उपलब्ध करवाता है जन हित के लिए. आप भी इसको ज़रूर शेयर करें. रहें only आयुर्वेद के साथ.

इस प्रयोग में बरती जाने वाली महत्वपूर्ण सावधानी

पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें। और अगर आपका स्टोन बड़ा है तो ये टूटने समय दर्द भी कर सकता है. और ये प्रयोग करने से पहले अगर आपका स्टोन आपकी cbd नलिका के साइज़ से बड़ा हो तो कृपया सिर्फ डॉक्टर की देख रेख में ही ये प्रयोग करें. और स्टोन को तोड़ने के लिए पाठकों से अनुरोध हैं के वो पहले 5 दिन हर रोज़ 5 गिलास सेब के जूस पियें. हर तीन घंटे के बाद एक गिलास सेब का जूस पीते रहें. और बाकी अपना खाना कम कर दीजिये. इस से 5 दिन में आपका स्टोन टुकड़े टुकड़े हो जायेगा. फिर दोबारा टेस्ट करवाएं. अगर स्टोन का साइज़ बड़ा रह जाए तो यह निकलने में cbd नलिका में फंस भी सकता है जो के अत्यंत खतरनाक हो सकता है. इसलिए जिन लोगों के स्टोन का साइज़ बड़ा हो वो केवल डॉक्टर की देख रेख में और अपने विवेक से इस प्रयोग को करें.


➡ गुड़हल 🌺 के 12 अद्भुत फायदे :
Image result for गुड़हल
1. गुडहल की पत्ती 🌿 से बनी चाय एलडीएल कोलेस्टेरॉल को कम करने में काफी प्रभावी है इसमें पाए जाने वाले तत्व अर्टरी में प्लैक को जमने से रोकते हैं जिससे कोलेस्टेरॉल का स्तर कम होता है। गुड़हल के फूलों में एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल कम करने के साथ ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है। इसके लिए इसके फूलों को गरम पानी में उबालकर पीना फायदेमंद होता है।
2. मधुमेह 🍇 या डायबिटीज के लिए नियमित आप इसकी 20 से 25 पत्तियों का सेवन शुरू कर दे ये आपकी डाइबिटीज का शर्तिया इलाज है -इसका पौधा नर्सरी से आसानी से मिल जाता है और इसे आप घर में लगा सकते है।
3. अगर आपको किडनी की समस्या है तो आप गुडहल की पत्ती से बनी चाय का सेवन करे इसी चाय का लाभ डिप्रेसन के लिए भी होता है।
4. गुड़हल का शर्बत 💖 दिल और दिमाग को शक्ति प्रदान करता है तथा ये आपकी मेमोरी पावर को बढ़ाता है जो लोग बढ़ते उम्र के साथ मेमोरी लॉस होने की समस्या से परेशान है और जब कम उम्र में याददाश्त कमजोर होने लगे तो गुड़हल इस समस्या को दूर करने में भी बहुत ही कारगर है गुड़हल की 10 पत्तियां और 10 फूल लें फिर इन्हें सुखाकर और पीसकर उसका पाउडर बना लें और किसी एयर टाइट डिब्बे में बंद करके रखें दिन में दो बार दूध के साथ इस पाउडर को लेना से आपकी मेमोरी पावर में काफी इजाफा होता है।
5. मुंह में छाले हो गए है तो आप 🌺 गुडहल के 🌿 पत्ते चबाये आराम हो जाएगा।
6. मैथीदाना, गुड़हल और बेर की पत्तियां पीसकर पेस्ट बना लें आप इसे 15 मिनट तक बालों में लगाएं इससे आपके बालों की जड़ें मजबूत और स्वस्थ होंगे।
7. गुडहल में अधिक मात्रा में विटामिन सी होता है जब चाय या अन्य रूपों में इसका सेवन किया जाता है तो यह सर्दी और खांसी के लिए काफी फायदेमंद होता है इससे आपको सर्दी से जल्द राहत मिलेगी।
8. बालों 👸 💇 के झड़ने की समस्या से लगभग हर कोई परेशान है गुड़हल के फूल इस समस्या को दूर करने में बहुत ही कारगर हैं ये न सिर्फ बालों का झड़ना रोकते हैं बल्कि इसके इस्तेमाल से एक अलग ही शाइनिंग बालों में नजर आने लगती है-गुड़हल की 6-8 पत्तियों को लेकर अच्छे से पीस लें इसे सिर और स्केल्प में अच्छे से लगाएं 3 घंटे रखने के बाद गुनगुने पानी से धो लें ये स्केल्प को पोषण देने के साथ ही बालों की ग्रोथ में भी बहुत ही फायदेमंद होता है।
9. बुखार व प्र दर में भी लाभकारी होता है यह शर्बत बनाने के लिए गुड़हल के सौ फूल लेकर कांच के पात्र में डालकर इसमें 20 नीबू का रस डालें व ढक दें। रात भर बंद रखने के बाद सुबह इसे हाथ से मसलकर कपड़े से इस रस को छान लें। इसमें 80 ग्राम मिश्री+20 ग्राम गुले गाजबान का अर्क+20 ग्राम अनार का रस+ 20 ग्राम संतरे का रस मिलाकर मंद आंच पर पका लें।
10. गुड़हल का फूल सूजन के साथ ही खुजली और जलन जैसी समस्याओं से भी आपको राहत दिलाता है। गुड़हल के फूल की पत्तियों को मिक्सी में अच्छे से पीस लें तथा सूजन और जलन वाले हिस्से पर लगाएं कुछ ही मिनटों में समस्या दूर हो जाएगी।
11. पिंपल्स और मुहांसों की समस्या से परेशान हैं तो गुड़हल की पत्तियों को पानी के साथ उबालकर अच्छे से पीस लें और इसमें शहद मिलाकर पिंपल्स पर लगाएं।
12. महिलाओं 👸 👰 को अक्सर आयरन की कमी से एनीमिया की समस्या हो जाती है लेकिन बहुत ही कम लोग इस बात को जानते होंगे कि गुड़हल के फूल से भी एनीमिया का इलाज संभव है आप 40-50 गुड़हल की कलियों को सुखा कर फिर अच्छे से पीसकर उन्हें किसी एयर टाइट डिब्बे में बंद कर दें और रोजाना सुबह-शाम एक कप दूध के साथ यह पाउडर लें सिर्फ एक महीने में ही एनीमिया की समस्या दूर हो जाएगी और इससे स्टेमिना भी बढ़ता है।

13. लार में वृद्धि और पाचन शक्ति को बनाने और मुँह के छालों के लिए गुड़हल की 🌿 3-4 पत्तियो को चबाना चाहिए। आपको लाभ होगा।


*

              गाजर के औषधीय गुण इसे खाने से क्या-क्या फायदे होंगे _


भारतीयों में फल, सब्जी एवं सलाद के रूप में प्रयोग की जाने वाली गाजर गरीबों का टानिक है. इसमें विटामिन बी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है. इसमें जो पोषक तत्व होते हैं, वे सेवन करने वाले के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं. इसके कुदरती गुण कई बीमारियों में बेहद फायदेमंद होते हैं.




कमजोरी दूर करने में फायदेमंद – गाजर में संतुलित आहार के सभी गुण मौजूद होते हैं. यदि इसके रस का नियमित उपयोग किया जाये तो किन्ही कारणों से आई कमजोरी दूर की जा सकती है. इसका रस पीते ही रक्त की मात्रा बढ़ना प्रारंभ हो जाती है. रक्त में कोलेस्ट्राल जमने की प्रक्रिया मंद हो जाती है. मरदाना शक्ति में इजाफा होता है. यदि अधिक काम करने से थकावट आ गयी हो, तो वह दूर हो जाती है. गर्भिणी महिला एवं बच्चों के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है. इसको पीने से स्मरण शक्ति में भी वृद्धि होती है. यदि आँखों की रौशनी धुधली हो गयी हो, तो वह तेज हो जाती है. क्योंकि इसमें विटामिन ए भी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है. इसके आलावा आँख सम्बन्धी अन्य रोगों में भी फायदेमंद होती है.




महिला रोगों में फायदेमंद – महिला रोगों को दूर करने में इसकी अहम् भूमिका हो सकती है. यदि मासिक धर्म में दर्द होता हो, या वह बंद हो गया हो, या गर्भाशय में कोई दोष आ गये हों, या श्वेत प्रदर से महिला पीड़ित हो, तो तीन चम्मच गाजर के बीजों को कूट कर उसे गुण एवं नमक के घोल में उबाल लें, जब आधा पानी रह जाए, तो उसे सुबह-शाम पीयें. इससे उपरियुक्त सभी रोगों में फायदा होगा. यदि महिला का गर्भपात हो जाता हो, तो एक गिलास गाजर का जूस और एक गिलास दूध को मिलाकर उबाल लें. जब आधा मिश्रण बच जाए, तो उसे सुबह-शाम पीते रहें. इससे गर्भपात की समस्या से निज़ात मिलेगी. किन्तु इसके लिए कुछ परहेज की भी जरूरत है. उस महिला को चटपटी चीजें, चाट, पकौड़ी खाने से बचना चाहिए. यदि महिला को अपने बच्चे को पिलाने के लिए पर्याप्त दूध नहीं हो रहा हो, तो उसे जीरा मिला कर सुबह-शाम एक गिलास गाजर का जूस पीना चाहिए. इससे पर्याप्त मात्रा में दूध बनने लगेगा. जिन महिलाओं को हिस्टीरिया की बीमारी हो, उसे एक गिलास गाजर के जूस में आधा नीबू निचोड़ कर देना चाहिए, इससे उसका यह रोग दूर हो जाता है.




हृदय रोग में फायदेमंद – हृदय रोगियों के लिए गाजर बहुत ही फायदेमंद है. हार्ट अटैक के रोगियों को गाजर एवं पालक का जूस मिलकर पीना चाहिए. इससे उनके हृदय की गति नियमित हो जाती है. गाजर का मुरब्बा खाने से भी यह रोग दूर होता है. एक गिलास गाजर के रस में एक नीबू निचोड़ कर पीने से भी लाभ होता है. इसे पीने से हृदय को बल एवं शीतलता प्राप्त होती है. सीने में दर्द की शिकायत हो तो एक गिलास गाजर के रस में स्वादानुसार शहद मिला कर पीने से दर्द होना बंद हो जाता है.




दमा रोग में फायदेमंद – गाजर का जूस दमा रोगियों के लिए भी बहुत फायदेमंद है. यदि दमा रोगी सुबह और दोपहर एक-एक गिलास गाजर का जूस पीता है, तो उसे आश्चर्यजनक रूप से फायदा होता है. यह प्रक्रिया कम से कम 15 दिन करना चाहिए. यदि कोई दमा रोगी लम्बे समय तक भी गाजर का जूस पीता है, तो भी उसे कोई हानि नही होती है. इसके आलावा दमा रोगी को गाजर, चुकंदर और शलजम तीनों की समान मात्रा में रस निकाल कर उसे एक गिलास दूध में मिला कर आधी मात्रा रहने तक उबाल लेना चाहिए. फिर उसमे थोड़ी सी शहद मिलाकर उसे सुबह-दोपहर-शाम पीना चाहिए. इससे दमा ठीक हो जाएगा.




गठिया, जोड़ों के दर्द में फायदेमंद – जिन रोगियों को गठिया या जोड़ों का दर्द हो, उसके लिए गाजर का जूस बहुत ही फायदेमंद है. इस प्रकार के रोगियों को दिन में तीन बार एक-एक गिलास गाजर का जूस देना चाहिए. इस तरह इसका उपयोग करने से रोगी को बहुत फायदा होता है. इसका कारण है कि गाजर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता तो बढाता है. जिससे यह रोग ठीक हो जाता है. इसके आलावा गाजर, चुकंदर और पत्तागोभी का बराबर मात्रा में रस मिलाकर उसे शहद के साथ लेने से जोड़ों का दर्द ठीक हो जाता है. चार कली लहसुन, पत्तागोभी और गाजर की चटनी भोजन के साथ खाने से भी इस प्रकार के रोगियों को फायदा मिलता है. इसके अलावा रोगी एक गिलास गाजर के रस में काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर पीने से भी फायदा होता है.




पेट के रोग में फायदेमंद – जिन्हें आँतों की गैस, ऐठन, शोथ, घाव, जलोदर, अपच या पेट में वायु में पैदा होती हो, उनके लिये गाजर बहुत ही फायदेमंद है. इस प्रकार के रोगियों को नियमित रूप से गाजर के रस का सेवन करना चाहिए. उन्हें आश्चर्यजनक रूप से फायदा होगा. गाजर, नीबू और पालक का रस पीने से कब्ज दूर हो जाती है. यदि पेट में गैस बन रही हो, तो गाजर का एक कप रस उसके एक चौथाई प्याज के रस में काला नमक और अदरक का रस मिलाकर पीने से कब्ज ठीक हो जाती है. यदि किसी को दस्त आने लगें तो उसे एक गिलास गाजर के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से आराम मिलता है. एक कप गाजर के रस में भुना हुआ जीरा डालकर दिन में चार बार पीने से फायदा पहुचता है. पेचिस के रोगियों जिन्हें रक्त आता हो, समान मात्रा में गाजर और दूध मिलाकर नित्य दो बार पीने से लाभ होता है. जिन पेट की रोगियों की आँतों में सूजन हो, उन्हें 185 ग्राम गाजर रस, 150 ग्राम चुकंदर रस और 160 ग्राम खीर का रस, तीनों को मिलाकर दिन में तीन बार पीने से रोगी के आँतों की सूजन उतर जाती है.




कैंसर रोगियों के लिए फायदेमंद – कैंसर रोगियों के लिए गाजर उपयोगी है. यदि कैंसर रोगी अपने भोजन में किसी न किसी रूप में नियमित रूप से गाजर का उपयोग करता है, तो उसे फायदा होता है. किन्तु कैंसर रोगी को मसाला डाले गाजर और पालक रस नियमित रूप से पीना चाहिए. किन्तु इसमें नमक नही डालना चाहिए. गाजर, पालक के रस में थोड़ा सा अदरक का रस मिलाकर पीने से भी रोगी फायदा होता है. कैंसर रोगी जब तक जीवित रहे, गाजर का जूस पीता रहे, निश्चित ही उसे फायदा लगेगा.




चर्म रोग में फायदेमंद – गाजर का रस चर्म रोगियों के लिए बहुत ही फायदेमंद है. इसके नियमित सेवन से रक्त शोधन हो जाता है, इस कारण किसी भी कारण से हुए चर्म रोग में फायदा पहुचता है. जिन रोगियों को सफेद दाग हो, उन्हें अधिक से अधिक गाजर खाना चाहिए और जूस भी पीना चाहिए. बस इसके साथ खटाई और नीबू का सेवन करने से बचना चाहिए. जिनकी चमड़ी रूखी हो, गाजर के एक गिलास रस में भुना पिसा जीरा और काला नमक मिलाकर नियमित रूप से पीना चाहिए. इसके आलावा कद्दूकस में गाजर को कस कर उसे दूध में उबाल कर उसका बूरा बना लें, शाम को गाजर के रस के साथ उसका सेवन करना फायदेमंद साबित होता है. दाद या खुजली होने पर गाजर और पालक का रस दिन में चार बार पीयें, फायदा होगा. गाजर की खीर बना कर खाएं. गाजर, पालक और खीरे के रस को खाली पेट पीयें. फायदा होगा.




डायबिटीज में फायदेमंद – गाजर एवं उसका जूस डायबिटीज रोग की भी बहुत ही कारगर दवा है. 310 ग्राम गाजर का रस, 185 ग्राम पालक के रस में मिला कर पीयें, बहुत फायदा होगा. इसके आलावा एक गिलास गाजर का रस, एक कप करेले का रस, आधा कप आंवले का रस मिलाकर दिन में तीन बार पीने से फायदा होता है. इसके अलावा गाजर, मूली, जामुन की गुठली सब मिलाकर रस निकाल कर एक-एक गिलास दिन में दो बार पीने से मधुमेह में फायदा मिलता है. इसके आलावा 100 ग्राम गाजर के रस में दो-दो चम्मच प्याज और करेले का रस मिलाकर नित्य दो बार पीने से मधुमेह की बीमारी ठीक हो जाती है. इन सबके साथ मरीज को सूखा धनिया, गाजर, करेला और सेंधा नमक सबकी मात्रा स्वादानुसार की चटनी भी भोजन के साथ खाना चाहिए.






कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.